मस्त विचार 037

तेरी नेकी का लिबास ही तेरा बदन ढकेगा ऐ बन्दे..

सुना है ऊपरवाले के घर में कपडे कि कोई दूकान नहीं है…

 

मस्त विचार 036

अगर मै मनचाहा रूप लेने में सछम होता,

तो तुम्हारे आंसू बन जाता

जो तुम्हारे गालों पर जीता और होठों पर मर जाता.

मस्त विचार 035

अच्छे लोगों का हमारी ज़िन्दगी में आना हमारी किस्मत होती है

और उन्हें सम्भाल कर रखना हमारा हुनर …….

सुविचार 208

जब आप मान लेते हैं कि आप दूसरे की तरह उत्कृष्ट नहीं बन सकते, तब आप आगे बढ़ने की सम्भावनाएं भी ख़त्म करने लगते हैं – ज़िन्दगी असीमित सम्भावना का भण्डार है.
महापुरुषो को देख कर मन में आस जगायें कि मानवता यहाँ तक ऊपर उठ सकती है, पीड़ायें तो उनके जीवन में भी थी, वे उनकी परवाह न करके आगे बढ़ते चले गए.

 

सुविचार – शिष्य और गुरु – 207

मन के अंधेरों को तू है मिटाता.

_ ज्ञान के प्रकाश को है बिछाता.
_ प्रेम की पुलक को है बढ़ाता.
_ भटकों को सन्मार्ग दिखाता.
_ रोते मन को रोज हंसाता.
_ मृत जीवन में सांस चलाता.
_ दुखियों के दुख दर्द मिटाता.
_ मोह ममता से बाहर लाता.
_ सदाचार का पाठ पढ़ाता.
_ साहिब का सन्देश सुनाता.
_ क्या है उस से अपना नाता ?
शिष्य और सतगुरु का::::::
आया त्यौहार गुरु पूनम का, उत्सव और मनाना क्या ?

_ जब अधिकार मिला गुरु पूजन का, तो देवी देव रिझाना क्या ?
_ जब आये द्वार गुरु के तो, जग में आना- जाना क्या ?
_ सच्चे स्नेही सदगुरु मिले तो, दुनिया को अपनाना क्या ?
_ स्वामी एक वही हैं अपने, औरों को शीश झुकाना क्या ?
_ गुरुज्ञान उड़ान उड़ाय रहे तो, लंबी रेस लगाना क्या ?
_ जब पास में साहिब बताय रहें तो, बुद्धि के बैल दौड़ाना क्या ?
_ जब आप ही अपना दे रहे तो, विषय विकारों से पाना क्या ?
_ जब मन मन्दिर में देव मिले तो, मन्दिर मस्जिद जाना क्या ?
_ जब मौन का मन्त्र मिला प्यारा तो, कहना और सुनाना क्या ?
_ अजपा जाप चले हरदम तो, मुख से अब चिल्लाना क्या ?
_ जब बूंद बने मयखाना तो, पीना और पिलाना क्या ?
_ नाम नशा उतरे नहीं तो, मयख़ाने में जाना क्या ?
_ जब निर्भयनाद का पाठ पढ़ा तो, डरना और डराना क्या ?
_ जब समता का साम्राज्य मिला तो, परिस्थितियों से घबराना क्या ?
_ चट्टान, तूफ़ान हो राह कंटीले पर, मंजिल से हट जाना क्या ?
_ जब राह साहिब के चल दिये तो, पीछे कदम हटाना क्या ?
_ जीवन अनमोल मिला मानव, तड़प- तड़प मर जाना क्या ?
_ सत्य- सनातन साहिब को, ना जाना तो जाना क्या ?
आया त्यौहार गुरु पूनम का, उत्सव और मनाना क्या ?

मस्त विचार 034

मैंने आज तक ख़ुदा को नहीं देखा है ,

लेकिन मैंने उन लोगों में उसे पाय़ा है ,

जिन्होंने मेरा तब साथ दिया ,

जब बाकि सारी दुनिया ने मेरा साथ नहीं दिया .

मस्त विचार 033

कहीं तुम यहीं तो नहीं.

आज का दिन खुशनुमा लग रहा है.

कहीं तुम आस पास तो नहीं.

महक उठा हूँ मैं.

कहीं यह तुम ही तो नहीं.

सुविचार 206

इन्सान वही है, जो अपनी कमजोरी को दूर करने के साथ- साथ दूसरों को भी ताकत दे.
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