सुविचार 530

जैसे पर्वत शिखरों के बीच से उठती हुई नदियाँ अपने तेज प्रवाह के साथ छोटे- मोटे पत्थरों को भी बहाकर ले जाती है. ऎसे ही आपका उत्साह विघ्न- बाधाओं को पार कर सकता है, अपने उत्साह को कभी ठण्डा मत पड़ने देना, अपने शरीर के रोम- रोम को उत्साह से भरपूर रखिए. 

सुविचार 529

यदि हम शान्ति का सर्मथन करना चाहते हैँ तो हमेँ इसके लिए चीखने – चिल्लाने की क्या आवश्यकता है.

सुविचार 528

“दिव्य गुण – सहनशिलता, नम्रता, निर्भयता, अन्तर्मुखता, धैर्यता, मधुरता, हर्षितमुखता, पवित्रता”

सुविचार 527

किसी का बड़प्पन इस बात पर निर्भर है कि उसके सोचने का तरीका और काम करने का ढंग क्या है.

सुविचार 526

जीवन को अविकसित, असफल बनाने वाले कारणों में श्रम से घृणा और समय की बरबादी ही प्रमुख है.

मस्त विचार 496

आपकी खुशी केवल और केवल आपके हाथ में है, आप खुद को इतना कमजोर न बनायें कि परिस्थितियां आपको तोड़- मरोड़ दे.

कई बार परिस्थितियां इतनी ख़राब नहीं होती, जितना हम उन्हें सोच- सोच कर बना देते हैं, हर घटना पर बेवजह सोचना बन्द करें. आगे बढ़ें, घटनाओं को सहज तरीके से लें, बेवजह दुःखी न हों.

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