Collection of Thought 239
मुझे लगता है कि किसी तरह, हम सीखते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं और फिर उस निर्णय के साथ जीते हैं.
मस्त विचार 1110
अक्सर मैं सोचा करता हूँ, दुनिया भर की बातें
इस चिंता मे राख करी हैं मैंने कितनी रातें,
सब कुछ मेरी सोच मुताबिक कभी नहीं होता है
या तो मैं अलग हूँ इस दुनिया से
या ये सबके साथ मे भी होता है
लेकिन फिर भी सारी दुनिया कुछ नहीं कहती है
अपने दिल मे चुपके चुपके सब कुछ ये सहती है
ये दुनिया अपनी है तो फिर क्यूँ है लोग पराये ?
कोई खुशियों मे डूबा है किसी पे गम के साये !!
दूसरों का दुःख देखकर क्यूँ खुश होते कुछ लोग ?
खुशी किसी की देखकर जलते क्यूँ हैं लोग ?
क्या ये मुमकिन है
सारी दुनिया सबको समझे अपना
पता नहीं कितने लोगो ने देखा ऐसा सपना ?
जन्नत क्या है दोजख क्या है शायद सबने देखा है
खुद करते हैं फिर कहते है
ये तो किस्मत का लेखा है.
मस्त विचार 1109
समय आता है सब का, ये है वक़्त-वक़्त की बात.
सुविचार 1176
Collection of Thought 238
बीता हुआ कल हमारा नहीं संभलना है, आने वाला कल को हमें जीतना है या हारना है.
मस्त विचार 1108
वो आखें कभी अपने “मुकद्दर” पे रोया नही करती.
सुविचार 1175
Collection of Thought 237
शैली के मामलों में, धारा के साथ तैरना; सिद्धांत के मामलों में, चट्टान की तरह खड़े हो जाओ.
मस्त विचार 1107
मिल जाएगी कभी न कभी, जरा कोशिश कर के तो देखिए.






