Collection of Thought 320

He who plucks unripe fruits from trees, get neither the juice nor the seeds. Who plucks fruits ripened by time gets the both.

जो पेड़ों से कच्चे फल तोड़ता है, उसे न तो रस मिलता है और न ही बीज ; जो समय से पके हुए फलों को तोड़ता है, उसे दोनों मिलते हैं.

सुविचार 1269

माना कि जीवन में अनेक कठिनाइयां हैं, लेकिन जीत उसी इंसान की होती है जो खुद के लिए प्रेरणा बनता है, खुद को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शक का काम करता है और कभी हार नहीं मानता.

सुविचार 1268

दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो अपनी दुर्दशा या कमियों का रोना तो रोते रहते हैं, लेकिन उन के कारणों को दूर करने के लिए उन के द्वारा कोई पहल नहीं की जाती. भले ही कोशिशों से हालात बदले जा सकते हों.

सुविचार 1267

हम सब सच्चाई से कोसों दूर हैं, हम सिर्फ जीवन का वही पक्ष देखतें हैं ; जो हम देखना चाहतें हैं.

_ जब कि वास्तविकता में जीवन वह है, जो हम देख नहीं पातें हैं ; इसलिए अपनी दृस्टि को विस्तार दें, खुद को सजग और सच्चा बनायें.

जब तक पूरी कहानी पता न चल जाए, तब तक किसी का पक्ष न लें,

_ कुछ लोग दूसरों को बुरा दिखाने में माहिर होते हैं.!!

सुविचार 1266

कोई भी हमेशा जीत नहीं सकता, जीवन में कई तरह की चुनौतियाँ आती हैं. कुछ में हम जीत जाते हैं, तो कुछ में हार जाते हैं. हमें जीत की ख़ुशी तो मनानी चाहिए, लेकिन उसका गुरुर नहीं करना चाहिए.

मस्त विचार 1206

कतरा कतरा धुल जायेगा मैल मन का,

दिल की गांठों को तुम खुलने दो,

बुँदे बूंदें मोती बन जाएँगी,

पश्याताप के आँसुओं को बहने दो

दिल के सीप तो खुलने दो।

तारीफी के कसीदे न भी पढ़ सको तो,

मुस्करा के दो बोल ,बोल ही दो।

बर्तनों का गठरी है ये रिश्ते,

खनखनाएंगे,थोड़ा शोर भी करेंगे,

भूल को भूल समझकर भूल जाने से,

कोलाहल भी संगीत बन जायेगा,

तिनका तिनका जुड़ जाएगा

कुनबा तेरा बन्ध जायेगा,

बाहें अपनी पसार तो लो।

गलतफहमियों के बीज से पनपता है,

शक का पौधा,फासलों का फूल,

इन फासलों को पाट दो,

इनमे विश्वास की पौध डाल दो।

जीने के हैं दिन है चार,

कौन कब बिछड़ जाएगा,

कौन कब छोड़ चला जायेगा,

बाहों में बाहें डाल दो,

रिश्तों को तुम मिठास दो ।

।। पीके ।।

Collection of Thought 319

We are not makers of history. We are made by history.

हम इतिहास के निर्माता नहीं हैं, _ हम इतिहास से बने हैं.

मस्त विचार 1205

पता है मैं हमेशा खुश क्यों रहता हूँ ?

क्योंकि मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता.

सुविचार 1265

जीवन में अपना लछ्य जरूर तय करें. लछ्य तय करने में पैसा नहीं लगता है, लेकिन ये बहुत कारगर होते हैं.लछ्य ही हमें काम करने की ऊर्जा देता है. काम के प्रति लगाव ही हमें ऊर्जा देती है. तर्क छमता या भाग्य का सफलता में उतना योगदान नहीं होता जितना काम के प्रति लगन का. अगर हम लछ्य निर्धारित नहीं करेंगे तो काम भी अनमने ढंग से करेंगे. लछ्य तय करेंगे तब हमारे भीतर उसे पाने की लालसा रहेगी. यही लालसा हमें ऊर्जा भी देगी. इसलिए जीवन में सफल होने के लिए मेहनत से कभी भी भागना नहीं चाहिए और हमेशा अपना लछ्य तय करके ही आगे बढ़ना चाहिए.
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