सुविचार – *उल्टी यात्रा* *बुढ़ापे से* *बचपन की तरफ़* – 051
*जो 50 को पार कर गये हैं या *करीब हैं उनके लिए यह खास है*
*मेरा मानना है कि, दुनिया में जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है, हमारे बाद की किसी पीढ़ी को, “शायद ही ” इतने बदलाव देख पाना संभव हो*
*हम_वो आखिरी_पीढ़ी_हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिका जेट देखे हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है, और “वर्चुअल मीटिंग जैसी” असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है।*
हम_वो_ “पीढ़ी” _हैं *जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के, घरों में बैठ कर, परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। जमीन पर बैठकर खाना खाया है। प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है।*
हम वो ” लोग ” हैं ? *जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल, खेले हैं ।*
हम आखरी पीढ़ी के वो लोग हैं ? *जिन्होंने चांदनी रात, डीबली, लालटेन, या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है। और दिन के उजाले में चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।
हम वही पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं। और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।*
हम उसी आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।*
हम वो आखरी लोग हैं ? *जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।*
हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती धोई है।*
हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है।*
हम वो आखरी लोग हैं ? *जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे। और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।*
हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं।*
हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।*
*हम निश्चित ही वो लोग हैं ?* *जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे प्रोग्राम पूरी शिद्दत से सुने हैं।*
*हम वो आखरी लोग हैं ? *जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं।*
*हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं, जो लगातार कम होते चले गए। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुद गर्मी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं।* और *हम वो खुशनसीब लोग हैं ?* *जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है…!!*
*हम आज के भारत की एकमात्र वह पीढी है ?* *जिसने अपने ” माँ-बाप “की बात भी मानी , और ” बच्चों ” की भी मान रहे है।*
*शादी मे (buffet) खाने में वो आनंद नहीं जो पंगत में आता था जैसे….* *सब्जी देने वाले को गाइड करना* *हिला के दे* *या तरी तरी देना!*
*👉 उँगलियों के इशारे से 2* *लड्डू और गुलाब जामुन,* *काजू कतली लेना* *👉 पूडी छाँट छाँट के* *और* *गरम गरम लेना !.* *👉 पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ* *गया !* *अपने इधर और क्या बाकी है।* *जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना*
*👉 पास वाले रिश्तेदार के पत्तल में जबरदस्ती पूडी* *🍪 रखवाना !* *👉 रायते वाले को दूर से आता देखकर फटाफट रायते* *का दोना पीना ।* *👉 पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी। उसके* *हिसाब से बैठने की पोजीसन बनाना।* *👉 और आखिर में पानी वाले को खोजना।*
………….. *एक बात बोलूँ* *इनकार मत करना* *जो इस मेसेज को पढेगा* *उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.* *वो आपकी वजह से अपने बचपन में चला जाएगा, चाहे कुछ देर के लिए ही सही।* *और ये आपकी तरफ से उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.* ~~~~~~~~~~~~
सुविचार – ज़िन्दगी 50 की उम्र के बाद – 050
_ तब ख्वाहिशें थम जाती हैं और सुकून की तलाश बढ़ जाती है..!!
चाय बनाकर फिर, कोई बात करते हैं !!
उम्र पचास के पार, हो गई हमारी !
जीवन का, इस्तक़बाल करते हैं !!
कौन आएगा अब, हमको देखने यहां !
एक दूसरे की, देखभाल करते हैं !!
बच्चे हमारी पहुंच से, अब दूर हो गए !
आओ फिर से दोस्तों को, कॉल करते हैं !!
जिंदगी जो बीत गई, सो बीत गई !
बाकी बची में फिर से, प्यार करते हैं !!
ऊपरवाले ने जो भी दिया, लाजवाब दिया !
चलो शुक्रिया उसका, बार बार करते हैं !!
कम बोलो, ज़्यादा सुनो, सामने चल कर किसी को शिछा मत दो,
दिल के ज़ख्म सबको न बताएँ, सबके घर मरहम नहीं होते,
लेकिन नमक सब के घर होता है…
सुकी रोटी भी प्रेम से खाएँ, करोड़ों लोगों को वो भी नसीब नहीं होती,
करकसर से जीओ __ करकसर इंसान को मज़बूत बना देती है..
अकेले जीना सीख लो, अब जोड़ी कभी भी टूट सकती है..
किताबें पढ़ने का शौक रखो, वो अंत तक साथ देंगी…
छाती पर पत्थर रखकर जीना सीख लो,
ज़िन्दगी की आपाधापी में, कब निकली उम्र हमारी, यारों
पता ही नहीं चला.
कंधे पर चढ़ने वाले बच्चे, कब कंधे तक आ गए,
पता ही नहीं चला.
किराये के घर से शुरू हुआ था सफर अपना
कब अपने घर तक आ गए,
पता ही नहीं चला.
साइकिल के पैडल मारते हुए, हांफते थे उस वक़्त,
कब से हम, कारों में घूमने लगे हैं,
पता ही नहीं चला.
कभी थे जिम्मेदारी हम माँ बाप की,
कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार हम,
पता ही नहीं चला.
एक दौर था जब दिन में भी बेखबर सो जाते थे,
कब रातों की उड़ गई नींद,
पता ही नहीं चला.
जिन काले घने बालों पर इतराते थे कभी हम,
कब सफेद होना शुरू कर दिया,
पता ही नहीं चला.
दर दर भटके थे, नौकरी की खातिर,
कब रिटायर होने का समय आ गया,
पता ही नहीं चला.
बच्चों के लिए कमाने, बचाने में
इतने मशगूल हुए हम,
कब बच्चे हमसे हुए दूर,
पता ही नहीं चला.
भरे पूरे परिवार से, सीना चौड़ा रखते थे हम,
अपने भाई बहनों पर गुमान था,
उन सब का साथ छूट गया,
कब परिवार हमीं दो पर सिमट गया,
पता ही नहीं चला.
अब सोच रहे थे, अपने लिए भी कुछ करें,
पर शरीर ने साथ ही देना बंद कर दिया,
पता ही नहीं चला !!!!
समय चला, पर कैसे चला…पता ही नहीं चला…
बिस्तरों पर अब सलवटें नहीं पड़ती
ना ही इधर उधर छितराए हुए कपड़े हैं
रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता
ना ही खाने की नई नई फरमाइशें हैं
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
सुबह जल्दी उठने के लिए भी नहीं होती मारा मारी
घर बहुत बड़ा और सुंदर दिखता है
पर हर कमरा बेजान सा लगता है
अब तो वक़्त काटे भी नहीं कटता
बचपन की यादें कुछ दिवार पर फ़ोटो में सिमट गयी है
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
अब मेरे गले से कोई नहीं लटकता
ना ही घोड़ा बनने की ज़िद होती है
खाना खिलाने को अब चिड़िया नहीं उड़ती
खाना खिलाने के बाद की तसल्ली भी अब नहीं मिलती
ना ही रोज की बहसों और तर्कों का संसार है
ना अब झगड़ों को निपटाने का मजा है
ना ही बात बेबात गालों पर मिलता दुलार
बजट की खींच तान भी अब नहीं है
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
पलक झपकते ही जीवन का स्वर्ण काल निकल गया
पता ही नहीं चला
इतना ख़ूबसूरत अहसास कब पिघल गया
तोतली सी आवाज़ में हर पल उत्साह था
पल में हँसना पल में रो देना
बेसाख़्ता गालों पर उमड़ता प्यार था
कंधे पर थपकी और गोद में सो जाना
सीने पर लिटाकर वो लोरी सुनाना
बार बार उठ कर रज़ाई को उढ़ाना
अब तो बिस्तर बहुत बड़ा हो गया है
मेरे बच्चों का प्यारा बचपन कहीं खो गया है
अब कोई जुराबे इधर उधर नहीं फेंकता है..
अब fridge भी घर की तरह खाली रहता है
बाथरूम भी सूखा रहता है
Kitchen हर दम सिमटा रहता है
अब हर घंटी पर लगता है कि शायद कोई surprise है
और बच्चों की कोई नयी फरमाईश है
अब तो रोज मेरी सेहत फोन पर पूछते हैं
मुझे अब आराम की हिदायत देते हैं
पहले हम उनके झगड़े निपटाते थे
आज वे हमें समझाते हैं
लगता है अब शायद हम बच्चे हो गए हैं
मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.
पच्चपन, साठ की उम्र वालो आपको सलाम
सुन लो मेरा ये पैग़ाम ।
बहुत मज़े से कटेगी बाक़ी की ज़िंदगानी,
बहुओं के संग समझौता करना सीख लो।
छोटे – बड़ें सब को मन की करने दो,
मत टोको जो करते है, करने दो।
कम बोलो, ख़ूब सुनो,
कभी सिखाने की कोशिश मत करो,
अपने काम स्वयं करना सीख लो ।
दिल पर पत्थर रखकर, सब नज़ारा देखते रहो ,
मौन रहना सीख लो।
अाप को जानो, आप पहचानो
अपने लिये जीना सीख लो।
नाती पोतो के संग बहुओं के मिज़ाज देखकर प्यार करो,
ज्ञान देने की कोशिश कदापि न करो ।
अपने लिये जीना सीख लो
दिल के ज़ख़्म छुपाकर रखना
कभी बताने की कोशिश मत करना !
मलहम की चाह मे नून छिड़का जायेगा,
पछतावा हो वह काम नही है करना,
रुखी सूखी जो मिल जायें प्रेम से खाकर तृप्त रहो !
बहुतों के नसीब तो घर भी नही,
वृद्धा आश्रम में है रहते, जैसे तैसे समय बीताते,
अपने के संग के लिए हसरतें मन में रख परलोक सिधार जाते,
जो मिला है उस में खुश रहना सीख लो !
अच्छे दोस्तों के साथ समय बिताना सीख लो !
थोड़ा है थोड़े में गुज़ारा करना सीख लो !
अब नही आपके पुराने दिन यह अच्छे से समझ लो !
जीवन साथी आपका है, उसकी क़दर करना सीख लो,
वही अंत तक निभायेगा, प्यार का रिंश्ता सच्चा रिश्ता
बाक़ी रिश्ते मतलब के है यह अच्छे से जान लो !
अपने आप को जानो, अपने को पहचानो, अपने आप मे रहना सींख लो !
कुछ किताबे पढ़ना सीख लो, कुछ लेखन से दिल लगाना सीख लो ।
ख़ाली वक्त के साथी है, ख़ूब प्यार तुम्हें दे जायेंगे,
नया नया ज्ञान भी मिलता रहेगा,
न शिकवा न शिकायत तुम्हें तुम्हारी तरह ही चाहेगी
उनसे दिल लगाना सीख लो।
अंत समय आयेगा कौन किसके पहले जायेगा,
यह बात किसी को नही है पता।
एक दिन अकेले रहने की तैयारी कर लो,
जीवन साथी फुर्र से उड़ जायेगा,
तेरे हाथ कुछ न आयेगा !
जीवन सूना हो जायेगा, कुछ सिमरण रब का कर लो साथ यही जायेगा,
बाक़ी सब मोह माया है, ख़ाली हाथ जाना है ।
पच्चपन, साठ के उम्र वालो अपने लिये जीना सीख लो।
दिल के ज़ख़्मों को, दिल में छिपाना सीख लो,
जिदगीं से समझौता करना सीख लो।
मैं उम्मीद करता हूं कि हम में से बहुत से लोगों की जिंदगी उपरोक्त वर्णन से काफी बेहतर होगी, फिर भी अगर इन बातों को माना जाएगा तो परिणाम अच्छे ही आएंगे.
सुविचार – वरिष्ठ नागरिक – वृद्ध – वृद्धावस्था – बुढ़ापा – बड़ी उम्र – जीवन का छाया काल – 049
_ क्योंकि जिन आकांक्षाओं के पीछे हम जीवनभर दौड़ते रहते हैं,
फिर वे फिसल जाते हैं और अर्थहीन लगने लगते हैं ( अनेक बार बोझल भी )
_ और हम जीवन के महत्वपूर्ण लगने वाले उद्देश्यों को निरर्थक पाने लगते हैं..!!
_ जिनके जीवन में कठिनाइयां और नकारात्मकता अधिक रहती है..
_ वे जीवन से निराश हो जाते हैं और बुढ़ापा जल्दी आ जाता है..!!
*1**अपने स्वयं के स्थायी स्थान पर रहें ताकि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद ले सकें!*
*2**अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें! अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें।*
*3* *अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकता भी बदल जाती है और कभी कभी चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते*
*4**उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं, यानी सच्चे हितैषी हों।*
*5**किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें!*
*6**अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करें, उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जीएँ!*
*7**अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास कभी ना करें।*
*8**लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें।*
*9**प्रार्थना करें लेकिन भीख ना मांगे, यहाँ तक कि रब से भी नहीं। रब से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत!*
*10**अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें! छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं।*
*11**अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें।*
*12**प्रति वर्ष अपने जीवन साथी के साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं, इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा!*
*13**किसी भी टकराव को टालें एवं तनाव रहित जीवन जिऐं!*
*14**जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें !*
*15**अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं!*
*खुशनुमा जीवन जीएं*
यह एक चुनौती होती है बुजुर्ग अवस्था मे आय के स्रोत को उस स्तर पर बनाए रखना, जिस स्तर पर आपने जीवन जिया, इसके अतिरिक्त बीमारियों का ख़र्च, सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह.
मैं यह सुझाव दूंगा कि बैंक में सीनियर सिटीजन डिपाजिट स्कीम में पैसा जमा करें तो अधिक ब्याज मिलेगा, साथ ही मासिक ब्याज की सुविधा होती है, इसी तरह LIC की भी योजना है.
“बुढ़ापा और परिवार”
“परिवार के साथ बुढ़ापा” अच्छे से व शान्ति से काटने के लिए कुछ बातें आप गौर से पढ़िये.
01. “कम बोलिये…” जरूरत न हो तो बिलकुल मत बोलिये.
02. मनचाही वस्तु ना मिलने पर “क्रोध” ना करे.
03. अपनी “धन संपत्ति” का बार बार बखान ना करें.
04. बहू-बेटियों के कार्य में दखल ना करें.
05. यह आशा न करें कि बहू.बेटे हर काम हमसे पूछकर करें.
06. “खाने पीने में संतोषी रहे.” जो मिल जाए, प्रसाद समझ कर ग्रहण करें.
07. किसी पर “अपनी इच्छा थोपने” की कोशिश न करें.
08. “बहू.बेटियों तथा उनके बच्चों से” स्नेह व प्रेम का का व्यवहार करें.
09. बुढापे के कष्ट व बीमारी को कर्मफल समझ कर खुशी खुशी सहन करें.
10. घर पर आए किसी भी व्यक्ति से “अपने घर की कोई बुराई न करें.”
11. बहू.बेटियों के “कटुवचन सुनकर” शांत हो जाएँ और कोई प्रत्युत्तर न दें.
12. अपने स्वास्थ्य के सामर्थ्य अनुसार “बहू.बेटियों के कार्य में” सहयोग करें.
13. “रब को अवश्य याद करते रहें.”
14. ध्यान रहे कि “रब की कृपा से” सब कुछ प्राप्त होता है. “उसका शुकराना करते रहिये. “खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जाना है, प्रेम से रहकर सबसे रिश्ता निभाना है.
15. अपने परिवार की समस्याएँ “दूसरों के सामने न रखें.”
16. “अपने बीते दिनों के गुणगान” रात-दिन न करें.
17. “प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएँ.”
18. ध्यान रहे इच्छा से मृत्यु सबको नहीं प्राप्त होती है, “अतः प्रसन्न व आनन्द में” रह कर बुढ़ापे का जीवन जियें.
19. उम्र के हिसाब से बच्चों के “पूछने के तरीके बदल जाते हैं.” बच्चों के उम्रदराज होने पर “उनके बताने व जानकारी देने को ही” उनके द्वारा पूछना ही समझें.
20. खाँसी सिर्फ बीमारी ही नहीं है, “खाँसी एक तहजीब भी होती है,” एक उम्र के बाद अपनी “उपस्थिति का अहसास” अपने ही घर में कराने के लिए.
“इंसान की सोच” “अगर तंग हो जाती है,”
“तो यह खूबसूरत जिन्दगी” “भी एक जंग हो जाती है.”
तुम कोई शौक पाल लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,
कम बोलो, ज्यादा सुनो, चल कर किसी को ज्ञान ना दो,,
योग, ध्यान को भी अपना लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,
जो भी मिले प्रेम से खाओ, हर किसी को ना अपने जख्म बताओ,,
तन्हा मुस्कुराना सीख लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,
कमाई के साथ साथ करो बचत, जाने कब स्वास्थ जाए अटक,,
दो चार सच्चे दोस्त बना लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,
तुम कोई शौक पाल लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,
Ageing is a welcome expectation but it is also a passing phase that changes your life style !!!
_ जिन्होंने इसे बनाया, सजाया होता है.._वह इसे छोड़ जाते हैं !!
_ पुरानी बिल्डिंगों को थोड़ा रख रखाव चाहिए,
🤷♀सुबह सुबह किसी ने द्वार खटखटाया,
मैं लपककर आया,
जैसे ही दरवाजा खोला
तो सामने * बुढ़ापा खड़ा * था,
भीतर आने के लिए,
जिद पर अड़ा था..😔
मैंने कहा :
नहीं भाई ! अभी नहीं😔
“ अभी तो * मेरी उमर * ही क्या है..”
वह हँसा और बोला :
* बेकार कि कोशिश * ना कर,
मुझे रोकना नामुमकिन है…
मैंने कहा :
“.. अभी तो कुछ दिन रहने दे,
अभी तक * दूसरो के लिए जी * रहा हूँ ..
अब अकल आई है तो कुछ दिन
* अपने लिए और दोस्तों*
के साथ भी जीने दे..”
* बुढ़ापा हंस कर बोला * :
अगर ऐसी बात है तो चिंता मत कर..
* उम्र भले ही तेरी बढ़ेगी *
मगर बुढ़ापा नहीं आएगा,
*तू जब तक दोस्तों के साथ जीएगा*
* खुद को जवान ही पाएगा..***….




