सुविचार 2318
मगर जो जिंदा है उसे समझने वाला एक भी नहीं मिलता.
मगर जो जिंदा है उसे समझने वाला एक भी नहीं मिलता.
“बङे हो कर क्या बनना है ?”
जवाब अब मिला है, – “फिर से बच्चा बनना है.
वर्ना मेरे वादे भी कभी जंजीर हुआ करते थे.
बहुत से लोग हमें जानते होंगे, लेकिन बहुत कम लोग हमें समझते होंगे.
जो सबकुछ समझता है फिर भी चुप है.
इससे अच्छी आदत क्या होगी मेरी…
किसी के दिल का दर्द छीन लूँ….
इससे अच्छी नियत क्या होगी मेरी.
मिलना जुलना सीखिये, मतलब के बगैर.
जिन्दगी जीना सीखिये, दिखावे के बगैर.
मुस्कुराना सीखिये, सेल्फी के बगैर.
और रब पर विश्वास रखिये, किसी शंका के बगैर.
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
जीवन तब आसान हो जाता है _ जब आप उससे नकारात्मक लोगों को हटा देते हैं.
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…
यहाँ आदमी आदमी से जलता है..