मस्त विचार 235

औरों के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत ना थी ,

जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.

मस्त विचार 231

मैंने तुमको अपना जाना, अपने से भी ज्यादा माना.

पर इतना सब करने पर भी, तुमने क्या मुझको पहचाना.

तुम तो अब भी पहले जैसे, लगते हो वैसे के वैसे.

मै कितना मजबूर हुआ हूँ, अपनों से भी दूर हुआ हूँ.

मस्त विचार 230

किसी के साथ किसी प्रतियोगिता की कोई आवश्यकता नहीं है ; _ आप स्वयं हैं, और जैसे आप हैं, आप पूरी तरह से अच्छे हैं ; खुद को स्वीकार करें.

🟠 आप वो बन जाते हैं जो आपको लगता है कि आप हैं.

मस्त विचार 228

कहते हैं गम की गलियों से, होकर मिलते हैं सुख के रास्ते.

इसलिए जरा धीरज रख ले, शायद फिर अपनी सुबह मिले.

हाँ सच है कि गम से बचना है, पर इसका हमसे कहना है.

मैं तुम्हे सिखाने आया हूँ, फौलाद बनाने आया हूँ.

मुझ से इतना घबराओगे, तो ख़ुशी कहाँ से पाओगे. 

मस्त विचार 227

अगर आप जाग रहे हो, तो सोतों को जगाओ.

क्योंकि जगाने का वक़्त आ गया है,

अतः अपनी तरह औरों को भी जगाओ.

मस्त विचार 226

कोई वादा ना कर, कोई इरादा ना कर;

ख्वाहिशों में खुद को आधा ना कर;

ये देगी उतना ही जितना लिख दिया

खुदा ने;

इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर.

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