सुविचार – माता-पिता – माँ-बाप – 020

एक दूरदर्शी माता-पिता बनने के लिए, हमें खुद पर काम करते रहना होगा, हमेशा के लिए नया और बेहतर बनना होगा.

To be a visionary parent, we need to keep working on ourselves, becoming forever new and improved.

पिता और माँ बनना सिर्फ एक शारीरिक घटना नहीं है.

_ यह मन के भीतर घटित होने वाली घटना है.

_ अगर रब ने आपको माता-पिता बनने का मौका दिया है तो इसे एक जिम्मेदारी समझें और प्यार से निभाएं.

जिंदगी में दो लोगों का ख़याल रखना बहुत जरुरी है,

पिता जिसने तुम्हारी जीत के लिए सब कुछ हारा हो, _माँ जिसको तुमने हर दुःख में पुकारा हो.

अपने माँ-बाप का अपने कठोर शब्दों से कभी दिल मत दुखाना,

_ क्योंकि इस दुनिया में वही हैं, जो बिना किसी मतलब के आपसे प्यार करते हैं.!!

माता – पिता वो होते हैं –

_ ‘वो जिन्होंने अपने बच्चों के लिए अपने जीवन, आराम और सुख की परवाह नहीं की….

_ वो जो अपने बच्चों को unconditionally प्यार करते हैं …

_ वो जो बच्चों के बड़े हो जाने पर भी उतना ही लाड़ देते हैं जैसे कोई छोटे बच्चे को…

जब आपके माता-पिता संपन्न न होने के बावजूद भी, वे आपको सबसे अच्छा जीवन दे सकते हैं, तो उनकी सराहना करें..

_ शायद आप जितना जानते हैं, वे उससे ज़्यादा संघर्ष करते हैं..!!

आजकल माता-पिता अपने बच्चों से ज़्यादा उम्मीद नहीं करते..

_ वे दो वक्त के भोजन और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद से संतुष्ट हो जाते हैं.!!

” नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से ही चलना ज़रा

कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।”

( These lines encourage to Respect Parents in their old age )

जब भी हाथ बढ़ाया उन्होंने थाम लिया, _ माँ बाप ने हर मुसीबतों में मेरा साथ दिया..
” जब आप अपनी माँ और बाप को देखते हैं, तो आप सबसे शुद्ध प्यार को देख रहे होते हैं _जिसे आप कभी नहीं जान पाएंगे.”
परिस्थितियाँ और आपके आस-पास के लोग बदल जाते हैं, खुशी की परिभाषा बदल जाती है,

– लेकिन जो आपको जोड़े रखते हैं ..वे आपके माता-पिता हैं और यही महत्वपूर्ण है.

पिता की गरीबी और माँ के पहनावे पर कभी शर्म मत करना..
माँ और पिता के रोल में बस इतना सा फर्क है,

माँ का रोल जीते जी समझ में आ जाता है, और पिता का रोल उनके चले जाने के बाद..

जो अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए खुद की भूख भूल जाए..
_ वो सिर्फ़ माता पिता ही हो सकते हैं.!!
सहानुभूति देने वाले हज़ार मिल जाएंगे…

साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!

अपनी सफलता का रौब माता- पिता को मत दिखाओ,

उन्होंने अपनी जिन्दगी हार कर आपको जिताया हैं.

कुछ लोग जो हमारे अच्छे बुरे समय में भी हमारे साथ होते हैं

वो सिर्फ माँ बाप कहलाते हैं.

धूप में बाप और चूल्हे पर माँ जलती है,

तब कहीं जाकर औलाद पलती है…

मां के बिना सारा घर बिखर जाता है,

पर बाप के बिना पूरी जिंदगी ही बिखर जाती है.

थोड़ा सा छुप-छुप कर खुद के लिए भी जी लिया करो,,,

माँ – बाप के सिवा कोई नहीं कहेगा थक गए हो आराम कर लिया करो !!!!

माँ अपनी छाती से दूध पिला कर बच्चे को सींचती है

और पिता अपने खून और पसीने से बच्चों का लालन – पालन करता है.

कुछ समय माँ – बाप के साथ भी बिता कर जाओ तुम, _

_ कितने कीमती हो तुम उनके लिए, ज़रा ये भी तो देख कर जाओ तुम ..

इंसान की बर्बादी का वक़्त तब शुरू होता है, _ जब उसके मां – बाप

_ उसके गुस्से से डर कर अपनी “जरूरत” बताना या “नसीहत” देना छोड़ देते हैं.

माता पिता की नसीहत सबको बुरी लगती है,

मगर माता पिता की वसीयत सबको अच्छी लगती है.

माता – पिता उस मेडिकल स्टोर की तरह होते हैं,

जहां हमारी हर उदासी और दर्द की दवा मिलती है.

हम क्या उपहार दे सकते हैं, अपने माता पिता को ?

_ उन्होंने हमें जीवन दिया है, वह जीवन जिसका हम मनचाहा उपयोग करते हैं..!!

आप कितने भी बड़े व्यक्ति क्यों न बन जाएं, लेकिन

आप कभी पिता की, आपके पीछे मेहनत और माँ की ममता का अंदाजा नही लगा सकते.

उस चीज के बारे में कभी भी किसी से कोई शिकायत मत करना.. जो हमारे मां-बाप हमको नहीं दे सके क्योंकि….

_ उनसे जो संभव हुआ वो सब कुछ हमको दिया.!!

माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए मेहनत करते हैं, ताकि भविष्य में उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

_ ऐसे में वे अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाते.
_ जब वे अपने सारे काम निपटाकर फुर्सत पाते हैं और अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो बच्चों के पास समय नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.
सुख भोगने का अधिकार बिन मांगे ले लेते हैं बच्चे लेकिन जिन माता पिता ने सुख के साधन जुटाए उनकी रोज मर्रा की जरूरत भी अहसान जता कर पूरी करते हैं.
मां- बाप के पास बैठने के दो फायदे हैं,

आप कभी बड़े नहीं होते और मां- बाप कभी बूढ़े नहीं होते.

बच्चों को पालने का सुख माता को मिलता है

और उनके जीवन को सही ढाँचे में ढालने का सुख पिता को.

दुनिया वाले एक गलती पर भी हमें पराया कर देते हैं,

लेकिन माँ बाप हमारी हज़ार गलतियों के बाद भी हमें अपना बना लेते हैं.

अपने माता – पिता से बहस ना करें, क्योंकि उनके जमाने के हिसाब से

उनकी बात भी सही है __ आपके जमाने के हिसाब से आप !

माँ बाप के अलावा दुनिया में कोई और आपको आगे बढ़ता हुआ नही देख सकते ;

_ बाकि लोग कभी न कभी तो जलन की भावना दिखा ही देते हैं !!

हर माता-पिता को सबसे बड़ी ख़ुशी तब मिलती है,

_ जब उनके बच्चे कोई उपलब्धि हासिल करते हैं तो ..उन्हें लगता है कि आज तक उन्होंने उनके लिए जो भी किया ..वह सफल हुआ,

_ यही उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी होती है !!

चाहे बेटे-बेटियाँ कितने ही समर्थ हो जाएं, कितना ही अपने पैरों पर खड़े हो जाएं,

_ उन्हें भावात्मक आश्रय [emotional shelter] देने के लिए माता-पिता को हमेशा तैयार रहना चाहिए.
_ बेटे-बेटियों के जीवन में टूटने के बहुत अवसर आते हैं, माता-पिता का स्नेह-सहयोग न मिला तो उन्हें बिखरते देर नहीं लगती.
_ बेटा-बेटी कभी टूटे-बिखरे नहीं..
_ माता-पिता के घर और दिल के दरवाजे उसके लिए हमेशा खुले रहें.
_ जन्मदाता से बढ़ कर कौन ?
हर तूफान में अगर कोई छाया बनकर साथ खड़ा रहता है तो वो सिर्फ माँ-बाप होते हैं.. दुनिया तो बस तमाशा देखती है.!!
आजमा के देख लो सारे जमाने को, _

_ मां बाप के सिवा कोई और हमदर्द नहीं है..

बस यही फर्क है माँ और पिता में..

_पिता सीने पर पत्थर रखता है और माँ सीने में..!!

सहानुभूति देने वाले हज़ार मिल जाएंगे…

साथ केवल वही देंगे जिन्होंने आपको पैदा किया है…!!

अपनों के कर्ज उतारते उतारते याद आया,

एक माँ बाप ही हैं जो कभी हिसाब नहीं मांगते.

पंख क्या लगे की घोंसले से उड़ गए सभी..

माँ बाप फिर अकेले रह गये बच्चो को पाल कर…

माँ – बाप के अलावा इस दुनिया में कोई भी नहीं है, _ जो हमे समझते हैं और समझाते भी हैं…!!!
माता – पिता आपके सच्चे दोस्त हैं, जो बुरे तथा अच्छे दोनों वक्त में आपका साथ देते हैं.
नखरे तो सिर्फ माँ बाप उठाते हैं, लोग तो बस उंगलियाँ उठाते हैं.
मां बाप का औलाद के प्रति प्यार किसी मकसद से नहीं होता.
मां जमीं है तो पिता आसमां है

खुदा की नेमतों से रोशन ये जहां है.

मां के कदमों में जन्नत है तो

पिता उसका दरवाजा है.

माता- पिता साथ है जिसके

दुनिया में वह राजा है.

माँ अगर शीतल छाया है. पिता बरगद है जिसके नीचे बेटा- बेटी उन्मुक्त भाव से जीवन बिताते हैं.

माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है. तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है.

हम तो बस उनके किये गए कार्यों को आगे बढ़ाकर अपने हित मे काम कर रहे हैं.

आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ……..!

जब माता-पिता नहीं रहते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.

_ हम अब बच्चे नहीं रहते, हम उनके गले लगाने और उत्साहवर्धक शब्दों से बहकते नहीं हैं.
_ लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे जीवन कठिन हो रहा है, क्योंकि उनकी सुरक्षा देनेवाली ममता अब हमारे पास नहीं है.
_ जब माता-पिता हमारे बीच नहीं रहते, हम अनाथ हो जाते हैं, और यह बहुत कठिन है, चाहे हम कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं.
_ हालांकि आपने अपना परिवार बना लिया हो, लेकिन आपके माता-पिता का चेहरा हमेशा आपके भीतर अमिट रूप से बसा रहता है.
_ हर व्यक्ति, चाहे वह बड़ा हो या बच्चा, अंदर एक जीवित बच्चा होता है, जो हमेशा अपने माता-पिता द्वारा सुरक्षा चाहता है.
_जब भी जरूरत हो, उनके बिना शर्त प्रेम की तलाश करता है, लेकिन जब वे हमारे बीच नहीं रहते, तब यह विकल्प अब मौजूद नहीं रहता…!!!
हम अपना जन्म स्थान और जन्मदाता नहीं चुन सकते.

_ हम भारत में पैदा हुए, युगांडा या अमेरिका में भी पैदा हो सकते थे.
_ हम गरीब माँ-बाप के घर पैदा हुए, किसी अमीर या किसी फ़क़ीर के घर भी पैदा हो सकते थे.
_ बात तो तब है जब हम अपनी जड़ों पर गर्व करते हुए अपनी नियति को बदल दें और उन ऊँचाइयों पर पहुँचें,
_ जहाँ पहुँच कर हमें संतुष्टि मिले तथा हमारे देश व जन्मदाता का नाम भी रोशन हो.!!
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

सुबह की सैर में कभी चक्कर खा जाते है ..

सारे मौहल्ले को पता है…पर हमसे छुपाते है

दिन प्रतिदिन अपनी खुराक घटाते हैं और

तबियत ठीक होने की बात फ़ोन पे बताते है.

ढीली हो गए कपड़ों को टाइट करवाते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

किसी के देहांत की खबर सुन कर घबराते है,

और अपने परहेजों की संख्या बढ़ाते है,

हमारे मोटापे पे हिदायतों के ढेर लगाते है,

“रोज की वर्जिश”के फायदे गिनाते है.

‘तंदुरुस्ती हज़ार नियामत “हर दफे बताते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर साल बड़े शौक से अपने बैंक जाते है,

अपने जिन्दा होने का सबूत देकर हर्षाते है,

जरा सी बढी पेंशन पर फूले नहीं समाते है,

और FIXED DEPOSIT रिन्यू करते जाते है,

खुद के लिए नहीं हमारे लिए ही बचाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चीज़ें रख के अब अक्सर भूल जाते है,

फिर उन्हें ढूँढने में सारा घर सर पे उठाते है,

और एक दूसरे को बात बात में हड़काते है,

पर एक दूजे से अलग भी नहीं रह पाते है.

एक ही किस्से को बार बार दोहराते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चश्में से भी अब ठीक से नहीं देख पाते है,

बीमारी में दवा लेने में नखरे दिखाते है,

एलोपैथी के बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट बताते है,

और होमियोपैथी/आयुर्वेदिक की ही रट लगाते है,

ज़रूरी ऑपरेशन को भी और आगे टलवाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

उड़द की दाल अब नहीं पचा पाते है,

लौकी तुरई और धुली मूंगदाल ही अधिकतर खाते है,

दांतों में अटके खाने को तिली से खुजलाते हैं,

पर डेंटिस्ट के पास जाने से कतराते हैं,

“काम चल तो रहा है” की ही धुन लगाते है.

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर त्यौहार पर हमारे आने की बाट देखते है,

अपने पुराने घर को नई दुल्हन सा चमकाते है,

हमारी पसंदीदा चीजों के ढेर लगाते है,

हर छोटी बड़ी फरमाईश पूरी करने के लिए,

माँ रसोई और पापा बाजार दौडे चले जाते है.

पोते-पोतियों से मिलने को कितने आंसू टपकाते है,

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..

संघर्ष पिता से सीखें, संस्कार माँ से सीखें

बाकी सब कुछ दुनिया सिखा देगी !

ऐसा नहीं है कि हमारे माता-पिता हमें कभी कुछ नहीं कहते _या वे हमपे कभी क्रोधित नहीं होते, _ लेकिन उनके गुस्से के बाद उनका प्यार भी उमड़ता है.

_बाकी दुनिया सबकुछ करती है _बस प्यार ही नहीं करती _लेकिन बदले में कर्तव्यों का पहाड़ जरूर सर पर लाद देती है.

दुनिया के हर मॉं – बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों को समझाने, डांटने, शिक्षा देने या कोई राय देने से पहले अपने जीवन में झांक लें कि, क्या वो वाकई जीवन में सफल हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चा उनकी उंगली पकड़े बगैर स्वयं के निर्णयों व स्वतंत्रता के दम पर ही उनसे आगे निकलने की संभावना रखता हो.

Before teaching, scolding, advising or giving opinion to children, every parent of the world should look deep into their lives and question themselves, are they really successful in their life? Is it not possible that a child, without holding the hand of his parents, has the potential to surpass them purely on the basis of his own decisions and freedom ?

दुनिया के हर माँ- बाप को चाहिए की अपने सड़े हुए बदबूदार अतीत को अपने बच्चों को विरासत के रूप में न दें.

बच्चों का अपना भविष्य है, _ उन्हें उनके अनुरूप बढ़ने दें, _ प्रकृति हमसे कहीं अधिक बुद्धिमान है.!!

Don’t give your rotten stinking pasts as an inheritance to your children. Children have their own future. Let them grow in their accord Nature is much more intelligent than we ever can be.

सच पूछिए तो अधिकतर बच्चे माता-पिता के प्रति संवेदनशील नहीं होते.

_ वे माता- पिता के महत्व को नहीं समझते कि ..यदि उन्हें दुनिया में लाया ही नहीं जाता तो ?
_ कुछ बच्चे रब से माँग कर, मिन्नतें करके लिए जाते हैं, इस दुनिया में आने के बाद लड़-झगड़ कर अपने पास रखे जाते हैं.
_ लेकिन ज़्यादातर बच्चे इस बात को नहीं समझते.
_ आज के माँ-पिता कोख का हवाला देकर बच्चों को अपनी ओर नहीं कर सकते.
_ बच्चे अपने मन से ही माता-पिता को उचित सम्मान दें, यह भाग्य की बात है या ये बच्चों की अपनी समझ पर निर्भर करता है.
माता –पिता अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए न जाने किन–किन चीजों का त्याग कर देते हैं,

_ पर बच्चे भी क्या मां बाप के लिए उतना समर्पण और त्याग कर पाते हैं,
_ क्या बच्चे उन जिम्मेदारी को पूरा कर पाते हैं जो उन्हें पूरा करना चाहिए..??
_ शायद नहीं..!!
_ आज के समय में बच्चों को अपने मोबाइल से ही फुर्सत नहीं मिलती,
_ अधिकांश समय तो बाबू सोना करते समय निकल जाता है,
_ अपने मां बाप के लिए उन्हें कुछ सोचने का समय ही कहा मिलता है…!!!!
–Geerisha
हम जिन बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजते हैं या अपने से दूर करते हैं, यह देखना भी हमारे लिए बहुत ज़रूरी है कि _वह शिक्षा उनको बेहतर इंसान बना रही है _या और संवेदनहीनता की तरफ़ ले जा रही है.
बहुत बार देखते हैं जीवन की सन्ध्या बेला में बच्चों की लाख मिन्नत चिरौरी के बावजूद माँ – बाप अपना घर गांव शहर छोड़कर जाना नहीं चाहते..

_ वो अपनी भावनात्मक जड़ों से कट कर बिलखने लगते हैं..

_’हाँ’ शारीरिक शिथिलता अन्य मजबूरी से ही वो दिल पर पत्थर रख उस स्थान को छोड़ पाते हैं.

सुविचार – विवाह – शादी – 019

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शादी हमारे दुखों को आधा कर देती है, खुशियों को दोगुना कर देती है और हमारे खर्चों को चौगुना कर देती है.

Marriage halves our griefs, doubles our joys, and quadruples our expenses. – Gilbert K. Chesterton

लोगों का मानना ​​है कि शादी हमें बेहतर बनाएगी.

People believe marriage will make us better. – Oprah Winfrey

विवाह का पूरा आनंद यह है कि यह एक सतत संकट है.

The whole pleasure of marriage is that it is a perpetual crisis.

– Gilbert K. Chesterton

विवाह के बाहर कुछ भी स्वतंत्रता और उत्साह जैसा लगता है, -Jeanette Winterson

Anything outside marriage seems like freedom and excitement. – Jeanette Winterson

विवाह दो खंभों पर टिके हुए मंदिर की तरह है ; _यदि वे एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए तो मंदिर ढह जाएगा.!!

Marriage is like a temple resting on two pillars. If they come too close to each other the temple will collapse. – Khalil Gibran

एक विवाह को सुखी तभी कहा जा सकता है जब दोनों पक्षों में से किसी को भी इससे अधिक खुशी मिलने की उम्मीद न हो.!!

A marriage is likely to be called happy if neither party ever expected to get much happiness out of it. – Bertrand Russell

विवाह में एक ही घर में दिन-रात एक साथ रहने वाले लोगों के बीच थोड़ी सी छूट, थोड़ी स्वतंत्रता अवश्य होनी चाहिए. – VirginiaWoolf

In marriage a little licence, a little independence there must be between people living together day in and day out in the same house. – VirginiaWoolf

सच ये है : समस्या ‘शादी’ नहीं है.

_ ज्यादातर लोग दुखी इसलिए नहीं हैं कि जिम्मेदारियां ज़्यादा हैं..
_ बल्कि इसलिए कि उन्होंने जीने का तरीका गलत सेट कर लिया है.
“घर को बोझ नहीं, सिस्टम बनाओ”
इसे कैसे लागू करें (Simple, actionable):
1. Role clear करो (दिमाग हल्का होगा)
_ हर चीज खुद करने की कोशिश मत करो.
_ तय करो – क्या मेरी जिम्मेदारी है, और क्या नहीं है.
👉 30% चीजें खुद हट जाएंगी.
2. Fixed routine बनाओ (Decision fatigue खत्म)
_ हर दिन नई लड़ाई नहीं चाहिए.
_ सुबह क्या करना है, शाम को कैसे unwind करना है, family time कब है- ये तय करो।.
👉 सिस्टम बनेगा और सेट होगा तो दिमाग खाली रहेगा – हंसी अपने आप आएगी.
3. पैसे, काम, family – सबका limit तय करो.
_ Unlimited expectation = permanent stress
👉 “बस इतना काफी है” – ये line तय करनी पड़ेगी.
4. हफ्ते में 1 दिन ‘No Responsibility Mode’
_ कम से कम 2–3 घंटे- ना काम, ना planning, ना future
👉 ये reset button है – बिना इसके system hang होगा ही.
✦ “जिंदगी मुश्किल नहीं होती,
_ हम उसे बिना सिस्टम के जीते हैं- इसलिए थक जाते हैं.”
🔹 “थकान जिम्मेदारियों से नहीं, बिखरे हुए जीने से आती है…
_ जिंदगी को सिस्टम दे दो, खुशहाली अपने आप लौट आएगी”
🔹 “समस्या शादी नहीं है, समस्या ये है कि हमने जीने का तरीका सेट नहीं किया…
_ जहाँ सिस्टम होता है, वहाँ इंसान नहीं टूटता”
_ “जिंदगी को सिस्टम दे दो… वरना वही जिंदगी आपको थका देगी”
_ “जिस दिन आपने अपनी जिंदगी का सिस्टम बना लिया,
उसी दिन जिम्मेदारियां बोझ नहीं रहेंगी”
विवाह का आनंद, यदि है तो, परिवार और दोस्तों के साथ है.!
_ वैसे मुझे तो कभी विवाह की रस्मों और समारोह में कभी कोई आनंद दिखा नहीं.!!
विवाहित जीवन में अनेक दुःख हैं, किन्तु अविवाहित जीवन में कोई भी सुख नहीं.
विवाह एक ऐसा बंधन है जो दो लोगों को जोड़ता है,

_ लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी के लिए सही हो.!!

विवाह को एक “साझा यात्रा [shared journey] के रूप में देखा जाना चाहिए,
_ न कि एक स्थायी समझौते [permanent agreement] के रूप में.!!
विवाह सरकस के समान है, क्योंकि उस में जितना विज्ञापन दिखाया जाता है, उतना वास्तव में होता नहीं है.
विवाहित जीवन फूलों की सेज नहीं, कांटों का ताज है,

_ सामान्य ताज में हीरे-जवाहरात बाहर जड़े हुए होते हैं _जबकि इसमें काटें अन्दर गुथे रहते हैं.

विवाह एक साझेदारी है और बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, उस बड़ी जिम्मेदारी के साथ बहुत सी छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं, जो आपको चाहते हुए या ना चाहते हुए भी उठानी ही पड़ेंगी, वरना समाज आपका सांस लेना मुश्किल कर देगा.!!
विवाह संस्था इतनी भी बुरी नहीं कि उसे सिरे से नकार दिया जाए.

_ विवाह ज़रूर करो.
_ क्या पता, कोई सच में मन का मिल जाए.
_ यह रिस्क तो लेना ही पड़ेगा.
_ हाँ, न जमे तो उसे दुनियादारी के डर से खींचे मत जाओ.
_ तोड़ो और आगे बढ़ो.
_ यह जीवन, यह दुनिया विवाह के बगैर भी बहुत खूबसूरत है.
विवाह करने के फायदे- निरंतर साथी, बुढ़ापे का साथी, प्रेम और मनोरंजन, गृहस्थी, संगीत और स्त्री हास्य, खूब सारे बच्चे..

_ विवाह करने के नुकसान- झगड़े, घूमने पर पाबंदी, समाज में बंधन, दोस्तों के साथ मनोरंजन घटना, ख़ामख़ाँ के रिश्तेदारों का बढ़ना, किताबों के लिए पैसे घटना, किताब पढ़ने की संभावना घटना, बच्चों के ढेर सारे खर्च और चिंता।
_ अंतिम निर्णय- विवाह कर ही लिया जाए.!!
“जब लोग शादी करते हैं तो उन्हें लगता है कि यह एक लंबे समय का प्रेम संबंध है, तो वे बहुत जल्द इसे खो देंगे, क्योंकि सभी प्रेम संबंधों का अंत निराशा में होता है,

_ लेकिन शादी एक “आध्यात्मिक पहचान” की पहचान है”
“जब आप शादी में त्याग करते हैं, तो आप एक दूसरे के लिए नहीं _ बल्कि एक रिश्ते में एकता के लिए त्याग कर रहे हैं.”
_इसीलिए अच्छी शादियां होती हैं, _लेकिन सुखद शादियां नहीं होतीं.!!
विवाह वह खुबसूरत संयोग है जिसमे व्यक्ति को अपना सबसे बेहतरीन दोस्त मिलता है.
ज़िंदगी भर समझौते का नाम है ‘शादी’..

_पहले बीवी के साथ, बाद में बच्चों के साथ..!!

शादी का अर्थ है अपनी आज़ादी को आधा और जिम्मेदारियों को दुगुनी करना..!!
शादी करके हम संभवतः जीवन की असुविधाओं के साथ_थोड़ी सी खुशियाँ खरीद रहे हैं..!!
शादी एक रिश्ता है, गुनाह नहीं, कि एक बार कर लिया तो ..उम्र भर इसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी..!!
‘सुना है, शादी के बाद ज़िंदगी तो होती है लेकिन ज़िंदादिली नहीं होती’
हर कोई आपकी ज़िंदगी में आने के काबिल नहीं होते..

_ हर रिश्ते का आधार आकर्षण नहीं, बल्कि मूल्य, सम्मान और समझदारी होनी चाहिए.!!

शादी एक शब्द पहेली है, जिसका परिणाम घोषित हो जाने के बाद पहेली भरने वाले को यही लगता है कि काश,

इस शब्द के बदले अमुक शब्द भरा होता.

विवाह खूबसूरत व छोटी- सी एक नाव है, जिस पर चढ़ने के लिए हर व्यक्ति उत्सुक रहता है,

फिर उतरने के लिए बैचेन हो जाता है.

जो इंसान अपनी खुद की जिंदगी ही नहीं संभाल सकता..

_ उसे प्रेम और विवाह करने का कोई हक नहीं.!!

‘विवाह एक रिश्ता है’ उसमें प्यार होने की गारंटी नहीं है.

_ प्यार के विवाह में बदलने की गारंटी नहीं है.!!
विवाह मित्रता का सबसे दृढ बन्धन है, विश्वास मित्रता की नीवं है, आपसी मेल से ही विश्वास पैदा होता है.

विवाह में जो खूबसूरती, धन और दिखावे को महत्व देता है, उसे सच्चा सुख नहीं मिल पाता.

विवाह की सफलता या असफलता पतिपत्नी की आपसी समझ और सामंजस्य पर निर्भर करती है.

_ दो लोगों को विवाह कर के भी दोस्त होना चाहिए.!!

रिश्ता तब सुंदर बनता है.. जब दो लोग मजबूरी नहीं..
_ समझदारी से एक दूसरे का साथ चुनते हैं.!!
शादी _ “दो लोगों के एक साथ आने का उद्देश्य एक-दूसरे को उनके व्यक्तिगत विकास में मदद करना है न कि इसमें बाधा बनना.

_अगर दो बहुत जागरूक लोग एक साथ आते हैं, तो यह एक खूबसूरत चीज़ हो सकती है.”

” विवाह जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन सफलता वह आधार है जो पूरे जीवन को संवारता है.

_ पहले खुद को स्थापित करना, फिर जीवनसाथी के साथ एक मजबूत भविष्य बनाना ही समझदारी है.
शादी के सातों वचन अनमोल होते हैं ; _इन वचनों में वो जादू है,

_जो इनका पालन करे तो _कभी इस रिश्ते में चूक हो ही नहीं सकती है.!

विवाह जीवन को एक लय देता है. जैसे बिना साज के आवाज अधूरी है वैसे ही बिन विवाह के जीवन अधूरा.

जीवनसाथी का साथ अकेलेपन को दूर करता है.

शादी एक जीवनभर की यात्रा है, जो आप केवल एक अच्छे साथी के साथ ही निभा सकते हैं.
विवाह सरल और कम खर्चीला होना चाहिए ताकि लोग जीवन के अन्य पहलुओं पर ध्यान दे सकें.!!
विवाह क्या है ?

“विवाह” एक ऐसा गठबंधन है – जिसमें दो व्यक्ति मिलकर उन समस्याओं को सुलझाने का जीवन भर प्रयास करते हैं, जो पहले कभी थी ही नही.!!

“सर्वोत्तम विवाह वह नहीं है, जब एक सर्वगुण संपन्न जोड़ा एक साथ जुड़ता है.

_ यह वह है, जब एक जोड़ा सर्वगुण संपन्न न होते हुए भी _ अपने मतभेदों का आनंद लेना सीख लेता है”

शादी की सफलता का श्रेय दोस्ताना व्यवहार को भी जाता है. आप को अपने साथी के साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए,

तभी आप का साथी अपने मन की बात बेझिझक आप से कर पाएगा.

कोई भी व्यक्ति परफैक्ट नहीं होता, पर अपनी मैरिड लाइफ को खूबसूरत बनाने के लिए

अपने लाइफपार्टनर को अपने लिए हमेशा परफैक्ट मानें.

विवाह होता है, प्रेम विवाह जैसा कुछ नहीं होता.!!
विवाह हमारे लिए विकास करने, स्वयं को परिष्कृत करने

और प्रेम करना सीखने की सम्भावना लेकर आता है.

खुद की जीने की वजह जिनके पास होती है, _

_ उन्हें शादी के झमेले की जरूरत क्या है..!!

विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन है, जिसमें बढ़ी हुई जिम्मेदारियां भी अच्छी लगती हैं.
शादी से पहले जिन्दगी एक मेला हैं _ शादी के बाद जिन्दगी एक झमेला है !!
जीविका का प्रश्न हल होने के बाद ही विवाह शोभा देता है..!!

मैं जब अपने संघर्ष से जीत जाऊंगा, तो निश्चित हीं विवाह कर लूंगा…
_ क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरे संघर्षों के बोझ तले कोई स्त्री दब कर,
_ अपने ख्वाबों की बलि चढ़ा दे..!!
जब तक आप अपनी वित्तीय स्थिति [financial position] ठीक नहीं कर लेते तब तक शादी न करें.
_ _ क्योंकि वे हमें टूटते हुए दिखाई देते हैं.. जो बहुत जल्दी पति की भूमिका निभाने लगते हैं.!!
शादी मतलब ढेर सारी जिम्मेदारियों का भार लेना, जो लोग बोलते है कब तक अकेले रहोगे ?

_ किसी का साथ जरूरी है..! सब बात ठीक है.. मगर जो इंसान खुद की जिम्मेदारी पूरी नही कर पा रहा..
_ उससे ये उम्मीद करना की वो अपने साथ एक और इंसान के भविष्य को दांव पे लगा दे.. इससे बड़ी बेवकूफी दूसरी नही हो सकती…!
शादी एक बहुत बड़ा आर्थिक निर्णय है, _ जिसे हम सामाजिक और भावनात्मक दबाव के चलते ले लेते हैं.!!
Marriage is a huge financial decision,_ Which we take due to social and emotional pressure.!!
“विवाह एक भरोसा है, समर्पण है “

तारीफ उस स्त्री की जिसने खुद का घर छोड़ दिया..

_ धन्य है वो पुरुष जिसने अनजाने स्त्री को अपना घर सौंप दिया.

शादी सिर्फ खुशियों का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर का साथ निभाने का वादा होती है.

_ हर रिश्ता शुरुआत में आसान लगता है, लेकिन असली ताकत तब सामने आती है जब मुश्किलें दस्तक देती हैं.
_ अगर रिश्ता भरोसे, प्यार और समझ पर टिका हो, तो कोई भी कठिनाई इसे तोड़ नहीं पाती.
_ उल्टा, मुश्किल हालात में और भी गहरे हो जाते हैं… जो रिश्ता हर तूफान में साथ खड़ा रहता है, वही साथ निभाने की गारंटी देता है.
_ शादी का रिश्ता एक दूसरे की पसंद-नापसंद के साथ एडजस्टमेंट होता है.
_ मगर, इसमें जैसे ही जिद और हठ की इंट्री होती है, तो इसे तबाह होने से कोई नहीं रोक सकता है.!!
हिन्दू विवाह में सात फेरे के साथ लिए जाने वाले सात वचन जीवन को संतुलित और अर्थपूर्ण बनाने का संकल्प होते हैं.

सात फेरे – सात वचन (सरल अर्थ)
1.पहला वचन – “भोजन व आजीविका”
_ हम मिलकर ईमानदारी से जीवनयापन करेंगे और परिवार का भरण-पोषण करेंगे.
2.दूसरा वचन – “शक्ति व स्वास्थ्य”
_ हम एक-दूसरे के स्वास्थ्य, मन और सुख-दुख का ख़याल रखेंगे.
3.तीसरा वचन – “धन व समृद्धि”
_ हम धन को समझदारी से कमाएँगे, धन का सही उपयोग करेंगे और परिवार की उन्नति करेंगे.
4.चौथा वचन – “प्रेम व पारिवारिक दायित्व”
_ हम प्रेम, विश्वास, समझ और जिम्मेदारी से परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाएँगे.
5.पाँचवाँ वचन – “संतान व संस्कार”
_ हम संतान को अच्छे संस्कार देंगे और उन्हें सही मार्ग दिखाएँगे.
6.छठा वचन – “साथ व निष्ठा’
_ हम हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाएँगे और ईमानदार रहेंगे.
7.सातवाँ वचन – “मित्रता व जीवनसाथी”
_ हम जीवन भर मित्र, साथी और सहयात्री बने रहेंगे.
इन सात वचनों का सार यही है कि विवाह केवल रस्म नहीं,
_ बल्कि साथ चलने, साथ निभाने और साथ बढ़ने का संकल्प है.
मेरा सवाल : -> क्या कोई व्यक्ति कभी यह रुककर देखता है कि वह किस वचन से भटक गया ?
“लोग जिम्मेदारी तो निभा लेते हैं.. पर मित्रता कहीं खो जाती है.”
हर व्यक्ति शादी के लिए नहीं बना होता.

_ हर कपल माँ/बाप बनने के लिए नहीं बना होता.
_ कई व्यक्ति बिना शादी के, सिंगल रहकर, ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ कई कपल बिना बच्चे के ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ सबको एक ढाँचे में फिट करने का फितूर छोड़ दीजिये..
_ शादी, बच्चे, घर-जायदाद, बेटा-वारिस इन सबने कई युवाओं की ज़िन्दगी बर्बाद की है.!!
जब मेरी शादी हुई, तो मुझे यह ठीक से नहीं पता था और न ही जानता था कि शादी के बाद जीवन कितना बदल जाएगा..

_ बस इतना समझता था कि शादी का अर्थ है, सुख-दुख में साथ निभाने का वादा, हर परिस्थिति में साथी बने रहने का भरोसा..
_ लेकिन सच कहूँ, उस समय मैंने इस रिश्ते की गहराई को पूरी तरह से समझा नहीं था..
_ लेकिन खुद उस सफर पर निकलने के बाद, शादी का असली अर्थ समझा..
_ लेकिन असल में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या जो समाज के सामने आ रही है,
_ वो है पति-पत्नी के रिश्तों में नासमझी की,,
_ पति-पत्नी का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं है, भावनाओं, समझ और वादों का है.
_ माता-पिता योग्य साथी चुन सकते हैं, या व्यक्ति खुद अपने लिए साथी ढूंढ सकता है,
_ लेकिन इस रिश्ते को निभाने की कसौटी इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों साथी मिलकर कैसे एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं.
_ बहुत से लोग शादी सिर्फ इसलिए करते हैं.. क्योंकि उम्र हो गई है या समाज का दबाव है.
_ लेकिन शादी का असली अर्थ समझे बिना किया गया यह फैसला अक्सर दुखदायी बन जाता है.
_ शादी तब ही सफल होती है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के लिए सेवा और समर्पण के भाव से साथ चलते हैं.
_ जब एक और एक मिल कर दो नहीं, बल्कि एक हो जाने के अहसास को जीने लगते हैं.
_ शादी का असली अर्थ त्याग, समर्पण और समझदारी है.
_ यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दो लोग ‘मैं’ और ‘तुम’ से ऊपर उठकर ‘हम’ बनते हैं.
_ यह रिश्ता तभी फलता-फूलता है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के सुख-दुख को साझा करें और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ दें.
_ शादी को निभाना आसान नहीं है..
_ यह रिश्ता त्याग और समझौते की मांग करता है.
_ दोनों साथी इस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाएं, तो यह जीवन को सबसे सुंदर अनुभव बना देता है.
_ शादी सिर्फ दो लोगों का जुड़ना नहीं है, बल्कि यह वादा है जिसे हर परिस्थिति में निभाना होता है.
_ शादी का अर्थ केवल प्रेम या संग-साथ तक सीमित नहीं है.
_ इसका असली अर्थ है अपने साथी के साथ हर मुश्किल में खड़ा रहना..
_ यही सच्चा वादा है, यही सच्चा रिश्ता है..!!

– संजय सिन्हा

सुविचार – विद्यार्थी – 018

विद्यार्थी की सच्ची सुंदरता उस के गुणों और योग्यता में है, न कि बाहरी फैशन में.
होंठो पे मुस्कान कंधो पे बस्ता था, _ सुकून के मामले में वो ज़माना सस्ता था !!
जिंदगी की पढ़ाई चल रही है, अभी हमारा बैग उतरा नहीं है.

सुविचार – बचपन – बच्चा – बच्चे – बच्चों – 017

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जब मैं छोटा था तब मुझे बड़ा होने की बड़ी जल्दी थी ! आज समझ आया की वो बचपन ही अच्छा था, जब ना किसी की ज़रूरत थी और ना कोई ज़रूरी था.

बचपन चला गया ___ज़िन्दगी की सबसे कीमती _ निशानी चली गई _
वो बचपन बहुत प्यारा था,_ जो कभी हमारा था..!!
बचपन की यादें किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे खूबसूरत यादें होती हैं.

_ समय में पीछे जाएँ और अपने आप को उस बचपन की मासूमियत में डुबो दें और देखें कि वह कितना सुंदर था.!!
बस कोई लौटा दे वो बचपन के दिन..

_ खाली हाथ होने के बावजूद भी, कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ था..

जब छोटे बच्चे थे तो जोर से रोते थे, जो पसंद था उसे पाने के लिए.!

_ आज बड़े हैं तो चुपके से रोते हैं, जो पसंद हैं उसे भुलाने के लिए.!!

अँधेरे से कह दो बचपन बीत चुका, अब तुझसे डर नहीं सुकून मिलता है.!!
बच्चे दर्पण की तरह होते हैं, हमारे लाख छिपाने की कोशिश के बावजूद भी

एक बच्चे में सच को समझने की अनोखी योग्यता होती है.

बच्चे कोरे कपड़े की तरह होते हैं, जैसा चाहो वैसा रंग लो,

उन्हें निश्चित रंग में केवल डुबो देना पर्याप्त है.

बड़े हो चुके होने का एहसास दिला के जिंदगी, झिंझोड़ देती है

बचपन तब ही ख़त्म हो जाता है जब, माँ डाँटना छोड़ देती है।……..

*बचपन साथ रखियेगा ज़िन्दगी की शाम में,*

*उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के मुक़ाम में*

” मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखे

ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह “

भागते बचपन में भी थे, भागते आज भी हैं !! _

_बस्ता वही है, बस अंदर का सामान बदल गया है !!!

वो बारिश का पानी, वो कागज़ की नाव _

_ बचपन को जिया है, मैंने फिर से एक बार ..

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था, _

_ वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था !!

लौट कर आती हैँ, वो तारीखें ,,

_ लौट कर, वो दिन नहीं आते …!!

बचपन बीत गया है अब, अब वो ज़माने नहीं आते _

_ यार पुराने दूर हैं मुझसे, अब वो ग़म मिटाने नहीं आते ..

इतनी चाहत तो लाखो रु पाने की भी नही होती,

जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है…….

बचपन साथ रखिए जिंदगी की शाम में

उम्र महसूस ही ना होगी सफर के मुकाम में।

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते.

इसलिए तो बच्चों पर नूर बरसता है,

शरारतें करते हैं, साज़िशें तो नहीं.

बच्चे पौधों के समान होते हैं –

वे प्रेम, प्रसन्नता और स्वतंत्र वातावरण में बढ़ते हैं.

आता है याद मुझ को बचपन वो जमाना,

रहता था साथ मेरे खुशियों का जब जमाना..

गरीबों की बस्ती में जरा जाकर तो देखो,

वहाँ बच्चे भुखे तो मिलेगें, मगर उदास नही.

दोस्ती तो बच्चे ही कर सकते हैं, बड़े तो समझौते और सौदेबाज़ी करते हैं !
माता-पिता बच्चों के नक़ली दोस्तों और बच्चे माता-पिता के नक़ली रिश्तेदारों को पहचानने में माहिर होते हैं..!!
एक बच्चे के लिए बचपन की यादें ही उनके आने वाले कल को खूबसूरत बनाती है,

_ इसलिए हो सके तो अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा प्रेम दें, ताकि वो प्रेम पाने के लिए गलत संगत का सहारा न ले.!!

अब तो बच्चे भी परिंदों जैसे हो गए हैं,

_ साथ रह कर बड़े होते हैं __ और बड़े हो कर उड़ जाते हैं..

बच्चे जल्दी-जल्दी घर आने चाहिएं.

_ एक उम्र के बाद मां-बाप मुरझाने लगते हैं “बच्चों के बिना”.!!

अपनी बच्चों से दोस्ती रखो, ताकि वो अपनी हर बात आप से शेयर कर सके.

_ वरना बुरे लोग घात लगाए बैठे हैं, उसे बुरा बनाने के लिए.!!

बच्चों की परवरिश में केवल आर्थिक उन्नति को शामिल मत कीजिए..

_ बल्कि मानसिक उन्नति को भी शामिल कीजिए.!

क्या हम अपने बच्चों को एक टॉप-ग्रेड मशीन बना रहे हैं, या एक समझदार इंसान ?
जिन बच्चों को बार-बार ताना मारा जाता है.. वो कोशिश करना छोड़ देते हैं.

_ जिन बच्चों को मारा पीटा जाता है.. वो डरपोक बन जाते हैं.
_ जिन बच्चे का मजाक बनाया जाता है.. वो आत्मविश्वास खो देते हैं.
_ जिन बच्चे पर विश्वास नहीं किया जाता है.. वो विद्रोही बन जाते हैं.
_ जिन बच्चों की तारीफ नहीं की जाती है.. वो अपने आप को पसंद करना छोड़ देते हैं.
_ कभी सोचा है हमारे व्यवहार से हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं.
_ बच्चो को फूलों की तरह सम्भालिए, उनका उत्साह बढाइये, मोटिवेशन दीजिए.
_ डराने धमकाने से.. सीखने की गति सौ गुना कम हो जाती है.!!
बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…

_ जहां पर वास्तव में जीवन की असली खुशियां मिलती है..
_ कोई जिम्मेदारी नहीं… दुनियादारी नहीं …मन में किसी तरह का छल कपट नहीं…
_ बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…जहां पर वास्तव में जीवन के असली खुशियां मिलती है..
_ जीवन में मिलने वाली छोटी-छोटी चीज भी कितनी अच्छी लगती है..
_ जीवन में बचपन का समय तो गुजर जाता है..
_ लेकिन बचपन की खुशियां कुछ तो विशेष होती हैं…
_ जिसके गुजर जाने के बाद अहमियत और बढ़ जाती है..
_ मां-बाप के साथ बीते हुए पल.. उनके द्वारा बनाया हुआ खुशी का माहौल…
_ कम में कैसे खुश रहना है…पता नहीं…
_ वो वक्त बहुत अलग था.. सादगी और मासूमियत से भरा जीवन..!!
” बचपन की यादों का सफर “

*************************
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
बीत गए कितनी जल्दी बरस दर बरस
पर ठहर गया तेरी बातों का सफर ।
किताब मांगना, फिर उसे लौटा देना
छत पर आना उसका, वो रातों का सफर।
रूठना बिना बात मेरा, मनाना तेरा
देखना साथ हमारा, तारों का सफर।
क्यों हुआ बचपन की बातो का छिड़ना
हां वो मास्टर जी की बेतों का सफर।
होली में भीगना, गुब्बारे फोड़ना
बहुत सुहाना था त्योहारों का सफर।
याद है वो हौज पे घंटो नहाना
सुहाना था सुबह की सैरों का सफर।
याद वो कपिल का वर्ल्ड कप जीतना
रेडियो पर मुकेश के गानों का सफर।
जून की तपती दोपहरी में खेलना
प्यारा लू से बेपरवाहियो का सफर।
वो नानाजी का प्यार से पढ़ाना
उनकी बेपनाह मुहब्बतों का सफर।
सिलसिला छिड़ा तो, उसका बंद न होना
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
आज बच्चों को शोर मचाने दो

कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ख़ामोश ज़िंदगी बिताएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
गेंदों से तोड़ने दो शीशें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दिल तोड़ेंगे या ख़ुद टूट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बोलने दो बेहिसाब इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
इनके भी होंठ सिल जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
दोस्तों संग छुट्टियों मनाने दो
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दोस्ती-छुट्टी को तरस जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
भरने दो इन्हें सपनों की उड़ान
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
पर इनके भी कट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बनाने दो इन्हें काग़ज़ की कश्ती
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ऑफ़िस के काग़ज़ों में खो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
खाने दो जो दिल चाहे इनका
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
हर दाने की कैलोरी गिनाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
रहने दो आज मासूम इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ये भी “#समझदार” हो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
एक सुझाव : – ध्यान रहे कि मैं बच्चे के जन्म के खिलाफ नही हूं..

_ _लेकिन जब हमें पता है कि बच्चे के जन्म होते ही क्या होने वाला है.. उसके साथ..
_ तो हम सोच सकते हैं कि क्या करना है,
_ यदि आप उन छोटे बच्चों का ध्यान जीवन भर रख सकते है तो जरूर जन्म लेने दें और उनका ख्याल रखें.
_ लेकिन ये भी ध्यान रहे कि बिना सोचे समझे बच्चे पैदा न करें..!!
_ हर कोई कह सकता है कि वो बच्चे चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चे पालने में सक्षम नहीं होते.!!
_ हमारी सबसे बड़ी कमी, बच्चे तो पैदा कर लेते हैं, पर उन्हें कैसे पालना है, उनकी कैसी परवरिश करनी है, पता नहीं होता,
_ और ऐसे लोग ही आगे चलकर मनोविकार से ग्रस्त हो जाते हैं, मेंटल हेल्थ से गुजरते हैं.
हम बच्चे पैदा किसकी खुशी के लिए करते हैं ?
_ इस दुनिया मे जंहा तकलीफ, दुख, संताप, संघर्ष, धोखे भरे पड़े हैं,
_ ये सब जानते हुए भी क्यों माँ बाप एक और जिंदगी ला रहे हैं ?
_ सिर्फ बाप को समाज को साबित करना है कि मै नपुंसक नहीं हूँ और औरत को कि मैं बांझ नही हूँ.
_ फिर कौन उस से पूछ रहा है कि तु इंसान बनेगा या हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ?
_ सब मां बाप धर्म थोप रहे हैं.
_ माता पिता को माफ कर दें बच्चे, उनको इस घटिया इंसानो की दुनिया में लाने के लिए तो भी बहुत है..!!
माता-पिता बनने के लिए योग्यता और पात्रता होनी चाहिए, हर कोई माता-पिता बनने में सक्षम नहीं होता, खराब पालन-पोषण का परिणाम आपराधिक प्रवृत्ति को ही बढ़ावा देता है, यदि बच्चे ठीक से प्रेम प्यार से पाले नहीं जाते तो पैदा ही न करें.

_ भारत में ज्यादातर पुरुष बाप बन जाते हैं, पिता कुछ ही बन पाते हैं.!!

आजकल के बच्चों में जिंदगी के झटके सहने की क्षमता बहुत कम है ;
_यही कारण है कि आज मानसिक अवसाद और तनाव अधिक व्याप्त है.!!
सामाजिक ताने बाने के भीतर आखिर हमने ऐसा खोखला डर क्यों बनाया हुआ है कि,
_ हम अपने ही घरों के बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को समझ नहीं पा रहे हैं.
बच्चों को बचपन में केवल एक अनुशासन सिखाइए कि अपनी चीज़ें सही जगह पर रखो.

_ बड़े होने पर उन्हें अपना जीवन सही जगह पर रखना आ जाएगा.
कभी-कभी होता यूँ है कि हम जिसे बच्चा समझ कर समझा रहे होते हैं,
_ वो अपनी विचारधारा में हमसे भी बड़े होते हैं.. वो खुद जानते हैं हर परिस्थिति से बाहर निकलना..!!
बच्चों को उड़ने से मत रोकिए._

_ वे कई बार गिरेंगे, कई गतिविधियों/कोर्सेज़ में पैसा व समय भी खराब करेंगे.
_ फिर भी उन्हें मत रोकिए.
_ अगर वे खुश होकर उड़ेंगे, तो उड़ते-उड़ते एक न एक दिन अंबर को छू ही लेंगे.
_ घर वालों को चाहिए कि वे अपने बच्चो के जीवन को बहोत कंट्रोल न करें…!
अपने बच्चों को खुद अपने सपने बुनने दीजिए..

_ उसे पूरा करने के लिये.. उसके सारथी बनिये..
_ मगर, उसकी आँखों में अपना सपना मत बो देना..
_ बच्चे की आंखों में परिवार का बोया सपना बड़ा भारी होता है..
_ वह सपना बच्चे को बूढ़ा कर देता है.. ‘उसे थका देता है’
_ दूसरों का सपना, सबसे पहले बचपन चट कर जाता है और फिर बाकी का जीवन..!!
माता-पिता कृपया अपने बच्चों पर अपने सपने मत थोपें, बच्चों के जो मनपसंद विषय है, उन्हें चुनने दें..
_ ताकि वो अपने भविष्य का निर्माण हंसते खेलते तनाव रहित होकर कर सकें..!!
संघर्ष में पले बच्चे भटक नहीं सकते, उन्होंने कामयाबी से पहले पसीना देखा होता है.
मै और मेरी पत्नी कभी अपनी बच्चों पर अपना सपना नहीं थोपते,

_ हमनें बच्चों को बोल कर रखा है कि.. आपसे ज्यादा हमारे लिए कुछ कीमती नहीं..
_ सही गलत की शिक्षा देते रहते हैं,
_ और फिर भी कोई बात हो या कोई गलती..
_ उसके लिए वो हमसे बेझिझक बात करे.. ऐसा माहौल बनाया है..!!
जीवन वाकई में दुखों और कष्टों की सेज है..

_ पर फिर लगता है कि हमारा क्या भरोसा, हम कब तक रहेंगे, और इस लिए बच्चों को आगे बढ़ने के लिए, स्वछंद उड़ान भरने की लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखना ही पड़ता है..!!
पेरेंटिंग पर अधिक से अधिक बात, विचार, किताबें होनी चाहिए,

_ क्योंकि साबित हो चुका है कि अधिकांश पेरेंट्स केवल बच्चे की पढ़ाई, खिलौने, खाने आदि ज़रूरतों को पूरा करना ही पेरेंटिंग समझते हैं,
_ उनकी भावनात्मक, संज्ञानात्मक ज़रूरतों की जानकारी.. उन्हें इस आपाधापी भरे जीवन में नहीं हो पाती..!!
बच्चों की अपनी जिंदगी होती है, उन्हें जीने दीजिए,

_ वे साथ दें तो धन्यवाद, साथ न दें तो भी आशीर्वाद दें >>’वृद्धावस्था में स्वयं स्वाबलंबी और समर्थ बनें रहें, बाकी सब मिथ्या..!!
_ फिर साथ मिले या आदर- सत्कार मिले तो ” सोने पर सुहागा “
स्वयं को अक्षम समझना हमें हीन, कमजोर और लाचार बनाता है,

_जबकि दूसरों में दोष देखना, हमें परछिद्रान्वेषी, घमंडी, ईर्ष्यालु, बहानेबाज और गैरजिम्मेदार बनाता है.
_मनुष्य के लिए आदर्श और सकारात्मक सोच है- मैं सही, तुम भी सही..
_ डा॰ एरिक बर्न की उक्त कसौटी पर माता-पिता और उनके बच्चों के मध्य विकसित होने वाले मनोभावों को आसानी से समझा जा सकता है.
_बचपन में माता-पिता पर निर्भरता बच्चे पर उनके प्रति अनुकूल प्रभाव रखती है,
_लेकिन उस निर्भरता के समाप्त होते ही, वह आत्म-स्वतन्त्रता की ओर उन्मुख होने लगता है.
_माता-पिता का मार्गदर्शन और आदेश उसे नहीं सुहाता.
_ दरअसल, वयस्क मन स्वयं समझ विकसित करके निर्णय लेना चाहता है,
_जिसमें माता-पिता उसे बाधक समझ आते हैं.
_यहीं से उनके मध्य मतभेद उत्पन्न होने लगते हैं,
_जो धीरे-धीरे मनभेद की ओर बढ़ जाते हैं, और कालांतर में संघर्ष का रूप ले लेते हैं.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल [ लेखक ]
अपने बच्चों से प्यार कीजिए, उन्हें बात-बात पर लज्जित मत कीजिए ;

_ कभी किसी बच्चे से तुलना करते हुए उसे कमतर मत बताइए.
_ बच्चा गलती कर सकता है, उसकी कुछ गलतियों की अनदेखी कीजिए.
_ मौका मिले तो समझाइए, बात कीजिए, लेकिन जलील मत कीजिए.
_ कोई उसकी आपसे शिकायत लगाए, तो भी अपने बच्चे को प्रोटेक्ट कीजिए.
_ कहिए कि वो छोटा है, टीन एज में है, नासमझ है,
_ पर उनकी हां में हां मिला कर बच्चे का दिल मत तोड़िए.
_ बच्चे अपने मां-बाप की ओर बहुत हसरत भरी नज़रों से देखते हैं.
_ उन्हें उम्मीद होती है कि जब पूरा संसार उनके विरुद्ध हो जाएगा, तब भी मां-बाप खड़े रहेंगे ..उसकी तरफ से.!!
— हर मां-बाप को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए, उनके दिल का हाल पूछिए.
_ उनसे स्कूल में होने वाली गतिविधियों पर चर्चा कीजिए.
_ वो कभी पार्टी करना चाहे तो करने दीजिए.
_ आखिर उसे इसी संसार में बड़ा होना है, जीना है.
_ हर छोटी-बड़ी बात पर उसका मूल्यांकन मत कीजिए और टीचर से जब मिलने जाएं तो उनकी ओर से नहीं, अपने बच्चे की ओर खड़े दिखिए.
_ बच्चे सही मायने में भविष्य की अमानत हैं.
_ उन्हें बड़ा कीजिए. प्रोडक्ट बना कर नहीं, इंसान बना कर.
_ उनमें भरोसा जताइए.
_ भरोसे से प्यार बढ़ता है, प्यार से नजदीकियां..
_ अपने बच्चे के नज़दीक आइए..
— प्यार ही हर रिश्ते की बुनियाद है.
_ जब आप बच्चे को डांटेंगे, फटकारेंगे, जलील करेंगे तो प्यार कम होगा.
_ जब प्यार कम होगा ..फिर रिश्ते रहें न रहें क्या फर्क पड़ने वाला है ?
_ किसी को डांटना, पीटना रिश्तों की कड़ियों को टूटने देना है.
_ मत टूटने दीजिए रिश्तों की कड़ियों को.
_ प्यार ज़िंदगी है, प्यार बंदगी है, प्यार से प्यार कीजिए.
_ आदमी वही आदमी होता है, जो प्यार करना जानता है.
हर इंसान की चाहत होती है कि उसकी कद्र हो और उसके अस्तित्व की अहमियत समझी जाए, ये बात दुनिया को बताई जाए..

_ हर किसी के अंदर एक बच्चा दुबकी मार के बैठा है..
_ जो गलतियां कर कर के सीखता रहना चाहता है पूरा जीवन..
_ इस बात को आप नकार सकते हो ..चूंकि ये आपके बड़प्पन के आड़े आ रहा होगा..
_ लेकिन मन ही मन सोच रहे होंगे कि __ मन की बात कह दी बच्चे ने !!
भारतीय समाज में विवाह और संतानोत्पत्ति की एक सुविचारित, सुदृढ़ और सुदीर्घ परंपरा के कारण माता पिता बनना बहुत आसान और अनिवार्य कार्य समझा जाता है..

बच्चे को जन्म देना, पढ़ाना लिखाना, खिलाना पिलाना और फरमाइशें पूरी करना ही यहां पेरेंटिंग समझा जाता है जबकि उसके संवेदात्मक, भावनात्मक विकास के लिए माहौल तैयार करना कोई ज़रूरी काम या जिम्मेदारी नहीं मानी जाती..
अधिकतर परिवारों में बेहद टॉक्सिक माहौल होता है, मां बाप बच्चों के आगे ही आपस में या परिवार, पड़ोस से झगड़ते, गाली गलौच करते हैं बिना यह सोचे कि इसका बच्चे के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा !
बिना मानसिक, आर्थिक, शारीरिक तैयारी के, बिना प्लान के बस शादी हो गई है तो बच्चा पैदा करना है के दबाव, आदत,परम्परा के कारण बच्चे पैदा कर दिए जाते हैं और फिर कभी उस बच्चे के कारण या उसे मोहरा बनाकर सारी जिंदगी लोग झगड़ते ,भटकते रहते हैं..
जिसे दुनिया में ला रहे हैं उसके लिए एक सुंदर दुनिया बनाने और उसे दुनिया को सुंदर बनाने लायक करना लोगों को नहीं आता…जब बच्चों से पूछकर उन्हें पैदा नहीं किया जाता तो पैदा होने के बाद वह किस बात की कीमत ज़िंदगी भर चुकाते हैं..
पारिवारिक, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक सुविधाएं देकर बच्चों का मानसिक शोषण करना, उन्हें नीचा दिखाना,पालन पोषण का ताना देना और ज़िंदगी भर उनके हर कदम की आलोचना करना और अंत में असहाय होने पर उन्हीं बच्चों से प्यार, इज़्ज़त,देखभाल की अपेक्षा करना यहां आम बात है..
घर नाम की जगह को इतना सुकून भरा,प्यार भरा और भरोसे भरा होना चाहिए कि पढ़ने, कमाने या दुनिया देखने निकला बच्चा बार बार वहां लौटना चाहे, वर्ना तो जिसे जब जैसा बहाना, मौक़ा मिलेगा वह घर छोड़ जाएगा फिर आप रोते रहिए नए ज़माने को..
बच्चों से ज़्यादा यहां पेरेंट्स को ट्रेनिंग की ज़रूरत है…
– Mamta Singh
कुछ लोग तो आज के दौर में भी इतने गैर जिम्मेदार होते हैं.. ऊपर वाले के भरोसे बच्चे पैदा करते हैं..

_ और उनमें से कुछ आज भी ऐसे होते हैं जो लड़के की चाहत में बच्चे पैदा करते जाते हैं, _ गैर जिम्मेदाराना तरीके से इस तरह अनियमितता लाना… अपने स्वयं के साथ और धरती के साथ अन्याय है,
_ साथ ही उस बच्चे के साथ भी जिसे अनचाहे तरीके से आप जन्मते हो..
_ पति पत्नी का साथ एक संतुलित व्यवस्था है.. इसे असंतुलित ना करो,
_ यदि अपने मनोरंजन के लिए तुम किसी का जीवन खराब करते हो और इस धरती को.. तो तुम मनुष्य नहीं हो..!!
– Rhythm Rahi
हम पूरी उम्र गुज़ार देते हैं श्रम करते हुए कि बच्चों का जीवन बनाना है, ताकि उन्हें भविष्य में कोई तकलीफ़ न उठानी पड़े.

_ उस समय हम बच्चों को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते.
_ जब हम सारे फ़र्ज़ पूरे करके खाली होते हैं, और बच्चों के साथ वक़्त बिताना चाहते हैं तो बच्चों के पास वक़्त नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.!!
– Manika Mohini

सुविचार – टाइम मैनेज – 016

~~ समय ~~

आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है.

परिवार, पुस्तक एवम प्रकृति के साथ समय बिताना सिख जाओ…

_ वरना समय भी एक समय तक ही मोहलत देता है…!!!!

धन बर्बाद कर के आप निर्धन होते हैं, _

_ लेकिन समय बर्बाद कर के आप अपना जीवन नष्ट करते हैं..!!

कई लोग ऐसी बातों के बारे में सोच रहे हैं, जो कभी होने वाली नही है, खैर !…
_ यह भी एक अच्छा टाइम पास है.!!
समय एक नदी की तरह है. आप एक ही पानी को दो बार नहीं छू सकते, क्योंकि जो प्रवाह बीत चुका है वह फिर कभी नहीं गुजरेगा.; _अपने जीवन के हर पल का आनंद लें !

Time is like a river. You cannot touch the same water twice, because the flow that has passed will never pass again. Enjoy every moment of your life !

समय मुफ़्त है, लेकिन अमूल्य है ; _ आप इसके मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं.

आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं ; _ एक बार आपने इसे खो दिया तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते..

हम अपने जीवन में सबसे बड़ी गलती यह सोचते हैं कि हमारे पास समय है.

Time is free, but it’s priceless. You can’t own it, but you can use it. You can’t keep it, but you can spend it. Once you’ve lost it you can never get it back. The biggest mistake we make in our life is thinking we have time.

अगर हम रोजाना अपने कामों की लिस्ट बनाएँ और टाइम मैनजमेंट के अनुसार उन्हें निबटाएँ, तो सारे काम बड़े आसानी से हो सकते है. इधर- उधर की चीजों में , बेकार के तनाव में अपना समय न गँवाएँ — स्मार्ट वर्किंग से काम पूरा करें और अपनी ज़िन्दगी को एन्जॉय भी करें.

जो लोग यह कहते हैं ” मेरे पास बहुत काम है, वक्त नहीं है….. ” दरअसल वे लोग दिशाहीन होते हैं, उन्हें खुद को मैनेज करना नहीं आता.

एक बात जान लीजिए – समय एक ऐसा संसाधन है जिसका भविष्य के लिए संग्रह नहीं किया जा सकता है. अमीर हो या गरीब, सभी के पास एक दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं. जो समय चला जाता है, उसे वापस कभी नहीं लाया जा सकता है.

इसलिए समय का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. जब कभी लगे कि समय कम पड़ गया है, तो अपना एक रूटीन बना लेना चाहिए. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए टाइम मैनेजमेंट में पारंगत होना जरुरी है. ऐसा नहीं होने पर कभी लगेगा समय कट नहीं रहा है और कभी अनुभव होगा कि समय है ही नहीं- इसलिए समय से पंगा नहीं.

समय का सदुपयोग किन किन चीजों में है ये बात हमें पता होनी चाहिए. एक ही टाइम टेबल 365 दिन काम नहीं आता. हमें समय का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए.
Time management  का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सबसे पहले आप यह पता लगाएं कि आपका समय कहाँ बर्बाद हो रहा है. अगर आप ये पता लगा पाए तो आप उन सभी कार्यों को छोड़ सकते हैं जो आपका टाइम वेस्ट कर रहे थे.
सोचिये यदि आप कोई जरुरी कार्य कर रहे हैं और तभी आपका कोई दोस्त आ जाता है और आपसे बातें करने लगता है. ऐसे समय में आपको उससे अच्छे शब्दों में “न” कह देना चाहिए, वरना आपका टाइम वेस्ट हो जायेगा.
ध्यान दीजिए, क्या आप व्हाट्सप्प या फेसबुक पर कितना समय देते हैं. क्या आप ज्यादा टीवी देखकर अपना टाइम वेस्ट तो नहीं कर रहे. अगर ऐसा है तो तुरंत सावधान हो जाएँ और ऐसे तरीके अपनाएं जिससे आपका टाइम वेस्ट न हो और आप समय बचा कर उसे अच्छे कार्यों में प्रयोग कर सकें.

सुविचार – ईर्ष्या – ईर्ष्यालु – द्वेष – घृणा- कुढ़ना – नफ़रत – नफरत – जलन – 015

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दूसरे की तरक्की से जलना नहीं चाहिए..

_ इंसान के पास अपनी ही खुशियां इतनी होनी चाहिए कि दूसरे की खुशी से जलने का समय न बचे.
_ लोगों की तारीफ़ करना सीखिए..
_ उनकी खुशी में शरीक होना सीखिए… खुश रहना सीखिए.
_ न जलिए, न जलाइए.. – ज़िंदगी इन बातों से आगे की कहानी है.
_ “किसी से जलना- उसकी ज़िंदगी को रौशन करना होता है, जिससे आप जलते हैं”
– Sanjay Sinha
यदि आपसे कोई व्यक्ति ईर्ष्या करता है, तो उससे नफरत ना करें, क्योंकि यही लोग जानते है कि आप उनसे बेहतर हैं.

दरअसल, ईर्ष्या हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव का हिस्सा है. कम या अधिक हर किसी में ईर्ष्या विद्यमान होती है. एक कहावत है, ईर्ष्या आदमी को उसी प्रकार खा जाती है, जैसे कपड़े को कीड़ा. ईर्ष्या व्यक्ति को अशांत और क्रोधी बना देती है. इसका बोझ आपको दुनिया का सबसे दुखी व्यक्ति बना देगा.

ईर्ष्या आत्म- विश्वास की कमी से पैदा होती है और आत्म- विश्वास का साथी है ज्ञान. आप अपने ज्ञान की धार मजबूत करके ईर्ष्या से मुक्ति पा सकते हैं. यदि हम अपने जीवन में ऐसा कर पाये तो कोई भी नकारात्मक शक्ति हमें अपने डगर से विचलित नहीं कर पायेगी.
ईर्ष्या, राग, द्वेष जैसे कुविचारों को अपने पास फटकने न दें. किसी की उन्नति और विकास को देख कर, चिढ़ने, कुढ़ने के बजाय अपने कर्म पर भरोसा रखें. धैर्य रखें और प्रतीछा करें.
अगर कोई व्यक्ति दूसरे को खाता- पीता देख कर, फलता- फूलता देख कर, सुखी होता देख कर, उन्नति करता देख कर मन में जलता हो, उसे ईर्ष्या आती हो, बुरा सोचने लगता हो..

– हम इनसान हो कर यह आदत अपनाएँ, तो हमारे लिए यह अच्छी बात नहीं है.
ईर्ष्या से ग्रसित होकर किसी की निन्दा कर उसका नुकसान करने का प्रयास नहीं करना चाहिए,

_ क्योंकि पलटवार होने पर इसका परिणाम घातक हो सकता है.

एक समझदार व्यक्ति वह है, जो दूसरों को देख कर उनकी विशेषताओं से सीखता है,

_ उनसे तुलना या ईर्ष्या नहीं करता.

अंजान लोग नापसंद करते हैं, नफ़रत नहीं.!!
अपना बना कर छल करना ये तो पुराना रिवाज है..

_ किंतु ईर्ष्या रखने वालों का आप कुछ नहीं कर सकते सिवाय दूरी बरतने के…हमने ये बात गाँठ बाँध ली है;
_ ऐसे लोगों को इग्नोर करना और खुश रहना _क्योंकि “बात उनकी होती है.. जिनमें कोई बात होती है”
_ जीवन अनमोल है.. इसे किसी ऐरे-गैरे के लिए दुखी नहीं करना है.!!
Because…”जिंदगी मिलेगी न दोबारा”
किसी के लिए सारे दरवाजे बंद करने के बाद भी लोग खिड़कियों से झांकना बंद नहीं करते !!
कुछ लोग दूसरों की ज़िंदगी में झांकने में ही अपना क़ीमती वक्त जाया कर देते हैं..

_ और ये ही आदत_उनकी ज़िंदगी को तबाह कर देती है, क्योंकि ये आदत ईर्ष्या की जननी है.. ..!

मन में नफ़रत पालने की बजाए उन लोगों से दूरियां बना लेना ज़्यादा बेहतर है..

_ जो आपकी अहमियत नहीं समझते हैं.!!

जब किसी के मन में आपके लिए ज़हर भर गया हो,

_ तो फिर आपकी सारी अच्छाई भी उसे छलावा ही लगती है.
_ एक बार घृणा बस जाए —
तो कोई दलील, कोई सच — कुछ भी असर नहीं करता.!!
अपने मन में किसी के प्रति नफरत रखने की बजाय..

_ अपनी ज़िंदगी से उनके अस्तित्व को ख़त्म कर देना ज़्यादा बेहतर है.!!

नफरत वो ही करते हैं.. जो आपकी बराबरी करने की चाहत तो रखते हैं, पर हिम्मत नहीं जुटा पाते.!!
ख़तरा दुश्मनों से नहीं बल्कि अपनों से है _ वो नहीं चाहते की आपकी कीर्ति और वैभव दुनिया में बढ़े ..! ईर्ष्यालु होना ज़्यादातर लोगों की मानसिकता है !

“हम खुद को बरगद बना कर छाँव बाटते रहे, और हमारे ही हमें थोड़ा थोड़ा काटते रहे !!”

जब इंसान ईर्ष्या करता है तो वह दुनिया में आग नहीं लगाता, बल्कि अपना ही घर जला देता है और दूर खड़ा होकर चुपचाप तमाशा देखता रहता है.!!
“असली ताकत नफ़रत में है”- जिन लोगों ने भी ऊँचाइयाँ हासिल कीं, उनके अंदर एक आग थी, एक चिंगारी जो नफ़रत के बिना कभी नहीं जल सकती थी.!!
इंसान की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसने जीवन में कुछ नहीं किया होता है, वह उस से नफरत करता है, जिसके पास उस से ज्यादा होता है.
ईर्ष्या और द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_माफ़ करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता. यह आपको मुक्त करता है.!!

“ईर्ष्यालु लोग आपको एक प्रतियोगी के रूप में देखते हैं ;

_जबकि आप उन्हें परिवार या दोस्तों के रूप में देखते हैं.”

बैठ कर केवल उन लोगों से ईर्ष्या न करें, जिन्होंने अपना लछ्य पा लिया हो.

_ उनकी बराबरी का एक ही उपाय है, आप अपने काम में जुट जाएं.

दूसरों का दीया बुझाने से आपकी रोशनी नहीं बढ़ेगी;
_ अपनी तरक्की पर ध्यान दें, ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता.!!
“नफरत बोझ है, माफी सुकून” बदला मत लो, बस सफल बनो..
_ आपकी कामयाबी ही सबसे तगड़ा जवाब है.!!
ईर्ष्या और जलन ने हमको इस स्तर तक नीच कर दिया..

_अगर तरक्की करे कोई वो हमे पसंद नहीं आता.!!

कुटिलता, चालाकी, लोभ, ईर्ष्या शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में चार गुना से भी ज़्यादा वापसी की गारंटी देते हैं,

_ इन्हें आप अपनों में, परायों में, जहां चाहें वहां बो सकते हैं ..और यह एक बार बोने पर बार बार फसल देते हैं..

एक भिखारी अमीर आदमी से ईर्ष्या नहीं करता. _ वह उस भिखारी से ईर्ष्या करता है, जिसे उससे ज़्यादा भीख मिलती है.

_ सच यह है कि लोग अपने स्टेटस वालों से ही जलते-कुढ़ते हैं,
_ अपने से बहुत निम्न या बहुत उच्च वर्ग के लोगों से नहीं.!!
मन में किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष रख कर मनुष्य सफल तो हो जाता है, _

_ पर कभी सुकून से जी नहीं पाता ..!!!

जब कोई आप पर अपनी मर्जी नहीं चला पाता है..

_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगता है..!!

जो लोग नफरत करते हैं, उन पर तरस खाना चाहिए.

_ उनका दिमाग छोटा होता है, दिल और छोटा होता है..!!

जो लोग आपसे ईर्ष्या करते हैं..

_ वे आपके विरुद्ध बकवास करते रहेंगे और खुश होते रहेंगे.!!

नफ़रत ढोने से बेहतर है इज़्ज़त की दूरी रखकर, बिना शोर के अलग हो जाना.
कभी कभी लोगो को गलतफहमी हो जाती है कि लोग उनसे जलते हैं.!!
हृदय में द्वेष है, ज़ुबान पर प्रेम है और आजकल लोग इसे ‘बुद्धिमत्ता’ कहते हैं.!!
ईर्ष्या एक ऐसी मनोस्थिति है, जिस में प्रेम, क्रोध, विद्वेष, छोभ, अपमान और कुंठा के भाव मिले जुले होते हैं.
नफरती आदमी अपनी नफरत का तीर कभी भी किधर भी घुमा सकता है.
_ जो इनके मन की न करे तो ये उसके विरोधी हो जाते हैं.!!
ईर्ष्या का तात्पर्य यही है कि ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति जिस से ईर्ष्या करता है, _

_ उसे वह स्वयं बड़ा मानता है.

आपको किसी व्यक्ति से ईर्ष्या हो रही हो तो समझ जाइये, _

_ आप का विचार का दायरा सीमित हो रहा है..!!!

तारीफ झूठी हो सकती है, मगर ईर्ष्या कभी झूठी नहीं हो सकती.!!
किसी से ईर्ष्या करके मनुष्य उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है पर अपनी नींद और सुख चैन अवश्य खो देता है.

_जो ईर्ष्या करता है _ वह पहले अपना नुकसान करता है.

द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_क्षमा करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता, बल्कि आपको आज़ाद करता है.

ज़रा सी समझ बहुत कुछ सुधार सकती है, बचा सकती है.

_ नफ़रत करना बहुत आसान है ..उससे भी आसान है ..अक्ल लगाकर उस नफरत को हराना..!!

लोगों से नफरत व ईर्ष्या करना चूहे से छुटकारा पाने के लिए अपने ही घर को जलाने जैसा है.
मन में ईर्ष्या तभी पनपती है जब हम दूसरों को खुश नहीं देखना चाहते..!!
नफ़रत भी कोई करने की चीज है, सब्र कीजिए, रहम कीजिए, माफ़ कीजिए.!!
आज कल लोग होठों पर दुआ और आँखों में जलन रखते हैं..!!
कभी भी उस से अपना दुख ना कहें, जो आप से ईर्ष्या करता है..!!
ईर्षालु मनुष्य स्वयं ही ईर्ष्याग्नि में जला करता है, उसे और जलाना व्यर्थ है.!!
‘जलन और ईर्ष्या’ खुद के छोटे होने का सबूत है.!!
कभी किसी से ईर्ष्या मत रखें, _क्योंकि कोई फायदा नहीं है

_ इससे सिर्फ दुखी ही मिलता है और गलत विचार आते हैं बस..!!

जब आपके पास कुछ नहीं होगा तब लोग आपको बेचारा समझेंगे,

_ मगर जैसे ही आप उठेंगे.. लोग आपसे ईर्ष्या करने लगेंगे.!!

नफरत, ईर्ष्या से सृष्टि का चक्र रुक जाता है.

_ मदद कीजिए ..मदद मिलेगी ..शुरुआत करके देखिए..!!

आपसे ईर्ष्या करने वाले अधिकांश लोग वही होंगे,

_ जिनकी आपने कभी अपना समझ कर मदद की थी..!!

मेरे लिए नफ़रत पालने वालों के लिए भी बेहतरी की दुवाएं मांगता हूं..

– उन्हें दुआओं की गठरी थमा के लौट आया, वो जो मुझको बर्बाद करना चाहते थे..!!
नफरत एक बार मन में घुस गयी तो उससे बाहर निकलने में हमारा संदेह बाधा उपस्थित करता है.
_ जिनसे भी मुझे नफरत हुई, किसी ठोस कारण से हुई लेकिन जब भी मैंने उस नफरत को कम करने की कोशिश की, मैं असफल रहा.
_ समझ में यह आया कि एक निश्चित दूरी बनाकर रखी जाए, तुम अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.!!
_ कुछ गलतियों की माफिया, शब्दों में तो मिल जाती है.. अंतर्मन नहीं दे पाता..!!
_ फिर सौंप दिया जाता है, उसको.. प्रकृति और ऊपर वाले के हवाले.!!
_ क्योंकि, जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं..!!
अगर किसी के मन में दूसरों की खुशी और तरक्की देखकर ईर्ष्या की भावना है..

_ तब वह तिनका तिनका राख हो रहा है और दीमक कि तरह खोखला..
आपसे जलने वाले आपके बारे में अफ़वाहें उड़ाते हैं..

_ और बेवकूफ लोग बिना सोचे समझे उन अफ़वाहों पर विश्वास कर बैठते हैं.!!
कुछ लोग आपसे नफ़रत इसलिए करते हैँ कि आपकी मौजूदगी उनके वज़ूद को बेकार बना देती है !
ईर्ष्यालु और आपसे जलने वाला आपकी बुरी ख़बरें जानने में बहुत दिलचस्पी लेता है.!!
जब लोग आपको अपनी बातों के झाँसे में नहीं फँसा पाते,
_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगते हैं.!!
आपसे जलने वालों की हरकतों पर कोई भी प्रतिक्रिया न दें.!!
जीवन में इज्जत और प्रेम पाने के भूखे कभी मत रहो..
_ वरना ये दुनिया ऐसे लूटेगी कि आप इससे नफरत करने लगोगे..!!
जैसे-जैसे आपकी प्रगति का स्तर बढ़ेगा,
_लोगों की ईर्ष्या का स्तर भी बढ़ेगा और आप दूर से भी उनकी ईर्ष्या की तपिश को महसूस कर पाओगे.
दूसरों की तरक्की से जलने वालों की किस्मत अकसर ठंडी ही रह जाती है !
_ आप अपने काम में लगे रहो, क्योंकि जो आपको गिराने में व्यस्त हैं, वो खुद कभी ऊपर नहीं उठ सकते !!
कुछ लोगों में ईर्ष्या और घृणा का स्तर इतना अधिक होता है कि जब वे अपने सामने वाले की सफलता और खुशी देखते हैं, तो वे…

_ वे ऊपर से तो बहुत चिकनी-चुपड़ी और बनावटी बातें करते हैं, लेकिन भीतर से पूरी तरह ख़त्म हो जाते हैं.. आपके आस-पास भी ऐसे कई होंगे.!!
आमतौर पर देखा जाता है कि जिस इंसान में ईर्ष्या अधिक होती है..

_वह किसी भी स्थिति में अधिक ही रहती है.!
कोई अगर खुश है तो ईर्ष्या मत करो, ध्यान दीजिए कि आप क्यों दुखी हैं..!!
यह देखकर बहुत ख़राब लगता है कि हमारे आस-पास के लोग बेवजह ईर्ष्या, जलन, नफ़रत और बदले की भावना रखते हैं.

_ बिना बात के एक-दूसरे को जज करते हैं.
_ वे लोगों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं.!!
अहंकार और ईर्ष्या से ग्रस्त इंसान को जीवन में कभी भी सच्ची खुशी नहीं मिलती,

_ क्योंकि उनके मन में हमेशा दूसरों के प्रति ईर्ष्या और अपने आप को बड़ा दिखाने की चाह रहती है.
_ ऐसे लोगों को अपने जीवन में सुधार करने के लिए प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर के अहंकार और ईर्ष्या को दूर करना चाहिए.
अक्सर हमें लगता है कि अगर कोई हमसे नफ़रत कर रहा है, तो शायद हमने कुछ गलत किया है.

_ लेकिन हकीकत यह है कि नफ़रत हमेशा जलन की वजह से नहीं होती.
_ कई बार यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत होता है कि आप अपनी ज़िंदगी के सफर में उन लोगों से बहुत आगे निकल चुके हैं.
_ जब आप अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भीड़ से अलग दिखने लगते हैं, तो जो लोग आपका मुकाबला नहीं कर पाते, वो अक्सर नफ़रत का सहारा लेते हैं.
_ उनकी यह कड़वाहट दरअसल उनकी अपनी हार का शोर है.
_ यह इशारा है कि आपकी रफ्तार इतनी तेज़ है कि वो आपको पकड़ नहीं पा रहे, इसलिए बस दूर से पत्थर फेंक रहे हैं.
_ इस नकारात्मकता को बोझ बनाने के बजाय इसे अपनी ‘सक्सेस रिपोर्ट’ समझिए.
_ याद रखिए, पेड़ पर पत्थर भी तभी मारे जाते हैं.. जब उस पर मीठे फल लगे हों.
_ अगर लोग आपके बारे में बातें कर रहे हैं या आपसे बेवजह चिढ़ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं.. जो वो कभी नहीं कर पाए.
_ उनकी बातों को दिल पर लेने के बजाय अपनी मंज़िल पर ध्यान लगाइए.
_ आपकी कामयाबी ही उनकी नफ़रत का सबसे करारा जवाब होगी.. आगे बढ़ते रहिए, _ क्योंकि आसमान छूने वालों को ज़मीन पर शोर मचाने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता.!!
उन लोगों से कभी नफरत न करें जो आपसे ईर्ष्या करते हैं,

_बल्कि उनकी ईर्ष्या का सम्मान करें, क्योंकि वे वही हैं जो सोचते हैं कि आप अद्भुत हैं.
Never hate those people who are jealous of you, but respect their jealousy, because they are the ones who think you are amazing.
नफ़रत मेरे स्वभाव में नहीं

सच कहूँ तो, ये एक choice भी नहीं
मैं उस level तक नहीं जाऊंगा
जहाँ मन ज़हर से भर जाए।😔
मैंने गुस्से में जीना नहीं सीखा,
बदले की आग में नहीं जलना
हाँ, मैंने तुम्हें माफ़ किया है।
अब मेरे दिल में तुम नहीं हो
न अच्छे में, न बुरे में।😶
मेरे मन में जगह कम नहीं–
पर उसे कचरे से नहीं भरूंगा।
थोड़ा-सा कचरा☠️
अच्छी चीज़ों की खुशबू बिगाड़ता है।
मन एक कमरा है—
जहाँ या तो शांति रहती है,
या पुराने झगड़ों की बदबू।
दोनों साथ नहीं रह सकते।❌
इसलिए मैंने तुम्हें माफ़ किया–
जो हुआ, सो हुआ।
तुमने दुख दिया, पीड़ा दी,
कई बार वो भी नहीं जो मेरा हक़ था।
अब मुझे कोई हिसाब नहीं करना।
मैंने शिकायतों की फाइल बंद की है।
लेकिन माफ़ करना👈
वापस वही रिश्ता जीना नहीं होता।
हर माफ़ी एक दूरी को जन्म देती है
जहाँ आत्मसम्मान खुलकर साँस ले।
Stay away now✔️
तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।
न तुम्हारा ज़िक्र,न नाम, न कहानी।
तुमने जैसा भी किया—
मैंने सब छोड़ा है।अपनी राह चलो
मुझे भी अपनी राह पर चलने दो।
कुछ लोग माफ़ तो कर दिए जाते हैं,
पर दिल के घर में❤️
उन्हें दोबारा जगह नहीं दी जाती।🌷
-Yu Hi
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