सुविचार 479

जीवन में सब को सब कुछ नहीं मिलता. हमारे वश में क्या है और क्या नहीं है, यह ध्यान रख कर सभी को सम्पूर्णता की तलाश करनी चाहिए. वैसे सम्पूर्णता की मंजिल संतुष्टि है, जो अपने को व्यक्तिगत गुणों से पूर्ण बनाने में मिलती है.
जीवन जीना भी एक नजरिए की बात है. अगर हम इस वास्तविकता को स्वीकार कर लें कि जीवन में सब को सब कुछ नहीं मिलता, तो हमारी कुंठा ऐसे ही काफी कम हो जाएगी. सब कुछ मिल जाना भी इस बात की गारण्टी नहीं कि जीवन में ख़ुशियाँ लहलहा उठेंगी एवं सभी मुश्किलों का अन्त हो जाएगा. एक उम्मीद पूरी होने के बाद दूसरी उम्मीद जगती है और जीवन में कब कैसे मोड़ आएँगे, इस के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. आज जो व्यक्ति काफी खुश है, कल उस के जीवन में दुःख की बदली छा सकती है. सोच में बदलाव लाकर जीवन को कुंठा और निराशा रहित बनाना सम्भव है.
जो लोग अपने हालात को लेकर दुःखी या असंतुष्ट रहते हैं, उन में से ज्यादातर ने इस यथार्थ को नजरअंदाज किया होता है कि जीवन की सभी स्थितियों या घटनाओं पर हमारा नियन्त्रण नहीं होता. कुछ ही चीजें ऐसी हैं जिन्हे हम बदल सकते हैं या अपने हिसाब से ढाल सकते हैं, सभी नहीं. ऐसी बातों को लेकर परेशान होना, जिन में हमारा कोई दखल न हो, बुद्धिमानी नहीं कही जाएगी. 
कुछ लोग व्यक्ति की कामयाबी को उस के रूप रंग और व्यक्ति के बाहरी शारीरिक आकर्षण से जोड़ कर देखते हैं, अगर यह धारणा सही होती तो सफलता के शिखर पर पहुँचे सभी लोग आकर्षक रूप रंग के स्वामी हुआ करते. सच तो यह है कि इनसान अपने कर्मों एवं कोशिशों से आगे बढ़ता है.

मस्त विचार 472

वो सब कुछ जो कहा जाना बहुत ज़रूरी है,,, या तो डायरियों में दर्ज़ है या चुप्पियों में कैद ,,,!

सुविचार 478

बुराइयां ही क्लेश की जड़ हैं जो हमारे द्वारा दूसरों को दुख देने का कारण बनती हैं, शायद उस से भी ज्यादा हमें दुखी रखने का. अपनी बुराइयों पर विजय पाना ही आत्मजयी होना है.

मस्त विचार 471

अगर ग़लत लोग मिल भी जाएँ, उनके मिल जाने से घबराना नहीं.

वह अपने काम करें, आप अपना काम करते चले जाइए.

सुविचार 477

जब आपका ह्रदय ऊँचा होगा, उदारता आपके अन्दर आएगी, तो संसार में आप एक नई तरह से जियेंगे.

सुविचार 476

जिस व्यक्ति के शुष्क ह्रदय में सद्भावनाओं के लिए, सदविचारों के लिए स्थान नहीं, उसके द्वारा जीवन में कोई श्रेष्ठ कार्य बन पड़े — यह लगभग असंभव- सा है.

मस्त विचार 469

इच्छा शक्ति इतनी प्रबल होनी चाहिए कि,

जिस भाव को हम न चाहें, उसे अपने मन में आने ही न दें.

सुविचार 475

हमें भय के कारण सन्धि वार्त्ता नहीं करनी चाहिए, परन्तु सन्धि वार्त्ता करने से भय भी नहीं करना चाहिए.

सुविचार 474

जीवन में आप जितने कष्टों और विपत्तियों का विरोध करेंगे, उतना अधिक ही वे आपको परेशान करेंगी. जितना अधिक आप उनको स्वीकार करेंगे, उतनी अधिक आसानी से वे आपको छोड़ देंगी.
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