सुविचार 4910
अच्छाई और बुराई इंसान के कर्मों में होती है, कोई बांस का तीर बना कर किसी को घायल करता है _
_ तो कोई बांसुरी बना कर बांस में सुर को भरता है.
_ तो कोई बांसुरी बना कर बांस में सुर को भरता है.
_ मैं स्नेह का धागा हूँ _ मजबूरी की जंजीर नहीं..!!
ख़ाक हूँ मैं, ख़ाक पर क्या ख़ाक इतरा के चलूँ..
ख़ुशी के लिये ही अब ये तलाश बंद कर दी.”
दुःख इस बात का होता है, कि वह हमें भूल गया है… जिसे हम याद कर रहे हैं….
अपनी आवाज न उठाएं, _ अपने तर्क में सुधार करें.