Collection of Thought 1154
यदि आप एक घर बना रहे हैं और एक कील टूट जाती है, तो क्या आप निर्माण करना बंद कर देते हैं या आप कील बदलते हैं ?
यदि आप एक घर बना रहे हैं और एक कील टूट जाती है, तो क्या आप निर्माण करना बंद कर देते हैं या आप कील बदलते हैं ?
_ मगर जो बदकिस्मती बनकर आपके हिस्से में आ जाए, उससे लड़ना शायद इंसान के बस में नहीं होता, कुछ चीज़ें चाहकर भी बदली नहीं जा सकतीं, बस उन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ना पड़ता है.!!
_फिर भी उनके होने का दर्द और खामियाज़ा हमें ही भुगतना पड़ता है,
_ शायद यही ज़िंदगी की सबसे अजीब बात है.
_ कुछ फैसले हमारे नहीं होते, हालात हमारे नहीं होते, फिर भी उनकी सज़ा हमें ही मिलती है.!!
– Nirarthak Nirarthak
कुछ अधूरी ख्वाहिशें ही तो …जिंदगी जीने का मजा देती हैं..
और विडंबना यह है कि _ हमारे हाथ में प्रयास होता है …परिणाम नहीं !!!
आपको महत्व देता हो, आपका ख्याल रखता हो, लगता है ना ?
_ पहले मुझे लगता था कि जो दिखाई देता है, वही सच है.
_ जो व्यक्ति बार-बार एक ही रास्ते पर जाता है, वह उसी मंज़िल का मुसाफ़िर होगा.
_ जो लोगों की नज़रों में गलत है, वह सचमुच गलत ही होगा.
_ फिर जीवन ने मुझे सिखाया कि आँखें दृश्य देखती हैं, लेकिन सत्य नहीं._ सत्य अक्सर वहाँ रहता है, जहाँ हमारी नज़र पहुँचती ही नहीं.
_ तब से मैंने किसी भी इंसान पर अंतिम निर्णय देने से पहले अपने भीतर एक प्रश्न जगाना शुरू कर दिया…”क्या पता मैं गलत हूँ ?”
_ क्या पता जिस व्यक्ति को मैं पापी समझ रहा हूँ, वह किसी और के पापों का बोझ अपने सिर पर लेकर चल रहा हो.
_ क्या पता जिसे मैं स्वार्थी समझ रहा हूँ, उसने अपना सबसे सुंदर हिस्सा किसी अनजान इंसान की ज़िंदगी सँवारने में खर्च कर दिया हो.
_ क्या पता जिसे मैं गिरा हुआ मान रहा हूँ, वह किसी और को गिरने से बचाने के लिए स्वयं गिरा हुआ दिखाई देना स्वीकार कर चुका हो.
_ जीवन ने मुझे यह भी समझाया कि सबसे गहरे त्याग कभी मंचों पर नहीं होते.
_ उन पर तालियाँ नहीं बजतीं, उनके लिए समाचार नहीं लिखे जाते, उनके सम्मान में स्मारक नहीं बनते.
_ वे त्याग चुपचाप होते हैं…
_ इतने चुपचाप कि दुनिया उन्हें गलत समझ बैठती है.
_ हम अक्सर किसी इंसान की पूरी कहानी उसके जीवन के एक दृश्य से लिख देते हैं.
_ हम उसके संघर्ष नहीं देखते, केवल उसका परिणाम देखते हैं._ हम उसके घाव नहीं देखते, केवल उसका व्यवहार देखते हैं.
_ हम उसकी नीयत नहीं पढ़ते, केवल उसके कदमों का रास्ता देखते हैं.
_ और यहीं हम सबसे बड़ी भूल कर बैठते हैं.
_ क्योंकि संसार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी प्रतिष्ठा बचाने के बजाय किसी और की इज़्ज़त बचा लेते हैं.
_ वे सफ़ाई दे सकते हैं, लेकिन नहीं देते.
_ वे सच बता सकते हैं, लेकिन चुप रहते हैं.
_ वे सम्मान पा सकते हैं, लेकिन किसी और का भविष्य उनसे अधिक मूल्यवान होता है.
_ ऐसे लोग दुनिया की नज़रों में हार जाते हैं, लेकिन ईश्वर की दृष्टि में वही सबसे ऊँचे खड़े होते हैं.
_ अब मैं समझ चुका हूँ कि किसी इंसान की महानता इस बात से नहीं मापी जा सकती कि लोग उसके बारे में क्या कहते हैं.
_ महानता तो वहाँ जन्म लेती है, जहाँ कोई व्यक्ति सही काम करता रहता है, भले ही पूरी दुनिया उसे गलत समझती रहे.
_ इसलिए अब मैं किसी पर उँगली उठाने से पहले अपने भीतर झाँकता हूँ.
_ क्योंकि मैंने सीखा है कि निर्णय देना आसान है, समझना कठिन.
_ आरोप लगाना सरल है, करुणा रखना दुर्लभ.
_ और शायद मनुष्य की सबसे बड़ी परिपक्वता यही है कि वह हर चेहरे के पीछे छिपी उस अनकही कहानी की संभावना को कभी मरने न दे.
_ हो सकता है जिसे मैं आज दोष दे रहा हूँ, वही कल मेरी इंसानियत का सबसे बड़ा पाठ निकले.
_ इसलिए अब मैं लोगों को उनके बारे में सुनी हुई बातों से नहीं, बल्कि अपनी करुणा की आँखों से देखने की कोशिश करता हूँ.
_ क्योंकि जीवन ने मुझे एक ऐसा सत्य सिखाया है जो शायद हर युग में अमर रहेगा…
_ हर दिखाई देने वाला सत्य, पूरा सत्य नहीं होता.
_ और कई बार…
_ सबसे पवित्र आत्माएँ वही होती हैं, जिन्हें दुनिया सबसे पहले अपवित्र घोषित कर देती है.
Rahul Kumar Jha

