मस्त विचार 1059

झांक रहे सब सबके आँगन, अपने आँगन झाँके कौन?

ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी, अपने मन में झाँके कौन?

सबके भीतर चोर छुपा है, उसको अब ललकारे कौन?

दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन?

पर उपदेश कुशल बहुतेरे, खुद पर आज बिचारे कौन?

हम सुधरें तो जग सुधरेगा, इस मुद्दे पर सब हैं मौनं.

सुविचार 1142

गलती कोई भी कर सकता है, परंतु मूर्ख के अतिरिक्त कोई उस को जारी नहीं रखेगा.

Collection of Thought 205

Life is really simple, but we insist on making it complicated.

जीवन वास्तव में सरल है, लेकिन हम इसे जटिल बनाने पर जोर देते हैं.

सुविचार 1141

इंसान को नमक की तरह होना चाहिए….जो खाने में रहता है मगर दिखाई नहीं देता; और अगर ना हो तो उनकी बहुत कमी महसूस होती है.

Collection of Thought 204

Opportunity is missed by most people because it is dressed in overalls and looks like work.

अवसर ज्यादातर लोग चूक जाते हैं _ क्योंकि यह चौग़ा पहना होता है और काम जैसा दिखता है.

सुविचार 1140

कभी- कभी अपने आपको भी आराम दें, ऐसा करने से भीतरी ऊर्जा का नवीकरण हो जाता है.

 

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