सुविचार – मेहमान – अतिथि – गेस्ट – 048

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आपके यहाँ जब कोई मेहमान आये तो..

_ उसके लिए ऐसा प्रयास करो कि ..उसे कोई तकलीफ़ न हो,
_ और जब कहीं आप मेहमान बन कर जाओ तो..
_ ऐसे रहो कि मेज़बान को अहसास न हो कि.. आप को कोई तकलीफ़ या कमी है.
सच्चाई तो आज की ये है आज कल गेस्ट आते ही कम हैं और आते भी हैं तो जाने की जल्दी और उनको भेजने की जल्दी के साथ..!

रिश्ते पनपे कैसे ?
_ अगर आप जाएंगे नहीं तो आपके पास भी कोई आएगा कैसे..
_ नई पीढ़ी भी यूं ही अजनबियत के साथ पल पुस जाएगी..
_ कल को एक दूसरे को पहचानेगी ही नहीं बर्दाश्त करना तो दूर की बात है..!!
आजकल कोई गेस्ट आता कहाँ है.

_ कोई आता भी है तो १-२ घंटे के लिए..
_ रात को रुकने का तो कोई सवाल ही नही..
_ सब रिश्ते धीरे धीरे ख़तम होते जा रहे हैं, ज्यादातर खून के रिश्ते..
_ किसी के पास वक़्त ही नही है और खासकर महानगरो मे रहने वालो के लिए..
_ फ्लैट का साइज जरूर बढ़ रहा है, लेकिन दिलो के साइज छोटे होते जा रहे हैं..!!
यह सही है कि अब गेस्ट का आना कोई पसंद नहीं करता..

_ और गेस्ट भी किसी के घर जाना पसंद नही करता..
_ हकीकत यह है कि हम सब की अपनी एक जीवन शैली हो गयी है..
_ हमारी अपनी प्रातः चर्या और दिनचर्या है, दूसरे के घर मे यह लागू नहीं हो पाती..
_ घर बड़ा हो, उसमें पर्याप्त जगह भी हो.. मगर अब गेस्ट कम ही आते हैं..!!
पहले मेहमानों के लिए दिल में जगह थी, सब जरा सी जगह में ही समा जाते थे.

_ पुरानी बातें अब सब हवा हो गई..
_ अब वास्तव मे किसी के घर जल्दी कोई रुकता नहीं है..
_ हमारा शरीर अब आराम का इतना अभ्यस्त हो गया है ज़मीं पर बैठ लेट ही नहीं पाता है, सबको अपना कमरा और पलंग चाहिए !!
पहले की तरह तो आना जाना सब खत्म हो गया,

_ पहले सब एक-दूसरे के घर हाल-चाल व राजी-खुशी पूछने जाते थे,
_ पर अब किसी के पास समय नहीं है, कोई किसी के घर जाता ही नहीं..
_ अब तो कोई फंक्शन होने पर ही जाते हैं, बेवजह किसी के घर नहीं जाते.!!
पहले हम कभी भी बिना पूर्व सूचना के किसी के घर चले जाते थे और कोई हमारे घर आ जाता था… अच्छा लगता था.

_ पहले पूर्व सूचना देने की सुविधा भी नहीं थी, न ज़रूरत महसूस होती थी.
_ आज शब्दों में तो सब नज़दीक हैं.. लेकिन वैसे बहुत दूरियां हैं.
_ यह नए ज़माने का बदलाव है.
_ बदलाव अच्छा हो या बुरा, पसंद आए या न आए, स्वीकारना ही होता है.!!
– Manika Mohini
किसी के घर जाओ तो अपनी आँखों को काबू में रखो, ताकि उसकी कमियां न दिखे !

_ किसी के घर से निकलो तो जुबान को काबू में रखो, ताकि उसके घर की इज्जत और राज़ दोनों सलामत रहें,
_ कौन क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है और क्यूँ कर रहा है, इन सबसे आप जितना दूर रहोगे, उतना ही खुश रहोगे,
_ जितना हो सके खामोश रहना ही अच्छा है, क्योंकि सबसे ज्यादा गुनाह इंसान से उसकी जुबान ही करवाती है,
_ बोलने से पहले सोचो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया जाता है..!!
अब मेहमान बदल गये हैँ, अब मेहमान आते हैँ तो वह चाहते हैँ कि उनको होटल जैसा ट्रीटमेंट मिले.!!
पहले दिन अतिथि, दूसरे दिन बोझ और तीसरे दिन कंटक है.!!
आजकल तो अपने भी कहलाते हैं मेहमान..

_एक वो दौर था मेहमान भी मेहमान नहीं थे.!!
हमें तो अच्छा लगता है कि कोई अतिथि हमारे पास आया है,
_ अपनी सुविधा और छमता के अनुरूप उनका ह्रदय से स्वागत करते हैं.!!

सुविचार – परिवार – फैमिली – Family – 047

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जाने के लिए कुछ जगह होना घर है,

किसी से प्यार करना ही परिवार है,
दोनों का होना एक आशीर्वाद है.
Having some place to go is HOME
Having someone to love is FAMILY
Having both is a BLESSING.
मानव जीवन में परिवार की भूमिका उस कुशन या गद्दे की तरह की होती है,

_ जो हमें जीवन में सफलता की ऊंचाइयों से अचानक गिरने पर हमें जख्मी होने से बचाती है.
_ इसलिए सफलता पाने की कोशिश में केवल संघर्ष ही अनिवार्य नहीं है,
_ बल्कि उन अपनों के प्यार व सहानुभूति की भी दरकार होती है..
_ जिनकी उपस्थिति के बिना जीवन तथा जहान की सारी खुशियां अधूरी प्रतीत होती है.
_ आप के अपने आप के सपनों के पीछे भागने की रेस में आप के साथ होंगे तो आप को एक अद्भुत ऊर्जा तथा प्रेरणा का एहसास पलप्रतिपल होगा.
_ अपनों के प्यार को खो कर पाई गई किसी भी कामयाबी की कीमत कभी भी इतनी अधिक नहीं होती,
_ जो आप के जीवन की भावनात्मक कमी की भरपाई कर सके.
‘परिवार बहुत जरूरी है’.. बिना परिवार का इंसान कटी हुई पतंग की तरह होता है.. जिसे लोग या तो लूट लेते है या फिर फाड़ देते हैं.

_ इसलिए परिवार से जुड़े रहिए. मुसीबत मे सिर्फ परिवार ही काम आता है.
परिवार सुख-दुःख, खुशी-गम यानि जीवन के हर रंग के अनुभवों का संगम है.

_ यूं अकेले भी जीवन आराम से जिया जाता है,
_ यूं परिवार को दुखों की जड़ कहा जाता है, लेकिन दुख और परेशानी के समय अगर परिवार का साथ मिले तो व्यक्ति मुसीबतों में भी निश्चिंत रहता है,
_ उसे अपना ख्याल रखने की भी चिंता नहीं होती.
_ जिनका अपना परिवार नहीं होता यानी खून का रिश्ता नहीं होता, वे अजनबियों से रिश्ते बनाते हैं.
_ मित्र भी सीमित रूप से ही आपका साथ देते हैं, वे स्थायी सहारा नहीं होते.
_ परिवार एकमात्र ऐसा सुख है जो वरदान स्वरूप मिलता है..!!
अगर परिवार में नई और पुरानी पीढ़ी एक दूसरे कि भावना को समझ कर परस्पर सामंजस्य बिठाये तो _जटिल परिस्थितियां कभी उत्पन्न ही नहीं होंगी,

_यदि दोनों थोडा- थोडा झुक जाएँ तो खुशियों का वृत्त अपने आप ही पूरा हो जायेगा.

दुनिया बहुत बड़ी है, मगर एक इंसान की दुनिया वह होती है, जिनके सुख और दुख से वह प्रभावित होता है.

_ अर्थात परिवार और चन्द दोस्त और रिश्तेदार..!
_ कोशिश ये कीजिए कि आपकी दुनिया में शामिल खास लोगों को आपसे कोई शिकायत न रहे.
_ बाकी दुनिया की चिंता छोड़ दीजिए..!!
जीवन में सच्ची खुशी उस बड़े बड़े मकान में नहीं, बल्कि उस छोटे से कोने में है.. जहां हम अपने परिवार के साथ हंसते-बोलते हैं.
_ सच्ची समृद्धि बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि भीतर की शांति और संतोष में है.
परिवार एक पेड़ की शाखाओं की तरह होता है,

_ जो बढ़ती तो अलग- अलग दिशाओं में है, लेकिन सब की जड़ एक ही है !

परिवार में अगर छोटी-छोटी बातों को बड़ा बनाओगे,

_ तो आपका बड़ा परिवार छोटा होता जाएगा..!!

बेशुमार पैसा और दुनिया का कोई भी ब्रांड, आपको वो ख़ुशी नहीं दे सकता ;

_ जो आपको आपका परिवार दे सकता है.

इस खूबसूरत जीवन मे दो रोटी रूखी-सुखी ही हो.. परिवार के साथ खाने में जो सुकूँ है.. वो सबसे बड़ा है,

_ पैसा -रूतबा- झगड़ा ये सब बस जीवन की खूबसूरती को बर्बाद करने के लिए ही है..!!

परिवार को मालिक बनकर नहीं बल्कि माली बनकर संभालो,

_ जो ध्यान तो सबका रखता हो.. पर अधिकार किसी पर ना जताता हो..

किसी घर में एकसाथ रहना परिवार नहीं कहलाता, बल्कि एकसाथ जीना, एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है.!!

जीवन में कुछ लोग हमारे लिये सिर्फ लोग नहीं होते, वो होते हैं हमारें जीनें की वजह..
_ हमारे मुस्कुराने की वजह, उनके होने मात्र से सब सही-सा लगता है.!!
परिवार की नीवं जब मिल- जुलकर अनेक कंधों पर सवार होती है,

तब वह मजबूत बनती है.

परिवार में बहुत समस्याएँ होती हैं, पर वे लोग खुशनसीब हैं जिनका परिवार होता है.!
” पारिवारिक बंधन एक पेड़ की तरह होता है, यह झुक सकता है लेकिन टूट नहीं सकता “
परिवार उस वृक्ष की तरह होता है, जिसकी घनी छांह में हम खुद को सुखद स्थिति में महसूस करते हैं.
परिवार वो है जो मुश्किल घड़ी में आपके काम आए.. ना की आपके बारे में बातें बनाये..!!
विडंबना ये है कि घात करने वाले अब परिवार में ही अधिक हैं,

_ वो पराये को लाभ दे देंगें.. पर अपनों के लिये चाहेंगे कि ये दुखी हीं रहे.!!
परिवार बर्बाद होने लगते हैं, जब समझदार मौन रहते हैं और नासमझ बोलने लगते हैं.

_ कुछ मूर्खों का पागलपन कब तक परिवारों को निगलता रहेगा ? 

परिवार में मौजूद नाखुश लोग बेमतलब की बात का बतंगड़ बनाने में माहिर होते हैं.!!
परिवार को जोड़ने वाला बंधन खून का नहीं,

_बल्कि एक-दूसरे के जीवन में सम्मान और खुशी का है.!!

अपने परिवार से मिल के रहो, _ दुनिया की हर खुशी तुम्हारा दरवाजा खटखटाएगी।।
“अगर मैं अपने परिवार के साथ सामंजस्य बिठाता हूं, तो यह सफलता है “
परिवार, परिवेश और परवरिश का बहुत असर पड़ता है व्यक्तित्व पर..!!
जड़ों से जुड़े रहिए, क्योंकि परिवार से अलग होकर इंसान अक्सर मुरझा जाता है.!!
मनुष्य की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसका परिवार है और सबसे बड़ी ताकत भी.!!
परिवार में मौजूद आपसे जलने वाला शख्स..

_ आपसे नफ़रत करने वाले आपके किसी दुश्मन से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है.!!
परिवार एक ऐसा अनमोल उपहार है,

_ ज़्यादातर कार्य हम अपनी ज़िन्दगी में अपने परिवार की ख़ुशी और भलाई के लिए करते हैं,
_ इसलिए आपसी तालमेल और रिश्तों में मिठास लाना एवं रखना बहुत ही अनिवार्य है.
दुनिया मे लोग कचरे की तरह बिखरे पड़े हैं, सबकी ज़िंदगी मुट्ठी में रेत के तरह फिसल रही है,

_ जब स्वयं दुःख में हो तो किसी और को कोई कितना रोये और कितना किसी को चुप कराए,
_ हम अपना दुःख किसी को कह नही पा रहे, क्यूंकि सामने वाला हमसे ज्यादा दुःख में है…!
_ किसी अपने के जाने के बाद दो ही चीजें होती हैं,
_ या तो हर बात से फर्क पड़ना बंद हो जाता है या बाकी बचे लोगों के लिए और ज्यादा प्रेम और उन्हें खोने का और भी ज्यादा डर मन में भर जाता है, खैर !…
_ सब पहले जैसा तो कभी नही होगा.. पर कम से कम अपने परिवार और अपने लोगो की कदर कीजिये, क्योंकि यहाँ अमर कोई नही रहता…!!
— इसलिए जिसको भी जो मन का करना है या कहना है सब कर लो, कितने पल बाकी हैं, इस जीवन के,
_ न आपको पता है न किसी और को, बस ज़िन्दगी वो है.. जो अभी हम जी रहे हैं,
_ कल सब सही होगा के इंतज़ार में कितना इंतज़ार करोगे,
_ मरने वालो के लिए लोग उतने दिन ही रोते हैं.. जितने दिन का लगाव था..
_ उसके बाद सब भूल जाते हैं…!
अब लोगों का जीवन जीना बहुत कठिन हो गया है,

_ किसी को किसी से किसी भी प्रकार का कोई भी मतलब नहीं है,
_ जबान तो लोगों की इतनी खराब हो चुकी है कि ये भी पता नहीं.. ये बात बोलनी चाहिए की नहीं..
_ हालात दिनों दिन खराब हो रहे परिवारों में, ज्यादातर किसी की किसी के साथ नहीं बन रही है.!!
किसी घर में एक साथ रहना परिवार नहीं कहलाता… बल्कि एक साथ जीना,

_ एक दूसरे को समझना और एक दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है..

बिना समझ के परिवार दिशाहीन होकर, सदस्यों के पतन का कारण बनता है,

_ इसलिए परिवार में हमेशा एक- दूसरे को समझने को प्रधानता दें.

दूसरों की बातों व रिश्तेदारों को महत्ता देने वाला परिवार धीरे धीरे अपने निजी सदस्यों के बीच संबंध को खराब कर लेता है, _

_ जिससे परिवार की वृद्धि असंभव हो जाती है.

जड़ों से जुड़े रहना जरुरी है….

_ परिवार के साथ हैं तो तनाव से दूर और खुश रहेंगे.

इक ज़माना था कि परिवार में सब एक जगह रहते थे,

_ और अब ‘कोई कहीं’ ‘कोई कहीं’ रहता है..!!

अपने काम और परिवार के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखें.

_ कार्य और परिवार दोनों बहुत जरुरी है लेकिन हम जो भी करते हैं, वह परिवार के लिए ही करते हैं.

_ सो, कार्य महत्त्वपूर्ण है, लेकिन परिवार उस से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.

खुशहाल परिवार की पहचान :-

_ जिस परिवार के सदस्यों में एक-दूसरे पर भरोसा, आपसी प्रेम और आदर का भाव हो,

_ वह परिवार सबसे खुशहाल परिवार कहलाया जाएगा.

आपका परिवार कितना अमीर है, ये मायने नहीं रखता ;

_ आपका परिवार कितना खुश है, ये बहुत मायने रखता है..

परिवार ही एक पवित्र बंधन हुआ करता था,_

_ ख़ैर ! दुःख होता है की आज प्रगतिशील समाज में रिश्तों का कोई मूल्य नहीं है…!!!

अब तो हम सिर्फ अपना घर-परिवार को संभालकर रख ले ..ये ही बड़ी बात है;

_किसी दूसरे को सही बात बोलने से ..वो आप को ही गलत साबित कर देगा.

जीवन मे सब ठीक ही था बस पारिवारिक वातावरण के अलावा,

_ किसी और के जीवन का निर्णय कोई और ले रहा था !!

घर परिवार के नाटक चलते रहेंगे,  आप अपने काम पर ध्यान दो,

_ परिवार के सदस्यों को अपने नाकामी का कारण मत बनने दो..!!

जब आपके पास एक परिवार होता है, तो ज़िंदगी सिर्फ आपकी नहीं रह जाती.

_ आपके फ़ैसलों की गूंज उन ज़िंदगियों तक पहुँचती है, जो आप पर सबसे ज़्यादा भरोसा करती है.
_ आप अपने समय को लापरवाही से नहीं बिता सकते,
_ अपनी बातों को हल्के में नहीं ले सकते या अपने फ़ैसलों में खुदगर्ज़ नहीं हो सकते,
_ क्योंकि आपकी हर एक हरकत उन दिलों को प्रभावित करती है — जो आपको “अपना घर” मानते हैं.
_ माता-पिता या जीवनसाथी होना सिर्फ एक भूमिका नहीं है… ये एक ज़िम्मेदारी है.
_ आप एक सुरक्षित जगह हैं, एक सहारा हैं, एक मिसाल हैं.
_ जब ज़िंदगी मुश्किल हो जाए, तो आपके पास हार मानने की लग्ज़री नहीं होती.
_ आप अकेले नहीं जी सकते.. जब मासूम आँखें आपको देख रही हों — सीखने के लिए, समझने के लिए.
_ आप आधे मन से और पूरे बहानों के साथ परिवार नहीं पाल सकते.
_ इसलिए पूरा साथ दो, ज़मीन से जुड़े रहो..
_ अपनी शांति की रक्षा करो — पर कभी उन लोगों की कीमत पर नहीं,
जो सब कुछ छोड़कर सिर्फ आपके पास रहना चाहते हैं.
_ क्योंकि जब आपके पास एक परिवार होता है, तो आपकी विरासत आपकी कामयाबी से नहीं बनती…
_ बल्कि इस बात से बनती है कि आपने उन लोगों से कितना सच्चा और गहराई से प्यार किया, जिनसे आपने कभी न छोड़ने का वादा किया था.!!
यदि हम संयमित और संतुलित जीवन जीते हैं तो हमसे जुड़े लोगों पर, हमारे परिवार पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

_ इसके अवसर बहुत कम होते हैं कि हमसे किसी को दुख मिले..
_ जीवन सामान्य गति से शांतिपूर्वक चलता है.. लेकिन प्रायः ऐसा नहीं हो पाता.
_ परिवार में किसी एक की भी मनमर्ज़ी और मनमौजीपन सबके सुखों में आग लगा देता है.!!
– Manika Mohini
संयुक्त परिवार में रहकर खुश रहना अब गुजरे जमाने की बात हो गई है,

_ संयुक्त परिवार में रहना मतलब जो इंसान कमाता है उसे पूरा निचोड़ लेना, फिर जैसे ही वो कमाना बंद कर दे उसे अलग कर देना,
_ एक मेहनती इंसान अपनी जिंदगी का prime time संयुक्त परिवार को देकर आखिर में कुछ नहीं पाता है,
_ इसलिए बेहतर है अलग रहे और खुश रहे.
_ रिश्ते भी बचे रहेंगे और खुदकी मानसिक शांति.
नोट: joint family में दिक्कत इसलिए होती है, क्योंकि इसमें कमाने वाला एक होता है बाकी सब बैठ कर खाने वाले होते है,
_ सब कमाए तो कोई दिक्कत ना हो.. पर जब एक ही कमाए तो फिर उसे एक ना एक दिन दिक्कत होगी.
_ और देखा जाए तो अधिकतर परिवार में कमाने वाला इंसान अपने माता पिता का लाडला ना होकर नालायक इंसान अपने माता पिता का लाडला होता है..
अब इसकी वजह तो माता पिता ही जाने.!!
– कमांडो ध्रुव

Quotes by श्री श्री रवि शंकर

तुम जिसका भी सम्मान करते हो, वह तुमसे बड़ा हो जाता है| यदि तुम्हारे सभी सम्बन्ध सम्मान से युक्त हैं, तो तुम्हारी अपनी चेतना का विकास होता है| छोटी चीज़ें भी महत्त्वपूर्ण लगती हैं| हर छोटा प्राणी भी गौरवशाली लगता है| जब तुममें सारे विश्व के लिए सम्मान होता है, तो तुम ब्रह्माण्ड के साथ लय में होते हो.
कितनी घड़ियाँ, कितने घण्टे और कितने दिन हम भीतर से प्रसन्न रहे, उतने ही छण हम वास्तव में जीए हैं.
जीवन को एक रोमांचक खेल की तरह देखो और परिणाम की चिंता किए बिना खेलो.
मानव विकास के दो चरण हैं – कुछ होने से कुछ न होना, और कुछ न होने से सब कुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है.
यह पूरा विश्व एक पुस्तकालय है और इन सभी पुस्तकों का लेखक केवल एक है.
जीवन एक उपहार है और तुम उसे खोलने आए हो.
जिम्मेदारी दी नहीं जाती, ली जाती है.

 

Quotes by चाणक्य

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अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो, छह साल से पन्द्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो, सोलह साल से उन के साथ मित्रता करो, आपकी सन्तान ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है.
किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्थिति देख के उसके भविष्य का उपहास मत उड़ाओ, क्योंकि काल में इतनी शक्ति है कि वो एक मामूली से भी कोयले को धीरे- धीरे हीरे में बदल देती है.
पृथ्वी पर केवल तीन ही रत्न हैं – जल, अन्न, और मधुर वचन ! बुद्धिमान व्यक्ति इनकी समझ रखते हैं, पर मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों को ही रत्न समझते हैं.
मनुष्य के चेहरे पर जो भाव उसकी आँखों के द्वारा प्रकट होते हैं, वे उसके मन की अनुकृति होते हैं, उन्हें देवता भी नहीं छुपा सकते.
शिछा सबसे अच्छी मित्र है, शिछित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है. शिछा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौन्दर्य दोनों ही कमजोर हैं. 
जिस प्रकार घिस कर, काट कर, तपा कर और पीट कर चार प्रकार से सोने की परीछा की जाती है, वैसे ही पुरुष की परीछा भी चार प्रकार से होती है – त्याग, शील, गुण और कर्म से.
सुखी जीवन का सबसे बड़ा गुरुमन्त्र यही है कि हमें कभी भी अपनी राज की बातें किसी को नहीं बताना चाहिए,

जो लोग ऐसा करते हैं, उन्हें भयंकर कष्ट झेलने पड़ते हैं.

आवश्यक नहीं है कि हर कोई तुम्हारी शक्ति को पहचाने,

क्योंकि कुछ बातों को गुप्त रखना भी एक चतुराई है.

जिसने अन्याय पूर्वक धन इक्कठा किया है और अकड़ कर सदा सिर को उठाए रखा है. ऐसे लोगों से सदा दूर रहो. ऎसे लोग स्वयं पर भी बोझ होते हैं, इन्हें शान्ति कहीं नहीं मिलती.
जब तक आनंददायी वसंत ऋतु का आगमन नहीं हो जाता तब तक कोयल मौन रह कर अपना समय व्यतीत करती है. ऋतुराज के आते ही उसकी मधुर वाणी सुनाई देती है. बरसात में तो मेढकों का ही साम्राज्य रहता है अर्थात श्रेष्ठ मनुष्य उपयुक्त समय आने पर ही बोलते हैं.
जो जिसके मन में है, वह उससे दूर रह कर भी दूर नहीं है और जो जिसके मन में नहीं है, वह उसके समीप रह कर भी दूर है.
व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है.
किसी कार्य को कभी कल पर नहीं छोड़ना चाहिए, अगले पल क्या हो जाए, कौन जानता है.
कठोर वाणी अग्निदाह { आग में जलने } से भी अधिक तीव्रता से दुःख पहुँचाती है.
व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है, ऊँचे स्थान पर बैठने से ऊँचा नहीं हो जाता है.
जब तक तुम दौड़ने का साहस नहीं जुटाओगे, तुम्हारे लिए प्रतिस्पर्धा में जीतना सदा असम्भव बना रहेगा.
जब रिश्तों में झूठ बोलने कि आवश्यकता पड़े, तब समझ लेना कि अब रिश्ता समाप्ति की ओर है.
दूसरों की गलतियों से सीखो, अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी.
अधिक सीधा- साधा होना भी अच्छा नहीं होता है, सीधे वृछ काट लिए जाते हैं और टेढ़े वृछ खड़े रह जाते हैं.
अपार धन राशि कुबेर भी यदि आमदनी से अधिक खर्च करे तो कंगाल हो जाता है.
जो व्यक्ति शक्ति न होते हुए भी मन से हार नहीं मानता है, उसको दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती.
जैसे ही भय आपके करीब आए, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिए.
अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति कभी नछत्रों की प्रतीछा नहीं करता है.
जो व्यक्ति अपने कर्म को नहीं पहचानता है, वह आँखें होते हुए भी अन्धे के समान है.
जो व्यक्ति अपनी गलतियों के लिए स्वयं से लड़ता है, उसे कोई भी हरा नहीं सकता.
इस संसार में सबसे शक्तिशाली हमारा मस्तिष्क है, किन्तु हम अधिकांश फैसले अपने दिल से लेते हैं.
बात को व्यक्त मत होने दीजिए कि आप ने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाए रखिए और उस काम को करने के लिए दृढ रहिए.
अच्छी योजना बनाना बुद्धिमानी का काम है, पर उस को ठीक से पूरा करना धैर्य और परिश्रम का.
यदि मार्ग कांटों भरा हो और आप नगें पांव हो तो रास्ता बदल लेना चाहिए.
उपाय करने से भी कार्य पूर्ण हो जाते हैं. कोई भी कार्य कठिन नहीं रहता है.
दोस्ती उन से बढ़ाइए, जिनका नजरिया दूरगामी हो.
जहाँ सुख से रहा जा सके, वही स्थान श्रेस्ठ है.
नाना प्रकार के उपायों को जानने वाला प्राणी कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी बुद्धि से सहज बना लिया करता है.

Quotes by जवाहरलाल नेहरू

Nehru-Ji

संकट और गतिरोध जब वे होते हैं तो कम से कम उनका एक फायदा होता है कि वे हमें सोचने पर मजबूर करते हैं.
समय वर्षों के बीतने से नहीं मापा जाता बल्कि किसी ने क्या किया, क्या महसूस किया और क्या हासिल किया, इससे मापा जाता है.
अच्छी नैतिक स्थिति में होना कम से कम उतना ही अभ्यास मांगता है जितना कि अच्छी शारीरिक स्थिति में होना.
स्वयं कर्म, जब तक मुझे यह भरोसा होता है कि यह सही कर्म है, मुझे संतुष्टि देता है.
श्रेष्ठतम मार्ग खोजने की प्रतीछा के बजाय, हम गलत रास्ते से बचते रहें और बेहतर रास्ते को अपनाते रहें.
संकट के समय हर छोटी चीज मायने रखती है.
अज्ञानता बदलाव से हमेशा डरती है.

 

Quotes by बेंजामिन फ्रेंक्लिन

वह आदमी जो कुछ न कुछ करता रहता है बहुत ही गलतियाँ कर देता है, लेकिन वह सब से बड़ी गलती कभी नहीं करता — निठल्ले बैठे रहने अथवा कुछ भी न करने की.
धन से आज तक किसी को ख़ुशी नहीं मिली और न ही मिलेगी, जितना अधिक व्यक्ति के पास धन होता है, वह उससे कहीं अधिक चाहता है. धन रिक्त स्थान को भरने के बजाय शून्यता को पैदा करता है.
एक उत्कृष्ट बात जो शेर से सीखी जा सकती है, वो ये है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और जोरदार प्रयास के साथ करें.
जीवन में दुखद बात यह है कि हम बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं, लेकिन समझदार देर से होते हैं.
जिसके पास धैर्य है वह जो चाहे वो पा सकता है.

Quotes by नेल्सन मंडेला

मैंने ये जाना है कि डर का ना होना साहस नहीं है, बल्कि डर पर विजय पाना साहस है.
बहादुर वह नहीं है जो भयभीत नहीं होता, बल्कि वह है जो इस भय को परास्त करता है.
शिछा सबसे सशक्त हथियार है, जिससे दुनिया को बदला जा सकता है.
एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा से विजयी जोड़ी रहे हैं.

Quotes by डेनिस वैटली

असफ़लता हमारी शिछक होनी चाहिए, हमारा अन्त करने वाली नहीं. असफ़लता देरी है, हार नहीं. यह एक अस्थायी चक्कर है, गतिरोध नहीं. – Denis Waitly 
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