अरसों बाद खुल के हंसी आयी _ वो भी खुद पे..
मस्त विचार 850
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
तेरे दीवाने में भी क्या आ गयी तेरी अदा.
मस्त विचार 849
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा… जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है.!!
लोग अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा दूसरों की ज़िंदगी में झांकते हैं..
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
मस्त विचार 848
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये. “– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“
वजह पूछने का तो मौका ही नही मिला, _
सुविचार 967
अधिकतर लोग झूठी दुनिया में जीतें हैं,,,,,,,,,
सच को भी समझना चाहिए ………..
मस्त विचार 847
किसी को नसीहत देने के लिए जितनी अक्ल चाहिए,
नसीहत से फायदा उठाने के लिए उस से कहीं ज्यादा अक्ल चाहिए.
मस्त विचार 846
हर किसी को खुश रख सकूँ,वो तरीका मुझे नहीं आता.
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का, सलीका मुझे नहीं आता.
दिल में कुछ और जुबां पे कुछ
ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता.
मस्त विचार 845
और जब करने वाले लग जाते है तो वो हकीकत हो जाती है.
हर हकीकत शुरू में एक सपना होती है,
मस्त विचार 844
फ़िर नयी जैसी लगेगी… …. ज़िन्दगी ही तो है…!
ज़रा सा रफू करके देखिये ना,
सुविचार 966
अपने लछ्य पर पहुँच जाएं, इससे पहले कि आपका लछ्य आप को लात मार दे.





