सुविचार – वक्त – वक़्त – समय – टाइम – 052

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जीवन रूपी यात्रा में समय को समझना बहुत ही मुश्किल है,

समय किसको कब कहाँ लाकर खड़ा कर दे, पता ही नहीं चलता है.

मिले हुए समय को ही अच्छा बनाएं, अगर अच्छे समय कि राह देखेंगे तो पूरा जीवन कम पड़ जाएगा !!

_ सही समय का इंतजार करना बंद करें, _समय आपका इंतजार नहीं कर रहा है.!!

हम समय के हाथों को नहीं रोक सकते लेकिन हम हर दिन उठ सकते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने सपनों का पीछा कर सकते हैं !
हम ज्यादातर समय इतनी जल्दी में रहते हैं कि हमें बात करने का ज्यादा मौका ही नहीं मिलता। परिणाम एक प्रकार की अंतहीन दिन-प्रतिदिन की उथल-पुथल है, एक नीरसता है जो एक व्यक्ति को वर्षों बाद आश्चर्यचकित करती है कि सारा समय कहाँ चला गया और खेद है कि यह सब चला गया है.

We’re in such a hurry most of the time we never get much chance to talk. The result is a kind of endless day-to-day shallowness, a monotony that leaves a person wondering years later where all the time went and sorry that it’s all gone. ~Robert M. Pirsig

हारने वाले और विजेता के बीच एकमात्र अंतर यह है कि वे अपने समय का कितना अच्छा उपयोग करते हैं.

The only difference between a loser and a winner is how well they use their time.

आपका सबसे कठिन समय अक्सर आपके जीवन के सबसे महान क्षणों की ओर ले जाता है.

Your hardest times often lead to the greatest moments of your life.

आपके जीवन के सबसे बुरे समय के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि आप को हर किसी का असली रंग देखने को मिलता है.

The best thing about the worst time of your life is that you get to see the true colors of everyone.

वक़्त के साथ अच्छी बात यह है कि आप इसे अग्रिम यानि एडवांस में खर्च नहीं कर सकते.
कुछ चीज़ों को वक़्त पर छोड़ देना चाहिए, _ तभी जिंदगी आसान लगती है.
समय सब ठीक नहीं करता, समझ ठीक करती है.!!
जो व्यक्ति जिस लायक होता है, वक़्त उसे धीरे-धीरे वहीँ पहुंचा देता है.!!
जो लोग अपनी गलती खुद नहीं मानते, उनसे वक़्त मनवा लेता है.!!
आप या तो समय का सदुपयोग कर रहे हैं या समय गंवा रहे हैं..

You are either using time or losing time.

समय वह है जिसमें सभी चीजें समाप्त हो जाती हैं.

Time is that in which all things pass away.

समय का सदुपयोग….

अपने समय का सर्वोत्तम ढंग से प्रयोग करना एक कला है, किन्तु इसके लिए बड़ी शक्ति की आवश्यकता होती है, _

_ अतः इसके लिए धैर्यता, नम्रता, सहनशक्ति के गुण धारण करे और बुद्धि के साथ समय का सदुपयोग करे !!!!

वैसे हमें बुरे वक्त को अपना साथी बनाकर.. उसके साथ जीना सीखना चाहिए,

_ क्योंकि अच्छे समय से ज्यादा बुरे समय या मुश्किल समय की आयु होती है…
_ बुरे समय को साथी बनाने से सफर में थोड़ी आसानी तो होगी..!!
जब लोग कहते हैं, “अभी सही समय नहीं है,”

_ तब कुछ लोग साबित कर देते हैं कि सही समय बनाया जाता है.
समय के साथ हर परिस्थितियां बदलती रहती हैं,
_ विधि के विधान के आगे मनुष्य का विधान शून्य है.!!
हर चीज़ समय के अनुसार नहीं होती.. कई बार हम जितना सोचते हैं, जिंदगी उतनी सीधी नहीं चलती.

_ रास्ते बदलते हैं, वक्त ठहरता सा लगता है, और उम्मीदें भी अधूरी रह जाती हैं..
_ लेकिन जब भी कुछ होता है, चाहे देर से ही सही.. वो अपने सही समय पर ही होता है.
_ ऐसा समय, जो हमें समझाने, सँवारने और मजबूत बनाने के बाद आता है.!!
कई बार इंसान के पास अनुभव की कोई कमी नहीं होती,

_ वो हर गलती, हर रास्ता और हर परिणाम समझता है, फिर भी चीज़ें सही नहीं हो पातीं _ शायद कुछ काम सिर्फ समझदारी या हुनर से नहीं चलते,
_ उनके सही होने के लिए सही वक्त का साथ होना भी ज़रूरी होता है.!!
ये ज़िन्दगी हमें वो सबकुछ देती है जो हम सच में चाहते हैं, मगर अपने वक़्त पर, हमारे वक़्त पर नहीं,

_ फर्क सिर्फ़ इतना है हम जल्दी में होते हैं, और ज़िन्दगी सही मौके में सब कुछ मिलता है बस तब नहीं, जब हमे चाहिये होता है.!!
आदमी चाहे तो अपने एक-एक मिनट का सदुपयोग कर सकता है.

सदुपयोग होता है, कुछ न कुछ सकारात्मक करना..

सारा दिन खुद को कोसने में, संसार को कोसने में खर्च करने से कुछ नहीं रखा है.

हर रोज़ आदमी को कुछ न कुछ नया करना चाहिए, _नया सीखना चाहिए..!!

सब कुछ एक समय तक ही रहने वाला है, कुछ भी स्थायी नहीं है, जिंदगी हर रोज बदलती है, _यहाँ तक की हमारी भावनाएं भी,

_लोग जो आप के साथ आज हैं कल नहीं होंगे, जो स्थिति अभी आप के साथ है शायद कल नहीं होगी !!

किसी की असफलता या परेशानी पर मत हंसिए.

_ समय का पहिया घूमता है.
_ आज जो दृश्य आपको मनोरंजन लग रहा है, कल वही आपके दरवाजे पर खड़ा हो सकता है.!!
किसी की आज की हालत देखकर उसके कल का फैसला मत कीजिए..

_ क्योंकि वक्त हर चीज़ बदल सकता है.!

वक्त ज़्यादातर रहता मौन है.

_बहुत देर से बताता है, किसका कौन है.!!

कल जो चाहिए था, आज वही नहीं चाहिए,

_बस यही समय की ताकत है.!!

वक्त के साथ सब बदल जाता है..
.. इंसान कभी स्थाई भाव में नहीं रह सकता और रहना भी नहीं चाहिए.!!
दूसरी कीमती चीजें यदि खो भी जाएं तो उन्हें फिर पाया जा सकता है.

_ किंतु समय ऐसी चीज है, जिसे खोने के बाद फिर नहीं पा सकते.

सबको उड़ जाना है एक दिन तस्वीर से रंगों की तरह..

_ हम वक़्त की टहनी पर बैठे हैं परिंदों की तरह.!!

समय की कमी नहीं, बल्कि दिशा की कमी ही समस्या है ;

_ हम सभी के पास दिन के 24 घंटे हैं.

अगर लाइफ में किसी का अच्छा टाइम चल रहा हो, तो ज्यादा एटीट्यूड नहीं दिखाना चाहिए, क्योंकि समय का पहिया 🛞 ज़रूर घूमता है..
माना वक़्त के पास भी इतना तो वक़्त नहीं है कि वो आप को दोबारा अपना वक़्त दे,_

_ पर आपके पास इतना तो वक़्त है कि आप यह तय करें कि आप कहाँ अपना वक़्त दें !!

कभी किसी को उसकी औकात बताने की कोशिश नहीं करनी चाहिए ;

_ कभी समय को अपना स्थायी मित्र नहीं मान लेना चाहिए.

घड़ी की टिक टिक को मामूली न समझिए…

बस यूँ समझ लीजिये की ” ज़िन्दगी के पेड़ पर कुल्हाड़ी के वार हैं..!!

इसलिए वक्त की कीमत समझने वालों को किसी के लिए लम्बे वक्त तक रुकते हुए और रोते हुए कभी नही देखा, _

_ क्योंकि उन्हें इस कुल्हाड़ी की चोट का अंदाजा रहता है .!!

हमारे हिस्से का यूँ बेकार गुज़रा ये वक़्त, फिर कभी लौटकर नहीं आएगा,

_आज भले ही ये दिन बेमतलब, उलझे हुए और अधूरे लगते हों,
_ मगर एक दिन यही खामोश लम्हे, बेवजह की बातें और साथ बिताया गया साधारण-सा समय सबसे ज़्यादा याद आएगा.!!
जब समय विकट हो जाता है, तो जीवन की हर दिशा उलझनों से भर जाती है.

_ छोटी-सी परेशानी भी बड़ी मुसीबत लगने लगती है, और हर कदम मानो अपने ही खिलाफ उठता महसूस होता है..
_ ऐसे वक्त में लगता है.. जैसे पूरी दुनिया ही हमारे खिलाफ हो गई हो,
_ जबकि असल में यह सिर्फ कठिन समय की ठंडी छाया होती है..
_ जो हर चीज़ को विकट बना देती है.!!
समय का महत्व समझ लेना वास्तव में बहुत कुछ समझ लेने जैसा ही है, क्योंकि समय ही सिखाता है कि कब रुकना है, कब आगे बढ़ना है और कब सिर्फ़ सहन करना है..
_ अक्सर जिन परेशानियों का हल हमें तुरंत नहीं दिखता, उनका समाधान समय खुद धीरे-धीरे सामने रख देता है.!!
कभी भी किसी को उसकी ज़रूरत से ज़्यादा वक़्त, महत्व या अवसर मत दीजिए.

_ क्योंकि जब आप ज़्यादा देने लगते हैं, तो वह एहसान नहीं, आदत बन जाती है.!!
अच्छी चीजों में समय लगता है, जैसा कि होना भी चाहिए;

कोई चीज़ बहुत आसानी से या बहुत जल्दी प्राप्त करने से परिणाम सस्ता हो सकता है.

लोग आपके अच्छे वक़्त के साथी होते हैं,

_ बुरे वक़्त में तो अपने भी अजनबी बन जाते हैं.!!

कभी-कभी जीवन में ऐसा समय आता है,

_ जब हमारे ना चाहते हुए भी जीवन ठहर सा जाता है.!!

अपने वक़्त को लेकर चाहे तो मतलबी हो जाओ,

_ क्योंकि बहुत से लोग आपके वक़्त के लायक नहीं होते हैं.!!

वक्त से बड़ी इस दुनिया में कोई दूसरी दौलत नहीं,

_ इसे जिसे भी देना बहुत सोच समझकर देना.!!

वक्त वो दौलत है जो लौटकर नहीं आती,

_ इसलिए इसे किसी भी हल्के इंसान पर मत लुटाओ.!!

वक़्त (समय) जल-प्रवाह की तरह होता है.

_ आप जल की उसी लहर को दोबारा नहीं छू सकते, क्योंकि जल-प्रवाह में पानी की लहर जो एक बार चली गई, वह दोबारा नहीं लौटती.
_ ऐसे ही वक़्त है, जो बीत गया, वह दोबारा नहीं आता..
_ वक़्त ऐसी चीज़ है जिसे आप न अग्रिम खर्च कर सकते हैं, न भविष्य के लिए बचा कर रख सकते हैं.
_ बस आज का पल है, इसे जैसे चाहे जी लो.!!
Time is like water. You can not touch same water twice, because the flow that has passed will never pass again.
ज़िन्दगी में जब सब कुछ सही नहीं हो रहा हो तो, उसे तुरंत सही करने के लिए पागल न हो जाओ ;

_ वक़्त के साथ सब कुछ बेहतर हो जाएगा, ना अच्छा पल ना बुरा पल हमेशा के लिए कुछ भी नहीं टिकता..!!

जब आपकी जेब भरी हो तो दुनिया साथ चलती है, लेकिन जब वक़्त करवट लेता है, तो सबसे पहले वही हाथ पीछे हटते हैं.. जिन्होंने कभी आपका साथ मांगा था.
आज किसी का वक्त खराब है, तो कल आपका भी हो सकता है..

_ इसलिए तिरस्कार नहीं, सहारा दो.!!

कभी-कभी कुछ बातें वक्त और कर्म पर छोड़ देना बेहतर होता है..

_ वरना गुस्से में उठाया कदम मुश्किलें बढ़ा सकता है.

यदि वक्त आपके साथ है तो भी विनम्र रहो..

_ क्योंकि जो आज ऊपर है, वो कल नीचे भी आ सकता है.!!

वक्त वो टीचर है जो पहले इम्तिहान लेता है, फिर सबक देता है..

_ और उसकी क्लास से कोई गैरहाज़िर नहीं रह सकता.!

अच्छा हो या बुरा, वक़्त आखिर गुज़र ही जाता है..

_ पर उस गुज़रते वक़्त में जो कुछ हम खो देते हैं, वो हमेशा वापस नहीं आता..
_ फिर बस एक हल्का सा मलाल रह जाता है, जो उम्र भर कहीं भीतर ठहरा रहता है..
_ वक़्त धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, और हम सोचते रह जाते हैं कि कुछ लम्हे थोड़ी देर और ठहर जाते.!!
मुश्किल समय हमें बहुत कुछ सिखाता है, इसलिए इस बात पर अफ़सोस की बजाय कि हमारे साथ कुछ क्यों हुआ, आभारी रहें कि जीवन ने हमें वह सबक सिखाया.!!
ये ज़िन्दगी हमें वो सब कुछ देती है जो हम चाहते हैं, मगर अपने तय किए हुए वक़्त पर..

_ हम जिस पल उसे पाने की हड़बड़ी में होते हैं, उसी पल ज़िन्दगी हमें इंतज़ार सिखा रही होती है.
_ क्योंकि हर चाहत, हर सपना तुरंत मिल जाए तो शायद उसकी अहमियत ही खो जाए..
_ वक़्त के साथ जो मिलता है, वो सिर्फ़ हाथों में नहीं आता, बल्कि समझ, सब्र और एहसास बनकर दिल में उतर जाता है.!!
आज परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हैं, पर इसका अर्थ यह नहीं कि हमेशा ऐसा ही रहेगा.

_ क्योंकि जब सब कुछ ठीक था, तब भी बहुत कुछ वैसा नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था..
_ वक्त सिर्फ हालात नहीं बदलता, सोच और सहने की क्षमता भी बदल देता है.!!
अच्छे समय को भरपूर जियें लेकिन बुरे वक़्त के लिए भी तैयार रहें ;

विनम्रता अच्छे समय की पूंजी है और अहंकार आप के अच्छे समय को असमय ही खत्म कर देने वाला हथियार..!!

अब ये वक़्त है ..जब साधन सम्पन्न होते हुए भी ..ज्यादातर लोगों को ..घोर संघर्ष से गुजरना पड़ता है..!!
हमेशा किसी के लिए आप का महत्त्व एक जैसा नही रहता.. वक़्त के साथ सबकुछ बदलता है.!!
जो वक्त को हल्के में लेते हैं, वही बाद में वक्त के ताने सुनते है..!!
कोई भी इंसान हमेशा वैसा नहीं रहता, जैसा पहले था..

_ वक्त सबको बदल देता है.!!

हम यह सिखने में बहुत समय बिताते हैं कि क्या करना है ;

_हम यह सिखने में पर्याप्त समय नहीं लगाते कि क्या रोकना है.!!

उड़ जायेंगे एक दिन, तस्वीर से रंगों की तरह ;

_ हम वक़्त की टहनी पर बैठे हैं, परिंदों की तरह…

हर चमकती चीज़ को धीरे-धीरे बेकार करता है,

_ यह वक़्त है जनाब ये सब का शिकार करता है !!

कोई भी एक सा रहता नहीं है दुनिया में !

_ एक दिन वक़्त के आगे सभी को झुकना है !!

समझना, समझाना हमेशा हमारे वश में नहीं है,

_ कुछ काम समय खुद करता है ..!!

कहने को तो बहुत कुछ है, पर वक्त कुछ ऐसा बदल गया है,

_ पहले मन नहीं भरता था, अब मन नहीं करता..!!

जो अपने एक घंटे का भी समय बरबाद कर सकता है, _

_ उसने अपने जीवन का मूल्य नहीं समझा है ..

” मुस्कुराहट ” कठिन वक्त की श्रेष्ठ प्रतिक्रिया है,

_ और ” ख़ामोशी ” गलत प्रश्न का बेहतरीन जवाब !!!

तुम्हारी सबसे बड़ी दौलत तुम्हारा वक़्त है,

_ जिसे भी दे रहे हो बहोत सोच समझ कर देना – ये लौटता नहीं है..!

उनके लिए कभी उपस्थित मत रहो..

_ जो आपको वक़्त ऐसे देते हैं, जैसे एहसान कर रहे हों.!!

बुरा वक्त गुज़र जाता है, लेकिन हमें पूरी तरह बदल जाता है,

_ हम आसानी से किसी पर भरोसा नहीं करते, _ हम आँखें बंद करके चलना छोड़ देते हैं,
_ हम अब वही इंसान नहीं रहते जो पहले थे..!!
हर ‘होने’ के अर्थ उस समय तक है, जिस समय तक हम उसमें से होकर गुज़र रहे होते हैं.

_ जो हो चुकता है, बाद में वह बड़ा बेमानी लगता है.!!
जीवन में जो असली है, वो उधार नहीं मिलता.. _ उसके लिए खुद चलना पड़ता है.!!
हर एक खेल तो तू नहीं जीत पाएगा, _ कद्र कर उसकी वरना वक़्त बीत जाएगा !!
आपका समय सिमित है, _ इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जीकर व्यर्थ न करें…
अपने सबसे बुरे समय में लड़खड़ाएं नहीं, क्योंकि जल्द ही वह खत्म हो जाएगा.
” वक़्त ” के झांसे में मत आना, _ये मुझसे भी यही कहता था ” मैं तेरा हूँ “
समय और उसकी मार को देख सकने वाली आंख हर मनुष्य में होती ही है.
तुम अकेले रहने की सोच भी मत लेना, मै तुम्हारा वक्त हूँ, साथ चलूंगा…
समय हर समय को बदल देता है, _ सिर्फ समय को थोड़ा समय दीजिए.
वक़्त के फैसले कभी गलत नहीं होते, बस साबित होने में वक़्त लगता है.!!
बुरा वक़्त आना भी ज़रूरी है, ज़िन्दगी से घटिया लोग निकल जाते हैं..!!
हा माना वक्त को किसी ने नही देखा पर,वक्त सबको सब कुछ दिखा देता है.!!
जीवन में समय और लोगों की अहमियत पहचानो, वरना ये आपसे दूर हो जायेंगे.!!
सदा वक़्त एक जैसा रहता नहीं, गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं..!!
समय के पास इतना समय नहीं कि आप को दोबारा समय दे सके..!!
कभी किसी की हालत पर मत हँसो, क्योंकि वक़्त को पलटने में देर नहीं लगती.
व्यर्थ और फालतू की बातें सुनने और जानने में अपना समय न गंवाएं, आप इंसान हैं कूड़ेदान नहीं !!
वक़्त बदलते ही बातों के मायने बदल जाते हैं.
समय तो बीतता जाता है ..अंत तक बात ही रह जाती है.
आज हम पर है, कल तुम पर आएगा, _ वक़्त ही तो है, बदल जाएगा…
वक्त के फैसले गलत नहीं होते, _ बस साबित होने में वक्त लगता है !!
सही हो या गलत, समय-समय पर किसी चीज को तोड़ना बहुत सुखद होता है.
अगर कोई आपको समय देना छोड़ दे, तो समझ लो.. अब वह आपका नहीं रहा.!!
जहां थोड़ा doubt हो, वहां थोड़ा वक़्त देना ही सबसे सही decision होता है.
समय के पास इतना समय नहीं कि आप को दोबारा समय दे सके..!!
” हर लड़ाई में, खुद ना उलझें _ जवाब देने का हक़, वक़्त को भी दें “
समय जब न्याय करता है, _ तब गवाहों की जरुरत नहीं होती !
अगर हरकतें न बदली, तो वक्त कभी नहीं बदलेगा.!!
जो अपना भविष्य आनंदमय बनाना चाहता है,

उसे अपने वर्तमान समय को बर्बाद नहीं करना चाहिए.

वक्त तू कितना भी परेशान कर ले हमें,

लेकिन याद रख ; किसी मोड़ पर तुझे भी बदल देंगे हम..

वक़्त से बड़ा न्यायाधीश कोई नहीं है,

ये जो भी निर्णय करता है, सबको मानना ही पड़ता है..

एक- एक कर साल गिर रहे हैं टूट कर,

वक़्त को ये कैसा पतझड़ लगा है ..!!

किसी के बुरे वक़्त पर हँसने की गलती मत करना,,

ये “वक़्त” है यारों, चेहरे याद रखता है..!!

वक़्त एक जैसा नहीं रहता साहब,,,,

उन्हें भी रोना पड़ता है, जो दूसरों को रुलाते हैं..

हर सच को जानने के लिए जवाब की जरूरत नहीं होती,

_ थोड़ा भरोसा वक्त पर रखिए.. वो सब कुछ सामने ला देता है.!!

वक्त का पासा कभी भी पलट सकता है, इसलिए

वही सितम कर,,,,जो तू भी सह सके.

वक़्त सिखा देता है फ़लसफ़ा ज़िंदगी का…

फ़िर नसीब क्या लकीर क्या और तक़दीर क्या…!!

बीते समय में जाकर नई शुरुआत नहीं की जा सकती, _

_ यह शुरुआत आज से ही करें ..

वक्त सब कुछ सीखा देता है साहब, _

_ लोगों के बिना रहना भी और लोगों के बिना जीना भी ..

अपने बीते हुए उस वक्त को भूल जाओ, जो तुम्हें तकलीफ देता हो ; _

_ पर यह मत भूलो कि उस बुरे वक्त ने तुम्हें क्या सिखाया ..

वक़्त घाव नहीं मिटाता, पर हमें इतना मज़बूत जरूर बना देता है कि हम उन्हें महसूस किए बिना चल सकें.!!
“गलत” समय सबके जीवन मे आता है..! _

_ लेकिन हमेशा कुछ ” अच्छा ” सिखाकर जाता है..!!

जब आप गुजरे समय पर अफसोस कर रहे होते हैं, _ उस समय भी समय गुजर रहा होता है !

कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोला करते हैं, _ इंसान की असलियत तो वक्त बताता है.

यादें रह जाती हैं याद करने के लिए और वक़्त सब कुछ ले कर गुजर जाता है.

वक़्त निकल जाने के बाद कदर की जाए तो, _ कदर नहीं अफ़सोस कहलाता है..

ना ज्यादा खुश होने की जरूरत… ना ही दुखी _ क्योंकि ये वक्त बीत जाएगा..

कोशिशें तो सब की जारी हैं, _ वक़्त बताएगा कौन किस पे भारी है.

वक़्त अच्छे – अच्छों को झुकाता है, _ और वक़्त सबका आता है..

जिसको जो कहना है कहने दो __ आपका क्या जाता है..

समय समय की बात है __ वक्त सबका आता है…

वक़्त बड़ा धारदार होता है, _ कट तो जाता है, मगर बहुत कुछ काटने के बाद…
वक़्त कभी कुछ उधार नहीं रखता, _ इज्जत, खुशी, नफरत, वफा सब दुगुना कर लौटा देता है.
समय के साथ बदल जाना बहुत आवश्यक है, क्योंकि समय बदलना सिखाता है _ रुकना नहीं..
वक्त इरादों का था, _ ओर तुम ख्वाबों में उलझे रहे !!
बचता कहाँ कुछ अपने हिस्से में, _ ये वक्त है सब समेट ही लेता है.
वक्त से सीखकर वक्त को ही सीखाना है… _ सफ़ल होकर ही अब मुँह दिखाना है…!!!
वक़्त बताता है कौन कब कितना अच्छा है, _ बातें तो सभी अच्छी अच्छी कर लेते हैं..
समय बताने वाले तो बहुत हैं, _ लेकिन समय पर काम आने वाले बहुत कम…
तुम अकेले रहने की सोच भी मत लेना ◆

◆मै तुम्हारा वक्त हूँ, साथ साथ चलूंगा◆

कहते हैं वक़्त सारे घाव भर देता है, _

_पर सच तो यही है कि,,,हम दर्द के साथ जीना सीख जाते हैं..

समय को जिस भाव से आप आवाज देंगे,

वैसा ही समय उपस्थिति हो जाता है, यही समय का दस्तूर है..

जिसका था इंतज़ार बहुत वक़्त से हमें _

_ वो वक़्त अपने वक़्त से पहले गुज़र गया !!

कभी वक्त नहीं दिया अपने आप को निहारने का _

_ और अब दर्पण से हम हिसाब मांगते हैं ..

खामोशियों से दिये जाएंगे, हर तानों का जवाब !

यकीन हैं वक़्त ने बिगाड़ा है तो, यही संवारेगा थोड़ा वक़्त लेकर !!

सबने इतने काम पाले हुए हैं और उनको करने के इतने बहाने हैं कि

_उनके पास ख़ुद के लिए कोई समय नहीं है.!!

यदि कोई आपके खिलाफ़ बोले तो आप बस सुनिए, जवाब देने का हक वक्त को दे दीजिए.

_ यदि कोई आपके साथ अत्याचार करे और आप अपना बचाव न कर पाएं तो वक्त के द्वारा निर्णय होने तक इंतज़ार करें.

_ संभवतः वक्त का निर्णय आपके हक में हो.
” समय हमेशा आपके साथ होता है ” वह बुरा या अच्छा हो, ये आपके कर्म तय करते हैं..
ज़िंदगी बहुत अजीब है _ समय गुजरता नहीं _ और साल के साल गुजरते जा रहे..
बुरा वक़्त भी गुज़र ही जाता है _ बस रब को हमारा सब्र आजमाना होता है..
वक्त की मार से गुजर रहे हो तुम,_ घबराओ नहीं _ अब निखर रहे हो तुम..
” वक्त कभी बुरा नहीं होता ” मगर वक्त पर हमारी इच्छा पुरी नहीं होती ~ तो वक्त बुरा लगता है..!!!

_”कुछ उलझनों के हल, _ वक्त पर छोड़ देने चाहिए !!”

समय एक बंद दरवाज़ा है…. और इस दरवाज़े के भीतर और बाहर खड़े लोग…. एक दूसरे को नहीं जानते…
कभी भी समय के हाथों की कठपुतली ना बनें, क्योंकि आप हालात बदलने का दम रखते हैं.
जो ठहरा …. वो तो लम्हा था _ वक्त तो होता ही है _ गुज़र जाने को..
माना की वक्त सता रहा है, मगर कैसे जीना है, वो भी तो बता रहा है…
उसका अच्छा वक्त जरूर आता है, जो किसी का बुरा नहीं चाहता है..
जो वक़्त के साथ नहीं चलते, वक़्त उन्हें छोड़ कर चला जाता है.
सबको वक्त देना भी, वक्त की बेज्जती है..
समय परिवर्तनशील है ; इस पर किसी को अहंकार नहीं करना चाहिए..
…अगर हम किसी को जवाब नही दे पाते ना …वक्त उन्हे जरूर जवाब देता है…
जो लोग खुद अपनी ग़लती नहीं मानते, _ वक़्त मनवा लेता है.
घड़ी सुधारने वाले बहुत मिल जाते हैं लेकिन समय स्वयं सुधारना पड़ता है.
बुरे वक्त में जनाब अपनों के ताने, दोस्त के बहाने और रोने वाले गाने रोज सुनने पड़ते हैं.
जब समय आप को चुनौती दे, _ साबित करें कि आप चुनौतियों के लायक हैं..
बुरा वक़्त तो निकल जाता है, _ लेकिन बदले हुए लोग जिंदगी भर याद रहते हैं.
वक़्त को समझना – समझदारी है, वक़्त पर समझना _ जिम्मेदारी है ….!!
सब्र, तहज़ीब, अदब दे कर जाता है, बुरा वक़्त अच्छे सबक दे कर जाता है !
वक्त का काम तो गुजरना है.. बुरा हो तो सब्र करो…अच्छा हो तो शुक्र करो.
वक़्त जब करवट लेता है तो बाजियां नहीं ” ज़िन्दगी ” पलट देता है.
वक़्त वो तराजू है साहब,, जो बुरे वक़्त में अपनों का वज़न बताता है…!!
वक्त आपका है चाहो तो सोना बना लो और चाहो तो सोने में गुजार दो.
डरिये वक़्त की मार से, बुरा वक़्त किसी को बताकर नही आता..!
सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं.
“वक्त अगर एक सा रहता तो फिर अपनों की पहचान कैसे होती”
वक्त की एक आदत बहुत अच्छी है, _ जैसा भी हो गुजर जाता है..!!
दुनिया में एक चीज़ सबको बराबर मिलती है और वो है __ ” वक़्त ” !!!
वक़्त जैसे बनो, जो क़दर ना करे …उसे दोबारा मत मिलो .!!
अपना कीमती समय किसी और को फ्री में बिलकुल मत दो.
वक्त की सबसे खास बात है कि यह पल-पल बदलता है…
वक़्त से हारा या जीता नहीं जाता, केवल सीखा जाता है ..!
समेटता रह गया मैं _ और वक़्त रेत सा फिसलता गया ..!!!
वक़्त जैसा बनो, जो क़दर ना करे उससे दोबारा मत मिलो..!
ये जो बीत रहा है, वो सिर्फ वक़्त नहीं.. _ जिंदगी भी है..
बुरा वक़्त रुलाता है, _ मगर; बहुत कुछ सिखाता भी है..
जिसे कोई नहीं सुधार पाता, _ उसे वक्त सुधार देता है.
वक़्त के साथ चलता रहे, यही बेहतर हैं इंसान के लिए.
थोड़ा सब्र करो, बुरे दिनों का भी बुरा वक़्त आता है.
तू वक्त था बदल गया, _ मैं इंसान था संभल गया..
एक वक्त के बाद सब बे मायने हो जाता है..!!
बीतता वक़्त है _ लेकिन ख़र्च हम हो जाते हैं.
जो बीत रहा है, _ वो वक़्त नहीं, ज़िन्दगी है..
वक़्त बदलता है, फिर बदलेगा..!!
वक्त आपके अनुकूल कभी नहीं आएगा, उसे लाना पड़ेगा, बेजोड़ प्रयास से तभी जाकर वक्त आपके अनुकूल होएगा,

अक्सर लोग कहते हैं कि ” अभी हमारा वक्त नहीं ” जबकि असल में ऐसा नहीं; क्रिया के प्रति प्रतिक्रिया जरुर होती है.

जिसको समय पकड़ना आ गया वह समय के रथ पर सवार होकर दुनिया में सदा याद किया जाता है

लेकिन जो समय की प्रतीक्षा करता रहता है वह ज़िन्दगी में कभी कुछ नहीं बनता !

उनकी खास कद्र किया करो जो आपको वक्त देते हैं, आज के युग मे भी,

क्योंकि उनके लिए वह वक्त नहीं परन्तु एक हिस्सा होता है उनके सीमित जीवन का…!!!

अपने बुरे वक्त का शुक्रिया अदा कीजिये, _क्योंकि उसी ने आपको मजबूत बनाया है.

_अच्छे वक़्त को देखने के लिए बुरे वक़्त को भी झेलना पड़ता है..

अभी साथ था ….. अब खिलाफ है __ वक़्त का भी …. आदमी सा हाल है..
लोगों को इतना समय कैसे मिल जाता है, फ़ालतू बातों पर डिस्कस करने के लिए..

_समझ के परे है..!!

जीवन के रास्ते शुरुआत में कठिन और डरावने लग सकते हैं, हर कदम अपरिचित सा लग सकता है, लेकिन समय धीरे-धीरे सब कुछ आसान बना देता है..

_ रास्तों की कठोरता धीरे-धीरे पिघलने लगती है, कदमों में आत्मविश्वास लौट आता है और वही यात्रा, जो कभी बोझिल लगती थी, एक दिन बहुत आसान लगने लगती है.!!
हां, माना कि वक़्त को कभी किसी ने नहीं देखा, लेकिन यही वक़्त की सबसे बड़ी ताकत है.

_ यह सबको सब कुछ दिखा देता है: कौन सच्चा था, कौन मुखौटे के पीछे छिपा था, कौन मूकदर्शक बना रहा, और कौन बहाने बना रहा था.
_ समय सबके चेहरे बेनकाब कर देता है.
_ शायद इसीलिए कहा जाता है, समय न दिखता है, न रुकता है, पर जो सिखाता है, वह जीवन भर याद रहता है.!!
वक़्त से इंसान ने पूछा मैं हार क्यों जाता हूं, फिर वक़्त ने कहा धुप हो या छाव, रात हो या बरसात, मैं हर समय चलता रहता हूं, तू भी मेरे साथ चल कभी नहीं हारेगा.
…आलस छोड़ो और जीवन के उच्च से उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त करने में जुट जाओ…

_ क्योंकि एक वक्त पर वक्त भी हिसाब माँगता है तुमने उसे कैसे खर्च किया…!!!!

अगर आप बहुत बुरे वक्त से गुज़र रहे हैं तो चलते रहिए, रुकिए मत… ” बुरा वक्त गुज़र जाएगा.”
बुरा वक्त भी कुछ अच्छा लेकर आता है, _ कौन अच्छा कौन पराया हमें यह सिखाता है,

अरे परेशानियों के दिन घट रहे हैं यह सोचकर तसल्ली कर लिया करो यारों,

तेरे हिस्से का बोया तुझे ही काटना है यह वक्त सिखाता है..

वक्त वक्त की बात है वरना अच्छे वक्त में भी हम अच्छे थे और बुरे वक्त में भी हम अच्छे हैं,

_सवाल नजरिए का है कि हमें किस वक्त में लोग किस नजरिए से देखते हैं !!

वक्त भी बदलते देखा है, _ अच्छा बदला तो, बुरे को भी जाते देखा है,

हौसला होना जरूरी है, फिर जुनूं हो तो, _ वक्त को खुद के मुताबिक बनाते देखा है..

समय का चक्र अनवरत चलते रहता है, यह पीछे नहीं होता,

_कोई उपाय नहीं है, इसे पीछे करने का.
_इसकी तो आदत है आगे बढ़ने की..
_संसार बदलते रहता है,
_लोग इस दुनिया में आते हैं, जाते हैं.
_समय सबको बिना किसी प्रतिक्रिया के चुपचाप देखते रहता है,
_नाराज या खुश नहीं होता,
_जो मर्जी आए करो, जैसा दिल आए वैसा जियो,
_हंस कर जियो या रो कर जियो, किसी की ज़िंदगी से उसे कोई मतलब नहीं.
_सत्य यह है कि इस दुनिया में जो आया है, उसे एक दिन जाना है.
_दरअसल समय सबका मालिक है. __वही स्मरणीय है.
“वक़्त”

घर बनाने में वक़्त लगता है, पर मिटाने में पल नहीं लगता.

दोस्ती बड़ी मुश्किल से बनती है, पर दुश्मनी में वक़्त नहीं लगता.

गुज़र जाती है उम्र रिश्ते बनाने में, पर बिगड़ने में वक़्त नहीं लगता.

जो कमाता है महीनों में आदमी, उसे गंवाने में वक़्त नहीं लगता.

पल पल कर उम्र पाती है ज़िंदगी, पर मिट जाने में वक़्त नहीं लगता.

जो उड़ते हैं अहम के आसमानों में, जमीं पर आने में वक़्त नहीं लगता.

हर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी में, वक़्त के गुजरने में वक़्त नहीं लगता..

जर्जर कश्ती पतवारों संग बीच भंवर में उलझी जाए,

कच्ची मिट्टी की दीवारों में दीमक चुपके से सेंध लगाए !!

कालचक्र के हाथों की कठपुतली बन वक्त नाच नचाए ,

जीवन में मुसीबत अच्छे -अच्छे को उनकी औकात बताए !!

आपका कीमती समय कीमती चीज़ों में ही लगना चाहिए; आपके विकास में लगना चाहिए, तब जीवन मूल्यवान बनेगा.

Your precious time should be spent in valuable things only; when spent in your development, it makes your life valuable.

कहते हैं कि वक़्त बड़ा ही बलवान होता है. इसके आगे किसी की कुछ भी औकात नहीं है. एक पल में क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता. हम यह कह सकते हैं कि संसार की हर चीज़ वक़्त की गुलाम होती है. अगर किसी इन्सान का वक़्त अच्छा है तो सब ठीक चलता रहता है और जैसे ही वक़्त ने करवट ली समझो सब कुछ नष्ट.

It is said that time is very powerful. Beyond this no one has any right. What happens in a moment, nothing can be said. We can say that everything in the world is a slave of time. If a person’s time is good, then everything goes on fine and as soon as the time has taken a turn, think that everything is destroyed.

आज आपकी समस्याएं कठिन हो सकती हैं, लेकिन याद रखें कि समय एक वफादार सहयोगी है ; _ जिस तरह हर दिन सूरज उगता है, वैसे ही आपकी चुनौतियां भी अंततः खत्म हो जाएंगी.

इसलिए चिंता न करें, क्योंकि आपके सबसे बुरे क्षण भी अस्थायी होते हैं। लगे रहो और जल्द ही एक उज्जवल कल की सुबह होगी.

Your problems may be daunting today, but remember that time is a faithful ally. Just as the sun rises each day, your challenges too will eventually set.

So don’t worry, for even your darkest moments are temporary. Keep persevering and the dawn of a brighter tomorrow will soon break through.

“सब कुछ करने के लिए कभी भी पर्याप्त समय नहीं होता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम करने के लिए हमेशा पर्याप्त समय होता है.”

“There is never enough time to do everything, but there is always enough time to do the most important thing.”

किसी को आपके लिए समय निकालने के लिए मजबूर न करें, यदि वे वास्तव में चाहते हैं, तो वे करेंगे.

Don’t force someone to make time for you, if they really want to, they will.

कभी भी किसी को अपना समय दो बार बर्बाद करने का मौका न दें.

Never give someone the opportunity to waste your time twice.

मैं एक बात समझ गया कि _हमारी जिन्दगी में अक्सर ऐसे लोग आएंगे- जायेंगे,

_जो कि हमारा कीमती समय और हमारी ऊर्जा को अपनी बेहूदा हरकतों से मिसयूज करने की कोशिश करेंगे
_ लेकिन आपकी चाभी आपके हाथ में है !!
_जीवन में एक बात सीख लो कि _आप, आपका समय, आपकी ऊर्जा, आपका शब्द, आपके विचार, बहुत कीमती हैं,
_इसको बचा के रखें और सही समय पर सही लोगों के सामने ही इसका इस्तेमाल करें !!
“ज्यादातर समय हम जल्दी में रहते हैं.

_ हमें कभी भी बात करने का ज्यादा मौका नहीं मिलता.

_ परिणाम एक प्रकार का अंतहीन दिन है.

_ उथलापन, एक नीरसता जो व्यक्ति को छोड़ देती है.

_ वर्षों बाद सोच रहा था कि ..सारा समय कहाँ चला गया.

_और खेद है कि यह सब ख़त्म हो गया.”

और फ़िर एक दिन वक़्त मुझे झकझोर के उठायेगा और बोलेगा..

_ कहाँ खोए हो, अब होश में आ जाओ, वो सब जा चुके हैँ, जिन्हें तुम जानते थे, जो तुम्हे जानते थे,
_ अब तुम्हें भी चलना चाहिए, अब वक़्त बर्बाद ना करो और फ़िर जब मुझे होश आएगा,
_ तब मैं भी कहीं किसी वक़्त में ख़त्म हो चुका रहूँगा.!!
कभी-कभी जीवन मे बुरा वक्त इसलिए आता है, कि वो हमें कुछ सिखा सके

ना सिर्फ़ सब्र का मतलब, बल्कि इंसानों की असलियत भी..
_ इसी बुरे वक्त में कुछ लोग हमें छोड़ जाते हैं, और कुछ ऐसे मिलते हैं, जो बिना कुछ कहे हमारे साथ खड़े रहते हैं..
_ तब समझ आता है कि बुरा वक्त बुरा नहीं होता, वो तो बस अच्छा वक्त आने से पहले, अच्छे लोगों से मिलवाने की एक वजह होता है.!!
हम जिस बुरे समय की कल्पना करके उससे बचने की तैयारी करते हैं, वो बुरा समय हमारी ज़िंदगी में आता है.

_ यकीन मानिए, जो उस बुरे से बचने की तैयारी ही नहीं करता, उसकी ज़िंदगी में वो बुरा समय आता भी नहीं है.

सुविचार – *उल्टी यात्रा* *बुढ़ापे से* *बचपन की तरफ़* – 051

*उल्टी यात्रा* *बुढ़ापे से* *बचपन की तरफ़*

*जो 50 को पार कर गये हैं या *करीब हैं उनके लिए यह खास है*

*मेरा मानना है कि, दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है, हमारे बाद की किसी पीढ़ी को, “शायद ही ” इतने बदलाव देख पाना संभव हो*

*हम_वो आखिरी_पीढ़ी_हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिका जेट देखे हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है, और “वर्चुअल मीटिंग जैसी” असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है।*

हम_वो_ “पीढ़ी” _हैं *जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के, घरों में बैठ कर, परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। जमीन पर बैठकर खाना खाया है। प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है।*

हम वो ” लोग ” हैं ? *जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल, खेले हैं ।*

हम आखरी पीढ़ी के वो लोग हैं ? *जिन्होंने चांदनी रात, डीबली, लालटेन, या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है। और दिन के उजाले में चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।

हम वही पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं। और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।*

हम उसी आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।*

हम वो आखरी लोग हैं ? *जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।*

हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती धोई है।*

हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है।*

हम वो आखरी लोग हैं ? *जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे। और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।*

हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं।*

हम वो आखरी लोग हैं ? *जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।*

*हम निश्चित ही वो लोग हैं ?* *जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे प्रोग्राम पूरी शिद्दत से सुने हैं।*

*हम वो आखरी लोग हैं ? *जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं।*

*हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं ? *जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं, जो लगातार कम होते चले गए। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुद गर्मी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं।* और *हम वो खुशनसीब लोग हैं ?* *जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है…!!*

*हम आज के भारत की एकमात्र वह पीढी है ?* *जिसने अपने ” माँ-बाप “की बात भी मानी , और ” बच्चों ” की भी मान रहे है।*

*शादी मे (buffet) खाने में वो आनंद नहीं जो पंगत में आता था जैसे….* *सब्जी देने वाले को गाइड करना* *हिला के दे* *या तरी तरी देना!*

*👉 उँगलियों के इशारे से 2* *लड्डू और गुलाब जामुन,* *काजू कतली लेना* *👉 पूडी छाँट छाँट के* *और* *गरम गरम लेना !.* *👉 पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ* *गया !* *अपने इधर और क्या बाकी है।* *जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना*

*👉 पास वाले रिश्तेदार के पत्तल में जबरदस्ती पूडी* *🍪 रखवाना !* *👉 रायते वाले को दूर से आता देखकर फटाफट रायते* *का दोना पीना ।* *👉 पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी। उसके* *हिसाब से बैठने की पोजीसन बनाना।* *👉 और आखिर में पानी वाले को खोजना।*

………….. *एक बात बोलूँ* *इनकार मत करना* *जो इस मेसेज को पढेगा* *उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.* *वो आपकी वजह से अपने बचपन में चला जाएगा, चाहे कुछ देर के लिए ही सही।* *और ये आपकी तरफ से उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.* ~~~~~~~~~~~~

 

सुविचार – ज़िन्दगी 50 की उम्र के बाद – 050

उम्र की दहलीज पर जब सांझ की आहट होती है,,,

_ तब ख्वाहिशें थम जाती हैं और सुकून की तलाश बढ़ जाती है..!!

हम एक बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में अपनी ज़िन्दगी को ही छोटा करते चले जा रहे हैं.!!
आओ किसी का यूँही, इंतजार करते हैं !

चाय बनाकर फिर, कोई बात करते हैं !!

उम्र पचास के पार, हो गई हमारी !

जीवन का, इस्तक़बाल करते हैं !!

कौन आएगा अब, हमको देखने यहां !

एक दूसरे की, देखभाल करते हैं !!

बच्चे हमारी पहुंच से, अब दूर हो गए !

आओ फिर से दोस्तों को, कॉल करते हैं !!

जिंदगी जो बीत गई, सो बीत गई !

बाकी बची में फिर से, प्यार करते हैं !!

ऊपरवाले ने जो भी दिया, लाजवाब दिया !

चलो शुक्रिया उसका, बार बार करते हैं !!

छाती पर पत्थर रखकर जीना सीख लो,

कम बोलो, ज़्यादा सुनो, सामने चल कर किसी को शिछा मत दो,

दिल के ज़ख्म सबको न बताएँ, सबके घर मरहम नहीं होते,

लेकिन नमक सब के घर होता है…

सुकी रोटी भी प्रेम से खाएँ, करोड़ों लोगों को वो भी नसीब नहीं होती,

करकसर से जीओ __ करकसर इंसान को मज़बूत बना देती है..

अकेले जीना सीख लो, अब जोड़ी कभी भी टूट सकती है..

किताबें पढ़ने का शौक रखो, वो अंत तक साथ देंगी…

छाती पर पत्थर रखकर जीना सीख लो,

समय चला, पर कैसे चला…पता ही नहीं चला…

ज़िन्दगी की आपाधापी में, कब निकली उम्र हमारी, यारों

पता ही नहीं चला.

कंधे पर चढ़ने वाले बच्चे, कब कंधे तक आ गए,

पता ही नहीं चला.

किराये के घर से शुरू हुआ था सफर अपना

कब अपने घर तक आ गए,

पता ही नहीं चला.

साइकिल के पैडल मारते हुए, हांफते थे उस वक़्त,

कब से हम, कारों में घूमने लगे हैं,

पता ही नहीं चला.

कभी थे जिम्मेदारी हम माँ बाप की,

कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार हम,

पता ही नहीं चला.

एक दौर था जब दिन में भी बेखबर सो जाते थे,

कब रातों की उड़ गई नींद,

पता ही नहीं चला.

जिन काले घने बालों पर इतराते थे कभी हम,

कब सफेद होना शुरू कर दिया,

पता ही नहीं चला.

दर दर भटके थे, नौकरी की खातिर,

कब रिटायर होने का समय आ गया,

पता ही नहीं चला.

बच्चों के लिए कमाने, बचाने में

इतने मशगूल हुए हम,

कब बच्चे हमसे हुए दूर,

पता ही नहीं चला.

भरे पूरे परिवार से, सीना चौड़ा रखते थे हम,

अपने भाई बहनों पर गुमान था,

उन सब का साथ छूट गया,

कब परिवार हमीं दो पर सिमट गया,

पता ही नहीं चला.

अब सोच रहे थे, अपने लिए भी कुछ करें,

पर शरीर ने साथ ही देना बंद कर दिया,

पता ही नहीं चला !!!!

समय चला, पर कैसे चला…पता ही नहीं चला…

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.

बिस्तरों पर अब सलवटें नहीं पड़ती

ना ही इधर उधर छितराए हुए कपड़े हैं

रिमोट के लिए भी अब झगड़ा नहीं होता

ना ही खाने की नई नई फरमाइशें हैं

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.

सुबह जल्दी उठने के लिए भी नहीं होती मारा मारी

घर बहुत बड़ा और सुंदर दिखता है

पर हर कमरा बेजान सा लगता है

अब तो वक़्त काटे भी नहीं कटता

बचपन की यादें कुछ दिवार पर फ़ोटो में सिमट गयी है

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.

अब मेरे गले से कोई नहीं लटकता

ना ही घोड़ा बनने की ज़िद होती है

खाना खिलाने को अब चिड़िया नहीं उड़ती

खाना खिलाने के बाद की तसल्ली भी अब नहीं मिलती

ना ही रोज की बहसों और तर्कों का संसार है

ना अब झगड़ों को निपटाने का मजा है

ना ही बात बेबात गालों पर मिलता दुलार

बजट की खींच तान भी अब नहीं है

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.

पलक झपकते ही जीवन का स्वर्ण काल निकल गया

पता ही नहीं चला

इतना ख़ूबसूरत अहसास कब पिघल गया

तोतली सी आवाज़ में हर पल उत्साह था

पल में हँसना पल में रो देना

बेसाख़्ता गालों पर उमड़ता प्यार था

कंधे पर थपकी और गोद में सो जाना

सीने पर लिटाकर वो लोरी सुनाना

बार बार उठ कर रज़ाई को उढ़ाना

अब तो बिस्तर बहुत बड़ा हो गया है

मेरे बच्चों का प्यारा बचपन कहीं खो गया है

अब कोई जुराबे इधर उधर नहीं फेंकता है..

अब fridge भी घर की तरह खाली रहता है

बाथरूम भी सूखा रहता है

Kitchen हर दम सिमटा रहता है

अब हर घंटी पर लगता है कि शायद कोई surprise है

और बच्चों की कोई नयी फरमाईश है

अब तो रोज मेरी सेहत फोन पर पूछते हैं

मुझे अब आराम की हिदायत देते हैं

पहले हम उनके झगड़े निपटाते थे

आज वे हमें समझाते हैं

लगता है अब शायद हम बच्चे हो गए हैं

मेरे बच्चे अब बड़े हो गए हैं और हम अकेले हो गए हैं.

आदमी भी क्या क्या नहीं सोचता है ? लेकिन सोचा हुआ कभी भी वैसे नहीं होता.. जैसा हमारे दिवा सपने में होता है.

_ बचपन खेल खेल में कट जाता है.
_ जवानी पैसा कमाने और बच्चों को सेट करने में जल गयी.
_ अब आया तीसरी पहर जिन्दगी का, जब शरीर ने काम करना बन्द कर दिया, बच्चे अपने परिवार के साथ दूर निकल गये.
_ जीवन स्वास्थ्य की देखभाल में कटने लगता है, अब गये कि तब गये.
_ लगा यह रात आखरी होगी, लेकिन अभी कर्मों के और फल सामने आने थे.
_ बहुत अच्छा होगा हम उम्र के उस पुल को पार करते हुए पीछे मुड़ कर न देखें..- पीछे का ध्यान दुखी ही करेगा.
_ आगे बढ़िये और हम उम्र लोगों के साथ समय बिताईये.
_ यही स्वर्ग है.!!
– Tejbeer Singh sadher
💐समझोता जिदंगी की किताब है 💐

पच्चपन, साठ की उम्र वालो आपको सलाम

सुन लो मेरा ये पैग़ाम ।

बहुत मज़े से कटेगी बाक़ी की ज़िंदगानी,

बहुओं के संग समझौता करना सीख लो।

छोटे – बड़ें सब को मन की करने दो,

मत टोको जो करते है, करने दो।

कम बोलो, ख़ूब सुनो,

कभी सिखाने की कोशिश मत करो,

अपने काम स्वयं करना सीख लो ।

दिल पर पत्थर रखकर, सब नज़ारा देखते रहो ,

मौन रहना सीख लो।

अाप को जानो, आप पहचानो

अपने लिये जीना सीख लो।

नाती पोतो के संग बहुओं के मिज़ाज देखकर प्यार करो,

ज्ञान देने की कोशिश कदापि न करो ।

अपने लिये जीना सीख लो

दिल के ज़ख़्म छुपाकर रखना

कभी बताने की कोशिश मत करना !

मलहम की चाह मे नून छिड़का जायेगा,

पछतावा हो वह काम नही है करना,

रुखी सूखी जो मिल जायें प्रेम से खाकर तृप्त रहो !

बहुतों के नसीब तो घर भी नही,

वृद्धा आश्रम में है रहते, जैसे तैसे समय बीताते,

अपने के संग के लिए हसरतें मन में रख परलोक सिधार जाते,

जो मिला है उस में खुश रहना सीख लो !

अच्छे दोस्तों के साथ समय बिताना सीख लो !

थोड़ा है थोड़े में गुज़ारा करना सीख लो !

अब नही आपके पुराने दिन यह अच्छे से समझ लो !

जीवन साथी आपका है, उसकी क़दर करना सीख लो,

वही अंत तक निभायेगा, प्यार का रिंश्ता सच्चा रिश्ता

बाक़ी रिश्ते मतलब के है यह अच्छे से जान लो !

अपने आप को जानो, अपने को पहचानो, अपने आप मे रहना सींख लो !

कुछ किताबे पढ़ना सीख लो, कुछ लेखन से दिल लगाना सीख लो ।

ख़ाली वक्त के साथी है, ख़ूब प्यार तुम्हें दे जायेंगे,

नया नया ज्ञान भी मिलता रहेगा,

न शिकवा न शिकायत तुम्हें तुम्हारी तरह ही चाहेगी

उनसे दिल लगाना सीख लो।

अंत समय आयेगा कौन किसके पहले जायेगा,

यह बात किसी को नही है पता।

एक दिन अकेले रहने की तैयारी कर लो,

जीवन साथी फुर्र से उड़ जायेगा,

तेरे हाथ कुछ न आयेगा !

जीवन सूना हो जायेगा, कुछ सिमरण रब का कर लो साथ यही जायेगा,

बाक़ी सब मोह माया है, ख़ाली हाथ जाना है ।

पच्चपन, साठ के उम्र वालो अपने लिये जीना सीख लो।

दिल के ज़ख़्मों को, दिल में छिपाना सीख लो,

जिदगीं से समझौता करना सीख लो।

मैं उम्मीद करता हूं कि हम में से बहुत से लोगों की जिंदगी उपरोक्त वर्णन से काफी बेहतर होगी, फिर भी अगर इन बातों को माना जाएगा तो परिणाम अच्छे ही आएंगे.

*पता-ही-नहीं-चला*.

अरे यारों कब 30+, 40+, 50+ के हो गये
*पता ही नहीं चला।*
कैसे कटा 21 से 31,41, 51 तक का सफ़र
*पता ही नहीं चला*
क्या पाया क्या खोया क्यों खोया
*पता ही नहीं चला*
बीता बचपन गई जवानी कब आया बुढ़ापा
*पता ही नहीं चला*
कल बेटे थे आज ससुर हो गये
*पता ही नहीं चला*
कब पापा से नानु बन गये
*पता ही नहीं चला*
कोई कहता सठिया गये कोई कहता छा गये
क्या सच है
*पता ही नहीं चला*
पहले माँ बाप की चली फिर बीवी की चली
अपनी कब चली
*पता ही नहीं चला*
बीवी कहती अब तो समझ जाओ
क्या समझूँ क्या न समझूँ न जाने क्यों
*पता ही नहीं चला*
दिल कहता जवान हूं मैं उम्र कहती नादान हुं मैं
इसी चक्कर में कब घुटनें घिस गये
*पता ही नहीं चला*
झड गये बाल लटक गये गाल लग गया चश्मा
कब बदलीं यह सूरत
*पता ही नहीं चला*
मैं ही बदला या बदले मेरे यार
या समय भी बदला
कितने छूट गये कितने रह गये यार
*पता ही नहीं चला*
कल तक अठखेलियाँ करते थे यारों के साथ
आज सीनियर सिटिज़न हो गये
*पता ही नहीं चला*
अभी तो जीना सीखा है कब समझ आई
*पता ही नहीं चला*
आदर सम्मान प्रेम और प्यार
वाह वाह करती कब आई ज़िन्दगी
*पता ही नहीं चला*
बहु जमाईं नाते पोते ख़ुशियाँ लाये ख़ुशियाँ आई
कब मुस्कुराई उदास ज़िन्दगी
*पता ही नहीं चला*
जी भर के जी ले जी ले भाई , फिर न कहना
*पता ही नहीं चला।*
*अब हम छोटे हो गए*!!

🙏🏻 *अब हम छोटे हो गए !!* *क्योंकि ! हमारे बच्चे बड़े हो गए !*🤗
*ऐसा मत करो, वैसा मत करो*
*ये खाया करो, वो खाया करो*
*दिन भर टीवी मत देखो*
*आखों पर असर पड़ेगा*
*कभी आँगन में ही घूम लिया करो*
*बच्चों से ही सीख लिया करो*
*अब हम बच्चे हो गए !!* *क्योंकि, बच्चे हमारे बड़े हो गए !*
*अब तुम्हारी उम्र बढ़ रही है,*
*बचपना छोड़ो, ज़िंदगी ढल रही है*
*समझदारी की बातें किया करो*
*सबसे ज़्यादा मत बोला करो*
*हम भी हाँ में हाँ मिलाते हैं*
*जैसे सब कुछ सीख जाते हैं*
*अब हम छोटे हो गए !!**क्योंकि, बच्चे हमारे बड़े हो गए !*
*जो काम कर पाओ वही किया करो,*
*नहीं बनता, किसी से कह दिया करो*
*यह सब करने की उम्र नहीं, तुम्हारी*
*कुछ बातें मान लिया करो हमारी*
*कही चोट लग गई तो क्या होगा*
*बिन बात के लफड़ा होगा*
*अब हम छोटे हो गए !! *क्योंकि, बच्चे हमारे बड़े हो गए !*
*खीज जाते हैं कभी – कभी*
*ज़िद में रूठ भी जाते कभी – कभी*
*पर जल्दी ही मान भी जाते है*
*मीठा देख ललचा जाते हैं*
*क्या करें जाएं भी कहाँ*
*अपने तो अपने ही होते है*
*यही सोच फिर जुट जाते है*
*अब हम छोटे हो गये* *क्योंकि! बच्चे हमारे बड़े हो गए !!!!😀*
बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना छोड़ दीजिए !
*_आप पाँच दशक पूरे कर चुके हैं, आप जान लिजिए…._*

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● *जीवन मर्यादित है और उसका जब अंत होगा, तब इस लोक की कोई भी वस्तु साथ नही जाएगी !*
● *फिर ऐसे में कंजूसी कर, पेट काट कर बचत क्यों कि जाए? आवश्यकतानुसार खर्च क्यों ना करें? जिन बातों में आनंद मिलता है, वे करना ही चाहिए।*
● *हमारे जाने के पश्चात क्या होगा, कौन क्या कहेगा, इसकी चिंता छोड़ दें, क्योंकि देह के पंचतत्व में विलीन होने के बाद कोई तारीफ करें, या टीका टिप्पणी करें, क्या फर्क पड़ता है?*
● *उस समय जीवन का और महत्प्रयासों से कमाए हुए धन का आनंद लेने का वक्त निकल चुका होगा।*
● *अपने बच्चों की जरूरत से अधिक फिक्र ना करें।* *उन्हें अपना मार्ग स्वयं खोजने दें। अपना भविष्य स्वयं बनाने दें। उनकी ईच्छा*
*आकांक्षाओं और सपनों के गुलाम आप ना बनें।*
● *बच्चों पर प्रेम करें, उनकी परवरिश करें, उन्हें भेंट वस्तुएं भी दें, लेकिन कुछ आवश्यक खर्च स्वयं अपनी आकांक्षाओं पर भी करें।*
● *जन्म से लेकर मृत्यु तक सिर्फ कष्ट करते रहना ही जीवन नही है, यह ध्यान रखें।*
● *आप पाँच दशक पूरे कर चुके हैं, अब जीवन और आरोग्य से खिलवाड़ कर के पैसे कमाना अनुचित है, क्योंकि अब इसके बाद पैसे खर्च करके भी आप आरोग्य खरीद नही सकते।*
● *इस आयु में दो प्रश्न महत्वपूर्ण है। पैसा कमाने का कार्य कब बन्द करें और कितने पैसे से अब बचा हुआ जीवन सुरक्षित रूप से कट जाएगा।*
● *आपके पास यदि हजारों एकर उपजाऊ जमीन भी हो, तो भी पेट भरने के लिए कितना अनाज चाहिए? आपके पास अनेक मकान हो, तो भी रात में सोने के लिए एक ही कमरा चाहिए।*
● *एक दिन बिना*
*आनंद के बीते,* *तो आपने जीवन का एक दिन गवाँ दिया और एक दिन आनंद में बीता तो एक दिन आपने कमा लिया है, यह ध्यान में रखें।*
● *एक और बात, यदि आप खिलाड़ी प्रवृत्ति के और खुशमिजाज हैं, तो बीमार होने पर भी बहुत जल्द स्वस्थ होंगे और यदि सदा प्रफुल्लित रहते हैं, तो कभी बीमार ही नही होंगे।*
● *सबसे महत्वपूर्ण यह है कि, अपने आसपास जो भी अच्छाई है, शुभ है, उदात्त है, उसका आनंद लें और उसे संभालकर रखें।*
● *अपने मित्रों को कभी न भूलें। उनसे हमेशा अच्छे संबंध बनाकर रखें। अगर इसमें सफल हुए, तो हमेशा दिल से युवा रहेंगे और सबके चहेते रहेंगे।*
● *मित्र न हो, तो अकेले पड़ जाएंगे और यह अकेलापन बहुत भारी पड़ेगा।*
● *इसलिए रोज व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क में रहें, हँसते हँसाते रहें, एक दूसरे की तारीफ करें। जितनी आयु बची है, उतनी आनंद में व्यतीत करें।*
● *प्रेम मधुर है*, *उसकी*
*लज्जत का आनंद लें।*
● *क्रोध घातक है, उसे हमेशा के लिए जमीन में गाड़ दें।*
● *संकट क्षणिक होते हैं, उनका सामना करें।*
● *पर्वत शिखर के परे जाकर सूर्य वापिस आ जाता है, लेकिन दिल से दूर गए हुए प्रियजन वापिस नही आते।*
● *रिश्तों को संभालकर रखें, सभी में आदर और प्रेम बाँटें। नही तो जीवन क्षणभंगुर है, कब खत्म होगा, समझ में भी नही आएगा। इसलिए आनंद दें, आनंद लें।*
*दोस्ती और दोस्त संभाल कर रखें।*
*जितना हो सके उतना गैट टूगेदर करते रहें!*
🤝🏻🤝🏻🤝🏻🤝🏻🤝🏻🤝🏻🤝🏻🤝🏻
“समय की मुस्कान”

_ बीस की दहलीज़ पर खड़े थे जब, आँखों में अनगिनत स्वप्न लिए,
_ हर सुबह एक नई संभावना थी, हर शाम उम्मीद की दीप लिए.
_ कदम बढ़े, राहें बदलती रहीं, धूप-छाँव का संग चलता रहा,
_ कभी संघर्ष की कड़ी परीक्षा, कभी सफलता का फूल खिलता रहा.
_ चालीस बरस यूँ बीत गए जैसे, पलकों पर ठहरी एक मधुर कहानी,
_ हँसी के कुछ अनमोल मोती, और अनुभव की गहरी निशानी.
_ आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो समय भी जैसे मुस्कुराता है,
_ कहता है—“तुमने जीवन को जिया है”, हर क्षण को अर्थपूर्ण बनाया है.
_ न उम्र का कोई अफसोस रहे, न बीते पलों की कोई थकान,
_ बस संतोष की शांत रोशनी हो, और हृदय में जीवन का मधुर गान.
_ क्योंकि जो समय को सहेज लेता है, वही सच्चा धनवान कहलाता है,
_ वर्ष नहीं, अनुभव गिनता है जीवन, और वही अमरता को छू जाता है.!!
खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है।

हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये।
बाल रंगने है तो रंगिये,
वज़न कम रखना है तो रखिये,
मनचाहे कपड़े पहनने है तो पहनिए,
बच्चों की तरह खिलखिलाइये,
अच्छा सोचिये,
अच्छा माहौल रखिये,
शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये।
कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती,
कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,
कोई तेल बाल नही उगाता,
कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता।
चाहे वो कोई भी कंपनी हो …..सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं।
ये सब कुदरती होता है।
उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है।
पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नही कर सकते।
ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम।
किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती !
कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,
कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,
कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं
या आपके होंठों की shape perfect नही हैं….
फिर भी हम सुंदर हैं,
अपनी सुंदरता को पहचानिए।
दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना।
हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं
…और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।
मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।
आत्मा को जानने का प्रयास करो
पेट निकल गया तो कोई बात नही
उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही ।
आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।
सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया
तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,
यह खाओ,वो मत खाओ
ठंडा खाओ, गर्म पीओ,
कपाल भाती करो,
सवेरे नीम्बू पीओ ,
रात को दूध पीओ
ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो
दाहिने से सोइये ,
बाहिने से उठिए,
हरी सब्जी खाओ,
दाल में प्रोटीन है,
दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा।
अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को
पढ़ने लगें तो पता चलेगा
ये ज़िन्दगी बेकार है
ना कुछ खाने को बचेगा
ना कुछ जीने को !!
आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।
ये सारा ऑर्गेनिक ,एलोवेरा, करेला,
मेथी, में फंसकर
दिमाग का दही हो जाता है।
स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है।
अरे !
मरने के लिये जन्म लेते हैं,
कभी ना कभी तो मरना है
अभी तक बाज़ार में
अमृत बिकना शुरू नही हुआ।
हर चीज़ सही मात्रा में खाइये,
हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो
आपको अच्छी लगती है।
भोजन का संबंध मन से होता है
और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है।
मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता।
थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,
टहलने जाइये, लाइट कसरत करिये
ध्यान करिये, व्यस्त रहिये, खुश रहिये,
शरीर से ज्यादा _ मन को सुंदर रखिये..
हमारे ये बच्चे!

________________
एक दिन उनका कमरा खाली रह जाता है.
_ वे चले जाते हैं पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में
एक रूटीनी साफ- सफाई के बाद
ये कमरे बंद रहने लगते हैं.
_ इन कमरों को हम उनके नाम से जानने लगते हैं.
_ वे छुट्टियों में लौटते हैं
तब तक वे एक नई दुनिया बना चुके होते हैं.
_ वे मोबाइल फोन पर गुम हो गये दिखते हैं.
_ महीनों बाद घर लौट कर आने के बाद भी
अपने पुराने स्कूल और उन दिनों की दोस्ती
को लेकर उनके भीतर कोई उत्साह दिखाई नहीं पड़ता.
_ वे नहीं कहते कि हमें मामा के घर जाना है.
_ “बुआ को देखे कितने दिन हो गए हैं !
_ मैं छुट्टियों में उसके घर जाना चाहता हूं”
यह सुने सालों हुए !
_ रिश्तेदारी में हमउम्र बच्चों को लेकर भी
उनके भीतर कोई कौतुहल, कोई उछाह नहीं !
_ उनकी दिलचस्पी घर के छोटे से
बाग-बगीचे में भी नहीं दिखती.
_ उन्हें मोहल्ले में किसी से नहीं मिलना-जुलना.
_ उन्होंने मोबाइल के भीतर ही अपनी दुनिया रच डाली है वे किसी अज्ञात संसार में रहते हैं अब
जिनके बारे में हमें कुछ पता नहीं होता.
_ एक दोस्त की 14 साल की बेटी को जानता हूं.
_ वह अपने किसी रिश्तेदार को नहीं जानती.
_ ना उसके भीतर ऐसी कोई ख्वाहिश ही दिखती है.
_ मोबाइल फोन ही अब उसकी दुनिया है.
_ उसके आक्रामक हो गए व्यवहार से
अब माता-पिता ही शंकित और घबराए से दिखते हैं.
_ उनमें से बहुत कम की दिलचस्पी होती है कि
एक वक्फे के बाद घर लौटे हैं तो
मोहल्ले के पुराने दोस्तों से मिल लें या
उनके घर ही हो आएं !
_ घर पर कोई आए तो सामने आने से बचते हैं.
_ कहते हैं : मैं मिलकर क्या करूंगा !
_ आए हैं, तो मैं क्या करूँ !
_ देखते ही देखते सुविधाओं में पल रहे
इन बच्चों की कितनी बदल गई है दुनिया !
_ वे तुनक मिजाज हैं.
_ अपनी जीवन शैली में उन्हें टोका-टोकी बिल्कुल पसंद नहीं.
_ चीजों को अपनी तरह से परिभाषित करना वे सीख गये हैं.
_ सामाजिकता और जुड़ाव जैसे शब्द उनकी डिक्शनरी से धीरे-धीरे दूर जा रहे हैं.
_ वे संबंधों को जरूरत के हिसाब से तौलते हैं.
_ उन्हें दुनिया की बहुत सारी चीजों के बारे में
बहुत कुछ पता है.
_ वे अक्सर हमें चौंका देते हैं
अपनी जानकारियों से.
हम अपने साथियों से कहते हैं कि
जो कुछ हम बीस- बाईस की उम्र में जान पाए
ये बच्चे अभी ही जान गए हैं.
_ और यह सब कहते हुए
एक घबराहट जैसा भाव
हमारा पीछा करता है.
_ वे दुनिया भर की ब्रांडेड चीजों के बारे में जानते हैं.
_ लेकिन मोहल्ले के दस घरों से ठीक से
उनका परिचय नहीं हैं.
_ सौ रुपए देकर उन्हें हाट से सब्जी लाने के लिए कहो
तो उजबक की तरह हमारा मुंह ताकने लगते हैं !
_ ऐसी दुनिया तो हमने नहीं चाही थी !
_ कहां चाहा था अपने बच्चों के
आस पड़ोस का खो जाना
_ उनके भीतर से रिश्तेदारियों और परिचयों का महत्वहीन हो जाना.
_ हमने तो यही चाहा था कि जिन अभावों के भीतर हम जिए उनकी छाया भी नहीं पड़े इन पर.
_ दुख को पहचानना सीखें और जीवन में सुंदर अवसरों का सम्मान करें.
_ इतनी कम उम्र में एक दूसरी ही
दुनिया में वे गुम हो जायेंगे,
जहाँ संसार की नदियों की तरह
हृदय के भीतर बहती हुई संवेदना के
उस स्रोत को भी
हम धीरे-धीरे सूखता हुआ देखेंगे !
– यह कहां सोचा था हमने !
– विनय सौरभ
*डॉ. हिदेकी वाडा, 61 वर्षीय मनोचिकित्सक जो बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ हैं.

_ *डॉ. वाडा की 44 समझदारी भरी बातें, जो पढ़ने और खासकर अपने बुजुर्ग अपनों के साथ शेयर करने लायक हैं:*
1. हर दिन चलते रहें, भले ही धीरे-धीरे.
2. परेशान हों तो गहरी सांस लें और शांत हो जाएं.
3. हल्की-फुल्की कसरत करें ताकि शरीर अकड़े नहीं.
4. गर्मी में AC चला रहे हैं तो खूब पानी पिएं.
5. जरूरत पड़े तो डायपर पहनने में शर्म न करें – ये हमें ज्यादा आज़ादी से चलने-फिरने देते हैं.
6. खूब चबाकर खाने से दिमाग और शरीर दोनों एक्टिव रहते हैं.
7. भूलने की वजह उम्र नहीं, दिमाग का कम इस्तेमाल है.
8. हर समस्या का इलाज ढेर सारी दवाओं से करना जरूरी नहीं.
9. जबरदस्ती ब्लड प्रेशर और शुगर कम करने के पीछे न पड़ें.
10. अकेले होना अकेलापन नहीं है; ये आराम करने का समय भी हो सकता है.
11. आलसी होना सामान्य है, खासकर जब थके हों.
12. अगर सुरक्षित ड्राइव नहीं कर सकते, तो चोट खाने से बेहतर है गाड़ी चलाना बंद कर दें.
13. वो काम करें जो पसंद हों, तनाव देने वाले कामों से बचें.
14. उम्र हो गई है, पर स्वाभाविक इच्छाएं अब भी महसूस हो सकती हैं.
15. सिर्फ घर में न बैठे रहें – बाहर निकलें, ताज़ी हवा लें और दुनिया देखें.
16. जो पसंद हो वो खाएं, बस ज्यादा न खाएं, थोड़ा वजन भी ठीक है.
17. हर काम आराम से और ध्यान से करें.
18. उन लोगों से दूर रहें जो आपको असहज करते हैं.
19. टीवी और मोबाइल के सामने कम समय बिताएं.
20. कभी-कभी बीमारी से जबरदस्ती लड़ने से बेहतर है उसके साथ समझौता कर लेना.
21. “कोई न कोई रास्ता हमेशा होता है” – जब फंसा हुआ महसूस करें तो ये बात हिम्मत दे सकती है.
22. ताजे फल और सब्जियां खाना जरूरी है.
23. नहाना लंबा होना जरूरी नहीं, सिर्फ 10 मिनट काफी हैं.
24. नींद न आए तो जबरदस्ती न करें.
25. जो चीजें आपको खुश करती हैं, वो दिमाग को एक्टिव रखती हैं.
26. मन की बात दबाएं नहीं; जो कहना है कह दें.
27. शुरू में ही एक भरोसेमंद फैमिली डॉक्टर ढूंढ लें.
28. हमेशा झुकना जरूरी नहीं। कभी-कभी “बुरे माता-पिता” बनना भी सेहतमंद है.
29. हमारी राय बदल जाए तो कोई बात नहीं.
30. बुढ़ापे में डिमेंशिया शायद भगवान का हमें शांत करने का तरीका हो.
31. अगर हमने सीखना बंद कर दिया, तो हम बहुत जल्दी बूढ़े हो जाते हैं.
32. सम्मान के पीछे भागने की जरूरत नहीं – जो अभी हमारे पास है वही काफी है.
33. मासूमियत माता-पिता का विशेषाधिकार है.
34. जिंदगी झंझट वाली हो सकती है, पर यही तो इसे दिलचस्प बनाती है.
35. धूप सेंकने से खुशी मिलती है.
36. दूसरों का भला करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा होगा.
37. हर दिन आराम से जिएं.
38. इच्छाएं होना इस बात का संकेत है कि आप अभी जिंदा हैं और प्रेरित हैं.
39. हमेशा सकारात्मक सोचें.
40. राहत की सांस लें; जिंदगी में जल्दी करने की जरूरत नहीं.
41. आप तय करें कि आपको अपनी जिंदगी कैसे जीनी है.
42. जो भी हो रहा है उसे शांतn मन से स्वीकार करें.
43. खुशमिजाज लोग आमतौर पर सबको पसंद आते हैं
44. एक मुस्कान कई आशीर्वाद ला सकती है.
-डॉ. हिदेकी वाडा

सुविचार – वरिष्ठ नागरिक – वृद्ध – वृद्धावस्था – बुढ़ापा – बड़ी उम्र – जीवन का छाया काल – 049

बूढ़ा होने पर ये कहावत रखो – “नौन, मौन और कौन”

_ नमक से रोटी, मौन धारण और घर का कोना ही आपकी इज़्ज़त बचा सकता है.!!
अब समय इमोशनल होने का नहीं प्रैक्टिकल होने का है..

_ अपने बच्चे को सक्षम बनाने के साथ साथ अपने बुढ़ापे में बच्चों पर बिना निर्भर हुए.. स्वास्थ्य, सुरक्षा, देखभाल के लिए एक रोड मैप तैयार करना होगा,
_ परिवार के नाम पर भटकने के बजाय पेशेवर कर्मियों [professional staff] के सहारे जीने और मरने के लिए ख़ुद को, समाज को तैयार करना होगा.!!
इससे पहले कि हम इतने वृद्ध हो जाएं और अपने आप को बदल ही न पाएं,
_वे ज़रूरी बदलाव हमें आज ही लाने चाहिए.!!
कई लोग तो अपनी आधी उम्र में भी इतना non sense बोलते हैं, तो बुढ़ापे में तो चुप ही नहीं रहेंगे… क्या कर रहे हैं लोग.!!
वक्त जो चला गया.. वो कब लौटा है ..की एक “उम्र” के बाद सफ़ेद “बालों” को रंगने से कोई “फ़िर” जवान नहीं होता.!!
संभवतः जीवन का छाया काल स्वभावतः निराशा से भरा होता है,

_ क्योंकि जिन आकांक्षाओं के पीछे हम जीवनभर दौड़ते रहते हैं, 

फिर वे फिसल जाते हैं और अर्थहीन लगने लगते हैं ( अनेक बार बोझल भी )

_ और हम जीवन के महत्वपूर्ण लगने वाले उद्देश्यों को निरर्थक पाने लगते हैं..!!

जो लोग एक सकारात्मक जीवन जीते हैं उन पर जल्दी बुढ़ापा नहीं आता,

_ जिनके जीवन में कठिनाइयां और नकारात्मकता अधिक रहती है..

_ वे जीवन से निराश हो जाते हैं और बुढ़ापा जल्दी आ जाता है..!!

*सुखमय वृद्धावस्था *

*1**अपने स्वयं के स्थायी स्थान पर रहें ताकि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद ले सकें!*

*2**अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें! अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें।*

*3* *अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकता भी बदल जाती है और कभी कभी चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते*

*4**उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं, यानी सच्चे हितैषी हों।*

*5**किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें!*

*6**अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करें, उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जीएँ!*

*7**अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास कभी ना करें।*

*8**लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें।*

*9**प्रार्थना करें लेकिन भीख ना मांगे, यहाँ तक कि रब से भी नहीं। रब से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत!*

*10**अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें! छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं।*

*11**अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें।*

*12**प्रति वर्ष अपने जीवन साथी के साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं, इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा!*

*13**किसी भी टकराव को टालें एवं तनाव रहित जीवन जिऐं!*

*14**जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें !*

*15**अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं!*

*खुशनुमा जीवन जीएं*

हर बीस वर्ष के बाद cost of living, ten times बढ़ जाती है

यह एक चुनौती होती है बुजुर्ग अवस्था मे आय के स्रोत को उस स्तर पर बनाए रखना, जिस स्तर पर आपने जीवन जिया, इसके अतिरिक्त बीमारियों का ख़र्च, सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह.

मैं यह सुझाव दूंगा कि बैंक में सीनियर सिटीजन डिपाजिट स्कीम में पैसा जमा करें तो अधिक ब्याज मिलेगा, साथ ही मासिक ब्याज की सुविधा होती है, इसी तरह LIC की भी योजना है.

“बुढ़ापा और परिवार”

“परिवार के साथ बुढ़ापा” अच्छे से व शान्ति से काटने के लिए कुछ बातें आप गौर से पढ़िये.

01. “कम बोलिये…” जरूरत न हो तो बिलकुल मत बोलिये.

02. मनचाही वस्तु ना मिलने पर “क्रोध” ना करे.

03. अपनी “धन संपत्ति” का बार बार बखान ना करें.

04. बहू-बेटियों के कार्य में दखल ना करें.

05. यह आशा न करें कि बहू.बेटे हर काम हमसे पूछकर करें.

06. “खाने पीने में संतोषी रहे.” जो मिल जाए, प्रसाद समझ कर ग्रहण करें.

07. किसी पर “अपनी इच्छा थोपने” की कोशिश न करें.

08. “बहू.बेटियों तथा उनके बच्चों से” स्नेह व प्रेम का का व्यवहार करें.

09. बुढापे के कष्ट व बीमारी को कर्मफल समझ कर खुशी खुशी सहन करें.

10. घर पर आए किसी भी व्यक्ति से “अपने घर की कोई बुराई न करें.”

11. बहू.बेटियों के “कटुवचन सुनकर” शांत हो जाएँ और कोई प्रत्युत्तर न दें.

12. अपने स्वास्थ्य के सामर्थ्य अनुसार “बहू.बेटियों के कार्य में” सहयोग करें.

13. “रब को अवश्य याद करते रहें.”

14. ध्यान रहे कि “रब की कृपा से” सब कुछ प्राप्त होता है. “उसका शुकराना करते रहिये. “खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जाना है, प्रेम से रहकर सबसे रिश्ता निभाना है.

15. अपने परिवार की समस्याएँ “दूसरों के सामने न रखें.”

16. “अपने बीते दिनों के गुणगान” रात-दिन न करें.

17. “प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएँ.”

18. ध्यान रहे इच्छा से मृत्यु सबको नहीं प्राप्त होती है, “अतः प्रसन्न व आनन्द में” रह कर बुढ़ापे का जीवन जियें.

19. उम्र के हिसाब से बच्चों के “पूछने के तरीके बदल जाते हैं.” बच्चों के उम्रदराज होने पर “उनके बताने व जानकारी देने को ही” उनके द्वारा पूछना ही समझें.

20. खाँसी सिर्फ बीमारी ही नहीं है, “खाँसी एक तहजीब भी होती है,” एक उम्र के बाद अपनी “उपस्थिति का अहसास” अपने ही घर में कराने के लिए.

“इंसान की सोच” “अगर तंग हो जाती है,”

“तो यह खूबसूरत जिन्दगी” “भी एक जंग हो जाती है.”

बुढ़ापा जब तुम्हे लगने लगे तो, दोस्तों

तुम कोई शौक पाल लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,

कम बोलो, ज्यादा सुनो, चल कर किसी को ज्ञान ना दो,,

योग, ध्यान को भी अपना लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,

जो भी मिले प्रेम से खाओ, हर किसी को ना अपने जख्म बताओ,,

तन्हा मुस्कुराना सीख लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,

कमाई के साथ साथ करो बचत, जाने कब स्वास्थ जाए अटक,,

दो चार सच्चे दोस्त बना लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,

तुम कोई शौक पाल लो यारों, वरना बुढ़ापा मुश्किल है,,

बुढ़ापा एक स्वागत योग्य अपेक्षा है लेकिन यह एक गुजरता हुआ दौर भी है जो आपकी जीवन शैली को बदल देता है !!!

Ageing is a welcome expectation but it is also a passing phase that changes your life style !!!

बुढापा बुरे विचारों और चिंता करने से ज्यादा आता है बजाए आयु की अधिकता के !!
“बूढ़ा होना भी एक कला है, जो सीखनी पड़ती है”
अपनी जिंदगी एक रूटीन में जिएं ताकि परिवार वाले अच्छी तरह आपकी देखभाल कर सकें.
तरुणाई अपने खून की गरमी के कारण अपनी रुचियां बदल देती हैं, बुढ़ापा आदत के वशीभूत हो कर उन्हीं का पीछा करता रहता है.
जीवन का मधुकोश भी एक दिन रिक्त हो उठता है..

_ जिन्होंने इसे बनाया, सजाया होता है.._वह इसे छोड़ जाते हैं !!

समय निकालकर बड़ों से बात कर लिया करो, _

_ पुरानी बिल्डिंगों को थोड़ा रख रखाव चाहिए,

*बुढापा*

🤷‍♀सुबह सुबह किसी ने द्वार खटखटाया,

मैं लपककर आया,

जैसे ही दरवाजा खोला

तो सामने * बुढ़ापा खड़ा * था,

भीतर आने के लिए,

जिद पर अड़ा था..😔

मैंने कहा :

नहीं भाई ! अभी नहीं😔

“ अभी तो * मेरी उमर * ही क्या है..”

वह हँसा और बोला :

* बेकार कि कोशिश * ना कर,

मुझे रोकना नामुमकिन है…

मैंने कहा :

“.. अभी तो कुछ दिन रहने दे,

अभी तक * दूसरो के लिए जी * रहा हूँ ..

अब अकल आई है तो कुछ दिन

* अपने लिए और दोस्तों*

के साथ भी जीने दे..”

* बुढ़ापा हंस कर बोला * :

अगर ऐसी बात है तो चिंता मत कर..

* उम्र भले ही तेरी बढ़ेगी *

मगर बुढ़ापा नहीं आएगा,

*तू जब तक दोस्तों के साथ जीएगा*

* खुद को जवान ही पाएगा..***….

*वरिष्ठ यानि 60 से अधिक वर्ष वालों के लिए विशेष टिप्स:*

*1- पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 2 लीटर न्यूनतम प्रति दिन.
*2- दूसरा सुझाव:* शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर को हिलना चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर, या तैराकी या किसी भी प्रकार के खेल से।
*3-तीसरा सुझाव:* खाना कम करो…अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें… क्योंकि यह कभी अच्छा नहीं लाता है। अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।
*4- चौथा सुझाव:* जितना हो सके वाहनका प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें। लिफ्ट, एस्केलेटर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।
*5- पांचवां सुझाव* क्रोध छोड़ो, चिंता छोड़ो,चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो. विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें, वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं। सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें।
*6- छठा सुझाव* सबसे पहले पैसे का मोह छोड़ दे । अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!पैसा जीने के लिए बनाया गया था, जीवन पैसे के लिए नहीं।
*7-सातवां सुझाव* अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते ।
इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।
*8- आठवां सुझाव* पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव;
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं. विनम्रता वह है जो लोगों को प्यारसे आपके करीब लाती है।
*9- नौवां सुझाव* अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है। यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!
*10- दसवां सुझाव* अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें! चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें ! अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें !
इस वरिष्ठ नागरिक उम्र में कोई नहीं आना चाहता लेकिन यह मौसम उन सब की जिंदगी में अवश्य आता है जो अधबीच में टपक नहीं जाते। यह मौसम खुशनुमा नहीं होता क्योंकि खुशियां कम हो जाती हैं। किसी का जोड़ा टूट जाता है, किसी की संतान दूर चली जाती है, किसी को शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याएं घेर लेती हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि दिमाग जितना तेज चलता है उतना शरीर नहीं चलता। दिल दीवाना होता है लेकिन शरीर साथ नहीं देता। मन मसोसकर रह जाना पड़ता है, क्या करें?
घर में पूछपरख कम हो जाती है, आदरभाव कम हो जाता है, बातों का वजन कम हो जाता है। संसार की अन्य चिंताओं के बदले सुबह पेट साफ होने की फिक्र बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर कठिन दिन शुरू हो जाते हैं जिनका बीतना और भी कठिन हो जाता है।
इन कठिनाईयों को आसान बनाकर जिया जा सकता है बशर्ते समयानुकूल व्यवहार करना सीख लिया जाए। अपनी इज्जत अपने हाथ में।
रिटर्नजर्नी टिकट तो तैयार है, बस, तारीख नहीं मालूम है। मालूम करने का कोई उपाय भी नहीं है तो जितनी सांसे बची हैं, प्रेमपूर्वक ली और छोड़ी जाएँ, इसी में भलाई है वरिष्ठ नागरिकों की।
— द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
न बचपन सुखद होता, न जवानी, न बुढ़ापा. तीनों चुनौतीपूर्ण व तकलीफदेह होते हैं.

यदि मन को तटस्थ कर लिया जाए और जो कुछ हो रहा है उसे निर्विकार होकर देखा जाए तो जीवन अच्छी तरह से व्यतीत हो जाता है. यह तो देह धरे का दंड है, जिसे सबको भुगतना पड़ता है.
चाहे रोकर जी लो या हंस कर.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
दिन आए निखार के :

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यह जीवन एक चक्र है जो आरंभ हुआ है तो पूरा भी होगा.
_ बचपन के बाद किशोरावस्था, युवावस्था के पश्चात प्रौढ़ावस्था और उसके बाद वृद्धावस्था- ये वर्तुल है जो सबको देखना है.
_ यह उम्र हमारी कड़ी परीक्षा लेता है क्योंकि शरीर कमजोर पड़ रहा है, थकान बढ़ गई है, उदासी घेर रही है.
_ कमाई-धमाई बंद हो चुकी है, शारीरिक कष्ट बढ़ रहे हैं- बीमारी, घुटनों में दर्द, कमर में जकड़न, पेट साफ न होना, नीद न आना, कम दिखना, कम सुनाई पड़ना जैसी अनेक समस्याएँ हैं.
_ इनके साथ-साथ इस उम्र में एक और बड़ी समस्या रहती है कि अपना समय कैसे काटें ?
_ लोगों की नज़रें भी बदली-बदली दिखाई पड़ती है, उपेक्षा होती है, मान-सम्मान कम होता दिखाई पड़ता है.
— हमारी कई इच्छाएँ और अभिलाषाएँ अपना पेट भरने की तलाश में अधूरी रह गई थी, उन्हें पूरा करने का यह सबसे माकूल समय है.
_ इस उम्र में अब आप दबावमुक्त हैं, स्वतंत्र हैं, आपके पास समय ही समय है, अपने मन की अधूरी आस पूरी कर डालिए.
_ संगीत सीखना चाहते थे या गाना, फोटोग्राफी करना चाहते थे या पेंटिंग, कविता लिखना चाहते थे या लेख, बागवानी करना चाहते थे या खेती, व्यापार करना चाहते थे या नौकरी, तीर्थ करना चाहते थे या विश्व भ्रमण, परिवार की देखरेख करना चाहते थे या जनसेवा > अपने मन का कर डालिए, अच्छा मौका है.
_ यह अवसर अधिक दिन के लिए नहीं मिला है क्योंकि आपके पास समय कम है.
— जैसे-जैसे आप की उम्र बढ़ेगी, आपकी उम्मीदें भी बढ़ेंगी, यही आपको दुख पहुंचाएंगी.
_ अब खुद से और दूसरों से भी उम्मीदें करना बंद करिए.
_ इस उम्र में आपको कोई पहचान ले, जो जितना कर दे, उतना बहुत है.
_ सारा संसारिक व्यवहार उपयोगिता पर आधारित है, यदि आपकी उपयोगिता समाप्त हो गई है तो चुप बैठिए या जैसा संभव हो, खुद को उपयोगी बनाइए.
_ घर के कई काम अभी भी आप अपने हाथ में ले सकते हैं, ले लीजिए.
_ आपके आसपास अब आपको खुशियाँ खोजनी होंगी, खोजिए, आनन्द सब तरफ बिखरा हुआ है, अपना नज़रिया बदलिए, बहुत कुछ नया दिखाई पड़ेगा.
_ टीका-टिप्पणी करने का सोच और बोल आपके लिए अब घातक है,
_ इस आदत को तुरंत ‘फुल स्टाप’ कर दें अन्यथा आपका शेष जीवन जीना दूभर हो जाएगा, अब आपका रुतबा नहीं चलने वाला !
— जैसा बचपन था, जवानी थी, वैसा ही यह बुढ़ापा है- जीवन का सर्वाधिक महत्व वाला हिस्सा.
_ इसे तटस्थ होकर देखिए कि यह कैसा गुजर रहा है !
_ असुविधा और तकलीफ़ों पर नज़र गड़ाए रखेंगे तो वे आपके दिमाग पर हावी रहेंगे, आपका चैन छीन लेंगे.
_ ‘जो हो रहा है,वह सही है’ – की सोच बनाइए, तब ही आपका मन शांत रहेगा वरन नए जमाने का व्यवहार, बातचीत, आदतें और वेषभूषा- आपको ये सब तकलीफ देने वाले हैं.
_ नया ज़माना अपने ढंग से चलेगा, आपके कहने से नहीं.
_ उन्हें अपना काम करने दें, आप अपना काम करें.
— आपके पास सबसे प्रबल विकल्प है- आपका दीर्घ अनुभव.
_ इस अनुभव का उपयोग खोजें.
_ अब आप युवा नहीं हैं, इसे समझते हुए अपनी क्षमता और योग्यता का आकलन करके उसके अनुरूप काम खोजिए.
_ आप नई पीढ़ी को बहुत कुछ सिखा सकते हैं, उन्हें बहुत कुछ देकर जा सकते हैं.
_ बच्चों को पढ़ा सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं, खेल सिखा सकते हैं.
— स्वयं स्वस्थ रहें और दूसरों को स्वस्थ रहने के उपाय सिखाएं,
_ व्यायाम और योग से जोड़ें, उन्हें खानपान की अच्छी आदतों से जोड़ें. मोहल्ले के बच्चों और युवाओं से दोस्ती बनाएं और निभाएं, यह बहुत रोचक काम है.
_ ‘लायब्रेरी’ से जुड़ें और विविध विषयों पर नई जानकारियां लें और उन्हें युवाओं में वितरित करें.
_ इस बात का सदैव ध्यान रखें कि आपके पास समय ही समय है लेकिन शेष लोगों के पास नहीं है,
_ इसलिए उनके समय के महत्व को समझते हुए उन पर बोझ न बनें,
_ अन्यथा लोग आपसे बिदकने लग जाएंगे और आपको देखते ही मन-ही मन में कहेंगे- ‘बुढ़ऊ आ गया दिमाग चाटने !
— घर के काम सम्भालना आरम्भ करें.
_ सुबह जागने के बाद बिस्तर, चादर, रजाई-कम्बल और मच्छरदानी अपने हाथों से समेटें, अपने हाथ से सुबह की चाय सबके लिए बनाएं, ड्राइंगरूम को व्यवस्थित कर दें लेकिन शान्तिपूर्वक ताकि किसी को ‘डिस्टर्वेंस’ न हो.
_ सुबह सैर के लिए निकल सकते हैं, किसी सार्वजनिक स्थान में जाएं और नए लोगों से पहल करके मित्रता स्थापित करें.
_ व्यायाम करें, चर्चा में भाग लें और प्रकृति की खूबसूरती को निहारें.
_ दोनों हाथों को आकाश की ओर उठाकर खुद में उसकी विशालता को समेटने का प्रयास करें और दृश्यमान देवता सूर्य को प्रणाम करें.
— अपने काम खुद करने का प्रयास करें.
_ किसी पर बोझ न बनें बल्कि सहायक बनने का उपक्रम करें.
_ याद रखिए, आपका शरीर तनिक वृद्ध हो चला है, मन अभी युवा है- उसकी ताज़गी बनाए रखें लेकिन सतर्कता के साथ !
_ हर समय मुस्कुराने की आदत बना लें तो आप भी खुश और दूसरे भी.
— अंत में, मृत्यु के स्वागत के लिए हर समय तैयार रहें.
_ आप अपनी पारी खेल चुके, अब नए लोगों को मौका देना है.
_ मृत्यु का आगमन एक सुखद अंत है- इस कष्टप्रद शरीर का. शरीर से मुक्त होना अपने जन्म से मुक्त होना है, वर्तुल तो पूरा होगा, होने दीजिए.
_ जो आप कर सके, वह आपने कर लिया,
_ अब मुक्ति के आगमन के उत्सव को मनाने की तैयारी में भिड़ जाएँ.
– -द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
युवावस्था में हसरतें कम होती हैं ..क्योंकि खुशी हो, ग़म हो, ज़िन्दगी स्वतः जी जाती है, _ सब कुछ अपने आप होता रहता है, जैसे नदी बहती है अपने आप..

_ _ रास्ते में चट्टान भी आ जाए तो इधर-उधर से रिसने की जगह निकल ही आती है.
_ जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ज़िन्दगी स्वतः बहनी बन्द हो जाती है.
_ फिर ज़िन्दगी अपने आप आगे नहीं बढ़ती, उसे आगे की ओर खींचना पड़ता है.
_ इसीलिए बड़ी उम्र में हसरतें ज़्यादा होती हैं, __क्योंकि हसरतों के बल पर ही ज़िन्दगी आगे खींची जाती है.
_ सच तो यह है कि हसरतें भी अपने अमूर्त रूप में रह जाती हैं, उन्हें पूरा करने के लिए शरीर भी साबुत नहीं रहता.
_ फिर भी इन हसरतों का होना ज़रूरी है.
_ ये हसरतें भी न हों तो कोई जिए कैसे ?
_ इन तमन्नाओं को दफ़न कर देंगे तो ..जो और कुछ समय जीना है, वह कैसे जिएँगे ?
_ बड़ी उम्र में अपना शरीर तो अपने साथ गद्दारी करता ही है, अब ये हसरतें भी न हों तो ?
हर वृद्ध पुरुष को इसे पढ़कर चिंतन अवश्य करना चाहिए।

1. पुरुष बूढ़ा होता है, जबकि स्त्री परिपक्व होती है।
2. जैसे ही पुरुष अपने बच्चों की शादी कर देता है और परिवार की आर्थिक नींव मजबूत कर देता है, परिवार में उसका वरिष्ठ और सम्मानित स्थान धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
3. इसके बाद उसे बोझ समझा जाने लगता है — चिड़चिड़ा, गुस्सैल और अनिश्चित स्वभाव वाला बूढ़ा व्यक्ति।
4. जिन कठोर निर्णयों से उसने कभी पत्नी और बच्चों के लिए व्यवस्था बनाई थी, आज उन्हीं निर्णयों की चीर-फाड़ होकर आलोचना होती है; एक न एक कारण से उसे दोषी ठहरा दिया जाता है। और यदि वास्तव में उससे कोई गलती हुई हो — तो भगवान ही रक्षा करे।
5. वृद्ध स्त्री को, इसके विपरीत, बच्चों और बहुओं से सहानुभूति मिलती है — क्योंकि उसके माध्यम से अभी भी कई काम करवाने होते हैं।
6. सही समय आने पर वह समझदारी से पति के पक्ष से बच्चों के पक्ष में चली जाती है।
7. जब पति उम्र में बड़ा हो, तो पत्नी बहू के साथ तालमेल बना लेती है, ताकि बेटा उससे दूर न हो और उसकी देखभाल करता रहे।
8. पुरुष ने जीवन में चाहे कितनी ही महान उपलब्धियाँ हासिल की हों — बुढ़ापे में वे किसी काम नहीं आतीं।
9. जबकि वृद्ध स्त्री अपने पुराने पुण्यों का ब्याज जीवन भर पाती रहती है।
10. जिन लोगों के पास पैतृक संपत्ति या खेती होती है (जिसकी बच्चों को अब भी इच्छा रहती है) उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर होती है। लेकिन जिन्होंने भविष्य के झगड़ों से बचने के लिए समय से पहले संपत्ति बाँट दी — वे अक्सर उपरोक्त ही दुःखद स्थिति का सामना करते हैं। इसलिए संपत्ति समय से पहले न बाँटना ही बेहतर है।
11. किसी भी अस्पताल में चले जाएँ , रिश्तेदारों की आँख देखकर ही पता चल जाता है कि भर्ती वृद्ध पुरुष है या वृद्ध स्त्री। यदि वृद्ध पुरुष हो, तो उसकी बेटी को छोड़कर शायद ही किसी की आँख नम होती है।
12. निष्कर्ष: जैसे ही पुरुष वृद्ध होता है, उसे सीख लेना चाहिए कि दूसरों से किसी भी प्रकार की अपेक्षा न रखे। याद रखें , मनुष्य जीवन भर विद्यार्थी है। समझ लें कि इस संसार में कोई किसी का नहीं है। विरक्ति, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ जीना सीखें।
13. सुझाव:
आपने दूसरों के लिए क्या-क्या किया , यह सोचना भी छोड़ दें, और इस बारे में बात करना भी बंद कर दें।
14. प्राचीन शास्त्रों में कहीं भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि किसी स्त्री ने वानप्रस्थ या संन्यास ग्रहण किया हो।
15. ये आश्रम केवल पुरुषों के लिए निर्धारित थे। इनके महत्व को समझें, तब ज्ञात होगा कि हमारे पूर्वज कितने दूरदर्शी थे।
मैं कौन हूँ?
सेवानिवृत्ति के बाद,
न नौकरी,
न कोई दिनचर्या,
और घर की चुप्पी…
तभी मैंने स्वयं को पहचानना शुरू किया।
मैं कौन हूँ?
कोठियाँ बनाईं,
फार्महाउस खड़े किए,
छोटे-बड़े अनेक निवेश किए,
और आज…
चार दीवारों के भीतर सीमित हो गया हूँ।साइकिल से मोपेड,
मोपेड से बाइक,
बाइक से कार , गति और शान का पीछा किया,
पर अब कमरे के भीतर
धीरे-धीरे अकेले चलता हूँ।
प्रकृति मुस्कुराकर पूछती है।
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैं कहता हूँ,
मैं… बस मैं।
दुनिया के कई राज्य, देश और महाद्वीप देखे,
पर आज मेरी यात्रा
ड्रॉइंग रूम से किचन तक है।
संस्कृतियाँ-परंपराएँ समझीं,
पर अब मन
बस अपने परिवार को समझना चाहता है।
प्रकृति हँसकर फिर पूछती है ,
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैं कहता हूँ,
“मैं… बस मैं।”
कभी जन्मदिन, सगाई, विवाह — सब धूमधाम से मनाए, आज बस अच्छी नींद और भूख लगना ही
मेरी खुशी है।
प्रकृति पूछती है,
“कौन हो तुम?”
और मैं उत्तर देता हूँ —
“मैं… बस मैं।”
सोना-चाँदी-हीरे जवाहरात
लॉकरों में सो रहे हैं।
सूट-ब्लेज़र
अलमारियों में ठहरे हैं।
और मैं ,
नर्म सूती कपड़ों में,
सरल और स्वतंत्र।अंग्रेज़ी-फ्रेंच-हिंदी सब सीखी,पर अब
माँ की बोली में बात करने में सुकून मिलता है।
काम के लिए अनगिनत यात्राएँ कीं,
और अब
उन फायदों-नुकसानों को
सिर्फ यादों में तौलता हूँ।
व्यवसाय चलाए,
परिवार सँवारा,
अनेकों संबंध बनाए,
और आज
सबसे सच्चा साथी
पास का पड़ोसी है।
कभी हर नियम का पालन किया,
शिक्षा के पीछे भागा —
पर अब जाकर समझ आया कि वास्तविक मायने क्या हैं।
जीवन के उतार-चढ़ाव के बाद, शांत क्षण में
आत्मा ने कहा,
बस अब…तैयार हो जाओ,
हे यात्री…
अंतिम यात्रा की तैयारी का समय आ गया है…
प्रकृति ने कोमलता से पूछा
“कौन हो तुम, मेरे मित्र?”
और मैंने कहा —
हे प्रकृति,
तुम ही मैं हो…
और मैं ही तुम हूँ।
कभी आकाश में उड़ता था, आज धरती को नम्रता से छूता हूँ।
क्षमादान दो…
एक और अवसर दो जीने का…
पैसे कमाने की मशीन नहीं,
बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में, मूल्यों के साथ,
परिवार के साथ,
प्रेम के साथ।
सभी वरिष्ठ नागरिको को शुभकामनाएँ।🙏🏿

सुविचार – मेहमान – अतिथि – गेस्ट – Guest – 048

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आपके यहाँ जब कोई मेहमान आये तो..

_ उसके लिए ऐसा प्रयास करो कि ..उसे कोई तकलीफ़ न हो,
_ और जब कहीं आप मेहमान बन कर जाओ तो..
_ ऐसे रहो कि मेज़बान को अहसास न हो कि.. आप को कोई तकलीफ़ या कमी है.
सच्चाई तो आज की ये है आज कल गेस्ट आते ही कम हैं और आते भी हैं तो जाने की जल्दी और उनको भेजने की जल्दी के साथ..!

रिश्ते पनपे कैसे ?
_ अगर आप जाएंगे नहीं तो आपके पास भी कोई आएगा कैसे..
_ नई पीढ़ी भी यूं ही अजनबियत के साथ पल पुस जाएगी..
_ कल को एक दूसरे को पहचानेगी ही नहीं बर्दाश्त करना तो दूर की बात है..!!
आजकल कोई गेस्ट आता कहाँ है.

_ कोई आता भी है तो १-२ घंटे के लिए..
_ रात को रुकने का तो कोई सवाल ही नही..
_ सब रिश्ते धीरे धीरे ख़तम होते जा रहे हैं, ज्यादातर खून के रिश्ते..
_ किसी के पास वक़्त ही नही है और खासकर महानगरो मे रहने वालो के लिए..
_ फ्लैट का साइज जरूर बढ़ रहा है, लेकिन दिलो के साइज छोटे होते जा रहे हैं..!!
यह सही है कि अब गेस्ट का आना कोई पसंद नहीं करता..

_ और गेस्ट भी किसी के घर जाना पसंद नही करता..
_ हकीकत यह है कि हम सब की अपनी एक जीवन शैली हो गयी है..
_ हमारी अपनी प्रातः चर्या और दिनचर्या है, दूसरे के घर मे यह लागू नहीं हो पाती..
_ घर बड़ा हो, उसमें पर्याप्त जगह भी हो.. मगर अब गेस्ट कम ही आते हैं..!!
पहले मेहमानों के लिए दिल में जगह थी, सब जरा सी जगह में ही समा जाते थे.

_ पुरानी बातें अब सब हवा हो गई..
_ अब वास्तव मे किसी के घर जल्दी कोई रुकता नहीं है..
_ हमारा शरीर अब आराम का इतना अभ्यस्त हो गया है ज़मीं पर बैठ लेट ही नहीं पाता है, सबको अपना कमरा और पलंग चाहिए !!
पहले की तरह तो आना जाना सब खत्म हो गया,

_ पहले सब एक-दूसरे के घर हाल-चाल व राजी-खुशी पूछने जाते थे,
_ पर अब किसी के पास समय नहीं है, कोई किसी के घर जाता ही नहीं..
_ अब तो कोई फंक्शन होने पर ही जाते हैं, बेवजह किसी के घर नहीं जाते.!!
पहले हम कभी भी बिना पूर्व सूचना के किसी के घर चले जाते थे और कोई हमारे घर आ जाता था… अच्छा लगता था.

_ पहले पूर्व सूचना देने की सुविधा भी नहीं थी, न ज़रूरत महसूस होती थी.
_ आज शब्दों में तो सब नज़दीक हैं.. लेकिन वैसे बहुत दूरियां हैं.
_ यह नए ज़माने का बदलाव है.
_ बदलाव अच्छा हो या बुरा, पसंद आए या न आए, स्वीकारना ही होता है.!!
– Manika Mohini
किसी के घर जाओ तो अपनी आँखों को काबू में रखो, ताकि उसकी कमियां न दिखे !

_ किसी के घर से निकलो तो जुबान को काबू में रखो, ताकि उसके घर की इज्जत और राज़ दोनों सलामत रहें,
_ कौन क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है और क्यूँ कर रहा है, इन सबसे आप जितना दूर रहोगे, उतना ही खुश रहोगे,
_ जितना हो सके खामोश रहना ही अच्छा है, क्योंकि सबसे ज्यादा गुनाह इंसान से उसकी जुबान ही करवाती है,
_ बोलने से पहले सोचो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया जाता है..!!
अब मेहमान बदल गये हैँ, अब मेहमान आते हैँ तो वह चाहते हैँ कि उनको होटल जैसा ट्रीटमेंट मिले.!!
अगर आप किसी के घर पर हैं और वे कहते हैं कि वे थक गए हैं, तो समझ जाइए कि अब वहां से निकलने का समय हो गया है.!!
पहले दिन अतिथि, दूसरे दिन बोझ और तीसरे दिन कंटक है.!!
आजकल तो अपने भी कहलाते हैं मेहमान..

_एक वो दौर था मेहमान भी मेहमान नहीं थे.!!
हमें तो अच्छा लगता है कि कोई अतिथि हमारे पास आया है,
_ अपनी सुविधा और छमता के अनुरूप उनका ह्रदय से स्वागत करते हैं.!!

सुविचार – परिवार – फैमिली – Family – 047

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जाने के लिए कुछ जगह होना घर है,

किसी से प्यार करना ही परिवार है,
दोनों का होना एक आशीर्वाद है.
Having some place to go is HOME
Having someone to love is FAMILY
Having both is a BLESSING.
मानव जीवन में परिवार की भूमिका उस कुशन या गद्दे की तरह की होती है,

_ जो हमें जीवन में सफलता की ऊंचाइयों से अचानक गिरने पर हमें जख्मी होने से बचाती है.
_ इसलिए सफलता पाने की कोशिश में केवल संघर्ष ही अनिवार्य नहीं है,
_ बल्कि उन अपनों के प्यार व सहानुभूति की भी दरकार होती है..
_ जिनकी उपस्थिति के बिना जीवन तथा जहान की सारी खुशियां अधूरी प्रतीत होती है.
_ आप के अपने आप के सपनों के पीछे भागने की रेस में आप के साथ होंगे तो आप को एक अद्भुत ऊर्जा तथा प्रेरणा का एहसास पलप्रतिपल होगा.
_ अपनों के प्यार को खो कर पाई गई किसी भी कामयाबी की कीमत कभी भी इतनी अधिक नहीं होती,
_ जो आप के जीवन की भावनात्मक कमी की भरपाई कर सके.
‘परिवार बहुत जरूरी है’.. बिना परिवार का इंसान कटी हुई पतंग की तरह होता है.. जिसे लोग या तो लूट लेते है या फिर फाड़ देते हैं.

_ इसलिए परिवार से जुड़े रहिए. मुसीबत मे सिर्फ परिवार ही काम आता है.
परिवार सुख-दुःख, खुशी-गम यानि जीवन के हर रंग के अनुभवों का संगम है.

_ यूं अकेले भी जीवन आराम से जिया जाता है,
_ यूं परिवार को दुखों की जड़ कहा जाता है, लेकिन दुख और परेशानी के समय अगर परिवार का साथ मिले तो व्यक्ति मुसीबतों में भी निश्चिंत रहता है,
_ उसे अपना ख्याल रखने की भी चिंता नहीं होती.
_ जिनका अपना परिवार नहीं होता यानी खून का रिश्ता नहीं होता, वे अजनबियों से रिश्ते बनाते हैं.
_ मित्र भी सीमित रूप से ही आपका साथ देते हैं, वे स्थायी सहारा नहीं होते.
_ परिवार एकमात्र ऐसा सुख है जो वरदान स्वरूप मिलता है..!!
अगर परिवार में नई और पुरानी पीढ़ी एक दूसरे कि भावना को समझ कर परस्पर सामंजस्य बिठाये तो _जटिल परिस्थितियां कभी उत्पन्न ही नहीं होंगी,

_यदि दोनों थोडा- थोडा झुक जाएँ तो खुशियों का वृत्त अपने आप ही पूरा हो जायेगा.

दुनिया बहुत बड़ी है, मगर एक इंसान की दुनिया वह होती है, जिनके सुख और दुख से वह प्रभावित होता है.

_ अर्थात परिवार और चन्द दोस्त और रिश्तेदार..!
_ कोशिश ये कीजिए कि आपकी दुनिया में शामिल खास लोगों को आपसे कोई शिकायत न रहे.
_ बाकी दुनिया की चिंता छोड़ दीजिए..!!
जीवन में सच्ची खुशी उस बड़े बड़े मकान में नहीं, बल्कि उस छोटे से कोने में है.. जहां हम अपने परिवार के साथ हंसते-बोलते हैं.
_ सच्ची समृद्धि बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि भीतर की शांति और संतोष में है.
परिवार एक पेड़ की शाखाओं की तरह होता है,

_ जो बढ़ती तो अलग- अलग दिशाओं में है, लेकिन सब की जड़ एक ही है !

परिवार में अगर छोटी-छोटी बातों को बड़ा बनाओगे,

_ तो आपका बड़ा परिवार छोटा होता जाएगा..!!

बेशुमार पैसा और दुनिया का कोई भी ब्रांड, आपको वो ख़ुशी नहीं दे सकता ;

_ जो आपको आपका परिवार दे सकता है.

इस खूबसूरत जीवन मे दो रोटी रूखी-सुखी ही हो.. परिवार के साथ खाने में जो सुकूँ है.. वो सबसे बड़ा है,

_ पैसा -रूतबा- झगड़ा ये सब बस जीवन की खूबसूरती को बर्बाद करने के लिए ही है..!!

परिवार को मालिक बनकर नहीं बल्कि माली बनकर संभालो,

_ जो ध्यान तो सबका रखता हो.. पर अधिकार किसी पर ना जताता हो..

किसी घर में एकसाथ रहना परिवार नहीं कहलाता, बल्कि एकसाथ जीना, एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है.!!

जीवन में कुछ लोग हमारे लिये सिर्फ लोग नहीं होते, वो होते हैं हमारें जीनें की वजह..
_ हमारे मुस्कुराने की वजह, उनके होने मात्र से सब सही-सा लगता है.!!
परिवार की नीवं जब मिल- जुलकर अनेक कंधों पर सवार होती है,

तब वह मजबूत बनती है.

परिवार में बहुत समस्याएँ होती हैं, पर वे लोग खुशनसीब हैं जिनका परिवार होता है.!
” पारिवारिक बंधन एक पेड़ की तरह होता है, यह झुक सकता है लेकिन टूट नहीं सकता “
परिवार उस वृक्ष की तरह होता है, जिसकी घनी छांह में हम खुद को सुखद स्थिति में महसूस करते हैं.
परिवार वो है जो मुश्किल घड़ी में आपके काम आए.. ना की आपके बारे में बातें बनाये..!!
विडंबना ये है कि घात करने वाले अब परिवार में ही अधिक हैं,

_ वो पराये को लाभ दे देंगें.. पर अपनों के लिये चाहेंगे कि ये दुखी हीं रहे.!!
परिवार बर्बाद होने लगते हैं, जब समझदार मौन रहते हैं और नासमझ बोलने लगते हैं.

_ कुछ मूर्खों का पागलपन कब तक परिवारों को निगलता रहेगा ? 

परिवार में मौजूद नाखुश लोग बेमतलब की बात का बतंगड़ बनाने में माहिर होते हैं.!!
परिवार को जोड़ने वाला बंधन खून का नहीं,

_बल्कि एक-दूसरे के जीवन में सम्मान और खुशी का है.!!

अपने परिवार से मिल के रहो, _ दुनिया की हर खुशी तुम्हारा दरवाजा खटखटाएगी।।
“अगर मैं अपने परिवार के साथ सामंजस्य बिठाता हूं, तो यह सफलता है “
परिवार, परिवेश और परवरिश का बहुत असर पड़ता है व्यक्तित्व पर..!!
जड़ों से जुड़े रहिए, क्योंकि परिवार से अलग होकर इंसान अक्सर मुरझा जाता है.!!
मनुष्य की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसका परिवार है और सबसे बड़ी ताकत भी.!!
परिवार में मौजूद आपसे जलने वाला शख्स..

_ आपसे नफ़रत करने वाले आपके किसी दुश्मन से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है.!!
परिवार एक ऐसा अनमोल उपहार है,

_ ज़्यादातर कार्य हम अपनी ज़िन्दगी में अपने परिवार की ख़ुशी और भलाई के लिए करते हैं,
_ इसलिए आपसी तालमेल और रिश्तों में मिठास लाना एवं रखना बहुत ही अनिवार्य है.
दुनिया मे लोग कचरे की तरह बिखरे पड़े हैं, सबकी ज़िंदगी मुट्ठी में रेत के तरह फिसल रही है,

_ जब स्वयं दुःख में हो तो किसी और को कोई कितना रोये और कितना किसी को चुप कराए,
_ हम अपना दुःख किसी को कह नही पा रहे, क्यूंकि सामने वाला हमसे ज्यादा दुःख में है…!
_ किसी अपने के जाने के बाद दो ही चीजें होती हैं,
_ या तो हर बात से फर्क पड़ना बंद हो जाता है या बाकी बचे लोगों के लिए और ज्यादा प्रेम और उन्हें खोने का और भी ज्यादा डर मन में भर जाता है, खैर !…
_ सब पहले जैसा तो कभी नही होगा.. पर कम से कम अपने परिवार और अपने लोगो की कदर कीजिये, क्योंकि यहाँ अमर कोई नही रहता…!!
— इसलिए जिसको भी जो मन का करना है या कहना है सब कर लो, कितने पल बाकी हैं, इस जीवन के,
_ न आपको पता है न किसी और को, बस ज़िन्दगी वो है.. जो अभी हम जी रहे हैं,
_ कल सब सही होगा के इंतज़ार में कितना इंतज़ार करोगे,
_ मरने वालो के लिए लोग उतने दिन ही रोते हैं.. जितने दिन का लगाव था..
_ उसके बाद सब भूल जाते हैं…!
अब लोगों का जीवन जीना बहुत कठिन हो गया है,

_ किसी को किसी से किसी भी प्रकार का कोई भी मतलब नहीं है,
_ जबान तो लोगों की इतनी खराब हो चुकी है कि ये भी पता नहीं.. ये बात बोलनी चाहिए की नहीं..
_ हालात दिनों दिन खराब हो रहे परिवारों में, ज्यादातर किसी की किसी के साथ नहीं बन रही है.!!
किसी घर में एक साथ रहना परिवार नहीं कहलाता… बल्कि एक साथ जीना,

_ एक दूसरे को समझना और एक दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है..

बिना समझ के परिवार दिशाहीन होकर, सदस्यों के पतन का कारण बनता है,

_ इसलिए परिवार में हमेशा एक- दूसरे को समझने को प्रधानता दें.

दूसरों की बातों व रिश्तेदारों को महत्ता देने वाला परिवार धीरे धीरे अपने निजी सदस्यों के बीच संबंध को खराब कर लेता है, _

_ जिससे परिवार की वृद्धि असंभव हो जाती है.

जड़ों से जुड़े रहना जरुरी है….

_ परिवार के साथ हैं तो तनाव से दूर और खुश रहेंगे.

इक ज़माना था कि परिवार में सब एक जगह रहते थे,

_ और अब ‘कोई कहीं’ ‘कोई कहीं’ रहता है..!!

अपने काम और परिवार के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखें.

_ कार्य और परिवार दोनों बहुत जरुरी है लेकिन हम जो भी करते हैं, वह परिवार के लिए ही करते हैं.

_ सो, कार्य महत्त्वपूर्ण है, लेकिन परिवार उस से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.

खुशहाल परिवार की पहचान :-

_ जिस परिवार के सदस्यों में एक-दूसरे पर भरोसा, आपसी प्रेम और आदर का भाव हो,

_ वह परिवार सबसे खुशहाल परिवार कहलाया जाएगा.

आपका परिवार कितना अमीर है, ये मायने नहीं रखता ;

_ आपका परिवार कितना खुश है, ये बहुत मायने रखता है..

परिवार ही एक पवित्र बंधन हुआ करता था,_

_ ख़ैर ! दुःख होता है की आज प्रगतिशील समाज में रिश्तों का कोई मूल्य नहीं है…!!!

अब तो हम सिर्फ अपना घर-परिवार को संभालकर रख ले ..ये ही बड़ी बात है;

_किसी दूसरे को सही बात बोलने से ..वो आप को ही गलत साबित कर देगा.

जीवन मे सब ठीक ही था बस पारिवारिक वातावरण के अलावा,

_ किसी और के जीवन का निर्णय कोई और ले रहा था !!

घर परिवार के नाटक चलते रहेंगे,  आप अपने काम पर ध्यान दो,

_ परिवार के सदस्यों को अपने नाकामी का कारण मत बनने दो..!!

जब आपके पास एक परिवार होता है, तो ज़िंदगी सिर्फ आपकी नहीं रह जाती.

_ आपके फ़ैसलों की गूंज उन ज़िंदगियों तक पहुँचती है, जो आप पर सबसे ज़्यादा भरोसा करती है.
_ आप अपने समय को लापरवाही से नहीं बिता सकते,
_ अपनी बातों को हल्के में नहीं ले सकते या अपने फ़ैसलों में खुदगर्ज़ नहीं हो सकते,
_ क्योंकि आपकी हर एक हरकत उन दिलों को प्रभावित करती है — जो आपको “अपना घर” मानते हैं.
_ माता-पिता या जीवनसाथी होना सिर्फ एक भूमिका नहीं है… ये एक ज़िम्मेदारी है.
_ आप एक सुरक्षित जगह हैं, एक सहारा हैं, एक मिसाल हैं.
_ जब ज़िंदगी मुश्किल हो जाए, तो आपके पास हार मानने की लग्ज़री नहीं होती.
_ आप अकेले नहीं जी सकते.. जब मासूम आँखें आपको देख रही हों — सीखने के लिए, समझने के लिए.
_ आप आधे मन से और पूरे बहानों के साथ परिवार नहीं पाल सकते.
_ इसलिए पूरा साथ दो, ज़मीन से जुड़े रहो..
_ अपनी शांति की रक्षा करो — पर कभी उन लोगों की कीमत पर नहीं,
जो सब कुछ छोड़कर सिर्फ आपके पास रहना चाहते हैं.
_ क्योंकि जब आपके पास एक परिवार होता है, तो आपकी विरासत आपकी कामयाबी से नहीं बनती…
_ बल्कि इस बात से बनती है कि आपने उन लोगों से कितना सच्चा और गहराई से प्यार किया, जिनसे आपने कभी न छोड़ने का वादा किया था.!!
यदि हम संयमित और संतुलित जीवन जीते हैं तो हमसे जुड़े लोगों पर, हमारे परिवार पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

_ इसके अवसर बहुत कम होते हैं कि हमसे किसी को दुख मिले..
_ जीवन सामान्य गति से शांतिपूर्वक चलता है.. लेकिन प्रायः ऐसा नहीं हो पाता.
_ परिवार में किसी एक की भी मनमर्ज़ी और मनमौजीपन सबके सुखों में आग लगा देता है.!!
– Manika Mohini
परिवार की महत्ता इतनी होती है कि बैकग्राउंड अच्छा न हो तो बढ़िया-से-बढ़िया लोग भी धक्के खाते हैं..

_ और बैकग्राउंड बढ़िया हो तो मूर्ख-से-मूर्ख लोग भी मज़े करते हैं.
_ पूर्वजों के कर्मों का फल भोगते हैं हम.!!
संयुक्त परिवार में रहकर खुश रहना अब गुजरे जमाने की बात हो गई है,

_ संयुक्त परिवार में रहना मतलब जो इंसान कमाता है उसे पूरा निचोड़ लेना, फिर जैसे ही वो कमाना बंद कर दे उसे अलग कर देना,
_ एक मेहनती इंसान अपनी जिंदगी का prime time संयुक्त परिवार को देकर आखिर में कुछ नहीं पाता है,
_ इसलिए बेहतर है अलग रहे और खुश रहे.
_ रिश्ते भी बचे रहेंगे और खुदकी मानसिक शांति.
नोट: joint family में दिक्कत इसलिए होती है, क्योंकि इसमें कमाने वाला एक होता है बाकी सब बैठ कर खाने वाले होते है,
_ सब कमाए तो कोई दिक्कत ना हो.. पर जब एक ही कमाए तो फिर उसे एक ना एक दिन दिक्कत होगी.
_ और देखा जाए तो अधिकतर परिवार में कमाने वाला इंसान अपने माता पिता का लाडला ना होकर नालायक इंसान अपने माता पिता का लाडला होता है..
अब इसकी वजह तो माता पिता ही जाने.!!
– कमांडो ध्रुव
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