सुविचार – बचपन – बच्चा – बच्चे – बच्चों – 017

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जब मैं छोटा था तब मुझे बड़ा होने की बड़ी जल्दी थी ! आज समझ आया की वो बचपन ही अच्छा था, जब ना किसी की ज़रूरत थी और ना कोई ज़रूरी था.

बचपन चला गया ___ज़िन्दगी की सबसे कीमती _ निशानी चली गई _
वो बचपन बहुत प्यारा था,_ जो कभी हमारा था..!!
बचपन की यादें किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे खूबसूरत यादें होती हैं.

_ समय में पीछे जाएँ और अपने आप को उस बचपन की मासूमियत में डुबो दें और देखें कि वह कितना सुंदर था.!!
बस कोई लौटा दे वो बचपन के दिन..

_ खाली हाथ होने के बावजूद भी, कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ था..

जब छोटे बच्चे थे तो जोर से रोते थे, जो पसंद था उसे पाने के लिए.!

_ आज बड़े हैं तो चुपके से रोते हैं, जो पसंद हैं उसे भुलाने के लिए.!!

अँधेरे से कह दो बचपन बीत चुका, अब तुझसे डर नहीं सुकून मिलता है.!!
बच्चे दर्पण की तरह होते हैं, हमारे लाख छिपाने की कोशिश के बावजूद भी

एक बच्चे में सच को समझने की अनोखी योग्यता होती है.

बच्चे कोरे कपड़े की तरह होते हैं, जैसा चाहो वैसा रंग लो,

उन्हें निश्चित रंग में केवल डुबो देना पर्याप्त है.

बड़े हो चुके होने का एहसास दिला के जिंदगी, झिंझोड़ देती है

बचपन तब ही ख़त्म हो जाता है जब, माँ डाँटना छोड़ देती है।……..

*बचपन साथ रखियेगा ज़िन्दगी की शाम में,*

*उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के मुक़ाम में*

” मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखे

ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह “

भागते बचपन में भी थे, भागते आज भी हैं !! _

_बस्ता वही है, बस अंदर का सामान बदल गया है !!!

वो बारिश का पानी, वो कागज़ की नाव _

_ बचपन को जिया है, मैंने फिर से एक बार ..

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था, _

_ वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था !!

लौट कर आती हैँ, वो तारीखें ,,

_ लौट कर, वो दिन नहीं आते …!!

बचपन बीत गया है अब, अब वो ज़माने नहीं आते _

_ यार पुराने दूर हैं मुझसे, अब वो ग़म मिटाने नहीं आते ..

इतनी चाहत तो लाखो रु पाने की भी नही होती,

जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है…….

बचपन साथ रखिए जिंदगी की शाम में

उम्र महसूस ही ना होगी सफर के मुकाम में।

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते.

इसलिए तो बच्चों पर नूर बरसता है,

शरारतें करते हैं, साज़िशें तो नहीं.

बच्चे पौधों के समान होते हैं –

वे प्रेम, प्रसन्नता और स्वतंत्र वातावरण में बढ़ते हैं.

आता है याद मुझ को बचपन वो जमाना,

रहता था साथ मेरे खुशियों का जब जमाना..

गरीबों की बस्ती में जरा जाकर तो देखो,

वहाँ बच्चे भुखे तो मिलेगें, मगर उदास नही.

दोस्ती तो बच्चे ही कर सकते हैं, बड़े तो समझौते और सौदेबाज़ी करते हैं !
माता-पिता बच्चों के नक़ली दोस्तों और बच्चे माता-पिता के नक़ली रिश्तेदारों को पहचानने में माहिर होते हैं..!!
एक बच्चे के लिए बचपन की यादें ही उनके आने वाले कल को खूबसूरत बनाती है,

_ इसलिए हो सके तो अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा प्रेम दें, ताकि वो प्रेम पाने के लिए गलत संगत का सहारा न ले.!!

अब तो बच्चे भी परिंदों जैसे हो गए हैं,

_ साथ रह कर बड़े होते हैं __ और बड़े हो कर उड़ जाते हैं..

बच्चे जल्दी-जल्दी घर आने चाहिएं.

_ एक उम्र के बाद मां-बाप मुरझाने लगते हैं “बच्चों के बिना”.!!

अपनी बच्चों से दोस्ती रखो, ताकि वो अपनी हर बात आप से शेयर कर सके.

_ वरना बुरे लोग घात लगाए बैठे हैं, उसे बुरा बनाने के लिए.!!

बच्चों की परवरिश में केवल आर्थिक उन्नति को शामिल मत कीजिए..

_ बल्कि मानसिक उन्नति को भी शामिल कीजिए.!

क्या हम अपने बच्चों को एक टॉप-ग्रेड मशीन बना रहे हैं, या एक समझदार इंसान ?
जिन बच्चों को बार-बार ताना मारा जाता है.. वो कोशिश करना छोड़ देते हैं.

_ जिन बच्चों को मारा पीटा जाता है.. वो डरपोक बन जाते हैं.
_ जिन बच्चे का मजाक बनाया जाता है.. वो आत्मविश्वास खो देते हैं.
_ जिन बच्चे पर विश्वास नहीं किया जाता है.. वो विद्रोही बन जाते हैं.
_ जिन बच्चों की तारीफ नहीं की जाती है.. वो अपने आप को पसंद करना छोड़ देते हैं.
_ कभी सोचा है हमारे व्यवहार से हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं.
_ बच्चो को फूलों की तरह सम्भालिए, उनका उत्साह बढाइये, मोटिवेशन दीजिए.
_ डराने धमकाने से.. सीखने की गति सौ गुना कम हो जाती है.!!
बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…

_ जहां पर वास्तव में जीवन की असली खुशियां मिलती है..
_ कोई जिम्मेदारी नहीं… दुनियादारी नहीं …मन में किसी तरह का छल कपट नहीं…
_ बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…जहां पर वास्तव में जीवन के असली खुशियां मिलती है..
_ जीवन में मिलने वाली छोटी-छोटी चीज भी कितनी अच्छी लगती है..
_ जीवन में बचपन का समय तो गुजर जाता है..
_ लेकिन बचपन की खुशियां कुछ तो विशेष होती हैं…
_ जिसके गुजर जाने के बाद अहमियत और बढ़ जाती है..
_ मां-बाप के साथ बीते हुए पल.. उनके द्वारा बनाया हुआ खुशी का माहौल…
_ कम में कैसे खुश रहना है…पता नहीं…
_ वो वक्त बहुत अलग था.. सादगी और मासूमियत से भरा जीवन..!!
” बचपन की यादों का सफर “

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ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
बीत गए कितनी जल्दी बरस दर बरस
पर ठहर गया तेरी बातों का सफर ।
किताब मांगना, फिर उसे लौटा देना
छत पर आना उसका, वो रातों का सफर।
रूठना बिना बात मेरा, मनाना तेरा
देखना साथ हमारा, तारों का सफर।
क्यों हुआ बचपन की बातो का छिड़ना
हां वो मास्टर जी की बेतों का सफर।
होली में भीगना, गुब्बारे फोड़ना
बहुत सुहाना था त्योहारों का सफर।
याद है वो हौज पे घंटो नहाना
सुहाना था सुबह की सैरों का सफर।
याद वो कपिल का वर्ल्ड कप जीतना
रेडियो पर मुकेश के गानों का सफर।
जून की तपती दोपहरी में खेलना
प्यारा लू से बेपरवाहियो का सफर।
वो नानाजी का प्यार से पढ़ाना
उनकी बेपनाह मुहब्बतों का सफर।
सिलसिला छिड़ा तो, उसका बंद न होना
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
आज बच्चों को शोर मचाने दो

कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ख़ामोश ज़िंदगी बिताएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
गेंदों से तोड़ने दो शीशें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दिल तोड़ेंगे या ख़ुद टूट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बोलने दो बेहिसाब इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
इनके भी होंठ सिल जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
दोस्तों संग छुट्टियों मनाने दो
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दोस्ती-छुट्टी को तरस जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
भरने दो इन्हें सपनों की उड़ान
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
पर इनके भी कट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बनाने दो इन्हें काग़ज़ की कश्ती
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ऑफ़िस के काग़ज़ों में खो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
खाने दो जो दिल चाहे इनका
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
हर दाने की कैलोरी गिनाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
रहने दो आज मासूम इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ये भी “#समझदार” हो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
एक सुझाव : – ध्यान रहे कि मैं बच्चे के जन्म के खिलाफ नही हूं..

_ _लेकिन जब हमें पता है कि बच्चे के जन्म होते ही क्या होने वाला है.. उसके साथ..
_ तो हम सोच सकते हैं कि क्या करना है,
_ यदि आप उन छोटे बच्चों का ध्यान जीवन भर रख सकते है तो जरूर जन्म लेने दें और उनका ख्याल रखें.
_ लेकिन ये भी ध्यान रहे कि बिना सोचे समझे बच्चे पैदा न करें..!!
_ हर कोई कह सकता है कि वो बच्चे चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चे पालने में सक्षम नहीं होते.!!
_ हमारी सबसे बड़ी कमी, बच्चे तो पैदा कर लेते हैं, पर उन्हें कैसे पालना है, उनकी कैसी परवरिश करनी है, पता नहीं होता,
_ और ऐसे लोग ही आगे चलकर मनोविकार से ग्रस्त हो जाते हैं, मेंटल हेल्थ से गुजरते हैं.
हम बच्चे पैदा किसकी खुशी के लिए करते हैं ?
_ इस दुनिया मे जंहा तकलीफ, दुख, संताप, संघर्ष, धोखे भरे पड़े हैं,
_ ये सब जानते हुए भी क्यों माँ बाप एक और जिंदगी ला रहे हैं ?
_ सिर्फ बाप को समाज को साबित करना है कि मै नपुंसक नहीं हूँ और औरत को कि मैं बांझ नही हूँ.
_ फिर कौन उस से पूछ रहा है कि तु इंसान बनेगा या हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ?
_ सब मां बाप धर्म थोप रहे हैं.
_ माता पिता को माफ कर दें बच्चे, उनको इस घटिया इंसानो की दुनिया में लाने के लिए तो भी बहुत है..!!
जब बच्चों के लिए सही होशपूर्ण- सचेत वातावरण और परवरिश न हो तो उन्हें जन्म क्यों देना.!!
माता-पिता बनने के लिए योग्यता और पात्रता होनी चाहिए, हर कोई माता-पिता बनने में सक्षम नहीं होता, खराब पालन-पोषण का परिणाम आपराधिक प्रवृत्ति को ही बढ़ावा देता है, यदि बच्चे ठीक से प्रेम प्यार से पाले नहीं जाते तो पैदा ही न करें.

_ भारत में ज्यादातर पुरुष बाप बन जाते हैं, पिता कुछ ही बन पाते हैं.!!

आजकल के बच्चों में जिंदगी के झटके सहने की क्षमता बहुत कम है ;
_यही कारण है कि आज मानसिक अवसाद और तनाव अधिक व्याप्त है.!!
सामाजिक ताने बाने के भीतर आखिर हमने ऐसा खोखला डर क्यों बनाया हुआ है कि,
_ हम अपने ही घरों के बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को समझ नहीं पा रहे हैं.
बच्चों को बचपन में केवल एक अनुशासन सिखाइए कि अपनी चीज़ें सही जगह पर रखो.

_ बड़े होने पर उन्हें अपना जीवन सही जगह पर रखना आ जाएगा.
कभी-कभी होता यूँ है कि हम जिसे बच्चा समझ कर समझा रहे होते हैं,
_ वो अपनी विचारधारा में हमसे भी बड़े होते हैं.. वो खुद जानते हैं हर परिस्थिति से बाहर निकलना..!!
बच्चों को उड़ने से मत रोकिए._

_ वे कई बार गिरेंगे, कई गतिविधियों/कोर्सेज़ में पैसा व समय भी खराब करेंगे.
_ फिर भी उन्हें मत रोकिए.
_ अगर वे खुश होकर उड़ेंगे, तो उड़ते-उड़ते एक न एक दिन अंबर को छू ही लेंगे.
_ घर वालों को चाहिए कि वे अपने बच्चो के जीवन को बहोत कंट्रोल न करें…!
अपने बच्चों को खुद अपने सपने बुनने दीजिए..

_ उसे पूरा करने के लिये.. उसके सारथी बनिये..
_ मगर, उसकी आँखों में अपना सपना मत बो देना..
_ बच्चे की आंखों में परिवार का बोया सपना बड़ा भारी होता है..
_ वह सपना बच्चे को बूढ़ा कर देता है.. ‘उसे थका देता है’
_ दूसरों का सपना, सबसे पहले बचपन चट कर जाता है और फिर बाकी का जीवन..!!
माता-पिता कृपया अपने बच्चों पर अपने सपने मत थोपें, बच्चों के जो मनपसंद विषय है, उन्हें चुनने दें..
_ ताकि वो अपने भविष्य का निर्माण हंसते खेलते तनाव रहित होकर कर सकें..!!
संघर्ष में पले बच्चे भटक नहीं सकते, उन्होंने कामयाबी से पहले पसीना देखा होता है.
मै और मेरी पत्नी कभी अपनी बच्चों पर अपना सपना नहीं थोपते,

_ हमनें बच्चों को बोल कर रखा है कि.. आपसे ज्यादा हमारे लिए कुछ कीमती नहीं..
_ सही गलत की शिक्षा देते रहते हैं,
_ और फिर भी कोई बात हो या कोई गलती..
_ उसके लिए वो हमसे बेझिझक बात करे.. ऐसा माहौल बनाया है..!!
जीवन वाकई में दुखों और कष्टों की सेज है..

_ पर फिर लगता है कि हमारा क्या भरोसा, हम कब तक रहेंगे, और इस लिए बच्चों को आगे बढ़ने के लिए, स्वछंद उड़ान भरने की लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखना ही पड़ता है..!!
पेरेंटिंग पर अधिक से अधिक बात, विचार, किताबें होनी चाहिए,

_ क्योंकि साबित हो चुका है कि अधिकांश पेरेंट्स केवल बच्चे की पढ़ाई, खिलौने, खाने आदि ज़रूरतों को पूरा करना ही पेरेंटिंग समझते हैं,
_ उनकी भावनात्मक, संज्ञानात्मक ज़रूरतों की जानकारी.. उन्हें इस आपाधापी भरे जीवन में नहीं हो पाती..!!
बच्चों की अपनी जिंदगी होती है, उन्हें जीने दीजिए,

_ वे साथ दें तो धन्यवाद, साथ न दें तो भी आशीर्वाद दें >>’वृद्धावस्था में स्वयं स्वाबलंबी और समर्थ बनें रहें, बाकी सब मिथ्या..!!
_ फिर साथ मिले या आदर- सत्कार मिले तो ” सोने पर सुहागा “
स्वयं को अक्षम समझना हमें हीन, कमजोर और लाचार बनाता है,

_जबकि दूसरों में दोष देखना, हमें परछिद्रान्वेषी, घमंडी, ईर्ष्यालु, बहानेबाज और गैरजिम्मेदार बनाता है.
_मनुष्य के लिए आदर्श और सकारात्मक सोच है- मैं सही, तुम भी सही..
_ डा॰ एरिक बर्न की उक्त कसौटी पर माता-पिता और उनके बच्चों के मध्य विकसित होने वाले मनोभावों को आसानी से समझा जा सकता है.
_बचपन में माता-पिता पर निर्भरता बच्चे पर उनके प्रति अनुकूल प्रभाव रखती है,
_लेकिन उस निर्भरता के समाप्त होते ही, वह आत्म-स्वतन्त्रता की ओर उन्मुख होने लगता है.
_माता-पिता का मार्गदर्शन और आदेश उसे नहीं सुहाता.
_ दरअसल, वयस्क मन स्वयं समझ विकसित करके निर्णय लेना चाहता है,
_जिसमें माता-पिता उसे बाधक समझ आते हैं.
_यहीं से उनके मध्य मतभेद उत्पन्न होने लगते हैं,
_जो धीरे-धीरे मनभेद की ओर बढ़ जाते हैं, और कालांतर में संघर्ष का रूप ले लेते हैं.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल [ लेखक ]
अपने बच्चों से प्यार कीजिए, उन्हें बात-बात पर लज्जित मत कीजिए ;

_ कभी किसी बच्चे से तुलना करते हुए उसे कमतर मत बताइए.
_ बच्चा गलती कर सकता है, उसकी कुछ गलतियों की अनदेखी कीजिए.
_ मौका मिले तो समझाइए, बात कीजिए, लेकिन जलील मत कीजिए.
_ कोई उसकी आपसे शिकायत लगाए, तो भी अपने बच्चे को प्रोटेक्ट कीजिए.
_ कहिए कि वो छोटा है, टीन एज में है, नासमझ है,
_ पर उनकी हां में हां मिला कर बच्चे का दिल मत तोड़िए.
_ बच्चे अपने मां-बाप की ओर बहुत हसरत भरी नज़रों से देखते हैं.
_ उन्हें उम्मीद होती है कि जब पूरा संसार उनके विरुद्ध हो जाएगा, तब भी मां-बाप खड़े रहेंगे ..उसकी तरफ से.!!
— हर मां-बाप को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए, उनके दिल का हाल पूछिए.
_ उनसे स्कूल में होने वाली गतिविधियों पर चर्चा कीजिए.
_ वो कभी पार्टी करना चाहे तो करने दीजिए.
_ आखिर उसे इसी संसार में बड़ा होना है, जीना है.
_ हर छोटी-बड़ी बात पर उसका मूल्यांकन मत कीजिए और टीचर से जब मिलने जाएं तो उनकी ओर से नहीं, अपने बच्चे की ओर खड़े दिखिए.
_ बच्चे सही मायने में भविष्य की अमानत हैं.
_ उन्हें बड़ा कीजिए. प्रोडक्ट बना कर नहीं, इंसान बना कर.
_ उनमें भरोसा जताइए.
_ भरोसे से प्यार बढ़ता है, प्यार से नजदीकियां..
_ अपने बच्चे के नज़दीक आइए..
— प्यार ही हर रिश्ते की बुनियाद है.
_ जब आप बच्चे को डांटेंगे, फटकारेंगे, जलील करेंगे तो प्यार कम होगा.
_ जब प्यार कम होगा ..फिर रिश्ते रहें न रहें क्या फर्क पड़ने वाला है ?
_ किसी को डांटना, पीटना रिश्तों की कड़ियों को टूटने देना है.
_ मत टूटने दीजिए रिश्तों की कड़ियों को.
_ प्यार ज़िंदगी है, प्यार बंदगी है, प्यार से प्यार कीजिए.
_ आदमी वही आदमी होता है, जो प्यार करना जानता है.
हर इंसान की चाहत होती है कि उसकी कद्र हो और उसके अस्तित्व की अहमियत समझी जाए, ये बात दुनिया को बताई जाए..

_ हर किसी के अंदर एक बच्चा दुबकी मार के बैठा है..
_ जो गलतियां कर कर के सीखता रहना चाहता है पूरा जीवन..
_ इस बात को आप नकार सकते हो ..चूंकि ये आपके बड़प्पन के आड़े आ रहा होगा..
_ लेकिन मन ही मन सोच रहे होंगे कि __ मन की बात कह दी बच्चे ने !!
भारतीय समाज में विवाह और संतानोत्पत्ति की एक सुविचारित, सुदृढ़ और सुदीर्घ परंपरा के कारण माता पिता बनना बहुत आसान और अनिवार्य कार्य समझा जाता है..

_ बच्चे को जन्म देना, पढ़ाना लिखाना, खिलाना पिलाना और फरमाइशें पूरी करना ही यहां पेरेंटिंग समझा जाता है जबकि उसके संवेदात्मक, भावनात्मक विकास के लिए माहौल तैयार करना कोई ज़रूरी काम या जिम्मेदारी नहीं मानी जाती..
_ अधिकतर परिवारों में बेहद टॉक्सिक माहौल होता है, मां बाप बच्चों के आगे ही आपस में या परिवार, पड़ोस से झगड़ते, गाली गलौच करते हैं बिना यह सोचे कि इसका बच्चे के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा !
_ बिना मानसिक, आर्थिक, शारीरिक तैयारी के, बिना प्लान के बस शादी हो गई है तो बच्चा पैदा करना है के दबाव, आदत, परम्परा के कारण बच्चे पैदा कर दिए जाते हैं और फिर कभी उस बच्चे के कारण या उसे मोहरा बनाकर सारी जिंदगी लोग झगड़ते ,भटकते रहते हैं..
_ जिसे दुनिया में ला रहे हैं उसके लिए एक सुंदर दुनिया बनाने और उसे दुनिया को सुंदर बनाने लायक करना लोगों को नहीं आता…जब बच्चों से पूछकर उन्हें पैदा नहीं किया जाता तो पैदा होने के बाद वह किस बात की कीमत ज़िंदगी भर चुकाते हैं..
_ पारिवारिक, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक सुविधाएं देकर बच्चों का मानसिक शोषण करना, उन्हें नीचा दिखाना,पालन पोषण का ताना देना और ज़िंदगी भर उनके हर कदम की आलोचना करना और अंत में असहाय होने पर उन्हीं बच्चों से प्यार, इज़्ज़त,देखभाल की अपेक्षा करना यहां आम बात है..
_ घर नाम की जगह को इतना सुकून भरा,प्यार भरा और भरोसे भरा होना चाहिए कि पढ़ने, कमाने या दुनिया देखने निकला बच्चा बार बार वहां लौटना चाहे, वर्ना तो जिसे जब जैसा बहाना, मौक़ा मिलेगा वह घर छोड़ जाएगा फिर आप रोते रहिए नए ज़माने को..
_ बच्चों से ज़्यादा यहां पेरेंट्स को ट्रेनिंग की ज़रूरत है…
– Mamta Singh
कुछ लोग तो आज के दौर में भी इतने गैर जिम्मेदार होते हैं.. ऊपर वाले के भरोसे बच्चे पैदा करते हैं..

_ और उनमें से कुछ आज भी ऐसे होते हैं जो लड़के की चाहत में बच्चे पैदा करते जाते हैं, _ गैर जिम्मेदाराना तरीके से इस तरह अनियमितता लाना… अपने स्वयं के साथ और धरती के साथ अन्याय है,
_ साथ ही उस बच्चे के साथ भी जिसे अनचाहे तरीके से आप जन्मते हो..
_ पति पत्नी का साथ एक संतुलित व्यवस्था है.. इसे असंतुलित ना करो,
_ यदि अपने मनोरंजन के लिए तुम किसी का जीवन खराब करते हो और इस धरती को.. तो तुम मनुष्य नहीं हो..!!
– Rhythm Rahi
हम पूरी उम्र गुज़ार देते हैं श्रम करते हुए कि बच्चों का जीवन बनाना है, ताकि उन्हें भविष्य में कोई तकलीफ़ न उठानी पड़े.

_ उस समय हम बच्चों को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते.
_ जब हम सारे फ़र्ज़ पूरे करके खाली होते हैं, और बच्चों के साथ वक़्त बिताना चाहते हैं तो बच्चों के पास वक़्त नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.!!
– Manika Mohini

सुविचार – टाइम मैनेज – 016

~~ समय ~~

आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है.

परिवार, पुस्तक एवम प्रकृति के साथ समय बिताना सिख जाओ…

_ वरना समय भी एक समय तक ही मोहलत देता है…!!!!

धन बर्बाद कर के आप निर्धन होते हैं, _

_ लेकिन समय बर्बाद कर के आप अपना जीवन नष्ट करते हैं..!!

कई लोग ऐसी बातों के बारे में सोच रहे हैं, जो कभी होने वाली नही है, खैर !…
_ यह भी एक अच्छा टाइम पास है.!!
समय एक नदी की तरह है. आप एक ही पानी को दो बार नहीं छू सकते, क्योंकि जो प्रवाह बीत चुका है वह फिर कभी नहीं गुजरेगा.; _अपने जीवन के हर पल का आनंद लें !

Time is like a river. You cannot touch the same water twice, because the flow that has passed will never pass again. Enjoy every moment of your life !

समय मुफ़्त है, लेकिन अमूल्य है ; _ आप इसके मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं.

आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं ; _ एक बार आपने इसे खो दिया तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते..

हम अपने जीवन में सबसे बड़ी गलती यह सोचते हैं कि हमारे पास समय है.

Time is free, but it’s priceless. You can’t own it, but you can use it. You can’t keep it, but you can spend it. Once you’ve lost it you can never get it back. The biggest mistake we make in our life is thinking we have time.

अगर हम रोजाना अपने कामों की लिस्ट बनाएँ और टाइम मैनजमेंट के अनुसार उन्हें निबटाएँ, तो सारे काम बड़े आसानी से हो सकते है. इधर- उधर की चीजों में , बेकार के तनाव में अपना समय न गँवाएँ — स्मार्ट वर्किंग से काम पूरा करें और अपनी ज़िन्दगी को एन्जॉय भी करें.

जो लोग यह कहते हैं ” मेरे पास बहुत काम है, वक्त नहीं है….. ” दरअसल वे लोग दिशाहीन होते हैं, उन्हें खुद को मैनेज करना नहीं आता.

एक बात जान लीजिए – समय एक ऐसा संसाधन है जिसका भविष्य के लिए संग्रह नहीं किया जा सकता है. अमीर हो या गरीब, सभी के पास एक दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं. जो समय चला जाता है, उसे वापस कभी नहीं लाया जा सकता है.

इसलिए समय का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. जब कभी लगे कि समय कम पड़ गया है, तो अपना एक रूटीन बना लेना चाहिए. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए टाइम मैनेजमेंट में पारंगत होना जरुरी है. ऐसा नहीं होने पर कभी लगेगा समय कट नहीं रहा है और कभी अनुभव होगा कि समय है ही नहीं- इसलिए समय से पंगा नहीं.

समय का सदुपयोग किन किन चीजों में है ये बात हमें पता होनी चाहिए. एक ही टाइम टेबल 365 दिन काम नहीं आता. हमें समय का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए.
Time management  का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सबसे पहले आप यह पता लगाएं कि आपका समय कहाँ बर्बाद हो रहा है. अगर आप ये पता लगा पाए तो आप उन सभी कार्यों को छोड़ सकते हैं जो आपका टाइम वेस्ट कर रहे थे.
सोचिये यदि आप कोई जरुरी कार्य कर रहे हैं और तभी आपका कोई दोस्त आ जाता है और आपसे बातें करने लगता है. ऐसे समय में आपको उससे अच्छे शब्दों में “न” कह देना चाहिए, वरना आपका टाइम वेस्ट हो जायेगा.
ध्यान दीजिए, क्या आप व्हाट्सप्प या फेसबुक पर कितना समय देते हैं. क्या आप ज्यादा टीवी देखकर अपना टाइम वेस्ट तो नहीं कर रहे. अगर ऐसा है तो तुरंत सावधान हो जाएँ और ऐसे तरीके अपनाएं जिससे आपका टाइम वेस्ट न हो और आप समय बचा कर उसे अच्छे कार्यों में प्रयोग कर सकें.

सुविचार – ईर्ष्या – ईर्ष्यालु – द्वेष – घृणा- कुढ़ना – नफ़रत – नफरत – जलन – 015

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दूसरे की तरक्की से जलना नहीं चाहिए..

_ इंसान के पास अपनी ही खुशियां इतनी होनी चाहिए कि दूसरे की खुशी से जलने का समय न बचे.
_ लोगों की तारीफ़ करना सीखिए..
_ उनकी खुशी में शरीक होना सीखिए… खुश रहना सीखिए.
_ न जलिए, न जलाइए.. – ज़िंदगी इन बातों से आगे की कहानी है.
_ “किसी से जलना- उसकी ज़िंदगी को रौशन करना होता है, जिससे आप जलते हैं”
– Sanjay Sinha
यदि आपसे कोई व्यक्ति ईर्ष्या करता है, तो उससे नफरत ना करें, क्योंकि यही लोग जानते है कि आप उनसे बेहतर हैं.

दरअसल, ईर्ष्या हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव का हिस्सा है. कम या अधिक हर किसी में ईर्ष्या विद्यमान होती है. एक कहावत है, ईर्ष्या आदमी को उसी प्रकार खा जाती है, जैसे कपड़े को कीड़ा. ईर्ष्या व्यक्ति को अशांत और क्रोधी बना देती है. इसका बोझ आपको दुनिया का सबसे दुखी व्यक्ति बना देगा.

ईर्ष्या आत्म- विश्वास की कमी से पैदा होती है और आत्म- विश्वास का साथी है ज्ञान. आप अपने ज्ञान की धार मजबूत करके ईर्ष्या से मुक्ति पा सकते हैं. यदि हम अपने जीवन में ऐसा कर पाये तो कोई भी नकारात्मक शक्ति हमें अपने डगर से विचलित नहीं कर पायेगी.
ईर्ष्या, राग, द्वेष जैसे कुविचारों को अपने पास फटकने न दें. किसी की उन्नति और विकास को देख कर, चिढ़ने, कुढ़ने के बजाय अपने कर्म पर भरोसा रखें. धैर्य रखें और प्रतीछा करें.
अगर कोई व्यक्ति दूसरे को खाता- पीता देख कर, फलता- फूलता देख कर, सुखी होता देख कर, उन्नति करता देख कर मन में जलता हो, उसे ईर्ष्या आती हो, बुरा सोचने लगता हो..

– हम इनसान हो कर यह आदत अपनाएँ, तो हमारे लिए यह अच्छी बात नहीं है.
हर छोटी-छोटी बात पर किसी के प्रति द्वेष रखना अक्सर इंसान की संकीर्ण और ओछी मानसिकता को दर्शाता है.

_ क्योंकि समझदार व्यक्ति मतभेदों को दिल में बोझ बनाकर नहीं रखता,
_ वह बातों से आगे बढ़ना जानता है,
_ जबकि छोटी सोच वाले लोग हर बात में दुश्मनी तलाश लेते हैं.!!
ईर्ष्या से ग्रसित होकर किसी की निन्दा कर उसका नुकसान करने का प्रयास नहीं करना चाहिए,

_ क्योंकि पलटवार होने पर इसका परिणाम घातक हो सकता है.

एक समझदार व्यक्ति वह है, जो दूसरों को देख कर उनकी विशेषताओं से सीखता है,

_ उनसे तुलना या ईर्ष्या नहीं करता.

अंजान लोग नापसंद करते हैं, नफ़रत नहीं.!!
अपना बना कर छल करना ये तो पुराना रिवाज है..

_ किंतु ईर्ष्या रखने वालों का आप कुछ नहीं कर सकते सिवाय दूरी बरतने के…हमने ये बात गाँठ बाँध ली है;
_ ऐसे लोगों को इग्नोर करना और खुश रहना _क्योंकि “बात उनकी होती है.. जिनमें कोई बात होती है”
_ जीवन अनमोल है.. इसे किसी ऐरे-गैरे के लिए दुखी नहीं करना है.!!
Because…”जिंदगी मिलेगी न दोबारा”
किसी के लिए सारे दरवाजे बंद करने के बाद भी लोग खिड़कियों से झांकना बंद नहीं करते !!
कुछ लोग दूसरों की ज़िंदगी में झांकने में ही अपना क़ीमती वक्त जाया कर देते हैं..

_ और ये ही आदत_उनकी ज़िंदगी को तबाह कर देती है, क्योंकि ये आदत ईर्ष्या की जननी है.. ..!

मन में नफ़रत पालने की बजाए उन लोगों से दूरियां बना लेना ज़्यादा बेहतर है..

_ जो आपकी अहमियत नहीं समझते हैं.!!

जब किसी के मन में आपके लिए ज़हर भर गया हो,

_ तो फिर आपकी सारी अच्छाई भी उसे छलावा ही लगती है.
_ एक बार घृणा बस जाए —
तो कोई दलील, कोई सच — कुछ भी असर नहीं करता.!!
अपने मन में किसी के प्रति नफरत रखने की बजाय..

_ अपनी ज़िंदगी से उनके अस्तित्व को ख़त्म कर देना ज़्यादा बेहतर है.!!

नफरत वो ही करते हैं.. जो आपकी बराबरी करने की चाहत तो रखते हैं, पर हिम्मत नहीं जुटा पाते.!!
ख़तरा दुश्मनों से नहीं बल्कि अपनों से है _ वो नहीं चाहते की आपकी कीर्ति और वैभव दुनिया में बढ़े ..! ईर्ष्यालु होना ज़्यादातर लोगों की मानसिकता है !

“हम खुद को बरगद बना कर छाँव बाटते रहे, और हमारे ही हमें थोड़ा थोड़ा काटते रहे !!”

जब इंसान ईर्ष्या करता है तो वह दुनिया में आग नहीं लगाता, बल्कि अपना ही घर जला देता है और दूर खड़ा होकर चुपचाप तमाशा देखता रहता है.!!
“असली ताकत नफ़रत में है”- जिन लोगों ने भी ऊँचाइयाँ हासिल कीं, उनके अंदर एक आग थी, एक चिंगारी जो नफ़रत के बिना कभी नहीं जल सकती थी.!!
इंसान की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसने जीवन में कुछ नहीं किया होता है, वह उस से नफरत करता है, जिसके पास उस से ज्यादा होता है.
ईर्ष्या और द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_माफ़ करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता. यह आपको मुक्त करता है.!!

“ईर्ष्यालु लोग आपको एक प्रतियोगी के रूप में देखते हैं ;

_जबकि आप उन्हें परिवार या दोस्तों के रूप में देखते हैं.”

नफरत से भरा व्यक्ति कला का सृजन नहीं कर सकता..
_ वह केवल जहर फैला सकता है.!!
बैठ कर केवल उन लोगों से ईर्ष्या न करें, जिन्होंने अपना लछ्य पा लिया हो.

_ उनकी बराबरी का एक ही उपाय है, आप अपने काम में जुट जाएं.

“जलन वहाँ जन्म लेती है, जहाँ तुलना रहती है..
_ और तुलना वहाँ रहती है.. जहाँ इंसान खुद को भूलकर दूसरों को देखने लगता है”
दूसरों का दीया बुझाने से आपकी रोशनी नहीं बढ़ेगी;
_ अपनी तरक्की पर ध्यान दें, ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता.!!
“नफरत बोझ है, माफी सुकून” बदला मत लो, बस सफल बनो..
_ आपकी कामयाबी ही सबसे तगड़ा जवाब है.!!
ईर्ष्या और जलन ने हमको इस स्तर तक नीच कर दिया..

_अगर तरक्की करे कोई वो हमे पसंद नहीं आता.!!

कुटिलता, चालाकी, लोभ, ईर्ष्या शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में चार गुना से भी ज़्यादा वापसी की गारंटी देते हैं,

_ इन्हें आप अपनों में, परायों में, जहां चाहें वहां बो सकते हैं ..और यह एक बार बोने पर बार बार फसल देते हैं..

एक भिखारी अमीर आदमी से ईर्ष्या नहीं करता. _ वह उस भिखारी से ईर्ष्या करता है, जिसे उससे ज़्यादा भीख मिलती है.

_ सच यह है कि लोग अपने स्टेटस वालों से ही जलते-कुढ़ते हैं,
_ अपने से बहुत निम्न या बहुत उच्च वर्ग के लोगों से नहीं.!!
मन में किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष रख कर मनुष्य सफल तो हो जाता है, _

_ पर कभी सुकून से जी नहीं पाता ..!!!

जब कोई आप पर अपनी मर्जी नहीं चला पाता है..

_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगता है..!!

जो लोग नफरत करते हैं, उन पर तरस खाना चाहिए.

_ उनका दिमाग छोटा होता है, दिल और छोटा होता है..!!

जो लोग आपसे ईर्ष्या करते हैं..

_ वे आपके विरुद्ध बकवास करते रहेंगे और खुश होते रहेंगे.!!

नफ़रत ढोने से बेहतर है इज़्ज़त की दूरी रखकर, बिना शोर के अलग हो जाना.
कभी कभी लोगो को गलतफहमी हो जाती है कि लोग उनसे जलते हैं.!!
हृदय में द्वेष है, ज़ुबान पर प्रेम है और आजकल लोग इसे ‘बुद्धिमत्ता’ कहते हैं.!!
ईर्ष्या एक ऐसी मनोस्थिति है, जिस में प्रेम, क्रोध, विद्वेष, छोभ, अपमान और कुंठा के भाव मिले जुले होते हैं.
नफरती आदमी अपनी नफरत का तीर कभी भी किधर भी घुमा सकता है.
_ जो इनके मन की न करे तो ये उसके विरोधी हो जाते हैं.!!
ईर्ष्या का तात्पर्य यही है कि ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति जिस से ईर्ष्या करता है, _

_ उसे वह स्वयं बड़ा मानता है.

आपको किसी व्यक्ति से ईर्ष्या हो रही हो तो समझ जाइये, _

_ आप का विचार का दायरा सीमित हो रहा है..!!!

तारीफ झूठी हो सकती है, मगर ईर्ष्या कभी झूठी नहीं हो सकती.!!
किसी से ईर्ष्या करके मनुष्य उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है पर अपनी नींद और सुख चैन अवश्य खो देता है.

_जो ईर्ष्या करता है _ वह पहले अपना नुकसान करता है.

द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_क्षमा करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता, बल्कि आपको आज़ाद करता है.

ज़रा सी समझ बहुत कुछ सुधार सकती है, बचा सकती है.

_ नफ़रत करना बहुत आसान है ..उससे भी आसान है ..अक्ल लगाकर उस नफरत को हराना..!!

लोगों से नफरत व ईर्ष्या करना चूहे से छुटकारा पाने के लिए अपने ही घर को जलाने जैसा है.
मन में ईर्ष्या तभी पनपती है जब हम दूसरों को खुश नहीं देखना चाहते..!!
नफ़रत भी कोई करने की चीज है, सब्र कीजिए, रहम कीजिए, माफ़ कीजिए.!!
आज कल लोग होठों पर दुआ और आँखों में जलन रखते हैं..!!
कभी भी उस से अपना दुख ना कहें, जो आप से ईर्ष्या करता है..!!
ईर्षालु मनुष्य स्वयं ही ईर्ष्याग्नि में जला करता है, उसे और जलाना व्यर्थ है.!!
नफरत फैलाने वाले को बदले में नफरत ही मिलेगी.!!
‘जलन और ईर्ष्या’ खुद के छोटे होने का सबूत है.!!
कभी किसी से ईर्ष्या मत रखें, _क्योंकि कोई फायदा नहीं है

_ इससे सिर्फ दुखी ही मिलता है और गलत विचार आते हैं बस..!!

जब आपके पास कुछ नहीं होगा तब लोग आपको बेचारा समझेंगे,

_ मगर जैसे ही आप उठेंगे.. लोग आपसे ईर्ष्या करने लगेंगे.!!

नफरत, ईर्ष्या से सृष्टि का चक्र रुक जाता है.

_ मदद कीजिए ..मदद मिलेगी ..शुरुआत करके देखिए..!!

आपसे ईर्ष्या करने वाले अधिकांश लोग वही होंगे,

_ जिनकी आपने कभी अपना समझ कर मदद की थी..!!

मेरे लिए नफ़रत पालने वालों के लिए भी बेहतरी की दुवाएं मांगता हूं..

– उन्हें दुआओं की गठरी थमा के लौट आया, वो जो मुझको बर्बाद करना चाहते थे..!!
नफरत एक बार मन में घुस गयी तो उससे बाहर निकलने में हमारा संदेह बाधा उपस्थित करता है.
_ जिनसे भी मुझे नफरत हुई, किसी ठोस कारण से हुई लेकिन जब भी मैंने उस नफरत को कम करने की कोशिश की, मैं असफल रहा.
_ समझ में यह आया कि एक निश्चित दूरी बनाकर रखी जाए, तुम अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.!!
_ कुछ गलतियों की माफिया, शब्दों में तो मिल जाती है.. अंतर्मन नहीं दे पाता..!!
_ फिर सौंप दिया जाता है, उसको.. प्रकृति और ऊपर वाले के हवाले.!!
_ क्योंकि, जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं..!!
अगर किसी के मन में दूसरों की खुशी और तरक्की देखकर ईर्ष्या की भावना है..

_ तब वह तिनका तिनका राख हो रहा है और दीमक कि तरह खोखला..
आपसे जलने वाले आपके बारे में अफ़वाहें उड़ाते हैं..

_ और बेवकूफ लोग बिना सोचे समझे उन अफ़वाहों पर विश्वास कर बैठते हैं.!!
कुछ लोग आपसे नफ़रत इसलिए करते हैँ कि आपकी मौजूदगी उनके वज़ूद को बेकार बना देती है !
ईर्ष्यालु और आपसे जलने वाला आपकी बुरी ख़बरें जानने में बहुत दिलचस्पी लेता है.!!
जब लोग आपको अपनी बातों के झाँसे में नहीं फँसा पाते,
_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगते हैं.!!
आपसे जलने वालों की हरकतों पर कोई भी प्रतिक्रिया न दें.!!
जीवन में इज्जत और प्रेम पाने के भूखे कभी मत रहो..
_ वरना ये दुनिया ऐसे लूटेगी कि आप इससे नफरत करने लगोगे..!!
जैसे-जैसे आपकी प्रगति का स्तर बढ़ेगा,
_लोगों की ईर्ष्या का स्तर भी बढ़ेगा और आप दूर से भी उनकी ईर्ष्या की तपिश को महसूस कर पाओगे.
दूसरों की तरक्की से जलने वालों की किस्मत अकसर ठंडी ही रह जाती है !
_ आप अपने काम में लगे रहो, क्योंकि जो आपको गिराने में व्यस्त हैं, वो खुद कभी ऊपर नहीं उठ सकते !!
कुछ लोगों में ईर्ष्या और घृणा का स्तर इतना अधिक होता है कि जब वे अपने सामने वाले की सफलता और खुशी देखते हैं, तो वे…

_ वे ऊपर से तो बहुत चिकनी-चुपड़ी और बनावटी बातें करते हैं, लेकिन भीतर से पूरी तरह ख़त्म हो जाते हैं.. आपके आस-पास भी ऐसे कई होंगे.!!
आमतौर पर देखा जाता है कि जिस इंसान में ईर्ष्या अधिक होती है..

_वह किसी भी स्थिति में अधिक ही रहती है.!
कोई अगर खुश है तो ईर्ष्या मत करो, ध्यान दीजिए कि आप क्यों दुखी हैं..!!
यह देखकर बहुत ख़राब लगता है कि हमारे आस-पास के लोग बेवजह ईर्ष्या, जलन, नफ़रत और बदले की भावना रखते हैं.

_ बिना बात के एक-दूसरे को जज करते हैं.
_ वे लोगों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं.!!
अहंकार और ईर्ष्या से ग्रस्त इंसान को जीवन में कभी भी सच्ची खुशी नहीं मिलती,

_ क्योंकि उनके मन में हमेशा दूसरों के प्रति ईर्ष्या और अपने आप को बड़ा दिखाने की चाह रहती है.
_ ऐसे लोगों को अपने जीवन में सुधार करने के लिए प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर के अहंकार और ईर्ष्या को दूर करना चाहिए.
अक्सर हमें लगता है कि अगर कोई हमसे नफ़रत कर रहा है, तो शायद हमने कुछ गलत किया है.

_ लेकिन हकीकत यह है कि नफ़रत हमेशा जलन की वजह से नहीं होती.
_ कई बार यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत होता है कि आप अपनी ज़िंदगी के सफर में उन लोगों से बहुत आगे निकल चुके हैं.
_ जब आप अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भीड़ से अलग दिखने लगते हैं, तो जो लोग आपका मुकाबला नहीं कर पाते, वो अक्सर नफ़रत का सहारा लेते हैं.
_ उनकी यह कड़वाहट दरअसल उनकी अपनी हार का शोर है.
_ यह इशारा है कि आपकी रफ्तार इतनी तेज़ है कि वो आपको पकड़ नहीं पा रहे, इसलिए बस दूर से पत्थर फेंक रहे हैं.
_ इस नकारात्मकता को बोझ बनाने के बजाय इसे अपनी ‘सक्सेस रिपोर्ट’ समझिए.
_ याद रखिए, पेड़ पर पत्थर भी तभी मारे जाते हैं.. जब उस पर मीठे फल लगे हों.
_ अगर लोग आपके बारे में बातें कर रहे हैं या आपसे बेवजह चिढ़ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं.. जो वो कभी नहीं कर पाए.
_ उनकी बातों को दिल पर लेने के बजाय अपनी मंज़िल पर ध्यान लगाइए.
_ आपकी कामयाबी ही उनकी नफ़रत का सबसे करारा जवाब होगी.. आगे बढ़ते रहिए, _ क्योंकि आसमान छूने वालों को ज़मीन पर शोर मचाने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता.!!
उन लोगों से कभी नफरत न करें जो आपसे ईर्ष्या करते हैं,

_बल्कि उनकी ईर्ष्या का सम्मान करें, क्योंकि वे वही हैं जो सोचते हैं कि आप अद्भुत हैं.
Never hate those people who are jealous of you, but respect their jealousy, because they are the ones who think you are amazing.
नफ़रत मेरे स्वभाव में नहीं

सच कहूँ तो, ये एक choice भी नहीं
मैं उस level तक नहीं जाऊंगा
जहाँ मन ज़हर से भर जाए।😔
मैंने गुस्से में जीना नहीं सीखा,
बदले की आग में नहीं जलना
हाँ, मैंने तुम्हें माफ़ किया है।
अब मेरे दिल में तुम नहीं हो
न अच्छे में, न बुरे में।😶
मेरे मन में जगह कम नहीं–
पर उसे कचरे से नहीं भरूंगा।
थोड़ा-सा कचरा☠️
अच्छी चीज़ों की खुशबू बिगाड़ता है।
मन एक कमरा है—
जहाँ या तो शांति रहती है,
या पुराने झगड़ों की बदबू।
दोनों साथ नहीं रह सकते।❌
इसलिए मैंने तुम्हें माफ़ किया–
जो हुआ, सो हुआ।
तुमने दुख दिया, पीड़ा दी,
कई बार वो भी नहीं जो मेरा हक़ था।
अब मुझे कोई हिसाब नहीं करना।
मैंने शिकायतों की फाइल बंद की है।
लेकिन माफ़ करना👈
वापस वही रिश्ता जीना नहीं होता।
हर माफ़ी एक दूरी को जन्म देती है
जहाँ आत्मसम्मान खुलकर साँस ले।
Stay away now✔️
तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।
न तुम्हारा ज़िक्र,न नाम, न कहानी।
तुमने जैसा भी किया—
मैंने सब छोड़ा है।अपनी राह चलो
मुझे भी अपनी राह पर चलने दो।
कुछ लोग माफ़ तो कर दिए जाते हैं,
पर दिल के घर में❤️
उन्हें दोबारा जगह नहीं दी जाती।🌷
-Yu Hi

सुविचार – वाणी – 014

एक सरल सी टिप्पणी भी किसी का मान-सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है, जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता,

इसलिए यदि किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें.

जिसकी वाणी विनम्र, शिष्ट और सभ्य होती है, _ उसका ह्रदय विशाल, पवित्र और उदात्त होता है.
मीठा बोल…[ वचन] …

मीठा बोलने मेँ हमारा कुछ नहीं जाता, किन्तु इससे हमें अमूल्य लोग, मित्र मिलते हैं और अनेक समस्याए मुफ्त मेँ हल हो जाती हैं !

अतः मधुर बोलें, वाणी संयम एक महान तप है !!!

दुर्भाषित वाणी हलाहल विष के समान ऐसा नाश करती है, जैसा तेज किया हुआ शस्त्र भी नहीं कर सकता,

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वाणी की समय- असमय रछा करे.

वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, ताकि हम शब्दों के दास न बनें.
जमीन अच्छी है खाद अच्छा हो परंतु पानी अगर खारा हो तो फूल खिलते नहीं.

भाव अच्छे हों  कर्म भी अच्छे हों, मगर वाणी खराब हो तो सम्बन्ध कभी टिकते नहीं.

वाणी में सरलता और सज्जनता होनी चाहिए,

बोलने के दौरान संयम के अभाव में कई तरह की समस्याएँ पैदा हो जाती हैं.

वाणी की मधुरता मित्रता बढाती है और

वाणी की कठोरता के कारण व्यक्ति अपनों से भी दूर हो जाता है.

वाणी के व्यवहार को लेकर जितनी लड़ाईयाँ होती हैं,

उतनी धन और सम्पत्ति को लेकर नहीं होती.

इंसान जब जब अपनी जुबान चाबुक की तरह चलाता है तब उसको यह पता नहीं होता कि

उसका एक कठोर शब्द दूसरे इंसान को कितना गहरा जख्म दे देता है.

बोलना या चुप रहना हमारे औजार और हथियार हैं,

इनका इस्तेमाल बहुत सोच- समझ कर करना चाहिए.

हमारी वाणी प्रेम पूर्ण हो. दूसरों में दोष ढूंढ़ना एक ऐसी आदत है

जो स्वयं के लिए भी दुख का कारण बन जाती है.

अगर पानी अपनी मर्यादा तोड़े तो विनाश होता है,

लेकिन वाणी अगर मर्यादा तोड़े तो सर्वनाश होता है.

पानी को छान कर पीते हो ! क्या वाणी को भी छान कर बोलते हो ??
जब बात जरुरत की हो तो, _ जुबान सब की मीठी हो जाती है !!!
सुसंस्कृत वाणी दिलों पर राज करती है..
कर्कश वाणी से कलह का जन्म होता है.

सुविचार – सफलता – सफल – Success – 013

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अपनी सफलता  के लिए ऐसे विशेषज्ञों से सवाल पूछिए और ध्यान से सुनिए, जो आपकी रूचि के हों………उन लोगों से बात कीजिए, आप जिन की तरह बनना चाहते हैं.
मुझे लगता है कि हर किसी के सुखी, सफल जीवन की राह कई तरीकों से तय होती है ;

_ कोई भी ग़लत नहीं है और ऐसा कोई जादुई नुस्खा नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठता हो.

पहले ही कदम पर लिए गए दृढ़ संकल्प को _यदि अंत तक कायम रखा जाए तो_ _ वह पूर्ण सफलता प्राप्त करने में कभी विफल नहीं होगा.
मुझे नहीं लगता कि आप आराम क्षेत्र से कुछ भी दिलचस्प बना सकते हैं.

_ आपको डर और असफलता की जगह से काम करना होगा.

I don’t think you can create anything interesting from a comfort zone. You have to work from a place of fear and failure.

सफलता शत्रुओं को आकर्षित करती है. प्रगति ईर्ष्या को जन्म देती है.

अगर कोई आपसे नफरत नहीं करता, तो आप जीवन में सफल नहीं हो रहे हैं.
SUCCESS attracts enemies. PROGRESS invites jealousy. If nobody HATES you, you are not making it in life.
मैं असफल नहीं होने वाला, हार में भी एक मूल्यवान सबक सीखा गया है, और यह मुझे विकसित कर रहा है.

I’m not going to fail, a valuable lesson has been learned even in defeat, and it’s developing me.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको एक नियम का सम्मान करना होगा: खुद से कभी झूठ न बोलें.

If you want to be successful, you must Respect One Rule: NEVER LIE TO YOURSELF.

आप अपना जीवन तब तक कभी नहीं बदल सकते जब तक आप कुछ ऐसा नहीं बदलते जो आप रोज करते हैं.

आपकी सफलता का राज आपके दैनिक दिनचर्या में पाया जाता है.

You’ll never change your life until you change something you do daily.

The secret of your success is found in your daily routine.

सफलता का अर्थ है उत्साह खोए बिना एक के बाद एक असफलताओं का सामना करना.

Success consists of going from failure to failure without loss of enthusiasm.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको अधिक कदम उठाना और कम घोषणाएँ करना सीखना होगा ; _ अपनी घोषणा को तब तक गुप्त रखें _जब तक आप यह न जान लें कि _यह स्थायी है; अपने कदम उठाने से पहले कभी भी उनकी घोषणा न करें.!!

_अधिक कदम उठाएँ और कम घोषणाएँ करें.!!

यदि, यद्यपि से जीवन नही चलता है, _जो परिस्थिति बने _उसी हिसाब से जीवन को ढालना होता है,

_यही सफलता- असफलता की निशानी होती है..!!

सफलता का वजन उठाने के लिए मजबूत मन चाहिए ;

_ जो तनाव नहीं झेल सकता, वह कामयाबी की ऊंचाइयों पर कभी नहीं टिक पाता.!!

अगर आपकी सफलता आपकी शर्तों पर नहीं है, अगर यह दुनिया को अच्छी लगती है. लेकिन आपके दिल को अच्छी नहीं लगती है, तो यह सफलता बिल्कुल नहीं है.
अगर ज़िन्दगी में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो _सबसे पहले जुबान का पक्का बनें, _तभी आप आगे बढ़ पायेंगे..!!
अपनी सफलता का मूल्यांकन इस बात से करें कि इसे हासिल करने के लिए आपको क्या त्याग करना पड़ा.!!
अपने जीवन में अच्छा सोचें, अच्छे व पक्के इरादे रखें. काम जो सोचा है, उसे परिस्थितियों के अनुरूप पूरा करने की ठान लें तो सफलता आपके कदम चूमेगी.
जीवन की सफलता का सब से अच्छा तरीका यह है कि जिस सलाह को आप दूसरों को देते हैं या जिस की दूसरों से अपेछा करते हैं, उसे स्वयं कार्यरूप में परिणत कर दिखाएं.
सफल लोगों की कहानी आपको अपने लक्ष्य के मार्ग पर बिना रुके चलने के लिए ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है.
असफलता, सफलता का विपरीत, या उलटा नहीं, उसका भाग है, उसका एक अंग.
एक आदमी सफल है यदि वह सुबह उठता है और रात को सोता है और इस बीच वह जो करना चाहता है वह करता है.

A man is a success if he gets up in the morning and gets to bed at night, and in between he does what he wants to do.

सफल लोग कभी इस बात की चिंता नहीं करते कि दूसरे क्या कर रहे हैं.

Successful people never worry about what others are doing.

हर सफल व्यक्ति के पीछे नफरत करने वालों का एक झुंड होता है.

Behind every successful person lies a pack of haters.

असफलता सफलता के विपरीत नहीं है, यह सफलता का एक हिस्सा है.

Failure is not the opposite of success, it’s part of success.

आपकी संपत्ति आपको या आपकी सफलता को परिभाषित नहीं करती है.

Your possessions do not define you or your success.

अगर आप सफल होना चाहते हैं तो दूसरों को नहीं, खुद को बदलने पर ध्यान दें.

If you want to succeed, focus on changing yourself, not others.

सफलता को कभी अपने सिर पर चढ़ने न दें; असफलता को कभी अपने दिल पर हावी न होने दें.

Never let success get to your head; never let failure get to your heart.

लोग शायद ही कभी सफल होते हैं जब तक कि वे जो कर रहे हैं उसमें उन्हें आनंद न मिले..!!

People rarely succeed unless they have fun in what they are doing.

सफलता के लिए दछता और धीरज का होना जरुरी है और इसके लिए मनःस्थिति और चिंतन में बदलाव आवश्यक है. हमें ज्यादा सकारात्मक और स्वीकार्य बनाना होगा, ताकि असमंजस में भी अडिग रह सकें. समस्या पर अपना ध्यान केंद्रित करने से बेहतर है कि हम चुनौतियों को स्वीकारें और उस पर विजय प्राप्त करें. वास्तव में हर समस्या हमारे लिए एक अवसर प्रदान करती है. अगर हम इस अवसर का उपयोग कर सकें, तो परिस्थिति हमारी दासी होगी.

अंग्रेजी में एक प्रसिद्ध वाक्य है- “फर्स्ट डिज़र्व, देन डिज़ायर” यानी पहले योग्य बनो, बाद में सफलता की कामना करो. जो अपने जीवन में प्रगति चाहते हैं, वे इस वाक्य का मनन और अनुसरण करें. अधिकतर लोग तपस्या से बचने के लिए ‘शॉर्टकट’ तरीके खोजते हैं. हो सकता है कि शॉर्टकट से सफलता मिल जाये, पर ऐसी सफलता छणिक होती है. साथ ही, इसके दूरगामी परिणाम हानिकारक होते हैं. असल में सहनशील बनकर व्यक्ति हर समस्या को झेलने में सफल हो जाता है. किसी भी कार्य के आरंभ में अवरोधों का सामना करना होता है. जो उनसे विचलित हो जाते हैं, वे अपने लछ्य नहीं भेद पाते. जो धीरज से आगे बढ़ते हैं, वे उन अवरोधों का निराकरण खोजने में सफल हो जाते हैं.

बड़ी सफलता हासिल करने के लिए आपको किसी और की तुलना में अधिक प्रतिभाशाली या होशियार या बेहतर दिखने या अधिक जुड़ा हुआ होने की आवश्यकता नहीं है ; _ आपको बस उस पर ध्यान केंद्रित करना है जो आप चाहते हैं, उस पर कड़ी मेहनत करें और उस पर टिके रहें.

You dont have to be more talented or smarter or better looking or more connected than anybody else to achieve great success. You just have to focus on what you want, work hard at it and stay on it.

सफलता किसी चमत्कार की तरह हमारे जेहन में जगह बनाती है. जब आप भी आकलन करेंगे, तो पायेंगे कि आप कई मुश्किलों से घिरे हैं. यह सबके साथ होता है, लेकिन थोड़ी- सी कोशिश से मुश्किलों में सफलता की राह बनायी जा सकती है.
सावधान रहें कि आप अपने सपनों को किससे सींचते हैं ; उन्हें चिंता और भय से सींचो, तुम मातम पैदा करोगे जो तुम्हारे सपनों को दबा देंगे. अपने सपनों को आशावाद और कड़ी मेहनत से सींचें, आप सफलता की खेती करेंगे.

Be careful what you water your dreams with. Water them with worry & fear, you will produce weeds that choke your dreams. Water your dreams with optimism and hard work, you will cultivate success.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो जानें कि आप क्या चाहते हैं, इसके बारे में स्पष्ट रहें और इसे लिख लें..!!

If you want succeed, know what you want, be super clear about it and write it down.

असफलता बस फिर से शुरुआत करने का अवसर है, इस बार अधिक समझदारी से.!

Failure is simply the opportunity to begin again, this time more intelligently.

संयोग से कुछ नहीं होता, कोई भी अनुभव बेकार नहीं होता, आपका दर्द व्यर्थ नहीं है, आज आप जो संघर्ष कर रहे हैं, वह उस ताकत को विकसित कर रहे हैं, जिसकी आपको कल के लिए जरूरत है.

आप जिस भी दौर से गुजर रहे हैं, उससे गुजरें, जिस यात्रा में आप हैं, उसके प्रति सच्चे रहें, प्रक्रिया को सहन करें और आप सफलता का आनंद लेंगे. __अच्छी चीज़ें आपके रास्ते में आ रही हैं, आज हार न मानें.

Nothing happens by accident, no experience is a waste, your pain is not in vain, the struggles you are in today are developing the strength you need for tomorrow.

Go through all that you are going through, stay true to the journey you are in, endure the process and you will enjoy the success. Great things are coming your way, don’t give up today.

सफल होने का कोई तय फार्मूला नहीं है. लेकिन, यह तय है कि कोशिश नहीं करने वाले हमेशा असफल होते हैं. इसलिए कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए.
जीवन में सफल लोगों की सफलता के सूत्रों पर ध्यान दीजिए. उनका अनुभव आपका मददगार बन सकता है.
अगर आज मुश्किलें हैं तो डरना मत.. क्योंकि कल आपकी सफलता उसी बुरे वक्त
की बदौलत चमकेगी.!!
हर किसी के पास सफल होने की एक योजना होती है, लेकिन केवल कुछ ही लोग उस योजना को क्रियान्वित करने में सक्षम होते हैं और इसलिए सफल भी कुछ लोग ही हो पाते हैं।
अगर कोई अपने मेहनत से सफलता हासिल करता है तो वो उसका पूरा हकदार है.
जिन्होंने सफलता पाई है, उन्होंने सपने कम देखे हैं और प्रयत्न अधिक किए हैं.!!
सफलता खैरात में नहीं मिलती, संघर्ष में पूरी उम्र गुजरती है.

सफलता शक्ल देख के कदम नहीं चूमती, _ सफलता मेहनत की दीवानी होती है.

आपके कार्यछेत्र में आपकी सफ़लता इस बात पर निर्भर करेगी कि आपको स्वयं पर कितना भरोसा है.

अगर जीवन में कभी असफलता से पाला पड़ जाए तो यह समझ कर न रूकें कि सफ़र यहीं समाप्त है, बल्कि वहीँ से नई राह की शुरुआत समझें.

असफलता यह दर्शाती है कि आप ने सफलता के लिए पूरे मन से प्रयास नहीं किया.

सफलता छोटे – छोटे प्रयासों का योग है, यह प्रतिदिन दोहराया जाता है..

सफल व्यक्ति हर उस काम को करता है, जिसे करना जरुरी होता है. इस तरह के काम को वो टालता नहीं है.

सफल व्यक्ति हर किसी को खुश करने की कोशिश नहीं करता है. ऐसा करना संभव भी नहीं है.

सफल लोग कभी- भी छोटी अवधि में होने वाले लाभ की तरफ आकर्षित नहीं होते हैं. वह हमेशा लांग टर्म टारगेट सेट करते हैं.

जीवन के हर छेत्र में सफल लोग खुद से सवाल करते हैं. खुद से ही सवाल पूछ कर वह जानना चाहते हैं कि जो काम वह कर रहे हैं, वह सही है या नहीं.

सफल लोग हर दिन को महत्वपूर्ण मानते हैं, उनके लिए कोई दिन अच्छा और कोई दिन खराब नहीं होता है.

सफल व्यक्ति भी गलती करता है. लेकिन, एक सफल व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करता है और कोशिश करता है कि आगे उससे वही गलती न हो.

सफल वही होता है, जो लछ्य का निर्धारण करता है और उस पर अडिग रहता है. रास्ते में आनेवाली हर कठिनाइयों का डटकर सामना करता है और छोटी- छोटी कठिनाइयों को नजरअंदाज कर देता है.

सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि आप ज्यादा स्मार्ट या ज्यादा पढ़े-लिखे हों ; _ आपकी शक्ति महत्वपूर्ण कार्य करने पर ध्यान केंद्रित करने की आपकी क्षमता में निहित है ;

_ यदि आप सही चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन पर अक्सर काम करते हैं, तो आप असाधारण परिणाम प्राप्त करेंगे.

हम सभी अपने जीवन में सफलता चाहते हैं, लेकिन हम उस शिद्दत और जुनून के अनुरूप जीवन नहीं जी पाते और कई बार बड़े मौके गंवा देते हैं.!!
वह जो लगातार हर दिन योजना बनाता है, वह जीवन के सभी वर्षों में सफलता पूर्वक यात्रा करेगा.!!
सफ़लता अपनी कीमत वसूल करती है, _ जो उस कीमत को चुकाने के लिये तैयार है _ उसे निराश होने की ज़रूरत नहीं है.
“असफलता का मौसम, सफलता के बीज बोने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है.”
सफल व्यक्ति के जीवन में समस्याऐं नहीं, _ सिर्फ चुनौतियाँ होती हैं.
सफल व्यक्ति वही है जो सुबह उठ कर पहले यह तय करता है कि आज उसे क्या – क्या काम करने हैं _

_ और रात तक वह उन सारे कामों को कई परेशानियों के बाद भी पूरा कर लेता है.

लोग हमें कमजोर बनाते हैं ताकि वे हमारे माध्यम से अपनी इच्छाएं पूरी कर सकें… और फिर जब आप असफल होते हैं तो वे आपको कोसते हैं.

_ इसलिए अपनी सफलता की जिम्मेदारी खुद लें और ऐसे लोगों से खुद को दूर रखें.!!
“सफलता शोर नहीं मचाती”

_ अपने लक्ष्यों को गुप्त रखें, और अपने काम को बोलने दें.
_ हर जीत को दिखाना ज़रूरी नहीं..
_ जो लोग शांत रहकर काम करते हैं, वही सबसे गहरी छाप छोड़ते हैं.!!
सफ़लता आपके हालात देखकर नहीं, आपकी मेहनत देख कर आएगी.
सफलता के हर शोर के पीछे होता है _सहनशीलता का मौन..
सफ़लता कि सभी कहानियाँ असफलताओं कि एक पूरी सीरीज से जुड़ी रहती हैं, _ इसलिए असफलताओं से घबराएँ नहीं.
इस दुनिया में, लोग हमेशा आपकी सफलता के रास्ते पर पत्थर फेकेंगे..

_ यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उनसे क्या बनाते हैं – एक दीवार या एक पुल..

असफलता से करीबी लोग भी खुद को दूर का बताते हैं, और सफलता से दूर वाले भी खुद को पास का बताते हैं.

_ हम समाज के तौर पे ऐसे ही हैं.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो संदेह और परीक्षण के लिए तैयार रहें। जीवन हमेशा चुनौतियों से भरा रहेगा। इसी तरह हम बढ़ते हैं.

If you want to be successful, prepare to be doubted and tested. Life will always be full of challenges. That’s how we grow.

सकारात्मक सोच के साथ आपकी सकारात्मक कार्रवाई से सफलता मिलती है.

Your positive action combined with positive thinking results in success.

अपनी सफलताओं पर इतराकर किसी का अपमान न करें,

_ आपकी सफलताएं किसी के असफल होने का प्रमाणपत्र नहीं हैं..!!

जब आप सफलता के खास मुकाम पर पहुंच जाते हैं,

_ तो आपको लोगों के तानों का जवाब देने का साहस मिल जाता है.!!

यदि हमें अपने जीवन में हमेशा सफ़लता मिलती रहेगी, _

_ तो कभी हमें जीवन का असल अर्थ पता ही नहीं लगेगा ..

भेड़ चाल से आप सफलता हासिल नही कर पाओगे …

अगर लक्ष्य तक पहुँचना है तो अपना रास्ता खुद बनाओ ..!

अगर दूर तक जाना है तो अकेले ही जाना पड़ेगा !

सफलता की ऊंचाई तक पहुँचने से ज़्यादा ज़रूरी है वहाँ टिके रहना.

_ याद रखें, दुनिया अक्सर आपकी कोशिशों को नहीं, बल्कि आपकी एक चूक को देखने के इंतज़ार में बैठी होती है.
_ अपनी मेहनत को दूसरों के मज़ाक का मौका न बनने दें.
_ हर कदम सावधानी से उठाएं.!
अगर आप मान लेते हैं कि कुछ असंभव है, तो वह सच में असंभव हो जाता है,

_ लेकिन अगर आप यह विश्वास कर लें कि कोई बाधा आपको रोक नहीं सकती,
_ तो आप हर मुश्किल को पार कर सकते हैं.
_ सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही मानसिकता से आती है.
If you believe that something is impossible, it truly becomes impossible. But if you have faith that no obstacle can stop you, you can overcome any challenge. Success comes not just from hard work but from the right mindset.
जीवन का आनंद लेना और अपने मनभावन कर्म करना ही सफलता है.
सफलता को मापने का ऐसा निश्चित पैमाना नहीं है, जिसमें आप नाप कर यह कह सको कि हां यह व्यक्ति सफल है.

_ आज के इस दौर में मेरी निगाह में सफल वही है जो सांसारिक सुख सुविधाओं को अपने दैनिक जीवन में उतनी ही अहमियत दे रहा है,
_ जितने से दैनिक कार्य सुचारू रूप से चल सके.
_ फर्जी के संसाधन एकत्र करके खुद को योग्य व धनाढ्य साबित करने वाले जिंदगी भर इन्ही जंजालों में बंधे रहते हैं.
_ अगर आप अपने कार्यों से स्वयं संतुष्ट रहते हैं और आपको लगता है कि आप जिस काबिल हैं, उतना योगदान दे रहे हैं और आपके कार्यों से किसी का अहित नहीं हो रहा है तो मेरी नजरों में आप सबसे सफल व्यक्ति हैं.!!
जीवन में सफलता पाने के टिप्स –

  1. कुछ लोग अपना गोल (लक्ष्य) छोटा सेट करते हैं और उसे हासिल करके खुश हो जाते हैं …
  2. व्यक्ति को हमेशा वही काम करना चाहिए, जिसमें उसकी रूचि हो …
  3. सफलता को पाने के लिए व्यक्ति को अपनी लाइफ संतुलित बनानी चाहिए …
  4. कहावत है कि असफलता का अर्थ है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया..

सुविचार – क्रोध- गुस्सा – नाराज़गी – 012

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गुस्से का अर्थ है कि जब कोई चीज हमारे विरोध में है, स्थिति प्रतिकूल है, उसका विरोध जताने के लिए जो हमारी  ऊर्जा शक्ति विस्फोट करती है, उस स्थिति का नाम क्रोध है.
कभी कभी गुस्से में क़ुछ लोग दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं, _ उन्हें पता ही नही चलता के वो अपना ही नुकसान कर रहे हैं, _ _ सार ये है कि अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, कुछ चीजों को, #कुछ घटिया लोगों को, #कुछ घटनाओं को, #_कुछ कामों को और #कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए ..

_ अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी बनाइये.

आप ही का गला ना काट ले कहीं, ज़ुबान बहुत तेज है आपकी ??
सभी लड़ाइयाँ लड़ने लायक नहीं होतीं ; कई बार जाने देना वास्तव में जीत है. अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, उन लोगों को क्षमा करें जिन्होंने आपको चोट पहुंचाई है, और लोगों या चीजों को अपने ऊपर हावी न होने दें ; _ यह अंततः आपको मार सकता है.
क्रोध क्या हैं ? क्रोध भयावह हैं, क्रोध भयंकर हैं, क्रोध बहरा हैं, क्रोध गूंगा हैं, क्रोध विकलांग है.
क्रोध को पाले रखना, गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान हैं, इसमें आप स्वयं ही जलते हैं.
क्रोध को छमा से, विरोध को अनुरोध से, घृणा को दया से, द्वेष को प्रेम से और हिंसा को अहिंसा की भावना से जीतो.
जब लोग गुस्से में हों तो उनकी बात सुनें, क्योंकि तभी असली सच्चाई सामने आती है.

Listen to people when they are angry, because that is when the real truth comes out.

अपने गुस्से को स्पष्ट करें, व्यक्त न करें, और आप तुरंत तर्क-वितर्क के बजाय समाधान का द्वार खोल देंगे.

Explain your anger, don’t express it, and you will immediately open the door to solutions instead of arguments.

जब लोग गुस्से में हों या नशे में हों तो उनकी बात ध्यान से सुनें क्योंकि तभी अनफ़िल्टर्ड सच सामने आता है.

Listen carefully to people when they are angry or drunk because that’s when the unfiltered truth comes out.

वह जो _ एक पल के गुस्से को दबा सकता है, कई दिनों तक होने वाले दुख को रोक सकता है.
मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है.
क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए.
आप किसी व्यक्ति को वर्षों में उतना नहीं जान सकते,

_ जितना कि उसे क्रोध की स्थिति में देखकर जान सकते हैं.!!

अगर आप सही मायनों में अपना ख्याल रखना चाहते हैं तो क्रोध की आग को बुझाना सीखें,

_ क्योंकि यह सबसे पहले आपको ही जलाती है.!!
अगर आप सही हैं तो शांत रहिए, अगर ग़लत हैं तो गुस्सा करने से कुछ नहीं बदलेगा.
गुस्सा बुरा है, पर इसी गुस्से में कई बार इंसान वो सच कह जाता है, जिसे वह छुपा रहा होता है.!!
क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है.
जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता और क्षमा करता है, वह अपनी और क्रोध करने वाले की महासंकट से रक्षा करता है.
सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता, जितना क्रोध या चिन्ता से पल भर में थक जाता है.
क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक.
क्रोध में उत्तर मत दीजिये, _ ऐसे उत्तर हमेशा खुद के लिए नया प्रश्न और परेशानी बनते हैं..!!
क्रोध हवा का वह झोंका है जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है.
क्रोध की फुफकार अहं पर चोट लगने से उठती है.
क्रोध करना पागलपन हैं, जिससे सत्संकल्पो का विनाश होता है.
वास्तव में हमें हर हाल में अपने क्रोध पर काबू रखना चाहिए, जिससे हमारा या अन्य किसी का अहित न हो सके.
जीवन में जो भी कर्म करो, होश में करो. क्रोध में अगर होश रह जाए तो विनाश नहीं होता.
क्रोध में ना कोई फैसला लो और ना ही किसी से बहस करो,

_ क्योंकि उस समय आप ना खुद को समझ पाते हो, ना सामने वाले को.!!

यदि आप गुस्सैल और अहंकारी हैं तो आपको दुश्मनों की कोई जरुरत नहीं है, आपको बर्बाद करने के लिए ये दो दुर्गुण ही काफी हैं.
गुस्से में बोला हुआ एक कठोर शब्द इतना जहरीला बन सकता है कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की ज़रूरत नहीं..

_ यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नहीं..
_ यदि कोई आपकी बात मानता ही नहीं तो गुस्सा करके कर भी क्या लेंगे ?
_ न जाने क्यों, फिर भी लोग गुस्सा करते रहते हैं..
_ खुल कर नहीं करेंगे तो घुमा-फिरा के करेंगे..
_ शांत हो कर बैठना सीखो..
_ गुस्से को जीवन मूल्य मत बनाओ.!!
ग़ुस्सा करने वालों की अक़्ल महदूद और कमज़ोर होती है, न ख़ुद उस इंसान को फ़ायदा पहुँचाती है, न किसी दूसरे को, साथ ही उसकी बदकलामी, बदज़ुबानी से लोग उस से दूरी बनाने लगते हैं,

एक वक़्त ऐसा आता है कि इंसान बिल्कुल अकेला रह जाता है, ग़ुस्से और ज़बान को का़बू में रखें, ताकि सबके अज़ीज़ बन सकें.

क्रोध अपने आप विपत्ति उत्पन्न करता हैं, क्रोधी मनुष्य दूसरों को हानि पहुँचाता है परन्तु उससे अधिक अपने आप को घायल कर लेता है.
क्रोध बुरा होता है, पर जहां जरुरत हो, वहां दिखाना भी चाहिए, नहीं तो गलती करने वाले को एहसास ही नहीं होगा कि वह गलत कर रहा है ; वह आपके साथ हमेशा वैसा ही व्यवहार करेगा.
गुस्सा करने वाले लोग बुरे नहीं होते, बल्कि शक्कर की तरह दिखावटी मीठा बोलने वाले लोगों से बचकर रहना चाहिए, मीठा बोलकर लोग ज्यादा फायदा उठाते हैं.
क्रोध करने का अर्थ है, दूसरों कि गलतियों का स्वयं से प्रतिशोध लेना.
क्रोध बुरे विचारों की खिचड़ी है. उसमे द्वेष भी है, दुःख भी है, भय भी है, तिरस्कार भी है और अविवेक भी.
जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है.
केवल वही लोग भड़कते और क्रोधित होते हैं, जो गलत होते हैं,

_ जो सही होगा, वो हमेशा परिस्थिति को सुधारने और संभालने का प्रयास करेगा.!

क्या आप जानते हैं ? क्रोध और आँधी दोनों बराबर हैं ….

शान्त होने के बाद पता चलता है, कितना नुकसान हुआ है ..

खौलते हुये पानी में जिस तरह प्रतिबिंब नहीं देखा जा सकता,

उसी तरह क्रोध की स्थिति में सच नहीं देखा जा सकता है.

क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है.
जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो.
क्रोध से धनी व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है.
क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है.
क्रोध के सिंहासनासीन होने पर बुद्धि वहां से खिसक जाती है.
क्रोध में की गयी बातें अक्सर अंत में उलटी निकलती हैं.
क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है.
क्रोध में विवेक नष्ट हो जाता है.
क्रोध एक स्थिति है, जिसमे जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने कि जरुरत नहीं..

और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होना का कोई हक नहीं…

क्रोध एक ऐसा तेजाब है जो जिस चीज़ पे डाला जाता है,

उससे ज्यादा उस पात्र को नुकसान पहुंचाता है जिसमे वो रखा है.

गुस्से में आप खुद को भी नहीं संभाल सकते,

लेकिन प्रेम से आप पूरी दुनिया को संभाल सकते हो.

गुस्से को योग्य दिशा में मोड़ा जाए तो पछताने की जरुरत नहीं पड़े कभी…
क्रोध में व्यक्ति जिद पर अड जाता है, हिंसा पर उतारू हो जाता है और फिर अंहकार में आकर खुद का ही नुकसान कर बैठता है.
गुस्से में इंसान बकवास तो करता ही है.. लेकिन कई बार वह बात भी बोल जाता है जो होश में बोलने की उसकी हिम्मत नहीं होती.!!
किसी इंसान से अच्छा रिश्ता होना ये नहीं दर्शाता कि आप उसे अच्छी तरह जानते हैं.

_ जब तक आपने किसी का गुस्सा नहीं देखा, तब तक आप उसे पूरी तरह नहीं समझ सकते.
_ लोग जो सोचते हैं, वो हमेशा ज़ाहिर नहीं करते.
_ सामाजिक शिष्टाचार, रिश्ते बनाए रखने की कोशिश या फिर सभ्यता की नकाब में बहुत कुछ छिपा रहता है.
_ लेकिन जो बातें दिल के अंदर दबी रहती हैं, वो गुस्से के समय बाहर आ जाती हैं.
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से,
_ गुस्सा एक ऐसा भाव है जो इंसान के अंदर जमा हुए अनकहे विचारों को जुबान पर ले आता है.
_ गुस्से में इंसान वो सब कुछ कह देता है जो वो सामान्य स्थिति में कभी नहीं कहता — क्योंकि उस वक़्त उसका “सोचने का फिल्टर” काम नहीं करता.
उदाहरण के तौर पर:
_ मान लीजिए, आपका एक रिश्तेदार हमेशा आपसे अच्छे से पेश आता था.
_ एक दिन किसी छोटी-सी बात पर गुस्से में कुछ कह बैठा,
_ ये बात क्या उस पल ही पैदा हुई ? नहीं.. ये उसके मन में पहले से बैठी थी.
_ गुस्से ने बस उसे बाहर निकाल दिया.
मनोविज्ञान कहता है:
“जब कोई इंसान गुस्से में बोलता है, तो वह केवल आवेग से नहीं बोलता, बल्कि अपने भीतर दबे हुए विचारों के भंडार से बोलता है.”
_ यानी गुस्सा केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि अंदर छिपे विचारों का तीव्र प्रदर्शन है.
_ इसलिए जब कोई गुस्से में होता है, तो वह कुछ नया नहीं कहता — बल्कि वह अपने छुपे हुए विचारों की परतें हटा देता है.
_ आपके बारे में लोग क्या सोचते हैं, यह आप उनकी मुस्कान, अच्छे व्यवहार या देखभाल से नहीं जान सकते.
_ लेकिन आप यह जरूर जान सकते हैं.. जब वो आपसे नाराज़ होते हैं — क्योंकि तब उनकी जुबान पर उनका असली मन होता है, न कि शिष्टाचार.
_ तो किसी के गुस्से को केवल सुनें नहीं — समझें, विश्लेषण करें.
_ रिश्ते अक्सर गुस्से से नहीं टूटते, बल्कि गुस्से से सच्चाई सामने आती है.
अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, यह खतरे से एक कदम दूर है ; इससे पहले कि वह आपको नष्ट कर दे !

क्रोध एक बहुत ही नकारात्मक भावना है, यह आंखों को अंधा कर देता है और मस्तिष्क को बंद कर देता है, और अंत में यह दर्द लाता है.

अपनी भावनाओं को अपना निर्णय न लेने दें, इसे हमेशा तर्क के अधीन रखें.

इससे पहले कि आप गुस्से से प्रतिक्रिया दें, परिणामों के बारे में सोचें ; _ ऐसा काम कभी न करें जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े !

लोग हमेशा आपका अपमान करेंगे, आपको परेशान करेंगे, आपको भड़काएंगे ; _ लेकिन उन्हें कभी भी आप पर नियंत्रण न करने दें !

उनके कार्यों को आपकी प्रतिक्रिया निर्धारित नहीं करनी चाहिए.

क्रोध के उपायों में से एक विलंब है ; _ प्रतिक्रिया देने से पहले एक क्षण लें, गहरी सांस लें ; _ जब तक आप सीधे नहीं सोच रहे हैं तब तक कार्य न करें.

_क्रोध से कुछ भी हल नहीं होता है, यह सब कुछ नष्ट कर देता है और हमेशा याद रखें, जो आपको क्रोधित करता है _ वह आप पर विजय प्राप्त करता है.

कुछ लोग हमारे क्रोध के नहीं, बल्कि दया के पात्र होते हैं,

_ इसलिए हमको क्रोध करने से पहले, चिन्तन करना आवश्यक है, कि सामने वाला व्यक्ति क्या है..

— हर किसी पर क्रोध करना उचित नहीं है, कुछ लोग मानसिक रूप से इतने गरीब होते हैं कि उनके पास उनकी हरकतों के अलावा कुछ नहीं होता…

_ जब उन्ही हरकतों पर क्रोध आता है, तो सोचता हूँ, यदि ये इतने ही समृद्ध होते तो ऐसा क्यों करते, फिर उनपर दया आने लगती है !!

गुस्सा दो तरह का होता है —

_ एक स्वभाव वाला, जो बस बेवजह बह जाता है — इससे बचना चाहिए.
_ दूसरा वो, जो जीवन की असंगतियों को देखकर भीतर उठता है —
_ वो दरअसल आपकी जागरूकता का प्रमाण है.
_ अगर और भी condensed चाहिए — ultra short:
_ बेवजह वाला गुस्सा कमजोरी है, अन्याय पर उठने वाला गुस्सा — जागरूकता है.!!
क्या करोगे किसी से नाराज़गी रखकर ?

_ जिंदगी का तो वैसे भी कोई भरोसा नहीं.
_ क्या पता, कब, कहां और किसका आख़िरी हो ?
_ इसलिए हर एक लम्हे को खुलकर जी लो,
_ जो भी यादें हैं, उन्हें संजो लो,
_ जो भी बिखरा है, उसे समेट लो.
_ अगर कोई रूठा है, तो उसे मना लो,
_ जोड़कर अपने पास रख लो.
_ क्योंकि जिंदगी कभी भी
_ फिर से कुछ भी नहीं दोहराएगी.
_ एक दिन हम भी गुजर जाएंगे यूं ही अचानक…
_ हम चलें जाएंगे, कोई और आ जाएगा.
_ कहानियां यहीं रहेंगी, बस किरदार बदल जाएगा.!!
– Neha Chandra
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