सुविचार 2242
और वास्तव मे वह आता भी है.
और वास्तव मे वह आता भी है.
!! क्यूंकि !! उनकी अच्छाइयाँ मुझसे ज़्यादा हैं…
!! और !! छोटो से प्यार इसलिए करता हुं,
!! क्यूंकि !! उनके गुनाह मुझसे कम हैं.
_ जिसे तैरना सिखाओ _ वही डुबोने को तैयार खड़ा है.
_ और अपने तो अहसान के बदले गुलामी चाहते हैं..!!
सम्मान दो और सम्मान पाओ, ये काम है बिल्कुल ईमानदारी का.
दूसरों के गुणों को न सिर्फ देखो बल्कि उनकी प्रशंसा करो और उन्हें सच्चे दिल से अपनाने का प्रयत्न करो, और दुसरे के अवगुणों को नज़र अंदाज करें, बहुत जरुरी होने पर उनको बतायें, अपितु उन पर ध्यान ही न दें, किन्तु अपने दुर्गुणों को ध्यान पूर्वक अपने से दूर करने का प्रयत्न करें !!!!
हमारे बीच कोई फासला दिखाई तो दे.
_ दूसरों के पास तो हमारी समस्या का सुझाव है ..