सुविचार – प्रतिक्रिया – रिएक्ट – React- 085

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जब भी विपरीत परिस्थिति आपके सामने आए, दो मिनट रुक कर सोचें कि

मेरी कौन- सी प्रतिक्रिया मुझे सही दिशा में ले जाएगी.

इंसान के असफल होने का एक प्रमुख कारण _

_उसका बिना सोचे समझे _ प्रतिक्रिया देने की आदत है.

जब आप प्रतिक्रिया करने से पहले रुकते हैं तो _

_ आप दस गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं..

शांत होकर सोचने से हर समस्या का समाधान मिल जाता है.

जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने की जगह.. सोच- विचार कर प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

जीवन एक बड़ी यात्रा है, अतः हमें हर किसी को जवाब देने की..

_ और प्रत्येक चीज़ पर प्रतिक्रिया करने की कोई जरुरत नहीं है,,

_ जिस यात्रा का चुनाव हमने स्वयं किया हो, उसके उतार चढ़ाव हमें ही स्वीकारने होंगे..!!

किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लोभ को यदि कुछ वक़्त के लिए टाल दिया जाए, तो बाद में सोचने पर अपनी तुच्छता/महत्वहीनता को आसानी से स्वीकार किया जा सकता है.

_ क्योंकि जब हम लोगों को समझने लगते हैं तो शांत होने लगते हैं.!!

सुविचार – पर्व – त्यौहार – उत्सव – उल्लास – हर्षोल्लास दिवस -समारोह – फेस्टिवल- Festival – 084

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जिस दिन आपने खुल कर के अपनी जिंदगी जी ली बस वही त्यौहार है…

..बाकी सब कैलेंडर की डेट्स हैं…

** कोई भी उत्सव इतना खास नहीं होता, अच्छे से जीया गया जीवन ही खास होता है..!!

_ जिंदा रहना सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर मुझे अपने कपड़े या अन्य चीजें किसी और खास मौके के लिए क्यों बचाकर रखना चाहिए ?
“ज़िंदगी ही जब सबसे बड़ा अवसर है, तो हर दिन को खास मानकर जीना भी एक समझदारी है –
कल के लिए बचाया गया ‘आज’ अक्सर अधूरा रह जाता है.”
_ अक्सर हम जीवन को भविष्य के किसी “परफेक्ट दिन” के लिए रोक देते हैं,
और आज को बस रिहर्सल मानकर निकाल देते हैं.
_ अगर सच में मान लें कि ‘जिन्दा रहना ही सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर –
अच्छे कपड़े “किसी दिन” नहीं, आज के लिए हैं,
पसंदीदा जूते किसी समारोह के लिए नहीं, आज की चाल के लिए हैं, महक किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद को महसूस कराने के लिए है.
_ हम चीज़ें बचाकर इसलिए रखते हैं.. क्योंकि भीतर कहीं डर होता है –
“कहीं ये पल ज़ाया न हो जाए”
_ पर सच्चाई उलटी है –
पल चीज़ों के लिए नहीं होते, चीज़ें पलों के लिए होती हैं.
_ जो जीवन को टालता है,
वह धीरे-धीरे खुद को भी टालने लगता है.
_ और एक दिन समझ आता है – हमने सब संभाल कर रखा था… सिर्फ़ जीना भूल गए थे.
_ आज अगर जी रहे हो, तो आज ही अवसर है.
_ बाकी सब सिर्फ़ तारीख़ें.!!
त्यौहार, पर्व, उत्सव, जीवन में खुशी लाते हैं.

_हमें ये खुशी के अवसर कभी नहीं छोड़ने चाहिए.!!
त्यौहार ख़त्म हो गए हैं अब, अब सिर्फ तारीखें बची हैं.!!
जीवन एक यात्रा है, और यह यात्रा अकेले नहीं की जाती.. इसे उत्सव बनाइए..!

_ जब किसी के साथ हैं, तो सिर्फ़ शारीरिक रूप से ही नहीं, मन का साथ दीजिए.. क्योंकि असली साथ वही है.!!

उत्सव का कारण कभी भी और हर समय बनाया जा सकता है.
जीवन सुंदर है उन लोगों के कारण _ जो साधारण खुशियों को बड़े उत्सवों में बदलने की कला जानते हैं.
प्रसन्न रहना, संतुष्ट रहना, शांत रहना, उत्साहित रहना, जीवन उत्सव के रंग हैं.

इसलिए हर पल को जी भरकर जीओ, हर दिन महोत्सव है.

जब हम सार्थक जीवन [meaningful life] जीते हैं, तो हमें किसी उत्सव का इंतजार नहीं करना पड़ता,

_ हमारे जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि एक उत्सव [celebration] होती है.!!
पहले त्यौहार में उतना थोड़ा भी बहुत ज्यादा होता था,

_ _ अब बहुत ज्यादा में उतना बहुत की खुशी गुम सी है..!!

लोग अगले ही दिन भूल जाते हैं कि कल कोई उत्सव भी था..

_ लोग कितने प्रतिबद्ध [Committed] हैं अपने-अपने दुखों में लौटने के लिए.!!

त्यौहार, पर्व, उत्सव, चाहे उनका ताल्लुक देश से हो या व्यक्तिगत खास अवसरों से, जीवन में खुशियाँ लाते हैं.

हमें ये खुशी के अवसर कभी नहीं छोड़ने चाहिए..

_ जब हम इन्हें सेलिब्रेट करते हैं तो हमारे ख़ुशी के पल बढ़ जाते हैं.

किसी भी पर्व, त्यौहार या ख़ास अवसर में ऐसा कुछ न करें ..जिससे किसी की या आपकी ही ज़िंदगी तबाह हो जाए.

_ आप ख़ास अवसर को मनाएं, पूरे हर्षोल्लास से मनाएं.
_ लेकिन सावधानी का साथ ..एक पल को भी न छोड़ें.
_ जीवन अनमोल है, और ज़रा-सी लापरवाही जीवनभर का दर्द दे सकती है.
अब तो सभी त्यौहार हर साल आते हैं, चुपके से गुजर जाते हैं, _ऐसा क्यों हो रहा है   पिछले कई वर्षों से ?

पहले अपनी भीनी-भीनी खुशबू छोड़ कर जाते थे.

_ और अब ? अब क्या हो गया है जो यह त्यौहार पहले जैसे नहीं रहे ?

अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है, जो थोड़ी-बहुत खुशी दे जाता है ; _ चलिए, इसी खुशी को मना लूँ मैं..!!

_ त्यौहार खत्म होने के बाद के लम्हें को झेलना काफी कष्टकारी होता है.. खैर,

_ हम सभी जानते है कि जीवन में खुशियों का पल क्षण भर के लिए आता है.!!

त्योहारों के मायने बदल गए हैं, लोग बदल गए हैं, रिश्ते बदल गए और खुशियाँ तो ख़ैर.!
एक मेरे बचपन के त्यौहार थे..

_ अब तो जिंदगी की भागदौड़ ने सबकुछ खत्म कर दिया है…
_ जो प्रेम आपस में बचपन में था,, वो बड़े होने पर न जाने कहां खो जाता है…
_ क्या सच में हम समझदार होते हैं,, या बेवकूफ बनते चले जाते हैं…
_ मगर वो बचपन के त्यौहार काफी पीछे छूट चुके हैं..
_ अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है.!!
_ अब तो ऐसा लगने लगा है कि ये दिन आया ही क्यों.. और जब आ ही गया तो जल्दी बीत क्यों नहीं रहा.. _ फिर लगने लगता है कि ये फेस्टिवल जश्न के लिए नहीं आते.. बल्कि ये याद दिलाने आते हैं कि अब खुशी भी अजनबी लगने लगी है.!!
अब तो किसी भी फेस्टिवल का नाम सुनते ही अजीब सा एहसास होने लगता है,
_ और न जाने क्यों मेरे अंदर एक बेचैनी सी पैदा हो जाती है.

_ वो नीरस आवाज़ें अब मेरे कानों में मिठास नहीं लातीं, हँसी और खुशी का शोर अब बोझिल सा लगता है.
_ ऐसा लगता है मानो हर कोई बस खुशी, प्यार और अपनापन का अभिनय कर रहा है.
_ मुझे नहीं पता कि मुझे किससे नफ़रत है: लोगों से या इन रस्मों के पीछे छिपे झूठे सुकून से..
_ मैं बस इतना जानता हूँ कि मेरा दिल अब इन बंधनों को नहीं, सिर्फ़ सच्चे जुड़ाव को चाहता है.!!
ना पहले जैसी खुशी है न पहले जैसे लोग न पहले जैसा समय.. 
_ जैसे जैसे समय बीत रहा.. भावनाएं निर्जीव होती जा रही हैं.!!
हिन्दुओं में इतने त्यौहार होते हैं (अन्यों का पता नहीं) कि सब मनाने बैठो तो आदमी जीवन में और कुछ कर ही नहीं सकता..

_ करने लायक रहता ही नहीं..
_ किसी के पास इतना समय कहाँ है ?
_ हम सिर्फ़ जन्माष्टमी, होली, दिवाली मनाते हैं.!!
पर्व- त्योहार होते रहना चाहिए..

_ नहीं तो निगेटिविटी और नीरसता आ जायेगी।
_ और कितने लोगों के आमदनी पर फ़र्क पड़ने लगेगा;
_ हर समय पर्व- त्यौहार का ध्यान रहता है,
_ बड़ी बड़ी कम्पनियां ही नहीं छोटे मोटे धन्धे वालों को भी इन्तजार रहता है,
_ पर्व- त्यौहार का कि थोड़ा ज्यादा और महंगी बिक्री होगी और कुछ पैसे बच जायेंगे।
_ त्यौहार के बहाने ही सही कपड़े और श्रृंगार के सामान के साथ कुछ जरूरी सामान भी आ जायेगा..!!
_ जश्न की उम्मीद ही जिन्दगी को जीने के लिये सबसे मजबूत कड़ी है, _ वरना तो बेरंग जिन्दगी जीने के कोई मायने नहीं.!!!
कोई भी दिवस हो, कोई भी कार्यक्रम हो ..उसमें लगने वाला समय ..आटे में नमक जितना होना चाहिए,

_ यानी मुख्य कार्य कभी बाधित न हो ..इसका खयाल रखना चाहिए..
_त्योहार, दिवस, पर्व मनाइए …पर ध्यान रहे इसे गौण [secondary] और जीवन को प्रमुख स्थान दें..
..बाकी बड़ी बड़ी बातें, तर्क करने के लिए कुछ भी कहा जा सकता है..
_ अपवादों की बात नहीं करिए, अधिकतर क्या हो रहा ..उसपर विचार करिए न !!…
— हमें न गरीबी चाहिए और न ही अमीरी;
_हमें हमारे लिये सुविधाजनक जीवन चाहिए.!!
त्योहारों को मनाना हमारी परम्परा है लेकिन अब उनमें आवश्यक परिवर्तन ज़रूरी हैं.

पानी, दूध, अनाज, विद्युत ऊर्जा [ इलेक्ट्रिक ] या पेट्रोल- डीज़ल की बर्बादी और पर्यावरण की अशुद्धता- ऐसी समस्या है,

_जिस पर हम यदि गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हमारी लापरवाही को भुगतेगी.

_हमें अपने ‘साक्षर’ नहीं, सुशिक्षित होने का व्यवहार करना चाहिए.

_एक कहावत है- `बचाया हुआ यानी कमाया हुआ.’

उत्सव क्या है ? एक दिन का उल्लास ;

_ हम खुश ना होकर भी खुश होने और दिखने का अभिनय कर रहे होते हैं.
_ “जिससे भी बात करो तो सब परेशान जैसे कि इस दुनिया में कोई खुश हैं ही नहीं..”
__लेकिन जब आपकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे किरदार हों _ जाने अनजाने में वो आपको उस अपनेपन का एहसास करा दें, जो खून के रिश्ते ताउम्र नहीं करा पाते..
_ तो समझिए वही दिन उत्सव है और हर दिन उल्लास..!!
सब कहते हैं कि त्योहार है तो परिवार के सभी लोगों को एक साथ रहना चाहिए और मिलकर त्योहार मनाना चाहिए..

_ लेकिन मेरा मानना इससे विपरीत है,
_ जब सभी लोग एक साथ होते हैं तो बेवजह की बातें ज्यादा होती हैं और इससे विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है,
_ खासकर तब जब कुछ लोग समझदार न हों.!!
– Nirarthak Nirarthak

सुविचार – संगीत – Music – 083

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संगीत आत्मा को रोजमर्रा की जिंदगी की धूल से धो देता है.
जो भारी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है.
बाहर का संगीत तब ही महत्वपूर्ण है..

_ जब वो तुम्हें ” तुम्हारे अंदर के संगीत की याद दिलाए “

संगीत सुनना मानसिक और आत्मिक रूप से किसी से जुड़ने जैसा है.

अधिकांश समय, हम संगीत सुनते हैं क्योंकि यह हमें शांत करता है या हमारी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करता है.

लेकिन कभी-कभी, संगीत अन्य चीजों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है – किसी ऐसे व्यक्ति में रुचि दिखाने के लिए जिसे हम पसंद करते हैं या प्यार करते हैं,

हमारी आत्मा को शांत करने के लिए इसे सुनना, हमें दूसरी जगह ले जाना और हमारी समस्याओं को दूर करना..!!

इसके अलावा, जहाँ हम अपने विचारों को नहीं सुन सकते, केवल महसूस कर सकते हैं और इसका आनंद ले सकते हैं.

आजकल लोगों ने गाना- संगीत सुनना ही बंद-सा कर दिया है,

_ लोग तनावपूर्ण जीवन के इतने आदी हो गए हैं कि वे उन रुचियों को भूल गए हैं..
_ जो कभी उन्हें खुशी देती थीं.!!
कुछ गाने-म्यूजिक हमारे दिलो-दिमाग़ में ऐसे बस जाते हैं मानो हमारी ही अधूरी कहानी का हिस्सा हों.
_ वो वक़्त-बेवक़्त हमारी ज़बान पर आते हैं, कभी किसी पुराने दर्द को छू जाते हैं, तो कभी एक अजीब सा सुकून दे जाते हैं.
 _ न जाने क्यों, पर कुछ धुनें शब्दों से ज़्यादा हमें समझती हैं.
संगीत भी दवा का काम करता है बहुत बार..

_ जब मन भारी हो, उदास हो, हताश हो, और जब खुशी से पागल हो तब भी …!

🎶Music Therapy🎶

“जब सुर और ताल से मन शांत हो, तो शरीर अपने आप ठीक होने लगता है.”
_ “Music सिर्फ सुनने की चीज नहीं, बल्कि एक उपचार है जो दिल और दिमाग दोनों को छू लेता है.”

जीवन संगीत है,  सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है.

Life is music. When this music is played in a melodious manner, it is pleasing and sweet.

“संगीत में अस्तित्व के हर शानदार पहलू को उत्साहित रूप से व्यक्त करने की क्षमता है, जबकि डाउनबीट पर उस पीड़ा को व्यक्त करने की क्षमता है जो एक इंसान समय की क्षणभंगुर प्रकृति और जीने और मरने की रहस्यमय यातना को समझने पर अनुभव करता है.

संगीत जीवन के प्रतीकों और चरणों, अस्तित्व और गैर-अस्तित्व दोनों को संप्रेषित करने की अपनी क्षमता में अकेला है.

“Music has the ability to express in the upbeat every brilliant aspect of existence, while on the downbeat convey the anguish that a human being experiences when apprehending the fleeting nature of time, and the mysterious torture of living and dying.

Music stands alone in its ability to communicate the symbols and phases of life, both being and nonbeing.” – Kilroy J. Oldster

सुविचार – नवाब – बादशाह – बादशाहत – बादशाही – अलमस्त – फ़क़ीर – फ़कीर – फकीर – फ़क़ीरी – फ़कीरी – फकीरी – 082

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अपनी ग़ैरत के लिए फ़ाक़ा कशी भी मंज़ूर,

तेरी शर्तों पे ख़ज़ाना भी नहीं चाहते हम – हसीब सोज़

जीवन जीने के केवल दो ही तरीके हैं… या तो ऐसे चलो जैसे तुम राजा हो या ऐसे चलो जैसे तुम्हें परवाह ही नहीं कि राजा कौन है.

There are only two ways of living life…
Walk like you are the King or Walk like you don’t care who is the king.
– Sanjay Shukla
फकीरों को कोई बर्दाश्त नहीं करता, असल में सच्चे फकीर कहीं भी बर्दाश्त नहीं किये जाते _ क्योंकि सच्चे फकीरों की सच्चाई लोगों को काटती है ;

_ उनकी सच्चाई से लोगों के झूठ नंगे हो जाते हैं, उनकी सच्चाई से लोगों के मुखौटे गिर जाते हैं.

फ़क़ीर : जिसे न दुख से मतलब न सुख से, न दिन से न रात से, न सम्मान से मतलब न ही अपमान, न किसी के पाने की लालसा न किसी के खोने का ग़म !!

_ जिसकी सांसारिक इच्छाएं मिट गईं हो, जिसे सभी मनुष्यों में एक ही रब दिखे, जिसे सारा संसार एक लगे, जो केवल ब्रह्म की खोज में हो…
शायद यही वैराग्य है और जिनमें ये गुण हैं शायद वही बैरागी ….. अब और किसी के अनुसार और क्या हो सकता है ये वही जाने.!!
फ़क़ीर : जो अपनी मस्त धुन में मदमस्त मस्तमौला है, जिसे दुनिया के रंग में रंगने का कोई शौक नहीं,

_ जो ख़ुद की ज़िन्दगी ख़ुद के बनाए तरीके से जीना पसंद करता है..!!

ये शक्ल ये सूरत सब क़र्ज़ पे ले रक्खी है, वक़्त आने पर इसके मालिक को लौटाना होगा.!!
किस्मत भी बादशाह उसी को बनाती है ; जो खुद कुछ करने का हुनर रखता है.
दिल अगर फ़क़ीरी पे उतर आए,,,_तो उलझ पड़ता है बादशाहों से….!!!
ये फकीरों की महफ़िल है चले आओ, हम जैसे लोग हैसियत नहीं पूछते.!!
न ढूंढ हमें दुनिया की भीड़ मैं, हम फ़क़ीर हैं हमेशा तन्हा ही मिलते हैं .!!
हम फ़क़ीर मिलते हैं टूट कर और बिछड़ते हैं शान से..!!
सलामत रहे गुरुर आपका, हम तो वैसे भी फ़क़ीर ठहरे..!!
बादशाहों का इंतज़ार करे.. इतनी फुर्सत कहाँ फकीरों को..!!
अध्यात्म का वास्तविक रूप फक्कड़पन /फकीरी में ही है.-  इसे कोई नहीं बदल सकता.!!
पूछ के मेरा पता वक्त जाया न करो, मैं तो फ़क़ीर हूं जानें किधर जाऊंगा.!!
फकीरों की फ़कीरी पर मत जाइए,

_ उसके भीतर बहुत बेतरतीब सा एक शख्स रहता है कोई.!!

“मुझे भीख की खुशियां मंजूर नहीं, _ मैं जीता हूँ अपनी तकलीफों में भी नवाबों की तरह.”

_ किस्मत की गुलामी नहीं करता मैं, _ अपनी मेहनत का नवाब हूं मैं !

मेरी ग़ुरबत को देख कर रास्ता ना बदल मुर्शद,

_ मैं दिल का बादशाह हूँ, मुक़द्दर तो खुदा लिखता है..!!

जरुरी नहीं कि फकीर फटेहाल ही दिखे,

_ जेब वो जगह है जिसे कोई न देख पाया.!!

हम फकीरों की सूरत पर ना जाना, _ _ हम कई रूप धर लेते हैं !
गुनगुनाता जा रहा था एक फ़क़ीर, धूप रहती है ना साया देर तक..!!
वक्त के एक तमाचे की देर है प्यारे, मेरी फकीरी क्या तेरी बादशाही क्या..!!
अमीरी में क्या है जो फकीरी में नहीं, _ दुनिया मेरी है नहीं तो दुनिया तेरी भी नही.
हर मांगने वाले को फ़क़ीर कहते है पर इसका मतलब ये नही है के जो सिर्फ सड़को पर गली मोहल्लों में फिर कर मांगते हैं, _ वही सिर्फ फ़क़ीर कहलाते हैं,

असल में फ़क़ीर तो हम सब हैं जो कुछ न कुछ हर रोज़ खुदा से मांगते हैं, _ कभी अपनी ज़रूरतों की चीज़ें कभी अपनी ज़िंदगी की भीख, कभी अपनी खुशी की भीख,,,, तो फ़क़ीर हम सब हैं

_ बस हमारा मांगने का तरीका उन मांगने वालो से थोड़ा अलग है जो सड़को पर मांगते हैं और हम दिल मे मांगते हैं तो हम सब फ़क़ीर हैं.

जीवन को तो बेशर्त ही जिया जा सकता है, दूसरों की तो छोड़ें _ जीवन को अपनी भी शर्तों पर नहीं जिया जा सकता है.

जीवन की अपनी ही मौज है, और अपनी मौज में ही जीवन जिया जा सकता है, दूसरों की मौज में नहीं.

दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से तो बेहतर है कि अपनी ही मौज में फ़क़ीर हो जायें. दूसरों की शर्तों पर सम्राट बन कर कभी आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता, अपनी मौज में फ़क़ीर बन भी वो आनन्द मिलता है, जो दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से नहीं मिलता.

जरूरतों के मुताबिक जियो, _ ख़्वाहिश मुताबिक नहीं. _ क्यूंकि

_ जरुरत फ़क़ीर की भी पूरी हो जाती है, _ ख्वाहिश बादशाह की भी अधूरी रह जाती है.

” हम अपनी फ़क़ीरी में भी बादशाह रहे, _ यह उन लोगों को बहुत अखरा,

_ जो दौलत कमा कर भी गरीब रहे और हम, _ आज भी बादशाह हैं,”

ज़िन्दगी सब कुछ देकर भी, किसी ना किसी चीज के लिए _

_ फकीर बना कर ही रखती है..

किसी ने पूंछा … फकीर कौन होता है … !!

_ मैंने कहा …जिसका कोई नहीं और … जो सबका..!!

जिसका ये ऐलान है कि वो मज़े में है,

_ या तो वो फ़कीर है या फिर नशे में है.!!

सच ही कहा था मुझ से एक फ़क़ीर ने..

_ कि तुझे लोग अपना तो कहेंगे, पर कभी अपना नहीं मानेंगे !!

आप फकीरों से क्या लोगे, आप फकीरों को क्या दोगे..

_ कभी ज़िक्र ए यार आएगा, बार-बार मेरे बारे में सोचोगे..!!

फ़कीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब,

बादशाही का अन्दाज़ ख़ुद ब ख़ुद आ जायेगा.

दुसरो की शर्तों से सुल्तान बनने से अच्छा, _

_खुद की खुशी से फकीर बनना ज्यादा बेहतर है.

हमें मंजूर नही था तेरी शर्तों पर सुल्तान बनना, _

_ इसलिए मै अपनी सल्तनत का फकीर बन गया…

कभी फ़क़ीर, कभी शाह, कभी दिलनशीं की तरह.. _

_ जिन्दगी, हमसे रोज मिलती है अजनबी की तरह..

जिसका ये एलान है कि वो मजे में है,

_ या तो वो फ़कीर है या नशे में है..!!!

मैं खुल कर हंस रहा हूं फकीर होते हुए,

वो मुस्करा भी नहीं पाया अमीर होते हुए.

फकीरी न दे सकी मेरे ज़मीर को शिकस्त,

_ झुक कर हर किसी से नहीं मिलता हूँ मैं..!!

खुद से मिलना है तो दिल से फकीर बन जाओ,_

_ मिट सके ना जो वो पत्थर की लकीर बन जाओ..

भौतिक जीवन की विपदाएँ सहते रहता है,

_ घर में रह कर भी दिल से फ़क़ीर होता है..!!

सब कुछ चला जाएगा फिर भी मुस्कुराएंगे,

_ हम दिल में एक फ़क़ीर रखा करते हैं.!!

मंजिल उनको मुबारक जिन्हें होड़ है कुछ पाने की, _

_ हम तो अल्हड़ फ़क़ीर हैं जो हर दम सफ़र करते हैं !!

ज़लील कर के जिस फ़क़ीर को किया तूने रुखसत… _

_ वो भीख लेनें नहीं…. तुझे दुआएँ देने आता था.. 

फ़कीराना तबियत हैं…मिले तो बाँट देते हैं,

_ हमसे तो दुआओं की जमाखोरी नहीं होती….!!

फकीरी ला देती है हुनर चुप रहने का,

अमीरी जरा सी भी हो तो शोर बहुत करती है.

ये खाली जेबें, फ़कीर हुलिया, उदास आंखें..

_ हमें जो कोई गले लगाए, तो क्यों लगाए !!

हम गृहस्थ आश्रम में कर्म करते हुए बैराग और फ़क़ीर मन को रख सकते हैं,

_ सिर्फ आत्मबल की जरूरत है.!!

सुविचार – Financial Planning – वित्तीय योजना – 081

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जिंदगी एक खूबसूरत रेस की तरह है.. अगर आप स्थिति के हिसाब से खुद को अपग्रेड करते जा रहे हैं तो आप पीछे नहीं रहेंगे..!!
Financial planning का उद्देश्य हर risk को खत्म करना नहीं है, बल्कि इतनी व्यवस्था बनाना है कि पैसों की चिंता रोज दिमाग में जगह ना घेरे.!!

“Financial freedom का मतलब बहुत पैसा होना नहीं ; इतना होना है कि पैसा हर दिन हमारे मन की शांति ना चुरा ले.!!
योजना जितनी गुप्त रहेगी, सफलता उतनी ही उच्च रहेगी.!!
कुछ समय से Insurance / SIP / Mutual Fund / Equity को लेकर परफ़ेक्ट मार्केटिंग का माहौल बना हुआ है।

मैं थोड़ा सा assume कर रहा हूँ कि आपकी स्थिति १-२ हज़ार महीना इन्वेस्ट कर पाने की है तो ऐसे में आपकी आर्थिक हालत दयनीय वाली है। ऐसे में आपको किसी भी प्रोडक्ट में इन्वेस्ट करने से पहले ख़ुद में इन्वेस्ट करना है। हाँ जी आप भी एक प्रोडक्ट हैं।
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💸आपसे बड़ा कोई प्रोडक्ट नहीं है। ख़ुद की शिक्षा में इन्वेस्ट करिए, स्किल अपग्रेड में इन्वेस्ट करिए, ज़रूरी कोर्स करिए और सबसे पहले अपनी इनकम बढ़ाइए। बिना इनकम बढ़ाये हुए १ भी रुपये किसी भी स्कीम में डालने की आवश्यकता नहीं है।
ख़ुद से पूछिये आप इतना कम क्यों कमा रहे _ जबकि आप के ही साथ के बाक़ी लोग _ इथिकली आपसे कई गुना ज़्यादा कमा रहे।
शिक्षा से बड़ा कोई भी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट नहीं है। आज की शिक्षा इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट ही है, तो फर्स्ट इन्वेस्टमेंट शिक्षा को ही जाना चाहिए। स्किल अपग्रेड को ही जाना चाहिए।
अगर कम कमा रहे हैं और इतनी बुद्धि है कि भविष्य का सोच रहे तो शिक्षा से ज़्यादा कन्फर्म और हाई रिटर्न मिलेगा ही नहीं।
गारंटिड रिटर्न और अमीर बनने के लिए सबसे पहले शिक्षा में इन्वेस्ट करिए।
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💸जब शिक्षा से sufficient पैसे आने लगें तो अगले पड़ाव में हेल्थ इन्शुरन्स लीजिए।यंग हैं तो ३ लाख कवर वाला प्लान ले सकते हैं, उम्र बढ़ती जाए तो अपने शरीर के रिस्पांस के हिसाब से कवर बढ़ाते जाये, वैसे कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत हल्का सा ही बढ़ता है।
मैं इन्शुरन्स के ही डोमेन में कस्टमर सर्विस में रहा हूँ और इन्शुरन्स प्रॉडक्ट्स का USA से सर्टिफ़ाइड ट्रेनर हूँ तो डिटेल में इसके कारण फिर कभी समझा दूँगा।
मोटा मोटा ये समझिए छोटे क्लेम ही ज़्यादा आते हैं, जीवन में बहुत बड़ा लॉस होने के चांसेज बहुत कम होते हैं _ इसलिए कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ता।
_तो उम्र के हिसाब से और अपनी फ़िटनेस के हिसाब से कवर बढ़ाते रहिए। कम से कम ४५ की उम्र तक फ़िटनेस इतनी रखिए कि ३-५ लाख के कवर में ही आप cure कर जायें।
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💸जब हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिये और आपकी शिक्षा आपको ठीक ठाक कमा कर दे रही तो _ अगले चरण में आप पर जो भी लोग डिपेंडेंट हैं _ उनके लिये शिक्षा का स्कोप देखिए _ और उनको अपनी डिपेंडेंसी से बाहर करिए, _वो बस अपने भर का ही कमा लें _उतना भी आपके लिये बहुत है,
_ ये इसलिए भी आवश्यक है ताकि आपको अचानक कुछ हो भी तो आप भूत बनकर भी ये न सोचें कि वो लोग तो अब भूखों मर रहे हैं ।
यदि उनके केस में संभव नहीं है और डिपेंडेंसी लगातार आप पर ही रहनी है _ तो उनलोगों का भी हेल्थ इन्शुरन्स अपने साथ ख़रीदिए।
_आप पर डिपेंडेंट बंदा पहले तो ज़िंदा रहे बाक़ी सब चीज़ें उसके बाद में देखी जाती हैं।
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💸एक बार आप शिक्षित होकर ठीक ठाक कमा रहे और आप पर डिपेंडेंट लोग या तो आगे बढ़ गए हैं या फिर अभी आप पर ही डिपेंडेंट हैं। हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिया है।
_ तो अगला चरण है अपनी ख़ुद की फिजिकल फ़िटनेस पर इन्वेस्ट करिए, बेहतर भोजन ख़रीदिए, बेहतर कपड़े, बेहतर जूते, बेहतर घड़ी, बेहतर फ़ोन और बेहतर फिजीक, ये सब चीजें इसलिए इंपोर्टेंट हैं _ताकि आप पहले तो फिट रह कर लंबे समय तक बिना किसी बीमारी के नौकरी या व्यवसाय कर सकें।
_ पैसा अपने आप इनसे आता है, शिक्षा वाला क्लाज पहले लगायें। फिट, बेहतर दिखने वाले लोगों को बेहतर मौक़े मिलते हैं,
_किसी भी फ़ालतू फ़िलासफ़ी में पड़े बिना चुपचाप सबसे पहले अपने आप को बेहतर दिखने लायक़ बनाइए।
_नैचुरली जो मिला वो भगवान से मिला उसके बाद कपड़ों इत्यादि में इन्वेस्ट करके अपने आप को मार्केट में कंप्टीशन में लाइए।
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💸जब शिक्षा भी हो गई, शिक्षा से पैसा भी बन रहा है। हेल्थ भी कवर हो गई, आप पर डिपेंडेंट लोग भी सेट हो गये या फिर आप उनको कवर कर ले गये तब अगले चरण में टर्म इन्शुरन्स लेना है, _वो भी सिर्फ़ तब _जब आप पर कोई बहुत जायदा डिपेंडेंट है। अगर आप पर कोई डिपेंडेंट नहीं है तो टर्म insurance भी बकवास प्रोडक्ट है।
_उदाहरण के लिए कुछ एकल परिवारों में पति पत्नी दोनों बहुत अच्छे से सेटेल होते हैं और इंडिविजुअली भी कई करोड़ की हैसियत रखते हैं। उधर भी लोग टर्म इन्शुरन्स लेके सोचते हैं कि मैं मरूँगा तो मेरी बीवी को १ करोड़ मिलेगा तो उसके आगे के खर्चे चलेंगे। भाई साहब ऐसे घरों में सिर्फ़ आप इंपोर्टेंट हैं। आपके मरने के बाद का पैसा नहीं।
_ये समझना ज़रूरी है कि पैसा बहुत ज़्यादा आवश्यक चीज है लेकिन एक नियत अमाउंट से ज़्यादा नहीं।
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💸जब उपरोक्त सब कुछ हो जाये तो कुछ पैसा लिक्विडिटी के रूप में रखिए। ध्यान रखिए कभी भी एक बैंक में ५ लाख से ज़्यादा रुपये मत रखिए। जब ५ लाख से ज़्यादा होने लगे तो खाता एक अन्य बैंक में भी खुलवा कर वहाँ भी ५ लाख तक रखिए।
_assume करूँगा कि आप ऊपर लिखे स्टेप्स से अच्छा ख़ासा कमा रहे हैं और ऐसे में २५-३० लाख तक कैश होल्ड करना उचित है, उससे ज़्यादा नहीं।
_ज़्यादा नहीं कमा रहे तो कम से कम १ वर्ष तक नौकरी न करने पर आपका घर चल जाये इसलिए कैश immidiate डिस्पोजल पर होना चाहिये।
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💸जब उपरोक्त सब हो गया हो तो पहला इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी में करिए। लेकिन ध्यान रखिए प्रॉपर्टी उतनी ही दूर ख़रीदिए जहां आप जब मन करे तब पहुँच कर जाँच सकें। अव्वल तो प्रॉपर्टी वही ख़रीदिए जहां रहते हैं।
_ और जब वहाँ से मूव करिए तो प्रॉपर्टी बेच के आगे नई जगह पर ले लीजिए। प्रॉपर्टी से कभी दिल नहीं लगाना चाहिए।
_ दिल लगाने के लिए पत्नी/प्रेमिका, माता पिता, बच्चे, मित्र तथा पालतू जानवर बस इतना ही उचित है। _ अच्छा एक बात और, जिस घर में आप रहते हैं _ वो जबतक आप उसमे रहते हैं _ वो asset सिर्फ़ काग़ज़ों पर होती है, रियल लाइफ में liability ही होती है। क्योंकि जब तक आप उसमे रहेंगे तब तक बेच के encash नहीं ही कर सकते _ तो उसको कभी अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग में as a asset मत कैलकुलेट करिए।
_ वो बात अलग है बेचने पर उससे पैसा मिलता है, लेकिन अगर आप उसको बेचते हैं तो, तुरंत कोई ख़रीदनी भी पड़ती है, ताकि रेंट से बचें।
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💸उपरोक्त में से कोई भी काम करने के लिए आपको पूरा जीवन लगेगा ही नहीं। लोग ये कहेंगे ऊपर जो कुछ लिखा है उतना करने में ही तो पूरा जीवन निकल जाता है _ लेकिन उपरोक्त लिखा सब कुछ अगर सही सीक्वेंस में फॉलो किया जाये तो मात्र १० वर्ष में सब कुछ हो जाता है।
_ और अगर आपसे नहीं हुआ तो यक़ीन मानिए, आपने शिक्षा की इन्वेस्टमेंट में ही गड़बड़ करी है। फिर से कहूँगा स्टार्ट अगेन फ्रॉम एजुकेशन एंड स्किल अपग्रेड।
_ अंधा पैसा पे करने वाले लोग पड़े हुए हैं। बस राइट एम्प्लोयी चाहिए।
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💸अब जब उपरोक्त सब हो गया। आइये अब रथ को Insurance/SIP/Equity/Mutual Fund इत्यादि पर ले चलते हैं।
_ अब फ्री माइंड से किसी में भी इन्वेस्ट करिए, आप 15-20% तक रिटर्न अपने आप बनाने लगेंगे क्योंकि आपकी रिस्क लेने और होल्ड करने की क्षमता बढ़ी हुई होगी।
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💸ये लिखे हुए concepts मार्केट से एकदम उल्टे हैं लेकिन यही इफेक्टिव हैं। एक बार फिर से कहना चाहूँगा Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता।
_ जब भी आपको कोई confusion हो तो _ आप इसी लाइन को बार बार दोहराये कि “Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता”
_ Insurance सिर्फ़ और सिर्फ़ रिस्क कवर के लिए ख़रीदिए _ जोकि हेल्थ कवर के रूप में आप आलरेडी ख़रीद चुके हैं।
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💸इन्शुरन्स कितना लेना चाहिए, यदि Term इन्शुरन्स ले रहे हैं तो अपने जीवन में अनुमानित आप वर्तमान स्थितियों में जितना कमा सकते हैं _वही आपकी लिमिट होनी चाहिए। उससे ज़्यादा नहीं लेनी।
_ याद रखिए पैदा होने के बाद पूरी दुनिया के खर्चे उठाने का जिम्मा आपका नहीं है। कुछ जिम्मा बाक़ी पैदा हुए लोगों का भी है।
_ आपके मरने के बाद दुनिया कैसे चल रही इससे आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। आपकी पत्नी हो सकता है _ दूसरी शादी कर के सैटल हो जाये, बच्चे कहीं और चले जायें, _इसलिए फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करिए, जीते जी financial नाईट मेयर मत बनाइए।
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💸गहनों में इन्वेस्ट नहीं करना चाहिए। गहने सिर्फ़ अपनी पत्नी, माँ या बेटी के शृंगार अथवा उपहार के लिए ख़रीदिए।
_ ऐसा भी सिर्फ़ तब करिए जब उन्हें भी ये पसंद हो, सोना और चाँदी के अलावा कोई भी गहना न ख़रीदें।
_ इन्वेस्टमेंट के लिए कभी गहने नहीं लेने चाहिए। अगर बहुत मन करे तो गोल्ड बिस्किट ख़रीदिए, लेकिन ध्यान रखिए आपके घर पर कभी भी चोरी हो सकती है, घर का कोई भी सदस्य कभी भी चुरा कर बेच सकता है।
_ यहाँ मुझे कोई सोशल या मोरल लेक्चर न दें। लेकिन ऐसा नहीं है कि गहने ख़रीदने ही नहीं है _लेकिन इनको इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं ख़रीदना _इसलिए इनको फाइनेंसियल प्लानिंग में मत लाइए।
_ अपने जीवन में मौजूद ज़रूरी स्त्रियों (पत्नी/प्रेमिका, माँ, बेटी) को इम्प्रैस करने के लिए ज़रूर ख़रीदें। गहने अगर उन्हें खुश करते हैं तो आपकी क्षमता के हिसाब से उसमे खर्चा बुरा नहीं है।
हीरे चूँकि लैब में भी बनाये जा सकते हैं _इसलिए हीरे तो बिलकुल भी रीसेल में नहीं जाते _जबतक कि आपके हाथ में सीधा कोहिनूर ही न हो।
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💸अगर सब कुछ उपरोक्त सीक्वेंस में आपकी लाइफ में चल ही रहा है तो फिर further बहुतेरे इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स है। एक्स्ट्रा पड़ा पैसा PPF, NPS, Equity, SIP, Mutual Fund तथा प्रॉपर्टी इत्यादि में मन मुताबिक़ डालिये। सबसे ठीक ठाक रिटर्न आने लगेगा।
_अगर आपकी लाइफ़ में सब चीजें उपरोक्त सीक्वेंस में नहीं बन पा रही हैं _क्योंकि आप कम कमाते हैं तो लेख को शुरू से पढ़ना शुरू करिए और लाइफ में फिर से शुरू करिए।
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💸इन्वेस्ट करके करोड़पति बनने का सपना त्याग दीजिये। १% भी ऐसे लोग नहीं हैं जो इन्वेस्ट करके अमीर बनते हों। इन्वेस्ट करके पैसा कमाना लाइफ की पैसा कमाने की सबसे आख़िरी स्टेज है। पहली स्टेज हमेशा काम करके पैसा कमाने की है। इसी स्टेज से दुनिया और आपके आस पास के लोग अमीर बने होते हैं।
इन्वेस्ट करके अमीर बनने का कोई फ़ितूर दिमाग़ से निकाल दीजिये अगर आपकी बेसिक कमाई ही बहुत कम है और आप day to day ख़र्चों के लिए भी स्ट्रगल ही करते हैं।
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💸अल्ट्रा लॉग टर्म फाइनेंसियल प्लानिंग नहीं करनी है। मार्केट डायनेमिक्स १०-१५ साल में पूरी तरह बदल जाते हैं। आपके द्वारा २० साल पहले लिये गये सभी पहले आज आउटडेटेड होंगे। इसलिए १०-१५ साल का टारगेट रक्खें बस।
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💸रिटायरमेंट के लिए रेंटल इनकम का प्लान करें। और रिटायरमेंट किसी आश्रम में अध्यात्म करते हुए बिताएँ।
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–Anurag Tiwari
ये आदतें आपको हमेशा गरीब बनाए रखेंगी. सावधान रहें !!

_ यदि आप एक ऐसा आदमी बनना चाहते हैं जो अपने जीवन पर नियंत्रण रखता है, सम्मानित है, और वित्तीय रूप से सुरक्षित है, तो पैसे के मामले में आपको कुछ बातें कभी नहीं करनी चाहिए.
_ एक पुरुष की वित्तीय स्थिति केवल उसके बैंक खाते को नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास, रिश्तों, अवसरों, और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है.
_ बहुत से पुरुष मेहनत करते हैं, फिर भी गरीब रहते हैं. क्यों ?
_ क्योंकि पैसे कमाना एक बात है, लेकिन उन्हें बनाए रखना और बढ़ाना दूसरी बात है.
_ यदि आप अपनी वित्तीय स्थिति पर काबू नहीं पाते, तो आप हमेशा किसी और आदमी के नियंत्रण में रहेंगे.
_ यहां कुछ वित्तीय गलतियाँ दी गई हैं जो आपको हमेशा कमजोर, अटका हुआ, और संघर्षशील बनाए रखेंगी:
1. इम्प्रेस करने के लिए खर्च करना, प्रगति के लिए निवेश नहीं करना:
_ अगर आप सिर्फ दिखावे के लिए पैसे खर्च करते हैं, तो आप खुद को गरीब बनाने की ओर बढ़ रहे हैं.
_ राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के शोध से पता चला है कि अधिकांश अमीर लोग अपनी जरूरतों से कम खर्च करते हैं, जबकि कई मध्यवर्गीय और गरीब लोग लक्जरी सामानों पर ज्यादा खर्च करते हैं.
_ असली ताकत संपत्ति में है। निवेश में। ऐसी क्षमताओं में जो पैसे उत्पन्न करती हैं। महंगे कपड़े नहीं जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते.
2. एक ही स्रोत पर निर्भर रहना:
_ यदि आपकी पूरी वित्तीय जिंदगी एक ही वेतन या एक ही व्यवसाय पर निर्भर है, तो आप एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं.
_ औसत करोड़पति के पास 7 आय के स्रोत होते हैं, लेकिन अधिकांश पुरुषों के पास केवल एक होता है.
_ यदि वही खत्म हो जाता है, तो क्या होता है ? घबराहट, संघर्ष, निर्भरता.
_ आय के कई स्रोत बनाना शुरू करें. भले ही आपके पास नौकरी हो, एक नई कौशल सीखें, एक साइड हसल शुरू करें, निवेश करें.
3. वित्तीय साक्षरता की उपेक्षा करना:
_ पैसे के भी अपने नियम होते हैं, और यदि आप उन्हें नहीं सीखते, तो आप हमेशा हारते रहेंगे.
_ राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा संस्थान के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70% लॉटरी विजेता कुछ ही वर्षों में गरीब हो जाते हैं, क्योंकि उन्होंने संपत्ति प्रबंधन के तरीके नहीं सीखे थे.
_ चाहे आप कितना भी कमाते हों, अगर आप पैसे को सही तरीके से नहीं संभालते, तो वह जल्दी खत्म हो जाएगा.
_ वित्तीय किताबें पढ़ें, अमीर लोगों का अध्ययन करें, और जो सीखें उसे लागू करें. अज्ञानता महंगी होती है.
4. गलत कारणों के लिए कर्ज लेना:
_ अच्छा कर्ज और बुरा कर्ज दोनों होते हैं.
_ अच्छा कर्ज आपको और अमीर बनाता है—जैसे कि व्यापार या रियल एस्टेट में निवेश के लिए उधारी लेना.
_ बुरा कर्ज आपको गरीब बनाता है—जैसे कि ऐसी चीज़ें खरीदना जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते केवल दिखावा करने के लिए.
_ यदि आप हमेशा कर्ज ले रहे हैं और वह कर्ज सिर्फ आपकी जरूरतों के बजाय भौतिक वस्तुओं के लिए है, तो आप एक वित्तीय गड्ढे में गिर रहे हैं.
5. “किस्मत” पर निर्भर रहना, रणनीति नहीं:
_ वे पुरुष जो “बड़े ब्रेक” या “भाग्यशाली अवसर” का इंतजार करते हैं, वे गरीब रहेंगे, जबकि अन्य पुरुष रणनीतिक रूप से संपत्ति बना रहे होंगे.
_ सफलता योजना, क्रिया और अनुशासन का परिणाम है, न कि किसी चमत्कार का.
_ चमत्कार का इंतजार करना बंद करें, स्मार्ट कदमों के माध्यम से खुद चमत्कार बनें.
6. जल्दी निवेश नहीं करना:
_ फेडरल रिजर्व के एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग अपनी 20s में निवेश करना शुरू करते हैं, वे अपनी 30s या 40s में निवेश करने वालों की तुलना में अधिक संभावना रखते हैं कि वे समृद्ध रूप से सेवानिवृत्त हो जाएं.
_ चाहे आप अब कितना भी कम कमा रहे हों, बचत और निवेश शुरू करें.
_ जितनी जल्दी आप शुरू करेंगे, उतना बड़ा आपका वित्तीय स्वतंत्रता होगा.
7. महिलाओं को अपने वित्तीय निर्णयों पर नियंत्रण देना:
_ एक असली पुरुष अपनी वित्तीय जिंदगी का नेतृत्व करता है.
_ बहुत से पुरुष पैसे के फैसले महिलाओं को प्रभावित करने के लिए लेते हैं—महंगे गिफ्ट खरीदना, महंगे डिनर पर जाना.. जबकि वे संघर्ष कर रहे होते हैं, या ऐसे जीवनशैली को फंड करना.. जिसे वे संभाल नहीं सकते.
_ एक महिला को आपके दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए, न कि आपके वॉलेट को खाली करना.
_ जो महिला सच में आपकी कद्र करती है, वह आपकी वित्तीय वृद्धि का समर्थन करेगी, न कि उसे नष्ट करेगी.
निष्कर्ष:
_ आपकी वित्तीय स्वतंत्रता आपके हाथ में है.
_ अगर आप इन गलतियों को बार-बार करेंगे, तो आप हमेशा संघर्ष करते रहेंगे, निर्भर रहेंगे, और सीमित रहेंगे.
_ लेकिन अगर आप नियंत्रण प्राप्त करते हैं—वित्तीय शिक्षा प्राप्त करते हैं, आय के कई स्रोत बनाते हैं, समझदारी से निवेश करते हैं, और स्मार्ट तरीके से खर्च करते हैं—तो आप हमेशा अपने भाग्य के मालिक होंगे.
_ अपने पैसों को नियंत्रित करें, या उसे नियंत्रित होने दें.. निर्णय आपका है.!!

सुविचार – काम, कार्य, धंधा, रोजगार – बेरोजगार, बेरोजगारी – 080

उनसे पूछिए कैसा लगता है जीवन का एक दिन को भी गुजारना..

_ जिनके पास काबिलियत तो है, परन्तु उनकी काबिलियत के अनुसार उन्हें रोजगार नहीं मिलता..

_ और इस वजह से वो _ बेरोजगारी के आग में पल – पल जलते हैं..

सता रहा है डर भविष्य का, अभिशाप बन गई बेरोजगारी है,

_ कैसे गुजारा होगा परिवार का, सिर पर हज़ारों ज़िम्मेदारी है..!!
ये बहुत तकलीफ देह होता है.. जब आप अपने जीने के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधनों की कमी से झूझ रहे हों.

_ कितना भी सकारात्मक सोच लो, लेकिन अंततः वास्तविकता आप को झकझोर कर रख देती है.!!
काम हमारे शरीर और दिमाग के लिए एक सबसे अच्छा व्यायाम है, जो जीवन में वास्तविक आनंद लाता है,

_ कार्य कौशल विकास के साथ-साथ नए अवसरों के लिए भी रास्ता निकालता है.

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काम को इतना बिगाड़ देते हैं कि _एक समय ऐसा आता है _जब उन्हें कहना पड़ता है कि, ‘रहने दो, मैं खुद कर लूंगा’

_ और फिर उन्हें काम से मुक्त कर के _सही व्यक्ति को _ उस काम को _अपने ऊपर ले लेना पड़ता है.
जो लोग काम करते हैं वो ज्यादा बात नहीं करते..

_ और जो ज्यादा बात करते हैं वो बातों के अलावा कुछ कर नहीं पाते.!!

बेरोजगारी किसी इंसान को उतना मायूस नहीं करती है..

_ जितना की उसके ख़ुद के परिवार वालों और दोस्तों का रवैया उसे कर देता है.!!
आप जो भी काम करें उसमें मूल्यों [values] के साथ समझौता न करें.!!
किसी भी कीमत पर..अपने काम के साथ कभी खिलवाड़ मत करना,

_ क्योंकि लोग तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन भूख तो हर दिन दस्तक देगी ही देगी.!!

किसी भी काम को पूरा करने से पहले उसका ढिंढोरा मत पीटा करो,

_ क्योंकि वो काम फिर मुश्किल से ही अपनी मंजिल पर पहुँच पाता है..!!
अपने उस काम के प्रति कभी भी शर्मिंदा मत होना, जो आपको दो वक्त की रोटी देता है, _ कम कमाना लेकिन हक़ का खाना.. ही बेहतर है.!!
आप बात करते हो, हम काम करते हैं, यही अंतर है..!!

You talk, we work, that’s the difference..!!

किसी काम को करने से पहले उसके बारे में अच्छे से जान लें.

Before doing any work, know about it thoroughly.

किसी का मूल्यांकन उसके काम को देखकर करना चाहिए.

One should judge someone by looking at his/her work.

जब काम में मज़ा आए तो काम, काम नहीं लगता.!!
कोई काम नामुमकिन नहीं और हर काम करना ही है, यह कतई ज़रूरी नहीं.!!
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