मस्त विचार 074
निकल ही आएगा , कोई ना कोई रास्ता .
मस्त विचार 073
अब किसी शख्श की आदत नहीं होती मुझको.
मस्त विचार – कोई इतना करीब हो कर, दूर क्यों हो जाता है – 072
कोई खुशी बन कर ग़म में, क्यों बदल जाता है.
कोई मन में बस कर, ज़िन्दगी से दूर क्यों हो जाता है.
कोई जीवन को रंगों से भर कर, उजाड़ क्यों देता है.
कोई हमराह बन कर, राह में छोड़ क्यों जाता है.
क्यों और क्यों कोई ऎसा करता है.
कि इतना ख़ास हो कर, बेगाना बन जाता है.
क्यों कोई हमारा साथ छोड़कर, दूसरों का हो जाता है.
क्यों कोई हमें बताये बिना,
अपने दिल से बाहर निकाल देता है.
क्या हम इतने बुरे हैं.
कि उसे हमारे दर्द का, एहसास भी नहीं होता.
_ बेहद हुए करीब तो किस्सा हुआ ख़तम..!!
_ अब जब हम उनसे दूर हो गए हैं तो, अब वो निश्चित सुखी होंगे..!!
_ जब बिना किसी किंतु-परंतु के आपके द्वारा पूछे गए सवाल उसे परेशान करने लगें..!!
मस्त विचार 071
तुम चाहो तो प्रतिकूल को अनुकूल बना दो.
चाहने की देर है और बस कुछ भी नहीं.
तुम चाहो तो आसमान को धूल बना दो.
मस्त विचार 070
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
मस्त विचार 069
वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..
सुविचार – कलाकार – Artist – 212
_ कई बार रिश्तेदारों से भी ज्यादा अपना.!!
- Shailendra Sudharma
मस्त विचार 068
जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.
मस्त विचार 067
_ अकल का बोझ उठा नहीं सकता !!



