सुविचार 3145
” सोच का अँधेरा ” रात के अँधेरे से ज्यादा खतरनाक होता है..
” सोच का अँधेरा ” रात के अँधेरे से ज्यादा खतरनाक होता है..
ये तजुरबा भी मिला है मुझे बुझे हुए चरागों से अक्सर..
कि हर “अँधेरा” भी, कुछ ना कुछ “देखना” सिखाता है…
कि हर “अँधेरा” भी, कुछ ना कुछ “देखना” सिखाता है…
तो गलतियाँ हमारे लिए सफलता की सीढ़ी है.
_ यह हो गया तो कोई समस्या आपके सामने टिक नहीं सकती.
लेकिन खुद को पढ़ने के लिए मौन की…
_ क्योंकि बाद में भी वह साथ ही है.!!