मस्त विचार 2976
खुद की महफ़िल में अकेले बैठे हो जनाब,
लगता है कहीं गहराई में दिल लगा बैठे हो…
लगता है कहीं गहराई में दिल लगा बैठे हो…
ताकि आपके जीवन में कभी भी कोई भी अंधकार न फैला सके.
काम अपने पाँव ही आते हैं सफ़र में।”
इन्हे भी सुकून की तलाश है…
और प्रकृति की प्राकृतिक वस्तुओं को भूल गया.
यह पल भी जाने ही वाला है.
तब अपने और सगे सभी हाथ छुड़ा लेते हैं…
उसी दिन से हमारी कमजोरी हमारी ताक़त बन जायेगी.
महफ़िलों में जब तेरी बात उठती है.