सुविचार – प्रेम – प्यार – मोह – 128

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ज्यों ज्यों प्रेम खोता गया, जीवन समृद्ध होता गया..!!- टैगोर
अगर कोई सिर्फ इसलिए साथ है कि दूसरा उसे संभाले या अर्थ दे, तो प्रेम धीरे-धीरे बोझ बन जाता है.

_ असली स्वतंत्रता तब है जब इंसान अपने भीतर ही जड़ें और पंख दोनों विकसित कर ले.

  • Rahul Kumar Jha
    अगर आप किसी के प्रेम में हैं, और केवल प्रेम में ही डूबे हुए हैं, तो आप अपने अस्तित्व को समाप्त करने की तैयारी कर रहे हैं.
    – Rahul Kumar Jha
“जहाँ प्रेम हो, वहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं, और आँखें बोल पड़ती हैं”
प्रेम की कोई समय-सीमा नहीं होती, वो बस होता है बिना कारण, बिना शर्त, और बिना किसी वक़्त के बंधन के.!!
अपरिपक्व प्रेम जहाँ हमें बाँधे रखता है, _ वहीँ परिपक्व प्रेम मुक्त कर देता है.
जो प्रेम करते हैं, वो रास्ता देते हैं जीने का‚ जीतने का‚ और जाने का भी…!

_ साथ होने का मतलब एक ही जगह होना नहीं, बल्कि एक-दूसरे की दुनिया में बने रहना है.!

प्रेम है और दंभ नहीं है तो जिंदगी बहुत खूबसूरत है.!!
‘प्रेम वह है’ जिसमें यह चाहत होती है कि जिससे हम प्रेम करते हैं,

_ वो हमेशा खुश रहे, कैसे भी हो ‘बस खुश रहे’

जो व्यक्ति बाहरी दुनिया को छोड़कर अंदर प्रवेश कर लेता है ..उसे खुद से प्रेम हो जाता है.!!
जो खुद से प्रेम करना सीख जाता.. वह कभी किसी के प्रेम का मोहताज नही होता है.
उन लोगों के करीब रहिए.. जो आपके लिए बहुत कुछ चाहते हैं, “यही प्रेम है.!!”
अगर प्रेम है तो सम्मान की अलग से जरूरत नहीं पड़ती है.. ‘प्रेम सबसे बड़ा सम्मान है’
असल प्रेम आपको कुछ और दे या न दे,

_ लेकिन आपके जीवन को खिलने में मदद ज़रूर करता है.!!

लोग प्यार शब्द आसानी से कह तो देते हैं,

_ पर फिर उसे संभाल नहीं पाते..!!

प्रेम का दीपक ख़ुद के भीतर हमेशा जलाएं रखो,

_ इसे कभी भी दूसरों की वजह से बुझने मत दो..!!

मोहभंग की स्थिति तब सुखदायक होती है, जब मोह जागने के साथ ही भंग हो जाए

_ लम्बी अवधि के बाद मोहभंग हो तो भंग होने के बाद भी लम्बी अवधि तक मोह रहता है.
“प्रेम बनाम मोह”

_बढ़ती उम्र के साथ मुझे प्रेम और मोह में एक बारीक सा अंतर समझ में आया है,
_ जब आप मोह को अपने से दूर कर देते हैं यानि किसी के मोह में नहीं होते, तब आप सबसे ज्यादा सुखी होते हैं.
_ लेकिन यह सिर्फ मज़बूरी में होता है.. क्योंकि मोह को आप जानबूझ कर अपने से दूर नहीं कर सकते, मोह में बड़ा आकर्षण होता है.
_ मोह वह है कि जब हम अपनी किसी पसंदीदा चीज को अपने पास रखना चाहते हैं और किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते ..फिर चाहे दम घुट जाए,
_ जबकि प्रेम वह है कि जब हम अपनी पसंदीदा किसी चीज को मुक्त रखते हैं या जो जगह उसके लिए बेहतर है ..उस जगह जाने से नहीं रोकते,
_ ये जानते हुए भी की इस तरह हम उसे दोबारा नहीं देख पायेंगे.
_ दरअसल यही तो प्रेम है ..
_ जहां हमारी खुशी से ज्यादा उस व्यक्ति/पशु/पक्षी की खुशी महत्वपूर्व है..
_ जिससे हम प्रेम करते हैं.
आज प्रेम एक अनुभव से अधिक एक विचार और प्रदर्शन बन गया है.

_ प्रेम कोई “सिद्धांत” नहीं, बल्कि एक जीवित अनुभूति है — जो तब खिलती है जब हम दूसरों की परिभाषाओं से मुक्त होकर उसे स्वयं जीने का साहस करते हैं.
“क्या मैंने प्रेम को अपने अनुभव से समझा है — या अब तक दूसरों की कही परिभाषाओं में ही उलझा रहा हूँ ?”
“ प्रेम करने की और देने की चीज है.”

_ प्रेम देने के बजाय.. जब हम प्रेम मांगने लगते हैं, तो समस्या शुरू हो जाती है.
_ अपेक्षाएं बढ़ने लगती हैं..
_ प्रेम का आधार बदलते ही इसका स्वरूप बिगड़ने लगता है..!!
दिल हल्का हो जाता है, जब मन से ऐसे लोग उतर जाते हैं, जो हमारे प्यार के कभी लायक ही नहीं थे ;

” प्यार में हम उन लोगों को भी ग्लोरीफाय कर लेते हैं, जो हमारे समय और ऊर्जा के कभी काबिल ही नहीं थे.!!”
_ सर्वप्रथम स्वयं का ध्यान रखें, स्वयं के हित का ध्यान न रखकर, स्वयं के साथ अन्याय कर, दूसरे के जीवन को संवारनें के प्रयास में स्वयं को खो देना मूर्खता के अतिरिक्त कुछ नहीं है.
_ पहले स्वयं को संवारो, जब खुद का जीवन सँवर जाये तो दूसरों की सहायता करो उनका जीवन संवारनें में.
_ लेकिन ध्यान रहे अपनें संवरे जीवन को बिगाड़ कर नहीं.!!
किसी और के लिए खुद को बदलना कोई बदलाव न होकर महज़ एक समझौता है.

_ जो आपसे प्रेम करता है.. वह आपको वैसे ही ख़ुशी से स्वीकार करेगा “जैसे आप हैं”
_ ये अलग बात है कि उसके प्रेम की वजह से आप खुद ही खुद को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दें.!!
जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो आप उनसे हर समय, बिल्कुल उसी तरह, पल-पल प्यार नहीं कर सकते, यह असंभव है ;

_और फिर भी हममें से अधिकांश लोग प्यार का दिखावा करने कि मांग करते हैं.!!
क्या हम किसी को वास्तव में प्रेम करते हैं, या हम उस ‘छवि’ से प्रेम करते हैं.. जो हमने उनके बारे में अपने मन में बना रखी है ?

_ यदि वे उस छवि के विपरीत आचरण करें, तो क्या हमारा प्रेम शेष रहेगा ?
हर इंसान प्रेम चाहता है… लेकिन हर इंसान प्रेम संभाल नहीं पाता.

_क्योंकि जब सच में कोई गहरा रिश्ता मिलता है, तो डर जाते हैं-
_ क्योंकि depth responsibility भी लाती है.
प्रेम का भी कोई मापक होना चाहिए, क्योंकि आवश्यकता से अधिक किसी से प्रेम करने से उसके लिए आपका प्रेम बोझ हो जाता है और आप मजाक के पात्र.!!
लोग एकतरफा प्यार में पागल हो रहे हैं.. अच्छी बात है,

_ पर प्यार के लिए गिड़गिड़ाना, चरणों में लेट जाना, साथ रहने के लिए हाथ जोड़ना,
_ प्यार में आत्मसमर्पण जरूर है चाहे एकतरफा ही क्यों न हो..
_ पर इसके लिए आत्मसम्मान को त्याग देना, ये किस तरह का प्यार है ?
_ जहां दूसरा व्यक्ति कोई सम्मान नहीं दे रहा…!!
“हर व्यक्ति दया, ममता और प्रेम का पात्र नहीं होता.
_ अपनी बहुमूल्य ऊर्जा और भावनाएं केवल योग्य लोगों के लिए ही संचित रखें.”
आप प्रेम करने के लिए किसी को मजबूर नहीं कर सकते..

_ प्रेम एक पवित्र भाव है.. जो यदि किसी को आपके प्रति होगा तो वह स्वत: ही हो जाएगा..!!
_ आप तमाम स्टाइल मारके बढ़िया कपड़े पहन के अपने आप को धनी दिखा के किसी का मात्र कुछ समय के लिए अटेंशन ले सकतें हैं.. प्रेम नहीं.!!
हम सब यहाँ जो प्यार, स्नेह और भावनाएँ दिखाते हैं, असल ज़िंदगी में वो कहीं हैं ही नहीं..

हम बस दूसरों को दिखाना चाहते हैं कि हम ही प्यार के रचयिता हैं, खैर…
सब ढकोसलेबाज़ी है, शब्दों का दिखावा और भावनाओं का बाज़ार भर.!!
ये प्रेम भी बड़ा अजीब है, जिसे चाहिए, उसे मिलता नहीं, और जिसे मिलता है, वो उसे चाहता नहीं..

_ कभी वक्त गलत होता है, कभी इंसान, कभी हम पास होकर भी दूर रह जाते हैं, और कभी दूर रहकर भी किसी के भीतर बस जाते हैं.
_ शायद प्रेम की यही विडंबना है…
_ यह मिलन में नहीं, अभाव में अपना अर्थ पाता है.!!
कोई यकीन करे या न करे, पर कुछ लोग आज भी वही किताबों वाला प्रेम कर सकते हैं..

_ जहाँ इंतज़ार में भी सुकून होता है, और एक तसवीर से ही पूरा दिन रोशन हो जाता है. _ जहाँ बातों से ज़्यादा ख़ामोशियाँ समझी जाती हैं, और वादे काग़ज़ पर नहीं, दिल में लिखे जाते हैं.
_ इस आधुनिक दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं.. जो आज भी पुराने पन्नों की तरह सच्चा, सादा और हमेशा के लिए प्रेम करना जानते हैं.!!
जो प्रेम को जानेगा.. जानता है..वो मौन रहता है…
_ अगर दिखावा है तो प्रेम के नाम से भ्रमित है वो.. उतना ही अंदर से खोखला है वो ..!!
“हर प्रेम का अंत मिलन नहीं होता, लेकिन हर सच्चा प्रेम हमें कुछ सिखाकर ज़रूर जाता है”
जो परंपरागत रूप से एक-दूसरे से प्यार करते हैं, वे लड़ते रहते हैं;

_तो एक-दूसरे से कहें, “कृपया – कम प्यार, और नार्मल व्यवहार !!

आपके जीवन में जो लोग वास्तव में आपसे प्रेम करते हैं,

_ वे आपके बदलाव के लिए कभी परेशान नहीं होंगे, बल्कि वे आपको प्रेरित करेंगे.!!

जिन्हें आप प्रेम करते हैं उन्हें उड़ने के लिए पंख दें,

_ वापस आने के लिए जड़ें और रहने के लिए कारण दें.!!

प्रेम में पकड़ नहीं होती, बस एक गहरी चाह होती है..
_ जो चाहकर भी किसी पर थोपी नहीं जा सकती.!!
‘ज़िंदगी एक नदी है’ – जिसमें हर क्षण नया पानी आता है और बह जाता है ;

_ जो बह जाता है फिर लौट कर नहीं आता, “वही प्रेम है”

“प्रेम पात्र बदलते रहते हैं..

_पर प्रेम यदि सच्चा हो तो धीरे-धीरे स्वभाव बन जाता है”
चाहे प्रेम का कोई आर्थिक मूल्य ना हो..

_ लेकिन, यह परम सुख जरूर दे जाया करता है.
_ तभी तो सब कुछ त्याग कर लोग इसी के इर्द गिर्द भटका करते हैं..
_ वरना उन्हें ये क्यों समझ नही आता कि प्रेम जीवन हो सकता है, पर जीविका का साधन नही.!
प्रेम अपनी अनुपस्थिति में सबसे व्यापक होता है.

_ जब व्यक्ति सामने मौजूद होता है, तो प्रेम सीमाओं में सिमट जाता है: शब्द, नज़रें और मुलाक़ात की औपचारिकता..
_ पर जैसे ही वह चला जाता है, प्रेम रूपों से मुक्त होकर हवा में, रातों में, यादों में, दर्द में फैल जाता है.!!
इस संसार की हर चीज़ की तरह ‘प्रेम’ के भी दो पहलू होते हैं..

_ मिलना और बिछड़ना.. पर अंत में यह हमारे बस में नहीं होता कि हमें कौन-सा हिस्सा मिलेगा..
_ यह तो भाग्यरेखा ही तय करती है कि कोई इंसान हमारी जिंदगी में ठहरने आया है या सिर्फ याद बनकर रह जाने के लिए.!!
आप किसी का ध्यान रखते हैं… पर क्या वो ध्यान आप मोह में आ कर रखते हैं या प्रेम में…

_ मोह भी प्रेम की तरह ही लगता है.. पर यह प्रेम का धोखा है.!!
जिसे आप प्यार करें, ज़रूरी नहीं कि उस पर विश्वास भी करें.

_ लेकिन जिस पर आपको विश्वास है, उसे आप प्यार अवश्य करेंगे.
कल्पनाएं त्याग कर वास्तविकता की ओर जाना ही..असल जीवन प्रेम है और राह भी..!!

_ मन पर भ्रम का ताला लग जाता है.. जो वास्तविकता से दूर ले जाता.!!
‘प्रेम संयोगवश नहीं होता’ _ यह एक ऐसा निर्णय है.. जो हम स्पष्टता, प्रमाण और परिचितता के आधार पर किसी व्यक्ति के प्रति लेते हैं.!!
यह सचमुच दुःखद है कि आजकल के लोग प्रेम को सही अर्थों में नहीं समझ पा रहे हैं.!!
जो इंसान न वास्तविक है और न ही सहज.. उससे कोई कैसे प्रेम कर सकता है ?
प्रेम के सिवा और भी ज़िम्मेदारियाँ हैं.. जिनके लिए हमें ज़िंदा रहना है.!!
_ प्रेम से भी जरूरी बहुत काम है.. – प्रेम सबकुछ नहीं है जिंदगी के लिए..!!
प्रेम केवल किसी को पा लेने का नाम नहीं है, उसे जाने देना भी प्रेम ही होता है.!!
प्रेम में एकाधिकार की भावना प्रेम को खत्म करती है.
“प्रेम झूठा नहीं होता, प्रेमी झूठे होते हैं”
हमेशा प्रेम की भाषा बोलिए, इसे बहरे भी सुन सकते हैं और गुंगे भी समझ सकते हैं.
‘सर्वप्रथम हमें खुद से प्रेम करना चाहिए’
_ अगर हम शुरुआत खुद से प्यार करके पूरी दुनिया से प्यार करें तो तब हम बेहतर हो सकते हैं.!!
टेम्पररी [temporary] चीजों को आनंद बोल कर आनंद की बेज़्ज़ती मत करें.
_जो प्रेम नहीं है, उसे प्रेम बोलकर प्रेम की बेज़्ज़ती न करें.
खूबसूरत होने से प्रेम नहीं होता,
_ जिस से भी प्रेम होता है वही खूबसूरत और सुंदर दिखने लगता है..!!
प्रेम का दुश्मन भी सारा संसार, प्रेम का भूखा भी सारा संसार ❓
_ प्रेम नहीं तो जीवन में कुछ भी नहीं ?
यदि प्रेम आप को बेहतर, सुन्दर और सरल नहीं कर रहा है तो..

_वो चाहे जो हो “प्रेम नहीं है”

प्रेम कभी ज़िन्दगी नहीं बर्बाद करता,

_प्रेम के नाम पर ढोंग से बने रिश्ते_ ज़िन्दगी बर्बाद करते हैं..!!

इतना कुछ है दुनिया में देखने- समझने को,

_पर लोग ज़रा से प्यार में डूब कर जीवन बिता देते हैं..!!

प्रेम एक एहसास से कहीं ज्यादा गहरा होता है.

_इसका अर्थ है कि हम उस व्यक्ति के साथ हमेशा सही और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें.

सच्चे प्रेम का अर्थ है, जिससे आप प्रेम करें, उसे उसके ही रूप में अपनाना होता है.

_न कि उसे अपनी सोच के सांचे में ढालें..!!

प्रेम का आनंद हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है,

_ जो उसकी परिस्थितियों और अतीत पर भी निर्भर करता है.!!

किसी भी नाम के धागे खोल दिए मैंने..

_ बंधनों में प्रेम मुझे अच्छा नहीं लगता..

अब न कोई उम्मीद है, और न ही इसकी सम्भावना कि ‘मुझे प्रेम है’

_ अगर मैं कह भी रहा हूँ, तो बस समझ लो.. मैं नयापन तलाश रहा हूँ.. ‘प्रेम नहीं’
_ क्योंकि प्रेम तो अब बीते मौसमों की तरह मेरी ज़िन्दगी से गुज़र चुका है, और उसकी खुशबू तक हवा में नहीं बची.!!
जिससे प्रेम होता है न और जो मन को भा जाता है वो हर हाल में खूबसूरत लगता है, प्रेम को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए, प्रेम कोई कारोबार नहीं जिसका ढिंढोरा बाजार में पीटा जाए,

_ प्रेम तो शांत लहरों सा मन में उठता हुआ एक खूबसूरत सा सुकून है किसी के लिए…!
प्रेम करना मनुष्य की प्रवृत्ति है, जो लोग कहते हैं की किसी चले जाने के बाद उनका प्रेम से विश्वास उठ गया, वे बस दुनिया को भ्रम में रखते हैं.

_ क्योंकि अंतर्मन में प्रेम का भाव कभी समाप्त नहीं होता..
_ हर कोई कहीं न कहीं चाहता है कि कोई आए, सीने से लगाए और कहे अब तुम्हारा विश्वास दोबारा नहीं टूटेगा.!!
प्रेम जिससे भी होता है, संयोग से होता है.

_ वह हमारा चुनाव नहीं होता.
_ प्रेम जब टूटता है, तो संयोग से नहीं टूटता, हम चाहते हैं तोड़ना, तभी टूटता है.
_ प्रेम का स्थायी रहना न चुनाव होता है, न संयोग.
_ इसे निभाने के लिए निरन्तर प्रयास करते रहना होता है.!!
कुछ प्रेम इतने खूबसूरत होते हैं कि टूट कर चूर-चूर हो जाने के बाद भी हर टूटे टुकड़े में खूबसूरती बची रह जाती है.!!
हम सब प्रेम-प्यार के भूखे होते हैं, हमें कहीं से भी थोड़ा सा प्यार और अटेंशन मिल जाता है तो.. हम बौखला जाते हैं,

_ उस थोड़े से प्यार के बदले में इतना ज्यादा प्यार, अटेंशन और रिस्पेक्ट दे देते हैं कि.. सामने वाले को हजम नहीं हो पाता है,
_ और हमारी बर्बादी का रास्ता यही से प्रारंभ हो जाता है.!!!
_ दुनिया का प्रेम तब तक ही है, जब तक आपका सितारा बुलंद है.!!
मनुष्य की बड़ी भूल यही है कि.. जो उसके वश में नहीं, उसे वश में करने लगता है.

_ हम भूल जाते हैं.. इंसान को प्रभावित किया जा सकता है, नियंत्रित नहीं.
_ डर से बना रिश्ता, रिश्ता नहीं होता – वह एक कैद होती है.
_ यही बीमारी प्रेम तक पहुँच जाती है,
जहाँ अपनापन नियंत्रण में बदलने लगता है.
_ जब प्रेम में आज़ादी नहीं रहती, तो प्रेम धीरे-धीरे साँस लेना भूल जाता है.!!
कभी कभी जिंदगी की राह में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिन्हें देखते ही लगता है ये तो अपने जैसा है, थोड़ा सा इसके साथ जी लेते हैं.

_ फिर हम उसे स्पेशल समझने लग जाते हैं.
_ धीरे धीरे वो जीवन मे ऐसे उतर जाता है कि.. उसकी हर बात अच्छी लगने लगती है.
_ उसे देखना, उसे सुनना अच्छा लगता है, मगर ज्यों ही हम उसे भाव देने लगते हैं.. वो महंगा होता जाता है.
_ एक समय ऐसा भी आता है कि.. हम अपने स्वाभिमान को दांव पर लगा कर उससे मनुहार करते हैं,, उसके सामने गिड़गिडाते हैं, रिक्वेस्ट करते हैं.
_ मगर उसके भाव बढ़ते ही जाते हैं.
_ फिर दिल पर पत्थर रखकर.. हमें उससे दूर होना पड़ता है.
_ उसे जिंदगी से निकालने के लिए उसकी कमियों पर गौर करना पड़ता है,
_ ज्यों जी चाहत का नशा उतरता है.. हमे ये अहसास होता है कि..
_ जिसके लिए इतना पागल थे.. वो तो हमारे लायक ही नहीं था.
_ फिर खुद से नफरत होने लगती है कि.. ऐसे इंसान को हमने दिल में जगह ही क्यों दी थी.!!
क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार, जो शुरू में इतना खूबसूरत लगता है,

आखिर में इतना दुख क्यों देता है ?
_ शायद यह प्यार नहीं है.. जो दुख देता है – बल्कि वह सब कुछ है.. जो हम उससे जोड़ते हैं.
_ उम्मीदें, वादे, हमेशा के लिए जीने का सपना..
_ सच्चा प्यार सरल होता है, पल में जीवंत होता है – जैसे कोई खुशबू जो आप अपने साथ रखते हैं.
_ यह दूसरे व्यक्ति से यह माँग नहीं करता कि वह आपके साथ रहे, एक खास तरीके से व्यवहार करे, या आपको पूरा करे.
_ लेकिन हम प्यार से शुरू करते हैं और धीरे-धीरे निर्भरता, अपेक्षाओं में ढल जाते हैं..
_ और जब कल्पना का भविष्य टूटता है, तो यह विश्वासघात जैसा लगता है.
_ इसलिए ये समझें कि क्या सच है और क्या भ्रम.!!
इंसान किसी की चाहत बस उस सुंदरता को खत्म और उसको मिट्टी करने के लिए ही करता है, जो दूर रह कर भाती है.

_ बस उस पर कब्जा हो जाए मेरी हो जाए, बस उस में ऐसा कुछ न बचे जिससे वो भा रही थी.
_ इंसानी मन ऐसा ही बना हुआ है.
_ इंसान मन को समझना ही नहीं चाहता.
_ निराश दुखी रह लेगा – मगर दौड़ बाहर की तरफ ही रखेगा.!!
– Dhara Pravaah
प्रेम करने का कोई तरीका नहीं है.

_ आप इसे खरीद नहीं सकते, न ही इसे किसी और चीज़ के बदले में दे सकते हैं.
_ प्रेम को सचमुच महसूस किया जाना चाहिए और जिया जाना चाहिए.
_ यह तब अस्तित्व में आता है जब सुख और दुःख, निराशा की भावना, दूसरे में पूर्णता की माँग का भाव, जब ‘मैं’ और ‘मेरे सुख’ का यह भाव समाप्त हो जाता है..
_ और यह सबसे कठिन और कष्टसाध्य चीजों में से एक है.
_ हम प्रेम को लेकर भावुक हो सकते हैं, लेकिन वह प्रेम नहीं है.
_ किसी एक से प्रेम करने में, आप पूरी मानवता से प्रेम करते हैं.
_ लेकिन अगर आप किसी एक से प्रेम करना नहीं जानते – अपने बच्चे से, अपने पति या पत्नी से, अपने पड़ोसी से – तो सभी से प्रेम करने का विचार बहुत कम अर्थ रखता है.
_ आखिरकार, एक ही संपूर्ण है.
– Dhara Pravaah
“पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही”

_ प्यार के लिए हर दिल इतना तरसा-भटका रहता है कि ..दुआ माँगी जाती है कि..
..चाहे कोई पल भर के लिए ही प्यार कर ले, बस कर ले, झूठा ही कर ले, बस कर ले.
_ लेकिन आज तक कोई पल भर के प्यार से संतुष्ट हुआ है ?
_ और झूठे प्यार से ? नहीं ना ? तो खुद को भुलावे में क्यों रखना ?
_ साफ़ कह दो कि ..यहाँ पल-दो-पल के लिए झूठा प्यार जताने कोई न आए,
_ आना हो तो सारी उम्र के लिए सच्चा प्यार करने आए ..वरना न आए..!!
जब हम प्रेम में होते हैं, तो उसके मन की हल्की-सी टीस भी हमें अपनी लगने लगती है.

_ उसका दुख, उसकी बेचैनी, उसका हर दर्द हमारे भीतर कहीं गहरे उतर जाता है.
_ तब हम चाहे शब्दों से हों, साथ से हों या किसी छोटे-से हावभाव से..
_ हर सम्भव कोशिश करते हैं कि उसकी पीड़ा कम हो जाए..
_ क्योंकि प्रेम में दिल सिर्फ़ महसूस नहीं करता, वो साझेदारी भी करता है..
_ उसके दर्द की, उसकी थकान की, उसकी हर बेचैनी की.!!
प्रेम या सम्मान का भाव उन्हीं के प्रति रखिये जो आपके मन की भावनाओं को समझते हैं, अन्यथा खुद को दुःख के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिलेगा..!!
आजकल प्यार तो सब करते हैं, – मगर कदर और इज्जत ?
_वो तो बड़े नसीब वालों को ही मिलती है.!!
जैसे जरूरी नहीं है कि हम जिसेसे प्रेम करे शादी भी उसी से हो,

_ उसी तरह जरूरी नहीं कि जिससे शादी हो उनसे प्रेम भी हो,
_ प्रेम उस स्तर का व्यक्तिगत और संवदेनशील विषय है कि एक उम्र के बाद हम अपने आप से इसके जिक्र से बचते है.!!
हम जिससे प्रेम करते हैं, उसका सब कुछ हमारा हो जाता है.

_ सिर्फ उसका प्रेम ही नहीं, उसका गुस्सा, उसकी नाराज़गी और उसकी चुप्पी भी..
_ ये सब उसी रिश्ते का हिस्सा होते हैं और सच यही है कि प्रेम को वही संभाल सकता है..
_ जो इन सबको समझने और अपनाने की क्षमता रखता हो.!!
प्रेम आपको धूल से उठाकर वापस उसी में मिला सकता है.!!

_हर किसी में सबसे बुरा दिखावा करने और उसे जीवन भर जीने का साहस नहीं होता.!!!

“प्रेम एक रोज़ हमें ख़ुद सिखा देता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सुख प्रेम नहीं है.!!”
फूल देना प्रेम नहीं, _फूलों की तरह रखना प्रेम है..!!
प्रेम कहीं नहीं है, सब तरफ सिर्फ आकर्षण है.!!
प्रेम अनजाने में उदासियों को दिया गया एक आमंत्रण मात्र ही तो है…!

_ जिसे सच्चा प्रेम कहते हैं, उससे बड़ा झूठ कोई नहीं.!!

किसी को बेइंतहा प्यार करने के धुन में खुद के वजूद को खोते जाना..

_ दुनिया की सबसे दर्दनाक घटना है.!!
दो अक्लमंद व्यक्तियों के मध्य प्रेम संभव नहीं है.

_ प्रेम हुआ तो समझो, दोनों में से एक मूर्ख है.!!
प्रेम आपको खुश तो कर सकता है, लेकिन जीवन जीने में मदद नहीं कर सकता.

_ आपको अपने प्रेम के साथ.. जीने के लिए भी कुछ करना होगा.!!
सच्चे प्रेम में अहंकार नहीं होता, पर सच्चा प्रेम खुद को मिटाने का नाम भी नहीं है.!!
जहां भी मिले झूठा प्यार, वहीं से लेते जाओ, सच्चे का कोई भरोसा नहीं..!!
प्रेम जिंदगी का वो खूबसूरत पल है,

_ जिसकी कीमत हम हर पल आंसुओं से चुकाते हैं.!!

एक तरफ़ा प्रेम से दो तरफा दोस्ती बेहतर है !!
“प्रेम की बातें छोड़ें..” और एक दूसरे की परवाह करें.!!

_ आमतौर पर प्रेम सिर्फ बेमतलब की माथापच्ची ही हुआ करता है,
_ अब मेरी बातों से सहमत होना न होना दूसरी बात है..
_ मैं केवल यही चाहता हूं आप प्रेम की तरफ ध्यान, स्वयं अपने विचार किए हुए निष्कर्षो पर पहुंचे,
_ कथित विशेषज्ञों के बहकावे मे न आओ कि “प्रेम कोई खूबसूरत चीज है….!”
मैं प्रेम में चेहरों पर यक़ीन नहीं करता.

_ पहली नज़र में दिल लग जाना मेरे लिए कोई चमत्कार नहीं.
_ मैं प्रेम करता हूँ पहली बार बहस में, पहली बार जब कोई अपनी बात में डटकर खड़ा होता है.
_ पहली बार जब किसी के साथ ठहाका लगता है—वो हँसी जो वर्षों के दर्द के बाद आती है.
_ मैं प्रेम करता हूँ उस ख़ामोशी से, जो असहज नहीं लगती.
_ उस पहली बातचीत से, जिसमें आत्मा खुद को खोल देती है, जहाँ कोई मुखौटा नहीं होता.
_ प्रेम वहाँ होता है, जहाँ कोई साथ देता है मुश्किल वक़्त में, जहाँ दर्द बाँटा जाता है और ख़ुशियाँ दुगनी होती हैं.!!
बाहरी सृष्टि में मैंने दुःख को देखा,

_ जब खुद के अंदर गया तो मैं देख पा रहा हूं..
_ यहां खुशियां ही खुशियां हैं.. यहां प्रेम ही प्रेम है.. यहां परमात्मा ही प्रेम है.!!
प्यार करना यह नहीं है कि किसी और के जीवन का बोझ अपनी पीठ पर ढोना;

_ यह एक साथ चलना है, स्वतंत्र, हल्का..हो कर.!
_ प्यार ऐसा नहीं होना चाहिए.. जो ज़रूरत से ज्यादा दर्द दे;
_ प्यार, जब सच्चा होता है, तो निर्माण करता है, विनाश नहीं.!!
प्रेम को सिर्फ दिल से निभाना काफी नहीं होता,

_ किस्मत और हालात का साथ भी ज़रूरी होता है,
_ जब वक़्त साथ नहीं देता तो सबसे सच्चा रिश्ता भी टूट जाता है…!
कुछ लोग प्यार और स्नेह तभी दिखाते हैं, जब हम उन्हें आमने-सामने देखते हैं.

_ उस समय उनका प्यार का इज़हार हमें ऐसा महसूस कराता है.. जैसे कोई और हमसे उतना प्यार नहीं करता.. जितना वे करते हैं.
_ उन्हें तो यह भी नहीं पता कि हम पहले कितने लोगों का ऐसा तमाशा देख चुके हैं.!!
प्रेम में यथा संभव दूरी को बचाए रखिए और जब दूरी अवश्यंभावी हो जाए तो मिलने की गुंजाइश रखिए.
_ मिलन की आस दूरी के आंसू पोंछ लेती है.!!
प्रेम में अक्सर हम वो बातें भी सुनते हैं जो कही नहीं जातीं.

_ असली ख़ुशी का कारण यही होता है.!!

वो जो बहुत कुछ कर सकते थे,

_ प्रेम कर लेते हैं, और कुछ नहीं कर पाते !!

प्रेम का वास्तविक आनंद तो तब है,

_ जब कोई आपसे दूर रहे कभी कोई आभास ना हो, मिलने की कभी कोई गुंजाइश ना हो फिर भी आप हर समय सिर्फ उसे ही सोचते रहे.!!
अधिकार जताना प्रेम नहीं हो सकता, यह भय का परिणाम है.!!
प्रेम में ठहराव दूरियों की वजह से नहीं होता..

_ झूठ की वजह से आ जाता है..!!

एक दूसरे की ज़रूरत महसूस होने को ही प्यार कहते हैं.

_ एक दूसरे की ज़रूरत महसूस न हो तो समझो, प्यार खत्म.!!

कुछ लोगों से हम प्रेम करते हैं ..कुछ लोग हमसे प्रेम करते हैं..

_ अब होना तो ये चाहिए कि हम उनका ख़्याल ज्यादा रखें ..जो हमसे प्रेम करते हैं.
_ मगर ऐसा कभी हो नहीं पाता…
_ हम हमेशा उनका ख़्याल ज्यादा रखते हैं या रखने की कोशिश करते हैं ..जिनसे हम प्रेम करते हैं..
_ बस यही छोटी सी बात भविष्य में दुःख का कारण बनती है.
प्रेम या सम्मान का भाव उन्हीं के प्रति रखिए, जो भावनाओं को समझते हैं,

_ अन्यथा खुद को दुःख के अलावा कुछ नहीं मिलेगा.!
जब तक कोई पुरुष या स्त्री खुद से प्रेम करना नहीं सीखता, तब तक यह सब ऐसे ही चलता रहेगा.

_ दुनियादारी भी ढंग से ना चल पा रहे हैं, क्योंकि हम अंदर से खोखले हैं.
जब आप किसी से प्रेम करने लगने लगना तो ..मत बताना उसे कि ..आपको उससे प्रेम है,

_ प्रेम कोई बताकर करने वाली चीज है ही नही ..या बता भी दिए तो ..इसका जिक्र बार बार मत करना,
_ क्योंकि एक ही अल्फाज़ की पुनरावृति से उसकी महत्ता खोने की सम्भावना है.
_ प्रेम में अपेक्षा मत करना कि मैं आज इतना प्रेम दे रहा, मुझे भी इतना या इससे अधिक मिलना चाहिए.
_ जिस दिन आप ये सोचने लग गए कि ..मुझे क्यों नही मिल पा रहा वैसा ही प्रेम ..जैसा मैं कर रहा,
_ प्रेम का अस्तित्व खत्म हो चुका होगा..!!
यदि कोई पुरुष सोचता है कि.. वह अपनी धन-दौलत के बल पर किसी स्त्री को बाँध कर रख सकता है.. तो वह ग़लत सोचता है.

_ यदि कोई स्त्री सोचती है कि.. वह अपने रूप-सौंदर्य के बल पर किसी पुरुष को बाँध कर रख सकती है.. तो वह ग़लत सोचती है.
_ न दौलत किसी को बाँध सकती है, न रूप-सौंदर्य.
_ बांध सकता है तो केवल आपसी care, सद्भाव और निःस्वार्थ अपनत्व का भाव.!!
_ परवाह करना ऐसा प्रेम है, जो रिश्तों को जिन्दा रखता है.
प्यार शब्द बहुत पुराना और अवास्तविक और अर्थहीन है,

_ नहीं पता कि लोग इसे करते क्यों हैं,
_ शायद इसलिए कि प्यार के पक्ष में इतनी सारी झूठी बातें कही गई हैं कि उन्हें बार-बार सुन कर लगता है कि..
_ ये सब बातें अनमोल हैं, सच्ची और गंभीर हैं.
_ हाँ, ठीक है !… , .इसमें कही सारे बातें नितांत मूर्खतापूर्ण है…!
प्रेम एक मामूली चीज़ है और इसके मामूली बने रहने में ही भलाई है.

_ जब-जब इसे विशिष्ट समझा जाएगा या विशिष्ट बताकर परोसा जाएगा, तब-तब इसमें सामान्यतः
: निर्मम पलायन, संवेदनहीन भटकाव, घोर आत्मनिष्ठता और क्रूर सुखजीविता स्वयं को सही ठहराने के लिए इसमें आश्रय खोज रहे होंगे.!!
प्रेम अक्सर किसी अभाव को दूर करने, किसी ख़ालीपन को भरने या किन्हीं भग्नाशाओं की क्षतिपूर्ति के प्रयास में उपजता है.

_ इंसान की ज़रूरतें वक़्त-वक़्त पर पूरी होती रहें, वह साधन-संपन्न बना रहे तो उसके लिए प्रेम कोई प्रबल भावना नहीं है.
_ प्रेम सामान्यतः हारे हुए का हथियार है.!!
प्रेम कभी समझदार नहीं होता..

_ यह हमेशा किसी खास किस्म के पागलपन से भरा होता है..
_ समझदार इंसान यह कर ही नहीं सकता..
_ यह हमेशा बचपने और पागलपन से भरा होता है…
_ जैसे आँखे मूँद कर विश्वास करना..
_ मिलने वाले का इंतजार करना..
_ या फिर अपना सुख छोड़.. किसी दूसरे के दुःख को अपनाने की इच्छा करना.
_ या किसी की सारे दुख सारी पीड़ा छीन लेना…
_ अपने हिस्से का सारा सुख खुशीयां उसके हिस्से देने के लिए ..ऊपर वाले तक को मजबूर करना..
_ उसके जीवन के बदले.. अपना जीवन दांव पर लगाने के लिए दबाव बनाना..
_ यह सिर्फ दिल कर सकता है.. दिमाग नहीं..
_ इसलिए ये सब कभी कोई समझदार इंसान नहीं कर सकता..!!
खुद को छोड़ कर किसी से प्रेम की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए,

_ जब आप किसी से प्रेम की अपेक्षा रखते हो और सामने वाला आपसे प्रेम नहीं करता है तो आत्म सम्मान को क्षति पहुँचती है,
_ और इंसान सोचने लगता है कि क्या वो इतना भी काबिल नहीं कि कोई उससे प्रेम करे,
_ वो खुद को इस नजर से देखता है जैसे उसी का कोई कसूर हो
_ और जब कोई इंसान खुद को प्रेम न मिलने का कसूरबार खुद को ही समझ बैठता है तो उससे अधिक नीरस व्यक्ति कोई नहीं रह जाता संसार मे…!
भीतर जब प्रेम फूटता है तो आबो-हवा ख़ुशगवार हो जाती है.

_ मन हिलोरें लेने लगता है.
_ संसार में सबसे बड़ी घटना है, ‘प्रेम’
_ जब प्रेम होता है, संसार रमता दिखने लगता है.
_ प्रेम एक भाव है.
_हर व्यक्ति को इससे गुजरना होता है.
_ लेकिन बहुत कम होते हैं, जो प्रेम को जी पाते हैं..!!
हम जीवन की राह पर हैं..

_ मैंने सबसे ज्यादा खोया है औरों के हितों के लिए.
_ इसलिए सच्चे प्रियजन को पाने के लिए जीवन में कम से कम एक बार खतरे में पड़ना जरूरी है.
_ तभी आप खतरे में पड़े नकाबपोश लोगों को पहचान सकते हैं.
_ सच्चा प्यार करने वाला चाहे अपनी जान खतरे में डाल दे..
_ लेकिन आपका साथ कभी नहीं छोड़ता.!!
जो हमारे अपने होते हैं और जो हमसे प्रेम करते हैं, वो हमारी मजबूरियों और ज़रूरतों को समझते भी हैं..

_ और उस हिसाब से हमारी सहूलियत का ध्यान रखते हुए ख़ुद को एडजस्ट करके हमारी हरसंभव मदद करते हैं..!!
प्रेम में एक और चीज़ जो ज़रूरी है, वो ये कि अपने साथी को उसके ख़ुद के लिए पँख फैलाने देना और ख़ुद की परवाज़ को समझने देना ;
_ ये होगा तभी प्रेम में साथ होने पर लोग दूसरे को बेहतर होने में मदद कर पाते हैं.!!
इंसान प्रेम में खुद को समर्पित करता है, शायद यह सोचकर कि अब अकेलापन नहीं रहेगा..
_ लेकिन प्रेम जब टूटता है या बदलता है, तो जो अकेलापन वापस लौटता है, वो पहले से कहीं अधिक गहरा और अधिक चुभने वाला होता है…!
सचमुच, कितना आसान था, उसे प्रेम करना, जो हम से प्रेम करता था..

_ पर जिसे हम प्रेम न कर सके !!

आप अपनी ऊर्जा प्रेम के प्रसार पर लगाइये,

_ नफ़रत तो वैसे ही भरपूर है इस दुनिया में !!

जिसने मनचाहे ख़ज़ाने खो दिये हों,,
_उसे पांच-पच्चीस का मोह नहीं होता.!!
हम किसी से प्रेम नहीं करते, खुद से प्रेम करते हैं तो..

_ उस प्रेम को देने की इच्छा होती है, लेने वाले सोचते हैं कि वह हमारे अधीन हो गया..!!

दिल की बातों में आ ही जाता है,, प्रेम नादान है समझ न पाता है !!
“सच्चे प्यार का मतलब है कि जो मेरा है वह तुम्हारा है”
“True love means what’s mine is yours.”
“हर तरह का प्यार प्यार है, लेकिन उनमें आत्म-प्रेम सर्वोच्च है”
“Every kind of love is love, but self-love is supreme among them.”
“आप जानते हैं कि आप किससे प्यार करते हैं लेकिन आप यह नहीं जान सकते कि कौन आपसे प्यार करता है.
“You know who you love but you can’t know who loves you.”
प्रेम और आकर्षण में फर्क है, दुनिया में ज्यादातर प्रेम केवल आकर्षण है..!!
“जो फूलदान से प्यार करता है, वह अंदर से भी प्यार करता है”
“One who loves the vase, loves also what is inside.”
“अगर पूर्णिमा तुमसे प्यार करती है, तो सितारों की चिंता क्यों करें ?”
“If the full moon loves you, why worry about the stars ?”
“प्यार में सच्चाई होनी चाहिए और सच्चाई में प्यार”
“Truth should be in love and love in truth.”
“प्रेमियों का झगड़ा प्रेम का नवीनीकरण है”
“The quarrel of lovers is the renewal of love.”
प्रेम में एक स्थिति यह भी आती है जब एक के कहे बिना दूसरा सुन लेता है.
There comes a situation in love when one listens without the other saying anything.
कोई प्यार जताए तो उसे पाने के योग्य बनिए, न कि उसका नाजायज फायदा उठाइए.
(पहले योग्य बनिए, फिर चाहत रखिए)
प्रेम शब्द का उच्चारण करते समय देखिएगा कि आप यह महज कर्मकांड की तरह जप रहे या इसे सचमुच जी रहे हैं..!!
किसी से कितना भी प्रेम करो, कितना भी सच्चा करो पर उसके नाम का टैटू मत बनवाना, शरीर के किसी हिस्से पर..

_ प्रेम खत्म हो सकता है, सच्चा प्रेम भी खत्म हो सकता है..
..पर नामुराद टैटू नहीं मिट सकता, मरने पर भी..
हमारे चारों ओर अनगिनत प्रेम- प्यार बिखरा हुआ है;
हम बेवजह ही नफरत में उलझे हुए हैं;
जो मिला है उसका दामन तो थामे रखो;
क्यों गैरों में उलझे हुए हैं…
प्यार और जिम्मेदारी में बहुत फर्क होता है,

_ हर जिम्मेदारी में प्यार नहीं होता, लेकिन सभी प्यार में बिना पूछे जिम्मेदारी आ जाती है.
_ प्यार लोगों को प्रियजनों के बारे में शिक्षित करता है.
_ वह शिक्षा जो उसने पहले नहीं सीखी है.
_ जो चीज़ उसे नापसंद थी ..वो अपने चाहने वाले के लिए लाइक करना सीख जाता है.
_ प्यार अपने प्रियजनों की खुशी के लिए खुद को तैयार करना है..
_ और जिम्मेदारी है परिवार के धर्म का पालन करना..!!
आम तौर पर हम मिलन को प्रेम समझ बैठते हैं.

_ जबकि सच क्या है ?
_ जहां पाने की शर्त है, वहां प्रेम नहीं..
_ प्रेम की पहली शर्त ही है परावर्तित कर देना, छोड़ देना..
_ सबसे बड़ा उदाहरण ‘राधा’ है..
_ “सारा संसार राधा को प्रेम की देवी मानता है”
_ राधा ने अपने प्रेम में सब छोड़ दिया..
_ प्रेमी को भी..
_ हम क्या गलती करते हैं ?
_प्रेम कहानी में मिलन तलाशते हैं.
_यही कारण है कि हम पूरी ज़िंदगी प्रेम की तलाश करते हैं, प्रेम को पा नहीं पाते.
_ और जिसे हम प्रेम कहते हैं, उसकी मियाद पांच मिनट होती है.
_ हम प्रेम के उपभोक्ता बन जाते हैं.
_हम समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं, वो हमारा गुलाम है.
_ हम प्रेम को जंजीरों में जकड़ लेना चाहते हैं.
_ समझ ही नहीं पाते कि ..छोड़ेंगे तभी तो प्रेम नज़र आएगा.
“जब कोई आपको खास और बेहतर महसूस कराने के लिए अपना सब कुछ दे रहा है, तो उसकी सराहना करें.

_ हर कोई आपके लिए ऐसा नहीं करेगा.
_ हर कोई आपको प्यार महसूस कराने के लिए अपनी सीमा और उससे आगे नहीं जाएगा.
_ प्रयास दुर्लभ हैं, इसलिए इसके खत्म होने से पहले इसकी सराहना करें,
_ क्योंकि कोई व्यक्ति चाहे आपकी कितनी भी परवाह क्यों न करे,
_ अगर उसके निरंतर प्रयासों की उचित तरीके से सराहना नहीं की जाती है,
_ तो यह उसे धीरे-धीरे आपसे दूर कर देगा.
_ इसलिए उन प्रयासों की सराहना करें और उन्हें महत्व दें,
_ इससे पहले कि आप बहुत सारे पछतावे और दुखों से घिर जाएं.”
यदि आप किसी के प्रति प्रेम महसूस नहीं करते हैं तो उसकी भावनाओं से न खेलें,

सच कहें और उसे जाने दें, अन्यथा आप उसे मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति बना देंगे.
if you don’t feel love for someone then don’t play with their emotions, say truly and let them go, otherwise you will make him or her mentally ill person.
हम अक्सर दूसरों के लिए जीने लगते हैं.

_ परिवार, दोस्त, सहकर्मी – हर किसी की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश में हम खुद को कहीं पीछे छोड़ देते हैं.
_ हमारे दिन की शुरुआत किसी और की मांगों से होती है, और रात किसी की उम्मीदों को पूरा करते हुए बीत जाती है.
_ और धीरे-धीरे, बिना हमें महसूस कराए, हम भीतर से खाली होने लगते हैं.
_ खालीपन सिर्फ एक भाव नहीं होता, वो धीरे-धीरे हमारे चेहरे पर उतर आता है, हमारी मुस्कान में झलकने लगता है.
_ हम थकते नहीं हैं, बल्कि सूखने लगते हैं – उस नदी की तरह जो दूसरों को सींचते-सींचते खुद बंजर हो जाए.
— पर क्या आपने कभी सोचा है —
_ अगर एक दीपक खुद बुझ जाए, तो वह किसी और के जीवन में रोशनी कैसे करेगा ?
_ अगर हमारे अंदर ही स्नेह, ऊर्जा और प्रेम का स्रोत न बचे, तो हम दूसरों को क्या दे पाएंगे ?
_ खुद की देखभाल करना स्वार्थ नहीं है, यह आत्म-सम्मान है.
_ यह स्वीकार करना है कि मैं भी उतना ही महत्वपूर्ण हूँ जितना कोई और..
_ कि मेरी थकान भी मायने रखती है, मेरी भावनाएँ भी ध्यान चाहती हैं, और मेरी आत्मा को भी प्यार की ज़रूरत है.
_ हम अपने प्रियजनों के लिए सब कुछ करना चाहते हैं — उनकी मदद करना, उन्हें मुस्कुराता देखना..
_ लेकिन सच यही है कि जब तक हम खुद को नहीं संवारते, तब तक वो सच्ची ऊर्जा, वो गहराई, वो स्थिरता हम दूसरों को नहीं दे सकते.
_ जब हम भीतर से भरे होते हैं — आत्मविश्वास, स्नेह और संतुलन से — तभी हमारे रिश्ते भी फलते-फूलते हैं.
_ इसलिए ज़रूरी है कि हम रोज़ थोड़ी देर खुद के साथ बिताएं.
_ वो चुप्पी में बैठकर आत्मा से संवाद करना हो सकता है, कोई किताब पढ़ना, खुलकर हँसना, एक लंबी साँस लेना, या बस बिना अपराधबोध के खुद के लिए कुछ अच्छा करना.
_ अपने आप को थामना, खुद को समझना और खुद से प्रेम करना — यही आत्म-देखभाल है.
_ क्योंकि अंत में, जब हम खुद से जुड़े होते हैं, तब ही हम सच्चे अर्थों में दूसरों से भी जुड़ सकते हैं.
_ और यही जीवन की सबसे सुंदर बात है — जब हम भीतर से भरे होते हैं, तब ही हमारे हाथों से बहकर दूसरों तक प्रेम पहुँचता है.
– Rahul Jha

सुविचार – रोटी – Bread – 127

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कभी कहा जाता था, “मनुष्य केवल रोटी के सहारे जीवित नहीं रह सकता, रोटी चाहिए सिर्फ जीने के लिए, ना कि हम जी रहे हैं रोटी के लिए..

_ “हमारी और भी भूखें हैं” लेकिन आजकल महँगाई और पैसे की कमी को देखते हुए यह कथन बदल कर यूँ हो गया है,
_ “ऐसा कोई मनुष्य नहीं हो सकता जो रोटी के बिना जी सके.
_ पहले पेट तो भरे, बाद में और कुछ सूझेगा”
_ देखते-देखते रुपए का अवमूल्यन कुछ ऐसा हुआ कि रोटी अहम् मुद्दा बन कर रह गई.!!
“रोज की कोई रोटी नहीं देगा..
_अपनी ही मेहनत काम आएगी”

सुविचार – आंसू – आँसू – रोना – 126

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#अगर आप रोना भूल गए हैं,🥕🥕🥕🌷💁 तो शायद आप जीना भूल गए, 🥕🥕

☺️आंसू अगर सच्चे हैं ,,🥕🥕🥕🥕🥕🥕🫂🥰 गहराई से आ रहे हैं,🥕🥕🥕

💁 तो आप को सुंदर कर जाएंगे..🥕

दुःख में स्वयं की एक उंगली आंसू पोंछती है, और सुख में दसों उंगलियां ताली बजाती है ;

_जब स्वयं का शरीर ही ऐसा करता है तो दुनिया से क्या गिला – शिकवा करना…

हम उनके लिए उतना नहीं रोते जो मर जाते हैं.

_ हम उनके लिए रोते हैं, जो हमें जिंदा मार जाते हैं..!!

उनके लिए क्या रोना, जो किसी और के लिए हंस रहे हों..!!
जो अपने आंसू खुद पोंछ सकता है ; उसे दुनिया में किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं.!!
खुद को इतना लाचार मत बनाओ कि कोई भी आकर आपकी आंखों में आंसू दे जाए.!!
अपने आंसू खुद पोंछना सीख लो,

_ क्योंकि दुनिया के कंधे हमदर्दी कम और मजाक ज्यादा देते हैं.!!

परिपक्व होने का अर्थ ये नहीं कि.. आप हृदय के घावों की असहनीय पीड़ा में रोना छोड़ दो..!!
बनावटी लोग पहले आपके आँसू पोंछेंगे, फिर उन्हीं आँसुओं की कहानी दुनिया को मज़े लेकर सुनाएंगे.. इसलिए संभल कर रहो.!!
जो इंसान अपने आंसू खुद पोंछना सीख जाता है,
_ वह भीतर से बेहद मजबूत हो जाता है.!!
सोचा ही नहीं कि जीवन में, ऐसे भी फ़साने होंगे.

_ रोना भी ज़रूरी होगा, आंसू भी छुपाने होंगे.
किसी भी आँसू में इतनी ताकत नहीं होती कि इंसान के भीतर का सारा ग़म बहा दे.
_ ग़मों के बोझ से ये कभी-कभी खुद सूख जाते हैं.!!
हम रोते हैं इसलिए नहीं कि हम कमजोर हैं, बल्कि इसलिए कि हमें समझ ही नहीं आता कि इसके आगे क्या किया जाए..

_ आँसू दरअसल उस विकल्पहीनता से उपजी विवशता है, जहाँ इंसान खुद से भी संवाद नहीं कर पाता, जहाँ सब कुछ होते हुए भी वो खुद को सबसे अकेला पाता है.!!!
हम जीतकर रो क्यों देते हैं.

_ वह आंखे,जो हमेशा लक्ष्य पर टिकी होती हैं..
_ जब लक्ष्य को प्राप्त करती हैं, तो छलक पड़ती हैं..
_ इन आंसुओं में गूंथे उसके संघर्ष रहते हैं,
_ उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए क्या क्या नही किया होगा..
_ ज़िन्दगी का सारा संघर्ष, इन आँसुओं के साथ बह उठता है..
_ जब कोई जीतकर रोता है, तब उसकी जीत में छिपी सच्चाई सामने आकर, उसकी गवाही देती है..
_ ये जीत.. उसके ख़ुद के सपनो की जीत है..
_ वह सपना, जो उसने ख़ुद देखा था..
_ जिस काम को पूरा करने में आपकी आंखों में आँसू आ जाए, वह काम सफ़लता है..
_ बहते आंसू तो काम एक सा करते हैं..
_ आपको थोड़ा हल्का कर देते हैं…!!
कुछ न किया तो इतना मिला, चलो अब कुछ किया जाए !

_ मूर्च्छा में जीते आए वर्षों, चलो अब होशपूर्वक जिया जाए !
_ जमाने ने इतना कष्ट न दिया, जितना हमने दुख निर्मित किया,
_ हँसने के मौके हजार थे, पर हमने रोना ही स्वीकार किया,
_ चलो अब आसूओं को रख गिरवी, कुछ मुस्कान उधार ले लें !
_ कलियाँ चूमें अम्बर घूमें, अजनबियों से प्यार ले लें.!!

सुविचार – आँख- आँखें – आँखों – नजर – नज़र – नज़रें – 125

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आँख बंद करके,  किसी की बात मानने से बेहतर है कि मुँह खोल कर बोलो और कान खोल कर समझो..
रख लो आईने हज़ार तसल्ली के लिए,, पर सच के लिए आंखें मिलानी पड़ेंगी..
प्रार्थना करते समय हम अपनी आँखें मूँद लेते हैं.

_ सपने देखते समय भी हमारी आँखें मुंदी होती हैं.
_गहन प्रेम के क्षणों में भी हमारी आँखें मुंद जाती हैं.
_ जानते हैं, क्यों?
_ क्योंकि बहुत सुंदर चीज़ें आँखों से नहीं, दिल से देखी और महसूस की जाती हैं.!!…
– Manika Mohini
जरूरतों को देखने के लिए अपनी आँखों का उपयोग करें, और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी प्रतिभा का उपयोग करें.

Use your eyes to see the needs, and use your talents to meet them.

“दो दिखने वाली आँखों के अलावा भी _ कुदरत ने इंसान को कई आँखें दी है,

_ जरूरत इतनी ही है कि उनको खुला रखा जाये”

बहुत कुछ है जीवन में .. जो नजर आता है.. जो नज़र नहीं आता इसका मतलब ये नहीं कि वो नहीं है ..

_ उदाहरण के तौर पर हवा … और ऐसे ही हजार चीज होगी जिसे रब ने बनाया तो है जो हमें दिखाई नहीं देती.!!
सबके पास समान आंखें हैं, लेकिन सब के पास समान दृष्टिकोण नहीं..

_ बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है.!!

जीवन में जब सब अच्छा ही अच्छा होता है तो हम अंधे बन जाते हैं,

_ उस वक़्त क्या ज़्यादा ज़रूरी है, वो साफ़- साफ़ नज़र नहीं आता.!!

कुछ ऐसा ख़ुद को बना लिया मैंने..

_ आँखों के आंसुओं को होठो की हँसी में छुपा लिया..!!

खाता मुंह है, झुकती आंखें हैं.

_ जिन आखों में झुकने की शर्मिंदगी हो, उन्हें खाने से डरना चाहिए.!!

ख़याल रखो कि तुम किस तरफ देख रहे हो.

_ क्योंकि जिनकी आँखें भटकती हैं, उनका मन भी भटकता है.!!

जिसने दूसरों की आँखें नम की हैं, उसके हिस्से में भी कभी ना कभी वही दर्द आता है, यही कर्म का फ़ैसला होता है.!!
तर्क किए बिना किसी बात को आँखें मूंद कर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है.
जीवन उसका ही सुधरेगा, जो आँख बंद होने से पहले आँख खोल लेगा.
आपकी आँखें जो देखती हैं, वह हरदम सच नहीं हो सकता.
फेर लेते हैं सब के सब नज़रें, आप जब काम के नहीं रहते.!!
वो नज़रें सलामत रहे, जिन्हें हम अच्छे नहीं लगते..!!
चेहरे पढ़ने वाला नहीं, आँखें पढ़ने वाला ढूंढो.!!
अक्सर लोग ख़ुद से नज़र मिलाने से डरते हैं,

_ क्योंकि वहां जवाब नहीं सवाल होते हैं;
_ और अगर सवाल गहरे हो जाएं, तो पूरी ज़िन्दगी हिल सकती है.
_ इसलिए दुनिया की बातों में उलझे रहना आसान है,
_ “ख़ुद को असलियत से बचाने का तरीका”
_ “लोगों ने दुनिया जीत ली, पर अपने आप से हार गए – इसलिए उनके पास जानकारी तो है, पर जीवन नहीं.!!”
दूसरों की नज़रों से खुद को मत देखो.

_ तुम्हारे पास आँखें हैं; तुम अंधे नहीं हो.
_ और तुम्हारे पास अपने आंतरिक और बाहरी जीवन के तथ्य हैं.
_ तुम्हारी अपनी आँखें ही असली “मैं” का रास्ता है.!!
“मेरी आँखें चुप हैं… पर भीतर की दृष्टि सब काली लकीरें पढ़ लेती है”

“मेरी चुप्पी मेरी ताक़त है—
मैं कहे बिना भी सब पहचान जाता हूँ”
“मुझे किसी से मिलने में कोई आपत्ति नहीं,
_ पर मैं आँखों के पर्दों में छुपी चालाकियाँ पढ़ लेता हूँ.
_ मुंह पर कुछ कह नहीं पाता, यह मेरी खामोशी है..
_ लेकिन भीतर से मैं हर काली लकीर पहचान जाता हूँ..
_ मेरी चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी गहराई है—
_ जो देखती है, समझती है, और चुपचाप याद रखती है”
“मैं चुप रह जाता हूँ, पर मेरी अंतर-दृष्टि उन काली लकीरों को पहचान चुकी होती है.”

सुविचार 124

ज़िन्दगी के 3 आसान नियम-

1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.

2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.

3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!

सुविचार – वर्तमान – प्रेजेंट – इस समय – इस क्षण – 123

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अगर आप एक दिन को जीवन मान कर जी सको,

तो आप सम्पूर्ण जीवन को अत्यन्त मूल्यवान बना सकते हो.

वर्तमान में जीने का यही फायदा होता है कि हम भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होते.!!
वर्तमान में जीने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भविष्य की चिंता नही होती, क्योंकि वर्तमान से ही भविष्य बनता है _

_ वर्तमान में जीने का यही लाभ है की हम जीवन को जी रहे हैं. भुत और भविष्य के बारे में सोच कर हम जो जीते है उसे जीवन नहीं कहते हैं.

वर्तमान में जीने से हम एक एक क्षण का आनंद ले सकते हैं.

आप पास्ट और फ्यूचर की सोच में वर्तमान को इगनोर न करें.

हमें वर्तमान में रहना चाहिए. जो हो रहा है उसे अपना बैस्ट दो.

अक्सर बहुत दूर की चीजों की ओर आकर्षित होते रहने से पास की चीजें कब छूट जाती हैं, पता भी नहीं चलता,

_ इसलिए कई बार भविष्य की योजनाओं से ज्यादा जरूरी अपने वर्तमान को सहेजना होता है.!!
भाग कर आप अपना केवल स्थान बदल सकते हैं, वर्तमान स्थिति नहीं !!
“बस वर्तमान को याद रखें.”

_और सुन्दर बात यह है कि यदि आप सचमुच इस क्षण में हैं, तो आप सोच नहीं सकते; यह तकनीकी रूप से असंभव है.

_सोचना केवल अतीत या भविष्य में ही संभव है, वर्तमान में कभी नहीं.

_अतीत में मत गिरो ​​और भविष्य की ओर मत भागो.

_उस क्षण में रहो, वह क्षण जो अभी घटित हो रहा है.

_जब आप खा रहे हों तो खायें – और कुछ न करें.

_जब आप सुन रहे हों, तो सुनें- और कुछ न करें.

_जब आप चल रहे हों तो चलें और कुछ न करें.

_वर्तमान क्षण में बने रहें, जो गतिविधि आप अभी कर रहे हैं उसमें बने रहें.– वर्तमान सबके लिए एक समान है; इसका नुकसान सभी के लिए समान है; और यह स्पष्ट होना चाहिए कि एक संक्षिप्त क्षण ही वह सब कुछ है जो खो गया है.

_क्योंकि आप न तो अतीत को खो सकते हैं और न ही भविष्य को; जो आपके पास नहीं है उसे आप कैसे खो सकते हैं ?

_ “वर्तमान ही वह सब कुछ है” और जो आपके पास [अतीत या भविष्य] नहीं है, उसे आप खो नहीं सकते.

“खोया हुआ वर्तमान”

_ कभी-कभी जीवन हमें ऐसा आईना दिखाता है जिसमें हम खुद को खोजते-खोजते ही खो देते हैं.
_ बीते हुए कल की परछाइयाँ और आने वाले कल की धुंध — दोनों मिलकर आज की रोशनी को ढक देती हैं.
_ जब घटनाएँ भीतर की चमक को निगलने लगती हैं, तब हमें रुककर पूछना चाहिए —
“क्या मैं अभी यहां हूं… सच में ?”
_ जब हम इस पल की सच्चाई को महसूस करते हैं —
साँसों की गति, मन की हलचल, आसपास की खामोशी — तभी वर्तमान की नमी लौटने लगती है.
> “क्या मैं अपने वर्तमान को जी रहा हूँ, या बस सोचने की आदत में जी रहा हूँ ?”
जिस चीज को हम भविष्य के लिए बचा लेते हैं, हम ख़ुद भी नहीं जानते कि वो कभी औरों के या ख़ुद हमारे भी काम आ सकेगी या नहीं.

_ ‘कल’ के लिए इतना कुछ बचा लिया जाता है, कि वो किसी के ‘आज’ को लील जाता है, और कभी-कभी ख़ुद के ‘आज’ को भी.!!
” जीवन आज जीया जा सकता था..
_ उसे लोग अक्सर ‘कभी बाद में’ के लिए बचा लेते हैं”

सुविचार 122

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अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं,

तो ये मत सोचिए कि वो कितना बेवकूफ है,

बल्कि ये सोचिए कि उसे आप पर कितना विश्वास है.

हम चाहें तो केवल अपने लिए कोई दीप जला सकते हैं,

लेकिन उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते

कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो.

 

सुविचार – उपहार – तोहफा – गिफ्ट – प्रेजेंट – 121

स्नेहपूर्वक भेंट किये गये उपहारों में हृदय की विशालता और नेह भावना निहित होती है.

_ ये उपहार जीवनपर्यंत संभाल कर रखे जाते हैं.
_ जब भी इन पर दृष्टि जाती है..
_ उपहार देने वाले की स्मृति जीवंत हो उठती है.
हम कोई भी वस्तु कभी भी खरीद सकते हैं,
_ लेकिन किसी खास मौके पर उपहार में मिली वस्तु का महत्व बढ़ जाता है.
उपहार हमेशा सराहनीय होता है, क्योंकि वह सिर्फ़ वस्तु नहीं होता,
_ बल्कि उसके साथ देने वाले की भावनाएं जुड़ी होती हैं..!!
उपहार को चीज़ मान लेना, उसकी बेकद्री है, उपहार भावना होती है.
जिन लोगों से हमें तोहफा मिलता है,
_ वे उनके दिल का स्वाद और पहचान है ..जो हमारे साथ चलती हैं.

सुविचार – ध्वनि प्रदूषण [noise pollution], गपशप, बकबक, ज्यादा बोलना, निरंतर बातचीत, ज्यादा बातचीत करना, – 120

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ज़्यादातर समय, किसी भी चीज़ के बारे में बात न करना ही बेहतर होता है.

_ यही सबसे अच्छी चीज़ है जो कोई भी कर सकता है.
_ हमने अपने ध्वनि प्रदूषण से उस शांति को नष्ट कर दिया है.
_ हम में से ज़्यादातर लोग नहीं जानते कि इस लगातार बातचीत को कैसे रोकें.
_ अगर कोई नहीं है, तो हम खुद से ही बातें करते रहते हैं.
_ यह ध्वनि प्रदूषण और बकबक करता मन हमारे भीतर की क्रिस्टल जैसी स्पष्टता को नष्ट कर देता है.!!
रिसर्च [Research] करके बोलने वाला अंदर से निश्चिंत और क्लैरिटी ळिए हुए रहता है,

_ सिर्फ़ बोलने के ळिए बोलने वाला अंदर से खाली और खोखला होता है.!!
ज़िन्दगी में इतने काम होते हैं, गपशप करने के लिए वक़्त कोई कहाँ से निकाले ?_गपशप तो छोड़ो, अपने से ही बात करने का समय नहीं मिल पाता..

_ अपने से बात करना, अपने भीतर झांकना, अपने आप से मिलना कितना ज़रूरी है,
_ इस आत्मसुख को जानिए, बहुत सारी उलझनों से मुक्ति मिल जाएगी.!!
केवल गपशप और तुलना करके हम अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं..

_ जिसका हमारे जीवन में कोई अर्थ या मूल्य नहीं है.
_ महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अपने आप को देखें, उस दयनीय, ​​तुच्छ अस्तित्व को देखें.. जो हम अपने लिए बना रहे हैं.
_ फिर महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में जीने के महत्व को समझें.
_ हम सभी के लिए अपने भीतर गहराई में जाने और उस क्षमता को पहचानने का समय आ गया है.. जो हमारे भीतर छिपी हुई है, जो छोटी-छोटी गपशप और तुलनाओं द्वारा मन की अंतहीन बकबक से ढकी हुई है. – “”पूर्वाग्रह और निष्कर्ष””
_ जागृत होइए, जीवित बनिए और अपने भीतर की क्षमता को देखना शुरू कीजिए.!!
हमारे यहाँ बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है तो कोई भी कुछ भी अनाप सनाप बोलना शुरू कर देता है.

_ बुद्धि और विवेक लुप्त हो गए हैं, यहाँ तक कि वाणी की मर्यादा भी खो गई है.
_ मानसिक संतुलन इतना बिगड़ गया है कि किसी भी विषय पर बोलने से पहले हम यह नहीं सोचते कि कहाँ, क्या, कैसे और कितना बोलना है,
_ क्योंकि हमें तो बस बोलने से मतलब है.!!
आजकल लोग बोलते नहीं, तोलते हैं.. क्योंकि अब बातें नहीं, मतलब निकाले जाते हैं.!!
हर “इसान” अपनी “जुबां” के “पीछे” “छुपा” हुआ है,अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!
जहां मुमकिन ही नहीं, वहां संवाद की कोशिशें सिर्फ फजीहत करवाती हैं.!!

सुविचार- जिंदगी क्या है.. – 119

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जिंदगी के 60 साल बीतने के बाद आप जान पाते है कि जिंदगी क्या है..

_ इसे जीना कैसे था.. क्या करना जरुरी था जो छूट गया और क्या क्या गैर-जरुरी करते रहे..
_ और यही बात अगर 30 साल की उम्र मे जान गये तो समझिये अगले 30 साल मिल जाएंगे.. जिंदगी जीने के लिये.!!
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