सुविचार – किसी के खो जाने का दर्द – 181

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खो जाने वाले के परिवार से कोई पूछे किसी के खो जाने का दर्द,

_ पूरा जीवन इसी उम्मीद में निकल जाता है कि शायद वो मिल जाए,

_ किसी के मरने से कहीं ज्यादा किसी के खो जाने का दर्द ज्यादा होता है,

_ जो इस दुनिया से चला गया उसका हमें पता है, जो खो गया उसके लिए पूरा जीवन यूं ही ऊहापोह में निकल जाता है.

सुविचार – हैरान करती हैं कुछ बातें.. – 180

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*हैरान करती हैं कुछ बातें,,,

किसी का व्यवहार
किसी का हद से ज्यादा बोलना…
तो किसी की चुप्पी,,,,
किसी का हमसे मतलब होने तक बात करना,,,
किसी का हमसे बिन वजह दुश्मनी निभाना,,,
किसी का हमारी खुशियों को देख,,,
मन ही मन दुखी होना,,,
तो किसी का मासूमियत से भरा चेहरा,,,
जिसके पीछे छिपा होता है एक काला चेहरा,,,
किसी का बिन वजह हमारी परवाह करना,,,
तो किसी का जान बुझकर Ignore करना,,,,
कहीं अजनबियों का अपनापन,,,
तो कहीं अपनों का परायापन,,,
हैरान करती हैं कुछ बातें,,,हरदम*

सुविचार – मदद, सहायता, उपकार, इमदाद, हेल्प, Help – 179

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हम किसी की मदद उसके ख्वाबों को पूरा करने में तो कर सकते हैं..

_ लेकिन जब कोई इंसान ख़्वाब ही न देखे तो हम उसकी आंखों में ख़्वाब नहीं भर सकते.
_ हस्सास इंसान दूसरों की दुःख तकलीफ़ मेहसूस भी करता और परेशान भी होता है.
_ हम उनकी मदद भी करते हैं, उन्हें सुनते भी हैं, अपनी हदों से आगे जाकर उसकी मदद भी कर सकते हैं लेकिन हम किसी और के हिस्से की कोशिश नहीं कर सकते.
_ हम किसी का हौसला तो बढ़ा सकते हैं, हम रास्ता भी दिखा सकते हैं..
_ लेकिन हम किसी और के हिस्से का क़दम नहीं बढ़ा सकते हैं.
_ कुछ लोग हमारे मूंह पर तमाचा मार जाते हैं कि तुम नहीं समझोगे,
_ हां हम वाकई नहीं समझते.. क्योंकि हम चाहते हैं कि आप अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ें.
_ रास्ता दिखाया जा सकता है लेकिन रास्ते पर उसी को चलना होता है जिसकी लड़ाई होती है.
_ सच तो ये है कि मुझे अब किसी भी चीज़ का कोई मलाल नहीं है कि मैंने किसी ऐसे अपने जानने वाले इंसान की मदद नहीं की.. जिसकी मदद की जानी चाहिए थी.
_ दरअसल ज्यादातर लोगों को मदद नहीं चाहिए होती है बस एक कंधा चाहिए होता है जहां वो बस सुना पाएं और रोते रहें.
_ मैंने ऐसे तमाम रोने वाले लोगों से दूरी इख्तियार कर ली है.
_ अब मैं अगर उन्हें सुनती हूं तो उतना जितने में मेरे ज़हन पर कोई असर न हो, और सलाह देनी तो बिलकुल ही बंद कर दी है.!!
– Nida Rahman
दूसरों का उपकार करना स्वयं का ही उपकार करना है.

_ इसलिए जितना हो सके उपकार करे.
_ बदले में क्या मिलेगा.. इसकी चिंता बिल्कुल न करे.
_ उस व्यक्ति से भले न मिले, भले वो चोट ही दे,
_ पर इतना मिलेगा.. जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.!!

सुविचार – इनकार – अस्वीकार – नकार – Denied – 178

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कोई भी काम शुरू करने से पहले उसके परिणाम के बारे में जरुर सोच ले और उसी के अनुसार क्रिया करे.

_ ख़ुशी और शांति पाने के लिये अपने दिमाग में हमेशा किये जा रहे काम के परिणाम को रखिये.
_ किसी चीज के लिए इनकार करना भी _ हमें दुःख की भावनाओं को कम करने में मदद करता है ; इनकार में एक अनुग्रह है.
_ यह प्रकृति का तरीका है कि हम उतना ही अंदर आने दें” – जितना हम संभाल सकें.”

सुविचार – माफ़ – माफ – माफ़ी – माफ़ी – 177

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लोगों को माफ़ करना तो एक बार को संभव है, लेकिन उन्हें अपनी ज़िंदगी में वही पहले वाला स्थान दे पाना.. लगभग नामुमकिन.!!
किसी की जिंदगी बर्बाद करके माफ़ी तो मांग सकते हो,

_ मगर बर्बाद की हुई जिंदगी को दोबारा संवार नहीं सकते..

आप कुछ लोगों को अपनी ज़िंदगी में दोबारा आने का मौक़ा दिए बग़ैर भी माफ़ कर सकते हो.
माफ़ी से कुछ नहीं होता, कुछ बातें दिल को लग जाती हैं, जो कभी भुलाई नहीं जाती..
माफ़ी सिर्फ उन्हें मिलनी चाहिए, जो जाने अनजाने में भूल कर बैठते है.. ना की उन्हें.. जो सोच समझकर चालाकी करते हैं.
हर बार इंसानियत के नाम पर माफ कर देना सही नहीं होता..

_ कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहाँ हमारी चुप्पी और नरमी को लोग हमारी कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसे में खुद की हिफाज़त के लिए थोड़ा सख्त होना भी जरूरी हो जाता है..
_ ताकि सामने वाला समझ सके कि हर बार सहना हमारी मजबूरी नहीं, हमारी मर्यादा है.!!
हम नहीं जानते कि कौन सा व्यक्ति इस समय किस परिस्थिति से गुजर रहा है,

_ लेकिन हम बिना सोचे-समझे ही दूसरे व्यक्ति के दर्द को जाने बिना ही उसके बारे में यह राय बनाना शुरू कर देता है कि फलां व्यक्ति ऐसा है या वैसा है.
_ न जाने ऐसे कितने लोगों की हमारे मन में छवि बुरी बनी हुई है, कि फलाना व्यक्ति ऐसा है वैसा है..!!
_ यदि किसी ने कुछ गलत किया हो आपके जीवन में, आपको दुख, कष्ट या हानि पहुंचाई हो तो उसे माफ कर दीजिए.
_ जीवन छोटा है, हमें लोगों को माफ़ कर देना चाहिए, चाहे उन्होंने हमारे साथ कितना भी गलत किया हो,
_ अपने भीतर किसी व्यक्ति के लिए कड़वाहट रखकर, इस जीवन को सहजता और शांति से नहीं जिया जा सकता, इसलिए माफ़ करें !!

सुविचार 176

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किसी की करुणा व पीड़ा देख कर मोम की तरह पिघलने वाला ह्रदय तो रखो, परन्तु विपत्ति की आँच आने पर कष्ट और प्रतिकूलताओं के थपेड़े खाने की स्थिति में चट्टान की तरह दृढ व ठोस बने रहो.

 

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