मस्त विचार 1010
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
नहीं मिलते जहाँ चोट के निशान…..
मैं छिपाना चाहता हूँ, घर से दफ्तर जाते _ दफ्तर से घर आते, वह एक बड़ी लंबी सी सूची _ जिसमें लिखा होता है _ दफ्तर जाते वक्त करना है क्या ? पर रोज मैं उस लंबी सूची के मुताबिक न कुछ कर पाता हूं _ न ला पाता हूं..
मैं छिपाना चाहता हूँ, कमीज की उघड़ी सिलाई, टूटे बटन, पेंट की तुरपाई, _ कभी इस कमीज को कभी उस पैर को बदल- बदल कर _ लेकिन आस्तीन से बाहर झांकती _ अंदर की धुलाई से लंबी हो गई बनियान की लटकती बाहें – दबे छुपे कह ही देती हैं _ बहुत कुछ..
इस जीवन में हमारा मुख्य उद्देश्य दूसरों की मदद करना है,_ और अगर आप उनकी मदद नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम उन्हें चोट न पहुंचाएं.
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ….
_दूर हो जाना किसी जीत से कम नहीं होता..
यह मत देखो कि दूसरे क्या कर रहे हैं बल्कि अपने काम पर ध्यान दो.
रिश्ता क्या है समझा नहीं सकता.
तुम मेरे लिए इतने ख़ास हो कि,
तुम जो नहीं साथ तो मैं मुस्करा नहीं सकता.