सुविचार 398

” स्थितियां विचारने से ही नहीं, सुधारने से सुधरती है,

और सुधार नज़र आना चाहिए,”

सुविचार 397

मन के संकल्प- विकल्प प्रतिछण एक नई सृष्टि की रचना कर रहे होते हैं, जो हमारे मन में है वही हम दूसरों में देखने लगते हैं.

सुविचार 396

हमेशा चीजों को अपनी जगह ही खड़े होकर न देखें, सोचें कि सामने- वाला कहाँ खड़ा है और उसे वहाँ से चीजें कैसी दिख रही हैं.

सुविचार 395

किसी की बात तुरन्त काटने की आदत न डालें, कोई कुछ बोल रहा है, उसका आधार क्या है, समझने की कोशिश करें.

सुविचार 394

हमें अधिक शान्ति मिलती, यदि हम अपने को दूसरों के काम और वचनों में उलझाये न होते ; उन वस्तुओं में न फंसे होते, जिनसे हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है.

सुविचार 392

जो दूसरों के कामों की  आलोचना में ही लगे रहते हैं, वे अपना समय तो व्यर्थ खोते ही हैं, दोष देखने की उनकी आदत बन जाती है और जिनको दूसरों में दोष ही दीखते हैं, उनके ह्रदय की जलन कभी मिट ही नहीं सकती.
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