मस्त विचार 2122
मिट्टी का बना हूँ गुरूर जचता नहीं मुझ पर…
मिट्टी का बना हूँ गुरूर जचता नहीं मुझ पर…
ठीक वैसे जब बुरे विचार हमारे सामने आये तो उन्हें भी अपने अंदर न आने दो जबकि अच्छे विचारों को हमेशा लेते रहो. क्योकि विचार कोई भी हो वो हमारे मन में बीज का कार्य करता है जो धीरे धीरे एक पेड़ बन जाता है.
बुरे विचार ही बुराई करने के लिये प्रेरित करते हैं.
आप जितना सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा बहादुर हैं, जितना आप दिखते हैं उससे ज्यादा होशियार और जितना आप सोचते हैं उससे ज्यादा मजबूत हैं.
*तुम सुनो ना सुनो,* *मै तुम्हे यूँही पुकारा करूँ…*
*तुम मिलो ना मिलों,* मै तुम्हे यूँही पाना चाहूँ….*
*तुम कहो ना कहो,* *मै तुम्हे यूँही सुना करूँ……*
*तुम देखो ना देखो,* *मै तुम्हे बस निहारा करूँ…*
अपने भीतर अपने आप को………”
असल में वह व्यस्त नहीं बल्कि अस्त-व्यस्त है.
पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है.
मंजिल को दायरे से निकल कर तलाश कर.
सिर्फ सेहत के सहारे जिंदगी कटती नहीं.