मस्त विचार 4871
_ ऐसी दुखद बात को मै बयां कैसे करूं,,,,,
_ ऐसी दुखद बात को मै बयां कैसे करूं,,,,,
_ जिसने राहों से जंग जीती, अक्सर वहीं सुबह में सूर्य बनकर निकलता है.
_ जो बात करे,,खुशी,,से..
कभी बहुत बाते किया करते थे हमसे _ अब खैरियत तक पूछा नहीं करते,,,
_ या तुम्हें लेकर मेरा नज़रिया ज़्यादा अच्छा है..
_ राहगीर रास्ते की परवाह नहीं करता _ वैसे ही तुम भी अपनी मंजिल की परवाह मत करो..
जो हमारी आवाज से ही हमारी खुशी और दुख का अंदाज लगा लेते हैं.
जैसे धनुर्धर को उड़ने वाले बाण से प्रेम होता है, उसी प्रकार हाथों में स्थिर रहने वाले धनुष से भी उसे प्रेम होता है.