सुविचार 829

जीवन जीने के लिए सन्तुलन की बड़ी आवश्यकता है और सन्तुलन बिगाड़ने के लिए न जाने कितनी- कितनी परिस्थितियाँ हमारे सामने रोज आती हैं — यह ध्यान रखना पड़ेगा कि परिस्थिति कुछ भी हो, हमें अपने आप को सम्भालना है.

सुविचार 828

सुख, सुविधा और सुरछा — ये तीन ऐसे बिन्दु हैं, जिन्हे केन्द्र बना कर और स्वयं परिधि बन कर मनुष्य चक्कर काटता रहता है.

सुविचार 827

एक स्वस्थ दिमाग की यह खूबी है कि न केवल वह स्वयं काम में लगा रहता है, बल्कि औरों को भी रचनात्मक कार्य में संलग्न रखता है.

सुविचार 826

कोई भी आदमी इतना महत्त्वहीन नहीं होता कि उस का उदाहरण दूसरों के सामने न रखा जा सके.

सुविचार 825

मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे खुश रह सकता है – यह मंत्र अगर आप को आ गया, तो समझिए जीवन अनमोल है, वरना हम लोग जीवन को जहर समझ कर ही पीते रहते हैं और हर छोटी छोटी बात का रोना रोते रहते हैं. “जीवन इतना कष्टमय और दुखदायी नहीं है, जितना हम समझते हैं.”

मस्त विचार 762

किसी इन्सान को अपने जैसा बनाने के लिए दबाव न डालें. उन्हें वैसे ही अपनाएँ, जैसे वे हैं. एक- दूसरे की पसन्द को सम्मान देंगे तो हम ज्यादा खुश रहेंगे.

मस्त विचार 761

गंदे एवं निरुपयोगी विचार……..

मन- मस्तिष्क में उमड़- घुमड़ कर ही शांत नहीं होते,

वे हम से वैसे ही गंदे एवं निरुपयोगी काम भी करा डालते हैं.

भले इस से बाद में हमें शर्मिंदगी उठानी पड़े.

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