मस्त विचार 1863

रिश्तों का एहसास अभी रहने दो,

थोड़ी सी तो प्यास अभी रहने दो.

चन्द चोटों से क्या घबराना,

मनुहार की आस अभी रहने दो.

तपते है कड़ी धूप में, झुलसते हैं,

तब डाल पर फूल कहीं खिलते हैं.

इन फूलों की खुशबु को,

फ़िजा में अभी तुम बिखरने दो.

बेशकीमती है ये आँसुओं के मोती,

अभी न इनको पलकों से बहने दो.

माना खुशी देती है, यादों की अविरल धारा,

क्या हासिल होता है, अतीत में डूबकर,

यादों के काफिलों को शहर से गुजरने दो.

खालीपन में अपनों से मिलकर,

प्रेम के मोती सजने दो.

कोरी आँखों मे ख्वाब भी नहीं आते,

इन आँखों की नमीं अभी रहने दो.

क्या पता कब आ जाये कोई थामने वाला,

काँधे पे सिर रख कर, फुट फुट कर,

गम का समन्दर बहने दो,

एहसास रहने दो, प्यास रहने दो ।।

।। पीके ।।

मस्त विचार 1859

उलझनें हैं बहुत..*मग़र सुलझा लिया करता हूँ..*

और, फोटो खिंचवाते वक़्त..*मैं अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ..

क्यूँ नुमाइश करुँ..*अपने माथे पर शिकन की..*

मैं, अक्सर मुस्कुरा के..*इन्हें मिटा दिया करता हूँ..*

क्योंकि..*जब लड़ना है खुद को खुद ही से..

तो, हार-जीत में..*कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ..*

हारुँ या जीतूं..* कोई रंज नहीं..*

कभी खुद को जिता देता हूँ..* तो, कभी खुद से जीत जाता हूँ..*

ज़िंदगी तुम बहुत खूबसूरत हो..*

इसलिए मैंने तुम्हें..* सोचना बंद और..* जीना शुरु कर दिया है..*

मस्त विचार 1858

जानते हो तो फिर मुझसे पूछते क्यों हो,

दुखा के दिल मेरा इतना सोचते क्यों हो,

दिल मेरा जानकार दुखाने वाले सुन,

जो बात सुन नहीं सकते वो सुनाते क्यों हो.

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