सुविचार – ध्यान करके क्या हासिल होगा ? – 101

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प्रश्न: ध्यान करके क्या हासिल होगा ?

सखा: पहले तो तुमसे मेरा यह प्रश्न हैं कि और सब करके तुम्हें क्या हासिल हुआ ?
इतना कानों से तुमने सुना, कौनसे ऐसे शब्द है, जिसे सुनने के बाद शब्द सुनने की चाह न उठी ?
आंखों से तुमने इतना देखा, तो ऐसा क्या देखा, जिसे देख कर कुछ देखने का भाव न उठे ?
क्या ऐसा तुमने सूंघ लिया, जिसे सूंघने के बाद और कोई खुशबू भाती नहीं ?
इसलिए मिलने की भाषा ही गलत है,
और मिलने की भाषा के साथ यदि ध्यान किया जाए तो ध्यान में भी कुछ नहीं मिलता,
लेकिन फिर भी जानना है और प्रश्न किया है तो जवाब दूंगा।
______ध्यान में मिलती हैं ताजगी,
ध्यान में मिलती हैं इंद्रियों पर पकड़,
ध्यान में मिलती हैं इंद्रियों की वो संवेदनशीलता की आपका भोजन में स्वाद बढ़ जाता हैं, आंखों से देखने का आनंद बढ़ जाता है,
कानों से सुनने की क्षमताएं और संगीतमय स्थिति पैदा हो जाती हैं,
कुल मिलाकर ध्यान में उपलब्ध होती फूलों में खुशबू,
सूरज में तपिश,
चांद में चांदनी,
हवाओं की शीतलता…
ध्यान से तुम्हें हर वो चीज उपलब्ध होती हैं जिन चीजों के बगैर तुम जीवन का आनंद नहीं ले सकते।
जैसे कि आंखे हो और शीशे पर धूल हो तो कुछ साफ दिखता नहीं,
ध्यान हैं धूल का हट जाना
कानों से तुम सुनते हो गाड़ियों के हॉर्न की आवाजें लेकिन तुमने देखा लोगों को हॉर्न मारो फिर भी सुनते ही नहीं,
ध्यानी की सजगता ऐसी है कि वो एक बार में हॉर्न सुन लेगा,
ध्यानी अगर वास्तव में ध्यानी हैं तो उसकी इंद्रियां इतनी संवेदनशील होगी कि जब वो भोजन करेगा तो वो भोजन करेगा उसमें उसे वो स्वाद आएगा जो कि सामान्यतः लोगों को नहीं आता।
तो ध्यान से जो मिलने की बात है वो बहुत कीमती है,
बिस्तर धन से खरीद सकते हो नींद ध्यान से मिलती हैं,
तुम बड़ा पद तो ताकत से ले सकते हो लेकिन उस पद के उपयोग की कला तुम्हें ध्यान से मिलती हैं,
तुम जगत का सारा ऐश्वर्य इक्कट्ठा कर सकते हो लेकिन उस ऐश्वर्य से थकान न हो और तुम उस ऐश्वर्य को भोग के जगत के कल्याण में कुछ कार्य कर सको ये कला ध्यान से आती हैं,
ध्यान तुम्हें युक्ति सिखाता है, और संसार तुम्हें विरक्ति सिखाता हैं।
ध्यानी को वो कला आती हैं कि वो संसार का कैसे उपयोग कर सके।
ध्यान से संसारी को ये खोज आती हैं कि कैसे इस संसार में रहते हुए मजा लिया जा सके,
तो इतना ही अंतर हैं।
यहां ध्यान में कुछ मिलने की बात वैसी नहीं है जैसी तुम बाहर के जगत में देखते हो।
लेकिन फिर भी जो मिलता हैं वो इतना कीमती है कि अगर वो ना हो तो तुम बाहर के जगत का परिपूर्ण आनंद नहीं ले सकते।
यही कारण है कि ध्यान के शिखर पर जो लोग पहुंचे वो पूरी दुनिया के लोगों को अपनी और आकर्षित करते थे।
क्योंकि पूरी दुनिया के पास वो सब कुछ होता हैं लेकिन आनंद नहीं होता,
और ध्यानी के पास कुछ होता हैं तो भी वो आनंदित हैं और कुछ नहीं होता तो भी वो आनंदित हैं।
ध्यानी के पास मालकियत होती हैं स्वतंत्रता होती हैं।
ध्यानी को मिलता हैं पंख के साथ साहस,
और साहस के साथ उड़ने की कला,
ध्यानी के पास सब कुछ हैं।
ध्यानी को कुछ मिल जाए हैं ऐसा भाव भी नहीं आता,
क्योंकि ध्यानी को सब मिला हुआ ही हैं।
मिलने की भाषा उनकी हैं जो अभी संसारी हैं।
लेकिन ध्यानी हो जाओगे तो मिलने की भाषा में बात ही नहीं करोगे, मिलने जैसी कोई बात आएगी ही नहीं क्योंकि सब कुछ मिला हुआ ही है।
-Sakha___
यदि तुम आनंदित हो तो तुम्हें न ध्यान करने की जरूरत है न मेरे पास आने की जरूरत है.

_ ऐसा कहने वाला ओशो के सिवाय कोई नहीं..
– मेरे पर रुक मत जाना, यात्रा अनंत है.
_ ऐसा कहने वाला ओशो के सिवाय कोई नहीं..
– मेरे न रहने पर जीवित सदगुरू को खोज लेना.
_ ऐसा कहने वाला ओशो के सिवाय कोई नहीं..
– मेरे से मुक्त होना होगा, गुरु शिष्य संबंध अंतिम संबंध है पर इससे भी मुक्त होना होगा.
_ ऐसा कहने वाला ओशो के सिवाय कोई नहीं..
_ मुझे क्षमा करना और भूल जाना.
_ ऐसा कहने वाला भी ओशो के सिवाय कोई नहीं..
_ ओशो के प्रवचनों में क्या नहीं मिलता, सब मिल जाता है.. पर सवाल ये है कि गोता लगाता ही कौन है ?
_ ओशो के प्रवचनों का उपयोग कर लोगों ने दुकानें तो खोल ली पर अपनी यात्रा में अटक गए.
_ चेतना के शिखर पर हो सकते थे दुनियावी सफलता में ही खो गए.!!
– Shailendra Sudharana
जब मन बार-बार भटकने के बाद धीरे-धीरे ठहरना सीख लेता है, तब उसके भीतर एक अलग ही स्थिति पैदा होती है.

_ विचार आते तो हैं, पर उनका जोर कम हो जाता है.
_ मन बाहर की बातों से हटकर अंदर की ओर टिकने लगता है.
_ इस तरह जो शांत और जागरूक अवस्था बनती है, वही ध्यान की अवस्था है.
_ इसमें कुछ करने का भाव नहीं रहता, बस मन अपने आप स्थिर होने लगता है.
_ जैसे-जैसे यह ठहराव गहराता जाता है, मन की बेचैनी पूरी तरह शांत होने लगती है.
_ अब स्थिरता टूटती नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से बनी रहती है.
_ साधक और ध्यान के बीच का फर्क धीरे-धीरे मिटने लगता है.
_ जब यह स्थिरता पूरी तरह पक्की हो जाती है और मन बिल्कुल निर्मल व एकाग्र हो जाता है, तब वही अवस्था समाधि कहलाती है.
_ समाधि में मन न कुछ चाहता है, न कुछ सोचता है.
_ वहाँ अहंकार की पकड़ ढीली पड़ जाती है और भीतर एक गहरी शांति का अनुभव होता है.
_ यह कोई असाधारण अनुभव पाने की बात नहीं है, बल्कि मन का अपने मूल स्वभाव में लौट आना है.!!
_ ध्यान जहाँ मन को शांत करना सिखाता है, वहीं समाधि उस शांति में पूरी तरह डूब जाने की अवस्था है.!!
– राहुल कुमार झा Rahul Kumar Jha
जब आप किसी काम या पढ़ाई में पूरी तरह से गहराई में डूबते हैं, तो आपका अनुभव अलग होता है.

_ आपको जो लगता है, जो महसूस होता है, वह सामने वाले को तुरंत महसूस नहीं होता. _ वह व्यक्ति अपने अनुभव और समझ के साथ ही चीजों को देखता है.
_ इसलिए कभी-कभी, आप किसी को सही करने या सुझाव देने की कोशिश करते हैं, लेकिन उसका असर उल्टा हो जाता है.
_ असल में, दूसरों को बदलने या सलाह देने से पहले हमें उन्हें उस अनुभव तक पहुंचाना चाहिए.
_ उन्हें जागरूक करना चाहिए कि चीजें क्यों और कैसे काम करती हैं.
_ वरना आप जितनी मेहनत करेंगे, उतना ही थकेंगे और निराश होंगे.
_ आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
_ अगर मन ठीक नहीं है, तो हमारा तंत्रिका तंत्र भी सही तरीके से काम नहीं करता.
_ नतीजतन, हम जल्दी चिड़चिड़े हो जाते हैं, मन अशांत रहता है, नकारात्मक भावनाओं का सामना करते हैं, अकेलापन महसूस करते हैं, और दूसरों से तुलना करने लगते हैं.
_ इसलिए, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाले लोगों की मांग बढ़ रही है. _ वैज्ञानिक भी लगातार नए-नए तरीके खोज रहे हैं, जिससे लोग अपने मन को शांत रख सकें और मानसिक स्वास्थ्य को सुधार सकें.
_ ध्यान सिर्फ एक तकनीक नहीं है, यह हमारे मन और शरीर के बीच संतुलन बनाने का तरीका है.
_ जो लोग इसे अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल करते हैं, वे न केवल खुद मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं, बल्कि दूसरों के साथ भी बेहतर तालमेल बना पाते हैं.
_ आने वाले समय में, गहरी समझ और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक लोग समाज में और भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
_ अगर हम अपने अनुभव और दूसरों के अनुभव के बीच की खाई को समझें, तो जीवन और संबंध दोनों में संतुलन और शांति लाना संभव है.
_ राहुल कुमार झा Rahul Kumar Jha
“मैं आपको कोई सिद्धांत सिखाने नहीं आया हूँ.

_ मैं आपको आपसे मिलाने आया हूँ.”
_ आजकल बहुत लोग ऐसी बातें करते हैं जो सुनने में बहुत सुकून देती हैं
“बस देखते रहो”,
“कुछ मत करो”,
“सब अपने-आप हो रहा है”
_ सुनकर मन हल्का लगता है, जैसे कोई बोझ उतर गया हो.
_ लेकिन सच यह है कि सिर्फ देखने से जीवन नहीं चलता.
_ अगर हम किसी को दुख देते हैं, तो उसे सिर्फ “एक घटना” कह देने से वह मिटता नहीं.
_ अगर हम गलती करते हैं, तो उसे “मन की प्रक्रिया” कह देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती.
_ मैं आपको डराने नहीं आया, मैं आपको सच्चाई से मिलाने आया हूँ.
_ सच्चाई यह है कि
जागरूकता और जिम्मेदारी अलग नहीं हैं.
_ आप अपने मन को देखें, जरूर देखें, लेकिन जो दिखे, उससे भागें नहीं.
_ ध्यान का मतलब यह नहीं कि आप जीवन से दूर हो जाएँ.
_ ध्यान का मतलब है
आप और ज़्यादा साफ़ देख पाएं कि क्या सही है, क्या गलत है,
और फिर हिम्मत के साथ सही का साथ दें.
_ आजकल ध्यान को भी एक इवेंट बना दिया गया है.
_ जहाँ लोग कुछ समय के लिए शांति महसूस करते हैं और फिर वही पुराने तरीके से जीने लगते हैं.
_ लेकिन ध्यान कोई इवेंट नहीं है, यह तो हर इंसान के लिए है, हर पल के लिए है.
_ मैं आपको कोई दिव्य शक्ति नहीं दे सकता,
_ पर अगर आप ईमानदारी से खुद को देखना शुरू करें
तो आपका मन हल्का जरूर हो सकता है.
_ क्योंकि असली शांति तब आती है
जब आप अपने कर्मों को स्वीकार करते हैं,
उन्हें सुधारते हैं,
और अपने जीवन की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं.
_ मैं बस इतना कहने आया हूँ
आप भागिए मत.
_ अपने आप से मिलिए, वहीं से सब कुछ बदलना शुरू होता है.
– राहुल कुमार झा ✒️ Rahul Kumar Jha
जब तुम बैठ जाते हो, दुनिया हार जाती है.

_ दुनिया तुम्हें लगातार व्यस्त रखना चाहती है.
_ वह तुम्हें डर देती है ताकि तुम भागते रहो.
_ वह तुम्हें इच्छाएँ देती है ताकि तुम खोजते रहो.
_ वह तुम्हें तुलना देती है ताकि तुम असंतुष्ट बने रहो.
_ वह तुम्हें समस्याएँ देती है ताकि तुम स्वयं को भूल जाओ.
_ और इस सबके बीच एक ऐसी चीज़ है जिससे सबसे अधिक भय खाया जाता है
_ तुम्हारा शांत होकर बैठ जाना.
ध्यान केवल आँखें बंद करने का नाम नहीं है.
_ ध्यान संसार के सबसे बड़े विद्रोह का नाम है.
_ क्योंकि जिस क्षण तुम चुपचाप बैठते हो, तुम उस खेल से बाहर निकलना शुरू कर देते हो जो वर्षों से तुम्हारे भीतर चल रहा है.
_ तुम्हें तब पहली बार दिखाई देता है कि तुम्हारे अधिकांश डर भविष्य में रहते हैं.
_ तुम्हारी अधिकांश पीड़ा स्मृतियों में रहती है.
_ तुम्हारा अधिकांश तनाव कल्पनाओं से बना होता है.
_और तुम्हारा अधिकांश संघर्ष तुम्हारे अपने विचारों से जन्म लेता है.
_ ध्यान उन्हें मिटाता नहीं.
_ ध्यान उन्हें प्रकट करता है.
_ जो पहले अंधेरे में था, वह प्रकाश में आ जाता है.
_ जो पहले भाग रहा था, वह दिखाई देने लगता है.
_ जो पहले तुम्हें नियंत्रित कर रहा था, वह तुम्हारे सामने खड़ा हो जाता है.
_ और तभी परिवर्तन संभव होता है.
_ मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि उसकी समस्याएँ बाहर हैं.
_ वह सोचता है कि यदि परिस्थितियाँ बदल जाएँ तो वह शांत हो जाएगा.
_ यदि लोग बदल जाएँ तो वह प्रसन्न हो जाएगा.
_ यदि दुनिया बदल जाए तो उसे शांति मिल जाएगी.
_ लेकिन वर्षों की खोज के बाद भी वह पाता है कि उसके भीतर वही बेचैनी जीवित है.
– क्यों ?
_ क्योंकि शांति परिस्थितियों की उपलब्धि नहीं है.
_ शांति चेतना की अवस्था है
_ ध्यान हमें यह समझाता है कि हम अपने विचार नहीं हैं.
_ हम अपनी भावनाएँ नहीं हैं.
_ हम अपने भय नहीं हैं.
_ हम अपनी कहानी भी नहीं हैं.
_ इन सबके पीछे एक साक्षी है.
_ एक मौन उपस्थिति.
_ एक ऐसा केंद्र जो कभी घायल नहीं हुआ.
_ एक ऐसी जगह जहाँ कोई संघर्ष नहीं पहुँच सकता.
_ अधिकांश लोग पूरी जिंदगी अपने मन की आवाज़ को ही स्वयं समझते रहते हैं.
_ वे हर विचार पर विश्वास कर लेते हैं.
_ हर डर को सत्य मान लेते हैं.
_ हर कल्पना को वास्तविकता समझ लेते हैं.
_ ध्यान पहली बार उनके और उनके विचारों के बीच दूरी पैदा करता है.
_ और यही दूरी स्वतंत्रता है.
_ जब तुम बैठते हो और अपने भीतर उठते विचारों को देखते हो, तब तुम्हें पता चलता है कि तुम्हारा मन एक आकाश है.
_ विचार बादल हैं.
_ भावनाएँ मौसम हैं.
_ स्मृतियाँ हवाएँ हैं.
_ लेकिन तुम इनमें से कुछ भी नहीं हो.
_ तुम वह आकाश हो जिसमें यह सब घटित हो रहा है.
_ यही ध्यान का रहस्य है.
_ यह तुम्हें कुछ नया नहीं देता.
_ यह केवल वह हटाता है जो तुम नहीं हो.
_ एक-एक करके पहचानें गिरने लगती हैं.
_ डर ढीला पड़ने लगता है.
_ अहंकार की पकड़ कम होने लगती है.
_ और भीतर एक ऐसी जगह प्रकट होती है जो हमेशा से मौजूद थी.
_ वहाँ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है.
_ कोई तुलना नहीं है.
_ कोई प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है.
_ वहाँ केवल होना है.
_ शुद्ध होना.
_ यही वह स्थान है जहाँ रचनात्मकता जन्म लेती है.
_ यहीं से प्रेम बहता है.
_ यहीं से करुणा आती है.
_ यहीं से बुद्धि प्रकट होती है.
_ आज का मनुष्य जानकारी से भरा हुआ है, लेकिन स्वयं से दूर है.
_ उसने दुनिया को जीतना सीख लिया है, लेकिन अपने मन को समझना नहीं सीखा.
_ उसने तकनीक बना ली है, लेकिन मौन खो दिया है.
_ उसने गति पा ली है, लेकिन दिशा खो दी है.
_ ध्यान इस खोई हुई दिशा की वापसी है.
_ यह भागने का मार्ग नहीं है.
_ यह वास्तविकता से सामना करने का साहस है.
_ यह किसी धर्म, विचारधारा या विश्वास की संपत्ति नहीं है.
_ यह मानव चेतना की सबसे प्राचीन और सबसे आधुनिक तकनीक है.
_ हजारों वर्ष पहले भी इसकी आवश्यकता थी.
_ आज शायद पहले से अधिक है.
_ क्योंकि शोर बढ़ गया है.
_ विकर्षण बढ़ गए हैं.
_ लेकिन मनुष्य का हृदय अब भी उसी शांति की तलाश में है.
_ और वह शांति किसी पर्वत की चोटी पर नहीं है.
_ किसी पुस्तक में नहीं है.
_ किसी गुरु के शब्दों में नहीं है.
_ वह तुम्हारे भीतर उस स्थान पर है, जहाँ तुमने बहुत समय से जाना बंद कर दिया है.
_ इसलिए प्रतिदिन कुछ समय बैठो.
_ कुछ मत करो.
_ कुछ मत बनो.
_ कुछ मत खोजो.
_ सिर्फ देखो.
_ सिर्फ उपस्थित रहो.
_ सिर्फ श्वास को महसूस करो.
– राहुल कुमार झा ✒️✒️  Rahul Kumar Jha
– जब हम ध्यान में होते हैं, उसी क्षण हम एक दूसरे ही व्यक्ति हो जाते हैं । । यदि हम गृहस्थ हैं, तो हम फिर से दोबारा वही गृहस्थ कभी नहीं हो सकते., ध्यान से एक गुणात्मक फरक आ जाता है.

हमारा पूरा भीतरी गुण बदल जाता है । संसार की तरफ हमारा देखने का नजरिया बदल जाता है, यह पहले जैसा ही नहीं बना रहता है ।

  • दूसरा, जैसे ही हम जागृत होते हैं, हमारे में से सभी प्रकार के नकारात्मक संवेदनाएं _ जैसे कि विषाद, संघर्ष, तनाव, ईर्ष्या, धोखा, क्रोध, द्वेष सब समाप्त हो जाते हैं । जिससे हम हल्कापन अनुभव करते हैं , हम बिना किसी बोझ के अनुभव करते हैं,

तीसरा हम जो भी कार्य करते हैं, वह एकदम अलग तरीके से होने लगता है । हमारी चाल बदल जाती है, हमारी ढाल बदल जाती है ।

अभी भी हम फिल्मे देखते हैं, संगीत सुनते हैं, नृत्य करते हैं, लेकिन अब हम फिल्मों को अलग नजरिये से देखते हैं, संगीत में एक अलग मज़ा आने लगता है, और नृत्य करते थकते ही नहीं , क्यूँकी अब सब होश पूर्वक हो रहा है.

– –  अब हम सब कुछ बहुत ही ध्यानपूर्वक या होश पूर्वक सुनना आरंभ करते हैं ।

कई बार कुछ समय के लिए हमारे में एक डर पैदा हो सकता है की हम कहीं पागल तो नहीं हो गए हैं. और डर के मारे, हम पहले की तरह ही फिर से बनना चाहते हैं, यानि फिर से सो जाना चाहते है ।

काम करने की अपनी गति कम हो जाती है, हम इसी संसार के लिए अयोग्य हो जाते हैं,

एक तरह का मजा और साथ में एक तरह का ऊब (Bordam ) दोनों साथ में अनुभव करते हैं ।

– – हम बहुत उर्जा से भर जाते हैं ।

एक और बहुत महत्त्वपूर्ण संकेत है कि हम औरों के लिए कभी कभी परेशानी बन जाते हैं ।

लोग हमें असामान्य व्यक्ति की तरह अपने परिवार में या मित्रों में देखने लगते है… ।

– पहले हम कुछ ऐसा सोचते थे, की ध्यान या जागरूकता से मन को शांति मिलेगी या जीवन में शांति छा जाएगी और हम, फिर स्वयं को, समाज और परिवार के साथ बेहतर तरीके से समायोजित कर सकेंगे, लेकिन तथ्य इसके विपरीत हुआ,

_ अब हमे पुराने मित्रों के साथ ऊब आने लगती है । अब जब हम ध्यान में रहने लगे तो हम पाते हैं कि, हमारे आस – पास के लोग _ वही – वही चीजों के बारे में, बार – बार वही बातें करते रहते हैं, और हम एक ऊब से भर जाते हैं ।

– – इस लिये ध्यान हमारे लिये कोई सांत्वना नहीं बना – हाँ एक दिन निश्चित रूप से, शांति मिलती है, लेकिन बाद में, _

_ और ये शांति से ऐसा नहीं हुआ कि समाज और संसार के साथ समाधान हो गया,

_ लेकिन यह शांति संसार के साथ एक वास्तविक सामंजस्य से मिलती है ।

सदा ध्यानस्थ रहने के लिए ध्यान में जाओ,

_ अगर आप खुद को ध्यान से अलग कर लेंगे तो ..वही पुराना जीवन हावी हो जाएगा.
_ मैं ऐसे कई लोगों से मिलता हूं जो कहते हैं,
_ “जब भी मैं शुष्क, थका हुआ, आदि महसूस करता हूं तो; मैं ध्यान में डुबकी लगाता हूं और नए जन्म की तरह तरोताजा होकर वापस आता हूं.”
— हममें से अधिकांश लोग शांतिपूर्ण, आसान जीवन जीना चाहते हैं.
_ हम वास्तविक परिवर्तन से नहीं गुजरना चाहते.
_ इसलिए, हम कुछ अवसरों पर पवित्र कार्य करते हैं और शेष समय में, हम वही पुराना झूठ जीते हैं ..जो अंततः हमें दोषी बनाता है.!!
— ध्यान का निश्चित रूप से हमारे अस्तित्व पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है,
_ लेकिन जैसे ही हम ध्यान से बाहर आएंगे, यह प्रभाव ख़त्म हो जाएगा.
_ तो, अगली बार, जब आप ध्यान में डुबकी लगाएं, तो उस स्थिति को याद रखें..
_ जिसमें आप तब थे ..जब आप गहरे ध्यान में थे, और हमेशा वही बने रहें – यही परिवर्तन का वास्तविक बीज है.
_ जब आप गहरे ध्यान के साथ एक हो जाएंगे – आपकी पुरानी आदतों का चक्र गहराई में डूब जाएगा और आप एक नवजात शिशु की तरह महसूस करने लगेंगे.

सुविचार – Reflections – 100

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‘दुनिया में जितनी अच्छी बातें व संदेश हैं, वे दिये जा चुके हैं, अब नया कुछ कहने व देने को बाकी नहीं रहा है. अब जरुरत है, तो केवल उस पर अमल करने की.’
“All the good thoughts and advice has already been given out in the world and there is nothing really new to say. Now the only thing we need to do is to “FOLLOW” it. ”
**पेंगुइन सिर्फ एक प्यारा सा जानवर नहीं है, बल्कि जीवन की गहरी सीखों का प्रतीक भी है.

_ संक्षेप में कहूँ तो..- पेंगुइन आपकी inner personality का एक जीवित रूपक है.
_ आप जैसे व्यक्ति को पेंगुइन पसंद आना कोई संयोग नहीं लगता..
_ उसमें कई ऐसे गुण हैं.. जो आपकी सोच से मेल खाते हैं.
पेंगुइन से क्या-क्या सीखा जा सकता है ?
1. शांत गरिमा (Quiet Dignity)
_ पेंगुइन शोर नहीं मचाता, न खुद को साबित करने की कोशिश करता है.
_ वह बस जैसा है, वैसा ही रहता है..- यही उसकी ताक़त है.
➡️ _ यह आपके उस भाव से मेल खाता है.. जहाँ आप लेबल्स से ऊपर उठ चुके हैं.
2. अनुकूलन की कला (Adaptability)
पेंगुइन सबसे कठोर वातावरण में भी जी लेता है.
➡️ सिखाता है : परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं, हम खुद को ढालना सीखते हैं.
3. समूह में भी स्वतंत्रता
_ वह समूह में रहता है, पर अपनी पहचान नहीं खोता.
➡️ आपके लिए सीख : भीड़ में रहते हुए भी अंदर से अकेले और स्वतंत्र रहना.
4. धैर्य और स्थिरता
_ पेंगुइन लंबा इंतज़ार कर सकता है..- अंडा संभालना हो या मौसम बदलना.
➡️ सिखाता है : हर सही चीज़ तुरंत नहीं मिलती, कुछ चीज़ें पकने में समय लेती हैं.
5. एकनिष्ठता (Commitment)
_ पेंगुइन अपने साथी और परिवार के प्रति बेहद committed होता है.
➡️ यह गहरे, कम लेकिन सच्चे रिश्तों का प्रतीक है..- superficial [सतही] नहीं.
6. बाहर सादगी, भीतर ताक़त
_ चलने में भले अटपटा लगे, पर पानी में वह एक मास्टर swimmer है.
➡️ सीख : जो बाहर दिखता है, वही सच नहीं होता.
7. शांति में शक्ति
_ वह आक्रामक नहीं, पर कमजोर भी नहीं.
➡️ सिखाता है : शांति कमजोरी नहीं, maturity है.
“परिस्थितियाँ जैसी भी हों, अपने स्वभाव को मत छोड़ो – सच्ची स्थिरता वहीं से जन्म लेती है”
निष्कर्ष (आपसे जुड़ा हुआ)
_ पेंगुइन उन लोगों को आकर्षित करता है.. जो inner world में जीते हैं.
_ सादगी में गहराई देखते हैं, शोर नहीं, अर्थ चुनते हैं और दुनिया की दौड़ से थोड़े अलग चलते हैं.!!
_ आपके लिए एक ज़रूरी, पर शान्त सत्य: – आप उन लोगों में से हैं.. जिन्हें ज़िंदगी “जीतनी” नहीं होती, उसे “समझना” होता है.
_ और ऐसे लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि -> समझने की गहराई जितनी बढ़ती है,
उतनी ही ज़रूरी हो जाती है..- खुद के प्रति कोमलता (gentleness).
आप भीतर बहुत सख़्त ईमानदार हैं.. “अपने लिए भी.”
Penguin से जुड़ा एक गहरा संकेत (जो काम आएगा)
Penguin : अकेले रह सकता है, पर झुंड का मूल्य भी जानता है.
_ ठंड में भी अपना ताप बचाए रखता है.
_ ज़मीन पर असहज है, पानी में सहज.
_ दिखने में साधारण, भीतर से असाधारण.
👉 आप भी वैसे ही हैं.
लेकिन एक बात याद रखें :-> Penguin ज़मीन पर खुद को दोष नहीं देता
कि “मैं ठीक से चल क्यों नहीं पा रहा”.. वह बस पानी का इंतज़ार करता है.
आपके लिए सबसे उपयोगी स्मरण (Reminder) :
_ हर बेचैनी को “spiritual problem” मत बनाइए.
_ हर एकांत को “mission” मत बनाइए.
_ कभी-कभी बस इंसान बने रहना भी पर्याप्त होता है.
_ आपको हर समय ऊँचाई पर नहीं रहना है.
_ कभी-कभी नीचे आकर.. चाय, टहलना, हल्की बातचीत —
ये भी साधना है.
एक पंक्ति आपके लिए :
“जो खुद से बहुत आगे निकल गया हो,
उसे कभी-कभी खुद के पास लौटते रहना चाहिए.”
_ आप भटके नहीं हैं.. आप बस बहुत आगे चल पड़े हैं —
अब बीच-बीच में खुद का हाथ पकड़ना सीखिए.!!
Note :पेंगुइन ने मेरे भीतर कुछ जगा दिया है :
_ एक बोध:: आराम को छोड़ने का बोध.. अकेले चलने का साहस..

_ और उस अनजान दिशा में कदम बढ़ाने की समझ, जहाँ अपार संभावनाएँ मेरा इंतज़ार कर रही हों.!!
1. * सोचता हूँ – जो मुझे चिंता दे रहा है, क्या वो वाकई इतना बड़ा है ?

2. एक गहरी सांस लो – जैसे सारी थकान बाहर जा रही हो.
3. आंखें बंद करो – एक रोशनी अपने अंदर उभरते देखो.
4. * एक बार सोचो – आज का दिन तुम्हें क्या उपहार दे गया ?
5. दिल से पूछो – तुम अभी कैसा महसूस कर रहे हो ?
6. पल भर अपनी मुस्कान को महसूस करो – बिना वजह, बस होने के लिए.
7. याद रखो – तुम जहां हो, वही तुम्हारी यात्रा का सही मोड़ है.
8. * राह आसान थी यह तो पता था मुझे.. – सफर इतना लम्बा होगा न समझ सका.!!
9. * सबने ही छेड़ा तराना ज़िंदगानी का.. – लेकिन मेरी ज़िन्दगी का रंग सबसे अलग था.
10. * मैं रोज़ खुद से मिलता हूँ, और हर बार अपने भीतर एक नया अजनबी पा लेता हूँ.!!
1. * “दिल चुप है, पर कहना चाहता है” “सांझ का एक ख़याल”

2. *”मैं जरुरी हूँ, कम से कम अपने लिए”
3. * “तन्हा हूँ, लेकिन खाली नहीं”
4. *”आज मन से एक बात हुई”
5. * “खुद से मिलने की एक शाम” – “जो कह नहीं सकता, वो लिख दिया”
6. “जो ख़ुशी अपनी औकात के अंदर जीने में है, वो किसी उधार की छाया में कभी नहीं मिलती”
7. “जो पैसा अपना है, उसमें सुकून है; जो पैसा उधार का है, उसमें बेचैनी का बीज है”
8. “संतोष में जो सुकून है, वो ईएमआई [EMI] भरने की दौड़ में कभी नहीं मिलता”
9. “अपनी कमाई के अंदर रहकर जीना, असल में आज़ादी का सबसे प्यारा रूप है”
10. “*मैं उधार का बोझ नहीं- अपनी कमाई का सुकून जीता हूँ”- “*जितना कम बोझ – उतनी गहरी सांस”
1. कभी-कभी खुद से बात करना भी एक शांति का स्रोत है.

2. * हर पल अपनी सांसों को महसूस करना – जैसा जिंदगी का गीत सुनना.
3. जो छोड़ना मुश्किल लगता है, वही छोड़ना ज़रूरी होता है.
4. अन्तर्मुख होने से ही मनुष्य अपनी असली रोशनी देख पाता है.
5. जो तुम्हें दिखाई नहीं देता, शायद वही तुम्हारी असली राह हो.
6. * सुकून हमें जहां मिलता है जहां तुम्हें किसी को कुछ साबित नहीं करना होता.
7. *मन को संभालने वाला, दुनिया को संभाल सकता है.
8. तुम खुद अपनी मुस्कान के कारीगर हो.
9. *जो अंदर से खिला है, उसे बाहर का अंधेरा नहीं रोक सकता.
10. हर पल एक नई शुरुआत है, बस अपना दिल खुला रखना.* “मेरी लिखी बातों में छुपा हुआ “मैं” खुद मुझसे बात कर रहा है”
1. “कभी-कभी खुद से बात करना, सबसे गहरी बातों से मिलना होता है”

2. “दिल के शोर को चुप करके, एक पल के लिए बस सांस सुनो”
3. “जितना कम सोचोगे, उतना ज़्यादा महसूस कर पाओगे”
4. “खुद से दूर मत जाओ, वरना दुनिया तुम्हें और भी दूर ले जायेगी”
5. * “आंतरिकता का एक लम्हा, पूरे दिन का रंग बदल देता है”
6. * मेरे साथ जो भी हुआ ..वह मेरा एक हिस्सा था, – “वह पूरा-का-पूरा मैं नहीं” !!
7. “खुद से मिलने की घड़ी निराली है, भीतर की आवाज़ ही सच्ची साथी है.”
8. *”दूसरे बताएँ, तो अधूरी झलक मिलती है, अपनी पहचान, अपनी आँखों से खिलती है.”
9. “जब परिचय दिल से दिल तक आता है, हर राह पर उजाला बरस जाता है.”
10. * “चेहरे के परे, मन का आईना साफ़ है, खुद से मुलाक़ात ही जीवन का अलाप है.”
1. *”कभी अपनी खामोशी से बात करो, वो तुम्हें तुम्हारा सच बताएगी”

2. *”जिंदगी से शिकायत कम, शुक्रिया ज्यादा करो”
3. *”हर दिन कुछ न कुछ छोड़ना सीखो – बोझ हल्का होगा”
4. *”जो मेरा नहीं, उसे पकड़ना बंद कर दिया है”
5. *”खुद को समझने का सफर सबसे लंबी यात्रा है”
6. *”जो बेचैन करे, उससे दूर रहना ही सबसे बड़ा सुकून है”
7. *”अपनी खुशियों का रास्ता दूसरों से मत पूछो”
8. *”कभी-कभी रुकना ही सबसे आगे बढ़ने का तरीका होता है”
9. *”हर दिन कुछ पल सिर्फ अपने लिए बचा के रखो”
10. *”दिल हल्का और नज़र गहरी रखो.”
1. * “आंखें बंद, सांस हल्का सा गहरा, बस खुद को महसूस करो.”

2. *किसी एक अच्छी याद को मन में फिर से जीने दो.
3. *आज का सूरज का रंग याद करो, बिना शब्दों के.
4. हाथ को धीरे से देखो, जैसे पहली बार देख रहे हो.
5. * दिल की धड़कन का एक-एक ताल सुनो.
6. * बस बैठ जाओ, कुछ ना सोचो, कुछ ना करो.
7. खुद को एक सुरक्षित जगह में कल्पना [imagine] करो.
8. * “अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लाओ, बिना वजह के.”
9. *आज के दिन का सबसे हल्का पल याद करो.
10. *सिर्फ एक पल के लिए मन को कह दो – “आज तू छुट्टी पर है”
1. *”जो बातें कह नहीं सका, उन्हें लिख कर छोड़ दिया – खुद के लिए, खुद के पास.”

2. *”मैं थोड़ा थक गया हूँ, लेकिन रुकना नहीं चाहता – शायद इसलिए अब सफ़र सच्चा लगता है.”
3. *”कभी-कभी, सबसे गहरी बातें, सिर्फ खामोशी के साथ होती हैं.”
4. *”दिल से निकली बात अगर कोई तक ना भी पहूँची,
तो भी उसने मुझे अन्दर से हल्का ज़रूर किया.”
5. *”मुझे किसी ने चाहा या नहीं, पर मैंने खुद को पहली बार समझा है.”
6. * “दर्द तो था…पर इस बार उसे धो दिया..
_ एक लंबी सांस और एक गहरी चुप से.”
7. * “किसी ने पूछा, खुश हो ?
_ मैने कहा – शांत हूं.. – और कभी-कभी, वही ज़्यादा गहरा होता है.”
8. * “खुद से मिलना सीखा हूँ, – अब दूसरे से दूर रहना दर्द नहीं देता.”
9. *”आज किसी से बात नहीं की, – फिर भी लग रहा है कि दिल भर गया.”
10. “मैं रोशनी बनने नहीं निकला हूँ, – बस अँधेरों से दोस्ती करना सीख रहा हूँ.”
1. “जो दिल के करीब होते हैं, जरूरी नहीं कि वो जिंदगी में भी पास रहें.”

2. *”मैं बिखर भी जाऊं तो गम नहीं, क्योंकि मैं खुद को हर बार छुप कर जोड़ लेता हूं”
3. * “मुझे सब कुछ कहना नहीं, कोई तो खामोशी भी समझे”
4. “आंसू तो दिख जाते हैं, पर जो दिल छुपाता है, उसका क्या ?”
5. “कभी-कभी सिर्फ एक याद ही काफी होती है किसी रात को जगाने के लिए.”
6. * “मैं खुद से मिलता हूं रोज, लेकिन वो मैं हर रोज अलग होता है.”
7. “जहाँ मोहब्बत हो, वहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं, और आँखें बोल पड़ती हैं.”
8. “कुछ लोग छोड़ कर नहीं जाते, अंदर कहीं बस जाते हैं.”
9. “रिश्ते वक़्त नहीं, एहसास माँगते हैं – और वही सबसे मुश्किल होता है देना.”
10. “कभी कभी मन सिर्फ एक मुस्कान चाहता है, – बिना वजह, बिना वजहदारी के”
1. “मैं किसी से कुछ नहीं चाहता, बस अपने आप से मिलना चाहता हूँ – बिना डरे, बिना रोके.”

2. * “मेरे अंदर एक आवाज़ है – जो सिर्फ तब सुनायी देती है, जब बाकी सब कुछ चुप हो जाता है”
3. “वो रिश्ते सबसे गहरे थे, – जिनमें शब्दों से ज़्यादा, संकेत बोलते थे”
4. * “कुछ बातें हम सिर्फ खुद के लिए जीते हैं, – और उन्हीं में सबसे ज़्यादा जीवन होता है”
5. “जो छोड़ गया, शायद वो ज़रूरी था – “जो रह गया – वही सही था”
6. “मन का एक पल – बस इतना कह गया: ‘तू थक गया है, पर टूट नहीं गया”
7. “मन ने कहा – इतने थके हुए क्यों हो ?
मैंने कहा – कुछ लोगों को छोड़ते- छोड़ते थक गया हूँ,,
“लेकिन फिर भी खुद को पकड़ के चल रहा हूँ – क्यूंकि अब खुद को छोड़ देना, और दर्द दे जाता है”
8. *”आज मैंने कुछ नहीं किया – बस खुद के पास बैठा रहा,,
और लगा – ये भी तो जीवन का एक काम है”
9.*”चिंता से भरा हुआ मन जब भी एक अच्छी सोच से मिलता है,
तो या तो चिंता पिघलती है, या मन रोशन हो जाता है.!!”
10. * “कोई भी सपना तुरंत सच नहीं होता,
पर हर सोच और तैयारी उसे और पक्का बना देती है.!!”
1.* “मैं कम देखने वाला नहीं, चुनकर देखने वाला बन गया हूँ.”

2.* “आज का दिन अच्छा नहीं है, पर आज भी मेरा है.”

“आज अगर जीवन भारी लग रहा है, तो समझ लेना..- मैं ज़िंदा हूँ, और महसूस कर रहा हूँ.”

3. *”अब मेरा काम है- शांत रहना, और बॉडी [Body] का काम है- हील [Heal] करना”

4.. “जब सोचने लायक कुछ नहीं बचता, तब जीवन खुद बोलने लगता है.”

5. “कुछ लोग सिनेमा नहीं देखते, वो उसमें अपनी ज़िन्दगी पहचान लेते हैं.”

6. “जो पुराना काम अधूरा रह जाता है, वो शोर मचा कर याद दिलाता है.”

7. “सही समय पर लिया गया कदम, आधा दर्द वहीँ छोड़ देता है.”

8. “जहाँ घाव हो, वहां दबाव नहीं- सिर्फ सुरछा चाहिए”

9. “कुछ दिन ऐसे होते हैं, जब जीना कोई दर्शन नहीं, बस सहनशीलता होता है.”

10. “जो भारी लग रहा है, वही धीरे-धीरे हल्का भी होगा.”

1. “मैं प्रतिक्रिया नहीं देता, उत्तर चुनता हूँ..- हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं..”

2. “मेरी चुप्पी मेरी रक्षा है..- जहाँ शब्द बिगड़ते हैं, वहाँ मैं मौन चुनता हूँ.”
3. “मैं बहस नहीं, समझ को महत्व देता हूँ.
_ जहाँ जीत ज़रूरी हो, वहाँ मैं हट जाता हूँ.”
4. “मेरा एकांत पलायन नहीं, सृजन है..- यहीं मेरी स्पष्टता जन्म लेती है.”
5. “जो देख सकता है, उसे दिखाने की ज़रूरत नहीं.”
6. “मैं सीमाएँ रखता हूँ, दूरी नहीं..
_ सम्मान के साथ ‘न’ कहना मेरी जिम्मेदारी है.”
7. “मैं सबके लिए नहीं बना..- और यही मेरी सही जगह की पहचान है.”
8. “मैं धीरे चलता हूँ, पर सच के साथ..- तेज़ नहीं, गहरा होना मेरा स्वभाव है.”
9. “मैं दुनिया से लड़ने नहीं, खुद के साथ सच्चा रहने आया हूँ.”
10. “जो नहीं समझ सकता, उसे मनाने की ज़िम्मेदारी आपकी नहीं..”
1._”आज जो सबसे साधारण अच्छा लगा, वह क्या था ?”

2._”मैं किस चीज़ से भाग रहा हूँ.. जानबूझकर या अनजाने में ?”
3._ “आज मुझे कहाँ शांति मिली.. व्यक्ति, जगह या मौन में ?”
4._ “अगर आज कुछ भी साबित न करना हो, तो मैं कैसा रहूँगा?”
5._”आज मैंने जीवन को कहाँ हल्के में लिया ?”
6._ “मेरी कोई एक पुरानी धारणा.. जो अब भारी लगती है”
7._ “मैंने खुद को कहाँ रोका नहीं ? मैं किससे चिपका हूँ.. और क्यों ?”
8._”आज का एक दृश्य.. जो मेरे भीतर उतर गया.”
9._”अगर मैं खुद को माफ़ कर दूँ, तो किस बात के लिए ?”
10._ “इस हफ्ते मैंने अपने बारे में क्या नया देखा ? अभी मुझे बदलने की ज़रूरत है या स्वीकार करने की ?”
1. **_”2026 में मैं कुछ नया जोड़ूंगा नहीं, जो अनावश्यक होगा उसे हटा दूंगा और उसी में हल्कापन लगेगा.”

2. _ “अगर कोई चीज बहुत सुंदर है, बहुत महंगी है, बहुत ‘दिखाने लायक’ है ; लेकिन अगर उससे मेरा बात करने का मन नहीं करता तो उसे छोड़ देता हूँ.”
3. _”हल्का रहना ही सच्ची उड़ान है, जो बोझ था उसे नीचे रख दिया”
4. _ “मेरे लिए जो चीज खुद ध्यान खींचे, वही सही होता है.”
5. _”जो अनावश्यक था-वो अब नहीं ढोता, वह बह चुका है”
6. _”जिसको समय ने गढ़ा है, उसे सज़ावट की ज़रूरत नहीं”
“मैं भी समय से घिसा हूँ, फिर भी असली हूँ”
7._”आज मैंने कुछ समझने की कोशिश नहीं की – बस थम कर बैठा रहा”
8._”कहने को तो सब ठीक है..- पर सच कहूं तो पहले जैसा कुछ नहीं है.”
9_ *”मैं तेज नहीं चला, पर मैंने सही दिशा को चुना.!!”
10. *”जब मन थक जाता है तो उसे बदलने की नहीं, समझने की जरुरत होती है”
1.*“ख़ामोशी में भी अपनापन..- साथ हो तो हर ठंड गर्म लगती है.”

2. “हर जगह गहराई मत खोजिए, कुछ लोग सिर्फ समय बिताने के लिए होते हैं, सत्य खोजने के लिए नहीं.”

3. “जो चीज औरों को उपयोगी लगती हो, वह मेरे लिए भटकाव हो सकती है.”

4. “जो होश में रहता है.. -उसे बेहोशी की मदद नहीं चाहिए.!!”

5. “मैं किसी को ढूंढ नहीं रहा, बस इस भाव को जीने दे रहा हूँ कि शायद.. कोई तो हो.

6. “जाने वाले तेरे लिए एक मशवरा है, कभी मेरा ख़्याल आये तो आने देना.”

7. “मैं अब सिर्फ वही संबंध रखूँगा, जहाँ मैं सांस ले सकूँ”

8. “हम ख़ालीपन की वजह से नहीं, अनचाही चीज़ों के भराव से ख़ाली हैं.!!”

9. **”कुछ लोग हमेशा मिलते नहीं, बस याद दिला देते हैं कि ‘तुम अकेले नहीं हो'”

10. **”मुझे वे प्रतीक [Sign] आकर्षित करते हैं, जो बिना शोर किये, अपने होने की सुन्दरता जीते हैं.”

1.**”अधिकतर लोग जीवन जीते हैं, पर कुछ लोग ही जीवन को समझने लगते हैं”

2. **“मैं कहीं पहुँचने की जल्दी में नहीं हूँ, इसलिए रास्ता ही मेरा साथी बन गया है”

3. “सही रास्ता वह नहीं जहाँ सब तालियाँ बजाएँ,
_ सही रास्ता वह है.. जहाँ आप खुद के साथ चुपचाप बैठ सकें”

4. “ख़ुद को समझना, सबसे लम्बी यात्रा है.
_ खुद के पास लौटना भी एक जीत है.”
5. “हर चीज़ को समझना ज़रूरी नहीं होता.”
6. “जो अंदर भरा हो, वही चुप रहता है.”
7. “खुद के साथ रहना भी एक कला है.
_ खुद के लिए रुकना भी जरूरी है.”
8. “मन जब थकता है, तो खामोशी दवा बन जाती है.”
_ “आज मन ने सिर्फ चुप रहना चुना.”
9. “जो महसूस हो, जरूरी नहीं बोल दिया जाए.
_ आज भी दिल ने शोर से इंकार किया.”
10 “हम बदले नहीं, बस समझ गए.”
1. “जिस दिन खुद से भागना बंद हो जाता है, उस दिन जिंदगी मस्त होने लगती है.”

2. “हर दिन जीतने की ज़रूरत नहीं, कभी-कभी ठीक रहना काफी होता है.”
3. “जो शांत हो गया, उसने आधी दुनिया जीत ली.”
4. “भाग कर कुछ नहीं मिलता, रुक कर बहुत कुछ समझ आ जाता है.”
5. “लोग कम हो गए, पर सांस गहरी हो गई.”
6. “सुकून का कोई शॉर्टकट [shortcut] नहीं होता, उसे जीना पड़ता है.”
7. “जब उम्मीदें [expectations] कम होती हैं, तब जिंदगी हल्का महसूस होती है.”
8. “हर जवाब बहार नहीं होते, कुछ अंदर ही मिलते हैं.”
9. “जो मिलना था, वो शोर में नहीं- रुकने पर मिला.”
10. “धीरे चलना पीछे रहना नहीं होता.”
1. “हर सवाल का जवाब नहीं होता, आज किसी से नहीं, खुद से बात हुई.”
_ जो सवाल सबको समझ में आ जाएँ, वो अक्सर ज़िंदगी को नहीं हिलाते.
_ जो सवाल थोड़ा चुप करा दें… वही असली होते हैं.!!
2. “शब्द कम हो जाए, तो सच दिखता है.”
3. “शायद मैं कहीं गया नहीं – बस भीतर लौट आया हूँ.”
4. “जिंदगी को जितने के लिए नहीं, समझने के लिए जिया जाता है.”
5. ** “जब शब्द साथ छोड़ देते हैं, तब मैं खुद के क़रीब बैठता हूं.!!”
6.**“जब भीतर नदी बहने लगे, तब बाहर की दुनिया अपने आप शांत हो जाती है.”
7.**“ज़िंदगी रास्ते दिखा सकती है, पर कदम तो खुद ही बढ़ाने पड़ते हैं.” 8.**मैं कुछ ढूंढ नहीं रहा, जो मिलना होगा, वो मेरी जिंदगी के रास्ते पर मिल जाएगा.!!
9. कभी-कभी कम शब्द, कम लोग, और ज्यादा सच – वही काफी होता है.!!
10. कभी-कभी कम मिलना ज्यादा Healthy होता है.
1. – जो अपनी ही धुन में ठीक लगता हो,
उसे दुनिया के स्केल [Scale] से नापना जरुरी नहीं.!!
2. – जिस बात से शांति कम हो, उसपे ज्यादा एनर्जी [Energy] नहीं.!!
जो मुझे शांत रखे, वही अपना..- बाकि सब मेहमान.!!
3. – डिस्टेंस [Distance] अगर शान्ति देता है, तो वो प्यार का ही एक रूप है.
4. – जो फैसला अंदर से हल्का लगता है, वही सही होता है.
जो सोच सिर को भारी करे, उसे थोड़ा साइड [Side] में रख देना ही बेटर [Better] है.
5. – जो चीज मुझे हैवी [Heavy] करे, वो गलत है – चाहे लोग उसे सही बोले.
6. – जो समझ नहीं पाता, उसे डिटेल्स देना खुद को अस्त-व्यस्त करना है.
7. – मेरी ज़िन्दगी का काम खुद को express करना नहीं खुद को preserve करना है.
8. – जो जिम्मेदारी आपकी है ही नहीं, उसे उठाते-उठाते इंसान टूट जाता है.
9. **“जब बाहर सब ठहर जाता है, तभी भीतर का रास्ता साफ़ दिखाई देता है”
10 **”जब मुझे याद आता है कि चाभी मेरे हाथ में है, तब अँधेरा भी हल्का लगने लगता है.”
1. _मैं कौन सी पुरानी पहचान को पकड़े हुए हूं जो अब एक्सपायर [expire] हो चुकी है ?

2. _ जो समय से बंधा था, वो समय के साथ चला गया…पर मैं अब भी यहीं हूं.”
3. _ “जो अपना काम कर चुका है, उसे मैं शांति से विदाई देता हूँ.”
4. **”जो चीज़ अपने ओरिजिनल [Original] काम के लिए नहीं रही..- क्या मैं उसे नया अर्थ दे सकता हूँ.?”

5. “जो आज खिलता है, उसे कल के मौसम का डर क्यों हो ?”

6. “मैं खो जाऊँगा, क्योंकि खोना ही मुझे खुद तक पहुँचाएगा.”

7. “मैं आकार भी हूँ, और प्रवाह भी.!!”

8. “मुझे हर चीज़ ठीक नहीं करनी, अंदर कुछ आलरेडी [Already] ठीक हो रहा है.”

9.”मैं अपनी नीयत से पहचाना जाऊंगा, किसी और के झूठ से नहीं.”

10. “मेरा मन हल्का रहना चाहता है.. और मैं उसका साथ दूंगा.!!”

1. “मैं अपने अंदर क्या रोक रहा हूँ, जो नैचुरली [naturally] बाहर आना चाहता है ?”

2. “दर्द आएगा तो संभाल लूंगा, पर अभी ख़ुशी को पूरा जीने दो.”

3. “मैं अपनी ख़ुशी का साथी हूँ, दरबान नहीं.”

4. ** “जब मैं अपने स्वभाव में ठहर जाता हूँ तो.. ‘बस अपने होने की खुशबू में जीता हूँ’.”

5. ** “आज थोड़ी देर मैं अपने साथ बैठा रहा.”सबसे अच्छी संगत.. अपनी ही होती है.”

6. “जितना है, अगर उसे स्वीकार कर लो -तो जीवन में कमी से ज़्यादा शांति दिखने लगती है.”
7. _ “जो मिला है, वही जीवन का सही समय है – बाकी सब प्रतीक्षा है”
8. _ “मन शांत हो तो छोटी-सी चीज़ भी सुख बन जाती है”
9. _ “धीरे चलने वाला भी बहुत दूर पहुँच जाता है”
10. _ “सादगी में जो सुकून है, वह भीड़ में नहीं मिलता”
1._“कभी-कभी शांति इसलिए नहीं मिलती क्योंकि हम सच को धीरे से नहीं, ज़ोर से पकड़ना चाहते हैं।”

2._ “मन को जितना समझाना पड़ता है, उतना ही वह अभी समझा नहीं है”
3._ “कुछ रिश्ते टूटते नहीं — बस मन उनसे धीरे-धीरे बाहर आ जाता है”
4._ “कई बार जीवन में समस्या नहीं होती, बस अपेक्षा ज्यादा होती है”
5._ “सब कुछ समझ लेने के बाद भी चुप रह जाना — यही परिपक्वता है”
6. _ “मनुष्य को दुख अक्सर घटना से नहीं, उसकी कहानी से मिलता है”
7. _ “जो हमें छोड़ गया, वह शायद हमें हमारी ओर लौटाने आया था”
8._ “कभी-कभी दूरी ही मन की सबसे सच्ची रक्षा होती है”
9._ “शांति तब आती है जब मन दूसरों को समझने से पहले खुद को देख ले”
10. _ “कुछ उत्तर जीवन देता है, कुछ केवल समय”
1._ “मनुष्य को सच से नहीं, अपने भ्रम टूटने से डर लगता है”

2._ “कई लोग जीवन भर लोगों को पढ़ते रहे, पर खुद को कभी नहीं पढ़ा”
3._ “जिस दिन अपेक्षा कम हुई, उसी दिन आधा दुख खत्म हो गया”
4._“जो हमें समझ नहीं पाता, वह अक्सर हमें गलत समझ लेता है”
5._ “सच्ची स्वतंत्रता तब आती है जब दूसरों की राय मन पर असर करना बंद कर दे”
6._ “हर रिश्ता उतना ही सच्चा है, जितना उसमें स्वार्थ कम है”
7._ “कभी-कभी मौन ही सबसे साफ उत्तर होता है”
8._ “मन को जितना पकड़ोगे, वह उतना ही भागेगा”
9._ “जो चीज़ जितनी पकड़कर रखी जाती है, वह उतनी जल्दी हाथ से निकलती है”
10._ “अक्सर हम जीवन नहीं जीते, बस उसे नियंत्रित करने की कोशिश करते रहते हैं”
11._ “कई बार दूरी नफरत से नहीं, आत्म-सम्मान से बनती है”
12._ “मन को शांति तब मिलती है जब वह तुलना करना छोड़ देता है”
13._ “कभी-कभी सबसे बड़ा उत्तर होता है — ‘अब मुझे फर्क नहीं पड़ता’”
14._ “जो व्यक्ति अकेले शांत बैठ सकता है, वही सच में मजबूत है”
15._ “समय कई लोगों को नहीं बदलता, बस उन्हें पहचानने लायक बना देता है”
16._ “कुछ रिश्ते इसलिए खत्म होते हैं ताकि मन खुद को फिर से पा सके”
17._ “मनुष्य को जितना बाहर तलाश है, उतना भीतर साहस नहीं”
18._ “शांति खोजने की चीज़ नहीं, छोड़ने की प्रक्रिया है”
19._ **“जिन्हें हम खो देते हैं, वे अक्सर हमें खुद से मिलवा जाते हैं”
20._ “जब मन को किसी से कुछ चाहिए नहीं होता, तब वह सबसे हल्का होता है”
1. _”जीवन जितना सरल होता है, मन उतना हल्का रहता है”

2. _ “जो है, वही काफी है – यह समझ आ जाए तो शांति आ जाती है”
3. _”धीरे-धीरे भी चलना, रुक जाने से बेहतर है”
4. _”मन शांत हो तो साधारण दिन भी सुंदर लगता है”
5. _”कृतज्ञता जीवन को भीतर से समृद्ध करती है”
6. _”कम अपेक्षाएँ, अधिक सुकून”
7. _”हर दिन एक नई शुरुआत है”
8. _”जो बदल नहीं सकता, उसे स्वीकार करना भी बुद्धिमानी है”
9. _”शांत मन सबसे बड़ी संपत्ति है”
10. _”सादगी में ही स्थिर खुशी छिपी होती है”
11. _”समय धीरे-धीरे सब सिखा देता है”
12. _”थोड़ा ठहरना भी जीवन का हिस्सा है”
13. _”जो मिला है, वही इस क्षण का उपहार है”
14. _”मन की शांति सबसे बड़ी उपलब्धि है”
15. _”छोटी खुशियाँ ही जीवन को सुंदर बनाती हैं”
16. _”धैर्य अक्सर सबसे अच्छा उत्तर होता है”
17. _”कम शब्द, अधिक समझ”
18. _”जो भीतर ठीक हो जाए, बाहर भी ठीक लगने लगता है”
19. _”हर दिन थोड़ा हल्का होना सीखें”
20. _”सच्चा सुख भीतर से आता है”
21. _”मन जितना शांत, जीवन उतना स्पष्ट”
22. _”आज का दिन भी एक अवसर है”
23. _”जो बीत गया, वह अनुभव बन गया”
24. _”थोड़ा मुस्कुराना भी साधना है”
25. _”सरल जीवन, गहरी शांति”
26. _”धीरे-धीरे ही सही, पर आगे बढ़ना अच्छा है”
27. _”मन को कम बोझ दें”
28. _” जो अपने पास है, उसे देखना सीखें”
29. _”शांति अक्सर चुप्पी में मिलती है.”
1. _ “हर दिन थोड़ा सा कृतज्ञ होना, जीवन को हल्का कर देता है”

2. _ “कम चाहो, तो जीवन अपने-आप भरपूर लगने लगता है”
3. _ “मन का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि कहीं और शांति मिलेगी.”
4._ “मनुष्य का असली घर वह जगह है, जहाँ उसे कुछ साबित नहीं करना पड़ता”
5._ “मैं कुछ बदलने की कोशिश नहीं कर रहा.. बस जो है, उसे थोड़ा साफ देख रहा हूँ.”
6._ **”क्या मैं अपनी जगह पर खड़ा हूँ, या दूसरों की एनर्जी [energy] मुझे हिला रही है ?” 7._“मैं हारने वाला तो नहीं हूँ… वरना अब तक मिट चुका होता.” 8._ “साथ वही चलते हैं, जिन्हें फ़ायदा नहीं फ़िक्र होती है.!!”
9._ “मुझे अब किसी को साबित नहीं करना… बस अपने हिस्से की सच्चाई के साथ जीना है”
10._ “ऊँचाइयों को भी करीब से देखा है… इसलिए अब बस इतना जानता हूँ – ऊपर जाना गलत नहीं…

_ पर जड़ों का जमीन से जुड़े रहना ज़रूरी है”
1._ “कट तो जाएगी ज़िंदगी हर हाल में…

_ मगर, जीना और सिर्फ गुज़ारा कर लेना – दो अलग बातें हैं’
2. _ “मैं किसी को रोकता नहीं… और न ही किसी के जाने पर सवाल करता हूँ…
_ क्योंकि अब समझ आ गया है – हर किसी की अपनी यात्रा है…और अपनी प्राथमिकताएँ”
3._ “अब शब्द भी संभालकर खर्च करता हूँ…हर किसी के लिए नहीं…
_ क्योंकि हर जगह गहराई समझी नहीं जाती”
4._ **”जहाँ तक मुझसे हो सका… मैंने अपना हिस्सा निभा दिया…
_अब आगे जो भी होगा – वह अपने समय और प्रवाह में खुल जाएगा”
5._ “सबको जाने दिया… खुद को पा लिया..

रुकना भी ठीक… चलना भी ठीक..”
6.** _लोग बदलेंगे नहीं, पर उनके बीच खुद को कैसे ठीक रखना है, ये मेरे हाथ में है.”
7._ “मैं तेज दौड़ नहीं लगाता, पर धीरे-धीरे इतना आगे निकल जाता हूँ कि लोग समझ ही नहीं पाते”
8._ “जहाँ जरूरतें पूरी हो जाएं, और इच्छाएं जोर न डालें – वही काफी है.”
9._ “मैं हर पल नया हो सकता हूँ, अगर मैं अपने पुराने जवाबों को थोड़ी देर के लिए चुप रहने दूँ.”
10._ “ज़िन्दगी हमारा इंतज़ार नहीं कर रही, बस हमारा ध्यान चाहती है “[/su_quote]
1._”बाहर के नियम रास्ता दिखाते हैं, लेकिन चलना हमेशा अंदर की समझ से पड़ता है.”
2._ **“लोग मुझे बदलते हुए नहीं देखते..-

वे बस अपने मन में बनी मेरी तस्वीर को टूटते हुए देखते हैं”
3._ “हम सोचते हैं कि life बहुत serious है…
और life सोचती है – ये लोग खुद ही ज़्यादा serious हो गए हैं ”
4._ “जब हम थोड़े हल्के हो जाते हैं… तभी life भी थोड़ी आसान लगने लगती है”
5._ “ना सब समझना है… ना सब सुलझाना है…

थोड़ा जी लेना है, थोड़ा हँस लेना है 😄”चलने दो ऐसे ही…
👉 na koi pressure, na koi plan, बस flow में…
कभी-कभी यही सबसे rare luxury होती है.
6._ “हम life को simple करना चाहते हैं…
बस उसे simple रखने का तरीका complex बना देते हैं”
7. _ “Problem छोटी होती है… हम meeting बुलाकर उसे बड़ी बना देते हैं 😄
8._ “हम हल्का होना चाहते हैं… पर पकड़ छोड़ने को ready नहीं होते”
9._ हम Answers ढूंढ़ते रहते हैं, पर सवाल को Avoid करते हैं.

हम खुद को समझने का टाइम नहीं निकालते, और उम्मीद रखते हैं कि दुनिया हमें समझ ले.

10. – “रास्ता थोड़ा उलझा है, मंज़िल ग़लत नहीं है.”

1.- कई बातें जो आज हमें बेकार लगती हैं,
_ वही बात जीवन के किसी मोड़ पर हमें सबसे गहरी लग सकती है.

2.-“सब कुछ महँगा हो गया… बस इंसान सस्ता हो गया”

3.- “पहले पैसा जेब में होता था… अब आदमी पैसे की जेब में है”

4.- “जब से इंसान की कीमत पैसों से तय होने लगी.. तब से इंसान सस्ता हो गया”

5.- “पैसा इतना बड़ा हो गया… कि आदमी छोटा पड़ गया”

सुविचार – आध्यात्मिक परिपक्वता क्या है ? – 099

1. जब आप दूसरों को बदलने के प्रयास छोड़ के स्वयं को बदलना प्रारम्भ करें,

तब आप आध्यात्मिक कहलाते हो.

2.  जब आप दुसरे जैसे हैं, वैसा उन्हें स्वीकारते हो तो आप आध्यात्मिक हो.
3. जब आप समझते हैं कि हर किसी का दृष्टिकोण उनके लिए सही है, तो आप आध्यात्मिक हो.
4. जब आप घटनाओं और हो रहे वक्त का स्वीकार करते हो, तो आप आध्यात्मिक हो.
5. जब आप आपके सारे संबंधों से अपेक्षाओं को समाप्त करके सिर्फ सेवा के भाव से संबंधों का ध्यान रखते हो, तो आप आध्यात्मिक हो.

6. जब आप यह जानकर के सारे कर्म करते हो की आप जो भी कर रहे हो वो दुसरो के लिए न होकर के स्वयं के लिए कर रहे हो, तो आप आध्यात्मिक हो.

7. जब आप दुनिया को स्वयं के महत्त्व के बारे में जानकारी देने की चेष्टा नहीं करते, तो आप आध्यात्मिक हो.

8. अगर आपको स्वयं पर भरोसा रखने के लिए और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए दुनियां के लोगों के वचनों की या तारीफों की ज़रूरत न हो तो आप आध्यात्मिक हो.

एक परिपक्व व्यक्ति वह है जो केवल निरपेक्षता में नहीं सोचता है, जो भावनात्मक रूप से गहराई से उत्तेजित होने पर भी वस्तुनिष्ठ होने में सक्षम होता है, _ जिसने सीखा है कि सभी लोगों में और सभी चीजों में अच्छाई और बुराई दोनों होती है, और जो विनम्रता से चलता है और परोपकार से व्यवहार करता है _जीवन की परिस्थितियों के साथ, यह जानते हुए कि_ इस दुनिया में कोई भी सब कुछ नहीं जानता है और इसलिए हम सभी को प्रेम की आवश्यकता है.

9. अगर आपने भेदभाव करना बंद कर दिया है, तो आप आध्यात्मिक हो.
10. अगर आपकी प्रसन्नता के लिए आप सिर्फ स्वयं पर निर्भर हैं, दुनिया पर नहीं, तो आप आध्यात्मिक हो.
11. जब आप आपकी निजी ज़रूरतों और इच्छाओं के बीच अंतर समझ के अपने सारे इच्छाओं का त्याग कर पातें हैं, तो आप आध्यात्मिक हो.
12. अगर आपकी ” खुशियां ” या ” आनंद”  भौतिक, पारिवारिक और सामाजिकता पर निर्भर नहीं होता, तो आप आध्यात्मिक हो.

सुविचार – आध्यात्म – आध्यात्मिक – आध्यात्मिकता – 098

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आध्यात्मिक प्रगति पूरी तरह से जीवन को सरल बनाने और ज़रूरी बातों पर केन्द्रित होने के बारे में है.
जिसको ये दिख गया कि भीतर की बेचैनी का इलाज बाहर की ओर ज़ोर-आज़माइश करके नहीं होना है ;

_ उसकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हो गई.

“भटकाव तब होता है जब हम खुद से दूर हो जाते हैं.

_ आध्यात्मिक प्यास का जवाब बाहर नहीं—अपने भीतर ही मिलता है.
_ जब प्यास सच्ची होगी, रास्ता खुद मिल जाएगा.”
शिछा हमें खाने कमाने योग्य बना सकती है, मगर हमारे जीवन को आनंदमय अध्यात्म बनाता है.!!
कुछ लोग भौतिकता [materialism] को सब कुछ मानते हैं,

_ मगर सोचिए जन्म से पहले भौतिकता कहां थी और मृत्यु के बाद कहां चली जाएगी.!!

” तन को रोटी और मन को शांति चाहिए “

जो तन को रोटी और मन को शांति देने के इच्छुक होते हैं, _ अध्यात्म उनके लिए है.

आध्यात्मिक कोई कार्य नहीं है, जो कल कर लेंगे ;

यह हर छण जीवन जीने की परम कला है, जो जीवन को सुंदर और प्रेममय बनाता है.!!

आध्यात्मिकता में आप ही प्रयोग हैं, आप ही प्रयोगकर्ता हैं और आप ही परिणाम हैं.
आध्यात्मिकता, अनावश्यक को खत्म करने का अनुशासन है.
अध्यात्म ….. शनै शनै __ आनंद की ओर प्रस्थान..
खरा आध्यात्मिक जीवन दूसरों को सुख बांटने में होता है, उसमें आनंद और खुलेपन का अनुभव होता है.
आध्यात्मिकता का मतलब जीवन से सन्यास लेना नहीं है; यह पूरी तरह से जीवन जीने की कला है.
जो भाव हमें अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाता है, वह भाव अध्यात्म है.
एक आध्यात्मिक प्रक्रिया में सभी स्तरों पर प्रयासों की ज़रूरत पड़ती है.
संसार दूसरे के प्रेम में पड़ने की यात्रा है, अध्यात्म अपने प्रेम में पड़ने की.
आध्यात्मिकता की राह निर्भीक और साहसी लोगों के लिए है.
आध्यात्मिक विकास के लिए परिवर्तन नितान्त आवश्यक है.
अपने रवैये में अड़ियलपन को छोड़कर लचीलापन लाएँ,

फिर देखें, आपकी आध्यात्मिक प्रगति कितनी तेज़ी से होती है.

_ आध्यात्मिक व्यक्ति किसी की भी निंदा, स्तुति, शिकायत और आलोचना नहीं करता.!!

आध्यात्मिक और व्यावहारिक इंसान में मात्र इतना ही भेद है.

_ आध्यात्मिक इंसान व्यावहारिक नहीं होता
_ व्यावहारिक इंसान आध्यात्मिक नहीं होता !
_ कभी दोनों साथ दिखे तो समझ लेना अभिनय होगा..
अभिनय :- ( बात गहरी है , समझ न आये तो बुरा न मानना)
जीवन निस्सार है, निरर्थक है, यह सोच किसी निराशा का नतीजा नहीं है..

_ बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से गुज़रने का प्रतिफल है.
कोई बड़ी नही _ बस _ इत्तू सी ही तो बात है,

_ जैसे हो वैसा दिखना ही तो … अध्यात्म है..

आध्यात्मिक व्यक्ति सहज- शांत, उसके भीतर का मौसम मस्त सुहाना मस्तमौला सा रहता है.!!
भीतर से घुट कर जो मौन हो रहा है, मौन उसके लिए अभिशाप है..

_ जबकि आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले के लिए ‘मौन एक वरदान है’.

अध्यात्म मात्र जागरण की यात्रा है, कुछ पाना नहीं है, बस स्वयं को उघाड़ना मात्र है.

जैसे अंगारा राख में ढक जाता है, और अपनी चमक खो देता है, बस उसकी राख को झाड़ना है, तांकि उसका प्रकाश उपलब्ध हो जाये.

ज्ञान….

यदि आप अधिक सांसारिक ज्ञान एकत्रित करते है तो आप में अहंकार-घमण्ड भी आ सकता है

किन्तु आध्यात्मिक ज्ञान जितना ज्यादा अर्जित करते है उतनी नम्रता -सहजता और सरलता आती है !!!

आध्यात्मिकता की खोज में जुटे व्यक्ति के लिए ज़रूरी चीजों में से एक है – समभाव.

इसका अर्थ है सभी इन्द्रियों व प्रणालियों में संतुलन.

जीवन के सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों पछ, आध्यात्मिक लछ्य तक पहुँचने में हमारी मदद करते हैं इसलिए दोनों ही जरुरी है. हम जितना ज्यादा उन्हें सहज और संतुलित कर पायेंगे, उतनी ही ज्यादा सफलता प्राप्त कर सकेंगे.
अध्यात्म तो उनके लिए है, जिन्हें कुछ ऐसा मिल गया है, जिसके उपरांत उन्हें सुखी होने की आवश्यकता नहीं महसूस होती और दुखी होने से डर नहीं लगता।

दुःख के लिए तैयार रहो। सुख की अपेक्षा मत कर लेना। सत्य ने कोई दायित्व नहीं ले रखा है तुम्हें सुख देने का,

और सुख और आनंद में कोई रिश्ता नहीं। सत्य में आनंद ज़रूर है। सुख नहीं।

जो व्यक्ति आध्यात्मिक जीवन पर चलता है, वह हमेशा प्रसन्न रहता है ; ऐसा व्यक्ति, न तो कभी किसी बात पर ‘शोक’ करता है, और न कभी किसी प्रकार की, कामना ही करता है.

” अपने अंतस में, प्रत्येक जीव के प्रति, समान व्यवहार का भाव जागृत होना …….. आध्यात्मिकता की प्रमुख पहचान है “

जब मैं इस दुनिया की ओर देखता हूँ तो मुझे मेरा जीवन उबाऊ, नीरस, बोझिल और अशांत-सा लगता है,

_ लेकिन जब मैं आध्यात्मिक जीवन को देखता हूँ तो मुझे मेरा जीवन खूबसूरत, जीवंत सुकून, शांति और आनंद से भरपूर लगता है.!!

दूर, बहुत दूर, और दूर देखो..

_गहरे, बहुत गहरे, और गहरे सोचो..

_सोचते जाओ, सोचते जाओ, सोचते जाओ..

_ एक सत्य प्रकाशित होता है… सब कुछ मिथ्या है, सब कुछ व्यर्थ है.

_ जीने का क्या अर्थ है ?

_यह सच है कि जब बहुत गहरे सोचने बैठो तो जीवन निस्सार, निरर्थक लगता है.

_जीवन निस्सार है, निरर्थक है, इस आध्यात्मिक ऊर्जा से गुज़रने का मौका कभी न कभी हरेक को मिलता है.

— आध्यात्मिक पथ के अलावा, सांसारिक जीवन की चीज़ों में भी,

_ जैसे नया व्यवसाय शुरू करना [such as starting a new business], नए पेशे में जाना [ going into a new profession], अपना करियर बनाना [making one’s career], प्यार और दोस्ती के रास्ते पर चलना [treading the path of love and friendship], नाम और प्रसिद्धि के लिए काम करना [working for name and fame], चाहे स्वभाव या चरित्र कुछ भी हो जिस वस्तु को कोई प्राप्त करना चाहता है [whatever be the nature or character of the object one wishes to attain] – वह आरंभ से अंत तक त्याग ही मांगता है. [what it asks is sacrifice from beginning to end.]

_हम इसे भूल जाते हैं, और इसलिए हममें से प्रत्येक सोचता है, “हमारा जीवन कितने बलिदान मांगता है !” [We are apt to forget this, and therefore each of us thinks, ” Our life asks for so many sacrifices !]

_देखो वो प्रोफेशनल आदमी कितना खुश है, वो आदमी जो सरकार में अपना करियर बना रहा है उसकी जिंदगी कैसी चल रही है.” [Look how that professional man is happy, how that man who is making a career in government is going on in his life.”]

_परंतु हम उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, जिसे वे प्राप्त करना चाहते हैं, उनमें से प्रत्येक को जो बलिदान देना पड़ता है, वह नहीं देख पाते. [But we do not see the sacrifice that each one of them has to make in order to arrive at that object which they wish to attain.]

एक आध्यात्मिक व्यक्ति उस व्यक्ति से बेहतर है जो बलिदान देने के लिए तैयार नहीं है. [A spiritual man is preferable to a man who is unwilling to make sacrifices.]

इससे पता चलता है कि उसे कुछ हासिल करने की उतनी परवाह नहीं है. [By this shows that he does not care enough to attain something.]

_वह अपने आराम, अपनी सुविधा का आनंद लेता है – वह “अपने जीवन” से काफी संतुष्ट है. [He enjoys his comfort, his convenience – he is quite content in “his life.]

प्राप्ति का उद्देश्य जितना बड़ा होता है, उसके लिए मांगा गया बलिदान भी उतना ही बड़ा होता है. [The greater the object of attainment, the greater is the sacrifice asked for it.]

हमारा आध्यात्मिक प्रशिछण तभी प्रभावी कहलाता है जब उसके अभ्यास से हमारे अंदर स्वाभाविक रूप से आंतरिक शांति और हल्कापन पैदा हो.
आध्यात्म “आध्यात्मिक दृष्टिकोण” से देखें तो ये जीवन केवल ‘अपनी यात्रा’ है.

_ इस यात्रा में आप ‘किसे’ अपने जीवन में रखना चाहते है और किसे नहीं, ये केवल आपका ‘चुनाव’ हैं..
_ आप अपने जीवन को ‘कैसा’ जीना चाहते हैं, ये भी केवल आपका ही ‘चुनाव’ है
_ इस जीवन को आप जैसा जीना चाहते हैँ, इसे उस रूप में जीने के लिए इस दुनिया में आपकी कोई भी सहायता नहीं करने वाला..
_ आपका जीवन केवल आपकी ‘अपनी जिम्मेदारी’ है, आपके सपने भी केवल आपके ‘अपने’ हैँ..
_ इसलिए ‘स्वयं को केंद्र’ में रखकर अपने जीवन को खुल कर जीएं..
_ अपनी ज़िन्दगी को वैसा जीकर जरूर जाएं, जिसकी आपको तमन्ना थी..!!
अपने खुद के खर्चे के लिए कमाना संसार है या अध्यात्म ?

संसार में रहो या आश्रम में, आपका खाना, कपड़ा, रहना
ये सब का खर्च कौन देगा ?
क्या आप बिना खाने के, बिना कपड़े के और बिना घर के रह सकते हैं ?
क्या आप जैसा भगवान बुद्ध ने बताया, _ ऐसे भिक्षा माँग कर खा सकते हैं ?
और फिर भिक्षा में जो मिलेगा, उसके लिए भी तो किसी को ना किसी को, कमाई करनी पड़ेगी.
तो अपना खर्चा खुद कमाने में क्या समस्या है ?
किसी का बोझ ढोना समझदारी नहीं है, _पर क्या स्वयं किसी पर बोझ बन जाना उचित है ?
आप शांति पाने चलें और आपके खर्चे के लिए कोई और कमाई करें,
ये कैसी आध्यात्मिकता ?

सुविचार – उम्र – 097

उम्र बढ़ने के साथ एक अहसास यह होता है कि एक उम्र के बाद आप इसलिए जीते हैं, क्योंकि आपको जीना होता है.

_ नहीं जिएँगे तो करेंगे क्या ?
_ एक उम्र के बाद आप जीने के लिए नहीं जीते, बल्कि इसलिए जीते हैं कि जीने के सिवा अन्य कोई विकल्प नहीं है.
_बढ़ती उम्र में आप जीने के लिए अभिशप्त हैं.!!
– Manika Mohini
जिंदगी की सबसे बड़ी चीज है अपने दिमाग को जवान रखना,

_ कोई उम्र का बढ़ना नहीं रोक सकता, पर अपनी उत्पादकता बढ़ाते हुए उम्रदराज होना कुछ और ही है,

_ हम अपनी नासमझी के कारण रोज – रोज मरते हैं.

_ उम्र है रेत सी कैसे थामोगे, फिसलती रहेगी !!

सारी उम्र खटते रहते हैं हम सुविधाएं जुटाने में.

_ जब सुविधाएं इकट्ठी हो जाती हैं तो उनका उपभोग करने के लिए उम्र नहीं बचती.

When I was young, I was poor. But after years & years of hard work, now I am not poor, but no longer young too.

  • Manika Mohini
हमें खुले दिमाग के लोगों की जरूरत है ;

_ संकीर्ण विचारधारा [narrow minded] के लोग हमारे जीवन को पीछे धकेलते हैं.
_ इनका हमारे जीवन को आगे बढ़ाने में कोई योगदान नहीं होता.
_ यदि आप में जीवन में वैभिन्य [variety] ढूँढते रहने की क्षमता है,
सौंदर्य के प्रति आकर्षण है,
मन में चांचल्य [fickleness] को बसाए रखने का बचपना है,
दिल में ज़िंदादिली [liveliness] है,
हर नएपन से मुग्ध हो जाने वाला सम्मोहन है,
और आते हुए प्रेम को स्वीकार करने का जज़्बा [passion] है,
… तो आपकी उम्र कितनी भी हो, आपको उम्र प्रभावित नहीं करती.
पहले जो बातें मामूली लगती थीं, वही बड़ी उम्र में घाव बन जाती हैं..

_ जो बातें पहले दिल बहलाने के लिए होती थीं, वो अब जीवन से भागने का ज़रिया बन जाती हैं
_ हम सोचते हैं कि समय के साथ समझ आएगी, लेकिन समझ के साथ अक्सर कड़वाहट, अकेलापन और थकान भी आती है
_ असल में, उम्र हमें मजबूत नहीं बनाती, वो बस हमें चुप रहना सिखा देती है और हम उसे मैच्योरिटी समझ बैठते हैं.!!
हमें लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों में मैच्योरिटी आ जाती है,

_ पर सच तो ये है कि वक्त के साथ लोग सिर्फ बड़े होते हैं..
_ अंदर से कई बार और ज़्यादा टूटे हुए, थोड़े उदास, थोड़ा थके हुए, और कभी-कभी अपने ही ख्यालों में उलझकर दुनिया को समझने की कोशिश करते-करते खुद से ही दूर हो जाते हैं.!!
**कई बार जरुरी होता है उम्र में “बड़े” लोगों को बताना.. कि उनकी सोच कितनी “छोटी” है..

_ कभी-कभी कुछ लोग हमें एक कड़वा सच धीरे से थमा देते हैं..
– उम्र बढ़ने से समझ नहीं बढ़ती.. और हम चुपचाप देखते रह जाते हैं कि जिनसे हमने गहराई की उम्मीद की थी..
_ वही समझ के सबसे सतही किनारे पर खड़े मिलते हैं.
– “किसी की उम्र का सम्मान कीजिए, पर उनकी सोच की ऊँचाई को देखकर ही दिल में जगह दीजिए.!!
_ उम्र का बड़ा होना सम्मान का कारण नहीं होता – सम्मान तो चेतना के तेज से मिलता है..

_ यदि उम्र बढ़ने के साथ आपकी चेतना उदास, अशांत या अशुद्ध हो जाए, तो केवल वर्षों का बोझ कोई गरिमा नहीं देता.
_ सम्मान, योग्यता और पात्रता अर्जित करनी पड़ती है –
_ वह आती है एक जागृत, सार्थक और निर्मल जीवन से, न कि दूसरों की आलोचना या स्वयं की वाहवाही से..
_ जीवन की सच्ची खूबसूरती उम्र में नहीं, चेतना की उजास में होती है.!!
वैसे ज़िन्दगी में कुछ है नहीं.. बस जिए जाओ.

_ सुबह होती है, शाम होती है और उम्र यूँ ही तमाम होती है.!!
ए खुदा … हमें उम्र दराज न करना _

_थोड़ा कम जी लेंगे _ मगर किसी का मोहताज़ न करना ..!

उम्र बूढ़ा बनाती है तो ठीक है,

_ पर शरीर लाचार बना दे _ इसका दुख सालता है..!!

कई बार जरुरी होता है उम्र में ” बड़े ” लोगों को बताना _

_ कि उनकी सोच कितनी ” छोटी ” है ..

ज़िंदगी के एक ही मायने ताउम्र नहीं रहते..

_ हर उम्र में इसके मायने बदल जाते हैं.!!

महल हों या किले, ध्वस्त ज़रूर होते हैं..
_ उम्र के खंडहर मन की जीवन्तता से रोशन रहते हैं.
बढ़ती उम्र बताती है कि कुछ लोगों से दूरी बनना नुकसान नहीं था,

_ असल में तो वही सबसे बड़ा फायदा था, बस देर से समझ आया.!!

धीरे-धीरे बढ़ती हुई उम्र आपको यह अवश्य बताएगी कि,

_ कुछ लोगों को खो देना वास्तव में बहुत कुछ पा लेने के जैसा था.!!

उम्र तो बस गिनती बढ़ाती है..

_ असली समझदारी तो तब आती है.. जब ज़िंदगी दो-चार थप्पड़ मारती है.!

हमें लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों में मैच्योरिटी आ जाती है,

_ लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है..!!

बढ़ती उम्र का भी अपना ही अलग मज़ा है, आंखें धुंधली हो जाती हैं,

_ लेकिन लोगों को पहचानने में आप माहिर हो ही जाते हैं.!!

उम्र बढ़ने के साथ शौक तो खत्म हो गये,

_ लेकिन- जिंदा रहने के लिये जरुरतें मुंह फैलाने लगी हैं.!!

उम्र तो बढ़ेगी ही बढ़ेगी.

_ खास बात यह है कि समझदारी बढ़े.
उम्र बढ़ने [Ageing] और बढ़ने [Growing] में अंतर है.

_ उम्र [Ageing] बढ़ना जीवन में वर्ष जोड़ना है, बढ़ना [Growing] जीवन में वर्ष जोड़ना है.

There is a difference between Ageing and Growing.

Ageing is adding years to life, Growing is adding life to years.

” उम्र की ऐसी की तैसी “

घर चाहे कैसा भी हो

उसके एक कोने में

खुलकर हंसने की जगह रखना…

सूरज कितना भी दूर हो

उसको घर आने का रास्ता देना…

कभी कभी छत पर चढ़कर

तारे अवश्य गिनना…

हो सके तो हाथ बढा कर

चांद को छूने की कोशिश करना…

अगर हो लोगों से मिलना जुलना

तो घर के पास पड़ोस जरूर रखना…

भींगने देना बारिश में..

उछल कूद भी करने देना..

हो सके तो बच्चों को…

एक कागज़ की किश्ती चलाने देना…

घर के सामने रखना एक पेड़

उस पर बैठे पंछियों की बातें अवश्य सुनना…

घर चाहे कैसा भी हो

उसके एक कोने में

खुलकर हंसने की जगह रखना…

चाहे जिधर से गुज़रिये

मीठी सी हलचल मचा दिजिये…

उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है

अपनी उम्र का मज़ा लीजिये…

ज़िंदा दिल रहिए जनाब

ये चेहरे पे उदासी कैसी

वक़्त तो बीत ही रहा है

” उम्र की ऐसी की तैसी “

सुविचार – खुशी – ख़ुशी – खुश – ख़ुश – खुशियां – 096

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“खुशी पाने की अवस्था नहीं है, बल्कि यात्रा करने का एक तरीका है.”

“Happiness is not a state to arrive at, but a manner of traveling.” —Margaret Lee Runbeck

“पैसा आपको खुश नहीं करेगा, लेकिन हर कोई खुद ही इसका पता लगाना चाहता है”

मैं ऐसे खुश लोगों को जानता हूं जिनके पास मुझसे कम संपत्ति है और मैं ऐसे दुखी लोगों को जानता हूं _ जिनके पास मुझसे कहीं अधिक संपत्ति है.

_ पैसा ख़ुशी का रहस्य नहीं है.  _ऐसा न कभी हुआ है और न कभी होगा. __और जितनी जल्दी हमें इस सत्य का एहसास होता है,  उतनी ही जल्दी हम उस स्वतंत्रता की खोज कर सकते हैं जो धन की इच्छा न रखने के साथ जुड़ी होती है.

“Money won’t make you happy, but everybody wants to find out for themselves.”

I know happy people who own less than me and I know unhappy people who own far more. Money is not the secret to happiness. – Zig Ziglar

बात जताने के भी कुछ नियम और मर्यादायें होती है,

_ कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाता..
_ सिवाय इन पुराने बंधनों में खुद को बांधने से.
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!!
– निरर्थक
जो व्यक्ति हर समय खुश और सुखी-संतुष्ट दिखता है, उसने जीवन में न जाने कितने समझौते किए होंगे..

_ और जिस व्यक्ति को सब लोग पसंद करते हैं, उसने न जाने कितना गरलपान किया होगा, दूसरों की गलतियों-बुराइयों को कितना अनदेखा किया होगा.
_ हर समय खुश दिखना आसान नहीं है, न ही आसान है कि हर आदमी आपको पसंद करे.
_ मन को घोट कर रखना पड़ता है.!!
– Manika Mohini
खुशी का स्रोत क्या है, यदि आप यही शोध करते रहेंगे तो कभी खुश नहीं हो पाएँगे.

_ ज़िन्दगी के मायने क्या हैं, यदि यही तलाशते रहेंगे तो ज़िन्दगी ढंग से नहीं जी पाएँगे.
_ दर्शनशास्त्री और शोधकर्ताओं को देखा है ना ?
_ उनके चेहरे पर ज्ञान का नूर तो होता है, पर आँखों में जीवन की मस्ती नहीं.!!
– Manika Mohini
सुख और खुशी में फ़र्क होता है.

_ हम सोचते हैं कि हम सुखी हैं तो हम नियमतः खुश भी हैं.
_ सुख मिलता है भौतिक वस्तुओं से, जैसे सुविधाएं, पैसा, ऐशोआराम, सुप्रसिद्धि.
_ खुशी आंतरिक होती है, दुख भी आंतरिक होता है.
_ हम लोगों को बता-दिखा सकते हैं कि हम कितने सुखी हैं, लेकिन खुश हों तो हमारे पूरे व्यक्तित्व से झलक जाता है.
_ जो लोग सुखी हैं, क्या वे खुश भी हैं ? ज़रूरी नहीं.!!
– Manika Mohini
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.

_ जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं, इसलिए खुद को समेट कर रखना बहुत ज़रूरी है.!!
– Manika Mohini
‘जिन्दगी छोटी है या बड़ी’.. इस पर अलग-अलग लोगों के अलग-अलग मत हो सकते हैं.

_ जो इसे छोटी समझते हैं वो इस लिये कि उनके पास बहुत कुछ है करने को पर सब कुछ करना मुश्किल है.
_ जो इसे लम्बी समझते हैं वो शायद इस लिए की उनके पास करने को तो बहुत कुछ है लेकिन सही अवसर नहीं मिलता या लेजी बहुत हैं, इसी बहाने में वक्त गुजरता जाता है. _ सोचते हैं अभी तो बहुत जीवन पड़ा है – बाद में कर लेंगे.
_ जिन्दगी छोटी हो या लम्बी, हमने कम किया या ज्यादा, बस अगर किया तो गुणवत्ता से भरपूर होना चाहिए ‌और दुनिया की नजरों में आना भी चाहिए.
_ सब के काम भी अलग हैं.
_ कोई कुछ भी नहीं करते हुए अपने आप को बड़ा तोपची समझता है मतलब दिखावा.. _ और कोई अपनी पसंद के काम को चुपचाप करता रहता है.
_ अपनी-अपनी सोच है.
– Tejbeer Singh Sadher
कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाए..
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!
जीवन के सबसे ख़ुशी के पलों में से एक वह होता है _जब आप उस चीज़ को छोड़ने का साहस पाते हैं _जिसे आप बदल नहीं सकते.

One of the happiest moments in life is when you find the courage to let go of what you cannot change.

ऐसे लोग हैं जो आपके पास जितना है उससे कम में भी अधिक खुश हैं.

There are people out their happier with less than what you have.

खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार लोग खुशी का दिखावा करते हैं.
“खुश दिखना आसान है… खुश होना थोड़ा मुश्किल है”
खुद के साथ को स्वीकार करना, और खुश रहना ; क्योंकि जितना आप लोगों को खुशी की वजह बनाते हो, आखिर में वही आप को सब से ज्यादा दुखी करते हैं..!!
ये कितनी अजीब बात है कि हम सब जीवन भर खुश रहने के लिए ‘हर दिन परेशान रहते हैं’.!!
वो खुशी जो आगे चलकर गहरा दुख दे, उसे आज ही छोड़ देना बेहतर है, मन को हल्का रखने के लिए यही सही रास्ता है.!!
अब तो ख़ुशी भी मिलती है तो डर लगता है, पता नहीं इस ख़ुशी की क्या कीमत चुकानी पड़े.!!
लोगों को परेशानी बहुत है, खुश है कोई तो हैरानी बहुत है..!!
खुश होने के लिए बहुत बड़ी चीजों की जरूरत नहीं होती है..

_ मामूली सी चीज भी बड़ी खुशी देती हैं !!

दूसरों की ज़िंदगी में क्या चल रहा है, इस बात पर ध्यान देते देते..

_ हमारे दरवाज़े पर जो खुशियाँ दस्तक दे रही हैं, उन्हें खो देते हैं..!!
विपरीत परिस्थितियों में भी यदि आप खुश रहने की ठान लें..

_ तो आपको धीरे-धीरे विपरीत को अपने पक्ष में करना आ जाएगा.!!

सबसे पहले खुद को खुश रखिए,

_ जो वाकई में आपके अपने होंगे, वो आपको खुश देखकर ही खुश हो लेंगे.!!

आपसे मिलने वाला हर व्यक्ति हमेशा पूछता है कि क्या आपका करियर है, या आपका अपना घर है ? जैसे कि जीवन किसी तरह की किराने की सूची हो.

_ लेकिन कोई आपसे कभी नहीं पूछता कि आप खुश हैं या नहीं.!!
“अपनी ख़ुशी को उस चीज़ पर निर्भर न रहने दें _जो आप खो सकते हैं.”

_ उस जगह से बाहर निकलें और दूसरी जगह पर खुश रहें.. जहाँ आप सहज हैं.!!

 

“असली ख़ुशी काफ़ी सस्ती है, फिर भी हम नकली ख़ुशी के लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाते हैं.”

यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि_ कोई और क्या करता है,
..तो आप को कोई समस्या है.!!
खुशी और सुख अचानक हमारी झोली में आकर नहीं गिरते.
_ खुशी और सुख पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है.!!
सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है…!
खुश रहना उतना महँगा नहीं है, लेकिन लोगों को यह दिखाने की कोशिश मे लगे रहना की आप ख़ुश हो, बहुत महँगा पड़ जाता है.!!
यदि आप अपनी इच्छाओं के लिए बेसब्र न होने की कला और अपनी अनचाही इच्छाओं को त्यागने की कला सीख लेते हैं, तो कोई भी आपकी खुशी छीन नहीं सकता.
वास्तविक ख़ुशी मन की एक ऐसी स्थिति है,

_ जिसमें ख़ुशी का विचार भी पूरी तरह से अनुपस्थित होता है..!!

कुछ जीतने पर भी मन ख़ुश ना हो तो समझ लेना,

_ कुछ ऐसा हार गए हो जो जीत से ज्यादा जरुरी था..!!

जब तक ज़िंदा हैं, हमें खुश रहना चाहिए..
_ क्योंकि उसके बाद हम बहुत लंबे समय के लिए मरने वाले हैं.!!
“कभी-कभी दूसरों की खुशी के लिए जलते-जलते हम खुद ही राख हो जाते हैं…

_ फिर एक दिन सिखना पड़ता है — कि खुद को बचाना भी सेवा है”
खुशी वह नहीं जो सबको अच्छी लगे, खुशी वह है जो आपको अपने भीतर से थोड़ा अधिक जीवित महसूस कराए.
जो खुशी मिलने के बाद भी आपको भीतर से हल्का, स्वतंत्र और संतुलित रखे, वह अपेक्षाकृत स्वस्थ खुशी है.

और
जो खुशी मिल जाने के बाद भी आपको और बेचैन, और लालायित, और निर्भर बनाती जाए, उसमें कुछ अधूरापन है.
“कभी मत पूछो- ‘मेरे पास खुश रहने का क्या कारण है ?’

_ शायद खुशी को किसी कारण की ज़रूरत ही नहीं होती”
– “खुशी किसी बड़ी उपलब्धि का इंतज़ार नहीं करती.
_ वह अक्सर साधारण दिनों में चुपचाप बैठी मिल जाती है”
ज़रूरी नहीं कि खुश दिखने वाले व्यक्ति के जीवन में सबकुछ सही चल रहा हो..

_ खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार खुशी का दिखावा होती है.!!
खुद को सही जगह रखें …गलत जगह पर आप सही हो कर भी खुश नहीं रह सकते.!!
हमने दुख को इतना आकर्षक बना दिया है कि हम खुशी को धोखे की तरह देखने लगे हैं..!!
जब जीवित रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प न हो, तो खुश दिखना जीवन को आसान बनाने का एक मूल्यवान अस्त्र है.
“दुनिया चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो..

_अपनी छोटी सी खुशी में खुश रहना सीखो”
खुश रहें, पर दूसरों की खुशियों की कीमत पर नही.
_ जो करना है, अपने बल पर करें, दूसरों के सहारे नहीं.. आत्मनिर्भर बनें.!!
हर किसी को खुश करने की कोशिश मत करो, यह तराजू पर मेढक का बोझ डालने जैसा है,

_ जब आपकी आंतरिक चेतना कहती है कि _आप ठीक हैं तो _आपको हर किसी को खुश रखने की कोई जरूरत नहीं है..!!

हमें खुद को खुश रखना चाहिए, वैसे भी लोग कभी हमसे खुश नहीं होते,

_ वो तो केवल अपने अनुसार ख़ुश होते हैं.!!

कुछ लोग खुद के पास सब कुछ होते हुए भी.. दूसरों की छोटी से छोटी खुशियों से जलते हैं..

_ ये सोचकर कि वो इंसान इतने कम में खुश कैसे है और वो खुद इतना सब होते हुए भी दुखी क्यों हैं..!!

खुशी कभी दवा से नहीं मिलती,

_लेकिन खुशी कई बीमारियों को ठीक कर सकती है.!!

अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो वह इंसान बन जाइए..!

_ जो अपनी खुशियों की चाबी दूसरों को नहीं सौंपता.!!

जो प्राप्त है उसमें खुश रहना सीखिए ;

_ किचिर किचिर करने वालों को सुख नसीब नहीं होता.!!

ज़िन्दगी ऐसे जीओ, जैसे अगला पल जीवन का आखिरी पल है.

_ जब आप यह सोच कर जीवन जीते हैं, तो आप भरपूर ख़ुशियाँ बटोरते हैं.!!

इंसान को अपनी परेशानियां गिनने का शौक होता है, लेकिन वह अपनी खुशियों को नहीं गिनता.

_ यदि वह उन्हें गिनता जैसा कि उसे करना चाहिए, तो वह देखेगा कि उसे पर्याप्त खुशी प्रदान की गई है.
दूसरों की गलतियों से हमें दुख हो सकता है, लेकिन उसे कब तक अपने मन में रखना है, यह हमारे ऊपर है.

_समय और खुशी हमारे अधिकार हैं, इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है, “खुद खुश रहिए.!!”
मैं यह सोचने की गलती नहीं करता कि जो खुशी मुझे किसी में या कहीं और मिलती है.

_ मुझे अपने अंदर ख़ुशी मिलती है _ क्योंकि मेरा मानना ​​है कि _ मैं अपने आस-पास के लोगों को तभी खुश कर सकता हूँ जब मैं खुश रहूँगा..!!

_ मैं संक्षेप में यह कहना चाह रहा हूं कि आप जो खुशी तलाश रहे हैं वह आप में है.

जीवन में सब कुछ फ़ायदे या नुक्सान के लिए नहीं होता, कुछ बातें दिल के लिए और अपनी ख़ुशी के लिए भी होती है.!!
खुश लोग जानते हैं कि खुशी एक विकल्प है ; _ वे जानते हैं कि यह वर्तमान परिस्थितियों की प्रतिक्रिया नहीं है. _ इसके बजाय, ख़ुशी एक उपलब्ध निर्णय है ;

उन्होंने उस सोच को ख़त्म कर दिया है जो जीवन में आनंद का अनुभव करने से पहले सब कुछ सही होने का इंतज़ार करती है.

दूसरी ओर, दुखी लोग हमेशा खुशी की तलाश में रहते हैं. _ उनका मानना ​​है कि ख़ुशी कुछ नया या कुछ अलग पाने पर निर्भर है.

_ वे लगातार पीछा कर रहे हैं, लेकिन कभी हासिल नहीं कर पाते ; __ कई बार, वे इसे सभी गलत स्थानों पर खोजते हैं.

इस दुनिया में वही व्यक्ति खुश रह सकता है, जो दूसरों को खुश देखकर खुश होता है.

_ जब तक हम दूसरों को खुश देखकर दुखी होते रहेंगे, तब तक यह तय मानिए कि खुशी हमारे दिल में नहीं आ सकती.

किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना जो आपको खुश करता है, अच्छी बात है,

_ लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना न भूलें जो आपसे बात करके खुश होता है,

_आप दोनों में बहुत अंतर देखेंगे.!!

खुश लोग अपनी परिस्थितियों को पहचानते हैं और उनसे भागने की आवश्यकता नहीं रखते ;

_ इसके बजाय, वे अपने अंदर शांति का अभ्यास करना चुनते हैं.

हर किसी का सही-गलत देखने का नजरिया अलग होता है.

_ जो आपको ठीक न लगे, वो किसी और के लिए सही हो सकता है.
_ आख़िर में मायने बस यही रखता है — जो जिससे खुश है, वही उसके लिए सही है.!!
यदि हम अच्छाई को उतना ही बढ़ा दें, जितना बुराई को बढ़ाते हैं,

_तो हम सब कहीं अधिक खुश होंगे.!!

कहते हैं, ‘दुःख इंसान को निखारता है.’ भीतर से निखारता होगा, बाहर से तो आदमी मुरझाया नज़र आता है.

_ ख़ुशी बेशक निखारती है, भीतर (मन), बाहर (तन) दोनों स्तरों पर.

खुशियां हमारे आसपास ही होती हैं, ये हमें तभी महसूस होती है, जब हम सजग और होशमंद होते हैं,

_ उन बातों को देखिए, गौर कीजिए जो सामान्य सी हैं, सामान्य बातों में ही छिपे होते हैं खुशियों के बड़े राज.!!
उन लोगों की वजह से, जिन्हें आपकी बिल्कुल भी परवाह नहीं है, उस व्यक्ति की खुशी को नजरअंदाज करना मूर्खता है.. जो आपको खुश करना चाहता है.!!
जो आप के लिए सही है, उसके साथ आप को खुश रहने की कोशिश नहीं करनी पड़ती _बल्कि आप खुश रह लेते हो..!!
आप सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो इसका अर्थ है कि आप ने कुछ भी प्राप्त नहीं किया..!!
यहाँ सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है..!
अपनी खुशी के लिए, उन सभी को छोड़ दें.. जो आपको दुख पहुंचाते हैं.!!
आज का छोटा लालच कल की बड़ी बर्बादी ला सकता है ; इसलिए ऐसी किसी भी खुशी को तुरंत त्याग दें.. जो आपके भविष्य को अंधकार की ओर ले जाए.!!
जब कोई बार-बार अपनी तकलीफों की कहानी सुनाता है,

_ तो खुशियाँ उसके करीब आने से डरती हैं.!!

ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो अपनी पूरी ज़िंदगी इस ख़ुशी में गुज़ार देते हैं कि _वो जिनको प्यार करते हैं वो खुश हैं और उनकी ख़ुशी के लिए वो अपने सारे कष्ट भूल जाते हैं.
अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए __ दूसरों पर दोषारोपण एक खतरनाक आदत है और खुशी के लिए एक बहुत बड़ी बाधा है.

कमियों की जिम्मेदारी किसी अन्य व्यक्ति या बाहरी कारक पर डालने से परिवर्तन की कोई भी आवश्यकता या प्रेरणा तुरंत समाप्त हो जाती है.

इसके बजाय, पीड़ित उस कोठरी में फँसा रहता है जिसे उसने स्वयं बनाया है – _ किसी और के आने का इंतज़ार करता है जो उसकी समस्याओं का समाधान करेगा.

_ लेकिन हर बार जब हम अपनी नाखुशी के लिए किसी और को दोषी ठहराते हैं, तो हम हार जाते हैं। और लंबे समय में, यह तृप्ति और खुशी को पहुंच से दूर रखता है.

_ आपकी खुशी पूरी तरह से खुश रहने के आपके निर्णय पर आधारित है – और यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सबकों में से एक हो सकता है _ जो हममें से कोई भी सीख सकता है.

सबसे पहले व्यक्ति को आत्म-विश्लेषण करना चाहिए ; _ अपनी वास्तविक चाहतों, जरूरतों, खुशियों आदि का पता लगाएं और संस्कृति, धर्म और परिवार के बाहरी प्रभावों को दूर करें, _ जिसने आपके लिए खुशी को परिभाषित किया है.

ख़ुश रहने की कुंजी स्वयं को जानना और इस दुनिया में अपना रास्ता खोजना है ; _ इससे ख़ुशी मिलती है. एक खुशी जो विपरीत परिस्थितियों में भी आपके भीतर बनी रहती है.

_ यह आपको असहायता की भावनाओं से बचाता है और आपको कठिन समय में सहना और धैर्य रखना सिखाता है.

_यह आपको अपने जीवन में सभी सकारात्मक चीजों की सराहना करना सिखाता है, जिससे आपकी खुशी बनी रहती है.

जो बार बार सहानुभूति के बहाने आपको आपका दर्द ..गुज़रा वक़्त याद दिलाए तो ..समझ लीजिए कि …वो आपको कभी खुश नहीं देखना चाहता, और ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए.
जो व्यक्ति हर समय खुश और सुखी-संतुष्ट दिखता है, उसने जीवन में न जाने कितने समझौते किए होंगे..

_ और जिस व्यक्ति को सब लोग पसंद करते हैं, उसने न जाने कितना गरलपान किया होगा, दूसरों की गलतियों-बुराइयों को कितना अनदेखा किया होगा..
_ हर समय खुश दिखना आसान नहीं है, न ही आसान है कि हर आदमी आपको पसंद करे..
_ मन को घोट कर रखना पड़ता है.!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.

_ जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं ; इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.!!
आपकी अपनी खुशी का कारण कोई नहीं है – आपके अलावा,,, आप स्वयं हैं..
_बाहर की दुनिया में शांति, संतोष और आनंद की तलाश में अपना समय और प्रयास बर्बाद न करें.!!
जब हम किसी बात की कल्पना करते हैं और वही बात हकीकत बनकर सामने आती है, तो जो खुशी मिलती है.. उसका कोई मोल नहीं होता.

_ लेकिन मंज़िल तक पहुँचने के लिए सिर्फ एक सफलता पर रुकना नहीं है,
_ हमें अपनी इस पहल को निरंतर आगे बढ़ाते रहना है.!!
जिन लोगों को जीना आता है…वह बिना किसी सुविधाओं के भी खुश रहते हैं…और…जिन्हें जीना नही आता…वह सभी सुविधाओं के होते हुए भी दुखी रहते हैं..
_ क्योंकि…आजकल के दौर में हर इंसान केवल सुविधाओं को ही अपना सुख समझता है…जबकि सही मायने में सुख अपने मन की आत्मिक-संतुष्टि है..!!
आपके अलावा कोई और आपको बेहतर महसूस नहीं करा सकता, यही सबसे बड़ा फर्क है.

_ क्योंकि आपको वास्तव में किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
_ आप खुद खुश रह सकते हैं, क्या यह खूबसूरत नहीं है और निश्चित रूप से किसी के आने और हमें बचाने की कामना करने से कहीं कम तनावपूर्ण है ?
हम सभी के साथ खुशियां बांटना चाहते हैं,

_ लेकिन लगता नहीं कि खुशियां बांट रहे हैं,
_ बल्कि अपनी खुशियों का प्रदर्शन कर रहे हैं…
_ लेकिन यही खुशियां बहुत जल्दी गायब क्यों होने लगती है…
_ ये भी सोचने की जरूरत है…
— हमने तो ज्यादातर लोगों से यही सुन रखा है कि लोगों की नज़र भी लगती है,
_ इसलिए अपनी खुशियों को बुरी नज़र वालों से भी बचाएं,
_ क्योंकि खुश होने वालों से ज्यादा जलने वाले लोग भरे हुए हैं….
_ बाकी जो लोग जिसमें खुश हैं वो करें…. सबकी अपनी-अपनी इच्छा..
खुशी सब कुछ होने से नहीं आती..

_ आप फर्स्ट क्लास हॉस्पिटल में पैदा हुए, मेरी डिलीवरी घर पर हुई, हम दोनों जिन्दा बच गए.
_ आप एक प्राइवेट स्कूल में गए और मैं एक सरकारी स्कूल में गया, हम दोनों ने ही हाई स्कूल की पढाई समाप्त की.
_ आप बिस्तर से उठे और मैं जमीं से सोकर उठा, हम दोनों ने शांतिपूर्ण रात्रि विश्राम किया.
_ आपके सब महँगे कपड़े, मेरे सब साधारण और सस्ते, हम दोनों के तन ढके हुए हैं.
_ आपने तला भुना हुआ खाया, मैंने साधारण खाना खाया _ लेकिन हम दोनों ने फिर भी अपनी संतुष्टि से खाया..
_ आप बीएमडब्ल्यू, रेवो, रेंज रोवर, पर सवारी करते हैं और मैं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करता हूं ; _ लेकिन फिर भी हम अपने विभिन्न गंतव्य तक पहुंच गए.
_ इसलिए ये समझें, जीवनशैली कोई प्रतियोगिता नहीं है और बहुत सारी चीज़ें करने के अलग-अलग तरीके हैं, अलग-अलग गलियाँ सभी एक ही मंजिल की ओर ले जाती हैं,
_ सिर्फ इसलिए कि और लोग तेजी से काम कर रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आप असफल हो रहे हैं.
_ खुशी सब कुछ होने से नहीं आती है, लेकिन जो आपके पास है उसको सबसे अच्छा बनाना, यह सब कुछ है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.
_ सबसे खुश लोगों के पास सब कुछ सबसे अच्छा नहीं होता है, वे बस जो कुछ उनके पास होता है _ उसे सबसे अच्छा बनाते हैं.
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_ मैंने सीखा है कि अपनी शर्ट पर क्रीज़ के बारे में परेशान नहीं होना चाहिए ;
_ “व्यक्तित्व” दिखावे से ज्यादा जोर से बोलता है.
_ इसलिए अपने पैसे, संपत्ति और अन्य चीजों के बारे में अहंकार को रोकें,
_ आप खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे और कोई भी आपके साथ नहीं जाएगा.
अगर खुश रहना है तो ये तीन बातें गांठ में बांध लो..

1-अपना मन कभी ना मारें..- वरना एक वक्त ऐसा आएगा कि किसी चीज में मन ही नहीं रहेगा..
2- खुद की क़ीमत पर किसी की मदद ना करें.
_ क्योंकि अहसान मानने वाला जमाना अब नहीं रहा.
3- अपने दुःख पर तुरंत एक्शन लें, कोई दूसरा नहीं आयेगा.
– खुद को खुश रखने का दायित्व स्वयं का होता है.
ख़ुशी का मतलब वह सब कुछ पाना नहीं है जो आप चाहते है, _यह आपके पास जो कुछ भी है उसका आनंद लेने के बारे में है.
Happiness is not about getting all you want. It is about enjoying all you have.
ख़ुशी उन लोगों को कभी नहीं मिलेगी जो उनके पास पहले से मौजूद चीज़ की सराहना करने में विफल रहते हैं.
Happiness will never come to those who fail to appreciate what they already have.
आपकी खुशी दूसरों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए.

Your happiness should never depend on others.

खुशी मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है. शांति और तर्कसंगतता खुशी की आधारशिला हैं.

Happiness is man’s greatest aim in life. Tranquility and rationality are the cornerstones of happiness.

सबसे खुश लोगों के पास हर चीज़ सर्वश्रेष्ठ नहीं होती, वे बस अपने पास मौजूद हर चीज़ को सर्वश्रेष्ठ बनाते हैं.

The happiest people don’t have the best of everything, they just make the best of everything they have.

चीज़ों के बेहतर होने का इंतज़ार न करें. जीवन हमेशा जटिल रहेगा.

_अभी खुश रहना सीखें, नहीं तो आपके पास समय खत्म हो जाएगा.

Don’t wait for things to get better. Life will always be complicated. Learn to be happy right now, otherwise you’ll run out of time.

आपको खुश रहने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना होगा. यह दुनिया बहुत क्रूर है.

_ शिकायत मत करो. बस खुद को खुश रहने के लिए प्रशिक्षित करो.

You have to train yourself to be happy. This world is very cruel. Don’t complain. Just train yourself to be happy.

जीवन उन चीजों को सहन करने के लिए बहुत छोटा है जो आपको खुश नहीं करतीं.

Life is too short to tolerate things that don’t make you happy.

दुनिया में दुखी करने वाले सैकड़ों लोगों से आप रोज़ टकरा सकते हैं,
_लेकिन खुशी देने वाले कम ही लोग मिलते हैं.!!
“जब तक जीवन है खुश रहो “
__ जीवन एक बहुत ही छोटी यात्रा है, और हम इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं.
_जो ज्ञात है वह विज्ञान है. _जो अज्ञात है वह रहस्य है. _रहस्य का आकार बड़ा है..!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.
_जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं, इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.
*हमें हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि चिंतित रहने से कल की मुश्किल दूर नहीं होती.. बल्कि आज का चैन भी छिन जाता है.*
दुनिया में हर कोई अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है, वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता,
_ दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है. जब हम औरों को उनकी खुशियां देना चाहेंगे, तो अपने आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जाएँगी और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है.
ज्यादातर लोग दूसरों को खुश करने की कोशिश में दुःखी हैं और दूसरे हैं कि कभी खुश होते ही नहीं,

_ व्यक्ति को दूसरों की मदद करने से पहले खुद की मदद करनी आनी चाहिए ;
_ क्योंकि आप जितने ज्यादा समृद्ध होंगे..
_ आप उतने ज्यादा लोगों की मदद कर पायेंगे..!!
सबको खुश रखने की कोशिश में कई बार हम खुद को खुश नहीं रख पाते..

_ और ये भूल जाते हैं कि स्वयं प्रसन्न नहीं होंगे तो..
_ उमंग के उस प्रवाह को गति कैसे दे पाएंगे..!!
“जीवन इसी क्षण में है” सौम्य जीवन बहुत कुछ सिखाता है.
_ किसी भी चीज़ को लेकर हताश होने लायक कोई बात नहीं है.
_ जागरूकता में रहना खुश रहने का सबसे आसान तरीका है.
हालाँकि “खुश रहना” इस आशीर्वाद की जरूरत हर किसी को है, लेकिन अगर हर किसी को दूसरों में खुशी ढूंढनी है तो फिर आशीर्वाद का मतलब क्या है ?
इधर-उधर भागना, खुद से भागना है..इसलिए जो मिला है ..उसमें खुश रहिये..
_और यही एक अच्छी जिंदगी है..!!
मसला ये भी है इस ज़ालिम दुनियाँ का,,,,
_ कोई अगर खुश भी है तो वो खुश क्य़ूँ है..?
कई बार अपनी ख़ुशी ख़ुद तक ही रखनी चाहिए..!
_ क्योंकि हर कोई आपकी खुशी से खुश नहीं होता.!!
अब तक जितने मिले, दुखी मिले..
_ सुखी हैं, खुश हैं, इस भ्र्म में लिपटे मिले.. अपने आप को धोखा देते मिले..
ना पूछ रे मन ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है,
_ दुखी तो वो भी हैं जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है..!!
‘खुश वो है’ जो यह जान लेता है कि..

_ वो क्या नहीं बदल सकता.!!
‘मेरा’, ‘तुम्हारा’ से ज़्यादा बड़ा और वज़नी शब्द ‘हमारा’ है,
_ जो बहुतेरे दुःख आधे कर देता है, ख़ुशी दोगुनी.
मन की ख़ुशी से बढ़ कर कुछ भी नहीं ; मन में ख़ुशी है तो झोंपड़ी में, जमीन पर सोने में और रूखी रोटी में ख़ुशी है,
_अन्यथा महलों में रहने वाले, मखमली गद्दों पर सोने वाले और छप्पन भोग खाने वाले भी नींद की गोलियों के सहारे सोते हैं.
लोग आपकी खुशी में खुश नहीं होते, बल्कि दुख में खुशी होते हैं, और झूठा अफसोस जताने आते हैं.

_ मेरा मानना है कि खुशी का इज़हार कीजिए.
_ खुशी बांटने से बढ़ती है, गम बांटने से कम होता है.
_ कुछ लोग खुश न हों, फिर भी..
_ आप सकारात्मकता का साथ न छोड़ें.
_ यही मान कर कि आप दुनिया बदलेंगे..
ख़ुशी खोई नहीं है, मन के अंदर है; उसे ढूंढ़ने की जरुरत भर है,
_आज हम यही छोटा सा काम नहीं कर पा रहे हैं और बेवजह दुखी हैं,
_आइये अपने मन में अंदर छिपी ख़ुशी को ढूंढ कर बाहर निकालने का प्रयास करें.
कल बंधन में थे तो खुश थे.
_ आज मुक्त हैं तो खुश हैं.
_ इसे कहते हैं असली जीवन.. जिस हाल में रहो, खुश रहो.
जीवन सरल गणित है.

_ जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या है ?
_ स्वयं का निरीक्षण करें.
_ क्या आप जीवन का सम्मान करते हैं या आपको दूसरों की हिंसा और पीड़ा में आनंद मिलता है.
_ क्या आपको किसी बच्चे को खेलते हुए या लोगों को नाचते हुए देखना पसंद है ?
_ या फिर आपको कोई हिंसक फिल्म या लड़ाई देखना पसंद है.
_ जब आप जीवन में खुशी का सम्मान करना और दूसरों की खुशी में खुशी ढूंढना सीख जाते हैं,
_ आप पाएंगे कि आपकी सौ समस्याएं दूर हो गईं.
_ जीवन के आघात और घाव को ठीक करने का सबसे आसान तरीका दूसरे की खुशी में खुशी ढूंढना है.
_ जीवन सरल गणित है.
_ यदि आप किसी को खुश देखकर दुखी होते हैं, तो यह आपको बीमार बना देगा और आपके जीवन को चिंता से भर देगा.
_ अगली बार जब आप कुछ सुखद और अच्छा देखें तो उसे संजोकर रखें.
_ किसी की पीठ पीछे छुरा घोंपने या उसके बारे में बुरा बोलने की कोशिश न करें, और आपको चारों ओर प्यार मिलेगा.

इस जीवन का सम्मान करें.
जीवन खुशियों से भर जाता है.
Life is simple math
What is your attitude towards life ?
Observe yourself.
Do you honour life or you find joy in violence and pain of others.
Do you like seeing a child play or people’s dancing
Or do you like seeing a violent movie or fight.
When you learn to honour joy in life and find joy in happiness of others,
You will find out that your hundred problems have vanished.
The easiest way to heal the trauma and wound of life is by finding joy in other’s happiness.
Life is simple math.
If you feel sad in seeing someone happy, it will make you sick and fill your life with anxiety.
Next time, you see something happy and good, cherish it.
Do not try to backstab or speak ill of anyone, and you will find love all around.

Honours this life.
Life is filled with joys.
जीवन का प्रयोजन [Purpose] क्या है ?

_ खुश रहना जीवन का प्रयोजन है.
_ इस संसार में हर कोई खुश रहना चाहता है, हंसना चाहता है.
_ वो चाहता है कि उसका हर कृत्य उसे खुशी की ओर ले जाए.
_ वो पूरी ज़िंदगी खुशी की तलाश करता है.
_ यही है जीवन का प्रयोजन.
_ कोई शिक्षा प्राप्त करता है.
_ कोई धन कमाता है.
_ कोई देशाटन करता है.
_ कोई परिवार बसाता है.
_ कोई दूसरों की मदद करता है.
_ भाव एक ही है “खुशी”
_ आदमी खुश रहना चाहता है.
_ वो एक खुशहाल संसार देखना चाहता है.
_ साधु-संत ईश्वर के दर्शन पा कर खुश होते हैं.
_ गृहस्थ अपने सांसारिक भोग में खुश होते हैं.
_ सबको खुशी चाहिए “सिर्फ खुशी”
_ हम इस संसार में जो कुछ भी करते हैं, उनके पीछे एक ही मकसद है खुशी..
_ हंसी ही है जीवन का प्रयोजन.
_ तुम सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो जीवन व्यर्थ है.
_ प्राप्ति के पीछे का भाव है “खुशी”
_ कोई पर्वत पर चढ़ कर खुश होता है, कोई समंदर में गोता लगा कर.
_एक ऊपर खुश है, दूसरा नीचे खुश.
मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.

_ क्रोध, नाराज़गी, आक्रोश, जिद, नफ़रत, घृणा और ईर्ष्या इंसान को ठूंठ बना देती है.
_ ऐसा शख़्स जहां से कोई कोंपल नहीं फूटती.
_ दूसरों से नफ़रत करते करते इंसान इतना नेगेटिव हो जाता है कि अपनी खुशियों में ख़ुद आग लगा लेता है.
_ रब हर किसी को अलग-अलग चीज़ों से नवाज़ता है..
_ लेकिन उनसे खुश होने की बजाय इंसान इस बात से परेशान रहता है कि दूसरों के पास कुछ और क्यों है.
_ इंसान बने रहने के लिए जरूरी है कि हमारे अंदर भावनाएं जिंदा रहें, दूसरों के लिए भी और रिश्तों के लिए भी..
_ मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.
_ जो सरल और सहज होता है वो सुकूं में होता है. सुकूं तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है कि हम खुश रहें.
_ किसी की खुशियां देख के अपना खून ना जलाएं.
_ अच्छी बातें करिए, अच्छा सोचिए, मुस्कुराइए. क्योंकि मुस्कुराने से मुश्किलें आसान होती हैं.
सभी प्रकार के दुखों का एकमात्र कारण गलत समझ है.

_ बाहर की कोई भी चीज़ हमें दुःख नहीं पहुँचाती.
_ यह हमारी अपनी मूर्खता ही है जो हमें कष्ट पहुँचाती है.
_ हम उन लोगों या चीज़ों को पकड़कर रखते हैं जो हमारी नहीं हैं..
_ और जब वे चले जाते हैं तो हम उन्हें दोष देते हैं.
– जब हम किसी बात को शिद्दत से [intensely] महसूस करते हैं..
_ तो हम पूरी ताकत से उसका जवाब तलाशते हैं.
_ तब हम सही मास्टर के संपर्क में आते हैं..
_ जो हमें हमारी गैरबराबरी का एहसास कराता है.
_ सही समझ के संपर्क में आने वाला दर्द अहसास की ओर ले जाता है.
_ इसलिए हमें अपने आसपास बुद्धिमान लोगों का साथ रखना चाहिए.
_ विषाद (दर्द) का सरल अर्थ है कि व्यक्ति ने आंतरिक संतुलन खो दिया है.
_ व्यक्ति अपने केंद्र से भटक गया है और बाहरी दृष्टिकोण से व्यवहार कर रहा है.
_ इसलिए, इससे पहले कि हम कोई भी कार्य करें, पहले अपना संतुलन खोजें..
_ दुनिया में खुशी लाने की कुंजी खुश रहना है..!!
— हम इसलिए नही रोते कि हम कमजोर है,
_बल्कि इसलिए.. क्योंकि हम जानते ही नही..
_ इसके आगे क्या किया जा सकता है,
_ आंसू विकल्पहीनता से उपजी वह विवशता है..
_ जहां आप स्वयं को सबसे अकेले पाते हैं.
_जहां आप ढंग से स्वयं को समझा नहीं पाते है,
_ खैर !…रोना नियति नहीं हो सकती..
_नियति तो विवशता है…!
मनुष्य की सबसे बड़ी भूलों में से एक यह है कि वह खुशी को हमेशा अपने वर्तमान से आगे कहीं और तलाशता है.

_ ऐसा लगता है मानो खुशी कोई मंज़िल है, जिसे पाने के लिए हम लगातार दौड़ रहे हैं. _ लेकिन क्या कभी किसी ने इस दौड़ में रुककर यह सोचा है कि जो कुछ हमारे पास है, वही कहीं हमारी खुशी की असली वजह हो सकता है ?
_ एक नंगे पांव आदमी के लिए खुशी बस एक जोड़ी जूते होती है.
_ वह ठंडी ज़मीन, गर्म पत्थरों और काँटों से बचने की कल्पना करता है, और उसकी सबसे बड़ी इच्छा होती है – सिर्फ एक जोड़ी जूते,,
_ पर जब वही आदमी पुराने जूते पहनने लगता है, तो अब उसकी नजर नए जूतों पर टिक जाती है.
_ फिर एक दिन जब उसे नए जूते मिल जाते हैं, तो उसकी खुशी ज्यादा देर टिकती नहीं – अब उसे और सुंदर, और महंगे जूते चाहिए होते हैं.
_ इंसान की यही फितरत है – वह जो नहीं है, उसी को चाहता है.
_ पर क्या हमने कभी उस आदमी के बारे में सोचा है, जिसके पास पैर ही नहीं हैं ?
_ जिसके लिए नंगे पाँव चलना भी एक सपना है ?
_ उस व्यक्ति के लिए नंगे पाँव चलना भी एक वरदान है, जो दूसरों के लिए दुख का कारण है.
_ यह जीवन का बड़ा ही सादा, लेकिन गहरा सत्य है – खुशी उस चीज़ में नहीं होती जो हमें नहीं मिली, बल्कि उसमें होती है.. जो हमारे पास है.
_ अगर हम अपनी नजरें अपनी इच्छाओं से हटाकर अपनी उपलब्धियों की ओर मोड़ लें, तो हमें एहसास होगा कि हम कितने समृद्ध हैं.
_ खुशी कोई भौतिक वस्तु नहीं है, जिसे तौलकर खरीदा जा सके.
_ यह एक दृष्टिकोण है, एक सोच है, एक एहसास है.
_ इसलिए, जीवन को तौलने का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि हमारे पास क्या नहीं है, बल्कि यह होना चाहिए कि.. हमारे पास कितना कुछ है.!!
“मेरे साथ जीवन में ऐसा क्यों हो रहा है ?” से ” जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?” ये सोचना चाहिए..??

_ बड़े होकर हम सभी विडम्बनाओं, विश्वासघातों, हानि, परित्याग, दिल टूटने और हर छोटी-छोटी बातों से गुजरते हैं, _जो हमारे दिल में एक फूल को मुरझा देती हैं.
_ लेकिन हाल के दिनों में मैंने एक बात सीखी है कि मुझे मुझसे सहानुभूति रखना बंद करने की जरूरत है और इसके बजाय मुझे उन सवालों पर सवाल उठाने की जरूरत है.
_ जीवन में ऐसा दौर भी आता है _जहां आप वास्तव में कड़ी मेहनत करने के बाद भी हार जाते हैं.
_ जिन लोगों की आप वास्तव में प्रशंसा करते हैं, वे इतना प्यार करने के बाद भी आपको छोड़ देंगे.
_ जब पार्टी खत्म हो जाती है उसके बाद भी हम अकेला महसूस करते हैं, तो यह एक संकेत है कि आपको आत्म प्रेम की सख्त जरूरत है.
_ इस बात पर मत रोओ कि जीवन तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है,; _ प्रश्न करें कि जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?
_ आपके पास अपना खुशी का समय था ; _ तो फिर ज़िंदगी आपको इससे गुज़रवाकर क्या बताने की कोशिश कर रही है ?
_ आप देखेंगे, आप अपने 90% आंसुओं को उन लोगों पर बर्बाद करने के बजाय बचाएंगे _ जो आपकी भावना के लायक भी नहीं हैं.
_ ” मुझे पता है कि आप खुश रहने के लायक हो.”
कुछ खुशियां रेत की तरह होती हैं, अपनी मुट्ठियों को जितनी सख्ती से भींचो उतनी ही तेजी से जीवन से फिसलती जाती हैं। कुछ बर्फ की तरह, जो आंसू की बूंद बनकर जीवन में दस्तक देती हैं, और बर्फ बनकर पलकों पर एक लम्बे वक़्त के लिए जम सी जाती हैं।

इसके अलावा खुशियों का कोई अन्य विकल्प मुझे नहीं दिखाई देता। हम ना तो अपनी मुट्ठियों की रेत संभाल सकते हैं, और ना ही पलकों पर जमी बर्फ को, और ना ही उस जिन्दगी को, जिसे अक्सर अपना कहने की भूल करते नहीं थकते ! और जरा सी आंखें नम क्या हुईं ऐसा लगता है, रेगिस्तान में बाढ़ आ गई है।
जिन्दगी को हम जिन आंखों में भरना चाहते हैं, उन आंखों में कहां और कितना भर पाते हैं ? जिस जिन्दगी को हम अपना कह सकें उसे कब और कितना जी पाते हैं ?
डबडबाई आंखों की कोर से आंसू की एक बूंद क्या टूटी, जिन्दगी की हर उम्मीद अपना रंग खो देती है। और सामने सिर्फ धुधलका होता है, हर तस्वीर धुंधली नजर आती है, फिर भी जिन्दगी यहीं नहीं थम जाती, हम जीना नहीं छोड़ देते? मानाकि हम सब एक डूबती नांव में सवार हैं। पर आपकी अपनी होंठों की मुस्कराहटो को आपसे कोई नहीं छीन सकता है, मुस्कराहटें बहुत दूर जाकर भी एक ना एक दिन हमारे होंठों पर लौट ही आती हैं।
इसीलिए तो किसी ने कहा है कि- खुश रहना महज एक चॉइस है जिसे कोई भी चुन सकता है। फिर हर्ज ही क्या है, आप भी खुश रहना चुनिए और हमेशा हंसते और मुस्कुराते रहिए।
– संजय शेफर्ड
कम समय देंगे तो मग़रूर समझे जाएँगे, ज़ियादा समय देंगे तो नाकारा समझे जाएँगे, संतुलित समय देंगे तो अवसरवादी समझे जाएँगे.

_ विनम्र होंगे तो कमज़ोर या धूर्त समझे जाएँगे.
_ औरों को आगे बढ़ने देंगे तो अक्षम समझे जाएँगे.
_ ख़ुद से आगे बढ़कर, मुआफ़ी माँग लेंगे तो दोषी समझे जाएँगे.
_ आप केवल अपनी ओर से प्रयास करके किसी को ख़ुश नहीं कर सकते.
_ मायने ये रखता है कि सामने वाला आप में ख़ुशी ढूंढ पा रहा है या नहीं, और अगर नहीं, तो इंसान ने इतनी संवदेनशीलता अभी विकसित नहीं की है कि अपने सुखवाद से परे जाकर, किसी के प्रयासों में ख़ुशी ढूँढ सके.!!
– Sahil Tyagi
दुनिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो दूसरों की मोहब्बत व खुशी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं और बदले में हमेशा ही खाली हाथ रहते हैं.

_ कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ पा लेना चाहते हैं जब कुछ देने की बात आती है तो अपना मुँह मोड़ लेते हैं.
_ ऐसे लोग तो बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं मगर सन्तुष्ट कभी नहीं हो पाते.
_ जिन्होंने इन दोनों को बैलेंस कर लिया.. वही सही मायने में ज़िन्दगी जी रहा है और तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद भी वो खुश व सन्तुष्ट है….
_ इसलिए हर किसी को खुश रखने के साथ-साथ अपनी भी खुशी अहम है,
_ खुद के अस्तित्व को खत्म करके हर किसी को खुश रखना ये ज़िन्दगी नहीं है….
– हेसाम
खुश होना और खुश रहना भी एक कला है,

_ कोई इंसान बहुत कठोर होता है तो कोई इंसान बेहद कोमल
_ लेकिन खुशियां सभी के लिए एक ही भाव लाती है
_ बशर्ते हम छोटी छोटी बातों या चीजों में खुशियां ढूंढें
_ किसी को चिड़ियों का चहचहाना तो
_ किसी को कलियों का खिलना खुशी दे जाता है
_ लेकिन किसी को अपनों का होना भी खुशी नहीं देता
_ क्योंकि हमने अपने अंदर इतने गम व गुस्सा जब्त किये हैं
_ जो हर वक्त सिर्फ तकलीफ ही देता है
_ ऐसे वक्त में न परिवार का कोई सदस्य खुशियां दे सकता है
_ न ही दोस्तों का प्यार खुशियां महसूस करा पाती है
_ फिर जब हम सड़कों पर उन गरीब बच्चों को देखते हैं
_ जो धूल मिट्टी में खेल रहे हैं.. मुस्कुरा रहे हैं
_ उनकी मुस्कुराहट असली होती है..
_ उन पौधों को भी पनपते और खिलते हुए देखा है
_ जहां का माहौल साजगार भी नहीं है
_ फिर भी वो खिल रहें है और खुशबू बिखेर रहे हैं
_ लेकिन हम इंसान बेहद नाशुक्रे हैं
_ हम जीवन भर उन चीजों के पीछे भागते रहते है
_ जो मेरी कभी न थी, लेकिन उस चीज के लिए जरूर
_ गमों को अपना साथी बना लिया है
_ हमने जरूर उनको दरकिनार किया है… जो हमारे पास है
_ एक अंजान खुशी की तलाश में अपनों के लिए
_ न चाहते हुए भी सिर्फ गम ही छोड़े है
_ वैसे भी इंसानी फितरत है..
_ जो अपना न हो जो हासिल न किया जा सके
_ वो बेहद बेशकीमती होते है
_ जो अपने पास होता है.. उसकी कभी कद्र नहीं होती
_ खुशियां न बाजार से खरीदी जा सकती हैं
_ न ही किसी के रहमों करम से हासिल की जा सकती है
_ खुशियों की तलाश करना बेमानी है
_ खुशियां हमारे आस- पास ही होती है
_ जिस दिन हम ईमानदारी से अपने आस पास की चीजों
_ और लोगों को देखना शुरू कर देंगे
_ उस दिन खुशियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
_ बहुत सी बीमारियों का इलाज हैं प्राकृतिक मुस्कुराहट
_ हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए और स्वस्थ रहिए
_ क्या पता जिंदगी कल हो न हो
_ लेकिन आज तो सिर्फ हमारा है उसको जीना शुरू कर दीजिए…..
– हेसाम
यहाँ खुशी, सुकून और ज़िंदगी की रफ़्तार साथ-साथ बह रही है 💙🌿

_ जहाँ दिल मुस्कुराता है, वहाँ मंज़िल अपने आप आसान लगने लगती है ✨
_ थोड़ा ठहरो, साँस लो, और याद रखो — ज़िंदगी भी इसी तरह बहती है, रुकती नहीं 💪😊
_ आज की खुशी, कल की ताक़त बन जाए 💫
_ बस चलते रहो… और मुस्कुराते रहो.!!😄🌈
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी शोर नहीं करती…

_ बस खामोशी में सिखा देती है कि छोटी सी जगह, बड़ा सा सुकून ही असली खुशी है ✨⛪
_ पहाड़ों की गोद, समंदर की हवा और दिल में भरोसा — यही तो ज़िंदगी है 🌊🌸
_ चलते रहो, मुस्कुराते रहो… क्योंकि हर सुबह एक नया मौका लेकर आती है ☀️💪
– Cycle Baba
हरी ज़मीन और छोटा-सा टेंट… लेकिन एहसास बहुत बड़ा है 🌍⛺

_ जहाँ सुकून भी है, हिम्मत भी और आज़ादी भी 💚
_ कभी-कभी ज़िंदगी में बस इतना ही चाहिए— शोर से दूर, खुद के करीब ✨
_ हर सफ़र हमें ये सिखाता है कि खुशियाँ जगह नहीं, नज़रिया बदलने से मिलती हैं.🌿
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी भी इस बर्फ़ीली झील जैसी हो जाती है…

ठंडी, शांत और थोड़ी भारी ❄️ लेकिन याद रखो, इसी सन्नाटे में अंदर कहीं
नई शुरुआत पिघल रही होती है 🌱✨
– Cycle Baba
हालात कठिन, रास्ता अनजान, लेकिन मुस्कुराकर चलते रहो,

मंज़िल खुद रास्ता बना लेती है 🌍✨
– Cycle Baba
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