सुविचार 2709
आपको वो नहीं मिलता जो आप चाहते हो,
बल्कि वो मिलता है जिसके आप योग्य हो.
बल्कि वो मिलता है जिसके आप योग्य हो.
ये तभी मुस्कुरायेगी जब आप मुस्कुरायेंगे.
कभी वो लफ्ज भी तो पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.
कौन जाने सांसों की मोहल्लतें कहाँ तक हैं।।
इसने हमें वो नहीं दिया, जिसकी हमें इससे उम्मीद थी.
और दूसरों के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए.
दूर से देखने पर हम ज़रा मग़रूर दिखते हैं.
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
निराशा से तो बेहतर ही होती है….