सुविचार – खुशी – ख़ुशी – खुश – ख़ुश – खुशियां – 096

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“खुशी पाने की अवस्था नहीं है, बल्कि यात्रा करने का एक तरीका है.”

“Happiness is not a state to arrive at, but a manner of traveling.” —Margaret Lee Runbeck

“पैसा आपको खुश नहीं करेगा, लेकिन हर कोई खुद ही इसका पता लगाना चाहता है”

मैं ऐसे खुश लोगों को जानता हूं जिनके पास मुझसे कम संपत्ति है और मैं ऐसे दुखी लोगों को जानता हूं _ जिनके पास मुझसे कहीं अधिक संपत्ति है.

_ पैसा ख़ुशी का रहस्य नहीं है.  _ऐसा न कभी हुआ है और न कभी होगा. __और जितनी जल्दी हमें इस सत्य का एहसास होता है,  उतनी ही जल्दी हम उस स्वतंत्रता की खोज कर सकते हैं जो धन की इच्छा न रखने के साथ जुड़ी होती है.

“Money won’t make you happy, but everybody wants to find out for themselves.”

I know happy people who own less than me and I know unhappy people who own far more. Money is not the secret to happiness. – Zig Ziglar

बात जताने के भी कुछ नियम और मर्यादायें होती है,

_ कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाता..
_ सिवाय इन पुराने बंधनों में खुद को बांधने से.
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!!
– निरर्थक
कभी-कभी विचार आता है कि काश कोई नया तरीका खोजा जाए..
_ क्यूँ ही जरूरी हो कि खुशी जताने के लिए ठहाके मारकर हँसा ही जाए.!
जीवन के सबसे ख़ुशी के पलों में से एक वह होता है _जब आप उस चीज़ को छोड़ने का साहस पाते हैं _जिसे आप बदल नहीं सकते.

One of the happiest moments in life is when you find the courage to let go of what you cannot change.

ऐसे लोग हैं जो आपके पास जितना है उससे कम में भी अधिक खुश हैं.

There are people out their happier with less than what you have.

खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार लोग खुशी का दिखावा करते हैं.
“खुश दिखना आसान है… खुश होना थोड़ा मुश्किल है”
खुद के साथ को स्वीकार करना, और खुश रहना ; क्योंकि जितना आप लोगों को खुशी की वजह बनाते हो, आखिर में वही आप को सब से ज्यादा दुखी करते हैं..!!
ये कितनी अजीब बात है कि हम सब जीवन भर खुश रहने के लिए ‘हर दिन परेशान रहते हैं’.!!
वो खुशी जो आगे चलकर गहरा दुख दे, उसे आज ही छोड़ देना बेहतर है, मन को हल्का रखने के लिए यही सही रास्ता है.!!
लोगों को परेशानी बहुत है, खुश है कोई तो हैरानी बहुत है..!!
खुश होने के लिए बहुत बड़ी चीजों की जरूरत नहीं होती है..

_ मामूली सी चीज भी बड़ी खुशी देती हैं !!

दूसरों की ज़िंदगी में क्या चल रहा है, इस बात पर ध्यान देते देते..

_ हमारे दरवाज़े पर जो खुशियाँ दस्तक दे रही हैं, उन्हें खो देते हैं..!!
विपरीत परिस्थितियों में भी यदि आप खुश रहने की ठान लें..

_ तो आपको धीरे-धीरे विपरीत को अपने पक्ष में करना आ जाएगा.!!

सबसे पहले खुद को खुश रखिए,

_ जो वाकई में आपके अपने होंगे, वो आपको खुश देखकर ही खुश हो लेंगे.!!

आपसे मिलने वाला हर व्यक्ति हमेशा पूछता है कि क्या आपका करियर है, या आपका अपना घर है ? जैसे कि जीवन किसी तरह की किराने की सूची हो.

_ लेकिन कोई आपसे कभी नहीं पूछता कि आप खुश हैं या नहीं.!!
“अपनी ख़ुशी को उस चीज़ पर निर्भर न रहने दें _जो आप खो सकते हैं.”

_ उस जगह से बाहर निकलें और दूसरी जगह पर खुश रहें.. जहाँ आप सहज हैं.!!

 

“असली ख़ुशी काफ़ी सस्ती है, फिर भी हम नकली ख़ुशी के लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाते हैं.”

यदि आपकी ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि_ कोई और क्या करता है,
..तो आप को कोई समस्या है.!!
खुशी और सुख अचानक हमारी झोली में आकर नहीं गिरते.
_ खुशी और सुख पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है.!!
सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है…!
खुश रहना उतना महँगा नहीं है, लेकिन लोगों को यह दिखाने की कोशिश मे लगे रहना की आप ख़ुश हो, बहुत महँगा पड़ जाता है.!!
यदि आप अपनी इच्छाओं के लिए बेसब्र न होने की कला और अपनी अनचाही इच्छाओं को त्यागने की कला सीख लेते हैं, तो कोई भी आपकी खुशी छीन नहीं सकता.
वास्तविक ख़ुशी मन की एक ऐसी स्थिति है,

_ जिसमें ख़ुशी का विचार भी पूरी तरह से अनुपस्थित होता है..!!

कुछ जीतने पर भी मन ख़ुश ना हो तो समझ लेना,

_ कुछ ऐसा हार गए हो जो जीत से ज्यादा जरुरी था..!!

“कभी-कभी दूसरों की खुशी के लिए जलते-जलते हम खुद ही राख हो जाते हैं…

_ फिर एक दिन सिखना पड़ता है — कि खुद को बचाना भी सेवा है”
ज़रूरी नहीं कि खुश दिखने वाले व्यक्ति के जीवन में सबकुछ सही चल रहा हो..

_ खुशी हमेशा सच्ची नहीं होती, अनेक बार खुशी का दिखावा होती है.!!
खुद को सही जगह रखें …गलत जगह पर आप सही हो कर भी खुश नहीं रह सकते.!!
हमने दुख को इतना आकर्षक बना दिया है कि हम खुशी को धोखे की तरह देखने लगे हैं..!!
जब जीवित रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प न हो, तो खुश दिखना जीवन को आसान बनाने का एक मूल्यवान अस्त्र है.
खुश रहें, पर दूसरों की खुशियों की कीमत पर नही.
_ जो करना है, अपने बल पर करें, दूसरों के सहारे नहीं.. आत्मनिर्भर बनें.!!
हर किसी को खुश करने की कोशिश मत करो, यह तराजू पर मेढक का बोझ डालने जैसा है,

_ जब आपकी आंतरिक चेतना कहती है कि _आप ठीक हैं तो _आपको हर किसी को खुश रखने की कोई जरूरत नहीं है..!!

हमें खुद को खुश रखना चाहिए, वैसे भी लोग कभी हमसे खुश नहीं होते,

_ वो तो केवल अपने अनुसार ख़ुश होते हैं.!!

कुछ लोग खुद के पास सब कुछ होते हुए भी.. दूसरों की छोटी से छोटी खुशियों से जलते हैं..

_ ये सोचकर कि वो इंसान इतने कम में खुश कैसे है और वो खुद इतना सब होते हुए भी दुखी क्यों हैं..!!

खुशी कभी दवा से नहीं मिलती,

_लेकिन खुशी कई बीमारियों को ठीक कर सकती है.!!

अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो वह इंसान बन जाइए..!

_ जो अपनी खुशियों की चाबी दूसरों को नहीं सौंपता.!!

जो प्राप्त है उसमें खुश रहना सीखिए ;

_ किचिर किचिर करने वालों को सुख नसीब नहीं होता.!!

ज़िन्दगी ऐसे जीओ, जैसे अगला पल जीवन का आखिरी पल है.

_ जब आप यह सोच कर जीवन जीते हैं, तो आप भरपूर ख़ुशियाँ बटोरते हैं.!!

इंसान को अपनी परेशानियां गिनने का शौक होता है, लेकिन वह अपनी खुशियों को नहीं गिनता.

_ यदि वह उन्हें गिनता जैसा कि उसे करना चाहिए, तो वह देखेगा कि उसे पर्याप्त खुशी प्रदान की गई है.
दूसरों की गलतियों से हमें दुख हो सकता है, लेकिन उसे कब तक अपने मन में रखना है, यह हमारे ऊपर है.

_समय और खुशी हमारे अधिकार हैं, इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है, “खुद खुश रहिए.!!”
मैं यह सोचने की गलती नहीं करता कि जो खुशी मुझे किसी में या कहीं और मिलती है.

_ मुझे अपने अंदर ख़ुशी मिलती है _ क्योंकि मेरा मानना ​​है कि _ मैं अपने आस-पास के लोगों को तभी खुश कर सकता हूँ जब मैं खुश रहूँगा..!!

_ मैं संक्षेप में यह कहना चाह रहा हूं कि आप जो खुशी तलाश रहे हैं वह आप में है.

जीवन में सब कुछ फ़ायदे या नुक्सान के लिए नहीं होता, कुछ बातें दिल के लिए और अपनी ख़ुशी के लिए भी होती है.!!
खुश लोग जानते हैं कि खुशी एक विकल्प है ; _ वे जानते हैं कि यह वर्तमान परिस्थितियों की प्रतिक्रिया नहीं है. _ इसके बजाय, ख़ुशी एक उपलब्ध निर्णय है ;

उन्होंने उस सोच को ख़त्म कर दिया है जो जीवन में आनंद का अनुभव करने से पहले सब कुछ सही होने का इंतज़ार करती है.

दूसरी ओर, दुखी लोग हमेशा खुशी की तलाश में रहते हैं. _ उनका मानना ​​है कि ख़ुशी कुछ नया या कुछ अलग पाने पर निर्भर है.

_ वे लगातार पीछा कर रहे हैं, लेकिन कभी हासिल नहीं कर पाते ; __ कई बार, वे इसे सभी गलत स्थानों पर खोजते हैं.

इस दुनिया में वही व्यक्ति खुश रह सकता है, जो दूसरों को खुश देखकर खुश होता है.

_ जब तक हम दूसरों को खुश देखकर दुखी होते रहेंगे, तब तक यह तय मानिए कि खुशी हमारे दिल में नहीं आ सकती.

किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना जो आपको खुश करता है, अच्छी बात है,

_ लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना न भूलें जो आपसे बात करके खुश होता है,

_आप दोनों में बहुत अंतर देखेंगे.!!

खुश लोग अपनी परिस्थितियों को पहचानते हैं और उनसे भागने की आवश्यकता नहीं रखते ;

_ इसके बजाय, वे अपने अंदर शांति का अभ्यास करना चुनते हैं.

हर किसी का सही-गलत देखने का नजरिया अलग होता है.

_ जो आपको ठीक न लगे, वो किसी और के लिए सही हो सकता है.
_ आख़िर में मायने बस यही रखता है — जो जिससे खुश है, वही उसके लिए सही है.!!
यदि हम अच्छाई को उतना ही बढ़ा दें, जितना बुराई को बढ़ाते हैं,

_तो हम सब कहीं अधिक खुश होंगे.!!

कहते हैं, ‘दुःख इंसान को निखारता है.’ भीतर से निखारता होगा, बाहर से तो आदमी मुरझाया नज़र आता है.

_ ख़ुशी बेशक निखारती है, भीतर (मन), बाहर (तन) दोनों स्तरों पर.

खुशियां हमारे आसपास ही होती हैं, ये हमें तभी महसूस होती है, जब हम सजग और होशमंद होते हैं,

_ उन बातों को देखिए, गौर कीजिए जो सामान्य सी हैं, सामान्य बातों में ही छिपे होते हैं खुशियों के बड़े राज.!!
उन लोगों की वजह से, जिन्हें आपकी बिल्कुल भी परवाह नहीं है, उस व्यक्ति की खुशी को नजरअंदाज करना मूर्खता है.. जो आपको खुश करना चाहता है.!!
जो आप के लिए सही है, उसके साथ आप को खुश रहने की कोशिश नहीं करनी पड़ती _बल्कि आप खुश रह लेते हो..!!
आप सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो इसका अर्थ है कि आप ने कुछ भी प्राप्त नहीं किया..!!
यहाँ सभी की अपनी एक दुनिया है और उसी दुनिया मे हर कोई अपने हिसाब से खुश है..!
अपनी खुशी के लिए, उन सभी को छोड़ दें.. जो आपको दुख पहुंचाते हैं.!!
आज का छोटा लालच कल की बड़ी बर्बादी ला सकता है ; इसलिए ऐसी किसी भी खुशी को तुरंत त्याग दें.. जो आपके भविष्य को अंधकार की ओर ले जाए.!!
जब कोई बार-बार अपनी तकलीफों की कहानी सुनाता है,

_ तो खुशियाँ उसके करीब आने से डरती हैं.!!

ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो अपनी पूरी ज़िंदगी इस ख़ुशी में गुज़ार देते हैं कि _वो जिनको प्यार करते हैं वो खुश हैं और उनकी ख़ुशी के लिए वो अपने सारे कष्ट भूल जाते हैं.
अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए __ दूसरों पर दोषारोपण एक खतरनाक आदत है और खुशी के लिए एक बहुत बड़ी बाधा है.

कमियों की जिम्मेदारी किसी अन्य व्यक्ति या बाहरी कारक पर डालने से परिवर्तन की कोई भी आवश्यकता या प्रेरणा तुरंत समाप्त हो जाती है.

इसके बजाय, पीड़ित उस कोठरी में फँसा रहता है जिसे उसने स्वयं बनाया है – _ किसी और के आने का इंतज़ार करता है जो उसकी समस्याओं का समाधान करेगा.

_ लेकिन हर बार जब हम अपनी नाखुशी के लिए किसी और को दोषी ठहराते हैं, तो हम हार जाते हैं। और लंबे समय में, यह तृप्ति और खुशी को पहुंच से दूर रखता है.

_ आपकी खुशी पूरी तरह से खुश रहने के आपके निर्णय पर आधारित है – और यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सबकों में से एक हो सकता है _ जो हममें से कोई भी सीख सकता है.

सबसे पहले व्यक्ति को आत्म-विश्लेषण करना चाहिए ; _ अपनी वास्तविक चाहतों, जरूरतों, खुशियों आदि का पता लगाएं और संस्कृति, धर्म और परिवार के बाहरी प्रभावों को दूर करें, _ जिसने आपके लिए खुशी को परिभाषित किया है.

ख़ुश रहने की कुंजी स्वयं को जानना और इस दुनिया में अपना रास्ता खोजना है ; _ इससे ख़ुशी मिलती है. एक खुशी जो विपरीत परिस्थितियों में भी आपके भीतर बनी रहती है.

_ यह आपको असहायता की भावनाओं से बचाता है और आपको कठिन समय में सहना और धैर्य रखना सिखाता है.

_यह आपको अपने जीवन में सभी सकारात्मक चीजों की सराहना करना सिखाता है, जिससे आपकी खुशी बनी रहती है.

जो बार बार सहानुभूति के बहाने आपको आपका दर्द ..गुज़रा वक़्त याद दिलाए तो ..समझ लीजिए कि …वो आपको कभी खुश नहीं देखना चाहता, और ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए.
जो व्यक्ति हर समय खुश और सुखी-संतुष्ट दिखता है, उसने जीवन में न जाने कितने समझौते किए होंगे..

_ और जिस व्यक्ति को सब लोग पसंद करते हैं, उसने न जाने कितना गरलपान किया होगा, दूसरों की गलतियों-बुराइयों को कितना अनदेखा किया होगा..
_ हर समय खुश दिखना आसान नहीं है, न ही आसान है कि हर आदमी आपको पसंद करे..
_ मन को घोट कर रखना पड़ता है.!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.

_ जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं ; इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.!!
आपकी अपनी खुशी का कारण कोई नहीं है – आपके अलावा,,, आप स्वयं हैं..
_बाहर की दुनिया में शांति, संतोष और आनंद की तलाश में अपना समय और प्रयास बर्बाद न करें.!!
जिन लोगों को जीना आता है…वह बिना किसी सुविधाओं के भी खुश रहते हैं…और…जिन्हें जीना नही आता…वह सभी सुविधाओं के होते हुए भी दुखी रहते हैं..
_ क्योंकि…आजकल के दौर में हर इंसान केवल सुविधाओं को ही अपना सुख समझता है…जबकि सही मायने में सुख अपने मन की आत्मिक-संतुष्टि है..!!
आपके अलावा कोई और आपको बेहतर महसूस नहीं करा सकता, यही सबसे बड़ा फर्क है.

_ क्योंकि आपको वास्तव में किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
_ आप खुद खुश रह सकते हैं, क्या यह खूबसूरत नहीं है और निश्चित रूप से किसी के आने और हमें बचाने की कामना करने से कहीं कम तनावपूर्ण है ?
हम सभी के साथ खुशियां बांटना चाहते हैं,

_ लेकिन लगता नहीं कि खुशियां बांट रहे हैं,
_ बल्कि अपनी खुशियों का प्रदर्शन कर रहे हैं…
_ लेकिन यही खुशियां बहुत जल्दी गायब क्यों होने लगती है…
_ ये भी सोचने की जरूरत है…
— हमने तो ज्यादातर लोगों से यही सुन रखा है कि लोगों की नज़र भी लगती है,
_ इसलिए अपनी खुशियों को बुरी नज़र वालों से भी बचाएं,
_ क्योंकि खुश होने वालों से ज्यादा जलने वाले लोग भरे हुए हैं….
_ बाकी जो लोग जिसमें खुश हैं वो करें…. सबकी अपनी-अपनी इच्छा..
खुशी सब कुछ होने से नहीं आती..

_ आप फर्स्ट क्लास हॉस्पिटल में पैदा हुए, मेरी डिलीवरी घर पर हुई, हम दोनों जिन्दा बच गए.
_ आप एक प्राइवेट स्कूल में गए और मैं एक सरकारी स्कूल में गया, हम दोनों ने ही हाई स्कूल की पढाई समाप्त की.
_ आप बिस्तर से उठे और मैं जमीं से सोकर उठा, हम दोनों ने शांतिपूर्ण रात्रि विश्राम किया.
_ आपके सब महँगे कपड़े, मेरे सब साधारण और सस्ते, हम दोनों के तन ढके हुए हैं.
_ आपने तला भुना हुआ खाया, मैंने साधारण खाना खाया _ लेकिन हम दोनों ने फिर भी अपनी संतुष्टि से खाया..
_ आप बीएमडब्ल्यू, रेवो, रेंज रोवर, पर सवारी करते हैं और मैं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करता हूं ; _ लेकिन फिर भी हम अपने विभिन्न गंतव्य तक पहुंच गए.
_ इसलिए ये समझें, जीवनशैली कोई प्रतियोगिता नहीं है और बहुत सारी चीज़ें करने के अलग-अलग तरीके हैं, अलग-अलग गलियाँ सभी एक ही मंजिल की ओर ले जाती हैं,
_ सिर्फ इसलिए कि और लोग तेजी से काम कर रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आप असफल हो रहे हैं.
_ खुशी सब कुछ होने से नहीं आती है, लेकिन जो आपके पास है उसको सबसे अच्छा बनाना, यह सब कुछ है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.
_ सबसे खुश लोगों के पास सब कुछ सबसे अच्छा नहीं होता है, वे बस जो कुछ उनके पास होता है _ उसे सबसे अच्छा बनाते हैं.
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_ मैंने सीखा है कि अपनी शर्ट पर क्रीज़ के बारे में परेशान नहीं होना चाहिए ;
_ “व्यक्तित्व” दिखावे से ज्यादा जोर से बोलता है.
_ इसलिए अपने पैसे, संपत्ति और अन्य चीजों के बारे में अहंकार को रोकें,
_ आप खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे और कोई भी आपके साथ नहीं जाएगा.
अगर खुश रहना है तो ये तीन बातें गांठ में बांध लो..

1-अपना मन कभी ना मारें..- वरना एक वक्त ऐसा आएगा कि किसी चीज में मन ही नहीं रहेगा..
2- खुद की क़ीमत पर किसी की मदद ना करें.
_ क्योंकि अहसान मानने वाला जमाना अब नहीं रहा.
3- अपने दुःख पर तुरंत एक्शन लें, कोई दूसरा नहीं आयेगा.
– खुद को खुश रखने का दायित्व स्वयं का होता है.
ख़ुशी का मतलब वह सब कुछ पाना नहीं है जो आप चाहते है, _यह आपके पास जो कुछ भी है उसका आनंद लेने के बारे में है.
Happiness is not about getting all you want. It is about enjoying all you have.
ख़ुशी उन लोगों को कभी नहीं मिलेगी जो उनके पास पहले से मौजूद चीज़ की सराहना करने में विफल रहते हैं.
Happiness will never come to those who fail to appreciate what they already have.
आपकी खुशी दूसरों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए.

Your happiness should never depend on others.

खुशी मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है. शांति और तर्कसंगतता खुशी की आधारशिला हैं.

Happiness is man’s greatest aim in life. Tranquility and rationality are the cornerstones of happiness.

सबसे खुश लोगों के पास हर चीज़ सर्वश्रेष्ठ नहीं होती, वे बस अपने पास मौजूद हर चीज़ को सर्वश्रेष्ठ बनाते हैं.

The happiest people don’t have the best of everything, they just make the best of everything they have.

चीज़ों के बेहतर होने का इंतज़ार न करें. जीवन हमेशा जटिल रहेगा.

_अभी खुश रहना सीखें, नहीं तो आपके पास समय खत्म हो जाएगा.

Don’t wait for things to get better. Life will always be complicated. Learn to be happy right now, otherwise you’ll run out of time.

आपको खुश रहने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना होगा. यह दुनिया बहुत क्रूर है.

_ शिकायत मत करो. बस खुद को खुश रहने के लिए प्रशिक्षित करो.

You have to train yourself to be happy. This world is very cruel. Don’t complain. Just train yourself to be happy.

जीवन उन चीजों को सहन करने के लिए बहुत छोटा है जो आपको खुश नहीं करतीं.

Life is too short to tolerate things that don’t make you happy.

दुनिया में दुखी करने वाले सैकड़ों लोगों से आप रोज़ टकरा सकते हैं,
_लेकिन खुशी देने वाले कम ही लोग मिलते हैं.!!
“जब तक जीवन है खुश रहो “
__ जीवन एक बहुत ही छोटी यात्रा है, और हम इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं.
_जो ज्ञात है वह विज्ञान है. _जो अज्ञात है वह रहस्य है. _रहस्य का आकार बड़ा है..!!
जिनके जीवन में एकाग्रता, एकनिष्ठता नहीं होती, उनके जीवन में खुशियों का स्थायी वास नहीं होता.
_जीवन में बिखराव होने से खुशियां भी बिखर जाती हैं, इसलिए खुद को समेट कर रखना ज़रूरी है.
*हमें हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि चिंतित रहने से कल की मुश्किल दूर नहीं होती.. बल्कि आज का चैन भी छिन जाता है.*
दुनिया में हर कोई अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है, वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता,
_ दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है. जब हम औरों को उनकी खुशियां देना चाहेंगे, तो अपने आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जाएँगी और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है.
ज्यादातर लोग दूसरों को खुश करने की कोशिश में दुःखी हैं और दूसरे हैं कि कभी खुश होते ही नहीं,

_ व्यक्ति को दूसरों की मदद करने से पहले खुद की मदद करनी आनी चाहिए ;
_ क्योंकि आप जितने ज्यादा समृद्ध होंगे..
_ आप उतने ज्यादा लोगों की मदद कर पायेंगे..!!
सबको खुश रखने की कोशिश में कई बार हम खुद को खुश नहीं रख पाते..

_ और ये भूल जाते हैं कि स्वयं प्रसन्न नहीं होंगे तो..
_ उमंग के उस प्रवाह को गति कैसे दे पाएंगे..!!
“जीवन इसी क्षण में है” सौम्य जीवन बहुत कुछ सिखाता है.
_ किसी भी चीज़ को लेकर हताश होने लायक कोई बात नहीं है.
_ जागरूकता में रहना खुश रहने का सबसे आसान तरीका है.
हालाँकि “खुश रहना” इस आशीर्वाद की जरूरत हर किसी को है, लेकिन अगर हर किसी को दूसरों में खुशी ढूंढनी है तो फिर आशीर्वाद का मतलब क्या है ?
इधर-उधर भागना, खुद से भागना है..इसलिए जो मिला है ..उसमें खुश रहिये..
_और यही एक अच्छी जिंदगी है..!!
मसला ये भी है इस ज़ालिम दुनियाँ का,,,,
_ कोई अगर खुश भी है तो वो खुश क्य़ूँ है..?
कई बार अपनी ख़ुशी ख़ुद तक ही रखनी चाहिए..!
_ क्योंकि हर कोई आपकी खुशी से खुश नहीं होता.!!
अब तक जितने मिले, दुखी मिले..
_ सुखी हैं, खुश हैं, इस भ्र्म में लिपटे मिले.. अपने आप को धोखा देते मिले..
ना पूछ रे मन ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है,
_ दुखी तो वो भी हैं जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है..!!
‘खुश वो है’ जो यह जान लेता है कि..

_ वो क्या नहीं बदल सकता.!!
‘मेरा’, ‘तुम्हारा’ से ज़्यादा बड़ा और वज़नी शब्द ‘हमारा’ है,
_ जो बहुतेरे दुःख आधे कर देता है, ख़ुशी दोगुनी.
मन की ख़ुशी से बढ़ कर कुछ भी नहीं ; मन में ख़ुशी है तो झोंपड़ी में, जमीन पर सोने में और रूखी रोटी में ख़ुशी है,
_अन्यथा महलों में रहने वाले, मखमली गद्दों पर सोने वाले और छप्पन भोग खाने वाले भी नींद की गोलियों के सहारे सोते हैं.
लोग आपकी खुशी में खुश नहीं होते, बल्कि दुख में खुशी होते हैं, और झूठा अफसोस जताने आते हैं.

_ मेरा मानना है कि खुशी का इज़हार कीजिए.
_ खुशी बांटने से बढ़ती है, गम बांटने से कम होता है.
_ कुछ लोग खुश न हों, फिर भी..
_ आप सकारात्मकता का साथ न छोड़ें.
_ यही मान कर कि आप दुनिया बदलेंगे..
ख़ुशी खोई नहीं है, मन के अंदर है; उसे ढूंढ़ने की जरुरत भर है,
_आज हम यही छोटा सा काम नहीं कर पा रहे हैं और बेवजह दुखी हैं,
_आइये अपने मन में अंदर छिपी ख़ुशी को ढूंढ कर बाहर निकालने का प्रयास करें.
जीवन सरल गणित है.

_ जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या है ?
_ स्वयं का निरीक्षण करें.
_ क्या आप जीवन का सम्मान करते हैं या आपको दूसरों की हिंसा और पीड़ा में आनंद मिलता है.
_ क्या आपको किसी बच्चे को खेलते हुए या लोगों को नाचते हुए देखना पसंद है ?
_ या फिर आपको कोई हिंसक फिल्म या लड़ाई देखना पसंद है.
_ जब आप जीवन में खुशी का सम्मान करना और दूसरों की खुशी में खुशी ढूंढना सीख जाते हैं,
_ आप पाएंगे कि आपकी सौ समस्याएं दूर हो गईं.
_ जीवन के आघात और घाव को ठीक करने का सबसे आसान तरीका दूसरे की खुशी में खुशी ढूंढना है.
_ जीवन सरल गणित है.
_ यदि आप किसी को खुश देखकर दुखी होते हैं, तो यह आपको बीमार बना देगा और आपके जीवन को चिंता से भर देगा.
_ अगली बार जब आप कुछ सुखद और अच्छा देखें तो उसे संजोकर रखें.
_ किसी की पीठ पीछे छुरा घोंपने या उसके बारे में बुरा बोलने की कोशिश न करें, और आपको चारों ओर प्यार मिलेगा.

इस जीवन का सम्मान करें.
जीवन खुशियों से भर जाता है.
Life is simple math
What is your attitude towards life ?
Observe yourself.
Do you honour life or you find joy in violence and pain of others.
Do you like seeing a child play or people’s dancing
Or do you like seeing a violent movie or fight.
When you learn to honour joy in life and find joy in happiness of others,
You will find out that your hundred problems have vanished.
The easiest way to heal the trauma and wound of life is by finding joy in other’s happiness.
Life is simple math.
If you feel sad in seeing someone happy, it will make you sick and fill your life with anxiety.
Next time, you see something happy and good, cherish it.
Do not try to backstab or speak ill of anyone, and you will find love all around.

Honours this life.
Life is filled with joys.
जीवन का प्रयोजन [Purpose] क्या है ?

_ खुश रहना जीवन का प्रयोजन है.
_ इस संसार में हर कोई खुश रहना चाहता है, हंसना चाहता है.
_ वो चाहता है कि उसका हर कृत्य उसे खुशी की ओर ले जाए.
_ वो पूरी ज़िंदगी खुशी की तलाश करता है.
_ यही है जीवन का प्रयोजन.
_ कोई शिक्षा प्राप्त करता है.
_ कोई धन कमाता है.
_ कोई देशाटन करता है.
_ कोई परिवार बसाता है.
_ कोई दूसरों की मदद करता है.
_ भाव एक ही है “खुशी”
_ आदमी खुश रहना चाहता है.
_ वो एक खुशहाल संसार देखना चाहता है.
_ साधु-संत ईश्वर के दर्शन पा कर खुश होते हैं.
_ गृहस्थ अपने सांसारिक भोग में खुश होते हैं.
_ सबको खुशी चाहिए “सिर्फ खुशी”
_ हम इस संसार में जो कुछ भी करते हैं, उनके पीछे एक ही मकसद है खुशी..
_ हंसी ही है जीवन का प्रयोजन.
_ तुम सब कुछ प्राप्त करके भी अगर हंसते नहीं, खुश नहीं रहते तो जीवन व्यर्थ है.
_ प्राप्ति के पीछे का भाव है “खुशी”
_ कोई पर्वत पर चढ़ कर खुश होता है, कोई समंदर में गोता लगा कर.
_एक ऊपर खुश है, दूसरा नीचे खुश.
मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.

_ क्रोध, नाराज़गी, आक्रोश, जिद, नफ़रत, घृणा और ईर्ष्या इंसान को ठूंठ बना देती है.
_ ऐसा शख़्स जहां से कोई कोंपल नहीं फूटती.
_ दूसरों से नफ़रत करते करते इंसान इतना नेगेटिव हो जाता है कि अपनी खुशियों में ख़ुद आग लगा लेता है.
_ रब हर किसी को अलग-अलग चीज़ों से नवाज़ता है..
_ लेकिन उनसे खुश होने की बजाय इंसान इस बात से परेशान रहता है कि दूसरों के पास कुछ और क्यों है.
_ इंसान बने रहने के लिए जरूरी है कि हमारे अंदर भावनाएं जिंदा रहें, दूसरों के लिए भी और रिश्तों के लिए भी..
_ मुस्कुराते चेहरे और खुशियाँ फैलाते लोग अच्छे लगते हैं.
_ जो सरल और सहज होता है वो सुकूं में होता है. सुकूं तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है कि हम खुश रहें.
_ किसी की खुशियां देख के अपना खून ना जलाएं.
_ अच्छी बातें करिए, अच्छा सोचिए, मुस्कुराइए. क्योंकि मुस्कुराने से मुश्किलें आसान होती हैं.
सभी प्रकार के दुखों का एकमात्र कारण गलत समझ है.

_ बाहर की कोई भी चीज़ हमें दुःख नहीं पहुँचाती.
_ यह हमारी अपनी मूर्खता ही है जो हमें कष्ट पहुँचाती है.
_ हम उन लोगों या चीज़ों को पकड़कर रखते हैं जो हमारी नहीं हैं..
_ और जब वे चले जाते हैं तो हम उन्हें दोष देते हैं.
– जब हम किसी बात को शिद्दत से [intensely] महसूस करते हैं..
_ तो हम पूरी ताकत से उसका जवाब तलाशते हैं.
_ तब हम सही मास्टर के संपर्क में आते हैं..
_ जो हमें हमारी गैरबराबरी का एहसास कराता है.
_ सही समझ के संपर्क में आने वाला दर्द अहसास की ओर ले जाता है.
_ इसलिए हमें अपने आसपास बुद्धिमान लोगों का साथ रखना चाहिए.
_ विषाद (दर्द) का सरल अर्थ है कि व्यक्ति ने आंतरिक संतुलन खो दिया है.
_ व्यक्ति अपने केंद्र से भटक गया है और बाहरी दृष्टिकोण से व्यवहार कर रहा है.
_ इसलिए, इससे पहले कि हम कोई भी कार्य करें, पहले अपना संतुलन खोजें..
_ दुनिया में खुशी लाने की कुंजी खुश रहना है..!!
— हम इसलिए नही रोते कि हम कमजोर है,
_बल्कि इसलिए.. क्योंकि हम जानते ही नही..
_ इसके आगे क्या किया जा सकता है,
_ आंसू विकल्पहीनता से उपजी वह विवशता है..
_ जहां आप स्वयं को सबसे अकेले पाते हैं.
_जहां आप ढंग से स्वयं को समझा नहीं पाते है,
_ खैर !…रोना नियति नहीं हो सकती..
_नियति तो विवशता है…!
मनुष्य की सबसे बड़ी भूलों में से एक यह है कि वह खुशी को हमेशा अपने वर्तमान से आगे कहीं और तलाशता है.

_ ऐसा लगता है मानो खुशी कोई मंज़िल है, जिसे पाने के लिए हम लगातार दौड़ रहे हैं. _ लेकिन क्या कभी किसी ने इस दौड़ में रुककर यह सोचा है कि जो कुछ हमारे पास है, वही कहीं हमारी खुशी की असली वजह हो सकता है ?
_ एक नंगे पांव आदमी के लिए खुशी बस एक जोड़ी जूते होती है.
_ वह ठंडी ज़मीन, गर्म पत्थरों और काँटों से बचने की कल्पना करता है, और उसकी सबसे बड़ी इच्छा होती है – सिर्फ एक जोड़ी जूते,,
_ पर जब वही आदमी पुराने जूते पहनने लगता है, तो अब उसकी नजर नए जूतों पर टिक जाती है.
_ फिर एक दिन जब उसे नए जूते मिल जाते हैं, तो उसकी खुशी ज्यादा देर टिकती नहीं – अब उसे और सुंदर, और महंगे जूते चाहिए होते हैं.
_ इंसान की यही फितरत है – वह जो नहीं है, उसी को चाहता है.
_ पर क्या हमने कभी उस आदमी के बारे में सोचा है, जिसके पास पैर ही नहीं हैं ?
_ जिसके लिए नंगे पाँव चलना भी एक सपना है ?
_ उस व्यक्ति के लिए नंगे पाँव चलना भी एक वरदान है, जो दूसरों के लिए दुख का कारण है.
_ यह जीवन का बड़ा ही सादा, लेकिन गहरा सत्य है – खुशी उस चीज़ में नहीं होती जो हमें नहीं मिली, बल्कि उसमें होती है.. जो हमारे पास है.
_ अगर हम अपनी नजरें अपनी इच्छाओं से हटाकर अपनी उपलब्धियों की ओर मोड़ लें, तो हमें एहसास होगा कि हम कितने समृद्ध हैं.
_ खुशी कोई भौतिक वस्तु नहीं है, जिसे तौलकर खरीदा जा सके.
_ यह एक दृष्टिकोण है, एक सोच है, एक एहसास है.
_ इसलिए, जीवन को तौलने का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि हमारे पास क्या नहीं है, बल्कि यह होना चाहिए कि.. हमारे पास कितना कुछ है.!!
“मेरे साथ जीवन में ऐसा क्यों हो रहा है ?” से ” जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?” ये सोचना चाहिए..??

_ बड़े होकर हम सभी विडम्बनाओं, विश्वासघातों, हानि, परित्याग, दिल टूटने और हर छोटी-छोटी बातों से गुजरते हैं, _जो हमारे दिल में एक फूल को मुरझा देती हैं.
_ लेकिन हाल के दिनों में मैंने एक बात सीखी है कि मुझे मुझसे सहानुभूति रखना बंद करने की जरूरत है और इसके बजाय मुझे उन सवालों पर सवाल उठाने की जरूरत है.
_ जीवन में ऐसा दौर भी आता है _जहां आप वास्तव में कड़ी मेहनत करने के बाद भी हार जाते हैं.
_ जिन लोगों की आप वास्तव में प्रशंसा करते हैं, वे इतना प्यार करने के बाद भी आपको छोड़ देंगे.
_ जब पार्टी खत्म हो जाती है उसके बाद भी हम अकेला महसूस करते हैं, तो यह एक संकेत है कि आपको आत्म प्रेम की सख्त जरूरत है.
_ इस बात पर मत रोओ कि जीवन तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है,; _ प्रश्न करें कि जीवन मुझे क्या बताने की कोशिश कर रहा है ?
_ आपके पास अपना खुशी का समय था ; _ तो फिर ज़िंदगी आपको इससे गुज़रवाकर क्या बताने की कोशिश कर रही है ?
_ आप देखेंगे, आप अपने 90% आंसुओं को उन लोगों पर बर्बाद करने के बजाय बचाएंगे _ जो आपकी भावना के लायक भी नहीं हैं.
_ ” मुझे पता है कि आप खुश रहने के लायक हो.”
कुछ खुशियां रेत की तरह होती हैं, अपनी मुट्ठियों को जितनी सख्ती से भींचो उतनी ही तेजी से जीवन से फिसलती जाती हैं। कुछ बर्फ की तरह, जो आंसू की बूंद बनकर जीवन में दस्तक देती हैं, और बर्फ बनकर पलकों पर एक लम्बे वक़्त के लिए जम सी जाती हैं।

इसके अलावा खुशियों का कोई अन्य विकल्प मुझे नहीं दिखाई देता। हम ना तो अपनी मुट्ठियों की रेत संभाल सकते हैं, और ना ही पलकों पर जमी बर्फ को, और ना ही उस जिन्दगी को, जिसे अक्सर अपना कहने की भूल करते नहीं थकते ! और जरा सी आंखें नम क्या हुईं ऐसा लगता है, रेगिस्तान में बाढ़ आ गई है।
जिन्दगी को हम जिन आंखों में भरना चाहते हैं, उन आंखों में कहां और कितना भर पाते हैं ? जिस जिन्दगी को हम अपना कह सकें उसे कब और कितना जी पाते हैं ?
डबडबाई आंखों की कोर से आंसू की एक बूंद क्या टूटी, जिन्दगी की हर उम्मीद अपना रंग खो देती है। और सामने सिर्फ धुधलका होता है, हर तस्वीर धुंधली नजर आती है, फिर भी जिन्दगी यहीं नहीं थम जाती, हम जीना नहीं छोड़ देते? मानाकि हम सब एक डूबती नांव में सवार हैं। पर आपकी अपनी होंठों की मुस्कराहटो को आपसे कोई नहीं छीन सकता है, मुस्कराहटें बहुत दूर जाकर भी एक ना एक दिन हमारे होंठों पर लौट ही आती हैं।
इसीलिए तो किसी ने कहा है कि- खुश रहना महज एक चॉइस है जिसे कोई भी चुन सकता है। फिर हर्ज ही क्या है, आप भी खुश रहना चुनिए और हमेशा हंसते और मुस्कुराते रहिए।
– संजय शेफर्ड
दुनिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो दूसरों की मोहब्बत व खुशी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं और बदले में हमेशा ही खाली हाथ रहते हैं.

_ कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ पा लेना चाहते हैं जब कुछ देने की बात आती है तो अपना मुँह मोड़ लेते हैं.
_ ऐसे लोग तो बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं मगर सन्तुष्ट कभी नहीं हो पाते.
_ जिन्होंने इन दोनों को बैलेंस कर लिया.. वही सही मायने में ज़िन्दगी जी रहा है और तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद भी वो खुश व सन्तुष्ट है….
_ इसलिए हर किसी को खुश रखने के साथ-साथ अपनी भी खुशी अहम है,
_ खुद के अस्तित्व को खत्म करके हर किसी को खुश रखना ये ज़िन्दगी नहीं है….
– हेसाम
खुश होना और खुश रहना भी एक कला है,

_ कोई इंसान बहुत कठोर होता है तो कोई इंसान बेहद कोमल
_ लेकिन खुशियां सभी के लिए एक ही भाव लाती है
_ बशर्ते हम छोटी छोटी बातों या चीजों में खुशियां ढूंढें
_ किसी को चिड़ियों का चहचहाना तो
_ किसी को कलियों का खिलना खुशी दे जाता है
_ लेकिन किसी को अपनों का होना भी खुशी नहीं देता
_ क्योंकि हमने अपने अंदर इतने गम व गुस्सा जब्त किये हैं
_ जो हर वक्त सिर्फ तकलीफ ही देता है
_ ऐसे वक्त में न परिवार का कोई सदस्य खुशियां दे सकता है
_ न ही दोस्तों का प्यार खुशियां महसूस करा पाती है
_ फिर जब हम सड़कों पर उन गरीब बच्चों को देखते हैं
_ जो धूल मिट्टी में खेल रहे हैं.. मुस्कुरा रहे हैं
_ उनकी मुस्कुराहट असली होती है..
_ उन पौधों को भी पनपते और खिलते हुए देखा है
_ जहां का माहौल साजगार भी नहीं है
_ फिर भी वो खिल रहें है और खुशबू बिखेर रहे हैं
_ लेकिन हम इंसान बेहद नाशुक्रे हैं
_ हम जीवन भर उन चीजों के पीछे भागते रहते है
_ जो मेरी कभी न थी, लेकिन उस चीज के लिए जरूर
_ गमों को अपना साथी बना लिया है
_ हमने जरूर उनको दरकिनार किया है… जो हमारे पास है
_ एक अंजान खुशी की तलाश में अपनों के लिए
_ न चाहते हुए भी सिर्फ गम ही छोड़े है
_ वैसे भी इंसानी फितरत है..
_ जो अपना न हो जो हासिल न किया जा सके
_ वो बेहद बेशकीमती होते है
_ जो अपने पास होता है.. उसकी कभी कद्र नहीं होती
_ खुशियां न बाजार से खरीदी जा सकती हैं
_ न ही किसी के रहमों करम से हासिल की जा सकती है
_ खुशियों की तलाश करना बेमानी है
_ खुशियां हमारे आस- पास ही होती है
_ जिस दिन हम ईमानदारी से अपने आस पास की चीजों
_ और लोगों को देखना शुरू कर देंगे
_ उस दिन खुशियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा
_ बहुत सी बीमारियों का इलाज हैं प्राकृतिक मुस्कुराहट
_ हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए और स्वस्थ रहिए
_ क्या पता जिंदगी कल हो न हो
_ लेकिन आज तो सिर्फ हमारा है उसको जीना शुरू कर दीजिए…..
– हेसाम
यहाँ खुशी, सुकून और ज़िंदगी की रफ़्तार साथ-साथ बह रही है 💙🌿

_ जहाँ दिल मुस्कुराता है, वहाँ मंज़िल अपने आप आसान लगने लगती है ✨
_ थोड़ा ठहरो, साँस लो, और याद रखो — ज़िंदगी भी इसी तरह बहती है, रुकती नहीं 💪😊
_ आज की खुशी, कल की ताक़त बन जाए 💫
_ बस चलते रहो… और मुस्कुराते रहो.!!😄🌈
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी शोर नहीं करती…

_ बस खामोशी में सिखा देती है कि छोटी सी जगह, बड़ा सा सुकून ही असली खुशी है ✨⛪
_ पहाड़ों की गोद, समंदर की हवा और दिल में भरोसा — यही तो ज़िंदगी है 🌊🌸
_ चलते रहो, मुस्कुराते रहो… क्योंकि हर सुबह एक नया मौका लेकर आती है ☀️💪
– Cycle Baba
हरी ज़मीन और छोटा-सा टेंट… लेकिन एहसास बहुत बड़ा है 🌍⛺

_ जहाँ सुकून भी है, हिम्मत भी और आज़ादी भी 💚
_ कभी-कभी ज़िंदगी में बस इतना ही चाहिए— शोर से दूर, खुद के करीब ✨
_ हर सफ़र हमें ये सिखाता है कि खुशियाँ जगह नहीं, नज़रिया बदलने से मिलती हैं.🌿
– Cycle Baba
कभी-कभी ज़िंदगी भी इस बर्फ़ीली झील जैसी हो जाती है…

ठंडी, शांत और थोड़ी भारी ❄️ लेकिन याद रखो, इसी सन्नाटे में अंदर कहीं
नई शुरुआत पिघल रही होती है 🌱✨
– Cycle Baba
हालात कठिन, रास्ता अनजान, लेकिन मुस्कुराकर चलते रहो,

मंज़िल खुद रास्ता बना लेती है 🌍✨
– Cycle Baba

सुविचार – समस्या – समस्याएं – समस्याएँ – मुश्किल – मुश्किलें- विषमताएँ – विषमताएं – वादविवाद – 095

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आप जितना अपने भीतर की ऊर्जाओं को, शक्तियों को जानते जायेंगे, उतना ही उन्हें सकारात्मक और सृजनात्मक मार्ग की ओर मोड़ना आपके लिए सरल हो जाएगा.
अपनी ऊर्जा को चिंता करने में ख़त्म करने से बेहतर है,

_इसका उपयोग समाधान ढूंढ़ने में किया जाये.

_ हर समस्या का हल है, बस हल करना आना चाहिए..!!

जीवन में जब- जब समस्या सामने आए, तब- तब स्वयं को समझाएँ !

_ तू धैर्य रख, तू हिम्मत रख, तू निर्बल नहीं है, साहस से काम ले, आगे बढ़ !

_ समस्या है तो समाधान भी जरुर होगा.!!

जहाँ समस्या है वहीं समाधान चाहिए,

_ समस्या एक जगह समाधान दूसरी जगह असम्भव— दोनो का मिलन ही न होगा–!

किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, कई समस्याएं कुछ समय लेकर स्वयं सुलझ जाती हैं.
आप किसी समस्या का समाधान तब तक नहीं कर सकते _जब तक आप स्वीकार नहीं करते कि समस्या आपके पास है और उसे हल करने की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते..!!
परिस्थितियां हमारे लिए समस्या नहीं बनती हैं ; समस्या तो तब बनती है, जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता.
समस्याएं पैदा करना आसान है, लेकिन उन्हें सुलझाना आपकी असली ताकत है.
परिस्थिती बदलने का दम रखो, समस्या कभी ख़त्म नही होने वाली..!!
“जीवन कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाया जाए बल्कि यह एक वास्तविकता है जिसे जीया और अनुभव किया जाना चाहिए.”

“Life is not a problem to be solved but a reality to be lived & experience. “
हमारी मुश्किलें-समस्याओं को हमसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता, इसलिए अपनी मुश्किलें-समस्याओं को हल करते समय, सभी को खुश रखने की शर्त से खुद को मुक्त रखिए.!!
यदि आप समस्या को देख नहीं पाते हैं तो _आप समस्या का समाधान नहीं कर सकते;

_यहीं पर हममें से कई लोग फंस जाते हैं.
_हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि _कोई समस्या है,
_इसलिए हम इसमें गहरे फंसे रहते हैं..!!
_परिवर्तन का द्वार उस क्षण खुल जाता है _जब हम स्वीकार करते हैं कि _किसी चीज़ को हल करने की आवश्यकता है..!!
_समस्या को समझते ही स्थिति बदल जाती है..!!
_और ये मस्तिष्क के बंद पड़ चुके जर्जर द्वार को _आहिस्ते से खोलने का कार्य करेगी और _हमें नव ऊर्जा से भर देगी..!!
अपनी समस्या का समाधान प्राप्त करने से पहले, आपको खुद से यह सवाल करना चाहिए कि..

_ क्या आप उन चीजों को छोड़ने या बदलने के लिए तैयार हैं,
_ जिन्होंने आपके जीवन को बीमार बना दिया है.
_ आत्म-ज्ञान और परिवर्तन, व्यक्तिगत संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण तत्व होते हैं.
_ यह उन आदतों, मानसिकताओं या लगावों की पहचान करने के बारे में है, जो स्थिति में योगदान कर सकते हैं, और उन्हें छोड़ने या बदलने का साहस रखने के बारे में है.
_ परिवर्तन तभी शुरू होता है, जब आप असहजता [Discomfort] का सामना करने और विकास को अपनाने के लिए तैयार होते हैं.!!
हर दिन हम नई समस्याओं से घिर जाते हैं और फ़िर उसे हम हल भी करते हैं.

_ हर किसी के लिए घिरने और सुरक्षित बाहर निकलने में लगने वाला समय अलग-अलग होता है..
_ और यह हमारी इच्छाशक्ति, साहस और इस विश्वास पर निर्भर करता है कि यह भी गुजर जाएगा.!!
जब तक आपसी विचार-विमर्श और अभिव्यक्ति का खुला माहौल नहीं होगा,

_तब तक समस्याओं के किसी समाधान पर पहुंचना संभव नहीं है.!!

ऐसा नहीं है कि समस्याएँ या अमानवीय स्थितियाँ नहीं हैं, लेकिन समस्याओं पर शोर मचाने से बेहतर है कि समाधान की दिशा में एक छोटा सा कदम उठाया जाए.
समस्या का मातम मनाना छोड़कर और खुद को बेबस, लाचार शोषित, पीड़ित, वंचित और अभावग्रस्त मानना छोड़कर.. समस्या का समाधान करना सीखिए.!!
समस्या यह है कि समस्या कि जड़ में न जाकर इसकी पत्तियों को छांटा जाता है कि इसमें कीड़े क्यों लग रहे हैं.
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.
समस्याएँ और विषमताएँ अब हमारे जीवन का अंग बन चुकी हैं,

_इनके साथ जीना सीख लें, इससे अवसाद नहीं रहेगा..!!
सारे समस्या सोच की है, सोच और माहौल से ही समस्या छोटी बड़ी दिखाई देती है.!!
हम जितना ज्यादा गहराई से सोचते हैँ, समस्या उतनी ही ज्यादा नज़र आती है ;
_ वहीं अगर सामान्य रहकर हर समस्या को स्वतंत्र छोड़ दिया जाय तो..
_ हर समस्या का समाधान स्वयं ही निकल आता हैं, और मुश्किलें आसान होने लगती हैं..!!
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_ वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_ जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.!!
समस्या से भागने पर वह और उलझी हुई लगने लगती है,

_ लेकिन जैसे ही हम उसका सामना करते हैं, वही धीरे-धीरे सुलझने लगती है.
_ डर दूर से हमेशा बड़ा दिखाई देता है, मगर हिम्मत से सामना करने पर उसकी असलियत छोटी पड़ जाती है.!!
समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बस एक दिन मन उन्हें जीवन का केंद्र बनाना छोड़ देता है.
जीवन समस्याओं के ख़त्म होने से शांत नहीं होता,
_ जीवन तब शांत होता है, जब मन समस्याओं के बीच भी हल्का रहना सीख ले.
जब आप समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपको और अधिक समस्याएं होंगी.

जब आप संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपके पास अधिक अवसर होंगे.

When you focus on problems you’ll have more problems.

When you focus on possibilities you’ll have more opportunities.

दूसरे लोगों की समस्याएँ तभी आपकी समस्या बनती हैं जब आप उन्हें समझते हैं.

Other people’s problems become your problem only if you pick up.

Quotes by रवीन्द्रनाथ टैगोर

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संसार में जिस ने कुछ खोया नहीं, उस ने पाया नहीं, जो हमारे हाथ आता है, उसे हम सम्पूर्ण रूप से नहीं पाते. जब हम त्याग द्वारा उसे पाते हैं, तभी वह हमारे हृदय का सच्चा धन हो उठता है.
सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है.
मैंने स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और पाया कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा में ही आनंद है.
वो जो अच्छाई करने में बहुत व्यस्त है, स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाता.
विश्वास वह पछी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है.
जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है ; यदि हम उसे ग्रहण करने की छमता रखते हैं.
फूल चुन कर एकत्र करने करने के लिए मत ठहरो. आगे बढे चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे.
हम महान व्यक्तियों के निकट पहुंच जाते हैं जब हम नम्रता में महान होते हैं.
जो शांत भाव से सहन करता है, वही गंभीर रूप से आहत होता है.
खुश रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल रहना बेहद मुश्किल !!
पँखुड़ियाँ तोड़ कर _आप फूल की ख़ूबसूरती नहीं इकट्ठा करते.
अकेले फूल को कई काँटों से ईर्ष्या करने की जरुरत नहीं होती.
शिक्षित व्यक्ति भाग्य का अस्तित्व स्वीकार नहीं कर सकता..!!

Quotes by मदर टेरेसा

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हम अच्छे विचारों के साथ सब कुछ नहीं कर सकते, किन्तु हम एक छोटे से विचार के साथ अच्छा स्नेह कर सकते हैं.
यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आपने कितना दिया है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि देते समय आपने कितने प्रेम से दिया.
अजूबा यह नहीं कि हमने किसी कार्य को कर दिखाया है, बल्कि यह है कि हमें वह कार्य करके प्रसन्नता हुई है.
यदि आप सौ व्यक्तियों की सहायता नहीं कर सकते तो केवल एक ही जरूरतमन्द की सहायता कर दें.
जब आप किसी के बारे में फैसला लेने लगते हैं, तब आप प्यार करना भूल जाते हैं.
खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते, अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं.
छोटी चीजों में वफादार रहिए, क्योंकि इन्हीं में आपकी शक्ति निहित है.
वो जीवन जिसने दूसरों के लिए कुछ ना किया हो, वह जीवन व्यर्थ होता है.
शान्ति की शुरुआत मुस्कराहट से होती है.
सादगी का जीवन खुशियों भरा जीवन होता है.

 

सुविचार – “उत्साह – उमंग – जोश – जुनून – 094

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“उत्साह,”

परिभाषा के अनुसार, “उत्साह, उत्सुकता, ऊर्जा और रुचि” का अर्थ है.
जीवन के लिए उत्साह का अर्थ है जोश के साथ जीना, अपने आसपास की दुनिया में रुचि लेना, रोमांच की तलाश करना और उत्साह की भावना के साथ जीना.जैसे,
” भूख का भोजन से क्या संबंध है, उत्साह का संबंध जीवन से है
“जीवन के लिए उत्साह और जुनून सबसे सरल सुखों से आते हैं.
जब कोई इंसान अधूरे मन और उत्साह के बिना कोई काम करता है,
_ तो सरल काम भी बहुत मुश्किल हो जाता है..!!
करने का जुनून हो तो कुछ भी हो जायेगा,
_ बैठे बैठे बातें तो कोई भी बना लेता है..!!
सदैव युवा, ऊर्जावान और उत्साही लोगों के साथ रहना चाहिये.
_ बूढ़ों के साथ बैठ कर ताश या कैरम खेलना एक तरह से आपके समय की बर्बादी है.!!
अपने सपनों को उत्साह, साहस, अनुशासन और आशावादी तथा सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करते हुए व अहं और भय का परित्याग कर, यह विश्वास करें कि यदि श्रद्धा हमारे जीवन की नीवं है तो प्रगति हमारे हाथों में है.
जो बातें एक समय हमारे भीतर उमंग भर देती थीं, वही समय के साथ बचकानी प्रतीत होने लगती हैं,

_ जिन भावनाओं में कभी डूबकर हम रोया करते थे, उन्हें आज देखकर मुस्कान आ जाती है, शायद खुद की ही नादानी पर..
_ शारीरिक रूप से बढ़ना प्रकृति का नियम है, लेकिन मानसिक रूप से परिपक्व होना अनुभवों का परिणाम..
_ और जब बचपन के उत्साह को विवेक की दृष्टि से देखने लगो..
_ समझो तुमने सच में बड़ा होना शुरू कर दिया है…!

सुविचार – व्यवहार – आचरण – बर्ताव – बरताव – बिहेवियर – Behavior – 093

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व्यवहार ……

उस चिराग की तरह बनिए जो गरीब के झोपड़े में भी उतना ही उजाला करता है जितना एक राजा के महल में रौशनी देता है !

_ सबके साथ समान और सम्मान से व्यवहार करिए !

अच्छा व्यवहार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है,

_ जबकि बुरा व्यवहार लोगों को पीछे हटा देता है.

किसी व्यक्ति के बारे में कोई एक निश्चित राय नहीं बनानी चाहिए,

_ क्योंकि लोग अलग अलग जगह अलग अलग तरह का व्यवहार करते हैं..!!

अपने व्यवहार को सच्चा रखो और बदनामी की परवा न करो.

गंदगी मिट्टी की दीवार पर लग सकती है, पौलिश किए हुए संगमरमर पर नहीं.

कभी-कभी अपने ही कुछ लोगों का व्यवहार इतना निकृष्ट कोटि का होता है कि

_उनका जिक्र करना भी अपनी ही इंसल्ट लगती है..!!

लोगों से बुरा बर्ताव उस तरह मत करें, जिस तरह वो बुरे हैं.

_ बल्कि लोगों से अच्छा बर्ताव उस तरह करें, जिस तरह आप अच्छे हैं.!!

किसी के भी व्यवहार को देख कर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया न किया करें.

_ बस जो हो रहा है.. उसे देखते रहो.. उसका आनंद लेते रहो.!!
_ क्यों हो रहा है ❓ कैसे हो रहा है ❓ कब से हो रहा है ❓ हो ही क्यों रहा है ❓
_ इस चक़्कर में न ही फंसे तो हमारे लिए अच्छा होगा.!!
जो सबकी हां में हां मिलाते हैं और ये जताते हैं कि उनका सबसे व्यवहार अच्छा है,

_असल में उनका किसी से व्यवहार होता ही नहीं है..
_ वो तो बस हां में हां मिलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं..
_ और जो सबकी हां में हां नहीं मिलाते.. वो हर किसी को हज़म नहीं होते..
_ अतः व्यवहार बनाए रखना और व्यवहार का दिखावा करना..
_ ये दोनों अलग अलग बातें हैं..!!
सोचने के बजाय काम करना, काम होना महत्वपूर्ण है सो समय मेरे लिए मौसम, समय, घर-परिवार के काम समस्या ही नहीं हैं,

_मुझे लगता है कि आप जैसा व्यवहार, कार्य करते हैं ..परिस्थितियां अपने आप उसके अनुकूल बनने लगती हैं..
_मैं आपको समझता हूं, और मैं आपका मन बदलने का प्रयास नहीं करूंगा.
_मैं दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखने के लिए बहुत बूढ़ा हो गया हूं.
_मैं जो सोचता हूं वह आपको बता चुका हूं और बस इतना ही.
_यदि आप मेरी मान्यताओं के विपरीत कार्य करेंगे ..तो भी मैं आपका मित्र बना रहूँगा _और यदि मैं आपसे असहमत हूँ ..तो भी मैं आपकी सहायता करूँगा.
अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी का फ़ोन एक बार में उठा लेंगे या किसी के मैसेज का उत्तर समय से दे देंगे तो उनकी वैल्यू कम हो जायेगी.

_ उन्हें लगता है कि तीन चार बार इग्नोर करने के बाद फोन उठायेंगे या मैसेज का रिप्लाई थोड़ा इग्नोर करने के बाद देंगे तो ऐसा करने से उनकी वैल्यू बढ़ेगी और सामने वाला उन्हें बहुत बड़ा इंसान समझेगा.
_ यह भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी ही है.. जिसमें लोग अपनी ही काल्पनिक दुनिया में जी रहे होते हैं.
_ जबकि बाहर लोगों में इनकी वैल्यू तो ख़ैर नहीं बढ़ती है.. मगर इनके इस व्यवहार के चलते लोग इन्हें ज़रूर किनारे कर देते हैं.!!
*लोग हमारा बुरा बर्ताव तो याद रखते हैं.. अपना भूल जाते हैं.

_ जब शिकायतें गिनाते हैं, तो हमारी गलती उन्हें क्रमवार याद होती है,
लेकिन उन्होंने हमारे साथ क्या-क्या बुरा किया ? उन्हें याद नहीं रहता..
_ जबकि हमारा बुरा बर्ताव उनके बुरे बर्ताव के एक्शन का रिएक्शन था.
_ पहल हमने नहीं की थी.. – ‘सहन करने की भी एक सीमा होती है’
_ इसलिए, दूसरों की गलतियाँ गिनाने से पहले- अपनी गलतियों पर भी ध्यान दीजिए..
दर्द सबको बराबर लगता है.!!
आप किसी से बातचीत में शालीनता बरतेंगे या आदर में उनके खराब व्यवहार पर भी जवाब नहीं देंगे तो.. सामने वाला अपने को सुपीरियर समझ कर आप पर चढ़ बैठेगा..!!
कुछ लोग सच में बुरे नहीं होते और न ही बुरा सोचते हैं, पर उन्हें एहसास ही नहीं होता कि उनका व्यवहार दूसरे को चोट पहुंचा सकता है.

_ वे संवेदनशीलता के मामले में कमजोर होते हैं.!!
कोई अच्छा इंसान भी एक वक्त तक ही अच्छा रह सकता है,

_ उसके बाद वो लोगों से वैसा ही व्यवहार रखने लगता है, जैसा लोग उसके साथ रखते हैं.!!

हमारा अच्छा व्यवहार भी लोगों को खटकता है और इसलिए वे दूरी बना लेते हैं,

_ क्योंकि इससे उनके अहंकार को ठेस पहुँचती है.!!

अपनी वाणी और व्यवहार में हमेशा स्पष्टता रखो,

_ फिर जिसे आना हो आयेगा और जिसे जाना हो जायेगा..!!

आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ सच्चा व्यवहार करें, तो आप खुद सच्चे बनें और अन्य लोगों से भी सच्चा व्यवहार करें.
आपके व्यवहार से ही सामने वाला तय करता है कि आप इज्जत के काबिल हैं या दूरी के.!!
किसी की बात को दिल पर मत लीजिए, जिसका जैसा संस्कार होता है..
_ वैसा ही… उसका व्यवहार होता है..!!
सबके साथ बराबर व्यवहार रखें बिना किसी व्यक्ति विशेष की तरफ झुकाव रख के,

_ अर्थात चाटुकारिता को बढ़ावा ना दें..!!

आप यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि दूसरे लोग कैसा व्यवहार करते हैं ; _लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप इस सब पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.

_आपकी प्रतिक्रिया में आपकी शक्ति है.

You can’t control how other people behave. But you can control how you respond to it all. In your response is your power.

सुविचार – शांत – शान्त – शांति – शान्ति – अमन – चैन – सुकून – 092

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ज़िंदगी को नए सिरे से ठीक करने के लिए कोई मौका दे तो ..क्या मांगा जाए ?
_ वैसे आप क्या मांगते एक सुकूनदेह ज़िंदगी के लिए ? ?

” शान्ति ” _ वह सब कुछ, जो अच्छा है, उसकी जननी है.
“इस दुनिया में कुछ लोग ही शांत, समर्थ और संतुलित जीवन जीते हैं”

‘मैं अपनी शान्ति का मालिक हूँ, सिचुएशन [Situation] का गुलाम नहीं.’

” शांति का आगमन ज्ञान से ही होता है, _ और शांति आनंद को आश्रय देती है,”

“सुकून बाहर नहीं, भीतर की ख़ामोशी से मिलता है”

_ थोड़ी देर खुद से मिलने बैठिए, जवाब वहीँ मिलेंगे, जहाँ आपने कभी झाँका नहीं.!!

जिसके पास मन की शांति है _वह न तो खुद को परेशान करता है _और न ही दूसरे को.!!

कोशिश यह करना कि सुकून का ताल्लुक़, किसी शख्स से ना जुड़े.!!
मन की शांति सबसे बड़ा धन है, जब मन शांत हो, तभी जीवन सुखमय बनता है.!!
“हमें सुकून वहां मिलता है जहां आपको किसी को कुछ साबित नहीं करना होता.”
ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीज़ है – मन की शान्ति, सुकून की नींद, सुलझे हुए रिश्ते, आर्थिक मजबूती, आध्यात्मिक जीवन.!!
कुछ लोग यह नहीं समझते कि अपने घर में अकेले शांति से बैठना, नाश्ता करना और अपने काम से काम रखना अमूल्य [ Priceless ] है.
दूसरों की प्रशंसा करें, इस से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी,

_ दूसरों से यह उम्मीद न करें कि, वे आप कि प्रशंसा करेंगे,

_ इस से आप को मानसिक शांति मिलेगी !!

शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं,

_ बल्कि आवश्यक है इच्छाओं की शांति !!

दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति को नष्ट करने का अधिकार न दें.

दूसरों से ईर्ष्या करने वाले मनुष्य को _ कभी मन की शांति नहीं मिलती.

मन की शांति दुनिया की किसी भी दौलत से बढ़कर होती है.

मन को तो तभी चैन मिलता है, _ जब ह्रदय शान्त हो.

” सुकून की फिजा में ही, _ मौज़-ए- बहार आती है,”
लोगों की राय से ज्यादा अपनी शांति को महत्व दें.

साधन खरीद सकते हैं, _ सुकून नहीं..

अपनी शांति बचाना किसी के खिलाफ जाना नहीं होता, बल्कि सबके लिए बेहतर बनने की शुरुआत होती है.
**’हमें शांति तो चाहिए…
_पर दिमाग को छुट्टी देने का मन नहीं करता.’
हम शान्ति के बिना रचनात्मक नहीं हो सकते.
किसी भी हालात में घबराना नहीं है, शांत दिमाग से रास्ते निकल ही आते हैं.
केवल न्यायप्रिय व्यक्ति ही मन की शांति का आनंद लेता है.
जब मन एकदम शांत हो जाता है, तब आप की बुद्धि मानवीय सीमाओं को पार कर जाती है..

_ अगर हम किसी तरह थोड़ा शांत रहना सीख लें तो जीवन सचमुच हल्का हो सकता है और हम वास्तविक मुद्दों पर बात कर सकते हैं.!!

हमारे राज़ जितने कम लोगों को पता हों, उतना ही सुकून से जिया जा सकता है,

_ क्योंकि बुरा वक़्त सबकी नीयत उजागर कर देता है.!!

अत्यधिक उम्मीदों को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी..!!
सुकून शांति पाने के लिए, जीवन को व्यवस्थित तरीके से जीने की ज़रूरत है.!!
जो अपने को शान्त रखना नहीं जानता, _कभी अच्छा नहीं बोल सकता.
“खुशियाँ तो मिलती रहीं, पर दिल सुकून के लिए तरसता रहा.”
ढूंढ लिया है खुद में ही सुकून…! ये ख्वाहिशें तो खत्म होने से रही।।
ज्यादा सुख सुविधा की चाहत सुकून भी छीन लेती है.!!
“जो भीतर से शांत है..- वो हर हाल में मुस्कुरा सकता है”
सुकून और शांति में होना ही कामयाबी है.!!
जो अच्छा था उसने सुकून दिया.. _ जो ख़िलाफ़ था.. उसने मज़बूत बनने में मदद की..!!
“मन की शांति भी एक जिम्मेदारी है..
_और हर किसी को उसका अधिकार नहीं दिया जा सकता”
यह एहसास कि वर्तमान क्षण ही सब कुछ मायने रखता है, _ तो हमें आंतरिक शांति मिलेगी _और हम प्रत्येक दिन की सुंदरता और खुशी की सराहना करेंगे..!!
1 दिन मृत्यु तो सभी की होनी है इसका यह मतलब नहीं कि जीना छोड़ दे

सुख शांति से परिवार के साथ वक्त बिताएं.

किसी भी तरह की बहस का हिस्सा बनने से बचें..
_ यदि जीवन में मानसिक शान्ति चाहते हैं तो..!!
कुछ अच्छा होने के लिए और मानसिक शांति के लिए बहुत कुछ छोड़ना और स्वीकार करना होता है.!!
“शांत रहना कमजोरी नहीं, यह समझदारी की निशानी है.

_ क्योंकि हर जवाब शब्दों से नहीं व्यवहार से दिया जाता है”
अशांति से हमें मुक्त होना है, क्योंकि अशांति के कारण मन में कंप पैदा होता रहता है, यह कंप बड़ा तकलीफ देता है ;_ क्योंकि कंप में हम प्रसन्न नहीं हो सकते, _

_ अशांति के इस दुष्प्रभाव से, कंप से हमको बचना होता है, ” हमें शांति की दिशा में यात्रा करनी चाहिए “

चाहे कोई आपके साथ कितना भी बुरा करे, उसके स्तर तक मत गिरो.

_ शांत रहो और दूर हो जाओ..!!

इस दुनिया में शांति से रहने के दो ही उपाय हैं – एक उपाय तो ये है कि अपनी आवश्यकताओं को कम कर दिया जाए ;

_ और दूसरा उपाय है कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाने का प्रयास किया जाए. ऐसा करने से जिंदगी आसान हो जाती है.

लोग आप क़े साथ ईमानदार नहीं हैं, लोग पाखंड से प्यार करते हैं ; _ जब आप

खुद क़े प्रति ईमानदार होते हैं तो आप को आंतरिक शांति का मार्ग मिल जाता है.

” सुकून खोता हो, और सल्तनत मिलती हो तो ठोकर मार देना सल्तनत को, _

_ और सुकून को संभाल लेना, _ यही सच्ची दौलत है,”

“जिसे याद करने से मन अशांत हो,

_ उसे भूल जाना नहीं.. उससे मुक्त हो जाना ही सच्ची शांति है.”

“जो स्वाभाविक रूप से बदल रहा है..
_उसे शांत होकर बदलने देना चाहिए”
कभी-कभी कुछ लोगों से दूरी बना लेना ही सुकून देता है..

_ ख़ासकर उनसे.. जो आपकी नज़दीकी को हल्के में लेते हैं.!!

जिस दिन आप खुद को भीतर से शांत कर लोगे..
_ उस दिन लोग खुद बेचैन हो जाएंगे आपके सुकून से.!!
बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्साह ही खुशी है; _लेकिन जब आप उत्साहित होते हैं तो आप शांत नहीं होते.

_ सच्चा सुख शांति पर आधारित है.

Many people think excitement is happiness. But when you are excited you are not peaceful. True happiness is based on peace.

जब मन शान्त होगा तब आप हर समस्या का आसानी से हल ढूंढ पाओगे ; तब आप किसी भी परिस्थिति में अपने मार्ग से विचलित नही होओगे..!!
यदि आपके पास उन चीजों के बारे में चिंता करने का समय है, जिन्हें आप वैसे भी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो आप विचलित हैं.

” मन की शांति सही चीजों पर केंद्रित होने से आती है.”

सच की लड़ाई अक्सर इंसान को अकेला कर देती है, पर समझदारी यह है कि हर जगह लड़ाई न लड़ी जाए – कभी-कभी शांति, जीत से ज़्यादा कीमती होती है.!!
जो हमसे नफ़रत करता हो, हमें हिकारत की नजर से देखता हो

_उसके लिए सबसे बेह्तरीन अमल है _उसे इग्नोर कर देना, उसे माफ़ कर देना.

ऐसा करने से हम शांति और सुकून में रहते हैं और वो बेचैन.

बैर रखने वालों के सामने से मुस्करा कर निकल जाना _सबसे मज़ेदार होता है.

करके देखिए अपने दिल को सादा और सरल बना लीजिए, _सुकून में रहेंगे.

जो लोग बार बार आपकी शांति भंग करें, उनकी जिंदगी से बेहद शांति से निकल कर, उन्हें भी शांति की तलाश के लिए छोड़ दें..!!
अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, करो ऐसी व्यवस्था जहाँ जबरदस्ती मानसिक शारीरिक तनाव का दंश नहीं झेलेंगे.. _ ऐसे रिश्तों में रहने का चुनाव नहीं करेंगे जहां प्रेम, शांति और सम्मान न हो.!!
लोगों की वास्तविकता जानना कोई बड़ी बात नहीं है, आप बस उनके जीवन को देखिए,

_ वे किन चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं, किन चीजों को अच्छा कह रहे हैं और किन चीजों को बुरा, उनमें व्यर्थता का बोध है या नहीं, उनके जीवन में सुकून शांति है या नहीं..!!
एक बार समझदारी आने की देर है.. फिर इंसान हर उस चीज़ से दूरी बना लेता है..

_ जो उसका सुकून छीनना चाहती है.. फिर चाहे वह चीज़ उसे कितनी ही पसंद क्यों ना हो.!!

दुनिया में अगर सुकून से जीना है तो उन लोगों से बहस करना छोड़ दीजिए..

_ जो अपने झूठ को भी सच मानते हैं.!!

शांत रहना सिख जाओ…

_ क्योंकि अधिक बोलने वालों को दुनिया उतनी गम्भीरता से नहीं लेती…!!!

शांति के मार्ग पर चलें, शक्ति की राह पर नहीं.

_ एक शांति ही है जो अखंड है और पूरा अस्तित्व उसमें डूबा है.
_ शांति के बिना संगीत संभव नहीं है.
_ खूबसूरती शांति और मौन से आती है, शब्दों से नहीं.!!
जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है ‘खुद को बदल लें’.

_ क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है.
कुछ सवालों के जबाब तो चाहिए होते हैं, चाहे मूल्य कोई भी चुकाना पड़े..

_ फिर इसके लिए हो सकता है, उन सवालों के जबाब जानने के लिए..
_ आपको मानसिक या फिर शारीरिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़े,
_ पर जबाब जरूरी है, मन की शांति के लिए.!!
हम अपनी दशा और दृष्टिकोण बदल दें तो.. _ शायद वास्तविक शांति हमें ज़्यादा सस्ती और टिकाऊ मिल जाए.!!
दौलत कमाना आसान है, पर सुकून कमाना मुश्किल ;

_ असली अमीरी वही है जहाँ सिर तकिये पर रखते ही गहरी नींद आ जाए.!!

जितना शांत आप ख़ुद को रखते हैं,

_ उतना ही अच्छे से आप दूसरी चीज़ों के बारे में सोच सकते हैं.!!

एक समय बाद नकारात्मक चीजें धीरे-धीरे जीवन से दूर हो जाती हैं,

_ और रह जाता है तो ‘एक सुकून भरा एहसास’

“जब मन भीतर से थक जाता है — तब वो बाहर को देखने लगता है.

_ और जब भावनाएं बोझ बन जाती हैं, तब दूरी ही शांति बन जाती है”

कुछ लोग चोट भी देते हैं और मासूम भी बन जाते हैं,

_ शांत रहिए.. समय सबका सच उजागर कर देता है !!

जब आपका मूल्य बढ़े, तो उसकी पहचान शोर से नहीं, शांतिपूर्वक कार्यों से होती है,

_ जैसे कागज़ की मुद्रा कभी शोर नहीं करती.!!

चाहकर भी अगर कहीं सुकून ना मिले, तो मस्त होकर खुद में खो जाया करो..!!
यदि किसी भी चीज से आपकी शांति नष्ट होती है, तो यह बहुत महँगा है.
शांत रहें, क्यूंकि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता ; वक्त बदलता जरूर है.
अपनी आंतरिक स्थिरता, शांति और आनंद की दशा को फैलने दीजिए.
जीवन इतना अभिशप्त नहीं होना चाहिए कि उसे शांति से जी ही न सकें..!
शांत लोग सबसे मजबूत होते हैं, उनकी चुप्पी में भी वो ताकत होती है..
_ जो समय आने पर सब बदल देती है.!!
जिसके साथ सुकून बहुत मिलता है..

_ यकीन मानिए.. उसके साथ वक़्त ही बहुत कम मिलता है.!!

800 करोड़ से ज़्यादा लोग हैं दुनिया में, लेकिन सुकून के नाम पर बस कोई एक आध ही मिलता है जीवन में.!!
दूसरों के काम में रुचि न लेने से अधिक शांतिपूर्ण कुछ भी नहीं है.
ढूढों तो सुकून खुद में ही है, दूसरों में तो बस उलझनें ही मिलेगी !!
लगाव की पीड़ा से अलगाव का सुकून बेहतर है..!!

_ जो आपकी मानसिक शान्ति भंग करे, उससे बहस मत करो बल्कि उसे तत्काल Block करना सीखो.!!

लोगों को उनके चाहने पर छोड़ देने में ही शांति है.

_ किसी के जीवन में तब तक रहने का कोई मतलब नहीं.. जब तक वे आपको न चाहें.!!

जब विचार मिल जाए, तो शब्द रोक देना ही समझदारी होती है.

_ अब उसे जीना है.. समझाना नहीं.
‘शांत रहिए’.. जो होना है, अपने समय से होगा.!!
दुनिया को समझने से पहले, अपने भीतर थोड़ी शान्ति बनाना ज़रूरी है.!!
महापुरुषों ने महल को त्याग दिया शांति की तलाश में…..

_ और हम शांति को त्याग रहे हैं महलों की तलाश में….

सुकून के पल धन दौलत से नहीं ख़रीदे जा सकते, _

_ अगर ख़रीदे जाते तो आज कोई बेचैन नहीं रहता ..

शांति से किया गया विचार हमें भीतर से मजबूत बनाता है ;

_वहीँ शोर से उठी हुई बातें हमें कमज़ोर बनाती हैं..!!

आप लोगों को जितना कम जवाब देंगे ;

_ आप का जीवन उतना ज्यादा शांतिपूर्ण रहेगा..!!

वक्त अच्छा हो या बुरा.. हर परिस्थिति में ख़ुद को शांत रखना सीखो,

_ यह बात आपकी ज़िंदगी बदल देगी..!!

आप सुकून शांति में रह रहे हो तो इसका अर्थ ये नहीं कि..

_ ये दुनिया भी आपको सुकून शांति से रहने देगी.!!

आपकी ज़िन्दगी में जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में हर किसी को बताना छोड़ दीजिए,

_ “आप ज्यादा सुकून से रहोगे “

अपने जीवन के उन क्षणों का विश्लेषण करें.. जिन्होंने आपको शांति और सुकून का एहसास दिलाया..

_ लेकिन बाद में मानसिक अस्थिरता और तनाव का कारण बन गए.!!
सुकून ज़रूरी है, इसलिए समय रहते आप वो कीजिए, जिसमें आपको ख़ुशी महसूस हो.

_ वर्ना उम्र और वक्त निकल जाने के बाद अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता..!!
जिंदगी से जितना लोगो को कम कर दोगे, उतना ही ज्यादा सुकून महसूस करोगे.

_ खुद से ज्यादा कोई महत्वपूर्ण नहीं..!!
घर के सारे दरवाजे बंद करने से आप सुरक्षित हो जाओगे ? शांत हो जाओगे?

“शायद नहीं —
_ आप सुरक्षित तभी हो सकते हो.. जब अपने दिमाग के शैतान को बाहर ही छोड़ कर आओगे.
_ दिमाग ही शैतान हुआ तो फिर कहीं भी चले जाओ.. शांति नही मिलेगी.!!
जिंदगी में हजारों आवाजें सुनाई देंगी,
_ मगर ठहरना वहीं जहां दिल को सुकून और अपनापन महसूस हो.!!
काम ने नहीं, उलझन ने थकाया है… काम तो बस एक बार में हो जाता.

_ काम ख़त्म करना ज़रूरी है, पर अपनी शांति खोना ज़रूरी नहीं.!!
जिंदगी जीने के लिए अनेक तरीके हो सकते हैं मगर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,
_जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे..!
हम शांति नहीं सुख से रहते हैं, सुख और शांति में बड़ा अंतर है,

_ परंतु ज्यादातर समय सुख ही शांति लगती है पर होती नहीं है…
_ बात यह है कि सुख व्यक्ति से लेकर सामाजिकता तक जाता है पर शांति वैयक्तिक है…
_ अब क्योंकि समाज सुखमय दिखता है _जिससे वातावरण शांत दिखता है, पर वह शांत शांति नहीं है…
हम उन लोगों की प्रशंसा करते हैं जो फिल्मों में हीरो लड़ता है, बचाता है और बचाव करता है.

लेकिन एक तरह से यह अजीब है. हम उन लोगों की प्रशंसा क्यों नहीं करते_ जो क्रोध, द्वेष और दूसरों को हानि नहीं कर रहे हैं ?

_ जो शांति स्थापित करने की कोशिश करते हैं ?

“कौन आगे-कौन पीछे — ये छोटी ऊँचाइयाँ हैं..

_ सच्ची ऊँचाई तो मन की शांति है — जैसे जीवन एक यात्रा है..
_ हम एक स्टेशन उतरते हैं, अपना अनुभव बटोरकर आगे बढ़ जाते हैं.
_ जो काम का नहीं — उसे रास्ते में ही छोड़ देना है”
तर्क सही भी हो, तो भी कभी-कभी अपनी बात सही सिद्ध करने से अधिक आवश्यक है, जीवन में शान्ति..

_ बहस करने से बेहतर है, चुप रहा जाए.!!
शान्ति चाहिए तो कुछ चीजों, बातों, प्रश्नों और लोगों को मुस्कुरा कर टाल दिया करो.!!
मन की शांति के लिए यह स्वीकार कर लें कि सबकी पसंद होना मुमकिन नहीं ;

_ कुछ लोगों की नफरत का बस इतना सा मतलब है कि आप अपनी राह पर सही हैं.
हालात कितने भी मुश्किल हों, शांत रहो और डटे रहो..
_ क्योंकि जब हिम्मत मजबूत होती है, तो हालात भी झुक जाते हैं.!!
जिंदगी जीने के लिए कई तरीके हो सकते हैं पर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,

_ जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे.!
क्यों कुछ लोग शांति में भी अशांति ढूंढते हैं ?

_ कुछ लोगों का मन हमेशा अशांत रहता है. क्योंकि उनके अंदर ही Restless होता है.
_ अगर अंदर Noise तो बाहर की शांति भी uncomfortable लगेगी.
_ वे शांति को समझ ही नहीं पाते, उन्हें लगता है कि हर जगह कोई न कोई संघर्ष होना चाहिए, क्योंकि वे उसी माहौल में जीने के आदी हो चुके होते हैं.
_ ऐसे लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों में विवाद ढूंढते हैं, क्योंकि उनके लिए वही सामान्य बन चुका होता है.!!
मैं अपनी ‘मन की शांति’ चुन रहा हूं.

_ क्योंकि यही वह है जिसकी मुझे ‘सचमुच’ जरूरत है.
_ मुझे और नाटक की जरूरत नहीं है.
_ मुझे ऐसा महसूस कराने वाले लोगों की जरूरत नहीं है कि मैं काफी अच्छा नहीं हूं.
_ मुझे झगड़े, बहस और ‘नकली’ कनेक्शन की जरूरत नहीं है.
_ अभी मैं वह नहीं हूं जो मैं होना चाहता हूं ;
_लेकिन मुझे गर्व है कि मैं वह नहीं हूं _जो मैं हुआ करता था..!
सही राह वही है जहाँ मन शांत रहे, भले दुनिया उसे समझ न पाए.!!
_ मन की शांति सबसे बड़ी चीज़ है, पर इसे पाने की क़ीमत भी कम नहीं होती..
_ इसके लिए कई रिश्ते छूट जाते हैं, कई उम्मीदें पीछे रह जाती हैं, और बहुत सी बातें अनकही ही दफ़न हो जाती हैं..
_ लेकिन जब भीतर का शोर थम जाता है, तो समझ आता है जो खोया, वह बोझ था और जो बचा, वही सुकून है.!!
एक बात हमेशा याद रखें : अशांत पानी में कभी अपना चेहरा साफ नहीं दिखता, वैसे ही अशांत मन में कभी सही रास्ता नहीं दिखता.
_ ​इसलिए जब भी उलझन में हों, थोड़ा ब्रेक लें, लंबी सांस लें और मन शांत होने के बाद ही कोई कदम उठाएं.!!
जो कोई भी मन की शांति और स्वास्थ्य को महत्व देता है,

_वह हर संभव सर्वोत्तम जीवन जीएगा.!!
_मन की अच्छी व्यवस्था का नाम ही शांति है.!!
_हम जो कहते और करते हैं, उनमें से अधिकांश आवश्यक नहीं है ;
_ यदि आप इसे समाप्त कर सकते हैं, तो आपके पास अधिक समय और अधिक शांति होगी.
_ हर क्षण अपने आप से पूछो, ‘क्या यह आवश्यक है ?’
आज खुद से वादा करते हैं कि, कैसी भी बात हो, लोगों का कैसा भी व्यवहार हो; हम शांति और खुशी से रिस्पॉन्ड करेंगे.

_ कोई भी हमारी भावनाओं के लिए जिम्मेवार नहीं होता है और ना ही जैसा हम चाहते हैं, वैसा फील करा सकता है.
_ हम खुद ही अपने विचार, भावनाओं और व्यवहार के लिए जिम्मेवार हैं, नाकि कोई दूसरा.
_ उसने मेरे साथ गलत किया.. इसलिए मैं उदास हूँ… उसके व्यवहार की वजह से मुझे क्रोध आया आदि.. हमारी शब्दावली का हिस्सा नहीं होने चाहिए.!!
सिर्फ दुनिया में अमन, चैन और सुकून की दुआ कीजिए,

_ किसी का समर्थन किसी का विरोध करने से कुछ हासिल न होगा,
_ क्योंकि इंसानियत से बढ़ कर कुछ नहीं है..
_ और जब इंसानियत ही नहीं हमारे अंदर ..तो हम कुछ भी नहीं हैँ.
_ इस जिंदगी की कब शाम आ जाए और कब अंधेरों में गुम हो जाए किसी को नहीं पता…
_ इसलिए मुश्किल वक्त में सभी के लिए दुआएं कीजिए,
_ जो गलत राह पर हैं ..उन्हें सही राह पर चलने की दुआ कीजिए…
_ हर इंसान को अपने कर्मों का फल इसी दुनिया में ही मिलना है…
_ बेशक रब सब जानता है…
एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो लोग अंदर से खाली होते हैं, वे बाहर से बहुत ज़्यादा शोर करते हैं. _ जिन्हें सच में शांति मिल गई होती है, उन्हें दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. _ उनकी जिंदगी खुद एक उदाहरण बन जाती है.!!
अगर जीवन में खुश रहना है तो.. “जो मिला है उसको समझो ज्यादा”

_ वरना दौड़ कभी खत्म नहीं होगी..
_ और अगर दौड़ खत्म नहीं होगी तो कभी सुकून प्राप्त नहीं होगा.!!
“किसी को कुछ साबित नही करना है”

_ किसी मे कोई सुधार की कोशिश नही करना है.
_ सिर्फ अपना शांतिपूर्ण जीवन जीना है और चुपचाप आगे बढ़ना है.!!
हर बात में उलझना और दिल पर लेना ज़रूरी नहीं ;
_ हर कहने वाले को जवाब देना और उलझने वाले से उलझना भी ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ बातों को छोड़ देना चाहिए, ध्यान नहीं देना चाहिए..
_ कुछ बातें इतनी भी ज़रूरी नहीं होती कि उनमें पड़ कर अपनी मानसिक शांति को ख़त्म कर दिया जाए.!!
हमने कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों से खुद को इस कदर बाँध लिया है, कि अब सच की हल्की सी छींट भी जब हमारे ज़ेहन को छूती है, तो वो सच नहीं..- एक बदतमीज़ दखल सा महसूस होता है, जो हमारे बनाए हुए भ्रम की शांति को तोड़ने की कोशिश कर रहा हो.!!
कभी भी सबको खुश नहीं रखा जा सकता, हर किसी को खुश रखना असंभव है.

_ कुछ लोग दूसरों के विचारों या ज्ञान में अच्छाई देखने के बजाय, सिर्फ़ आलोचना करने का अवसर खोजते हैं.
_ ऐसे लोगों से दूर रहना आत्म-सम्मान का संकेत है.
_ शांति तभी मिलती है जब हम ये समझ लें कि सबको प्रसन्न करना हमारी जिम्मेदारी नहीं.!!
मैं जिस किसी से भी मिलता हूं,

_ वह किसी न किसी बात को लेकर दुखी और निराश दिखता है;
_ ऐसा महसूस होता है जैसे किसी के पास जो कुछ भी है.. उससे वह खुश नहीं है.
_इससे मुझे आश्चर्य होता है कि हमें पहले ये अधूरी भावनाएँ क्यों दी गईं ?
_ और यदि दिया गया है, तो किसी को वह क्यों नहीं मिल रहा जो वह चाहता है..
_इंसानों को हमेशा कुछ शांतिपूर्ण खोजने के लिए खो जाना पड़ता है,
_ लेकिन जीवन के अंत में उन्हें हमेशा एहसास होता है कि _शांति हमेशा उनके बगल में किसी चीज़ या किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में मौजूद थी _जिसकी उन्होंने सराहना नहीं की थी.
_ मैं हर किसी पर प्रतिक्रिया करने और जवाब देने में इतना समय बर्बाद कर देता था कि मेरे जीवन की कोई दिशा ही नहीं रह जाती थी.
_ अन्य लोगों का जीवन, समस्याएँ और इच्छाएँ मेरे जीवन की दिशा निर्धारित करती हैं.
_ एक बार जब मुझे एहसास हुआ कि मैं जो चाहता हूं उसके बारे में सोचना और पहचानना मेरे लिए ठीक है,
_तो मेरे जीवन में उल्लेखनीय चीजें घटित होने लगीं.
एक शांत व्यक्ति के लिए ये दुनिया हमेशा भारी रहती है.

_ क्योंकि जिन्हें जीने का तरीका नहीं आता, वे सबसे पहले उसी को disturb करते हैं – जो चुपचाप अपनी राह चल रहा होता है.
_ पर यह आपकी गलती नहीं है, यह दुनिया की गति है और आपका मन इस दुनिया से दो कदम आगे है — इसलिए टकराव ज्यादा लगता है.!!
मन अब उस मोड़ पर है, जहाँ गलती चाहे किसी की भी हो, शोर न उठे.. बस यही जरूरी है,

_ इसलिए अब सच के बजाय शांति चुनता हूं, और खुद को ही सुकून देता हूँ…!
मुझे अब किसी भी चीज़ से ज़्यादा शांति पसंद है.

_ इसलिए अगर कोई मेरे जीवन में उथल-पुथल मचा रहा है, तो मैं उसे सुलझाने के बजाय.. उसे छोड़कर चले जाने को प्राथमिकता दूँगा.!!
मन मोह में भटकता रहा… पर छोड़ देने पर ही शांति मिली..

– जिसे पाने लिए जीवन भर तरसता रहा, उसे छोड़ देने में राहत मिल गई.!!
जो लोग बहुत शान्त नज़र आते हैं, ज़रूरी नहीं कि वे सुखी हों.
_ वे असहाय और मजबूर भी हो सकते हैं.
_ अपनी मांगें मनवाने के लिए चिल्ला-चिल्ला कर थके हुए लोग मांगें पूरी न होने पर अंततः शान्त हो कर बैठ जाते हैं.!!
अगर कोई चीज़ और कोई लोग से आपकी शान्ति छीन रही है, तो वहाँ दूरी रखना ही समझदारी है, _ वहां involvement कम करना ही maturity है, selfishness नहीं.!!
‘शांति कोई लक्ज़री नहीं, ज़रूरत है’

_ हमारा नर्वस सिस्टम लगातार लड़ाई–भागदौड़ (fight or flight) में रहता है.
_ अगर उसे शांति नहीं मिलती, तो बेचैनी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान, भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ती जाती है.
_ जो व्यक्ति सच की खोज में है, वह बाहरी शोर से ज़्यादा अपने भीतर की शांति की रक्षा करता है.
_ हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, हर बहस में नहीं कूदता, हर रिश्ते को हर वक़्त ढोता नहीं.
_ रातें सिर्फ़ सोने के लिए नहीं होतीं, वे मन की मरम्मत का समय होती हैं.
_ जो अपने भीतर की शांति बचा लेता है, वही सच में आगे बढ़ता है.
_ जो अपनी रातों की शांति बचाता है, वही भीतर की स्थिरता बचाता है.
Fix your nights — your nervous system needs peace; a seeker protects their inner stillness.
मैं आत्मनिर्भर हूँ, और मैं ऐसा ही बनना चाहता हूँ, मुझे किसी ऐसे व्यक्ति की क्या ज़रूरत है जो मेरी शांति बन सके ?
I am self reliant, and I want to be, why do I need someone to be my peace.
_ मैं आत्मनिर्भर हूँ और रहना चाहता हूँ.
_ मुझे किसी और से अपनी शांति की उम्मीद नहीं रखनी.
_ मेरी शांति मुझसे है —
_ मेरी सोच, मेरी भावनाएँ, और मेरा संतुलन.
_ मैंने समझ लिया है कि –
_ खाली लोग सिर्फ खालीपन बाँटते हैं,
_ वे देने के लिए कुछ नहीं रखते.
_ मैं उनकी जगह खुद को क्यों खोऊँ ?
_ अब मैं खुद अपनी शांति बनूँगा, अपने भीतर की रोशनी से.!!
शांति के बारे में सबसे बड़ी बात यह है कि जब आपके पास यह होती है, तो आपकी आत्मा स्थिर और अडिग होती है, ; जब आपके पास शांति होती है, तो कोई भी चीज आपके दिल को हिला नहीं सकती, ; आप ऐसे लोगों के साथ व्यवहार कर सकते हैं जो आपको पसंद नहीं करते हैं और फिर भी उनकी आत्मा से प्रभावित नहीं होते हैं.

The great thing about peace is that, when you have it, your soul is anchored and unwavering. When you have peace, nothing can rock your core. You can deal with people who don’t like you and still not be influenced by their spirit.

“कोई भी आपकी अनुमति के बिना आपकी भावनाओं को ट्रिगर नहीं कर सकता है। शांत रहना सीखें और कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाहर क्या हो रहा है.”

“Nobody can trigger your emotions without your permission. Learn to be calm and centered no matter what’s happening outside of you.”

सुविचार – सत्य – सच – सच्चा – सच्चाई – Truth – 091

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” सत्य पर आधारित कुछ सुविचार प्रस्तुत हैं.”

1. सत्य बोलने वाला व्यक्ति मानसिक रोगों से बचा रहता है.
2. सत्य परेशान हो सकता हैं परन्तु पराजित नही हो सकता.
3. सत्य बोलने के लिए कोई तैयारी नही करनी पड़ती, वह अपने आप निकल जाता है.
4. दोपहर तक बिक गया बाज़ार का हर एक झूठ शाम तक हमें कचोटता रहता है.
5. सत्य को छुपाने का प्रयत्न निरर्थक होता है. वह कभी न कभी सामने आ ही जाता है.
6. सच बोलना कष्ट देता है पर बड़े मुसीबतों से बड़े आसानी से बचाता भी है.
7. सत्य वह दौलत हैं जिसे पहले खर्च करो और ज़िन्दगीभर आनन्द लो.
8. सत्य की विजय दीर्घकालिक होती है.
9. सत्य बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता हैं कि उसे याद नही रखना पड़ता.
10. सत्य में शक्ति होती हैं जो व्यक्ति को हर मुसीबत से बचाती है.
11. मित्र के द्वारा बोला गया कड़वा सत्य सदा ही हितकर होता है.
12. जिसकी मित्रता सत्य से है उसे कोई पराजित नही कर सकता है.
13. सत्य की भूख सबको होती हैं लेकिन जब इसे परोसा जाता है तो बहुत कम लोगो को इसका स्वाद अच्छा लगता है.
14. जिस सत्य के बोलने से किसी का भला हो उसे बोलने में कभी-भी हिचकना नही चाहिए.
15. सत्य का स्वाद कड़वा होता हैं पर स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है.
16. भरम में जीने से अच्छा है, सच का सामना किया जाए.
सत्य को जान लेने के बाद, उसका त्याग नहीं किया जा सकता, उसे अंगीकार करना ही होता है.!!
“जो खुद से सच बोलता है, उसे दुनिया का झूठ छू भी नहीं सकता.!!”
“सत्य की एक झलक ही काफी होती है..
_ पर असर पूरी जिंदगी का नजरिया बदल देता है”
अगर मैं सत्य पर टिक गया, तो अकेला होकर भी अनंत का सहारा मेरे साथ होगा.!
_ चाहे कोई जॉब से निकाले या घर से, सत्य का खोजी परवाह नहीं करता है.!!
सत्य कोई सुने न सुने _ आप सुनते व सुनाते रहिए ; क्योंकि एक दिन यही अभ्यास आप के व्यक्तित्व को इतना निखार देगा कि बाक़ी सब लोगों के पास करतल ध्वनि करने के सिवाए और कोई विकल्प नहीं होगा.
सत्य इसलिए नहीं बोलना कि लाभ होगा _ न ही इसलिए कि सत्य बोलने से पीड़ा मिलती है, _ बल्कि आप सत्य बोलने का आनंद लो..!!
सच्चाई का अपमान होता है, जब हम झूठ बोलते हैं और प्रत्येक झूठ सत्य का ऋणी होता है ; _ जल्दी या बाद में, उस कर्ज का भुगतान किया जाता है.
सत्य बोलने का फायदा ये होता है कि जो झूठ के आदी हैं वो आपसे दूर हो जाते हैं ;
_ सत्य कड़वा उन्ही को लगता है जो झूठ सुनने के आदी हों !!
मूर्ख वह है जो सत्य को जानता है, सत्य को देखता है, लेकिन फिर भी झूठ पर विश्वास करता है.
Stupid is knowing the truth, seeing the truth, but still believing the lies.
सत्य से कभी कोई आहत नहीं हुआ; लेकिन जो अज्ञानता में बना रहता है वह घायल होता है.

_ ” सत्य उन लोगों को घृणा जैसा लगता है _जो सत्य को संभाल नहीं सकते.!!”
_ ” सब कुछ बीत जाता है, केवल सत्य रह जाता है.”
_ ” सच बोलने के लिए केवल वही लोग आपसे नाराज़ हैं _जो झूठ बोल रहे हैं.”
हम दुनिया को जैसी है, वैसी नहीं देखते ;

_हम दुनिया को वैसा देखते हैं, जैसे हम देखना चाहते हैं
_ हमारी दृष्टि बदलती रहती है पर सच उससे कहीं बड़ा होता है.!!
सत्य के लिए अपने सुख को भी ठोकर मारनी पड़ती है, _

_ और हर एक में ___ इतना साहस कहाँ …

“– जो सत्य की तलाश करता है वह खुद को जोखिम में डालता है..–“

**जो शोर मचा कर prove हो वो अक्सर unreal होता है.

_ जो चुपचाप असर छोड़ दे वही real होता है.!!
बोलने कहाँ देते हैं हम किसी को ?? सच कोई बोल भी जाये तो जल्दी से उसे चुप करा देते हैं…

_ अंदर ही अंदर मर जाओ पर जुबान से कोई शिकायत ना करो..!!
छल की दुनिया में कोई जीत स्थायी नहीं होती..

_ लेकिन अगर आप सच्चाई से जियोगे, तो हर दिन आपकी जीत होगी.. सुकून के रूप में.!!
सच सबके सामने होता है…- पर उसे वही उठाता है, जो तैयार होता है.
बुरा लग जाये ऐसा ” सत्य ” जरूर बोलिए,

_ परंतु ” सत्य ” लगे ऐसा ” झूठ ” कभी ना बोलिए.

आप अपने दिल को वह सच बताने दो..

_ जिसे आप स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो.

आप सच का साथ दो या न दो ..ये बाद की बात है.!

_ आप झूठ का साथ नहीं दोगे ..यही फैसला बहुत है.!!

समय सत्य के सिवाय सब चीजों को कुतर खाता है,

_ झूठ, चालाकी, और बेईमानी की उम्र बहुत ही कम होती है !!

जो झूठ है वह दिल को परेशान करता है,

_ लेकिन सच्चाई खुशी से शांति लाता है.!!

जो अंदर सच के साथ जीता है, उसे बाहर का रास्ता ढूंढ़ना नहीं पड़ता.
_ जीवन बाहर का रास्ता खुद बना लेगा.!
हालात चाहे जैसे भी हों, अगर आप सच्चे हो..तो एक दिन वक्त भी गवाही देगा कि आप गलत नहीं थे.!!
“सच एक ही होता है, पर हर किसी तक अलग रास्ते से पहुँचता है.”
अब यहाँ सब मैनेज है,, सत्य तो अब मैग्नीफाइंग ग्लास से भी नहीं दिखता.

_ हमारे इर्द -गिर्द कृत्रिम और बनावटी दुनियाँ बुन दी गई है,

_ समझ ही नहीं पाते कि क्या सच है और क्या झूठ ?

हम कितना भी दुनिया को जानने का दावा करें..

_ पर सच्चाई यही है कि दुनिया की बात छोड़ो हम ख़ुद को भी कहाँ जान पाते हैं.!!

कभी-कभी सत्य भी चुप हो जाता है..

_क्योंकि उसे पता होता है कि समय ही वो आवाज़ है, जो सबको सच्चाई दिखा देगा.!!

हर सच बोल देना भी ज़रूरी नहीं होता.. कब बोलना है, ये समझना भी एक wisdom है.!!

_ हर सच बोलना जरूरी नहीं… सही वक्त पर बोलना जरूरी है.!!

और फिर एक दिन हम इस झूठ की दुनिया मे, जहाँ हँसी से लेकर सारी बातें तक झूठी हैं,

_ इस दुनिया से निकलना भूल, इसमे जीना शुरू कर देंगे.. हमारी चेतना शून्य हो जाएगी, हम सिर्फ सत्य को देखेंगे.!!

सच बोलने वाला इंसान कहीं भी फिट नहीं बैठता..

_ क्योंकि आज के दौर में लोग मीठा झूठ सुनना पसंद करते हैं, कड़वा सच नहीं.!!

जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं, दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
जितना सच से भागोगे.. उतनी ही तकलीफ़ ज्यादा होगी.._यही प्रकृति का नियम है.!!
जो इंसान अपने सच से भागता है, उसका सारा जीवन भागने में ही गुज़र जाता है..!!
ताकतवर वही होता है जो अकेले होकर भी सच का साथ नहीं छोड़ता.!!
जिन्हें सच में बोलना आता है, वे अक्सर खामोश रहना ही बेहतर समझते हैं.!!
सत्य जानकर भी असत्य के प्रति गहरा लगाव मानसिक गुलामी का संकेत है.!!
कुछ झूठ बहुत हल्के होते हैं और सच बहुत भारी.!!
सत्य को जानें बिना कोई भी निर्णय उचित नहीं.!!
सच को देखना आसान नहीं होता, पर वहीँ से रास्ता शुरू होता है.!!
सच को याद नहीं रखना पड़ता..
‘Stress’ उन्हें होता है.. जिन्हें याद रखना पड़े कि किस से क्या झूठ बोला था.!!
“इस उलझी हुई दुनिया में समझदारी की बात करना गुनाह है.
_ लोग अपने-अपने बनाए झूठों में इतने रमे रहते हैं कि सच उन्हें चुभ जाता है.!”
सत्य का सामना करने के लिए विनम्रता चाहिए..

_ क्योंकि अहंकार के रहते सच दिखाई ही नहीं देता.!!

जब सामने वाला खुद को सही साबित करने में इतना खो जाए कि आपकी सच्चाई ही ना देख पाए..

_ तो उस वक्त चुप रहना ही समझदारी है.!!

झूठ का झुंड लिपटा हुआ था मुझसे, एक सच बोलते ही सब हवा हो गए.!

_ अगर आप सत्य के साथ हो तो आपको व्यक्ति का साथ छोड़ना पड़ेगा, चाहे वो जो हो..

_ अकेले हुए बिना सत्य का साथ निभता नहीं.. इतना अकेला कि स्वयं को भी छोड़ देना होता है.!!

सच को कह न पाना भी कहीं न कहीं झूठ ही बन जाता है..

_ फर्क सिर्फ़ इतना है कि हम झूठ बोलते नहीं, बल्कि सच को दबाने का चुनाव करते हैं..
_ लोग अपने हित के मुताबिक़ सच और झूठ की परिभाषाएँ गढ़ लेते हैं, ताकि उनके फैसले उन्हें ही सही लगें.!!
कभी- कभी सच्चाई की जीत नहीं होती, प्रमाण की जीत होती है, और.. _जरूरी नहीं कि सत्य के पास प्रमाण हो..
अगर चुनना पड़े तो हमेशा सच को चुनो क्योंकि..
_ झूठ पल भर का सुख देता है, और सच उम्रभर का सम्मान.!!
सच हमेशा सीधा, आसान और क्लियर होता है, वह कुछ छुपाने की कोशिश नहीं करता.!!
धूल की तरह उड़ती है अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
एक सत्य यह है की :- “अगर जिन्दगी इतनी अच्छी होती तो हम इस दुनिया में रोते- रोते हुए न आते…..!!

मगर एक मीठा सत्य यह भी है की :- “अगर यह जिन्दगी बुरी होती तो जाते-जाते लोगों को रुलाकर न जाते….!!

सच्चाई भले देर से चमके, पर नियति उसे जरूर स्वीकार करती है..

_ छल करने वाले कभी मंज़िल तक नहीं पहुँचते.!!

कुछ लोग सच्चाई देखना नहीं चाहते और सच नहीं बताना चाहते.

_ जो दिख रहा है ..वह कुछ और बता रहे हैं.!!

एक झूठ, सौ झूठ बुलवाएगा.!

_ आप सच बोलना, समझने वाला समझ जाएगा..!!

झूठ के फलों को ही हम चखते हैं,

_ सत्य के फलों को चखना तो दूर….हम इसके बागीचे के आसपास भी.. नही फटकना चाहते हैं..

एक सच्चा व्यक्ति अनजाने में गलतियाँ कर सकता है,
_ लेकिन उसका किसी को भी नुकसान पहुँचाने का ज़रा सा भी इरादा नहीं होता,!!
कभी दिल इतना मासूम था कि जादू भी सच्चा लगता था..

_ अब ज़माना ऐसा हो गया है कि सच्चाई पर भी भरोसा नहीं होता.!!

जो व्यक्ति सफलतापूर्वक अपने झूठ को सच साबित कर सकता है, उससे बड़ा असफल व्यक्ति दूसरा नहीं होता.. क्योंकि अंततः सच ही जीवन में काम आता है.

_ यदि आप सच बोलने की महत्ता नहीं समझते तो आपसे बड़ा दुर्भाग्यशाली अन्य कोई नहीं है.
दर्द तो तब होता है जब सच्चाई को लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं,
_ और झूठ को बिना सोचे-समझे अपना लेते हैं.!!
सत्य को स्वीकार करने का अल्पकालिक दर्द,

_ एक भरम को मानने के दीर्घकालिक दर्द से कहीं बेहतर है !

जो आदमी सच से भागता है, झूठ में जीता है.. _ उसका अंजाम एक ही होता है..- इज़्ज़त, भरोसा और भविष्य तीनों का नुकसान.!!
जो सच बोलता है, वह अकेला नहीं होता,

_ लेकिन सच्चाई के साथ खड़ा होने की हिम्मत रखना जरूरी है.

लोग सोचते हैं कि उनके बिना दुनिया रुक जाएगी.. पर सच्चाई ये है कि वक्त सबको जीना भी सिखा देता है और आगे बढ़ना भी.!!
अगर व्यक्ति सच बोलता है तो लोग उस पर और उसकी बातों पर भरोसा करते हैं.

_ जो सत्य बोलता है उसे सांसारिक परेशानियां कम आती हैं और उसकी ज़िंदगी में बेफिक्री हुआ करती है.

सच्चे लोग गलती कर सकते हैं, पर जानबूझकर किसी को तकलीफ नहीं देते.!!
“जीवन का लक्ष्य सुनिश्चित करना अस्तित्व को सत्य में बदलने का पहला कदम है”
सच्चाई हमेशा खामोश रहने वाले इंसान के अंदर ही मिलती है, झूठ बोलने वाले तो हमेशा शोर ही मचाते हैं.
आपका असली हितैषी वही है.. जो आपको सच्चाई बताने का साहस रखता है.!!
लोग झूठों से इतने प्रभावित हैं कि सच बोलने वाले की एक भी बात मानी नहीं जाती.!!
जब आपको पूरा सच पता ही ना हो तो.. अपनी जुबान पर काबू रखना सीख लीजिए.!!
सच को बोलने से जब चुप कराया जाता है तो,, फिर इंसान खामोश हो जाता है.!!
हम झूठ बोल कर गर्व करने वाले और सच बोलकर शर्मिंदा होने वाले लोग हैं..
“सच जब भी आएगा, _अपने साथ बड़ी सरलता की खुशबू लेकर आएगा..!!
और वो जो सच की तलाश में निकले ही नहीं, _” वो झूठ के शिकार हो गए..!!”
धूल की तरह उड़ती हैं अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
लोग दूसरों का सच जानना चाहते हैं, पर अपने बारे में, सच सुनना पसंद नहीं करते.
सच एक तलवार है, जो सबसे पहले उन संबंधों को काटती है.. जो छलावे से बंधे होते हैं.!!
हम सत्य नहीं ढूंढ़ते, हम अपनी सुविधा अनुसार की बातें ढूंढ़ते हैं.!!
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अफवाहों पर भरोसा करने वाले.. कभी सच्चाई तक नहीं पहुंचते.!!
“….ये दुनिया ऐसी ही है, सच को लोग पसंद करते हैं _लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते..”

_ फिर भी बाहर के झूठ के बीच भी अपने सत्य में स्थिर रहना, बिना असहज हुए.!!

“लोग आते-जाते रहेंगे, पर मेरा असली सफ़र तो भीतर है.

_ वहीं मुझे अपनी सच्चाई, अपना सहारा और अपनी शांति मिलती है.”
विश्वास सच बोलने पर बनता है, न कि लोगों को यह बताने पर कि _वे क्या सुनना चाहते हैं.
कुछ बातें कभी सुनी ही नहीं गयीं.. क्योंकि वो सत्यता से परिपूर्ण थी.!
आप जीवन के उन सत्यों से दूर भटक रहे हो, जहां से होकर ही आपको गुजरना होगा.!!
घबराना नहीं कभी, क्योंकि सत्य की गाडी में बैठोगे तो कष्ट-मुसीबत के स्टेशन तो आते ही रहेंगे.!!
सच्चाई को छुपाने के लिए झूठ को जोर-जोर से बोला जाता है, फिर भी सच कभी नहीं छुप सकता..!!
कुछ बातों पर विश्वास किया जाता है क्योंकि वे सत्य हैं, लेकिन कई बातों पर केवल इसलिए विश्वास किया जाता है _क्योंकि उन्हें बार-बार कहा गया है.!
ये दुनिया ऐसी ही है.. लोग सच को पसंद तो करते हैं, लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते.!!
सत्य प्रतीक्षा कर सकता है, _ क्योंकि वह लंबा जीवन जीता है !!
जब तक हम सत्य से भागते है, नहीं समझ पाते स्वयं को न वर्तमान को .!!
बात बात पर व्यंग्य करने वाले व्यंग्य ही करते रह जाते है, सत्य से दूर हो जाते हैं.
फरेब की महफ़िल थी और मैं सच बोल बैठा, नमक के शहर में ज़ख्म खोल बैठा.!!
जो लोग आपको मीठे झूठ के बजाय कड़वा सच बताते हैं तो उनका सम्मान करें.!!
हम इसीलिए सच नहीं देखते कि हमारा खुद के प्रति जो भ्रम है, वह टूट न जाए.!!
जब हम सच के साथ होते हैं तो.. मन, शरीर सब एक रहस्यमय ऊर्जा से भर जाता है.!!
जहाँ सच्चाई मर जाए, वहाँ मुस्कान मुखौटा और कसम दिखावा बन जाती है.

जब आप सच्चे बने रहते हो तब आप उन लोगों को खो देते हो, जो आपके लायक नहीं होते..!!

“सच को किसी सबूत की जरुरत नहीं होती, और झूठ ज्यादा देर छिप नहीं सकता”

_ शुद्ध सोने को जंग नहीं लगता, डरना उन्हें चाहिए जो पीतल होकर सोने का नाटक कर रहे हैं.!!

मीठे बोल हर बार सच्चाई का संकेत नहीं होते,
_ कई बार ज़हर भी शहद की तरह परोसा जाता है.!!
कमजोर मानसिकता वालों को सच दिखा दो तो वे बिलबिला जाते हैं.!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
सत्य से भाग सकते हैं हम, लेकिन उसे झुठला नहीं सकते.!!
बहुत से सत्य जानकर भी _ अनजान रहना चाहिए..!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
अगर मुझे सत्य के अलावा कुछ चाहिए _ तो मुझे केवल कुछ मिलेगा ” सत्य नहीं “
अपने जीवन में स्पष्टता लाने का सबसे सशक्त तरीका — सच्चाई को बोले देना होता है.

_ अच्छे और सच्चे लोगों को साथ रखना है तो सीधे स्पष्ट बोलिए,
_ जो लोग सच्चे होंगे, वे आपकी सच्चाई को समझेंगे और आपके साथ रहेंगे;
_ बाकी, जिन्हें आपकी सच्चाई चुभती है, उनका जाना ही सही होता है.
“अपने जीवन में स्पष्टता से बोलने की हिम्मत रखें, भले ही उससे आपके आस-पास लोग कम हो जाएँ ?”
अपना पक्ष सही रखो और अपने सत्य पर विश्वास बनाये रखो, यही आत्म निष्ठा है.

_ बाकी हर कोई अंतिम साँस तक साथ नहीं चल सकता, पुराना जाएगा, तभी नया आएगा.
_ अगर आप ग़लत नहीं हो तो कभी भी अफ़सोस मत करो.!!
सच का सबसे बड़ा दुश्मन झूठ नहीं, बल्कि वो इंसान होता है..

_ जो सच बोलने वाले को ही गलत साबित करने पर तुला हो.!!

हम सही रास्ते चलते हैं, फिर भी – जीवन में समस्याएं आती हैं, लोग विघ्न डालते हैं और कोई भी साथ नहीं देता ;
_ सिर्फ याद रखना – सत्य की नाव हिलती है, डोलती है, लेकिन कभी डूबती नहीं..
कभी-कभी आपको उनको सुनने की ज़रूरत नहीं होती है, कि वे अपने लिए क्या कहते हैं,
_क्योंकि उनके कार्य पहले ही सच बोल देते हैं.!!
जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं,

_दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
जब आप सच बोल कर अपने लिए स्टैंड लेने लगोगे,
_ तब सबसे पहले आपके अपनों में छुपे,,,पराये.. आप से दूरी बनाएँगे !!
ये वो दुनिया है जहाँ झूठ छुपाने के लिए,

_लोग सच्चाई को सूली पे चढ़ा देते हैं..!!
सच की आवाज़ में एक अलग ही खनक होती है, साहस होता है, शौर्य होता है ;

_ जबकि झूठ की आवाज़ में एक बनावटीपन, भय और दबाव !!
तकलीफ तब होती है जब हम किसी खास से सच के पक्ष में खड़ा होने की उम्मीद करते हैं,
_ मगर वे इतने स्वार्थी निकल जाते हैं कि मात्र सच भी नहीं बोल पाते, न ही परोक्ष रूप से समर्थन देते हैं.!!
उसका दुर्भाग्य कम है, जिसको कोई मिला ही नहीं ऐसा जो उसे राह दिखा सके और सच बता सके !

पर जिसको कोई मिले ऐसा _ जो राह दिखा सके और सच बता सके, और वो उसको घर के दरवाज़े पर ही रोक दे,_

_ उससे बड़ा अभागा कोई दूसरा नहीं होगा..

हर सच्चा इंसान अपने जीवन में एक न एक बार उस मोड़ पर जरूर आता है..

_ जहाँ उसे लगता है कि क्या वाकई सच्चे होने का कोई मोल है ?
_ लेकिन समय धीरे-धीरे उन्हें जवाब देता है — हाँ, है.. शायद तुरंत नहीं, पर अंत में सच ही जीतता है.
_ क्योंकि सच वक़्त मांगता है, लेकिन झूठ कीमत..!!
सत्य की राह…

अगर हम तथ्य पूर्ण और सच बातों से बचते हैं और इनका सामना नहीं करना चाहते हैं तो यकीं मानिए की कहीं न कहीं हम असत्य से प्रभावित हैं या असत्य का इस्तेमाल कर रहे हैं !!

अतः सत्य को पहचानिए इसे स्वीकार करिए, और सत्य की राह पर चलिए !

_ ये थोड़ी कष्टकर जरुर है, मगर लम्बी – स्थायी और अंततः सुख शान्ति प्रदान करने वाली है.

जो गलत होते हैं, छली एवम दगाबाज़ होते हैं ; वे हमेशा तेज़ आवाज़ में बात करते हैं ; _ ताकि सामने वाले को लगे की वह झूठ नहीं बोल रहा है.

_ लेकिन कोई किसी के सामने कितना भी फ़रेब कर ले, एक समय के बाद उजागर होना लाजमी है ; _ तेज़ आवाज़ें सत्य को नहीं ढँक सकती.!!

अक्सर जिस सच को हम पहले स्वीकार नहीं करना चाहते,

_ उस सच को स्वीकार करना हमे वक़्त ही सिखा देता है,
_ फिर एकदिन हम अचानक बचपना छोड़ कर बड़े हो जाते हैं,
_ पता नहीं सच को स्वीकार करने के इस खेल में आखिर तक नुकसान होता है या फायदा,
_ लेकिन हम अंदर ही अंदर बहुत कुछ मार कर जीना शुरु कर देते हैं…!
सच्चे इंसान को ठगने की कोशिश मत करना,
_ क्योंकि उसकी खामोशी में भी ऊपर वाले की दुआ और सच्चाई की ताक़त होती है.!!
आपके जीवन मे कौन कौन नकली है, यह पहचानना चाहते हो ?

_जो मिले उसी से सच की बात करो, जितने नकली होंगे वो भाग जाएंगे..

सत्य की सुंदरता केवल सच्चे लोग ही जानते हैं…_

_ और सच्चे होने से उनका आत्मविश्वास कभी नहीं गिरता ..!!

सत्य मौन इसलिए हो जाता है क्योंकि उसे पता है..

_ कुछ बातों का जवाब सिर्फ समय देगा..

गर हम सच के साथ हैं, तो हमारे पास असीमित शक्ति है ;

_सत्य से साथ छूटते ही, हमारी शक्ति भी हमसे कोसों दूर भाग जाती है..!

आज के दौर में विरले ही मिलेंगे,

_ ग़लत को ग़लत कहने का साहस रखने वाले, मीठी बातों से इतर सच कहने वाले.!!

“हर दिखने वाली चीज सत्य नहीं होती, यहां तक कि अपने कान से सुनी हुई चीज़ भी..

_ बहुत से सच ऐसे भी होते हैं, जिसे जीवन भर कोई जान नहीं पाता.!!”

हमनें अपने आपको कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों की जंजीरों से बाँधकर इतना गहरे डुबो दिया है कि अब स्थिति यह है कि..

_ यदि सत्य का एक छोटा सा छींटा भी मन पर पड़ता है तो भ्रम की सघन लहरें टूटने लगती हैं..
_ और तभी हमें एहसास होता है कि कोई तो है जो हमें वास्तविकता का आईना दिखा रहा है.
_ मगर क्या करें काल्पनिकता का यह संसार ही तो सबसे ज्यादा सुकून देता है…!
जो लोग हरदम बहुत अच्छे बने रहते है.. वे एक झूठी जिंदगी जीते हैं.

_ अगर सच के साथ जीना है तो आपको बहुतों के लिए बुरा बनना ही होगा..
_ या सज्जन बनो या सच्चा बनो, चुनाव आपका है.!!
दोपहर तक बिक गया इस शहर का हर एक झूठ
और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा रहा.!!
मनुष्य अनेक त्रुटियों के माध्यम से अप्राप्य सत्य तक पहुँचता है.

Man approaches the unattainable truth through a succession of errors.

यदि आप हर सांस के साथ प्रयास करते हैं तो ही आप सत्य को खोजने के पात्र हैं.

You deserve to find the truth only if you strive with every breath.

सत्य की प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा के माध्यम से संसार में जो कुछ भी आपको प्रिय था, उसे त्यागना ही त्याग है.

यह कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो बलपूर्वक प्राप्त की जाती है, बल्कि यह केवल सत्य और सत्य को चाहने का एक सहज परिणाम है.

Renunciation is giving up what you had held dear in the world through a burning aspiration for the realisation of the truth.

It is not a state that is achieved by force but it is a spontaneous result of wanting the truth and truth alone.

हमेशा अपने आप से सच्चे रहो, क्योंकि बहुत कम लोग हैं जो हमेशा आपके लिए सच्चे होंगे.

Always stay true to yourself, because there are very few people who will always be true to you.

कभी-कभी सबसे अच्छी चीज़ जो आप कर सकते हैं वह है अपना मुँह बंद रखना और अपनी आँखें खुली रखना. _ सत्य सदैव अंत में सामने आता है.

Sometimes the best thing you can do is keep your mouth shut and your eyes open. The truth always comes out in the end.

जब आपको किसी समस्या का कोई समाधान नहीं मिलता है, तो संभवतः यह कोई समस्या नहीं है _जिसे हल किया जाए,

_बल्कि यह एक सत्य है जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए.

When you find no solution to a problem, it’s probably not a problem to be solved, but a truth to be accepted.

Truth is like a surgery. It hurts but cures. Lie is like a pain killer. It gives instant relief but has side effects forever.

सत्य एक सर्जरी की तरह है. दर्द होता है लेकिन ठीक हो जाता है. _झूठ एक दर्दनिवारक की तरह है.

इससे तुरंत राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट हमेशा के लिए होते हैं.

हम अक्सर सोचते हैं कि जब किसी बात पर मतभेद हो, तो ज़रूर कोई न कोई गलत होगा..

_ लेकिन जरूरी नहीं कि मतभेद का मतलब गलती हो.
_ हो सकता है कि हम सभी एक ही सत्य को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हों.
_ सत्य किसी विशाल पर्वत की तरह होता है, हम सब उस पर्वत को अपनी-अपनी दिशा से निहारते हैं.
_ जिसे मैं देख रहा हूँ, वह मेरा अनुभव है, मेरी सच्चाई..
_ जिसे तुम देख रहे हो, वह तुम्हारा..
_ ये दोनों ही दृष्टिकोण अपने-अपने स्थान पर सही हो सकते हैं.
_ विचारों की विविधता कोई दुर्बलता नहीं, बल्कि समझदारी और सह-अस्तित्व की पहचान है.
_ जब हम किसी और की आँखों से देखना सीखते हैं, तभी हमारे भीतर सहानुभूति और समझ का जन्म होता है.
_ इसलिए अगर तुम्हारी और मेरी सोच अलग है, तो इसका ये अर्थ नहीं कि हम एक-दूसरे के विरुद्ध हैं.
_ हो सकता है हम दोनों ही उसी सत्य के करीब हों — बस अलग-अलग रास्तों से.!!
आदमी खुद के सच की तलाश से दूर रहना चाहता है.

_ वो दिखावे के ऐसे झांसे में फंस जाता है कि पूरी ज़िंदगी झूठ में गुजार देता है.
_ ऐसे में होता क्या है ?
_ आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार कर खुद गुजर जाता है.
_ हम जो हैं, वैसा हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो सोचते हैं, वैसा भी हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो नहीं हैं, उसे हम दुनिया के सामने रखना चाहते हैं.
_ क्या विडंबना है.
_ हम पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार देते हैं.
_ अपने सच को कभी स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं.
_ हर किसी को अपने हिस्से का सच समझना चाहिए.
_ हर किसी को अपने सच को स्वीकार करना चाहिए और हर किसी को ज़िंदगी के सच को जीना आना चाहिए.
_ मुझे इस पर आपत्ति नहीं कि आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ को जीता है.
_ मुझे आपत्ति इस बात पर है कि वो इस झूठ के चक्कर में अपनी ज़िंदगी जी नहीं पाता.
_ ज़िंदगी सत्य को जीने का नाम है.. असत्य को ढोने का नहीं.
_ हैरानी- मैं बहुत बार हैरान होता हूं, आदमी किस कदर खुद को उलझा कर सारी उम्र झूठ की बंद तिजोरी में जीता रह जाता है.
_ आइए, आज से कोशिश करें, सत्य को जीने का साहस दिखला पाने का.
_ झूठ से सत्य कहीं अधिक खूबसूरत होगा..!!
– Sanjay Sinha
सच कड़वा होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़वा वो इंसान होता है, जो सच सुनकर अपने अंदर झांकने की बजाय अपनी आवाज ऊंची कर लेता है.

_ ऐसे लोग असल में कमजोर होते हैं, जिनके पास ना तर्क होता है, ना क्षमता, बस शोर होता है.
_ अपनी औकात से ज्यादा बोलना इनके लिए एक आदत नहीं, एक ढाल होती है, जिससे ये अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश करते हैं.
_ जो इंसान कुछ कर नहीं सकता, वो अक्सर चिल्लाता है.
_ उसकी आवाज जितनी ऊंची होती है, उसका अंदर उतना ही खाली होता है.
_ वो सामने वाले को गुस्सा दिलाकर ये साबित करना चाहता है कि वो भी किसी से कम नहीं, जबकि हकीकत ये होती है कि उसे खुद पर ही भरोसा नहीं होता.
_ ऐसे लोग बहस नहीं करते, बस माहौल खराब करते हैं.
_ इनकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि ये अपनी असफलता को दूसरों पर थोपते हैं.
_ खुद कुछ हासिल नहीं कर पाए, तो दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करते हैं.
_ लेकिन सच ये है कि इज्जत चिल्लाने से नहीं, काम करने से मिलती है.
_ और जो ये समझ नहीं पाता, वो जिंदगी भर सिर्फ बोलता ही रह जाता है.
_ ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे सही तरीका उनकी तरह बनना नहीं, बल्कि उन्हें उनकी हकीकत दिखाना है.
_ शांत रहकर, अपने काम से, अपनी सफलता से.
_ क्योंकि जब एक शोर करने वाला इंसान एक मजबूत और शांत इंसान के सामने खड़ा होता है, तो उसकी असली औकात खुद ही सामने आ जाती है.
_ जो सिर्फ बोलता है, वो कभी कर नहीं पाता और जो कर दिखाता है, उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती.
_ यही फर्क है असली और नकली में.
– लेखक की दुनिया

सुविचार – बचपन वाला वो ‘#रविवार’ अब नही आता..- 090

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90 का #दूरदर्शन और हम :”

1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना
2.”#रंगोली“में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना
3.”#जंगल-बुक”देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना
4.”#चंद्रकांता“की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को कोसना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना
9.”#मूक#बधिर“समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नहीं
आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नहीं
आता…।।।
वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता…।।।
#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता…।।।
वो ‘#मोगली‘ वो ‘#अंकल Scrooz’,
#ये जो है जिंदगी’ ‘#सुरभि‘ ‘#रंगोली
और ‘#चित्रहार‘ अब नहीं आता…।।।
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
‘रविवार’ अब नहीं आता…।।।
वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना !
अब हर वार ‘सोमवार’ है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है।
दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो ‘रविवार’ अब नहीं
आता…।।।
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नही
आता…।।।

सुविचार – morning power – सुबह, सवेरा, भोर की ताकत – 089

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” सुबह की ताकत “

_ दिन की सबसे खूबसूरत शक्ल सुबह होती है. सुबहों का मैं हमेशा से दीदार करता रहा हूँ.
_ अब तक जहां- जहां रहा हूँ, वहां की सुबह बहुत अलग- अलग दर्शन देती रही है.
_कुछ ना कुछ नया हर जगह की सुबह से सीखने को मिलता है.
_हर सुबह को जीवन की नयी शुरुआत मान सकते हैं.
_कल से क्या मतलब. सुबह आपको आज का एहसास कराएगी.
_ अभी आज इसी समय में रहना सुबह होना है.
_ कल के काल में घटी नकारात्मकता से उबारना सुबह होना है.
_हर दिन एक नये जीवन का एहसास करना.
_ जैसे कि जो है वो आज से ही शुरू है, कल चाहे जैसा भी रहा हो, आज अच्छा ही होगा. इसका एहसास सुबह है.
_ऊर्जा का अनंत एकदिशीय प्रवाह जो सिर्फ आपको ताकतवर बनायेगा.
_ आप को कभी कितना भी कमजोर क्यों ना लगे, बस एक बार सुबह में डूब के देखिए
._प्रकृति की तेज बहती हवा में परिश्रम का स्नान सुबह करके देखिये,
_अपने नये होने का एहसास होगा आपको.
सुबह की ताज़गी महसूस करो.. क्योंकि ज़िन्दगी तो है.. हर लम्हा वासी हो ही रहा है.!
सुबह हो चुकी है, हवा में ताजगी है.. जैसे दिन मुझे भी ताज़ा रहने को कह रहा हो.!
अगली सुबह क्या होने वाला है और क्या नहीं _ यह सोने वाला भी जानता है क्या ?
_ शायद नहीं..!!
हर अंधेरा एक सवेरा लेकर आता है.. बस उस सवेरे तक ठहरने का साहस चाहिए.
**सुबह पार्क में बैठा सोच रहा हूँ —

कहाँ चूक गया मैं ?
_ ज़िंदगी ने जो दिया, उससे ज़्यादा शायद उम्मीदें थीं.
_ मेहनत और नतीजे के बीच एक ऐसी खाई है, जहाँ सपने गिरकर टूट जाते हैं.
_ अंत में —
_ ना जीत सुकून देती है, ना हार कोई मायने रखती है…
_ बस अधूरी ख्वाहिशें ही थका देती हैं.!!
**आज सुबह ठण्ड है, चाय पीते हुए सोच रहा हूँ..

_ एक कप चाय, और इस भीड़-भरे शहर से विदाई…
_ कैसे सब कुछ धीरे-धीरे टूट जाता है, बिना शोर किए, बिना बताये.
_ यह सिर्फ देह या दूरी की विदाई नहीं है,
बल्कि हर उस रिश्ते, हर जिम्मेदारी से भी विदाई है.
_ जो कभी आत्मा के ताने-बाने में गुँथी थी.
_ अब यह शहर बस एक स्मृति है.. – और स्मृतियाँ, भले चुभती रहें,
वे हैं.. – जिन्हें कोई समय, कोई कारण, कोई दूरी मिटा नहीं सकती.!!
आज सुबह कुछ नहीं किया, थोड़ा सा अपना सामान साफ किया, खाया पिया, आराम किया और कुछ देर एक किताब पढ़ी,

_ और सबसे बढ़िया.. कोई मैसेज- मेल नहीं देखी, ना जवाब दिया किसी का, सिस्टम को हाथ भी नहीं लगाया,
_ बस खुद में ही हूँ, दिमाग के मैन गेट पर ताला लगा लिया है ताकि कोई सरदर्दी ना हो, ना मिलना – किसी से ना बात करना, ना फोन ना कुछ, ना ज्ञान – ना विज्ञान
_ अभी शाम और रात बाकी है, यही जीवन ठीक है अब रोज इसे ही अपनाना होगा,
_ जिसे बात करना हो या कुछ काम हो टेक्स्ट कर दें, मन होगा तो जवाब दूंगा.. नहीं तो अपनी धुन में रहूंगा,
_ धीरे – धीरे मोबाइल और सब बंद, यही श्रेष्ठ है..
_ कभी – कभी ऐसा दिन भी होना चाहिए.!!
मेरी ज़िन्दगी का ..मेरा निजी पसंदीदा हिस्सा इसकी “सुबह” है.

_ “सुबह” के समय भी आपको बहुत सारे लोग दिखेंगे ..लेकिन सुबह के लोगों में एक अनोखी शांति का माहौल होता है.
_ न मोटर का शोर और न तेज़ आवाज़.
– हर ‘सुबह’ प्रकृति के उपहारों की याद दिलाती है, चाहे आप इसे कोई भी नाम दें’
_ हर सुबह यह सोचकर दुख होता है कि ..अगर एक दिन प्रकृति अपने प्राकृतिक तरीकों से काम करना बंद कर दे, ..तो हमारा जीवन कुछ ही क्षणों में लुप्त हो जाएगा.
_सुबह की रोशनी और हवा इतनी जीवंत और जीवन शक्ति से भरी होती है कि यह हजारों शानदार भोजन के बराबर होती है.
[The morning light and air is so alive and full of vitality that it equals the thousand splendid meals.]
_ जब भी आपको शांति की आवश्यकता होगी तो यह आपकी थेरेपी होगी.
[It will be your therapy whenever you need a calm.]
“सुबह और शांति”

___ ‘शांति ऐसी चीज़ है’ जिसे मैं खोना नहीं चाहता,
_ जो शांति मुझे ‘सुबह’ का साथ पाकर मिली..
_ सुबह की रोशनी और हवा जीवंत और जीवन शक्ति से भरपूर होती है.
_ ‘शांति’ जिसे मैं वर्षों से गलत लोगों से दूर रह कर..
_ और सही लोगों का साथ लेकर हासिल कर पाया हूं.
_ मैं अपनी पसंद को खोना नहीं चाहता,
_ मैंने लंबा समय लगा कर इसे हासिल किया है.
_ यही कारण है कि मुझे मेरी पसंद पर.. विश्वास इतना दृढ़ है.
— मैं अब अपनी शांति को खोना नहीं चाहता,
_ क्योंकि इसने मुझे एक उद्देश्य और जिम्मेदारी की भावना के साथ..
_ फिर से जीवन जीने की दिशा दी है.
_ ऐसा नहीं है कि मैं उसके बिना अपना जीवन नहीं जी रहा होता, लेकिन यह दिशाहीन होता,
_ मैं बस उन चीज़ों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता, जो अनावश्यक है.
_ मैं औरों की भांति अपना जीवन खोना नहीं चाहता, जिन्हें सही भी गलत लगता है.!!
– मैं कुछ न कुछ लिखता- पढ़ता रहता हूँ, किसी का ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं..
_ क्योंकि इससे मैं खुश महसूस करता हूँ..
_ बल्कि यह बताने के लिए कि.. मैं वह काम कर रहा हूं,
_ जो किसी ने मेरे लिए नहीं किया.!!
_ मैं अपने लिखने- पढ़ने की भावना को खोना नहीं चाहता;
_ यह एक ऐसी चीज है.. जिस पर मैं हमेशा विश्वास करता हूं..!!
_ शायद इसलिए कि.. मुझे मेरा जीवन इसी में मिलता है.!!
_ मैं अपनी मौलिकता [ originality] के साथ जीना चाहता हूँ..
_ और इसके अलावा, मैं खुद को खोना नहीं चाहता..
_ क्योंकि केवल.. मैं ही खुद को संभाल सकता हूं,
_ और मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता, कम से कम अब और नहीं..!!
सुबह-सुबह यूँ मन करता कि वक्त यहीं रुक जाए.

_इस सुबह की दोपहर कभी न हो.
_शामें जहां थकान, उलझनों, नींद, ज्यादा खा लेने का सबब है,
_ वहीं सुबहें… ताजगी, उमंग, नए विचार, भूख का प्रतिबिंब है.
_ पसंद है शाम, पर सुबह की चाह हमेशा रही..
_उम्मीद की एक छोटी सी किरण शाम रात के स्याह अंधेरे को छांट देती है.
_ सुबह सकारात्मक है… यह जीवन जीने के लिए बनी है.
आज झील किनारे टहलते हुए आसमान में पतंगें, हवाईजहाज, चील दिखाई दे रहीं थी,

_ ठण्ड के साथ खिली हुई धूप है, जिसे बस निहारते रहने को मन करता है, वही आंखों का सूकून है.
_ पहाड़, नदियों, झरनों से बातें करने की इच्छा हो रही थी,
_ लग रहा था मुझे भी कोई यूँ उड़ा कर उन तक पहुंचा दे !
_ यक़ीन मानिए.. मैं वह बिलकुल वह नहीं हूँ.. जिसे आप जानते हैं.!!
सुबह के 6:00 बजे हैं.

_ जो मुझे दिख रहा है, मुझे महसूस हो रहा है, बताऊं..
_ बस लिखूंगा… मुझे खुद नहीं मालूम कि क्यों और क्या लिखूंगा..
_ मौसम में हरा और सलेटी रंग का ..कॉम्बिनेशन..
_ यह जीवन के कई रंगों को जन्म देता है.
_ यह उत्साह को जन्म देता है,
_ यह मन की उमंग को जन्म देता है,
_ यह प्रसन्नता, वैभव, खुशहाली को जन्म देता है.
_ यह सिंबल है आने वाले दिनों की संपन्नता का..!!
_ अभी बालकनी में हूँ, सामने कुछ पछी नजर आ रहे हैं.
_ उछल कर कभी इस डाल पर तो कभी उस डाल पर चले जाते हैं..
_ और ऊपर आकाश में बादल इधर से उधर आ- जा रहे हैं..
– शीतल, मंद हवा चल रही है.. घनघोर घटा छायी है,
_इस छटा का आनंद वही ले सकता है, जो जल्दी उठता हो,
_जिसमें प्रकृति को ग्रहण करने की क्षमता हो.
__ अभी अभी कोई पछी की आवाज आई.
_ कोई बनावटी आवाज सुनाई नहीं दे रही.
_ सिर्फ कुछ पंछियों की आवाज है.
_ किसी ट्रैफिक या रसोई से बर्तन खड़कने की आवाज नहीं.
_ कानों में एक सीटी सी बज रही है, इतनी शांति की आदत नहीं इन कानों को..
_ मै भाग्यशाली हूं ..जो अक्सर ऐसी सुबह ..किसी ऐसी जगह होता हूं..!!
सुबह होने ही वाली है,

_ पेड़ों से चिड़ियों के कलरव की ध्वनि मेरे कानों को गुदगुदा रही है,
_ मेरे चारों और शांति है और मैं अकेला बैठा विचारमग्न हूँ,
_ कभी-कभार अव्यवस्थित मन घबरा उठता है,
_ ऐसे में मेरी डायरी के कोई पन्ने को पढ़ कर मुझे शांति की आश्वस्ति होती है,
_ विचलित मन को आराम सा मिलता है,
_ पढ़ते हुए ऐसा लग रहा है ..
_ जैसे मेरी आवाज़ को सुंदर शब्दों से बुन दिया गया हो..!!
**आज सुबह थोड़ी ठंड है, तिसपर आज बारिश भी मेहरबान है ..

_ बालकनी में लगे गमलों में से फूलों कि मिलीजुली गंध मन को मदहोश करने को काफ़ी है,
_ इनके पास जाते ही अतींद्रिय [extrasensory] अनुभव होता है …
_ दवाओं और ध्यान के असर से अब सुख और दुख दोनों में मन थिर रहने लगा है,
_ साथ में अतिव्यस्तता कुछ सोचने का अवसर ही नहीं देती,
_ सुख, दुःख, सदभाव, लाभ, आनंद, उल्लास जैसी अनुभूति होती है.
_ अब न शिकवा, न गिला, न इंतज़ार न उम्मीद ..किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं महसूस होती है..
_ अक्टूबर से फरवरी मेरा मौसम होता है,
_ तन के करीब, मन के करीब और जीवन के करीब ..
_ जब मैं अधिक जीवंत और अधिक खुश रहता हूं..
_ हर चीज़ के प्रति कृतज्ञ, हर चीज़ के प्रति प्रेम से भरा..
_ गर्मी मुझे नापसंद, इस मौसम में ..मैं जीवित नहीं रहता हूं, बस जीने का अभिनय करता हूं..
सुबह-सुबह खिले हुए फूल मुझे तेरी याद याद दिलाते हैं..

— सूर्य की चमक की पहली किरण के साथ तुम कितने सुंदर दिखते हो ;
_ मुझे आश्चर्य होता है कि ..मैंने कभी तुम्हारे सुबह के लुक की प्रशंसा कैसे नहीं की,
_ जबकि तुम बिल्कुल स्वाभाविक थे, सुंदर बनने की कोशिश नहीं कर रहे थे..
_ इस अनभिज्ञ दृष्टि ने मुझे झकझोर कर रख दिया कि.. भले ही मुझे पता नहीं हो कि अपना दिन कैसे बिताऊंगा,
_ फिर भी तू मुझे अपने साथ चाहता है.
_ ‘अपने दिन में एकमात्र चीज’ मैं इन पलों को बार-बार जीने में भाग्यशाली महसूस करता हूँ.
_ और मैं उन्हें फिर से जीने के लिए कुछ भी करूंगा, भले ही इसके लिए मुझे ऐसा व्यक्ति बनना पड़े..
_जो दुनिया की पहुंच से बाहर हो ..लेकिन हमेशा तेरे पास हो.
_ क्योंकि मुझे पता है ..तुम चाहोगे कि मैं तुमसे ऊपर रहूँ, जैसा कि तुमने हमेशा किया है.
— इसीलिए फूल मुझे तुम्हारी याद दिलाता है;
_ उन्हें कभी इसकी परवाह नहीं होती कि.. उनकी पत्तियाँ उनके ऊपर हैं,
_ क्योंकि अंदर से वे नहीं जानते थे कि.. यह उनके अपने भले के लिए है.
_ यह उन्हें सूरज की तेज़ किरणों से बचाने के लिए है;
यह सब उनके लिए ढाल बनने के बारे में है.
_ ठीक वैसे ही जैसे मैं तुम्हारे लिए था !!
आज सुबह 5:30 बजे पछियों की आवाज से मेरी आंख खुली..

_ मुझे लगा की ये मुझे बुला रहे हैं, बुला क्या चिढ़ा रहे हैं.
_ और उठकर देखा तो वे इस डाल से उस डाल डोल रहे थे,
_ यूँ लगा जैसे मुझसे कह रहे हों.. ठंड लग रही है क्या ? चाय बनवाऊं.? साथ में बिस्किट भी खा लेना..
_ यही तो है आप इंसानों का…
_ हमे देखो, न कफ़ न बलगम, न जोड़ों का दर्द न सांस फूलने की बीमारी, न पकाने का झमेला न स्वाद की चाहत…
— जाओ.. दिवाली आने वाली है,
_ फिर दिखावे करना..
_ हमारी न ईद न दिवाली… हमारे सिर्फ मौसम त्यौहार हैं,
_ जो असल में ईश्वर ने बनाए हैं.
_ जीवन आपसे कम है पर सुकून है.
_ हमने न सड़क बनाई न मशीनें, न जहाज.
_ शायद हमें जरूरत ही नहीं.
_ हमारे पास पासपोर्ट भी नहीं.
_ हमे किसी की इजाजत भी नहीं चाहिए.
—- वास्तव में उनकी की बातों में सच्चाई है.
_ इंसान ने विकास कर सब बर्बाद कर दिया.
_ परिंदों को न गठिया है न इन्हें स्ट्रोक आता है, और आता भी होगा तो इल्म नहीं.
_ हमने जान कर क्या उखाड़ लिया.
_ लालच बढ़ा, बीमारी बड़ी, समस्या बढ़ी, ईगो बढ़ी, प्रभुत्व बढ़ा… पर हमने अपनी स्वच्छंदता खो दी.
_ हमने अपना मूल खो दिया.
_ अब हम केवल जो सामान बनाया था, उसी को निभा रहे हैं.
_ पहले बीमारी बनाई, फिर उसका इलाज बनाया.
_ अब उस इलाज को अपना विकास बता रहे हैं..!!
आज सुबह उठा तो बाहर अँधेरा है ..पर बिल्कुल अंधेरा भी नहीं है.

_ लग रहा था हवा शीत और पारदर्शी है ..एकदम हल्की फूल जैसी..
_ बॉलकनी में खड़ा हूँ तो ठंडी हवा देह को छूती है और ऐसी मीठी सी सिहरन होती है..
_ जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता..
_ बिना चिंता, बिना किसी तनाव के बॉलकनी से ठंड को महसूस करते हुए आसमान में धुंधले से दिखते तारों को देखते हुए सोचता हूं कि ..आख़िर सुख क्या है !!
_ इस मीठी, शीतल, निर्भार हवा में चुपचाप आकाश ताकना …क्या सुख नहीं है !
_ ..याकि अलग अलग फूलों की गंध को पहचानने की कोशिश करना सुख नहीं है !!
_ गंध की लिपि को आँखें बंद करके ही पढ़ा जा सकता है,
_ क्योंकि खुली आँखें तो रंग की लिपि में उलझ जाती हैं..
_ आस-पास लगे हजारों पेड़ों की गंध, उसके फूल पत्तों की गंध..
_ सारी गंध एकसाथ गड्ड मड़्ड होकर ..मन को सुख में डुबा देती हैं…,
— मन खुश है, संतुष्ट है, निहाल है,,,
_ क्योंकि यह उसके मन को भाने वाला मौसम है..
_ यह सर्दी का मौसम है…
ये सुबह होते ही नींद का खुल जाना,

_ कई ख्याल मंडराने लगे हैं दिल में,
_ वो ख्याल जो मुझे हर रात सपनों में जगाते रहते हैं…
_ ये घड़ी की टिक-टिक…जो सिर्फ रात को ही सुनाई देती है..
_ ये अँधेरा मुझे वक़्त का एहसास कराता है,
_ और मेरे और आपके बीच की दूरियां..
_ जहाँ मुझे सब कुछ सामान्य दिखता है,
_ जैसे सब आसपास ही घटित हो रहा है,
_ और वो बाहर खिड़की, जहां मेरी नजर अभी अभी गई है,
_ वहां से बहती हुई हवा ..कुछ समझा रही है मुझे..
_ कि किसी को जीवित रखना ..सिर्फ मेरा काम नहीं…
_ तुम्हारा भी योगदान होना चाहिए…
सुबह का जादू हकीक़त है, छलावा नहीं है..

_ ये खूबसूरत और मनमोहक है..
_ मैंने देखा है और महसूस किया है..
_ कि वाक़ई सुबह बेहद हसीन होती है,
_ मैंने महसूस किया है सुबह का स्वाद..
_ सब से आला और निराला होता है,
_ सुबह की हलचल एक अलग दुनियां का एहसास कराता है,
_ मैंने देखा है कि सुबह अपनी जेब में ज्यादा ही ताज़गी रखता है..
_ ये जो प्रकृति है ..ये हर पल जादू कर रही है,
_ ये हर पल अपनी खूबसूरती को और निखार रही है,
_ आपको हर पल बदलते हुए नजारे मिलते हैं,
_ हर जगह अपने आप में खूबसूरत है.. ये जादू है,
_ मैं हर वक्त इस जादुई दुनियां से घिरा रहना चाहता हूं,
_ इसमें जीना चाहता हूं.!!
” सुबह का जादू”

_ अब सुबह हो गई है, मगर यह सुबह धुंध लिपटी हुई है,
_ उजाला फैला तो सही, मगर उसकी ठंडक में सुकून है,
_ हवा कितनी सुंदर, कितनी शीतल है एकदम पारदर्शी और निर्भार..
_ दुआर पर सूखे पत्तों की कालीन बिछी है,
_ हवा के एक झोंके ने.. उन्हें उस डाल से बिलगा दिया.. जहां उनका जन्म हुआ था..
_ और चिड़ियों का इतना बोलना, लगता है ये आपस में बातें करती होंगी..
_ घासों की नोक पर ओस की बूंदे ऐसी ठिठकी हैं.. जैसे आंखों की कोर में ठहरे आँसू.. चमकती हुई, झिलमिलाती हुई..
_ अभी बस सूरज की किरणें निकलेंगी और इन बूंदों को अपने आंचल से पोंछ देंगी..
आज फिर सुबह हो गई..

_ हर रात यही सोचते बीत जाती है कि आखिर ‘मैं यहां क्यों हूं’
_ ज़िंदगी जैसे एक पुरानी, घिसी हुई फिल्म बन गई है,
_ जिसे देखने का मन नहीं करता, लेकिन रुक भी नहीं सकता !!
_ सुबह हो चुकी है..
_ बाहर लोग अपने-अपने काम में लग गए हैं,
_ लेकिन मैं अंदर ही अंदर कहीं अटका हुआ हूँ.
_ शायद खुद से, या शायद उस सवाल से जो हर सुबह मुझे घूरता है..
_ “आगे क्या ?”
सुबह हो गई है,

_ मैं एकांत में शांत बैठा हूँ और हर तरफ बस सन्नाटा है,
_ तभी दिमाग में कोई अनचाहा विचार आ गया, मैंने उसे पूरी शक्ति से भगाना चाहा और वो दोगुनी ताकत से मुझ पर हावी होता है,
_ मैं जब ऐसी बुरी स्मृति को भुलाना चाहता हूँ, और वो सब सामने ऐसे नाचता है..
_ जैसे आज की ही बात हो..
_ अंदर भावनाओं का भूचाल आ जाता है.. हृदय कचोटने लगता है..
_ उस बुरी स्मृति से निकलने की कई सालो की कोशिश क्षण भर में व्यर्थ हो जाती है, खैर !!
मैंने आज सुबह को महसूस किया, आरामदायक लेकिन ठंडा..!!

_ मैं कामना करता हूं कि यह हमेशा ऐसा ही बना रहे, क्योंकि मुझे इसी की जरूरत है.
_ मुझे एक शांतिपूर्ण जगह की जरूरत है,
_ जहां मैं अपना दिमाग बंद कर सकूं और जब चाहूं सो सकूं..
_ मैं जागकर.. लोगों में शांति की तलाश नहीं करना चाहता.
_ बहुत हो गया; मैंने यह किया है; यह मेरे लिए अच्छा नहीं है.
_ तो चलिए.. बस मैं तुम्हारी इतनी प्रशंसा करूंगा, जितनी पहले कभी किसी ने नहीं की.
_ लोग कहेंगे या तो मैं पागल हूँ या सुबह से प्यार करता है.
_ कोई भी सच हो सकता है.
_ आइए एक-दूसरे का ख्याल रखने और एक-दूसरे की शांति बनने के बारे में एक समझौता करें..!!
सुबह की पहली किरण जब आंखों में पड़ती है, तो सबसे पहले मैं सांस लेता हूं…फिर मुस्कुराता हूं.!

_ कारण ? बस इतना कि मैं हूं… मैं ज़िंदा हूं.
_ रात और सुबह के बीच एक पतली-सी डोर होती है, जो सबको पार नहीं करने देती.
_और मैं… खुली आंखों से यह नया दिन देख पा रहा हूँ.
_ क्या यह किसी चमत्कार से कम है ? “नहीं”
_ यह तो रोज़ मिलने वाला एक अनमोल तोहफ़ा है, जिसे हम अक्सर खोलना ही भूल जाते हैं
_ मैं चारों तरफ देखता हूं – कोई अपना दिख जाए तो उसकी तरफ मुस्कुराहट भेज देता हूं.
_ क्योंकि पता है, एक दिन आएगा जब या तो मैं नहीं रहूंगा, या वो नहीं रहेंगे.
_ उस दिन की उदासी से बचने का एक ही तरीका है, आज के साथ को पूरे दिल से जीना.
_ बाहर पेड़ों पर ओस टपक रही होती है,पत्तों पर हल्की धूप खेल रही होती है.
_ ये भी कल रात सोए थे, और आज मेरे साथ उठे हैं.
_ जीवन हर सुबह हमें चुपचाप यह कहता है, तुम्हारे पास एक और दिन है.
_ प्यार करने का, गले लगाने का, धन्यवाद कहने का, और हां… मुस्कुराने का..
_ कुछ नया सीखने का, अपने काम को कल से थोड़ा और बेहतर करने का,
_ और अपने सपनों को हकीकत के एक कदम और करीब लाने का।
_ क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा,
_ जब सुबह तो होगी… लेकिन हम नहीं होंगे.
_ इसलिए आज का दिन पूरे दिल से जी लो, जैसे यही तुम्हारी आख़िरी सुबह हो.!!
“सुबह खूबसूरत है” उठो, खिलो, चहचहाओ, जीवन एक भोर है.!

_ आसमान से खुशनुमा हवा आ रही है और इसे महसूस करते हुए..
_ मुझे फिर से बचकाना होने की याद आती है.
_ जब तुम नहीं होते तो.. मैं नहीं हंसता.
_ ऐसा नहीं है कि मेरे आसपास लोग नहीं हैं; वे हैं.
_ लेकिन मुझे उनके साथ अच्छा नहीं लगता;
_ शायद मैं उनके साथ जीवित महसूस नहीं करता.
_ मुझे तुम्हारे आसपास रहने की याद आती है,
_ जहां हम बिना घड़ी या विषय पर ध्यान दिए.. घंटों तक लगातार बात करते हैं.
_ हमारी बातें अनावश्यक हैं, लेकिन वे जीवन से भरपूर हैं.
_ तुम्हारी मौजूदगी में “मैं अकेले अपने साथ का आनंद भी उठाता हूँ,”
_ इस एहसास के साथ कि तुम यहां हो.!!
_ अब, मैं सब कुछ सिर्फ इसलिए करता हूं.. क्योंकि यह आवश्यक है;
_ कुछ भी करने में कोई मज़ा नहीं है. हर चीज़ समय की बर्बादी लगती है.
“मुझे नहीं पता कि यह कैसे काम करता है,
_ लेकिन मुझे लगता है कि मैं खुद से ज्यादा ‘सुबह’ और ‘आकाश’ से जुड़ा हुआ हूं.”
मैं आज सुबह ऐसी जगह बैठा हूं:

_ जो हर सुबह और शाम पक्षियों के गायन को सुनने के लिए बहुत शांत है.
_ एक ऐसी जगह जो मौसमों से भरी है, और मैं उनमें से हर एक के साथ खुद रह सकता हूं.
_ मैं बहुत ठंडी हवा के साथ अपनी सर्दियों का आनंद ले सकता हूं और फिर भी हर दोपहर सूरज देख सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं कभी भी, हर समय आकाश देख सकता हूं, और यह हमेशा की तरह सुंदर है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे रोजाना चंद्रमा देखने को मिलता है,
_ यह एक ऐसी जगह है, जहां मुझे ख़ुशी ढूंढने के लिए भागना नहीं पड़ता;
_ वरना हर जगह हर कोई आता है और पूछता है कि.. मैं जीवन में क्या कर रहा हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं अपनी सुबह का उतना ही आनंद ले सकता हूं,
_ जितना मैं अपने दिन या रात का आनंद ले सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे हर शाम खूबसूरत सूर्यास्त देखने को मिलता है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे भागदौड़ या कुछ न कुछ करना नहीं पड़ता.
_ बस बैठ सकता हूं, कुछ नहीं कर सकता और जीना चुन सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जो मेरे द्वारा देखी गई दुनिया से भी अधिक जीवंत है.!!
अभी सुबह होने वाली है, हुई नहीं है..!!

_ बालकनी के बाहर बल्ब की रोशनी में आस-पास का धुंधला दिख रहा है..
_ लेकिन मन में उजाला है.!
_ इस समय घरों में सब गहरी नींद सो रहे हैं, रब उनकी सुबह सुंदर करे.
_ अभी थोड़ी देर बाद सूरज दिखेगा.. और आंखें चमक जाएंगी,
_ अभी मन शांत है, बालकनी से आने वाली रोशनी और अंधेरे का खेल देख रहा हूँ.
_ पीठ हजार करवट सोते जागते थक चुकी है..
_ अब आँखों को ठंडक चाहिए.!!
_ आसमान से ओस झर रही है, हवा में ठंडक है..
_ आस-पास के दीखते पेड़ आश्वस्त कर रहे हैं.
_ अब मैं हूँ जमीन पर और मन आसमान पर..!!
सुबह-सुबह धरती पर सूर्य की किरणें बिखर रही हैं,

_ प्यासे पेड़-पौधों पर ओस की बूंदें टपक रही हैं,
_ पत्तियों पर ओस थिरक रही है..
_ चहुं ओर हरियाली महक रही है..
_ बहती हवा में रुनझुन सुनाई दे रही है..
_ डगमगाते मन में उम्मीद भर रही है..
_ याद दिला रही है ‘जीओ मस्ताना जीवन’
_ जी लो अपने आज को, अपने हासिल को..
_ अपना जीवन समझ, जी भरकर जी लो..
_ क्योंकि यह पल, हर पल न रहेगा..!!
आज सुबह ठंड बहुत है..

_ मैं बालकनी में गया तो लगता है.. हवा जमा देगी मुझे,
_ लेकिन मेरे अन्दर का अलाव अचानक से दहक उठता है..
_ और मन करता है.. कोई जीवन भर की चुप्पी मुझमें उतर जाए..
_ बस किसी से कुछ भी न कहूं, कोई शिकायत न करूं, न किसी बात का रोना मुझे छूकर गुजरे..
_ तो मैं इस भाव से चुप बैठा रहूँ, कोरा और भावना शून्य हो जाऊं.!
_ अपनी नसों में उबलते हुए खून को, मस्तिष्क में दौड़ते हुए सवालों को और पैर में पड़ी जंजीरों को महसूस कर ही न पाऊँ.!!
_ अपने ज्ञान का पूरा भंडार खाली कर दूं,
_ बन जाऊं एक प्राण रहित-भाव रहित पत्थर का टुकड़ा..!!
आज सुबह हल्की-हल्की बारिश हो रही है,

_ सामने बादलों का झुंड दिख रहा है तो धुंधलका और बढ़ गया, कुछ साफ नहीं दिख रहा..
_ बारिश की बूंदों से मुझे परहेज नहीं, गालों पर बूंद के छींटे का अहसास हो रहा है..
_ बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम में संगीत का एहसास हो रहा है..
_ मुझे भीगना पसंद है, ठंडे हाथों से चेहरे को पोंछने में अच्छा लगता है..
_ गीले पैरों से सामने न दिखते पहाड़ पर जाने को जी करता है..
_सर्द हवा, वो मसाला चाय… मेरे पास कुछ और वक्त होता तो यहीं रुक जाता..!!
“सुबह के गतिशील रंगों का संयोजन”

[“Combination of dynamic colors of the morning”]
… मानो रब आसमान के कैनवास पर हर रोज़ नया चित्र बनाता है.. हमको विस्मित करने के लिए !;
_ आसपास का सन्नाटा ऐसा लगता.. मानो सब कुछ थम गया हो और सिर्फ फुसफुसाहट सुनाई दे रही है..
_ मैं इतना हल्का महसूस कर रहा हूँ कि.. फुसफुसाहट धीमे स्वर में सुनाई दे रही है.. और बहती हवा में जैसे एक मिठास हो..!
_ ऐसा लगता है.. जैसे धरती और आकाश ने दूरियां मिटाकर एक-दूसरे को समेट लिया हो..
_ जब हम अच्छा महसूस करते हैं, तो शब्द कम पड़ जाते हैं ; आंखें भाषा बन जाती हैं.!!
मैं जब सुबह – सुबह नींद से जागता हूँ तो.. जो पहली याद जेहन में उभरती है वो ‘सुबह’ ही होती है.

_ वक्त बदल गया, हालात बदल गए, इंसान बदल गए, पर सुबह अब भी नहीं बदली.
_ ‘सुबह’ अब भी पहले की ही तरह हर सुबह आती है.
_ मैं बालकॉनी के बाहर पेड़- पौधों पर फुदकती -चहचहाती चिड़ियों को निहारता रहता हूँ.. एक ख़ालीपन लिए.!!!
_ ‘सुबह’ मेरे पूरे जेहन में उतरकर खुशियाँ बिखेर देती है और एक मधुर एहसास से भर देती है..
_ ‘सुबह’ एक तुम्हीं तो हो.. जो हर हालात में हर जज्बात में और हर खयालात में साथ बनी रहती हो..!
_ मैं आगे बढ़ता रहा और कितना कुछ जिंदगी से गुजरता चला गया,
_ लेकिन तुम आज भी पूरी शिद्दत से मेरे साथ चल रही हो..
_ सुबह ने मेरी कितनी ही यादों को तह लगाकर मेरे अंदर समेट रखा है..
_ ना जाने कितनी मुलाकातें तुमने मुझमें दर्ज की हैं.
_ कैसे भूल सकता हूँ उन पलों को.. जब अपने एकांत से मैं थक जाता हूँ या परेशान हो जाता हूँ,
_ तब ‘सुबह’ मुस्कुराती हुई आती है और हौले से मेरे कानों में कहती है – पगले, परेशान क्यूँ होते हो ,मैं हूँ ना..!!!
_ “सुबह’ जिंदगी के अनगिनत पलों के ना जाने कितने एहसासों को मैंने तेरे संग जिया है.
_ कहने को तो बहुत कुछ है तुम्हारे बारे में.. लेकिन बस इतना कहूँगा सुःख हो या दुःख तुम हमेशा साथ रहना,
_ चुपके से सच्चे साथी की तरह एहसासों को समेटती रहती हो !!
बीते साल की उदासी आज नए साल की सुबह में उतर आई है,

_ मानों वह गुजरना ही नहीं चाह रहा हो.!
_ मन बीते साल की उदासी में खो कर ना जाने कहां भटक जाता है.
_ आज नए साल के आने पर लगता है कि..
_ जिन्दगी ने जो एकमुश्त एक साल दिया था, वह खत्म हो गया है।
_ बाहर कोहरा अपनी बाहें फैलाकर दिन के उजाले को ढ़क लेना चाहता है,
_ बाहर सबकुछ बदल रहा है, हवाएँ सर्द होती जा रही हैं और धूप नर्म..
_ मौसम की सर्द रातें लम्बी हो चली हैं..
_ ये लम्बी राते उस बुढ़ापे की तरह होती हैं, जो खत्म होने का नाम ही नहीं लेता..
_ दिन जवानी के दिनों की तरह सिमटता जा रहा है..
_ जिन्दगी मे उतार पर तो रिश्ते की गर्माहट भी कमजोर होने लगती है और भावनाएं जम कर ठहर सी जाती हैं.
_ प्रकृति बदल रही है, लेकिन मन ठहरा है.
_ ऐसा लगता है जैसे.. मुझे नया या पुराना जो भी साल हो.. इस से कोई लेना देना नहीं है.
_ जिसने जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर लिया हो..
_ बीतता साल प्रतीक है उतरान का, ढ़लान का, अवसान का..
_ जीवन के पड़ाव पर ठहर कर आगे बढ़ने का संकेत है..!!
—- कुछ भी नया नहीं लगता..!!!
_ और ना ही लगता है कि अरे ये क्या हुआ कैसे हुआ,
_ मन पीड़ाओं और तमाम सुखों की अनुभूतियों से ऊपर उठकर उपेक्षा के गर्त में इस कदर डूब चुका होता है कि..
…. ना ही यह चौंकता है ना ही आतंकित और ना ही अचंभित, बस जो भी है अच्छा है.!!
मुझे ढलता हुआ सूरज बहुत पसंद है,

_ आसमाँ में दूर तक फैली हुई लालिमा आँखों को सुकूँ से भर देती है,
– इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे शाम ने दिन भर की थकान से खामोशी की चादर ओढ़ ली हो
— ताकि.. फिर सुबह किसी सूरजमुखी के फूल जैसे खिल सके…!!
देर से उठकर सुबह को छोटा मत करो, या उसे अयोग्य कामों या बातों में बर्बाद मत करो; _ इसे जीवन की सर्वोत्कृष्टता के रूप में, कुछ हद तक पवित्र के रूप में देखें.

_शाम बुढ़ापे की तरह है: हम सुस्त, बातूनी, मूर्ख हैं. _ हर दिन एक छोटा सा जीवन है: हर जागता और उठता हुआ एक छोटा सा जन्म, हर ताज़ा सुबह एक छोटी सी जवानी, हर आराम और नींद के लिए जाता हुआ एक छोटी सी मौत.- Arthur Schopenhauer

Do not shorten the morning by getting up late, or waste it in unworthy occupations or in talk; look upon it as the quintessence of life, as to a certain extent sacred. Evening is like old age: we are languid, talkative, silly. Each day is a little life: every waking and rising a little birth, every fresh morning a little youth, every going to rest and sleep a little death. – Arthur Schopenhauer

पक्षियों की चहचहाहट और हवा की फुसफुसाहट के साथ जागना हमेशा सुखदायक होता है, जब आप जागते हैं तो आप कैसे जागते हैं ? क्या आप मौन में जागते हैं, या क्या आप प्रश्नों और करने वाली चीजों की एक सूची के साथ जागते हैं ?

जागने के बारे में मुझे जो सबसे खूबसूरत चीज पसंद है, वह है इससे निकलने वाली खामोशी ; सुबह में, मेरे पास कोई प्रश्न या कोई खोज नहीं है; इसलिए, मैं हमेशा इस क्षण में हूं.

सुबह हमेशा इस बात की याद दिलाती है कि मैं अपनी प्राकृतिक अवस्था में कैसा हूं ; _ अक्सर जब मुझे नहीं पता कि क्या करना है, तो मैं सुबह के क्षण में खुद के बारे में सोचता हूं, और उस शांति की स्थिति से, मुझे हमेशा एक प्रतिक्रिया मिलती है जो सांस लेने या हवा के रूप में स्वाभाविक होती है ;

सुबह हमेशा एक गहरी, अधिक वास्तविक स्वयं की भावना में प्रवेश करने का अवसर बनाती है ;  _ तो, इस तरह सुबह की शुरुआत हुई..

जिनको गहरी नींद नहीं आती वो समझ पाते हैं कि दुनिया में सुबह से अच्छा कुछ होता ही नहीं.!!
आप जिस तरह से अपने दिन की शुरुआत करते हैं, उससे आपके बाकी दिन पर बहुत फर्क पड़ता है.

_सुबह जल्दी उठने और सुबह अच्छा मूड रखने से आप पूरे दिन खुश महसूस करेंगे ;
_ भोर की शांति आपके दृष्टिकोण में अद्भुत आकर्षण का भाव ला सकती है.
_ भोर दिन का सबसे सुंदर और शांत समय होता है ; जैसे ही सुबह की हवा आपके चेहरे पर आती है, पक्षियों की गुनगुनाहट सुनने की शांति और दुनिया को रोशनी से भरते देखना आत्मा में एक अकथनीय आशा और शांति लाता है.
_ “सुबह की रोशनी दिन भर के काम के लिए आपकी भावना और उत्साह को नवीनीकृत कर देती है.”
_ “भोर एक नए और आशापूर्ण दिन को जन्म देते हुए चमकती है.”
_ “भोर सभी के लिए एक ताजगी लेकर आती है.”
रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो,
_ सवेरा एक वादा निभाता है.. फिर से लौट आने का.!!
चटख सुबहों के बाद मटमैली दोपहरें भी देखने की आदत डाल लेनी चाहिए दिल को.!!
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