जन्म देने वाले माता- पिता से अध्यापक कहीं अधिक सम्मान के पात्र हैं, क्योंकि माता- पिता तो केवल जन्म देते हैं, लेकिन अध्यापक उन्हें शिछित बनाते हैं, माता- पिता तो केवल जीवन प्रदान करते हैं, जबकि अध्यापक उनके लिए बेहतर जीवन को सुनिश्चित करते हैं.
स्त्रियों की उन्नति या अवनति पर ही राष्ट्र की उन्नति या अवनति निर्भर करती है.
हम इसलिए सही काम नहीं करते क्योंकि हमारे अंदर सदगुण तथा श्रेष्ठ्ता है, बल्कि हमारे अन्दर वे गुण इसलिए हैं क्योंकि हमने सही काम किया है. हम वैसे ही हैं जैसा हम बार- बार करते हैं, तब श्रेष्ठ्ता कोई क्रिया नहीं रहती बल्कि एक आदत बन जाती है.
जीवन में सफलता के लिए लछ्य निर्धारण बहुत जरुरी है. लछ्य निर्धारित होने के बाद उसके अनुरूप कार्य करने की अनिवार्यता होती है. पूरी प्रतिबद्घता, अनुशासन, संयम, लगातार परिश्रम करने की लगन यदि एक साथ मिल जाए तो हर मंजिल आसान हो जाती है.
जिन्दगी अच्छे और बुरे पलों से मिल कर बनी है, दोनों का अपना मज़ा है. एक के बिना दूसरा अधूरा है, यही वजह है कि न तो कभी खुशी को सिर पर बिठाओ, न ग़म को दिल से लगाओ.