Collection of Thought 047

Nobody can go back in time. You can live your life only one way — Forward. Put the past behind and use your energy to fight the problems facing you now. Stop fretting about the moles and mountains of the dead past.

कोई भी बीते हुए समय पर वापस नहीं जा सकता, _ आप अपना जीवन केवल एक ही तरीके से जी सकते हैं – आगे __ अतीत को पीछे छोड़ दें और अपनी ऊर्जा का उपयोग उन समस्याओं से लड़ने के लिए करें जिनका आप अभी सामना कर रहे हैं, _ मृत अतीत के तिलों और पहाड़ों के बारे में चिंता करना बंद करें.

 

 

 

 

 

 

 

 


 

 

 

 


 

 

सुविचार – हैरान करती हैं कुछ बातें.. – 180

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*हैरान करती हैं कुछ बातें,,,

किसी का व्यवहार
किसी का हद से ज्यादा बोलना…
तो किसी की चुप्पी,,,,
किसी का हमसे मतलब होने तक बात करना,,,
किसी का हमसे बिन वजह दुश्मनी निभाना,,,
किसी का हमारी खुशियों को देख,,,
मन ही मन दुखी होना,,,
तो किसी का मासूमियत से भरा चेहरा,,,
जिसके पीछे छिपा होता है एक काला चेहरा,,,
किसी का बिन वजह हमारी परवाह करना,,,
तो किसी का जान बुझकर Ignore करना,,,,
कहीं अजनबियों का अपनापन,,,
तो कहीं अपनों का परायापन,,,
हैरान करती हैं कुछ बातें,,,हरदम*

सुविचार – मदद, सहायता, उपकार, इमदाद, हेल्प, Help – 179

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हम किसी की मदद उसके ख्वाबों को पूरा करने में तो कर सकते हैं..

_ लेकिन जब कोई इंसान ख़्वाब ही न देखे तो हम उसकी आंखों में ख़्वाब नहीं भर सकते.
_ हस्सास इंसान दूसरों की दुःख तकलीफ़ मेहसूस भी करता और परेशान भी होता है.
_ हम उनकी मदद भी करते हैं, उन्हें सुनते भी हैं, अपनी हदों से आगे जाकर उसकी मदद भी कर सकते हैं लेकिन हम किसी और के हिस्से की कोशिश नहीं कर सकते.
_ हम किसी का हौसला तो बढ़ा सकते हैं, हम रास्ता भी दिखा सकते हैं..
_ लेकिन हम किसी और के हिस्से का क़दम नहीं बढ़ा सकते हैं.
_ कुछ लोग हमारे मूंह पर तमाचा मार जाते हैं कि तुम नहीं समझोगे,
_ हां हम वाकई नहीं समझते.. क्योंकि हम चाहते हैं कि आप अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ें.
_ रास्ता दिखाया जा सकता है लेकिन रास्ते पर उसी को चलना होता है जिसकी लड़ाई होती है.
_ सच तो ये है कि मुझे अब किसी भी चीज़ का कोई मलाल नहीं है कि मैंने किसी ऐसे अपने जानने वाले इंसान की मदद नहीं की.. जिसकी मदद की जानी चाहिए थी.
_ दरअसल ज्यादातर लोगों को मदद नहीं चाहिए होती है बस एक कंधा चाहिए होता है जहां वो बस सुना पाएं और रोते रहें.
_ मैंने ऐसे तमाम रोने वाले लोगों से दूरी इख्तियार कर ली है.
_ अब मैं अगर उन्हें सुनती हूं तो उतना जितने में मेरे ज़हन पर कोई असर न हो, और सलाह देनी तो बिलकुल ही बंद कर दी है.!!
– Nida Rahman
लगातार पच्चीस साल से अगर कोई अपनी परेशानियां बता रहा है, दुखड़े रो रहा है तो समझाए कि समाधान ढूंढे.

_ जितना हो सके तो आप उनकी मदद कर दें.
_ इसके बाद भी अगर परेशानी बनी हुई है, और आपको सुना सुना कर आपके दिमाग को लगातार निगेटिव खुराक दिया जा रहा है तो नमस्ते कर लीजिए.. नहीं तो बीमार पड़ जायेंगे.
_ क्यों कि जीवन में और भी लोग हैं उनकी परेशानियां भी सुननी है और कोशिश करनी है, उनकी जिंदगी भी पटरी पर आ जाए.
_ एक दो लोगों की लाइफ में पच्चीस साल में नहीं कुछ हो पाया तो अब उम्र निकल रही है, उनकी भी और आपकी भी निकल रही है।
_ मुझे तो लगता है ऐसे लोग परेशान कम होते हैं, अपनी परेशानी को एक माला बना लिए हैं और लगातार जप रहें हैं.
_ तो एक डाक्टर की तरह सोचिए, परेशानियां सुनिए, जितना हो सलाह सुझाव दीजिए और भूल जाइए.
_ लगातार सुनते सुनते मोह जाल में मत फंसिए, नहीं तो फालतू का टेंशन होगा और बीपी बढ़ेगा..- अपना काम प्रभावित होगा.
_ सुनिए सबकी लेकिन डाक्टर की तरह.
_ कभी कभी समय निकालिए मस्ती के लिए भी..
– Shalini Shrinet
“मदद कीजिए, लेकिन किसी और की समस्या को अपना जीवन मत बना लीजिए”
दूसरों का उपकार करना स्वयं का ही उपकार करना है.

_ इसलिए जितना हो सके उपकार करे.
_ बदले में क्या मिलेगा.. इसकी चिंता बिल्कुल न करे.
_ उस व्यक्ति से भले न मिले, भले वो चोट ही दे,
_ पर इतना मिलेगा.. जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.!!
मदद मिलने पर ही राहत नहीं होती..

_ मदद का वादा भी बहुत बड़ी राहत देता है.!!

सुविचार – इनकार – स्वीकार – अस्वीकार – नकार – Denied – 178

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कोई भी काम शुरू करने से पहले उसके परिणाम के बारे में जरुर सोच ले और उसी के अनुसार क्रिया करे.

_ ख़ुशी और शांति पाने के लिये अपने दिमाग में हमेशा किये जा रहे काम के परिणाम को रखिये.
_ किसी चीज के लिए इनकार करना भी _ हमें दुःख की भावनाओं को कम करने में मदद करता है ; इनकार में एक अनुग्रह है.
_ यह प्रकृति का तरीका है कि हम उतना ही अंदर आने दें” – जितना हम संभाल सकें.”
जिस चीज से जितना दूर भागोगे.. वो उसी गति से आपके पीछे लग जाएगी,

_ उसे स्वीकार लोगे तो उसका प्रभाव आपके वर्तमान जीवन पर इतना नहीं पड़ेगा..
_ जितना कि उसको अस्वीकार करने से पड़ता है.!!

सुविचार – माफ़ – माफ – माफ़ी – माफ़ी – 177

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लोगों को माफ़ करना तो एक बार को संभव है, लेकिन उन्हें अपनी ज़िंदगी में वही पहले वाला स्थान दे पाना.. लगभग नामुमकिन.!!
किसी की जिंदगी बर्बाद करके माफ़ी तो मांग सकते हो,

_ मगर बर्बाद की हुई जिंदगी को दोबारा संवार नहीं सकते..

आप कुछ लोगों को अपनी ज़िंदगी में दोबारा आने का मौक़ा दिए बग़ैर भी माफ़ कर सकते हो.
माफ़ी से कुछ नहीं होता, कुछ बातें दिल को लग जाती हैं, जो कभी भुलाई नहीं जाती..
माफ़ी सिर्फ उन्हें मिलनी चाहिए, जो जाने अनजाने में भूल कर बैठते है.. ना की उन्हें.. जो सोच समझकर चालाकी करते हैं.
हर बार इंसानियत के नाम पर माफ कर देना सही नहीं होता..

_ कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहाँ हमारी चुप्पी और नरमी को लोग हमारी कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसे में खुद की हिफाज़त के लिए थोड़ा सख्त होना भी जरूरी हो जाता है..
_ ताकि सामने वाला समझ सके कि हर बार सहना हमारी मजबूरी नहीं, हमारी मर्यादा है.!!
हम नहीं जानते कि कौन सा व्यक्ति इस समय किस परिस्थिति से गुजर रहा है,

_ लेकिन हम बिना सोचे-समझे ही दूसरे व्यक्ति के दर्द को जाने बिना ही उसके बारे में यह राय बनाना शुरू कर देता है कि फलां व्यक्ति ऐसा है या वैसा है.
_ न जाने ऐसे कितने लोगों की हमारे मन में छवि बुरी बनी हुई है, कि फलाना व्यक्ति ऐसा है वैसा है..!!
_ यदि किसी ने कुछ गलत किया हो आपके जीवन में, आपको दुख, कष्ट या हानि पहुंचाई हो तो उसे माफ कर दीजिए.
_ जीवन छोटा है, हमें लोगों को माफ़ कर देना चाहिए, चाहे उन्होंने हमारे साथ कितना भी गलत किया हो,
_ अपने भीतर किसी व्यक्ति के लिए कड़वाहट रखकर, इस जीवन को सहजता और शांति से नहीं जिया जा सकता, इसलिए माफ़ करें !!

सुविचार 176

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किसी की करुणा व पीड़ा देख कर मोम की तरह पिघलने वाला ह्रदय तो रखो, परन्तु विपत्ति की आँच आने पर कष्ट और प्रतिकूलताओं के थपेड़े खाने की स्थिति में चट्टान की तरह दृढ व ठोस बने रहो.

 

सुविचार – क्या बदला है दुनिया में ? – 175

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सभी कहते हैं दुनिया बदल गई है, क्या बदला है दुनिया में ?

_ मिरची ने अपना तीखापन नहीं बदला,
_ आम ने अपनी मिठास नहीं बदली,
_ पत्तों ने अपना हरा रंग नहीं बदला है,
_ बदली है तो इंसान ने अपनी इंसानियत और इल्ज़ाम देता है पूरी दुनिया को..!!
दुनिया बड़ी गोल-गोल हो गई है.. – समझ नहीं आता कि ‘क्या ही किया जाए’.!!
जीवन को आसान बनाने के लिये हमने नये नये साधन अपना लिये हैं.

_ इसमें कोई शक नहीं की इनसे जीवन आसान हो चला है.
_ दूसरी तरफ देखें तो हमने इन संसाधनों की व्यवस्था में अपने आप को बहुत व्यस्त भी कर लिया है.
_ हम इनको ठीक ठाक रखने के लिये हर वक्त कहीं न कहीं लगे रहते हैं.
_ इनमें ज्यादातर चीजें इलेक्ट्रॉनिक या इलेक्ट्रिकल होने के कारण सब को सही रख पाना बहुत दुष्कर है.
_ टीवी, फ्रीज, पंखे, कूलर, एसी, कार, स्कूटर, मिक्सर, मोबाइल, लैपटॉप इत्यादि.
_ जहां भी हाथ रखें वहीं कुछ दर्द होता है.
_ ठीक है कि आजादी के पहले हमारे पास या उन्नीसवीं बीसवीं सदी तक दुनिया बहुत धीमी थी लेकिन क्या जीवन में इतनी मारामारी थी ?
_ पिछली सदी के साठ के दशक में हमारे घरों में पंखा या रेडियो या सायकिल तक नहीं था.
_ क्या हम जी नहीं रहे थे ?
_ विकास की आंधी ने हमें जिस कोने में धकेल दिया है या हम उसके भी आगे जाने को तैयार बैठे हैं क्या यही एक लक्ष्य रह गया है मानव का.
_ क्या रोटी कपड़ा और घर भर से संतुष्ट रहकर शून्य आवश्यकता की तरफ नहीं बढ़ा जा सकता है ?
– Tejbeer Singh Sadher

सुविचार – “हमारे ज़माने में” – 174

आ_अब_लौट_चलें..

_ जीवन के लगभग 40 साल बीतने पर नई पीढ़ी आ जाती है और हम “हमारे ज़माने में” कहने की सुविधा प्राप्त कर लेते हैं.
_ तो ! हमारे ज़माने में ऐसी गुंडागर्दी न थी.
_ प्यार मुहब्बत थे, दिल मिलने, न मिलने की बातें थीं.. लेकिन भई, मार-काट डालने की खबरें हमने नहीं सुनी थीं.
_ हमारे ज़माने में हम निर्द्वंद जीते थे, कहीं घूम-फिर लें, हमें कतई डर नहीं लगता था.
_ आजकल घर के अंदर घुसे रहते हैं.. तो भी डर लगता है.
_ अपने लिए नहीं तो बच्चों के लिए ही डर लगता रहता है.
_ इससे सिद्ध होता है कि ‘हमारा ज़माना अच्छा था’
– Manika Mohini
नई पीढ़ी के तौर-तरीके सन्न भी करते हैं और सुन्न भी.!!
– Manika Mohini

सुविचार 173

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पाखण्ड, घमण्ड, अभिमान, क्रोध, कठोर वाणी और अज्ञान,

यह सब आसुरी संपदा को प्राप्त हुए पुरुष के लछन हैं.

 

सुविचार – दया – दयालु – करुणा – कृपालु – मर्सी – Mercy – 172

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उन्हें वही ऊर्जा वापस मत दो, गुस्से का जवाब गुस्से से मत दो.

_ इसके बजाय, नर्म तरीके से जवाब दो.
_ दया को चुनो, भले ही वे इसके लायक न हों.
_ यही असली ताकत है.
__ ज्यादातर लोग उम्मीद करते हैं कि आप वही प्रतिक्रिया देंगे.. जैसा वे आपसे व्यवहार करते हैं,
_ लेकिन जब आप शांत रहते हैं, दयालु रहते हैं, और उनके बर्ताव से अपने दिल को बदलने नहीं देते, तो यही वह समय होता है जब आप दूसरों से अलग दिखते हैं.
_ आप दयालु होने के लिए कमजोर नहीं होते, बल्कि आप इस हद तक मजबूत होते हैं कि उनका बुरा दिन आपका बुरा दिन न बने.
_ तो वही व्यक्ति बनिए जो सॉफ्ट और दयालु रहे, चाहे दूसरे कैसे भी व्यवहार करें.
_ यही वह पलटाव है.. जिसे वे कभी नहीं देखेंगे..!!
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