सुविचार 2243

“मत करो इंतज़ार” इतना की इंतज़ार ही करते रह जाओ

और सब कुछ ख़त्म हो जाए.

सुविचार 2242

इस तरह कर्म करो – कि मानो तुम्हारे हर कर्म को पलट कर तुम्हारे सिर पर आना है,

और वास्तव मे वह आता भी है.

मस्त विचार 2116

मैं बड़ो कि इज़्जत इसलिए करता हुं,

!! क्यूंकि !! उनकी अच्छाइयाँ मुझसे ज़्यादा हैं…

!! और !! छोटो से प्यार इसलिए करता हुं,

!! क्यूंकि !! उनके गुनाह मुझसे कम हैं.

सुविचार 2241

किसी के प्रति कहा गया अच्छा शब्द एक कृतज्ञता है, इसलिए बुरी बात न कह कर चुप रहने की जरुरत होती है, जिस में कुछ खर्च नहीं होता.

मस्त विचार 2115

खुदगर्जों की इस बस्ती में _ अहसान भी है एक गुनाह,

_ जिसे तैरना सिखाओ _ वही डुबोने को तैयार खड़ा है.

कोई किसी पर यूं ही अहसान नहीं करता…

_ और अपने तो अहसान के बदले गुलामी चाहते हैं..!!

अपनों के खिलाफ चालें चलने वाले भूल जाते हैं कि..
_ अंत में उन्हें गैरों की गुलामी करनी पड़ती है.!!

सुविचार 2240

बजती है ताली दोनों हाथों से, ये उसूल है दुनियादारी का,

सम्मान दो और सम्मान पाओ, ये काम है बिल्कुल ईमानदारी का.

सुविचार 2239

गुण अवगुण…

दूसरों के गुणों को न सिर्फ देखो बल्कि उनकी प्रशंसा करो और उन्हें सच्चे दिल से अपनाने का प्रयत्न करो, और दुसरे के अवगुणों को नज़र अंदाज करें, बहुत जरुरी होने पर उनको बतायें, अपितु उन पर ध्यान ही न दें, किन्तु अपने दुर्गुणों को ध्यान पूर्वक अपने से दूर करने का प्रयत्न करें !!!!

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