सुविचार 2442
यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है.
यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है.
और रिश्तों का मतलब समझ आएगा.
आप अपने जीवन में लोगों को खो देंगे और महसूस करेंगे कि आपने उनके साथ कितना भी समय बिताया हो, ऐसा कभी नहीं लगेगा कि यह पर्याप्त था.
कितने रस्ते वो बदलता है उसे पाने के लिए…..
_ ” जरूरतें ” सजदा करवाती हैं, आजकल ” इबादत “कौन करता है..
_ हो सके तो खुद को भी इक बार सजदा कीजिए.
वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा ?
लेकिन बैठिए वहीं जहां अपनेपन का अहसास हो.
लेकिन खूबसूरत दिल बहुत कम लोगों के पास होता है.
समय खुद ही आपकी पहचान दूसरों से करवायेगा.
वह स्वयं भी रास्ता भटक जाता है.