सुविचार – उम्र – 097

जिंदगी की सबसे बड़ी चीज है अपने दिमाग को जवान रखना,

_ कोई उम्र का बढ़ना नहीं रोक सकता, पर अपनी उत्पादकता बढ़ाते हुए उम्रदराज होना कुछ और ही है,

_ हम अपनी नासमझी के कारण रोज – रोज मरते हैं.

_ उम्र है रेत सी कैसे थामोगे, फिसलती रहेगी !!

सारी उम्र खटते रहते हैं हम सुविधाएं जुटाने में.

_ जब सुविधाएं इकट्ठी हो जाती हैं तो उनका उपभोग करने के लिए उम्र नहीं बचती.

When I was young, I was poor. But after years & years of hard work, now I am not poor, but no longer young too.

  • Manika Mohini
हमें खुले दिमाग के लोगों की जरूरत है ;

_ संकीर्ण विचारधारा [narrow minded] के लोग हमारे जीवन को पीछे धकेलते हैं.
_ इनका हमारे जीवन को आगे बढ़ाने में कोई योगदान नहीं होता.
_ यदि आप में जीवन में वैभिन्य [variety] ढूँढते रहने की क्षमता है,
सौंदर्य के प्रति आकर्षण है,
मन में चांचल्य [fickleness] को बसाए रखने का बचपना है,
दिल में ज़िंदादिली [liveliness] है,
हर नएपन से मुग्ध हो जाने वाला सम्मोहन है,
और आते हुए प्रेम को स्वीकार करने का जज़्बा [passion] है,
… तो आपकी उम्र कितनी भी हो, आपको उम्र प्रभावित नहीं करती.
पहले जो बातें मामूली लगती थीं, वही बड़ी उम्र में घाव बन जाती हैं..

_ जो बातें पहले दिल बहलाने के लिए होती थीं, वो अब जीवन से भागने का ज़रिया बन जाती हैं
_ हम सोचते हैं कि समय के साथ समझ आएगी, लेकिन समझ के साथ अक्सर कड़वाहट, अकेलापन और थकान भी आती है
_ असल में, उम्र हमें मजबूत नहीं बनाती, वो बस हमें चुप रहना सिखा देती है और हम उसे मैच्योरिटी समझ बैठते हैं.!!
हमें लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों में मैच्योरिटी आ जाती है,

_ पर सच तो ये है कि वक्त के साथ लोग सिर्फ बड़े होते हैं..
_ अंदर से कई बार और ज़्यादा टूटे हुए, थोड़े उदास, थोड़ा थके हुए, और कभी-कभी अपने ही ख्यालों में उलझकर दुनिया को समझने की कोशिश करते-करते खुद से ही दूर हो जाते हैं.!!
**कई बार जरुरी होता है उम्र में “बड़े” लोगों को बताना.. कि उनकी सोच कितनी “छोटी” है..

_ कभी-कभी कुछ लोग हमें एक कड़वा सच धीरे से थमा देते हैं..
– उम्र बढ़ने से समझ नहीं बढ़ती.. और हम चुपचाप देखते रह जाते हैं कि जिनसे हमने गहराई की उम्मीद की थी..
_ वही समझ के सबसे सतही किनारे पर खड़े मिलते हैं.
– “किसी की उम्र का सम्मान कीजिए, पर उनकी सोच की ऊँचाई को देखकर ही दिल में जगह दीजिए.!!
_ उम्र का बड़ा होना सम्मान का कारण नहीं होता – सम्मान तो चेतना के तेज से मिलता है..

_ यदि उम्र बढ़ने के साथ आपकी चेतना उदास, अशांत या अशुद्ध हो जाए, तो केवल वर्षों का बोझ कोई गरिमा नहीं देता.
_ सम्मान, योग्यता और पात्रता अर्जित करनी पड़ती है –
_ वह आती है एक जागृत, सार्थक और निर्मल जीवन से, न कि दूसरों की आलोचना या स्वयं की वाहवाही से..
_ जीवन की सच्ची खूबसूरती उम्र में नहीं, चेतना की उजास में होती है.!!
वैसे ज़िन्दगी में कुछ है नहीं.. बस जिए जाओ.

_ सुबह होती है, शाम होती है और उम्र यूँ ही तमाम होती है.!!
ए खुदा … हमें उम्र दराज न करना _

_थोड़ा कम जी लेंगे _ मगर किसी का मोहताज़ न करना ..!

उम्र बूढ़ा बनाती है तो ठीक है,

_ पर शरीर लाचार बना दे _ इसका दुख सालता है..!!

कई बार जरुरी होता है उम्र में ” बड़े ” लोगों को बताना _

_ कि उनकी सोच कितनी ” छोटी ” है ..

ज़िंदगी के एक ही मायने ताउम्र नहीं रहते..

_ हर उम्र में इसके मायने बदल जाते हैं.!!

बढ़ती उम्र बताती है कि कुछ लोगों से दूरी बनना नुकसान नहीं था,

_ असल में तो वही सबसे बड़ा फायदा था, बस देर से समझ आया.!!

धीरे-धीरे बढ़ती हुई उम्र आपको यह अवश्य बताएगी कि,

_ कुछ लोगों को खो देना वास्तव में बहुत कुछ पा लेने के जैसा था.!!

उम्र तो बस गिनती बढ़ाती है..

_ असली समझदारी तो तब आती है.. जब ज़िंदगी दो-चार थप्पड़ मारती है.!

हमें लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों में मैच्योरिटी आ जाती है,

_ लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है..!!

बढ़ती उम्र का भी अपना ही अलग मज़ा है, आंखें धुंधली हो जाती हैं,

_ लेकिन लोगों को पहचानने में आप माहिर हो ही जाते हैं.!!

उम्र बढ़ने के साथ शौक तो खत्म हो गये,

_ लेकिन- जिंदा रहने के लिये जरुरतें मुंह फैलाने लगी हैं.!!

उम्र बढ़ने [Ageing] और बढ़ने [Growing] में अंतर है.

_ उम्र [Ageing] बढ़ना जीवन में वर्ष जोड़ना है, बढ़ना [Growing] जीवन में वर्ष जोड़ना है.

There is a difference between Ageing and Growing.

Ageing is adding years to life, Growing is adding life to years.

” उम्र की ऐसी की तैसी “

घर चाहे कैसा भी हो

उसके एक कोने में

खुलकर हंसने की जगह रखना…

सूरज कितना भी दूर हो

उसको घर आने का रास्ता देना…

कभी कभी छत पर चढ़कर

तारे अवश्य गिनना…

हो सके तो हाथ बढा कर

चांद को छूने की कोशिश करना…

अगर हो लोगों से मिलना जुलना

तो घर के पास पड़ोस जरूर रखना…

भींगने देना बारिश में..

उछल कूद भी करने देना..

हो सके तो बच्चों को…

एक कागज़ की किश्ती चलाने देना…

घर के सामने रखना एक पेड़

उस पर बैठे पंछियों की बातें अवश्य सुनना…

घर चाहे कैसा भी हो

उसके एक कोने में

खुलकर हंसने की जगह रखना…

चाहे जिधर से गुज़रिये

मीठी सी हलचल मचा दिजिये…

उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है

अपनी उम्र का मज़ा लीजिये…

ज़िंदा दिल रहिए जनाब

ये चेहरे पे उदासी कैसी

वक़्त तो बीत ही रहा है

” उम्र की ऐसी की तैसी “

सुविचार – खुशी – ख़ुशी – खुश – ख़ुश – खुशियां – 096

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“खुशी पाने की अवस्था नहीं है, बल्कि यात्रा करने का एक तरीका है.”

“Happiness is not a state to arrive at, but a manner of traveling.” —Margaret Lee Runbeck

“पैसा आपको खुश नहीं करेगा, लेकिन हर कोई खुद ही इसका पता लगाना चाहता है”

मैं ऐसे खुश लोगों को जानता हूं जिनके पास मुझसे कम संपत्ति है और मैं ऐसे दुखी लोगों को जानता हूं _ जिनके पास मुझसे कहीं अधिक संपत्ति है.

_ पैसा ख़ुशी का रहस्य नहीं है.  _ऐसा न कभी हुआ है और न कभी होगा. __और जितनी जल्दी हमें इस सत्य का एहसास होता है,  उतनी ही जल्दी हम उस स्वतंत्रता की खोज कर सकते हैं जो धन की इच्छा न रखने के साथ जुड़ी होती है.

“Money won’t make you happy, but everybody wants to find out for themselves.”

I know happy people who own less than me and I know unhappy people who own far more. Money is not the secret to happiness. – Zig Ziglar

बात जताने के भी कुछ नियम और मर्यादायें होती है,

_ कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाता..
_ सिवाय इन पुराने बंधनों में खुद को बांधने से.
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!!
– निरर्थक
कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाए..
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!
जीवन के सबसे ख़ुशी के पलों में से एक वह होता है _जब आप उस चीज़ को छोड़ने का साहस पाते हैं _जिसे आप बदल नहीं सकते.

One of the happiest moments in life is when you find the courage to let go of what you cannot change.

ऐसे लोग हैं जो आपके पास जितना है उससे कम में भी अधिक खुश हैं.

There are people out their happier with less than what you have.

खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार लोग खुशी का दिखावा करते हैं.
“खुश दिखना आसान है… खुश होना थोड़ा मुश्किल है”
खुद के साथ को स्वीकार करना, और खुश रहना ; क्योंकि जितना आप लोगों को खुशी की वजह बनाते हो, आखिर में वही आप को सब से ज्यादा दुखी करते हैं..!!
ये कितनी अजीब बात है कि हम सब जीवन भर खुश रहने के लिए ‘हर दिन परेशान रहते हैं’.!!
वो खुशी जो आगे चलकर गहरा दुख दे, उसे आज ही छोड़ देना बेहतर है, मन को हल्का रखने के लिए यही सही रास्ता है.!!
लोगों को परेशानी बहुत है, खुश है कोई तो हैरानी बहुत है..!!
खुश होने के लिए बहुत बड़ी चीजों की जरूरत नहीं होती है..

_ मामूली सी चीज भी बड़ी खुशी देती हैं !!

दूसरों की ज़िंदगी में क्या चल रहा है, इस बात पर ध्यान देते देते..

_ हमारे दरवाज़े पर जो खुशियाँ दस्तक दे रही हैं, उन्हें खो देते हैं..!!
विपरीत परिस्थितियों में भी यदि आप खुश रहने की ठान लें..

_ तो आपको धीरे-धीरे विपरीत को अपने पक्ष में करना आ जाएगा.!!

सबसे पहले खुद को खुश रखिए,

_ जो वाकई में आपके अपने होंगे, वो आपको खुश देखकर ही खुश हो लेंगे.!!

आपसे मिलने वाला हर व्यक्ति हमेशा पूछता है कि क्या आपका करियर है, या आपका अपना घर है ? जैसे कि जीवन किसी तरह की किराने की सूची हो.

_ लेकिन कोई आपसे कभी नहीं पूछता कि आप खुश हैं या नहीं.!!
“अपनी ख़ुशी को उस चीज़ पर निर्भर न रहने दें _जो आप खो सकते हैं.”

_ उस जगह से बाहर निकलें और दूसरी जगह पर खुश रहें.. जहाँ आप सहज हैं.!!

 

“असली ख़ुशी काफ़ी सस्ती है, फिर भी हम नकली ख़ुशी के लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाते हैं.”

यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि_ कोई और क्या करता है,
..तो आप को कोई समस्या है.!!
खुशी और सुख अचानक हमारी झोली में आकर नहीं गिरते.
_ खुशी और सुख पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है.!!
सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है…!
खुश रहना उतना महँगा नहीं है, लेकिन लोगों को यह दिखाने की कोशिश मे लगे रहना की आप ख़ुश हो, बहुत महँगा पड़ जाता है.!!
वास्तविक ख़ुशी मन की एक ऐसी स्थिति है,

_ जिसमें ख़ुशी का विचार भी पूरी तरह से अनुपस्थित होता है..!!

कुछ जीतने पर भी मन ख़ुश ना हो तो समझ लेना,

_ कुछ ऐसा हार गए हो जो जीत से ज्यादा जरुरी था..!!

“कभी-कभी दूसरों की खुशी के लिए जलते-जलते हम खुद ही राख हो जाते हैं…

_ फिर एक दिन सिखना पड़ता है — कि खुद को बचाना भी सेवा है”
ज़रूरी नहीं कि खुश दिखने वाले व्यक्ति के जीवन में सबकुछ सही चल रहा हो..

_ खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार खुशी का दिखावा होती है.!!
खुद को सही जगह रखें …गलत जगह पर आप सही हो कर भी खुश नहीं रह सकते.!!
हमने दुख को इतना आकर्षक बना दिया है कि हम खुशी को धोखे की तरह देखने लगे हैं..!!
जब जीवित रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प न हो, तो खुश दिखना जीवन को आसान बनाने का एक मूल्यवान अस्त्र है.
खुश रहें, पर दूसरों की खुशियों की कीमत पर नही.
_ जो करना है, अपने बल पर करें, दूसरों के सहारे नहीं.. आत्मनिर्भर बनें.!!
हर किसी को खुश करने की कोशिश मत करो, यह तराजू पर मेढक का बोझ डालने जैसा है,

_ जब आपकी आंतरिक चेतना कहती है कि _आप ठीक हैं तो _आपको हर किसी को खुश रखने की कोई जरूरत नहीं है..!!

हमें खुद को खुश रखना चाहिए, वैसे भी लोग कभी हमसे खुश नहीं होते,

_ वो तो केवल अपने अनुसार ख़ुश होते हैं.!!

कुछ लोग खुद के पास सब कुछ होते हुए भी.. दूसरों की छोटी से छोटी खुशियों से जलते हैं..

_ ये सोचकर कि वो इंसान इतने कम में खुश कैसे है और वो खुद इतना सब होते हुए भी दुखी क्यों हैं..!!

खुशी कभी दवा से नहीं मिलती,

_लेकिन खुशी कई बीमारियों को ठीक कर सकती है.!!

अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो वह इंसान बन जाइए..!

_ जो अपनी खुशियों की चाबी दूसरों को नहीं सौंपता.!!

जो प्राप्त है उसमें खुश रहना सीखिए ;

_ किचिर किचिर करने वालों को सुख नसीब नहीं होता.!!

ज़िन्दगी ऐसे जीओ, जैसे अगला पल जीवन का आखिरी पल है.

_ जब आप यह सोच कर जीवन जीते हैं, तो आप भरपूर ख़ुशियाँ बटोरते हैं.!!

इंसान को अपनी परेशानियां गिनने का शौक होता है, लेकिन वह अपनी खुशियों को नहीं गिनता.

_ यदि वह उन्हें गिनता जैसा कि उसे करना चाहिए, तो वह देखेगा कि उसे पर्याप्त खुशी प्रदान की गई है.
दूसरों की गलतियों से हमें दुख हो सकता है, लेकिन उसे कब तक अपने मन में रखना है, यह हमारे ऊपर है.

_समय और खुशी हमारे अधिकार हैं, इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है, “खुद खुश रहिए.!!”
मैं यह सोचने की गलती नहीं करता कि जो खुशी मुझे किसी में या कहीं और मिलती है.

_ मुझे अपने अंदर ख़ुशी मिलती है _ क्योंकि मेरा मानना ​​है कि _ मैं अपने आस-पास के लोगों को तभी खुश कर सकता हूँ जब मैं खुश रहूँगा..!!

_ मैं संक्षेप में यह कहना चाह रहा हूं कि आप जो खुशी तलाश रहे हैं वह आप में है.

जीवन में सब कुछ फ़ायदे या नुक्सान के लिए नहीं होता, कुछ बातें दिल के लिए और अपनी ख़ुशी के लिए भी होती है.!!
खुश लोग जानते हैं कि खुशी एक विकल्प है ; _ वे जानते हैं कि यह वर्तमान परिस्थितियों की प्रतिक्रिया नहीं है. _ इसके बजाय, ख़ुशी एक उपलब्ध निर्णय है ;

उन्होंने उस सोच को ख़त्म कर दिया है जो जीवन में आनंद का अनुभव करने से पहले सब कुछ सही होने का इंतज़ार करती है.

दूसरी ओर, दुखी लोग हमेशा खुशी की तलाश में रहते हैं. _ उनका मानना ​​है कि ख़ुशी कुछ नया या कुछ अलग पाने पर निर्भर है.

_ वे लगातार पीछा कर रहे हैं, लेकिन कभी हासिल नहीं कर पाते ; __ कई बार, वे इसे सभी गलत स्थानों पर खोजते हैं.

इस दुनिया में वही व्यक्ति खुश रह सकता है, जो दूसरों को खुश देखकर खुश होता है.

_ जब तक हम दूसरों को खुश देखकर दुखी होते रहेंगे, तब तक यह तय मानिए कि खुशी हमारे दिल में नहीं आ सकती.

किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना जो आपको खुश करता है, अच्छी बात है,

_ लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना न भूलें जो आपसे बात करके खुश होता है,

_आप दोनों में बहुत अंतर देखेंगे.!!

खुश लोग अपनी परिस्थितियों को पहचानते हैं और उनसे भागने की आवश्यकता नहीं रखते ;

_ इसके बजाय, वे अपने अंदर शांति का अभ्यास करना चुनते हैं.

हर किसी का सही-गलत देखने का नजरिया अलग होता है.

_ जो आपको ठीक न लगे, वो किसी और के लिए सही हो सकता है.
_ आख़िर में मायने बस यही रखता है — जो जिससे खुश है, वही उसके लिए सही है.!!
यदि हम अच्छाई को उतना ही बढ़ा दें, जितना बुराई को बढ़ाते हैं,

_तो हम सब कहीं अधिक खुश होंगे.!!

कहते हैं, ‘दुःख इंसान को निखारता है.’ भीतर से निखारता होगा, बाहर से तो आदमी मुरझाया नज़र आता है.

_ ख़ुशी बेशक निखारती है, भीतर (मन), बाहर (तन) दोनों स्तरों पर.

खुशियां हमारे आसपास ही होती हैं, ये हमें तभी महसूस होती है, जब हम सजग और होशमंद होते हैं,

_ उन बातों को देखिए, गौर कीजिए जो सामान्य सी हैं, सामान्य बातों में ही छिपे होते हैं खुशियों के बड़े राज.!!
उन लोगों की वजह से, जिन्हें आपकी बिल्कुल भी परवाह नहीं है, उस व्यक्ति की खुशी को नजरअंदाज करना मूर्खता है.. जो आपको खुश करना चाहता है.!!
जो आप के लिए सही है, उसके साथ आप को खुश रहने की कोशिश नहीं करनी पड़ती _बल्कि आप खुश रह लेते हो..!!
आप सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो इसका अर्थ है कि आप ने कुछ भी प्राप्त नहीं किया..!!
यहाँ सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है..!
अपनी खुशी के लिए, उन सभी को छोड़ दें.. जो आपको दुख पहुंचाते हैं.!!
आज का छोटा लालच कल की बड़ी बर्बादी ला सकता है ; इसलिए ऐसी किसी भी खुशी को तुरंत त्याग दें.. जो आपके भविष्य को अंधकार की ओर ले जाए.!!
जब कोई बार-बार अपनी तकलीफों की कहानी सुनाता है,

_ तो खुशियाँ उसके करीब आने से डरती हैं.!!

ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो अपनी पूरी ज़िंदगी इस ख़ुशी में गुज़ार देते हैं कि _वो जिनको प्यार करते हैं वो खुश हैं और उनकी ख़ुशी के लिए वो अपने सारे कष्ट भूल जाते हैं.
अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए __ दूसरों पर दोषारोपण एक खतरनाक आदत है और खुशी के लिए एक बहुत बड़ी बाधा है.

कमियों की जिम्मेदारी किसी अन्य व्यक्ति या बाहरी कारक पर डालने से परिवर्तन की कोई भी आवश्यकता या प्रेरणा तुरंत समाप्त हो जाती है.

इसके बजाय, पीड़ित उस कोठरी में फँसा रहता है जिसे उसने स्वयं बनाया है – _ किसी और के आने का इंतज़ार करता है जो उसकी समस्याओं का समाधान करेगा.

_ लेकिन हर बार जब हम अपनी नाखुशी के लिए किसी और को दोषी ठहराते हैं, तो हम हार जाते हैं। और लंबे समय में, यह तृप्ति और खुशी को पहुंच से दूर रखता है.

_ आपकी खुशी पूरी तरह से खुश रहने के आपके निर्णय पर आधारित है – और यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सबकों में से एक हो सकता है _ जो हममें से कोई भी सीख सकता है.

सबसे पहले व्यक्ति को आत्म-विश्लेषण करना चाहिए ; _ अपनी वास्तविक चाहतों, जरूरतों, खुशियों आदि का पता लगाएं और संस्कृति, धर्म और परिवार के बाहरी प्रभावों को दूर करें, _ जिसने आपके लिए खुशी को परिभाषित किया है.

ख़ुश रहने की कुंजी स्वयं को जानना और इस दुनिया में अपना रास्ता खोजना है ; _ इससे ख़ुशी मिलती है. एक खुशी जो विपरीत परिस्थितियों में भी आपके भीतर बनी रहती है.

_ यह आपको असहायता की भावनाओं से बचाता है और आपको कठिन समय में सहना और धैर्य रखना सिखाता है.

_यह आपको अपने जीवन में सभी सकारात्मक चीजों की सराहना करना सिखाता है, जिससे आपकी खुशी बनी रहती है.

जो बार बार सहानुभूति के बहाने आपको आपका दर्द ..गुज़रा वक़्त याद दिलाए तो ..समझ लीजिए कि …वो आपको कभी खुश नहीं देखना चाहता, और ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए.
जो व्यक्ति हर समय खुश और सुखी-संतुष्ट दिखता है, उसने जीवन में न जाने कितने समझौते किए होंगे..

_ और जिस व्यक्ति को सब लोग पसंद करते हैं, उसने न जाने कितना गरलपान किया होगा, दूसरों की गलतियों-बुराइयों को कितना अनदेखा किया होगा..
_ हर समय खुश दिखना आसान नहीं है, न ही आसान है कि हर आदमी आपको पसंद करे..
_ मन को घोट कर रखना पड़ता है.!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.

_ जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं ; इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.!!
आपकी अपनी खुशी का कारण कोई नहीं है – आपके अलावा,,, आप स्वयं हैं..
_बाहर की दुनिया में शांति, संतोष और आनंद की तलाश में अपना समय और प्रयास बर्बाद न करें.!!
जिन लोगों को जीना आता है…वह बिना किसी सुविधाओं के भी खुश रहते हैं…और…जिन्हें जीना नही आता…वह सभी सुविधाओं के होते हुए भी दुखी रहते हैं..
_ क्योंकि…आजकल के दौर में हर इंसान केवल सुविधाओं को ही अपना सुख समझता है…जबकि सही मायने में सुख अपने मन की आत्मिक-संतुष्टि है..!!
आपके अलावा कोई और आपको बेहतर महसूस नहीं करा सकता, यही सबसे बड़ा फर्क है.

_ क्योंकि आपको वास्तव में किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
_ आप खुद खुश रह सकते हैं, क्या यह खूबसूरत नहीं है और निश्चित रूप से किसी के आने और हमें बचाने की कामना करने से कहीं कम तनावपूर्ण है ?
हम सभी के साथ खुशियां बांटना चाहते हैं,

_ लेकिन लगता नहीं कि खुशियां बांट रहे हैं,
_ बल्कि अपनी खुशियों का प्रदर्शन कर रहे हैं…
_ लेकिन यही खुशियां बहुत जल्दी गायब क्यों होने लगती है…
_ ये भी सोचने की जरूरत है…
— हमने तो ज्यादातर लोगों से यही सुन रखा है कि लोगों की नज़र भी लगती है,
_ इसलिए अपनी खुशियों को बुरी नज़र वालों से भी बचाएं,
_ क्योंकि खुश होने वालों से ज्यादा जलने वाले लोग भरे हुए हैं….
_ बाकी जो लोग जिसमें खुश हैं वो करें…. सबकी अपनी-अपनी इच्छा..
खुशी सब कुछ होने से नहीं आती..

_ आप फर्स्ट क्लास हॉस्पिटल में पैदा हुए, मेरी डिलीवरी घर पर हुई, हम दोनों जिन्दा बच गए.
_ आप एक प्राइवेट स्कूल में गए और मैं एक सरकारी स्कूल में गया, हम दोनों ने ही हाई स्कूल की पढाई समाप्त की.
_ आप बिस्तर से उठे और मैं जमीं से सोकर उठा, हम दोनों ने शांतिपूर्ण रात्रि विश्राम किया.
_ आपके सब महँगे कपड़े, मेरे सब साधारण और सस्ते, हम दोनों के तन ढके हुए हैं.
_ आपने तला भुना हुआ खाया, मैंने साधारण खाना खाया _ लेकिन हम दोनों ने फिर भी अपनी संतुष्टि से खाया..
_ आप बीएमडब्ल्यू, रेवो, रेंज रोवर, पर सवारी करते हैं और मैं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करता हूं ; _ लेकिन फिर भी हम अपने विभिन्न गंतव्य तक पहुंच गए.
_ इसलिए ये समझें, जीवनशैली कोई प्रतियोगिता नहीं है और बहुत सारी चीज़ें करने के अलग-अलग तरीके हैं, अलग-अलग गलियाँ सभी एक ही मंजिल की ओर ले जाती हैं,
_ सिर्फ इसलिए कि और लोग तेजी से काम कर रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आप असफल हो रहे हैं.
_ खुशी सब कुछ होने से नहीं आती है, लेकिन जो आपके पास है उसको सबसे अच्छा बनाना, यह सब कुछ है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.
_ सबसे खुश लोगों के पास सब कुछ सबसे अच्छा नहीं होता है, वे बस जो कुछ उनके पास होता है _ उसे सबसे अच्छा बनाते हैं.
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_ मैंने सीखा है कि अपनी शर्ट पर क्रीज़ के बारे में परेशान नहीं होना चाहिए ;
_ “व्यक्तित्व” दिखावे से ज्यादा जोर से बोलता है.
_ इसलिए अपने पैसे, संपत्ति और अन्य चीजों के बारे में अहंकार को रोकें,
_ आप खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे और कोई भी आपके साथ नहीं जाएगा.
अगर खुश रहना है तो ये तीन बातें गांठ में बांध लो..

1-अपना मन कभी ना मारें..- वरना एक वक्त ऐसा आएगा कि किसी चीज में मन ही नहीं रहेगा..
2- खुद की क़ीमत पर किसी की मदद ना करें.
_ क्योंकि अहसान मानने वाला जमाना अब नहीं रहा.
3- अपने दुःख पर तुरंत एक्शन लें, कोई दूसरा नहीं आयेगा.
– खुद को खुश रखने का दायित्व स्वयं का होता है.
ख़ुशी का मतलब वह सब कुछ पाना नहीं है जो आप चाहते है, _यह आपके पास जो कुछ भी है उसका आनंद लेने के बारे में है.
Happiness is not about getting all you want. It is about enjoying all you have.
ख़ुशी उन लोगों को कभी नहीं मिलेगी जो उनके पास पहले से मौजूद चीज़ की सराहना करने में विफल रहते हैं.
Happiness will never come to those who fail to appreciate what they already have.
आपकी खुशी दूसरों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए.

Your happiness should never depend on others.

खुशी मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है. शांति और तर्कसंगतता खुशी की आधारशिला हैं.

Happiness is man’s greatest aim in life. Tranquility and rationality are the cornerstones of happiness.

सबसे खुश लोगों के पास हर चीज़ सर्वश्रेष्ठ नहीं होती, वे बस अपने पास मौजूद हर चीज़ को सर्वश्रेष्ठ बनाते हैं.

The happiest people don’t have the best of everything, they just make the best of everything they have.

चीज़ों के बेहतर होने का इंतज़ार न करें. जीवन हमेशा जटिल रहेगा.

_अभी खुश रहना सीखें, नहीं तो आपके पास समय खत्म हो जाएगा.

Don’t wait for things to get better. Life will always be complicated. Learn to be happy right now, otherwise you’ll run out of time.

आपको खुश रहने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना होगा. यह दुनिया बहुत क्रूर है.

_ शिकायत मत करो. बस खुद को खुश रहने के लिए प्रशिक्षित करो.

You have to train yourself to be happy. This world is very cruel. Don’t complain. Just train yourself to be happy.

जीवन उन चीजों को सहन करने के लिए बहुत छोटा है जो आपको खुश नहीं करतीं.

Life is too short to tolerate things that don’t make you happy.

दुनिया में दुखी करने वाले सैकड़ों लोगों से आप रोज़ टकरा सकते हैं,
_लेकिन खुशी देने वाले कम ही लोग मिलते हैं.!!
“जब तक जीवन है खुश रहो “
__ जीवन एक बहुत ही छोटी यात्रा है, और हम इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं.
_जो ज्ञात है वह विज्ञान है. _जो अज्ञात है वह रहस्य है. _रहस्य का आकार बड़ा है..!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.
_जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं, इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.
*हमें हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि चिंतित रहने से कल की मुश्किल दूर नहीं होती.. बल्कि आज का चैन भी छिन जाता है.*
दुनिया में हर कोई अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है, वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता,
_ दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है. जब हम औरों को उनकी खुशियां देना चाहेंगे, तो अपने आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जाएँगी और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है.
ज्यादातर लोग दूसरों को खुश करने की कोशिश में दुःखी हैं और दूसरे हैं कि कभी खुश होते ही नहीं,

_ व्यक्ति को दूसरों की मदद करने से पहले खुद की मदद करनी आनी चाहिए ;
_ क्योंकि आप जितने ज्यादा समृद्ध होंगे..
_ आप उतने ज्यादा लोगों की मदद कर पायेंगे..!!
सबको खुश रखने की कोशिश में कई बार हम खुद को खुश नहीं रख पाते..

_ और ये भूल जाते हैं कि स्वयं प्रसन्न नहीं होंगे तो..
_ उमंग के उस प्रवाह को गति कैसे दे पाएंगे..!!
“जीवन इसी क्षण में है” सौम्य जीवन बहुत कुछ सिखाता है.
_ किसी भी चीज़ को लेकर हताश होने लायक कोई बात नहीं है.
_ जागरूकता में रहना खुश रहने का सबसे आसान तरीका है.
हालाँकि “खुश रहना” इस आशीर्वाद की जरूरत हर किसी को है, लेकिन अगर हर किसी को दूसरों में खुशी ढूंढनी है तो फिर आशीर्वाद का मतलब क्या है ?
इधर-उधर भागना, खुद से भागना है..इसलिए जो मिला है ..उसमें खुश रहिये..
_और यही एक अच्छी जिंदगी है..!!
मसला ये भी है इस ज़ालिम दुनियाँ का,,,,
_ कोई अगर खुश भी है तो वो खुश क्य़ूँ है..?
कई बार अपनी ख़ुशी ख़ुद तक ही रखनी चाहिए..!
_ क्योंकि हर कोई आपकी खुशी से खुश नहीं होता.!!
अब तक जितने मिले, दुखी मिले..
_ सुखी हैं, खुश हैं, इस भ्र्म में लिपटे मिले.. अपने आप को धोखा देते मिले..
ना पूछ रे मन ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है,
_ दुखी तो वो भी हैं जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है..!!
‘खुश वो है’ जो यह जान लेता है कि..

_ वो क्या नहीं बदल सकता.!!
‘मेरा’, ‘तुम्हारा’ से ज़्यादा बड़ा और वज़नी शब्द ‘हमारा’ है,
_ जो बहुतेरे दुःख आधे कर देता है, ख़ुशी दोगुनी.
मन की ख़ुशी से बढ़ कर कुछ भी नहीं ; मन में ख़ुशी है तो झोंपड़ी में, जमीन पर सोने में और रूखी रोटी में ख़ुशी है,
_अन्यथा महलों में रहने वाले, मखमली गद्दों पर सोने वाले और छप्पन भोग खाने वाले भी नींद की गोलियों के सहारे सोते हैं.
लोग आपकी खुशी में खुश नहीं होते, बल्कि दुख में खुशी होते हैं, और झूठा अफसोस जताने आते हैं.

_ मेरा मानना है कि खुशी का इज़हार कीजिए.
_ खुशी बांटने से बढ़ती है, गम बांटने से कम होता है.
_ कुछ लोग खुश न हों, फिर भी..
_ आप सकारात्मकता का साथ न छोड़ें.
_ यही मान कर कि आप दुनिया बदलेंगे..
ख़ुशी खोई नहीं है, मन के अंदर है; उसे ढूंढ़ने की जरुरत भर है,
_आज हम यही छोटा सा काम नहीं कर पा रहे हैं और बेवजह दुखी हैं,
_आइये अपने मन में अंदर छिपी ख़ुशी को ढूंढ कर बाहर निकालने का प्रयास करें.
जीवन सरल गणित है.

_ जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या है ?
_ स्वयं का निरीक्षण करें.
_ क्या आप जीवन का सम्मान करते हैं या आपको दूसरों की हिंसा और पीड़ा में आनंद मिलता है.
_ क्या आपको किसी बच्चे को खेलते हुए या लोगों को नाचते हुए देखना पसंद है ?
_ या फिर आपको कोई हिंसक फिल्म या लड़ाई देखना पसंद है.
_ जब आप जीवन में खुशी का सम्मान करना और दूसरों की खुशी में खुशी ढूंढना सीख जाते हैं,
_ आप पाएंगे कि आपकी सौ समस्याएं दूर हो गईं.
_ जीवन के आघात और घाव को ठीक करने का सबसे आसान तरीका दूसरे की खुशी में खुशी ढूंढना है.
_ जीवन सरल गणित है.
_ यदि आप किसी को खुश देखकर दुखी होते हैं, तो यह आपको बीमार बना देगा और आपके जीवन को चिंता से भर देगा.
_ अगली बार जब आप कुछ सुखद और अच्छा देखें तो उसे संजोकर रखें.
_ किसी की पीठ पीछे छुरा घोंपने या उसके बारे में बुरा बोलने की कोशिश न करें, और आपको चारों ओर प्यार मिलेगा.

इस जीवन का सम्मान करें.
जीवन खुशियों से भर जाता है.
Life is simple math
What is your attitude towards life ?
Observe yourself.
Do you honour life or you find joy in violence and pain of others.
Do you like seeing a child play or people’s dancing
Or do you like seeing a violent movie or fight.
When you learn to honour joy in life and find joy in happiness of others,
You will find out that your hundred problems have vanished.
The easiest way to heal the trauma and wound of life is by finding joy in other’s happiness.
Life is simple math.
If you feel sad in seeing someone happy, it will make you sick and fill your life with anxiety.
Next time, you see something happy and good, cherish it.
Do not try to backstab or speak ill of anyone, and you will find love all around.

Honours this life.
Life is filled with joys.
जीवन का प्रयोजन [Purpose] क्या है ?

_ खुश रहना जीवन का प्रयोजन है.
_ इस संसार में हर कोई खुश रहना चाहता है, हंसना चाहता है.
_ वो चाहता है कि उसका हर कृत्य उसे खुशी की ओर ले जाए.
_ वो पूरी ज़िंदगी खुशी की तलाश करता है.
_ यही है जीवन का प्रयोजन.
_ कोई शिक्षा प्राप्त करता है.
_ कोई धन कमाता है.
_ कोई देशाटन करता है.
_ कोई परिवार बसाता है.
_ कोई दूसरों की मदद करता है.
_ भाव एक ही है “खुशी”
_ आदमी खुश रहना चाहता है.
_ वो एक खुशहाल संसार देखना चाहता है.
_ साधु-संत ईश्वर के दर्शन पा कर खुश होते हैं.
_ गृहस्थ अपने सांसारिक भोग में खुश होते हैं.
_ सबको खुशी चाहिए “सिर्फ खुशी”
_ हम इस संसार में जो कुछ भी करते हैं, उनके पीछे एक ही मकसद है खुशी..
_ हंसी ही है जीवन का प्रयोजन.
_ तुम सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो जीवन व्यर्थ है.
_ प्राप्ति के पीछे का भाव है “खुशी”
_ कोई पर्वत पर चढ़ कर खुश होता है, कोई समंदर में गोता लगा कर.
_एक ऊपर खुश है, दूसरा नीचे खुश.
मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.

_ क्रोध, नाराज़गी, आक्रोश, जिद, नफ़रत, घृणा और ईर्ष्या इंसान को ठूंठ बना देती है.
_ ऐसा शख़्स जहां से कोई कोंपल नहीं फूटती.
_ दूसरों से नफ़रत करते करते इंसान इतना नेगेटिव हो जाता है कि अपनी खुशियों में ख़ुद आग लगा लेता है.
_ रब हर किसी को अलग-अलग चीज़ों से नवाज़ता है..
_ लेकिन उनसे खुश होने की बजाय इंसान इस बात से परेशान रहता है कि दूसरों के पास कुछ और क्यों है.
_ इंसान बने रहने के लिए जरूरी है कि हमारे अंदर भावनाएं जिंदा रहें, दूसरों के लिए भी और रिश्तों के लिए भी..
_ मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.
_ जो सरल और सहज होता है वो सुकूं में होता है. सुकूं तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है कि हम खुश रहें.
_ किसी की खुशियां देख के अपना खून ना जलाएं.
_ अच्छी बातें करिए, अच्छा सोचिए, मुस्कुराइए. क्योंकि मुस्कुराने से मुश्किलें आसान होती हैं.
सभी प्रकार के दुखों का एकमात्र कारण गलत समझ है.

_ बाहर की कोई भी चीज़ हमें दुःख नहीं पहुँचाती.
_ यह हमारी अपनी मूर्खता ही है जो हमें कष्ट पहुँचाती है.
_ हम उन लोगों या चीज़ों को पकड़कर रखते हैं जो हमारी नहीं हैं..
_ और जब वे चले जाते हैं तो हम उन्हें दोष देते हैं.
– जब हम किसी बात को शिद्दत से [intensely] महसूस करते हैं..
_ तो हम पूरी ताकत से उसका जवाब तलाशते हैं.
_ तब हम सही मास्टर के संपर्क में आते हैं..
_ जो हमें हमारी गैरबराबरी का एहसास कराता है.
_ सही समझ के संपर्क में आने वाला दर्द अहसास की ओर ले जाता है.
_ इसलिए हमें अपने आसपास बुद्धिमान लोगों का साथ रखना चाहिए.
_ विषाद (दर्द) का सरल अर्थ है कि व्यक्ति ने आंतरिक संतुलन खो दिया है.
_ व्यक्ति अपने केंद्र से भटक गया है और बाहरी दृष्टिकोण से व्यवहार कर रहा है.
_ इसलिए, इससे पहले कि हम कोई भी कार्य करें, पहले अपना संतुलन खोजें..
_ दुनिया में खुशी लाने की कुंजी खुश रहना है..!!
— हम इसलिए नही रोते कि हम कमजोर है,
_बल्कि इसलिए.. क्योंकि हम जानते ही नही..
_ इसके आगे क्या किया जा सकता है,
_ आंसू विकल्पहीनता से उपजी वह विवशता है..
_ जहां आप स्वयं को सबसे अकेले पाते हैं.
_जहां आप ढंग से स्वयं को समझा नहीं पाते है,
_ खैर !…रोना नियति नहीं हो सकती..
_नियति तो विवशता है…!
मनुष्य की सबसे बड़ी भूलों में से एक यह है कि वह खुशी को हमेशा अपने वर्तमान से आगे कहीं और तलाशता है.

_ ऐसा लगता है मानो खुशी कोई मंज़िल है, जिसे पाने के लिए हम लगातार दौड़ रहे हैं. _ लेकिन क्या कभी किसी ने इस दौड़ में रुककर यह सोचा है कि जो कुछ हमारे पास है, वही कहीं हमारी खुशी की असली वजह हो सकता है ?
_ एक नंगे पांव आदमी के लिए खुशी बस एक जोड़ी जूते होती है.
_ वह ठंडी ज़मीन, गर्म पत्थरों और काँटों से बचने की कल्पना करता है, और उसकी सबसे बड़ी इच्छा होती है – सिर्फ एक जोड़ी जूते,,
_ पर जब वही आदमी पुराने जूते पहनने लगता है, तो अब उसकी नजर नए जूतों पर टिक जाती है.
_ फिर एक दिन जब उसे नए जूते मिल जाते हैं, तो उसकी खुशी ज्यादा देर टिकती नहीं – अब उसे और सुंदर, और महंगे जूते चाहिए होते हैं.
_ इंसान की यही फितरत है – वह जो नहीं है, उसी को चाहता है.
_ पर क्या हमने कभी उस आदमी के बारे में सोचा है, जिसके पास पैर ही नहीं हैं ?
_ जिसके लिए नंगे पाँव चलना भी एक सपना है ?
_ उस व्यक्ति के लिए नंगे पाँव चलना भी एक वरदान है, जो दूसरों के लिए दुख का कारण है.
_ यह जीवन का बड़ा ही सादा, लेकिन गहरा सत्य है – खुशी उस चीज़ में नहीं होती जो हमें नहीं मिली, बल्कि उसमें होती है.. जो हमारे पास है.
_ अगर हम अपनी नजरें अपनी इच्छाओं से हटाकर अपनी उपलब्धियों की ओर मोड़ लें, तो हमें एहसास होगा कि हम कितने समृद्ध हैं.
_ खुशी कोई भौतिक वस्तु नहीं है, जिसे तौलकर खरीदा जा सके.
_ यह एक दृष्टिकोण है, एक सोच है, एक एहसास है.
_ इसलिए, जीवन को तौलने का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि हमारे पास क्या नहीं है, बल्कि यह होना चाहिए कि.. हमारे पास कितना कुछ है.!!
“मेरे साथ जीवन में ऐसा क्यों हो रहा है ?” से ” जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?” ये सोचना चाहिए..??

_ बड़े होकर हम सभी विडम्बनाओं, विश्वासघातों, हानि, परित्याग, दिल टूटने और हर छोटी-छोटी बातों से गुजरते हैं, _जो हमारे दिल में एक फूल को मुरझा देती हैं.
_ लेकिन हाल के दिनों में मैंने एक बात सीखी है कि मुझे मुझसे सहानुभूति रखना बंद करने की जरूरत है और इसके बजाय मुझे उन सवालों पर सवाल उठाने की जरूरत है.
_ जीवन में ऐसा दौर भी आता है _जहां आप वास्तव में कड़ी मेहनत करने के बाद भी हार जाते हैं.
_ जिन लोगों की आप वास्तव में प्रशंसा करते हैं, वे इतना प्यार करने के बाद भी आपको छोड़ देंगे.
_ जब पार्टी खत्म हो जाती है उसके बाद भी हम अकेला महसूस करते हैं, तो यह एक संकेत है कि आपको आत्म प्रेम की सख्त जरूरत है.
_ इस बात पर मत रोओ कि जीवन तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है,; _ प्रश्न करें कि जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?
_ आपके पास अपना खुशी का समय था ; _ तो फिर ज़िंदगी आपको इससे गुज़रवाकर क्या बताने की कोशिश कर रही है ?
_ आप देखेंगे, आप अपने 90% आंसुओं को उन लोगों पर बर्बाद करने के बजाय बचाएंगे _ जो आपकी भावना के लायक भी नहीं हैं.
_ ” मुझे पता है कि आप खुश रहने के लायक हो.”
कुछ खुशियां रेत की तरह होती हैं, अपनी मुट्ठियों को जितनी सख्ती से भींचो उतनी ही तेजी से जीवन से फिसलती जाती हैं। कुछ बर्फ की तरह, जो आंसू की बूंद बनकर जीवन में दस्तक देती हैं, और बर्फ बनकर पलकों पर एक लम्बे वक़्त के लिए जम सी जाती हैं।

इसके अलावा खुशियों का कोई अन्य विकल्प मुझे नहीं दिखाई देता। हम ना तो अपनी मुट्ठियों की रेत संभाल सकते हैं, और ना ही पलकों पर जमी बर्फ को, और ना ही उस जिन्दगी को, जिसे अक्सर अपना कहने की भूल करते नहीं थकते ! और जरा सी आंखें नम क्या हुईं ऐसा लगता है, रेगिस्तान में बाढ़ आ गई है।
जिन्दगी को हम जिन आंखों में भरना चाहते हैं, उन आंखों में कहां और कितना भर पाते हैं ? जिस जिन्दगी को हम अपना कह सकें उसे कब और कितना जी पाते हैं ?
डबडबाई आंखों की कोर से आंसू की एक बूंद क्या टूटी, जिन्दगी की हर उम्मीद अपना रंग खो देती है। और सामने सिर्फ धुधलका होता है, हर तस्वीर धुंधली नजर आती है, फिर भी जिन्दगी यहीं नहीं थम जाती, हम जीना नहीं छोड़ देते? मानाकि हम सब एक डूबती नांव में सवार हैं। पर आपकी अपनी होंठों की मुस्कराहटो को आपसे कोई नहीं छीन सकता है, मुस्कराहटें बहुत दूर जाकर भी एक ना एक दिन हमारे होंठों पर लौट ही आती हैं।
इसीलिए तो किसी ने कहा है कि- खुश रहना महज एक चॉइस है जिसे कोई भी चुन सकता है। फिर हर्ज ही क्या है, आप भी खुश रहना चुनिए और हमेशा हंसते और मुस्कुराते रहिए।
– संजय शेफर्ड
दुनिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो दूसरों की मोहब्बत व खुशी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं और बदले में हमेशा ही खाली हाथ रहते हैं.

_ कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ पा लेना चाहते हैं जब कुछ देने की बात आती है तो अपना मुँह मोड़ लेते हैं.
_ ऐसे लोग तो बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं मगर सन्तुष्ट कभी नहीं हो पाते.
_ जिन्होंने इन दोनों को बैलेंस कर लिया.. वही सही मायने में ज़िन्दगी जी रहा है और तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद भी वो खुश व सन्तुष्ट है….
_ इसलिए हर किसी को खुश रखने के साथ-साथ अपनी भी खुशी अहम है,
_ खुद के अस्तित्व को खत्म करके हर किसी को खुश रखना ये ज़िन्दगी नहीं है….
– हेसाम
खुश होना और खुश रहना भी एक कला है,

_ कोई इंसान बहुत कठोर होता है तो कोई इंसान बेहद कोमल
_ लेकिन खुशियां सभी के लिए एक ही भाव लाती है
_ बशर्ते हम छोटी छोटी बातों या चीजों में खुशियां ढूंढें
_ किसी को चिड़ियों का चहचहाना तो
_ किसी को कलियों का खिलना खुशी दे जाता है
_ लेकिन किसी को अपनों का होना भी खुशी नहीं देता
_ क्योंकि हमने अपने अंदर इतने गम व गुस्सा जब्त किये हैं
_ जो हर वक्त सिर्फ तकलीफ ही देता है
_ ऐसे वक्त में न परिवार का कोई सदस्य खुशियां दे सकता है
_ न ही दोस्तों का प्यार खुशियां महसूस करा पाती है
_ फिर जब हम सड़कों पर उन गरीब बच्चों को देखते हैं
_ जो धूल मिट्टी में खेल रहे हैं.. मुस्कुरा रहे हैं
_ उनकी मुस्कुराहट असली होती है..
_ उन पौधों को भी पनपते और खिलते हुए देखा है
_ जहां का माहौल साजगार भी नहीं है
_ फिर भी वो खिल रहें है और खुशबू बिखेर रहे हैं
_ लेकिन हम इंसान बेहद नाशुक्रे हैं
_ हम जीवन भर उन चीजों के पीछे भागते रहते है
_ जो मेरी कभी न थी, लेकिन उस चीज के लिए जरूर
_ गमों को अपना साथी बना लिया है
_ हमने जरूर उनको दरकिनार किया है… जो हमारे पास है
_ एक अंजान खुशी की तलाश में अपनों के लिए
_ न चाहते हुए भी सिर्फ गम ही छोड़े है
_ वैसे भी इंसानी फितरत है..
_ जो अपना न हो जो हासिल न किया जा सके
_ वो बेहद बेशकीमती होते है
_ जो अपने पास होता है.. उसकी कभी कद्र नहीं होती
_ खुशियां न बाजार से खरीदी जा सकती हैं
_ न ही किसी के रहमों करम से हासिल की जा सकती है
_ खुशियों की तलाश करना बेमानी है
_ खुशियां हमारे आस- पास ही होती है
_ जिस दिन हम ईमानदारी से अपने आस पास की चीजों
_ और लोगों को देखना शुरू कर देंगे
_ उस दिन खुशियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
_ बहुत सी बीमारियों का इलाज हैं प्राकृतिक मुस्कुराहट
_ हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए और स्वस्थ रहिए
_ क्या पता जिंदगी कल हो न हो
_ लेकिन आज तो सिर्फ हमारा है उसको जीना शुरू कर दीजिए…..
– हेसाम
यहाँ खुशी, सुकून और ज़िंदगी की रफ़्तार साथ-साथ बह रही है 💙🌿

_ जहाँ दिल मुस्कुराता है, वहाँ मंज़िल अपने आप आसान लगने लगती है ✨
_ थोड़ा ठहरो, साँस लो, और याद रखो — ज़िंदगी भी इसी तरह बहती है, रुकती नहीं 💪😊
_ आज की खुशी, कल की ताक़त बन जाए 💫
_ बस चलते रहो… और मुस्कुराते रहो.!!😄🌈
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी शोर नहीं करती…

_ बस खामोशी में सिखा देती है कि छोटी सी जगह, बड़ा सा सुकून ही असली खुशी है ✨⛪
_ पहाड़ों की गोद, समंदर की हवा और दिल में भरोसा — यही तो ज़िंदगी है 🌊🌸
_ चलते रहो, मुस्कुराते रहो… क्योंकि हर सुबह एक नया मौका लेकर आती है ☀️💪
– Cycle Baba
हरी ज़मीन और छोटा-सा टेंट… लेकिन एहसास बहुत बड़ा है 🌍⛺

_ जहाँ सुकून भी है, हिम्मत भी और आज़ादी भी 💚
_ कभी-कभी ज़िंदगी में बस इतना ही चाहिए— शोर से दूर, खुद के करीब ✨
_ हर सफ़र हमें ये सिखाता है कि खुशियाँ जगह नहीं, नज़रिया बदलने से मिलती हैं.🌿
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी भी इस बर्फ़ीली झील जैसी हो जाती है…

ठंडी, शांत और थोड़ी भारी ❄️ लेकिन याद रखो, इसी सन्नाटे में अंदर कहीं
नई शुरुआत पिघल रही होती है 🌱✨
– Cycle Baba
हालात कठिन, रास्ता अनजान, लेकिन मुस्कुराकर चलते रहो,

मंज़िल खुद रास्ता बना लेती है 🌍✨
– Cycle Baba

सुविचार – समस्या – समस्याएं – समस्याएँ – मुश्किल – मुश्किलें- विषमताएँ – विषमताएं – वादविवाद – 095

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आप जितना अपने भीतर की ऊर्जाओं को, शक्तियों को जानते जायेंगे, उतना ही उन्हें सकारात्मक और सृजनात्मक मार्ग की ओर मोड़ना आपके लिए सरल हो जाएगा.
अपनी ऊर्जा को चिंता करने में ख़त्म करने से बेहतर है,

_इसका उपयोग समाधान ढूंढ़ने में किया जाये.

_ हर समस्या का हल है, बस हल करना आना चाहिए..!!

जीवन में जब- जब समस्या सामने आए, तब- तब स्वयं को समझाएँ !

_ तू धैर्य रख, तू हिम्मत रख, तू निर्बल नहीं है, साहस से काम ले, आगे बढ़ !

_ समस्या है तो समाधान भी जरुर होगा.!!

जहाँ समस्या है वहीं समाधान चाहिए,

_ समस्या एक जगह समाधान दूसरी जगह असम्भव— दोनो का मिलन ही न होगा–!

किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, कई समस्याएं कुछ समय लेकर स्वयं सुलझ जाती हैं.
आप किसी समस्या का समाधान तब तक नहीं कर सकते _जब तक आप स्वीकार नहीं करते कि समस्या आपके पास है और उसे हल करने की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते..!!
परिस्थितियां हमारे लिए समस्या नहीं बनती हैं ; समस्या तो तब बनती है, जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता.
समस्याएं पैदा करना आसान है, लेकिन उन्हें सुलझाना आपकी असली ताकत है.
परिस्थिती बदलने का दम रखो, समस्या कभी ख़त्म नही होने वाली..!!
“जीवन कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाया जाए बल्कि यह एक वास्तविकता है जिसे जीया और अनुभव किया जाना चाहिए.”

“Life is not a problem to be solved but a reality to be lived & experience. “
हमारी मुश्किलें-समस्याओं को हमसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता, इसलिए अपनी मुश्किलें-समस्याओं को हल करते समय, सभी को खुश रखने की शर्त से खुद को मुक्त रखिए.!!
यदि आप समस्या को देख नहीं पाते हैं तो _आप समस्या का समाधान नहीं कर सकते;

_यहीं पर हममें से कई लोग फंस जाते हैं.
_हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि _कोई समस्या है,
_इसलिए हम इसमें गहरे फंसे रहते हैं..!!
_परिवर्तन का द्वार उस क्षण खुल जाता है _जब हम स्वीकार करते हैं कि _किसी चीज़ को हल करने की आवश्यकता है..!!
_समस्या को समझते ही स्थिति बदल जाती है..!!
_और ये मस्तिष्क के बंद पड़ चुके जर्जर द्वार को _आहिस्ते से खोलने का कार्य करेगी और _हमें नव ऊर्जा से भर देगी..!!
अपनी समस्या का समाधान प्राप्त करने से पहले, आपको खुद से यह सवाल करना चाहिए कि..

_ क्या आप उन चीजों को छोड़ने या बदलने के लिए तैयार हैं,
_ जिन्होंने आपके जीवन को बीमार बना दिया है.
_ आत्म-ज्ञान और परिवर्तन, व्यक्तिगत संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण तत्व होते हैं.
_ यह उन आदतों, मानसिकताओं या लगावों की पहचान करने के बारे में है, जो स्थिति में योगदान कर सकते हैं, और उन्हें छोड़ने या बदलने का साहस रखने के बारे में है.
_ परिवर्तन तभी शुरू होता है, जब आप असहजता [Discomfort] का सामना करने और विकास को अपनाने के लिए तैयार होते हैं.!!
हर दिन हम नई समस्याओं से घिर जाते हैं और फ़िर उसे हम हल भी करते हैं.

_ हर किसी के लिए घिरने और सुरक्षित बाहर निकलने में लगने वाला समय अलग-अलग होता है..
_ और यह हमारी इच्छाशक्ति, साहस और इस विश्वास पर निर्भर करता है कि यह भी गुजर जाएगा.!!
जब तक आपसी विचार-विमर्श और अभिव्यक्ति का खुला माहौल नहीं होगा,

_तब तक समस्याओं के किसी समाधान पर पहुंचना संभव नहीं है.!!

ऐसा नहीं है कि समस्याएँ या अमानवीय स्थितियाँ नहीं हैं, लेकिन समस्याओं पर शोर मचाने से बेहतर है कि समाधान की दिशा में एक छोटा सा कदम उठाया जाए.
समस्या का मातम मनाना छोड़कर और खुद को बेबस, लाचार शोषित, पीड़ित, वंचित और अभावग्रस्त मानना छोड़कर.. समस्या का समाधान करना सीखिए.!!
समस्या यह है कि समस्या कि जड़ में न जाकर इसकी पत्तियों को छांटा जाता है कि इसमें कीड़े क्यों लग रहे हैं.
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.
समस्याएँ और विषमताएँ अब हमारे जीवन का अंग बन चुकी हैं,

_इनके साथ जीना सीख लें, इससे अवसाद नहीं रहेगा..!!
सारे समस्या सोच की है, सोच और माहौल से ही समस्या छोटी बड़ी दिखाई देती है.!!
हम जितना ज्यादा गहराई से सोचते हैँ, समस्या उतनी ही ज्यादा नज़र आती है ;
_ वहीं अगर सामान्य रहकर हर समस्या को स्वतंत्र छोड़ दिया जाय तो..
_ हर समस्या का समाधान स्वयं ही निकल आता हैं, और मुश्किलें आसान होने लगती हैं..!!
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_ वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_ जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.!!
समस्या से भागने पर वह और उलझी हुई लगने लगती है,

_ लेकिन जैसे ही हम उसका सामना करते हैं, वही धीरे-धीरे सुलझने लगती है.
_ डर दूर से हमेशा बड़ा दिखाई देता है, मगर हिम्मत से सामना करने पर उसकी असलियत छोटी पड़ जाती है.!!
समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बस एक दिन मन उन्हें जीवन का केंद्र बनाना छोड़ देता है.
जीवन समस्याओं के ख़त्म होने से शांत नहीं होता,
_ जीवन तब शांत होता है, जब मन समस्याओं के बीच भी हल्का रहना सीख ले.
जब आप समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपको और अधिक समस्याएं होंगी.

जब आप संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपके पास अधिक अवसर होंगे.

When you focus on problems you’ll have more problems.

When you focus on possibilities you’ll have more opportunities.

दूसरे लोगों की समस्याएँ तभी आपकी समस्या बनती हैं जब आप उन्हें समझते हैं.

Other people’s problems become your problem only if you pick up.

सुविचार – “उत्साह – उमंग – जोश – जुनून – 094

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“उत्साह,”

परिभाषा के अनुसार, “उत्साह, उत्सुकता, ऊर्जा और रुचि” का अर्थ है.
जीवन के लिए उत्साह का अर्थ है जोश के साथ जीना, अपने आसपास की दुनिया में रुचि लेना, रोमांच की तलाश करना और उत्साह की भावना के साथ जीना.जैसे,
” भूख का भोजन से क्या संबंध है, उत्साह का संबंध जीवन से है
“जीवन के लिए उत्साह और जुनून सबसे सरल सुखों से आते हैं.
जब कोई इंसान अधूरे मन और उत्साह के बिना कोई काम करता है,
_ तो सरल काम भी बहुत मुश्किल हो जाता है..!!
करने का जुनून हो तो कुछ भी हो जायेगा,
_ बैठे बैठे बातें तो कोई भी बना लेता है..!!
सदैव युवा, ऊर्जावान और उत्साही लोगों के साथ रहना चाहिये.
_ बूढ़ों के साथ बैठ कर ताश या कैरम खेलना एक तरह से आपके समय की बर्बादी है.!!
अपने सपनों को उत्साह, साहस, अनुशासन और आशावादी तथा सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करते हुए व अहं और भय का परित्याग कर, यह विश्वास करें कि यदि श्रद्धा हमारे जीवन की नीवं है तो प्रगति हमारे हाथों में है.
जो बातें एक समय हमारे भीतर उमंग भर देती थीं, वही समय के साथ बचकानी प्रतीत होने लगती हैं,

_ जिन भावनाओं में कभी डूबकर हम रोया करते थे, उन्हें आज देखकर मुस्कान आ जाती है, शायद खुद की ही नादानी पर..
_ शारीरिक रूप से बढ़ना प्रकृति का नियम है, लेकिन मानसिक रूप से परिपक्व होना अनुभवों का परिणाम..
_ और जब बचपन के उत्साह को विवेक की दृष्टि से देखने लगो..
_ समझो तुमने सच में बड़ा होना शुरू कर दिया है…!

सुविचार – व्यवहार – आचरण – बर्ताव – बरताव – बिहेवियर – Behavior – 093

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व्यवहार ……

उस चिराग की तरह बनिए जो गरीब के झोपड़े में भी उतना ही उजाला करता है जितना एक राजा के महल में रौशनी देता है !

_ सबके साथ समान और सम्मान से व्यवहार करिए !

अच्छा व्यवहार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है,

_ जबकि बुरा व्यवहार लोगों को पीछे हटा देता है.

किसी व्यक्ति के बारे में कोई एक निश्चित राय नहीं बनानी चाहिए,

_ क्योंकि लोग अलग अलग जगह अलग अलग तरह का व्यवहार करते हैं..!!

अपने व्यवहार को सच्चा रखो और बदनामी की परवा न करो.

गंदगी मिट्टी की दीवार पर लग सकती है, पौलिश किए हुए संगमरमर पर नहीं.

कभी-कभी अपने ही कुछ लोगों का व्यवहार इतना निकृष्ट कोटि का होता है कि

_उनका जिक्र करना भी अपनी ही इंसल्ट लगती है..!!

लोगों से बुरा बर्ताव उस तरह मत करें, जिस तरह वो बुरे हैं.

_ बल्कि लोगों से अच्छा बर्ताव उस तरह करें, जिस तरह आप अच्छे हैं.!!

किसी के भी व्यवहार को देख कर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया न किया करें.

_ बस जो हो रहा है.. उसे देखते रहो.. उसका आनंद लेते रहो.!!
_ क्यों हो रहा है ❓ कैसे हो रहा है ❓ कब से हो रहा है ❓ हो ही क्यों रहा है ❓
_ इस चक़्कर में न ही फंसे तो हमारे लिए अच्छा होगा.!!
जो सबकी हां में हां मिलाते हैं और ये जताते हैं कि उनका सबसे व्यवहार अच्छा है,

_असल में उनका किसी से व्यवहार होता ही नहीं है..
_ वो तो बस हां में हां मिलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं..
_ और जो सबकी हां में हां नहीं मिलाते.. वो हर किसी को हज़म नहीं होते..
_ अतः व्यवहार बनाए रखना और व्यवहार का दिखावा करना..
_ ये दोनों अलग अलग बातें हैं..!!
सोचने के बजाय काम करना, काम होना महत्वपूर्ण है सो समय मेरे लिए मौसम, समय, घर-परिवार के काम समस्या ही नहीं हैं,

_मुझे लगता है कि आप जैसा व्यवहार, कार्य करते हैं ..परिस्थितियां अपने आप उसके अनुकूल बनने लगती हैं..
_मैं आपको समझता हूं, और मैं आपका मन बदलने का प्रयास नहीं करूंगा.
_मैं दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखने के लिए बहुत बूढ़ा हो गया हूं.
_मैं जो सोचता हूं वह आपको बता चुका हूं और बस इतना ही.
_यदि आप मेरी मान्यताओं के विपरीत कार्य करेंगे ..तो भी मैं आपका मित्र बना रहूँगा _और यदि मैं आपसे असहमत हूँ ..तो भी मैं आपकी सहायता करूँगा.
अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी का फ़ोन एक बार में उठा लेंगे या किसी के मैसेज का उत्तर समय से दे देंगे तो उनकी वैल्यू कम हो जायेगी.

_ उन्हें लगता है कि तीन चार बार इग्नोर करने के बाद फोन उठायेंगे या मैसेज का रिप्लाई थोड़ा इग्नोर करने के बाद देंगे तो ऐसा करने से उनकी वैल्यू बढ़ेगी और सामने वाला उन्हें बहुत बड़ा इंसान समझेगा.
_ यह भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी ही है.. जिसमें लोग अपनी ही काल्पनिक दुनिया में जी रहे होते हैं.
_ जबकि बाहर लोगों में इनकी वैल्यू तो ख़ैर नहीं बढ़ती है.. मगर इनके इस व्यवहार के चलते लोग इन्हें ज़रूर किनारे कर देते हैं.!!
*लोग हमारा बुरा बर्ताव तो याद रखते हैं.. अपना भूल जाते हैं.

_ जब शिकायतें गिनाते हैं, तो हमारी गलती उन्हें क्रमवार याद होती है,
लेकिन उन्होंने हमारे साथ क्या-क्या बुरा किया ? उन्हें याद नहीं रहता..
_ जबकि हमारा बुरा बर्ताव उनके बुरे बर्ताव के एक्शन का रिएक्शन था.
_ पहल हमने नहीं की थी.. – ‘सहन करने की भी एक सीमा होती है’
_ इसलिए, दूसरों की गलतियाँ गिनाने से पहले- अपनी गलतियों पर भी ध्यान दीजिए..
दर्द सबको बराबर लगता है.!!
आप किसी से बातचीत में शालीनता बरतेंगे या आदर में उनके खराब व्यवहार पर भी जवाब नहीं देंगे तो.. सामने वाला अपने को सुपीरियर समझ कर आप पर चढ़ बैठेगा..!!
कुछ लोग सच में बुरे नहीं होते और न ही बुरा सोचते हैं, पर उन्हें एहसास ही नहीं होता कि उनका व्यवहार दूसरे को चोट पहुंचा सकता है.

_ वे संवेदनशीलता के मामले में कमजोर होते हैं.!!
कोई अच्छा इंसान भी एक वक्त तक ही अच्छा रह सकता है,

_ उसके बाद वो लोगों से वैसा ही व्यवहार रखने लगता है, जैसा लोग उसके साथ रखते हैं.!!

हमारा अच्छा व्यवहार भी लोगों को खटकता है और इसलिए वे दूरी बना लेते हैं,

_ क्योंकि इससे उनके अहंकार को ठेस पहुँचती है.!!

अपनी वाणी और व्यवहार में हमेशा स्पष्टता रखो,

_ फिर जिसे आना हो आयेगा और जिसे जाना हो जायेगा..!!

आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ सच्चा व्यवहार करें, तो आप खुद सच्चे बनें और अन्य लोगों से भी सच्चा व्यवहार करें.
आपके व्यवहार से ही सामने वाला तय करता है कि आप इज्जत के काबिल हैं या दूरी के.!!
किसी की बात को दिल पर मत लीजिए, जिसका जैसा संस्कार होता है..
_ वैसा ही… उसका व्यवहार होता है..!!
सबके साथ बराबर व्यवहार रखें बिना किसी व्यक्ति विशेष की तरफ झुकाव रख के,

_ अर्थात चाटुकारिता को बढ़ावा ना दें..!!

आप यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि दूसरे लोग कैसा व्यवहार करते हैं ; _लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप इस सब पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.

_आपकी प्रतिक्रिया में आपकी शक्ति है.

You can’t control how other people behave. But you can control how you respond to it all. In your response is your power.

सुविचार – शांत – शान्त – शांति – शान्ति – अमन – चैन – सुकून – 092

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ज़िंदगी को नए सिरे से ठीक करने के लिए कोई मौका दे तो ..क्या मांगा जाए ?
_ वैसे आप क्या मांगते एक सुकूनदेह ज़िंदगी के लिए ? ?

” शान्ति ” _ वह सब कुछ, जो अच्छा है, उसकी जननी है.
“इस दुनिया में कुछ लोग ही शांत, समर्थ और संतुलित जीवन जीते हैं”

‘मैं अपनी शान्ति का मालिक हूँ, सिचुएशन [Situation] का गुलाम नहीं.’

” शांति का आगमन ज्ञान से ही होता है, _ और शांति आनंद को आश्रय देती है,”

“सुकून बाहर नहीं, भीतर की ख़ामोशी से मिलता है”

_ थोड़ी देर खुद से मिलने बैठिए, जवाब वहीँ मिलेंगे, जहाँ आपने कभी झाँका नहीं.!!

जिसके पास मन की शांति है _वह न तो खुद को परेशान करता है _और न ही दूसरे को.!!

कोशिश यह करना कि सुकून का ताल्लुक़, किसी शख्स से ना जुड़े.!!
मन की शांति सबसे बड़ा धन है, जब मन शांत हो, तभी जीवन सुखमय बनता है.!!
“हमें सुकून वहां मिलता है जहां आपको किसी को कुछ साबित नहीं करना होता.”
ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीज़ है – मन की शान्ति, सुकून की नींद, सुलझे हुए रिश्ते, आर्थिक मजबूती, आध्यात्मिक जीवन.!!
कुछ लोग यह नहीं समझते कि अपने घर में अकेले शांति से बैठना, नाश्ता करना और अपने काम से काम रखना अमूल्य [ Priceless ] है.
दूसरों की प्रशंसा करें, इस से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी,

_ दूसरों से यह उम्मीद न करें कि, वे आप कि प्रशंसा करेंगे,

_ इस से आप को मानसिक शांति मिलेगी !!

शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं,

_ बल्कि आवश्यक है इच्छाओं की शांति !!

दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति को नष्ट करने का अधिकार न दें.

दूसरों से ईर्ष्या करने वाले मनुष्य को _ कभी मन की शांति नहीं मिलती.

मन की शांति दुनिया की किसी भी दौलत से बढ़कर होती है.

मन को तो तभी चैन मिलता है, _ जब ह्रदय शान्त हो.

” सुकून की फिजा में ही, _ मौज़-ए- बहार आती है,”
लोगों की राय से ज्यादा अपनी शांति को महत्व दें.

साधन खरीद सकते हैं, _ सुकून नहीं..

अपनी शांति बचाना किसी के खिलाफ जाना नहीं होता, बल्कि सबके लिए बेहतर बनने की शुरुआत होती है.
**’हमें शांति तो चाहिए…
_पर दिमाग को छुट्टी देने का मन नहीं करता.’
हम शान्ति के बिना रचनात्मक नहीं हो सकते.
किसी भी हालात में घबराना नहीं है, शांत दिमाग से रास्ते निकल ही आते हैं.
केवल न्यायप्रिय व्यक्ति ही मन की शांति का आनंद लेता है.
जब मन एकदम शांत हो जाता है, तब आप की बुद्धि मानवीय सीमाओं को पार कर जाती है..

_ अगर हम किसी तरह थोड़ा शांत रहना सीख लें तो जीवन सचमुच हल्का हो सकता है और हम वास्तविक मुद्दों पर बात कर सकते हैं.!!

हमारे राज़ जितने कम लोगों को पता हों, उतना ही सुकून से जिया जा सकता है,

_ क्योंकि बुरा वक़्त सबकी नीयत उजागर कर देता है.!!

अत्यधिक उम्मीदों को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी..!!
सुकून शांति पाने के लिए, जीवन को व्यवस्थित तरीके से जीने की ज़रूरत है.!!
जो अपने को शान्त रखना नहीं जानता, _कभी अच्छा नहीं बोल सकता.
“खुशियाँ तो मिलती रहीं, पर दिल सुकून के लिए तरसता रहा.”
ढूंढ लिया है खुद में ही सुकून…! ये ख्वाहिशें तो खत्म होने से रही।।
ज्यादा सुख सुविधा की चाहत सुकून भी छीन लेती है.!!
“जो भीतर से शांत है..- वो हर हाल में मुस्कुरा सकता है”
सुकून और शांति में होना ही कामयाबी है.!!
जो अच्छा था उसने सुकून दिया.. _ जो ख़िलाफ़ था.. उसने मज़बूत बनने में मदद की..!!
यह एहसास कि वर्तमान क्षण ही सब कुछ मायने रखता है, _ तो हमें आंतरिक शांति मिलेगी _और हम प्रत्येक दिन की सुंदरता और खुशी की सराहना करेंगे..!!
1 दिन मृत्यु तो सभी की होनी है इसका यह मतलब नहीं कि जीना छोड़ दे

सुख शांति से परिवार के साथ वक्त बिताएं.

कुछ अच्छा होने के लिए और मानसिक शांति के लिए बहुत कुछ छोड़ना और स्वीकार करना होता है.!!
“शांत रहना कमजोरी नहीं, यह समझदारी की निशानी है.

_ क्योंकि हर जवाब शब्दों से नहीं व्यवहार से दिया जाता है”
अशांति से हमें मुक्त होना है, क्योंकि अशांति के कारण मन में कंप पैदा होता रहता है, यह कंप बड़ा तकलीफ देता है ;_ क्योंकि कंप में हम प्रसन्न नहीं हो सकते, _

_ अशांति के इस दुष्प्रभाव से, कंप से हमको बचना होता है, ” हमें शांति की दिशा में यात्रा करनी चाहिए “

चाहे कोई आपके साथ कितना भी बुरा करे, उसके स्तर तक मत गिरो.

_ शांत रहो और दूर हो जाओ..!!

इस दुनिया में शांति से रहने के दो ही उपाय हैं – एक उपाय तो ये है कि अपनी आवश्यकताओं को कम कर दिया जाए ;

_ और दूसरा उपाय है कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाने का प्रयास किया जाए. ऐसा करने से जिंदगी आसान हो जाती है.

लोग आप क़े साथ ईमानदार नहीं हैं, लोग पाखंड से प्यार करते हैं ; _ जब आप

खुद क़े प्रति ईमानदार होते हैं तो आप को आंतरिक शांति का मार्ग मिल जाता है.

” सुकून खोता हो, और सल्तनत मिलती हो तो ठोकर मार देना सल्तनत को, _

_ और सुकून को संभाल लेना, _ यही सच्ची दौलत है,”

“जिसे याद करने से मन अशांत हो,

_ उसे भूल जाना नहीं.. उससे मुक्त हो जाना ही सच्ची शांति है.”

“जो स्वाभाविक रूप से बदल रहा है..
_उसे शांत होकर बदलने देना चाहिए”
कभी-कभी कुछ लोगों से दूरी बना लेना ही सुकून देता है..

_ ख़ासकर उनसे.. जो आपकी नज़दीकी को हल्के में लेते हैं.!!

जिस दिन आप खुद को भीतर से शांत कर लोगे..
_ उस दिन लोग खुद बेचैन हो जाएंगे आपके सुकून से.!!
बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्साह ही खुशी है; _लेकिन जब आप उत्साहित होते हैं तो आप शांत नहीं होते.

_ सच्चा सुख शांति पर आधारित है.

Many people think excitement is happiness. But when you are excited you are not peaceful. True happiness is based on peace.

जब मन शान्त होगा तब आप हर समस्या का आसानी से हल ढूंढ पाओगे ; तब आप किसी भी परिस्थिति में अपने मार्ग से विचलित नही होओगे..!!
यदि आपके पास उन चीजों के बारे में चिंता करने का समय है, जिन्हें आप वैसे भी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो आप विचलित हैं.

” मन की शांति सही चीजों पर केंद्रित होने से आती है.”

सच की लड़ाई अक्सर इंसान को अकेला कर देती है, पर समझदारी यह है कि हर जगह लड़ाई न लड़ी जाए – कभी-कभी शांति, जीत से ज़्यादा कीमती होती है.!!
जो हमसे नफ़रत करता हो, हमें हिकारत की नजर से देखता हो

_उसके लिए सबसे बेह्तरीन अमल है _उसे इग्नोर कर देना, उसे माफ़ कर देना.

ऐसा करने से हम शांति और सुकून में रहते हैं और वो बेचैन.

बैर रखने वालों के सामने से मुस्करा कर निकल जाना _सबसे मज़ेदार होता है.

करके देखिए अपने दिल को सादा और सरल बना लीजिए, _सुकून में रहेंगे.

जो लोग बार बार आपकी शांति भंग करें, उनकी जिंदगी से बेहद शांति से निकल कर, उन्हें भी शांति की तलाश के लिए छोड़ दें..!!
अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, करो ऐसी व्यवस्था जहाँ जबरदस्ती मानसिक शारीरिक तनाव का दंश नहीं झेलेंगे.. _ ऐसे रिश्तों में रहने का चुनाव नहीं करेंगे जहां प्रेम, शांति और सम्मान न हो.!!
लोगों की वास्तविकता जानना कोई बड़ी बात नहीं है, आप बस उनके जीवन को देखिए,

_ वे किन चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं, किन चीजों को अच्छा कह रहे हैं और किन चीजों को बुरा, उनमें व्यर्थता का बोध है या नहीं, उनके जीवन में सुकून शांति है या नहीं..!!
एक बार समझदारी आने की देर है.. फिर इंसान हर उस चीज़ से दूरी बना लेता है..

_ जो उसका सुकून छीनना चाहती है.. फिर चाहे वह चीज़ उसे कितनी ही पसंद क्यों ना हो.!!

दुनिया में अगर सुकून से जीना है तो उन लोगों से बहस करना छोड़ दीजिए..

_ जो अपने झूठ को भी सच मानते हैं.!!

शांत रहना सिख जाओ…

_ क्योंकि अधिक बोलने वालों को दुनिया उतनी गम्भीरता से नहीं लेती…!!!

शांति के मार्ग पर चलें, शक्ति की राह पर नहीं.

_ एक शांति ही है जो अखंड है और पूरा अस्तित्व उसमें डूबा है.
_ शांति के बिना संगीत संभव नहीं है.
_ खूबसूरती शांति और मौन से आती है, शब्दों से नहीं.!!
जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है ‘खुद को बदल लें’.

_ क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है.
कुछ सवालों के जबाब तो चाहिए होते हैं, चाहे मूल्य कोई भी चुकाना पड़े..

_ फिर इसके लिए हो सकता है, उन सवालों के जबाब जानने के लिए..
_ आपको मानसिक या फिर शारीरिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़े,
_ पर जबाब जरूरी है, मन की शांति के लिए.!!
हम अपनी दशा और दृष्टिकोण बदल दें तो.. _ शायद वास्तविक शांति हमें ज़्यादा सस्ती और टिकाऊ मिल जाए.!!
दौलत कमाना आसान है, पर सुकून कमाना मुश्किल ;

_ असली अमीरी वही है जहाँ सिर तकिये पर रखते ही गहरी नींद आ जाए.!!

जितना शांत आप ख़ुद को रखते हैं,

_ उतना ही अच्छे से आप दूसरी चीज़ों के बारे में सोच सकते हैं.!!

एक समय बाद नकारात्मक चीजें धीरे-धीरे जीवन से दूर हो जाती हैं,

_ और रह जाता है तो ‘एक सुकून भरा एहसास’

“जब मन भीतर से थक जाता है — तब वो बाहर को देखने लगता है.

_ और जब भावनाएं बोझ बन जाती हैं, तब दूरी ही शांति बन जाती है”

कुछ लोग चोट भी देते हैं और मासूम भी बन जाते हैं,

_ शांत रहिए.. समय सबका सच उजागर कर देता है !!

जब आपका मूल्य बढ़े, तो उसकी पहचान शोर से नहीं, शांतिपूर्वक कार्यों से होती है,

_ जैसे कागज़ की मुद्रा कभी शोर नहीं करती.!!

चाहकर भी अगर कहीं सुकून ना मिले, तो मस्त होकर खुद में खो जाया करो..!!
यदि किसी भी चीज से आपकी शांति नष्ट होती है, तो यह बहुत महँगा है.
शांत रहें, क्यूंकि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता ; वक्त बदलता जरूर है.
अपनी आंतरिक स्थिरता, शांति और आनंद की दशा को फैलने दीजिए.
जीवन इतना अभिशप्त नहीं होना चाहिए कि उसे शांति से जी ही न सकें..!
शांत लोग सबसे मजबूत होते हैं, उनकी चुप्पी में भी वो ताकत होती है..
_ जो समय आने पर सब बदल देती है.!!
जिसके साथ सुकून बहुत मिलता है..

_ यकीन मानिए.. उसके साथ वक़्त ही बहुत कम मिलता है.!!

800 करोड़ से ज़्यादा लोग हैं दुनिया में, लेकिन सुकून के नाम पर बस कोई एक आध ही मिलता है जीवन में.!!
दूसरों के काम में रुचि न लेने से अधिक शांतिपूर्ण कुछ भी नहीं है.
ढूढों तो सुकून खुद में ही है, दूसरों में तो बस उलझनें ही मिलेगी !!
लगाव की पीड़ा से अलगाव का सुकून बेहतर है..!!

_ जो आपकी मानसिक शान्ति भंग करे, उससे बहस मत करो बल्कि उसे तत्काल Block करना सीखो.!!

लोगों को उनके चाहने पर छोड़ देने में ही शांति है.

_ किसी के जीवन में तब तक रहने का कोई मतलब नहीं.. जब तक वे आपको न चाहें.!!

जब विचार मिल जाए, तो शब्द रोक देना ही समझदारी होती है.

_ अब उसे जीना है.. समझाना नहीं.
‘शांत रहिए’.. जो होना है, अपने समय से होगा.!!
दुनिया को समझने से पहले, अपने भीतर थोड़ी शान्ति बनाना ज़रूरी है.!!
महापुरुषों ने महल को त्याग दिया शांति की तलाश में…..

_ और हम शांति को त्याग रहे हैं महलों की तलाश में….

सुकून के पल धन दौलत से नहीं ख़रीदे जा सकते, _

_ अगर ख़रीदे जाते तो आज कोई बेचैन नहीं रहता ..

शांति से किया गया विचार हमें भीतर से मजबूत बनाता है ;

_वहीँ शोर से उठी हुई बातें हमें कमज़ोर बनाती हैं..!!

आप लोगों को जितना कम जवाब देंगे ;

_ आप का जीवन उतना ज्यादा शांतिपूर्ण रहेगा..!!

वक्त अच्छा हो या बुरा.. हर परिस्थिति में ख़ुद को शांत रखना सीखो,

_ यह बात आपकी ज़िंदगी बदल देगी..!!

आप सुकून शांति में रह रहे हो तो इसका अर्थ ये नहीं कि..

_ ये दुनिया भी आपको सुकून शांति से रहने देगी.!!

आपकी ज़िन्दगी में जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में हर किसी को बताना छोड़ दीजिए,

_ “आप ज्यादा सुकून से रहोगे “

अपने जीवन के उन क्षणों का विश्लेषण करें.. जिन्होंने आपको शांति और सुकून का एहसास दिलाया..

_ लेकिन बाद में मानसिक अस्थिरता और तनाव का कारण बन गए.!!
सुकून ज़रूरी है, इसलिए समय रहते आप वो कीजिए, जिसमें आपको ख़ुशी महसूस हो.

_ वर्ना उम्र और वक्त निकल जाने के बाद अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता..!!
जिंदगी से जितना लोगो को कम कर दोगे, उतना ही ज्यादा सुकून महसूस करोगे.

_ खुद से ज्यादा कोई महत्वपूर्ण नहीं..!!
घर के सारे दरवाजे बंद करने से आप सुरक्षित हो जाओगे ? शांत हो जाओगे?

“शायद नहीं —
_ आप सुरक्षित तभी हो सकते हो.. जब अपने दिमाग के शैतान को बाहर ही छोड़ कर आओगे.
_ दिमाग ही शैतान हुआ तो फिर कहीं भी चले जाओ.. शांति नही मिलेगी.!!
जिंदगी में हजारों आवाजें सुनाई देंगी,
_ मगर ठहरना वहीं जहां दिल को सुकून और अपनापन महसूस हो.!!
काम ने नहीं, उलझन ने थकाया है… काम तो बस एक बार में हो जाता.

_ काम ख़त्म करना ज़रूरी है, पर अपनी शांति खोना ज़रूरी नहीं.!!
जिंदगी जीने के लिए अनेक तरीके हो सकते हैं मगर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,
_जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे..!
हम शांति नहीं सुख से रहते हैं, सुख और शांति में बड़ा अंतर है,

_ परंतु ज्यादातर समय सुख ही शांति लगती है पर होती नहीं है…
_ बात यह है कि सुख व्यक्ति से लेकर सामाजिकता तक जाता है पर शांति वैयक्तिक है…
_ अब क्योंकि समाज सुखमय दिखता है _जिससे वातावरण शांत दिखता है, पर वह शांत शांति नहीं है…
हम उन लोगों की प्रशंसा करते हैं जो फिल्मों में हीरो लड़ता है, बचाता है और बचाव करता है.

लेकिन एक तरह से यह अजीब है. हम उन लोगों की प्रशंसा क्यों नहीं करते_ जो क्रोध, द्वेष और दूसरों को हानि नहीं कर रहे हैं ?

_ जो शांति स्थापित करने की कोशिश करते हैं ?

“कौन आगे-कौन पीछे — ये छोटी ऊँचाइयाँ हैं..

_ सच्ची ऊँचाई तो मन की शांति है — जैसे जीवन एक यात्रा है..
_ हम एक स्टेशन उतरते हैं, अपना अनुभव बटोरकर आगे बढ़ जाते हैं.
_ जो काम का नहीं — उसे रास्ते में ही छोड़ देना है”
तर्क सही भी हो, तो भी कभी-कभी अपनी बात सही सिद्ध करने से अधिक आवश्यक है, जीवन में शान्ति..

_ बहस करने से बेहतर है, चुप रहा जाए.!!
शान्ति चाहिए तो कुछ चीजों, बातों, प्रश्नों और लोगों को मुस्कुरा कर टाल दिया करो.!!
मन की शांति के लिए यह स्वीकार कर लें कि सबकी पसंद होना मुमकिन नहीं ;

_ कुछ लोगों की नफरत का बस इतना सा मतलब है कि आप अपनी राह पर सही हैं.
हालात कितने भी मुश्किल हों, शांत रहो और डटे रहो..
_ क्योंकि जब हिम्मत मजबूत होती है, तो हालात भी झुक जाते हैं.!!
जिंदगी जीने के लिए कई तरीके हो सकते हैं पर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,

_ जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे.!
क्यों कुछ लोग शांति में भी अशांति ढूंढते हैं ?

_ कुछ लोगों का मन हमेशा अशांत रहता है. क्योंकि उनके अंदर ही Restless होता है.
_ अगर अंदर Noise तो बाहर की शांति भी uncomfortable लगेगी.
_ वे शांति को समझ ही नहीं पाते, उन्हें लगता है कि हर जगह कोई न कोई संघर्ष होना चाहिए, क्योंकि वे उसी माहौल में जीने के आदी हो चुके होते हैं.
_ ऐसे लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों में विवाद ढूंढते हैं, क्योंकि उनके लिए वही सामान्य बन चुका होता है.!!
मैं अपनी ‘मन की शांति’ चुन रहा हूं.

_ क्योंकि यही वह है जिसकी मुझे ‘सचमुच’ जरूरत है.
_ मुझे और नाटक की जरूरत नहीं है.
_ मुझे ऐसा महसूस कराने वाले लोगों की जरूरत नहीं है कि मैं काफी अच्छा नहीं हूं.
_ मुझे झगड़े, बहस और ‘नकली’ कनेक्शन की जरूरत नहीं है.
_ अभी मैं वह नहीं हूं जो मैं होना चाहता हूं ;
_लेकिन मुझे गर्व है कि मैं वह नहीं हूं _जो मैं हुआ करता था..!
सही राह वही है जहाँ मन शांत रहे, भले दुनिया उसे समझ न पाए.!!
_ मन की शांति सबसे बड़ी चीज़ है, पर इसे पाने की क़ीमत भी कम नहीं होती..
_ इसके लिए कई रिश्ते छूट जाते हैं, कई उम्मीदें पीछे रह जाती हैं, और बहुत सी बातें अनकही ही दफ़न हो जाती हैं..
_ लेकिन जब भीतर का शोर थम जाता है, तो समझ आता है जो खोया, वह बोझ था और जो बचा, वही सुकून है.!!
एक बात हमेशा याद रखें : अशांत पानी में कभी अपना चेहरा साफ नहीं दिखता, वैसे ही अशांत मन में कभी सही रास्ता नहीं दिखता.
_ ​इसलिए जब भी उलझन में हों, थोड़ा ब्रेक लें, लंबी सांस लें और मन शांत होने के बाद ही कोई कदम उठाएं.!!
जो कोई भी मन की शांति और स्वास्थ्य को महत्व देता है,

_वह हर संभव सर्वोत्तम जीवन जीएगा.!!
_मन की अच्छी व्यवस्था का नाम ही शांति है.!!
_हम जो कहते और करते हैं, उनमें से अधिकांश आवश्यक नहीं है ;
_ यदि आप इसे समाप्त कर सकते हैं, तो आपके पास अधिक समय और अधिक शांति होगी.
_ हर क्षण अपने आप से पूछो, ‘क्या यह आवश्यक है ?’
आज खुद से वादा करते हैं कि, कैसी भी बात हो, लोगों का कैसा भी व्यवहार हो; हम शांति और खुशी से रिस्पॉन्ड करेंगे.

_ कोई भी हमारी भावनाओं के लिए जिम्मेवार नहीं होता है और ना ही जैसा हम चाहते हैं, वैसा फील करा सकता है.
_ हम खुद ही अपने विचार, भावनाओं और व्यवहार के लिए जिम्मेवार हैं, नाकि कोई दूसरा.
_ उसने मेरे साथ गलत किया.. इसलिए मैं उदास हूँ… उसके व्यवहार की वजह से मुझे क्रोध आया आदि.. हमारी शब्दावली का हिस्सा नहीं होने चाहिए.!!
सिर्फ दुनिया में अमन, चैन और सुकून की दुआ कीजिए,

_ किसी का समर्थन किसी का विरोध करने से कुछ हासिल न होगा,
_ क्योंकि इंसानियत से बढ़ कर कुछ नहीं है..
_ और जब इंसानियत ही नहीं हमारे अंदर ..तो हम कुछ भी नहीं हैँ.
_ इस जिंदगी की कब शाम आ जाए और कब अंधेरों में गुम हो जाए किसी को नहीं पता…
_ इसलिए मुश्किल वक्त में सभी के लिए दुआएं कीजिए,
_ जो गलत राह पर हैं ..उन्हें सही राह पर चलने की दुआ कीजिए…
_ हर इंसान को अपने कर्मों का फल इसी दुनिया में ही मिलना है…
_ बेशक रब सब जानता है…
एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो लोग अंदर से खाली होते हैं, वे बाहर से बहुत ज़्यादा शोर करते हैं. _ जिन्हें सच में शांति मिल गई होती है, उन्हें दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. _ उनकी जिंदगी खुद एक उदाहरण बन जाती है.!!
अगर जीवन में खुश रहना है तो.. “जो मिला है उसको समझो ज्यादा”

_ वरना दौड़ कभी खत्म नहीं होगी..
_ और अगर दौड़ खत्म नहीं होगी तो कभी सुकून प्राप्त नहीं होगा.!!
“किसी को कुछ साबित नही करना है”

_ किसी मे कोई सुधार की कोशिश नही करना है.
_ सिर्फ अपना शांतिपूर्ण जीवन जीना है और चुपचाप आगे बढ़ना है.!!
हर बात में उलझना और दिल पर लेना ज़रूरी नहीं ;
_ हर कहने वाले को जवाब देना और उलझने वाले से उलझना भी ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ बातों को छोड़ देना चाहिए, ध्यान नहीं देना चाहिए..
_ कुछ बातें इतनी भी ज़रूरी नहीं होती कि उनमें पड़ कर अपनी मानसिक शांति को ख़त्म कर दिया जाए.!!
हमने कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों से खुद को इस कदर बाँध लिया है, कि अब सच की हल्की सी छींट भी जब हमारे ज़ेहन को छूती है, तो वो सच नहीं..- एक बदतमीज़ दखल सा महसूस होता है, जो हमारे बनाए हुए भ्रम की शांति को तोड़ने की कोशिश कर रहा हो.!!
कभी भी सबको खुश नहीं रखा जा सकता, हर किसी को खुश रखना असंभव है.

_ कुछ लोग दूसरों के विचारों या ज्ञान में अच्छाई देखने के बजाय, सिर्फ़ आलोचना करने का अवसर खोजते हैं.
_ ऐसे लोगों से दूर रहना आत्म-सम्मान का संकेत है.
_ शांति तभी मिलती है जब हम ये समझ लें कि सबको प्रसन्न करना हमारी जिम्मेदारी नहीं.!!
मैं जिस किसी से भी मिलता हूं,

_ वह किसी न किसी बात को लेकर दुखी और निराश दिखता है;
_ ऐसा महसूस होता है जैसे किसी के पास जो कुछ भी है.. उससे वह खुश नहीं है.
_इससे मुझे आश्चर्य होता है कि हमें पहले ये अधूरी भावनाएँ क्यों दी गईं ?
_ और यदि दिया गया है, तो किसी को वह क्यों नहीं मिल रहा जो वह चाहता है..
_इंसानों को हमेशा कुछ शांतिपूर्ण खोजने के लिए खो जाना पड़ता है,
_ लेकिन जीवन के अंत में उन्हें हमेशा एहसास होता है कि _शांति हमेशा उनके बगल में किसी चीज़ या किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में मौजूद थी _जिसकी उन्होंने सराहना नहीं की थी.
_ मैं हर किसी पर प्रतिक्रिया करने और जवाब देने में इतना समय बर्बाद कर देता था कि मेरे जीवन की कोई दिशा ही नहीं रह जाती थी.
_ अन्य लोगों का जीवन, समस्याएँ और इच्छाएँ मेरे जीवन की दिशा निर्धारित करती हैं.
_ एक बार जब मुझे एहसास हुआ कि मैं जो चाहता हूं उसके बारे में सोचना और पहचानना मेरे लिए ठीक है,
_तो मेरे जीवन में उल्लेखनीय चीजें घटित होने लगीं.
एक शांत व्यक्ति के लिए ये दुनिया हमेशा भारी रहती है.

_ क्योंकि जिन्हें जीने का तरीका नहीं आता, वे सबसे पहले उसी को disturb करते हैं – जो चुपचाप अपनी राह चल रहा होता है.
_ पर यह आपकी गलती नहीं है, यह दुनिया की गति है और आपका मन इस दुनिया से दो कदम आगे है — इसलिए टकराव ज्यादा लगता है.!!
मन अब उस मोड़ पर है, जहाँ गलती चाहे किसी की भी हो, शोर न उठे.. बस यही जरूरी है,

_ इसलिए अब सच के बजाय शांति चुनता हूं, और खुद को ही सुकून देता हूँ…!
मुझे अब किसी भी चीज़ से ज़्यादा शांति पसंद है.

_ इसलिए अगर कोई मेरे जीवन में उथल-पुथल मचा रहा है, तो मैं उसे सुलझाने के बजाय.. उसे छोड़कर चले जाने को प्राथमिकता दूँगा.!!
मन मोह में भटकता रहा… पर छोड़ देने पर ही शांति मिली..

– जिसे पाने लिए जीवन भर तरसता रहा, उसे छोड़ देने में राहत मिल गई.!!
जो लोग बहुत शान्त नज़र आते हैं, ज़रूरी नहीं कि वे सुखी हों.
_ वे असहाय और मजबूर भी हो सकते हैं.
_ अपनी मांगें मनवाने के लिए चिल्ला-चिल्ला कर थके हुए लोग मांगें पूरी न होने पर अंततः शान्त हो कर बैठ जाते हैं.!!
अगर कोई चीज़ और कोई लोग से आपकी शान्ति छीन रही है, तो वहाँ दूरी रखना ही समझदारी है, _ वहां involvement कम करना ही maturity है, selfishness नहीं.!!
‘शांति कोई लक्ज़री नहीं, ज़रूरत है’

_ हमारा नर्वस सिस्टम लगातार लड़ाई–भागदौड़ (fight or flight) में रहता है.
_ अगर उसे शांति नहीं मिलती, तो बेचैनी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान, भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ती जाती है.
_ जो व्यक्ति सच की खोज में है, वह बाहरी शोर से ज़्यादा अपने भीतर की शांति की रक्षा करता है.
_ हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, हर बहस में नहीं कूदता, हर रिश्ते को हर वक़्त ढोता नहीं.
_ रातें सिर्फ़ सोने के लिए नहीं होतीं, वे मन की मरम्मत का समय होती हैं.
_ जो अपने भीतर की शांति बचा लेता है, वही सच में आगे बढ़ता है.
_ जो अपनी रातों की शांति बचाता है, वही भीतर की स्थिरता बचाता है.
Fix your nights — your nervous system needs peace; a seeker protects their inner stillness.
मैं आत्मनिर्भर हूँ, और मैं ऐसा ही बनना चाहता हूँ, मुझे किसी ऐसे व्यक्ति की क्या ज़रूरत है जो मेरी शांति बन सके ?
I am self reliant, and I want to be, why do I need someone to be my peace.
_ मैं आत्मनिर्भर हूँ और रहना चाहता हूँ.
_ मुझे किसी और से अपनी शांति की उम्मीद नहीं रखनी.
_ मेरी शांति मुझसे है —
_ मेरी सोच, मेरी भावनाएँ, और मेरा संतुलन.
_ मैंने समझ लिया है कि –
_ खाली लोग सिर्फ खालीपन बाँटते हैं,
_ वे देने के लिए कुछ नहीं रखते.
_ मैं उनकी जगह खुद को क्यों खोऊँ ?
_ अब मैं खुद अपनी शांति बनूँगा, अपने भीतर की रोशनी से.!!
शांति के बारे में सबसे बड़ी बात यह है कि जब आपके पास यह होती है, तो आपकी आत्मा स्थिर और अडिग होती है, ; जब आपके पास शांति होती है, तो कोई भी चीज आपके दिल को हिला नहीं सकती, ; आप ऐसे लोगों के साथ व्यवहार कर सकते हैं जो आपको पसंद नहीं करते हैं और फिर भी उनकी आत्मा से प्रभावित नहीं होते हैं.

The great thing about peace is that, when you have it, your soul is anchored and unwavering. When you have peace, nothing can rock your core. You can deal with people who don’t like you and still not be influenced by their spirit.

“कोई भी आपकी अनुमति के बिना आपकी भावनाओं को ट्रिगर नहीं कर सकता है। शांत रहना सीखें और कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाहर क्या हो रहा है.”

“Nobody can trigger your emotions without your permission. Learn to be calm and centered no matter what’s happening outside of you.”

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