मस्त विचार 2198
गिरना भी चाहता हूं….बस रुकना नहीं चाहता.
गिरना भी चाहता हूं….बस रुकना नहीं चाहता.
उससे भी ज़िन्दगी छोटी हो जाती है.
कम गर्माहट मिलती है, उसी तरह कमज़ोर इच्छा से कमज़ोर परिणाम मिलते हैं.
और “किस्मत” महलों में राज करती है!!
यदि मन में दृढ़ निश्चय और विश्वास है तो विजय और सफलता मिलने का प्रतिशत ज्यादा हो जाता है, और अगर संकल्प कमजोर है तो फिर असफलता निश्चित हो जाती है !!
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
ये किसी भी अच्छे रिश्ते को बर्बाद कर देती है.
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”