सुविचार – ये अंग्रेजी वर्ण हमें सिखाते हैं – 150

ये अंग्रेजी वर्ण हमें सिखाते हैं :-

A B C….?
Avoid Boring Company​
_​मायूस संगत से दूरी​_
_D E F…?_
Dont Entertain Fools​
_​मूर्खो पर समय व्यर्थ मत करों_
_G H I…?_
Go For High Ideas​
_​ऊँचे विचार रखो​_
_J K L M…?_
Just Keep A Friend Like Me​
_*मेरे जैसा मित्र रखों*
_N O P…?_
Never Overlook The Poor n Suffering​
_​गरीब व पीड़ित को कभी अनदेखा मत करों_
_Q R S…?_
Quit Reacting To Silly Tales​_
_​मूर्खो को प्रतिक्रिया मत दो​_
_T U V…?_
Tune Urself For Ur Victory​
_​खुद की जीत सुनिश्चित करों_
_W X Y Z…?_
We Xpect You To Zoom Ahead In Life​
————————————-

सुविचार – Climate change – क्लाइमेट चेंज – जलवायु परिवर्तन – 149

13878553534_2de9d2b63b

हमें ये समझना होगा कि दुनिया की बर्बादी होगी तो हम भी बिल्कुल सुरक्षित नहीं रहेंगे.!! 
बढ़ती गर्मी के मद्देनजर अब समय आ गया है कि ..हमें अपनी धार्मिक, सामाजिक, पारिवारिक और जहां तक संभव हो.. आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करने, बदलने या खत्म करने की जरूरत है..!!

_ 49 डिग्री में जन्मदिन, शादी भोज तथा अन्य प्रकार के भोज करना बंद करना होगा..
_ घर में लोगों (खासकर पुरुषों ) को दोनों समय छप्पन व्यंजन खाने की आदत बदलकर पुराने समय की तरह चना चबैना, सत्तू, शर्बत पर आना होगा..
..या भट्ठी जैसे धधकते किचेन में जाकर खुद पकाने की आदत डालनी होगी..
_ आर्थिक गतिविधियों में भी जो संभव हो ..उन्हें अब रात्रि कालीन करना चाहिए..!!
_ पेड़ लगाने और पानी बचाने की बात को पोस्टर, बैनर और फेसबुक से आगे निकलकर धरातल पर उतरना होगा..
_ प्लास्टिक और डिस्पोजेबल का उपयोग बंद नहीं तो कम ज़रूर करना होगा..
_ गर्मी से बचने,लड़ने के लिए नए ढंग से सोचने,करने की जरूरत है..
_पुराने ढंग में तो इंसान जिंदा ही नहीं बचेगा..
_ अगर शारीरिक रूप से जिंदा बचा भी तो मानसिक रूप से वह असंतुलित होकर जिएगा..
_ अनिद्रा, थकान सब उसे चिड़चिड़ा बना रहे हैं ..!!
_ जरूरी नहीं कि मेरी बात से आप सहमत हों..!!
_ क्योंकि प्रथाओं, परंपराओं, जीवनशैली, आर्थिक/सामाजिक गतिविधियों को बदलना आसान नहीं होता..
_ ..पर जब सरवाइव करने की लडाई हो तो ..बदलाव अपने आप आ जाते हैं..!!
– Mamta Singh

सुविचार – दर्द – पीड़ा – वेदना – 148

13871777424_5e38c6100b

आप 2 लोगों से पूछते हैं कि क्या उन्हें दर्द पसंद है और आपको 2 अलग-अलग जवाब मिलते हैं… सच में ?!?!

_ हाँ “दर्द किसे पसंद है ?” आप पूछ सकते हैं ?
_ हममें से ज्यादातर लोग दर्द से नफरत करते हैं.
_ और यह बहुत स्पष्ट है कि क्यों: – यह हमारे मन की शांति और हमारे आनंद को छीन लेता है.
_ इसलिए जब आप टेबल पर अपनी छोटी उंगली 🤞 मारते हैं और दर्द होता है 🤣 तो आपको निश्चित रूप से यह पसंद नहीं है.
_ दर्द को देखने का यह तरीका हम सभी पहले से ही जानते हैं.
_ “तो आप दर्द से अलग तरीके से कैसे निपट सकते हैं ?”
_ जब आप GYM में ट्रेनिंग के लिए जाते हैं तो आप पूरे शरीर की मांसपेशियों में दर्द के साथ बाहर निकलते हैं.
_ लेकिन इस बार – आप इसे पसंद करते हैं, क्यों ?
_ क्योंकि आप सोचते हैं कि यह दर्द आपके शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है 💪
_ आपको समझ आया ?
_ अगर आपके दिमाग में दर्द आपको मानसिक और भावनात्मक विकास की ओर ले जाता है, तो बिल्कुल जिम की तरह – आप महसूस करेंगे कि दर्द आपको बढ़ने में मदद कर रहा है.!!
ज़िंदगी में हमारे पास दो ही रास्ते होते हैं..

_ या तो हम ज़ख्म पर ध्यान देकर दर्द झेलते रहें,
या तो सबक़ पर ध्यान देकर ज़िंदगी में आगे बढ़ते जाएं.!!
कुछ बातें ऐसी होती हैं.. जिनका जिक्र किसी से नहीं होता,

_ कुछ दर्द ऐसे होते हैं.. जिनका कोई मरहम नहीं होता
_ कुछ गलतियां ऐसी होती हैं.. जिनका कोई पश्चताप नहीं होता
_ कुछ वक्त ऐसा होता है.. जो काटे नहीं कटता,
_ इन्हीं कुछ का मिला-जुला स्वरूप होती है हमारी जिंदगियां…!
“वो दर्द जो मेरे अपने नहीं, फिर भी मुझे छेड़ जाते हैं”

_कुछ दर्द हम कमाते नहीं, बल्कि औरों से ले आते हैं ताकि उनका बोझ हल्का हो सके”
हर पीड़ा का एक उद्देश्य होता है..

_ कभी सबक देना, कभी सब्र सिखाना, और कभी खुद से मिलवाना.!!
हर कोई सलाह देता है, पर असली समझ तब आती है जब दर्द अपने
दरवाज़े पर दस्तक देता है.!!
जिनके लिए हम दर्द बन जाएं या जो हमारे लिए दर्द बन जाए,,

_ उनके लिए खुद की जिंदगी को कष्टदायी क्यों बनाया जाए,,
_ क्यों न छोटी छोटी बातों से खुश होकर दर्द को ही जलाया जाए.!!
उस वक्त वाक़ई बहुत दर्द होता है, जब लोग आपकी बड़े से बड़ी कोशिश को नज़रअंदाज़ करके..

_ आपकी छोटी से छोटी गलती के लिए आप पर उंगली उठाते हैं.!!
आप अपने दुःख- दर्द – तकलीफें मत बताओ, ये तो सबके साथ हैं ;

_ आपने इससे अलग और क्या हासिल किया, वो बताओ.!!
कुछ उदासियाँ और दर्द,  किसी के साथ… बाँटें नही जा सकते…

_ उन्हें खुद के अंदर ही… रखने में सुकून मिलता है..!!
दर्द महसूस करें, लेकिन वहीं न रुकें – रोइए, चिल्लाइए, सब कुछ लिख डालिए—
_ जो भी आपको दर्द को स्वीकार करने में मदद करे, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी न होने दें.
खामोशियाँ कर दें बयान तो अलग बात है,
_कुछ दर्द हैं,, जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते.!!
सबकी तकलीफें अलग अलग, सबके दर्द सहने की क्षमता अलग अलग है,
_ कौन जानता है किसने क्या सहा है और क्या सह रहा है.!!
“हम दर्द में भी सामान्य दिखने की कोशिश करते हैं, टूटते हुए भी मुस्कुराते रहते हैं,

_ सिर्फ इसलिए कि लोग “अच्छा दिखने” को “ठीक होने” से ज़्यादा महत्व देते हैं.”
वक़्त दर्द को कम कर देता है, लेकिन जिन लोगों ने जानबूझकर वो दर्द दिया हो, उन्हें भूलना आसान नहीं होता.!!
कुछ दर्द साझा करने के लिए नहीं होते, – वे तो बस, हमें गहरा बनाते हैं.
कोई इंसान आपको तब तक दर्द पहुँचा सकता है,
_ जब तक आप समझ नहीं जाते कि वो इंसान आपके लिए बना ही नहीं है.
आपके दर्द को सुनने वाला हर शख़्स आपका अपना नहीं होता है,
_ कुछ लोग तो आपको बस इसलिए सुनते है ताकि वो दूसरों में आपकी बातें उछाल सकें.!!
अचानक लगी चोट कभी मौका नहीं देती कि ठहरकर सोच सकें या उसके दर्द को शब्दों में बयां कर सकें,

_ वो तो सीधे दिल और जिस्म पर एक साथ वार कर जाती है.!!
अक्सर चीज़ें हमारी मर्ज़ी के मुताबिक़ नहीं होतीं..

_ और आँखों के सामने बिखरती उम्मीदों की किरचन..
_ अक्सर अकेले में हमारी आँखों और दिल में चुभती हैं.
_ किसी को कैसे कहोगे कि वो उसे महसूस करके देखे,
_ क्योंकि उस दर्द का अंदाज़ा कोई कैसे लगा सकता है.!!
जब दर्द अपना नहीं होता, तो सिर्फ शब्द बनकर रह जाता है, ना वो चीख सुनाई देती है, ना वो खालीपन महसूस होता है, बस कहानी बनकर बीत जाता है.!!
अपने घाव भरने के लिए आपको उन चीज़ों और उन लोगों से दूर होना ही पड़ेगा.. जो आपको दर्द देते हैं.!!
जब दर्द बहुत होता है, तो इंसान को सबसे ज़्यादा साथ का एहसास चाहिए होता है – सलाह नहीं.!!
दर्द को ज़ाहिर करने के लिए हर बार आंसुओं की ज़रूरत नहीं होती,

_ कभी-कभी मुस्कुराहट भी बहुत कुछ कह जाती है.!!
किन लफ़्ज़ों में बयान करूँ मैं अपने दर्द को,
_ सुनने वाले तो बहुत हैं.. मगर समझने वाला कोई नहीं.!!
“दर्द की लिपि [Script] किसी भी भाषा से अनुवाद की जाए वह एक सी ही होती है.”
दर्द भुलाया जा सकता है, मगर जान बूझकर तकलीफ़ देने वालों को नहीं.!!
किसी के दर्द को महसूस करना हो तो थोड़ी देर के लिए उसके किरदार में उतर कर देख लो..!!
अब तो ग़म में भी कॉम्पटीशन है.. आपका दर्द सुनने से पहले सामने वाला अपना दर्द सुना देता है.!!
हम अक्सर अपने दर्द से भागना चाहते हैं, उसे भूलना चाहते हैं,

_ पर जितना भागते हैं, वो उतना ही भीतर उतरता जाता है.
_ और फिर एक दिन समझ आता है कि दर्द को मिटाया नहीं जा सकता, केवल स्वीकार किया जा सकता है.
_ उसी स्वीकार में एक अजीब-सी शांति मिलती है, जैसे तूफ़ान के बीच कोई ठंडी सांस उतर आए.!!
आख़िर हर इंसान हमेशा मज़बूत नहीं रह सकता.

_ कभी-कभी लड़ते-लड़ते हौसला भी जवाब देने लगता है,
_ मुस्कुराते चेहरे के पीछे का दर्द असहनीय हो जाता है और भीतर का इंसान बस थोड़ी-सी राहत चाहता है,
_ हर बार टूटकर ख़ुद को समेट लेना आसान नहीं होता.
_ कभी-कभी इंसान मज़बूत बने रहने की कोशिश करते-करते इतना थक जाता है कि उसे सहारे की नहीं,
_ बस कुछ पल सुकून से साँस लेने की ज़रूरत होती है.!
– Nirarthak Nirarthak
अपनी उलझन किसी से इसलिए भी नहीं कही जाती कि लोग समझाने चले आते हैं.

_ और इंसान हर वक़्त समझने, ज्ञान लेने के लिए तैयार नहीं होता है.
_ कभी कभी प्यार से सुन लिया जाता है, समझ लिया जाता है, किसी की तकलीफ़ को मेहसूस किया जाता है,
_ उसके सामने सही गलत, अच्छा, बुरा लेके नहीं बैठा जाता है..
_ और हमारे आसपास के लोगों को इतनी समझ भी नहीं शायद या वो इतने हस्सास नहीं हैं.
_ दर्द में ख़ामोशी से किसी अपने को थाम लिया जाता है..
_ क्योंकि वो आपसे बस थोड़ी सी मोहब्बत अपनेपन की दरकार से आए होंगे.!!
– Nida Rahman
इस दुनिया में कभी-कभी कुछ ऐसे भयानक मोड़ आते हैं, जहाँ इंसान अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि हालातों के थपेड़ों और अपनों के दिए गए असीम दबाव से मजबूर हो जाता है.

_ हम अक्सर उन लोगों को गलत ठहरा देते हैं जो जिंदगी से हार मानकर कोई चरम कदम उठा लेते हैं, पर हम यह कभी नहीं देख पाते कि उस कदम के पीछे उनकी कोई इच्छा नहीं होती.
_ उन्हें ऐसा करने के लिए धकेला जाता है मानसिक प्रताड़ना, उपेक्षा और उस घुटन के द्वारा, जहाँ चारों तरफ से रास्ते बंद कर दिए जाते हैं.
_ जब किसी का दम इस हद तक घुटने लगे कि उसे हवा का एक झोंका तक नसीब न हो, तब वह उस दर्द से मुक्त होना चाहता है.
_ यह किसी की कमज़ोरी नहीं, बल्कि उस लाचारी की इंतहा है जिसमें समाज और परिस्थितियां मिलकर उसे अकेला छोड़ देती हैं…✍️
– Tanveer

सुविचार – पछतावा – 147

h

क्या पछताने का कोई मतलब है ? पछतावे से मुक्त जीवन कैसे जीयें ?

Is there a point in having regrets ?How to live a regret free life ?
_ बिल्कुल कोई मतलब नहीं.
_ ऐसी चीजें हैं जो हम चाहते हैं कि हमने जीवन में नहीं की हैं और ऐसी चीजें हैं जो हम चाहते हैं कि हमने की है.
_ किसी भी कीमत पर, कोई भी पछतावा इसके लायक नहीं है.
_ जीवन पछतावे से मुक्त होना चाहिए.
_ रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर हम समझौता कर लेते हैं.
_ हम बिना वजह झूठ बोलते हैं.
_ दिन में कई बार, हम सूक्ष्म लाभों के लिए नकली चीजें बनाते हैं.
_ मैंने कई बार ऐसा किया है और मुझे इसका एहसास भी नहीं हुआ.
— हम रोज़ की ज़िंदगी में इस बात का ख़्याल नहीं रखते कि..
..हमारी वजह से उन्हे तकलीफ़ तो नहीं हो रही, जिनके साथ हम हैं.
— मैंने अपने जीवन में जो सीखा है वह यह है:
_ जो हो गया, उसे आप बदल नहीं सकते.
_ लेकिन अगर ऐसी स्थिति दोबारा आती है, और मुझे इसकी जानकारी है, तो मैं आदत से इसे दोहराऊंगा नहीं.
_ यदि मैं कुछ ऐसा करता हूं जो मैं नहीं करना चाहता और मुझे लगता है कि यह किसी भी तरह से गलत है, तो मुझे वह नहीं करना चाहिए.
— लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है:
_ यह सरल है.
_ पछतावे से मुक्त, ईमानदार जीवन जीने के लिए.
_ मैं इसमें हर दिन असफल होता हूं लेकिन यह असफलता भी मुझे आज फिर से जीवंत प्रयास करने के लिए और अधिक प्रेरणा देती है.
_ अगर मैं स्वीकार करता हूं कि मैं असफल रहा हूं, तो मुझे थोड़ी अधिक जागरूकता मिलती है और आज, एक नया व्यक्ति निर्णय ले रहा है.
— हमारे पास जो कुछ है वह आज है – या तो हम इसे जी सकते हैं,
_ हम कल के बारे में खेद महसूस कर सकते हैं, या उसके बारे में दिवास्वप्न देख सकते हैं.
_ चुनाव पूरी तरह हमारा है.
_ तो, आइए आज पछतावा न करें और इसे जीएं.
“आपको अपने आप पर काम करने का कभी पछतावा नहीं होगा ;

_ आपको अपने भविष्य में निवेश करने का कभी पछतावा नहीं होगा ;
_ साधन संपन्न होने, व्यायाम करने, ध्यान करने पर आपको कभी पछतावा नहीं होगा ;
_ उन चीजों को करने में अधिक समय व्यतीत करें..
जिन्हें आप जानते हैं कि आपको पछतावा नहीं होगा.”

सुविचार – पराधीन, पराधीनता, अधीन, मातहत, आश्रित, पराश्रित, परवश, परतंत्र, निर्भर, अधीनस्थ – 146

y

पराधीन – दूसरों के रहमो करम पर जीवन यापन करना कितना कष्टप्रद होता है,

_ यह तो कोई भुगतभोगी ही बता सकता है.

पराधीन व्यक्ति परायी और बासी ज़िंदगी जीता है,

_ वह सदा जिस पर आश्रित है कि ओर टुकर-टुकर निहारता है.

पराधीनता का आशय है – दुसरे के अधीन. “अधीनता बहुत बड़ा दुःख है”

_ हर आदमी स्वतंत्र रहना चाहता है,

_ यहाँ तक कि सोने के पिंजरे में बंद पक्षी भी राजमहल के सुखों और स्वादिष्ट भोगों को छोड़कर खुले आकाश में उड़ जाना चाहता है.

सुविचार – पानी, जल, नीर, वाटर, Water – 145

13822343693_c3e1a3295f

पानी, दूध, अनाज, विद्युत ऊर्जा [ इलेक्ट्रिक ] या पेट्रोल- डीज़ल की बर्बादी और पर्यावरण की अशुद्धता- ऐसी समस्या है,

__जिस पर हम यदि गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हमारी लापरवाही को भुगतेगी. _हमें अपने ‘साक्षर’ नहीं, सुशिक्षित होने का व्यवहार करना चाहिए.
_एक कहावत है- `बचाया हुआ यानी कमाया हुआ.’
How long until we run out of fresh water ?

Unless water use is drastically reduced,severe water shortage will affect the entire planet by 2040.
“There will be no water 2040 if we keep doing what we’re doing today.” – Professor Bejamin Sovacool, Aarhus University, Denmark.
कब तक हमारा ताज़ा पानी ख़त्म हो जाएगा ?
जब तक पानी का उपयोग बहुत कम नहीं किया जाता, 2040 तक पानी की गंभीर कमी पूरे ग्रह को प्रभावित करेगी.
“यदि हम वही करते रहे जो हम आज कर रहे हैं तो 2040 तक पानी नहीं होगा.”
– Professor Bejamin Sovacool, Aarhus University, Denmark.
जल की एक्सपायरी डेट क्या है ?

● जहाँ नल में जल हर दिन आता है. वहीं जल हर दिन बासी हो जाता है और हर दिन बहा दिया जाता हैं। उसकी एक्सपायरी डेट सिर्फ़ १ दिन की होती है.
● जहाँ २ दिन में जल आता है, वहाँ २ दिन में जल बासी हो जाता है और बहा दिया जाता है.
● जहाँ आठ दिन बाद जल आता है। वहाँ वह आठ दिन बाद बासी हो जाता है.
● शादी समारोह में अगली बिसलरी का सामना होते ही हाथ में रखी जल की आधी बोतल खत्म हो जाती है और उसे फेंक दिया जाता है.
● रेगिस्तान में यात्रा करते समय निकटतम जल तब तक ताजा रहता है, जब तक जल का दूसरा स्थान दिखाई न दे.
● बाँध का जल अगले मानसून तक ताजा माना जाता है.
● यदि सूखे की स्थिति बनती है तो यही जल दो से तीन वर्ष तक ताजा माना जाता है.
● जहाँ ५० फीट के बोरवेल से जल निकाला जाता है. वह जमीन के नीचे सैकड़ों साल पुराना है. यानी सैकड़ों साल पुराना जल पीने के लिए सुरक्षित है. एक्सपायरी डेट सैकड़ों साल..
● जहाँ ४०० से ५०० फीट पर बोरवेल से जल निकाला जाता है, वह हजारों साल तक ज़मीन के अंदर जमा रहता है. फिर भी चलता रहता है.
● कुल मिलाकर जल की समाप्ति हमारी कमज़ोर बुद्धि पर तय होती है.
जल का संयम से उपयोग करें, नहीं तो आपके विचार आपको मार डालेंगे.
जल है तो कल है.
पानी के कितने सारे नाम है..

आकाश से गिरे तो बारिश
आकाश की और उठे तो भाप
अगर जम कर गिरे तो ओले
अगर गिर कर जमे तो बर्फ
फूल पर गिरे तो ओस
फूल से निकले तो इत्र
जमा हो जाए तो झील
बहने लगे तो नदी
सीमाओं में रहे तो जीवन
सीमाएं तोड़ दे तो प्रलय
आंख से निकले तो आंसू
शरीर से निकले तो पसीना
हरि के चरणों को छूकर निकले तो चरणामृत.!!
error: Content is protected