सुविचार 4961

जरूरत से ज्यादा सोचना बेहद घातक है.. _

_ यह सिवाए निराशा के आपको कुछ नहीं दे सकता..!!!

सुविचार 4960

अभी आपकी मुट्ठी में सिर्फ वर्तमान है _ इसे वाद- विवाद, तर्क- वितर्क, शंका- संदेह में बर्बाद न करें.

” आनंद के साथ सहज कर्म करते रहें ”

जीवन में हर जगह तर्क ना घुस जाये.
_ जीवन का सौन्दर्य बोध तर्क की सीमा से बाहर है.

सुविचार 4958

किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है,

आप स्वयं में जैसे हैं, एकदम सही हैं, स्वयं को स्वीकारिये.

सुविचार 4957

जीवन के महत्व को जानें और दूसरों को नीचा दिखाने में कभी भी खुद को शामिल न करें.
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