सुविचार 1334
एक परिंदा रोज खटखटाने आता है, दरवाजा मेरे घर का _
_ जरूर लकड़ी उसी पेड़ की होगी, जिस पर कभी आशियाना था उसका ..
ख़्वाब तो परिंदों के होते हैं आसमान छूने के,
_ इंसान तो बस गिरने गिराने में लगे हैं..!!
_ जरूर लकड़ी उसी पेड़ की होगी, जिस पर कभी आशियाना था उसका ..
_ इंसान तो बस गिरने गिराने में लगे हैं..!!
मैं कल से नहीं डरता, क्योंकि मैंने कल देखा है और मुझे आज से प्यार है.
उस उम्र की बातें, उम्र भर याद आती है.
वर्ना जिंदगी कट जाती हे… “तक़दीर” को इल्जाम देते देते…
उसका परिणाम कभी छोटा नहीं होता.