सुविचार 2051
भाग्य और दूसरों को दोष क्यों देना, जब सपने हमारे हैं तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहिए.
भाग्य और दूसरों को दोष क्यों देना, जब सपने हमारे हैं तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहिए.
…पर ‘ज़िम्मेदारी’ इतना भी वक़्त नहीं देती…!!!”
क्या है की हम आज तक लेने का ही सुख जान पाएं हैं, खाने का ही सुख महसूस कर पाये हैं; लेकिन इतना जानिये की लेने से ज्यादा देने में आनंद है.
सब कुछ तो “गिरवी” पड़ा है, ज़िम्मेदारी के बाज़ार में.
सच बताओ ” ये महकने का हुनर तुमने कहाँ से सीखा “
जिस जिस पर ये जग हँसा है, उसी उसी ने इतिहास रचा है.
किसी को अपना कैसे मानेंगे..
गलतियाँ आपको पहले से बेहतर किसी चीज़ में बदलने की शक्ति रखती हैं.