Collection of Thought 483
एक विवेकपूर्ण प्रश्न है – आधा ज्ञान.
एक विवेकपूर्ण प्रश्न है – आधा ज्ञान.
पर लोग कैचियाँ चला कर, सारा फ़साना ही बदल देते हैं.
_ बातें भूल भी जाऊँ पर लहजा याद रखता हूँ..!!
**जब जड़ों में ज़ख्म लगते हैं,* *तो टहनियाँ भी सूख जाती हैं…*
– यह ऎसी नीति है, जिसे घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा सीखाते हैं, _ इसे लागू करें फिर नतीजा देखें.
_ चंद लम्हों के बदले में वो आपको बरसों का तजुर्बा देते हैं..
_ लम्हों में कैद हो गया जैसे सदियों का राज….!!
_ किस्सा सुना रहा था एक बुजुर्ग जिंदगी का..!!
_ हर बुजुर्ग बुद्धिमान नहीं होते हैं, मूर्ख भी एक दिन बुजुर्ग हो जाते हैं.!!
नज़र उसे ही पसंद करती है जो नसीब में नही होता.
खुशी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप अनुभव करते हैं; यह कुछ ऐसा है जो आपको याद है.