Collection of Thought 320
जो पेड़ों से कच्चे फल तोड़ता है, उसे न तो रस मिलता है और न ही बीज ; जो समय से पके हुए फलों को तोड़ता है, उसे दोनों मिलते हैं.
जो पेड़ों से कच्चे फल तोड़ता है, उसे न तो रस मिलता है और न ही बीज ; जो समय से पके हुए फलों को तोड़ता है, उसे दोनों मिलते हैं.
_ जब कि वास्तविकता में जीवन वह है, जो हम देख नहीं पातें हैं ; इसलिए अपनी दृस्टि को विस्तार दें, खुद को सजग और सच्चा बनायें.
_ कुछ लोग दूसरों को बुरा दिखाने में माहिर होते हैं.!!
मिट्टी की तरह हम भी महकते चले जाएं…..!!
दिल की गांठों को तुम खुलने दो,
बुँदे बूंदें मोती बन जाएँगी,
पश्याताप के आँसुओं को बहने दो
दिल के सीप तो खुलने दो।
तारीफी के कसीदे न भी पढ़ सको तो,
मुस्करा के दो बोल ,बोल ही दो।
बर्तनों का गठरी है ये रिश्ते,
खनखनाएंगे,थोड़ा शोर भी करेंगे,
भूल को भूल समझकर भूल जाने से,
कोलाहल भी संगीत बन जायेगा,
तिनका तिनका जुड़ जाएगा
कुनबा तेरा बन्ध जायेगा,
बाहें अपनी पसार तो लो।
गलतफहमियों के बीज से पनपता है,
शक का पौधा,फासलों का फूल,
इन फासलों को पाट दो,
इनमे विश्वास की पौध डाल दो।
जीने के हैं दिन है चार,
कौन कब बिछड़ जाएगा,
कौन कब छोड़ चला जायेगा,
बाहों में बाहें डाल दो,
रिश्तों को तुम मिठास दो ।
।। पीके ।।
हम इतिहास के निर्माता नहीं हैं, _ हम इतिहास से बने हैं.
क्योंकि मैं खुद के सिवा किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता.