सुविचार 416
सफलता बाधाओं को दूर कर प्राप्त की जा सकती है न कि उन से घबरा कर और सिमटकर एवं यह सोच कर कि आगे रास्ता बंद है, जब कि जीवन में रास्ते कभी बंद नहीं होते.
दौलत चाहे कितनी भी बेईमानी से आये;
लेकिन
उसकी रखवाली के लिए
सबको ईमानदार शख्स ही चाहिए…
तो यह स्वयं आप के लिए हानिकारक है.
खुदा की कसम ये चाहने वाले बडी मुश्किल से मिलते हैं …
फिर भी न जाने क्यों मैं उस राह ही चलता रहा !
सोचा बहुत इस बार रोशनी नहीं ..धुआं दूंगा,
लेकिन चिराग था…..फितरत से जलता रहा……जलता ही रहा….
और भविष्य को सुखद स्थिति में अनुभव करने लग जाएँ ,
उस स्थिति का नाम सफलता है .