मस्त विचार 4702
अकेला ही चला था ताउम्र अकेला ही रहा,
न कोई साथ मिला ना ही कोई कारवाँ बना..
न कोई साथ मिला ना ही कोई कारवाँ बना..
लेकिन उसे पाने की एक निश्चित प्रक्रिया पूर्ण करनी अनिवार्य होती है,”
वह अकेले कैसे जीता होगा.. यही सोच कर सिहर जाता हूँ…!!
जब कर्म का चक्र घूमकर वापस तुम पर आएगा तो कहीं के भी नहीं रह जाओगे.
सामने वाले की यहाँ सुनना कौन चाहता है ?
” बाधाएं वे चीजें हैं जो एक व्यक्ति तब देखता है जब वह अपने लक्ष्य से अपनी आंखें हटा लेता है “
पर कभी कभी लगता है ऐसे…हम एक दूसरे को मिल जाते तो होता बेहतर सबसे !
जिस दिन समझदार बन गया..सह नही पाओगे…