मस्त विचार 2541
हंसता तो रोज हूँ, __ पर खुश हुए ज़माना हो गया…
दर्द अपरिहार्य है, __ दुख वैकल्पिक है.
जाने कितना ज़हर भरा, अब लोगों की बोली में.
ये हौसले हमारे सुन तुझसे भी बड़े है.
_ यह वक़्त बड़ा खिलाड़ी है, हर रोज अपनी चाल बदलेगा..
तेरा सलूक, मुझे पत्थरों मैं ढाल गया !
वो सबको रोशनी पहुंचाने वाला सूरज भी तो ऊपर अकेला ही रहता है.