मस्त विचार 945
अफ़सोस यह है की उनमें चन्द मेरे घर के लोग थे.
अफ़सोस यह है की उनमें चन्द मेरे घर के लोग थे.
अब मजा देने लगी है, ज़िंदगी की मुश्किलें.
हर बात के अर्थ निकाले …
हर ख़ामोशी समझी …
हर आँख को पढ़ा मैंने …
अंत में जाना ..
जीवन सहज होने में है, यूँ ही जीने में है …
जंग नहीं खेल है ..
कोई फर्क नहीं पड़ता हार जाने से …
न फर्क पड़ता गिर पड़ने से …
उठो कपड़े झाड़ो चल पड़ो …
न बोझ बनो किसी पर ..
न किसी को बोझ बनाओ ..
जितना मिले नाचो गाओ ..
कभी मन करे तो चुप हो जाओ ..
पर अब हर बात में अर्थ न ढूंढो ..
जिसका दिल भरता गया, वो हमें छोड़ता गया.
जो आज है उसे जी कर तो देख, आने वाला पल खुद ही सँवर जाएगा एक बार मेरे यार को याद कर के तो देख.
जो जवाब मांगने निकला तो, खुद को सवालों से घिरे पाया, सोचा, लोगों को उनकी असलियत बता दूँ, जब देखा सामने तो, खुद को आइने के सामने पाया. परेशानी का सबब बनना है आसान, रास्ता निकालना जरा है मुश्किल. सबके साथ चल, सबकी बात कर, साथी हैं सब सफर के. तंग है तो क्या मलाल है. आज है गम तो, कल खुशहाल है. सुख-दुख तो मौसम हैं जीवन के, बदल जायेगा मौसम, रात ऋतु के बदलते. रोता हुआ आया था, रुलाते हुए जाना है. सबकी ख़ुशी में शरीक हो ले, कट जाएगा रास्ता, फिर हँसते-हँसते. जो हासिल है, वो भी कम तो नहीं. बन जा सहारा किसी डूबते का, चाहे खुद को तिनका समझ कर. Pk