सुविचार – सुख – 136
सुविचार – सब ठीक हो जाएगा, सब ठीक है, सब बढ़िया है, एकदम ठीक, एकदम बढ़िया, ठीक हूं, ठीक नही हूँ मैं, मैं हूँ ना – 135
सुविचार – इच्छा, इच्छाएँ, तमन्ना, तमन्नाएं, अभिलाषा, अभिलाषाएं – 134
Quotes by प्रेमचंद
सच्ची प्रतिष्ठा और सम्मान के लिए संपत्ति की जरुरत नहीं, उस के लिए त्याग व सेवा काफी है.
क्रोध में आदमी अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है.
कविता सच्ची भावनाओं का चित्र है और सच्ची भावनाएँ चाहे वे दुःख की हों या सुख की, उसी समय सम्पन्न होती हैं, जब हम दुःख या सुख का अनुभव करते हैं.
सिर्फ उसी को अपनी सम्पति समझो, जिसको तुमने अपने परिश्रम से कमाया है.
विपत्ति से बढ़ कर अनुभव सीखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला.
कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब से नहीं.
जिनके लिए अपनी जिंदगानी खराब कर दो, वे भी गाढ़े समय पर मुँह फेर लेते हैं.
निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है.
घमण्डी आदमी प्रायः शक्की हुआ करता है.
कार्य कुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है.
जो अन्त तक साथ निभाए, ऐसा साथी पत्त्नी के सिवा दूसरा नहीं.
सन्तोष सेतु जब टूट जाता है, तब इच्छा का बहाव अपरिमित हो जाता है.
खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है.
जीवन नाम है, सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का.
कर्त्तव्य ही ऐसा आदर्श है, जो कभी धोखा नहीं दे सकता.
केवल बुद्धि के द्वारा ही मानव का मनुष्यत्व प्रकट होता है.
स्त्री पृथ्वी की भांति धैर्यवान है, शान्ति संपन्न है, सहिष्णु है.
सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्त्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं.
संतान को विवाहित देखना, बुढ़ापे की सब से बड़ी अभिलाषा है.
बिना ठोकर खाए आदमी की आँख नहीं खुलती.
पश्चात्ताप के कड़वे फल कभी न कभी सभी को चखने पड़ते हैं.
प्रेम, वसंत समीर है, द्वेष, ग्रीष्म की लू.
अनुराग, यौवन, रूप या धन से नहीं उत्पन्न होता. अनुराग अनुराग से उत्पन्न होता है.
अतीत चाहे दुखद ही क्यों न हो, उस की स्मृतियां मधुर होती हैं.
बुराई से सब घृणा करते हैं, इसलिए बुरों में परस्पर प्रेम होता है. भलाई की सारा संसार प्रशंसा करता है, इसलिए भलों में विरोध होता है.
मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है.
अन्याय में सहयोग देना अन्याय करने के सामान है.
स्वार्थ में मनुष्य बावला हो जाता है.
सुविचार – धारणा – 133
सुविचार – भीड़ – Crowd – 132
सुविचार – जनसंख्या – आबादी – Population – 131
आज समूचा विश्व कई समस्याओं से जूझ रहा है, सृष्टि अपने सबसे भयानक दौर में है.
_ अगर सभी समस्याओं के मूल में जाएं, तो अत्यधिक आबादी को पायेंगे.
_ पृथ्वी की छमता सीमित है और मनुष्य की आबादी असीमित.
_ इतने सुंदर ग्रह को हमने बर्बाद कर दिया और रहने लायक नहीं छोड़ा है.
_ हम ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, बढ़ते समुद्री जल स्तर, ओजोन लेयर में छेद, भुखमरी, आतंकवाद, परमाणु खतरा इत्यादि समस्याओं से घिरे हैं.
_ इन सबकी जड़ में जनसंख्या है.
_ अगर हम अपना अस्तित्व बचाये रखना चाहते हैं, तो सोच समझकर इस दुनिया में बच्चे लाएं और उनके लिए अच्छी दुनिया छोड़ जाएँ.
_अगर जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही तो हमारे पास आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से भी ज्यादा बेहतर भविष्य नहीं है.
इस धरती पर आठ सौ करोड़ की जनसँख्या destructive [विनाशकारी] है.. प्रकृति के लिए, जो पहले कभी नहीं थी.
_ चाहे जैसे हो, चाहे जिस विधि से हो, जनसंख्या एक बार कम हो और होनी ही चाहिए.!!
प्रकृति अपना संतुलन स्थापित स्वयं करती है और संभावना है कि प्रकृति आने वाले कुछ वर्षों में जनसंख्या संतुलन भी अपने दम पर कर लेगी.!!
बाजारवाद और जनसंख्या विस्फोट ने मनुष्य से सब कुछ छीन लिया है.!!
आज आबादी का ये हाल है कि चाहे कितनी भी ट्रेनें, बसें और हवाई जहाज चला लें,
_ कहीं जगह नहीं है.
_ स्कूल और कालेज खोल दिए जाएं,- सीट नहीं है,
_ हर जगह भीड़ ही भीड़ और चारों ओर पसरी अव्यवस्था..!!
प्राइवेट जॉब में कब जॉब चली जाए, पता नहीं.!
_ दूसरी कब मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, पता नहीं..
_ सभी कुछ व्यवसाय कर पायें, संभव नहीं..
_ इसीलिए सारी मारामारी और समस्यायें..
_आबादी पर नियंत्रण, कानूनन और समुचित औद्योगिकीकरण ही राहत दे सकता है.!!
अगर एक नाव में जरुरत से ज्यादा लोगों को बैठाते हैं तो उसका डूबना तय है,
_ तो अत्यधिक जनसंख्या ले कर विकसित होना कैसे सोचा जा सकता है.
आप 100 रूपए 10 लोगों में बांटते हैं, और अगर वही 100 रूपए 100 लोगों में बांटते हैं तो एक के हिस्से कितने आएंगे,
_ बस यही है जनसंख्या का गरीबी से रिश्ता.
देश एक silent crisis की तरफ इंच दर इंच खिसक रहा है.
_ ज्यादातर ये जो हैवी जनसंख्या हमारे यहाँ इकट्ठा हो चुकी है, उसको कोई दूसरा देश तो लेने से रहा और न ही ये जनसंख्या स्वयं कहीं और जाने वाली है.
& समय के साथ ये जनसंख्या बूढ़ी हो रही है और आगे और बूढ़ी होती जाएगी.
_ न इनके पास सेविंग्स हैं और न इनके लिए कोई social security set up है.
_ एक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी हुआ करती थी बच्चों की माँ बाप को पालने की वो भी अब वाली तीन एज की जनसंख्या के कंधों से हटने लगी है.
_ अगले 25-30 सालों मे जो लोग मरने की कगार पर बूढ़े होंगे, उनमे से ज्यादातर के हालात बहुत खराब हो सकते हैं.
_ ये जनसंख्या इतनी ज्यादा होगी कि सरकारी खजाने से इनको बेसिक्स दे पाना भी बहुत कठिन होने वाला है.
_ सरकार को कोई वर्किंग प्लान पर काम करना चाहिए.
_ कोई कंपलसरी बिल जिससे प्राइवेट सैक्टर मे जीवन खपा रहे लोगों को भी पेंशन दी जा सके.
_ EPFO मे फॅमिली पेंशन का प्रावधान तो है जोकि 10 साल काम करने के बाद mandatory मिलेगी, लेकिन मुझे वो नाकाफी लगता है.
_ सरकार को थोड़ा सा इनवेस्टमेंट अभी से भविष्य के बूढ़ों के लिए करना शुरू करना चाहिए.
_ कोई वर्किंग और कन्विंसिंग प्लान बनाया जाना आवश्यक है.
– Anurag Tiwari







