सुविचार 2864
जिंदगी में कुछ भी नहीं है.
आपके देखने पर, आपका एटीटयूड, आपकी पकड़, आपकी समझ, आपकी दृष्टि सब कुछ बनाती और बिगाड़ती है.
जिंदगी में कुछ भी नहीं है.
आपके देखने पर, आपका एटीटयूड, आपकी पकड़, आपकी समझ, आपकी दृष्टि सब कुछ बनाती और बिगाड़ती है.
मेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर तू है.
हो सकता है कि आपका जीवन आपके होठों से अधिक जोर से प्रचार करे.
हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
अपनी रजा में अब तू रहना सीखा दे,
शिकायत ना हो कभी भी किसी से,
सुख और दुख के पार जीना सीखा दे..
इंसान बनना भूल जाते हैं..!
तेरी संगत में खुद को,,,,,,,झुकाना सीख गए,
पहले मायूस हो जाते थे,,,,,,,कुछ ना मिलने पर,
अब तेरी रज़ा में,,,,,,राज़ी रहना सीख गए,,,,!!
ऐसे में अपना भला कैसे हो सकता है..??
कभी खुदा की रजा समझ कर…
कभी अपने गुनाहों की सजा समझ कर.
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…