सुविचार 411

हमें ये समझना होगा कि आज दुनिया में जितने भी आविष्कार हुए हैं. जितने भी प्रोडक्ट हम इस्तेमाल कर रहे हैं, किन्ही के दिमाग़ में एक आइडिया आया और उन्होंने उस पर काम शुरू किया. इसलिए वह चीज साकार हो पायी.

सुविचार 410

अधिक से अधिक निर्दोष, कम ज्ञानी और अधिक बालसुलभ बनें ;

_ जीवन को मजे के रूप में लें – क्योंकि यही ठीक है !

सुविचार 408

जब आस- पास में समाज के, परिवार के हालात ख़राब होने लग जायँ, ऎसी स्थिति में ही तो आपको मन की धीरता को बना के रखना होता है. रब पर विश्वास और कर्म के सिद्धान्त के ऊपर निश्चय बनाए रखना है.

मस्त विचार 384

यूँ ना खींच अपनी तरफ मुझे बेबस कर के…..

ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले….

मस्त विचार 383

तुझे याद करना भी अब दिल का धड़कना सा बन गया है,

पता ही नहीं ज़िन्दगी साँसों से चल रही है या तेरी यादों से.

मस्त विचार 382

कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, “ऐ ज़िंदगी” तुझको,

जिधर भी देखूँ,,,,,,”तू-ही-तू” बिखरी पड़ी है..

सुविचार 407

उत्तेजित दिमाग ऐसे तिनके के समान हो जाता है, जिसे हवा कहीं भी उड़ा कर ले जा सकती है.
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