मस्त विचार 305

ज़िन्दगी मेरे कानों में हौले से कह गई,

उन रिश्तों को थामे रखना, जिनके बिना गुजारा नहीं.

मस्त विचार 302

ठोकरे खाकर भी ना सँभले तो मुसाफिर का नसीब..

वरना..

पत्थर तो अपना फर्ज निभा दिया ही करते हैँ…

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