सुविचार 470
अगर आप खराब परिस्थिति व हालातों में जी रहे हैं, तो ये न सोचें कि इससे बाहर निकला नहीं जा सकता. खुद पर भरोसा रखें, कोशिश जारी रखें.
वीरानों में भटकना ही मेरी ज़िन्दगी है,
लगता है जैसे किसी को मेरी जरुरत नहीं,
मंज़िलें तो बहुत है पर कोई साथ नहीं.
महीनों तपती जमीन और कांटों से _ बचाया था जिसने…
मेरा वजूद जैसे किनारा नदी का था…….
गुलशन में हमीं, लेकिन खुशबू को तरसते है…….