सुविचार 3006
या तो स्थितियों को जस का तस स्वीकार कर लो, _
_ या फिर जिम्मेदारी उठाओ उन्हें बदलने की..
_ या फिर जिम्मेदारी उठाओ उन्हें बदलने की..
जो इतना गुमान कर गया.
बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…
आप तभी जीत सकते हैं जब आपका दिमाग आपकी भावनाओं से ज्यादा मजबूत हो.
संगीत भी मैं तेरा हूँ तेरे लिये हीे बजाता हूँ,
खूबियाँ हैं तेरी मुझमें तुझी पे लुटाता हूँ.
दोनो ही नकली हो गये आंसू और मुस्कान.
पूरी दुनिया को “डुबोने” की “ताकत” रखने वाला “समंदर”
“तेल” की एक बूंद को नहीं “डूबो” सकता.
उसके पास पंख नहीं है “