सुविचार – सब्र – सबर – 088

हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है. उत्साह मनुष्य को कर्मों में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनाता है.
कभी किसी का दिल ना दुखाओ, क्योंकि अगर उसने सब्र कर के _

_ रब पर छोड़ दिया तो तुम्हारे लिए कहर बन जायेगा..

सब्र का घूंट दूसरों को पिलाना कितना आसान लगता है, _

_ लेकिन जब खुद को पीना पड़ता है तब कतरा कतरा जहर लगता है..

ज़िन्दगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है, _

_ मैंने हर शख्स को यहाँ, खुशियों का इंतज़ार करते देखा है !!

सब्र की एक बात बहुत अच्छी है, _

_ जब आ जाता है, __ तो किसी की तलब नही रहती..

सहने वाले को अगर सब्र आ जाए तो _

_ कहने वाले की औकात दो टके की रह जाती है.

जरूरी नही की किसी की बद्दुआएं ही आपको तबाह करे,

_ किसी का सब्र भी आपको बर्बाद कर सकता है,,

किसी के सब्र की अत्यधिक परीक्षा नहीं लेनी चाहिए,

_ कोई भी तिनका आखिरी तिनका हो सकता है.

सब्र और सहनशीलता कोई कमजोरियां नहीं होती हैं, _

_ ये तो अंदरूनी ताकत है जो केवल मजबूत लोगों में होती है.

हम इंसान बड़े अजीब हैं, कुछ ना मिले तो सब्र नहीं करते _

_ और अगर मिल जाये तो फ़िर उसकी कद्र नहीं करते.

अगर जिन्दगी में कुछ बुरा हो तो थोड़ा सब्र रखना, _

_ क्यूँकि रोने के बाद हँसने का मजा ही कुछ और होता है.

सबर कर बन्दे मुसीबत के दिन भी गुज़र जायेंगे…

_ हसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे..

सब कुछ मिला है हमको फिर भी सबर नहीं, _

_ बरसों की सोचते हैं पल की खबर नहीं..

जब सहने वाला सब्र करना सीख जाए,

_ तब कहने वाले की अहमियत खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है.!!

सब्र कर बन्दे ..मुसीबत के दिन गुजर जायेंगे !!

_ आज जो तुझे देख के हंसते हैं, वो कल तुझे देखते रह जायेंगे !!

गुस्सा अकेला आता हैं, मगर हमसे सारी अच्छाई ले जाता हैं !

_ सब्र भी अकेला आता हैं, मगर हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!

जो सब्र के साथ इंतजार करना जानते हैं, _

_ उनके पास हर चीज़ किसी ना किसी तरीके से पहुँच जाती है.

पलकों की हद से टूट कर मेरे दामन पे आ गिरा…

_ एक आँसू मेरे सब्र की तौहीन कर गया….

वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता !!!

सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता !!!

” जो तेरे पास है उसी में सबर कर, और उस की कदर कर, _

_ यहां तो आसमान के पास खुद की जमीन नहीं ”

सब्र की चादर ओढ़िए..

_बुरे वक्त के बाद ही अच्छे दिनों की रौशनी आती है.!!

सब्र की जड़ें चाहे जैसी भी हों, इसके फल सदैव मीठे होते हैं.

जो खोया है उससे भी बेहतरीन पायेंगे, _सब्र रख दिन तेरे भी आयेंगे.
जो लोग सब्र करते है… __ या तो वो जीत जाते हैं या सीख जाते हैं.
सब्र कोई कमज़ोरी नहीं होती, ये वो ताकत है, जो सब में नहीं होती !!
ज़िन्दगी में कुछ रास्ते सब्र के होते हैं और कुछ रास्ते सबक के..!!
सबर रखो, समय का न्याय सबसे सटीक होता है..
_ और उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं पड़ती.!!
सब्र रखो हर चीज़ आसान होने से पहले ” मुश्किल ” होती है.
सब्र के लिए इतना काफी है कि हम इस क्षण में जीवित हैं.
” सब्र करना ” दुनिया के सामने रोने से __ बेहतर है..
मिल जाए तो शुक्र करो, _ ना मिले तो सब्र करो.
वांछित के लिए बेसब्र न होने की कला और अवांछित को दूर करने की कला यदि आप सीख लें तो आप हमेशा खुश रहेंगे.!!
समझ न आया ऐ जिंदगी तेरा ये फलसफा, _ एक तरफ कहती है _ सबर का फल मीठा होता है

_ और दूसरी तरफ कहती है वक़्त किसी का इंतजार नहीं करता…

जिंदगी को धीरे धीरे करीब से जाना तो पता चला कि जिंदगी सब्र के सिवा कुछ नहीं..

_ किसी ने किरदार पर उंगली उठाई तो सब्र, कोई बिछड़ गया तो सब्र, कोई रूठ गया तो सब्र कुछ माँगा और वो ना मिला तो सब्र..!!
जब कोई सब कुछ देखते हुए भी चुप रहे___तो उसे बार-बार इतना परेशान न करें कि वह आपके लिए नासूर बन जाए !!

_क्योंकि समय के साथ सब्र टूट जाता है !!

सबर आने तक का खेल है सब..

_ना फिर किसी से मिलने की ख़ुशी रहती है और ना किसी से बिछड़ने का गम.!!

ये ज़िंदगी एक सफ़र है,

इस सफ़र में सबर रख के चल,

जो कहना है तुझको वो कह के ही उठ,

ना दिल में ज़रा भी कसर रख के चल,

खिंचा आए ”काबा” जहाँ सर झुके,

तू सज़दे’ में इतना असर रख के चल…….

सुविचार – मृत्यु – मौत – काल – 087

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शुक्र कीजे कि मौत है वरना ज़िन्दगी से हमें बचाता कौन – Shakir Dehlvi
मरने वाले के साथ मरा नहीं जाता,
_ पर अहाने-बहाने उसके लिए कोई रीत निभा कर उसके साथ जीने को महसूस किया जा सकता है.!!

– Manika Mohini

तबियत देने लगी है रोज इशारे, क्यों न सफ़र के लिए सामान समेटा जाए.!!
एक दिन कहानी बन कर रह जाएंगे हम सब, कोशिश करें कि कहानी अच्छी रहे.!!
मौत हमेशा द्वार पर खड़ी है.. जितनी देर बचे रहे.. उसी को हम जिंदगी कह कर काम चला लेते हैं.!!
मृत्यु बुढ़ापे तक सीमित नहीं, मृत्यु हर उम्र में मौजूद है.!!
एक दिन विशिष्ट से तुच्छ हो जाएंगे, मैं, आप, हम सब विलुप्त हो जाएंगे.!!

_ जो लोग चले जाते हैं — वो पलट कर कहाँ आते हैं ?

वो सब जा चुके हैं जिन्हें तुम जानते थे, जो तुम्हें जानते थे..

_ अब तुम्हें भी चलना चाहिए अब वक़्त बर्बाद मत करो और जब मुझे होश आएगा,

तब तक मैं भी किसी वक़्त में ख़त्म हो चुका रहूँगा…!
चाहे जितना उड़ लो.. बस दो दिन की ज़िन्दगी है दो दिन का मेला.!!
अपनी आंखों को आश्चर्य से भर लें, फिर दुनिया देखें,

_ऐसे जिएं जैसे कि “एक दिन, आप इस दुनिया को छोड़ देंगे”;
_ यह किसी भी सपने से ज्यादा शानदार है..!!
कुछ सवाल उम्रभर अनसुलझे ही रहते हैं ; और इंसान खाली हाथ पैदा होता है,
_ पर जाता हमेशा अपने अनकहे दर्द और रहस्यों की गठरी लेकर ही है.!!
हम पैदा होते हैं खाली हाथ और जाते भी वैसे ही हैं,

_ जो इस सत्य को जान लेता है, वह कभी घमंड नहीं करता.!!
हमें लगता है कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि वे मरने से डरते हैं,

_ लेकिन वास्तव में लोग जीने से अधिक डरते हैं.!!

कल की जिसे थी फ़िक्र वो आज चल बसा..!

_ इसलिए आज में जी लो यारों.. कल का किसी को क्या पता..!!

काल के आगे सभी लाचार हैं, ज़िन्दगी का एक कोना दर्द से भरा होता है..

_ फिर भी जीने की जिद में ज़िन्दगी मुस्कुराती ही रहती है.

कई लोग सोचते हैं कि वे आरामदायक जीवन जीने के लिए काम कर रहे हैं,

_ जबकि वास्तविकता में, वे आरामदायक मृत्यु पाने के लिए काम कर रहे हैं !!

कोई इंसान मर जाए तो उसकी कीमत बढ़ जाती है;

_ अगर वह जिंदा रह गया तो दुनिया उसे जिंदा रहने की सजा देती है..!!

अगर आपको पता चल गया ना कि लोग कितनी जल्दी मरने वालों को भूल जाते हैं,

_ तो आप लोगों को प्रभावित करने के लिए जीना बंद कर दोगे..!!

जब हमारा कोई करीबी मरता है तो हमें दुख होता है, लेकिन जब कोई पराया मरता है तो हमें उतना दुख नहीं होता.

_ यानी दर्द की वजह मौत नहीं, बल्कि संबंध होते हैं.!!

आजकल भावनाएँ भी अजीब हो गई हैं,
_ किसी इंसान की मौत की खबर अब मन को नहीं छूती, बस एक पल की खामोशी और फिर वही दिनचर्या.!!
जब लोग जीवित रहते हैं लोगों को मुगालता रहता है कि वह सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं.. कि वह नहीं होंगे तो उनका घर, उनका परिवार, उनका कार्य स्थल सब अनाथ हो जाएंगे, बर्बाद हो जाएंगे..!

_ पर कटु सत्य यह है कि कुछ लोगों को छोड़ दें तो आपके होने न होने से कहीं कुछ भी नहीं रुकता, न बर्बाद होता है..
_ जीवन की सबसे अच्छी या सबसे बुरी बात यही है कि यह चलता रहता है, किसी के साथ भी, किसी के बिना भी..!!
उस व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी भयानक नहीं है जो यह जान लेता है कि मृत्यु में कुछ भी भयानक नहीं है.

There is nothing terrible in life for the man who realizes there is nothing terrible in death.

यदि मरने के बाद मृत्यु आपको कोई पीड़ा नहीं पहुँचाती है, तो अब उसके भय को आपको पीड़ा पहुँचाने की अनुमति देना मूर्खता है.

If death causes you no pain when you’re dead, it is foolish to allow the fear of it to cause you pain now.

अच्छे से जीने की कला और अच्छे से मरने की कला एक ही है.

The art of living well and the art of dying well are one.

मुझे मौत से क्यों डरना चाहिए ?

यदि मैं हूं तो मृत्यु नहीं है.

यदि मृत्यु है, तो मैं नहीं हूँ.

मुझे उस चीज़ से क्यों डरना चाहिए _जिसका अस्तित्व तभी हो सकता है _जब मैं नहीं हूँ ?

मौत के सामने हम लाचार हैं, मजबूर हैं.

_ कोई कितना भी ताकतवर हो, मज़बूत हो वो मौत को नहीं टाल सकता है.
_ बस एक लम्हा आएगा और सब ख़त्म.._ कोई कुछ नहीं कर सकता, कोई किसी को बचा नहीं सकता.
_ये दुनिया फरेब है, ये रिश्ते धोखा हैं._ हकीकत सिर्फ़ ओ सिर्फ़ मौत है, जो सच है.!!
क्षमा करें, लेकिन जब आप मरेंगे तो आपके घर वाले एक ही दोपहर में आपके सारे सामान को कूड़ेदान में फेंक देंगे ;

_वे जल्द से जल्द उस सामान से घर को साफ़ कर देंगे ;
_ वे आपका कबाड़ नहीं चाहते..
—- कुल मिलाकर वे आपका घर और पैसा चाहते हैं ;
_ कड़वी सच्चाई है, लेकिन सच है __ इसलिए _ उनके लिए इसे बचाने का बहाना न बनाएं.
जीवन तो जैसे तैसे सामाजिकता ढ़ोते बीत रहा पर अपनी मृत्यु के लिए मैं बहुत सख़्ती से अपने घरवालों को कहूँगा कि मेरे मरने के बाद शोक संदेश, मृतक भोज और तेरह दिन का टिटिम्मा नहीं करें..

_ मेरी मुक्ति के लिए कोई उपाय करने की ज़रूरत नहीं..
_ क्योंकि जिसपल मेरी मृत्यु होगी मेरी आत्मा उसी पल लोगों से और लोग मुझसे मुक्त हो जाएंगे..
==मैं पलटकर झांकने नहीं आऊंगा,
_क्योंकि मैंने देख लिया है कि परिवार और कुछ नजदीकी लोगों को छोड़कर किसी को भी आपके होने न होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता..
_हो सकता है कि मेरी बात लोगों को असंवेदनशील लगे पर आजकल शोक को भुनाना ट्रेंड में है..
_अब शोक लोगों को स्तब्ध, अवाक नहीं करता ..बल्कि वह लोगों को न केवल मुखर बना रहा बल्कि नए नए प्रयोग करने को भी उकसा रहा,
तुम्हारे शोकोत्सव से ज़्यादा भव्य मेरा शोकोत्सव है यह चलन में है..
_तेरहवीं में पूरा परिवार एक रंग के कपड़े पहनेगा..दर्ज़नों प्रकार के पकवान बनेंगे..सेल्फ़ी ली जाएगी..मृतक की तस्वीर के इर्द गिर्द की सजावट इतनी भव्य होगी कि जयमाल का स्टेज शरमा जाए..
_स्त्रियाँ पूरे मेकअप में होंगी.. पुरुष उसी तल्लीनता और निश्चिन्तता से राजनीति ,खेल और मौसम पर चर्चा करते हुए ठंडा/गर्म पेय पियेंगे ..जैसे वह ऑफिस,नुक्क्ड़ या किसी अन्य पार्टी में जाने पर करते हैं..
_कुछ लोग वीतरागी की तरह फ़ोन चलाते हुए खाना शुरू होने का इंतज़ार करेंगे..
_बस बच्चे अपने सहज स्वाभाविक रूप में दौड़ते, भागते, खेलते, खाते दिखेंगे..
— यहाँ शोक में गरिमा नहीं होती _ख़ासकर स्त्रियों को देखता हूँ कि ..वह मृतक के घर यह जांचती हैं कि ..कौन कितना चीखकर विलाप किया,
_आप मौन विलाप नहीं कर सकते ..क्योंकि उसमें उन्हें मज़ा नहीं आता..
_ वह आपको रोते चीखते, बेहोश होते देखने को आतुर रहेंगी..
_कई जगह मैंने देखा कि ..मृतक के जीवित रहते उसके नज़दीकी रिश्ते से भले बातचीत तक बन्द रही हो ..पर उसके मरते ही वे बेहोश हो जाते हैं,
_कई तो ऐसे चीखेंगे कि ..आसमान थर्रा उठे और पांच मिनट बाद ही सब ऐसे सामान्य हो जाएंगे ..जैसे कुछ हुआ ही नहीं,
_किन्तु जैसे ही कोई नया रिश्तेदार, नातेदार आया नहीं कि ..फ़िर गगनभेदी चीखें उठने लगेंगी और मृतक के बच्चे कोने में सहमे यह सब तमाशा देखते रहेंगे..
— रिश्तेदार जिस निस्पृह भाव से तिलक बरीक्षा में ऐन मौके पर जीमने पहुंचते हैं, ..उसी तटस्थता से वह तेरहवीं में भी एकदम ठीक समय पर आते हैं,
_रस्मन बातचीत और भोजन के बाद सब निकल लेते हैं..
_पीछे शोक में, थकन में, चिंता में डूबा परिवार अकेला बचता है..
_माँ, बाप, भाई को खोने के समय हमने यह देख लिया कि किसी को हमारी फ़िक्र नहीं थी,
_फ़िक्र थी तो यह कि कब यह संयुक्त परिवार टूटकर बिखरेगा ..क्योंकि परिवार के स्तंभ ढह चुके थे..
— हालांकि लोग मृतक भोज की प्रशंसा यह कहकर कहते हैं कि ..यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ..ताक़ि लोग तेरह दिन इतने व्यस्त रहें कि ..वह अपने दुख को भूले रहें..
_पर अपने माता पिता, पति या पत्नी अथवा बच्चे को खोने के बाद इतनी अधिक सामग्रियों को इकट्ठा करना, इतनी रस्मों को निभाना एक प्रकार की क्रूरता है..
_ दान के राशन, बर्तन, कपड़े, गहने को कहीं नाऊ झगड़ रहा कहीं पंडित..
_कोई न बुलाये जाने पर नाख़ुश है तो कोई परोसा न मिलने पर नाराज़..
_इन सब व्यवहार से वितृष्णा होती है..
_लोग आ रहे, लोग जा रहे तो बस इसलिए कि ..लोकाचार की बही में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा सकें ..न कि इसलिए कि ..वह आपके दुख से दुखी हैं..
नोट- यह सार्वभौमिक सत्य नहीं है ..बस समाज के बदलते व्यवहार पर एक टिप्पणी मात्र है.
अगर कल आप मर जाते हो तो अंतिम संस्कार में आपके रिश्तेदार चाय पी के चले जाएंगे.

_ एक हफ्ते में ही ऑफिस वाले आपकी पोजीशन के लिए कैंडिडेट ढूंढने लग जाएंगे।
_ दो दिन तक कुछ दोस्तों की इंस्टा स्टोरी में रहोगे.. उसके बाद सबकी अपनी अपनी लाइफ चालू हो जाएगी।.
_ आपका पार्टनर भी आपसे आगे बढ़ जाएगा.
_ आपकी फैमिली भी कुछ टाइम बाद फिर से नॉर्मल हो जाएगी.
_ कुछ पल का मातम फिर हंसते लगेंगे लोग – जीना सीख जाते हैं, किसी के बिना मरते नहीं है हम.
_ आपके म्युचुअल फंड को क्लेम करने नॉमिनीस फॉर्म भरेंगे.
_ डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लाइन में लगेंगे.
_ दुनिया चलती रहेगी..- जैसे चल रही है.
_ धीरे-धीरे आपके परिवार को भी आपकी नामौजूदगी की आदत हो जाएगी.
_ “जो कह रहे थे मर जाएंगे तुम्हारे बिना” देखना उन्हें कितनी जल्दी किसी और से मोहब्बत हो जाएगी.
_ जहां धड़कन रूकी.. वहां आपका नाम भी खत्म.
_ कुछ लोग जिनको आप अजीज समझते हो.. वह आपके अंतिम दिन भी नहीं आएंगे.
_ कुछ लोग तुम्हारी तारीफ के पुल बांध रहे होंगे और कुछ लोग अभी भी आप पर हंस के चले जाएंगे.
_ आप आंगन में पड़े होंगे और बातें पॉलिटिक्स की चल रही होगी,
_ आपको किस डायरेक्शन में लेटाना है.. इस बात पर बहस हो रही होगी.
_ लोग खाना खाकर चले जाएंगे.. किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
_ आप इतने जरूरी नहीं थे.. किसी के लिए.. तब सब पता चलेगा ;
_ इसलिए खुद के लिए जीया करो – किसी और के लिए नहीं.
_ किसी के चले जाने से दुनिया नहीं रुकती..
_ लोग चले जाते हैं.. फिर बस तस्वीर देखकर याद करते हैं लोग – याद में रखना बंद कर देते हैं.
_ तो आज से अपनी खुशी के लिए काम करो.. अपने लिए जियो.
_ खुद को प्रायोरिटी दो.. नहीं तो दूसरों को खुश करते-करते मर जाओगे.!!
अगर हम मृत्यु को ठीक से पहचान लें, तो इस पृथ्वी पर वैर का कारण न रह जाए.
_ जहां से चले जाना है, वहां वैर क्या करना ?
_ जहां से चले जाना है, वहां दो घड़ी का प्रेम ही कर लें.
_ जहां से विदा ही हो जाना है, वहां गीत क्यों न गा लें, गाली क्यों बकें ?
_ जिनसे छूट ही जाना होगा सदा को, उनके और अपने बीच दुर्भाव क्यों पैदा करें ?
_ कांटे क्यों बोए ? थोड़े फूल उगा लें, थोड़ा उत्सव मना लें, थोड़े दीए जला लें !
_ वास्तव में यही सच्चा धर्म है इस पृथ्वी का और उसके मनुष्य का.
_ जिस व्यक्ति के जीवन में यह स्मरण आ जाता है कि मृत्यु सब छीन ही लेगी; यह दो घड़ी का जीवन, इसको उत्सव में क्यों न रूपांतरित करें !
_ इस दो घड़ी के जीवन को प्रार्थना क्यों न बनाएं ! पूजन क्यों न बनाएं !
_ झुक क्यों न जाएं-कृतज्ञता में, धन्यवाद में, आभार में! नाचें क्यों न, एक-दूसरे के गले में बांहें क्यों न डाल लें !
_ मिट्टी मिट्टी में मिल जाएगी.
_ यह जो क्षण-भर मिला है हमें, इस क्षण-भर को हम सुगंधित क्यों न करें !
_ इसको हम धूप के धुएं की भांति क्यों पवित्र न करें, कि यह उठे आकाश की तरफ, ईश्वर की गूंज बने !
– OSHO
जीवन अपने हिसाब से जिएं, यूँ तो जीवन छोटा लगता है, महज साठ – सत्तर बरस की यात्रा – जो सभ्यता के बरक्स बहुत कम कालावधि है, पर जब जीने को हम उतरते है तो एक – एक पल भारी होता है,

_ इसमें हम हर किसी को खुश नहीं रख सकते, हर किसी को नाराज नहीं कर सकते,
_हम हर किसी के हीरो या हीरोइन नहीं बन सकते – ना ही किसी के खलनायक भी
_ एक टेढ़ा – मेढ़ा रास्ता है – धूल, कंकड़, गुबार और अंधड़ से भरा हुआ और बस गुजरना है – अपनी इच्छाओं को पूरा करते हुए या त्याग करते हुए
_ अपने आप से बार बार कहता हूँ कि एक ही जीवन है – बगैर किसी की अपेक्षा पर खरे उतरे या किसी बड़ी महत्वकांक्षा को पूरी करने के ख्वाब को संजोए – बस जी लो, अपने पसंद की कर लो,
_ यदि तुम्हे लगता है कि यह करने से खुशी मिलती है, या संतुष्टि तो कर लो एक बार अपनी वर्जनाएं और डर छोड़कर..
_ मरते समय छाती पर कोई तमगा होगा तो भी धू – धू कर जल जाएगा, बस यह याद रहेगा कि इसने जीवन कैसे जिया, जीवन को कैसे आनंदित भाव से पूर्ण किया – बाकी सब तो माया है,
_ हम जानते ही है, सब छोड़ दो यश, कीर्ति, पताकाएं और वो सब जो जीने से रोकता है.
– Sandip Naik
जिस दिन तुम मृत्यु को प्राप्त होगे उस दिन लोग तुम्हारा नाम भूल जायेंगे और तुम्हें अर्थी के नाम से संबोधित करेंगे। चारों तरफ़ तुम्हें उस घर से श्मशान ले जाने हड़बड़ी मची होगी, जिस घर को तुमने कभी बहुत शिद्दत से बनाया था। जो लोग तुम्हारे जीते जी तुमसे कभी मिलने नहीं आये वो भी औपचारिकता निभाने आयेंगे और इंतज़ार करेंगे कि जल्दी जल्दी सब हो और वो लौटकर वापस जाएं।
फ़िर तुम्हारा अंतिम संस्कार हो जाएगा और तुम्हारी चिता की राख ठंडी होने से पूर्व लोगों के आँसू सूख जाएंगे। जब लोग श्मशान से लौटकर आएंगे तो तुम्हारे परिवार के लोग उनके चाय नाश्ते के इंतज़ाम में जुट जाएंगे। तुमसे संबंधित सभी चीज़ों को घर से बाहर कर दिया जाएगा और धीरे -धीरे लोग अपने कामों में व्यस्त हो जाएंगे और धीरे धीरे तुम्हें भूल जाएंगे।
तुम जब तक जीवित हो तभी तक तुम सोच रहे हो कि सब अपने हैं मगर वास्तविकता यह है कि यह सब अस्थाई है। जिस दिन तुम चले जाओगे, उस दिन के बाद तुम्हारे अपने घर में भी तुम्हारा जिक्र कभी नहीं किया जाएगा क्योंकि अब तुम्हारा अस्तित्व समाप्त हो चुका है और तुम किसी के किसी भी काम नहीं आने वाले हो। यही संसार का सत्य है इसे समझ लो और रिश्तों के मोह से बाहर निकलकर अपने जीवन का आनंद लो।
– Mayank Mishra

मन हो नया – 2025

” मन हो नया “

नये वर्ष के नये दिन पर पहली बात तो यह कहना चाहूंगा कि दिन तो रोज ही नया होता है, लेकिन रोज नये दिन को न देख पाने के कारण हम वर्ष में कभी- कभी नये दिन को देखने की कोशिश करते हैं. हमने अपनी पूरी जिंदगी को पुराना कर डाला है. उसमें नये की तलाश मन में बनी रहती है, तो वर्ष में एकाध दिन को हम नया दिन मान कर अपनी इस तलाश को पूरा कर लेते हैं, सोचनेवाली बात है- जिसका पूरा वर्ष पुराना होता हो, उसका एक दिन कैसे नया हो सकता है ? जिसकी आदत एक वर्ष पुराना देखने की हो, वह एक दिन को नया कैसे देख पायेगा ? हमारा जो मन हर चीज को पुरानी कर लेता है, वह आज को भी पुराना कर लेगा. फिर नये का धोखा पैदा करने के लिए नये कपड़े हैं, उत्सव हैं, मिठाइयां हैं, गीत हैं. लेकिन न नये कपड़ों से कुछ नया हो सकता है, न नये गीतों से कुछ हो सकता है.

नया मन चाहिए ! और नया मन जिसके पास हो, उसे कोई दिन कभी पुराना नहीं होता. जिसके पास ताजा मन हो, फ्रेश माइंड हो, वह हर चीज को ताजी और नयी कर लेता है. लेकिन ताजा मन हमारे पास नहीं है. इसलिए हम चीजों को नयी करते हैं. मकान रंगते हैं. नयी कार लेते हैं. नये कपड़े लेते हैं. हम चीजों को नया करते हैं, क्योंकि नया मन हमारे पास नहीं है.

कभी सोचा है कि नये और पुराने होने के बीच में कितना फासला होता है ? चीजों को नया करने वाली इस वृत्ति ने जीवन को कठिनाई में डाल दिया है. भौतिकवादी और अध्यात्मवादी में यही फर्क है. अध्यात्मवादी रोज अपने को नया करने की चिंता में लगा है. क्योंकि उसका कहना है कि अगर मैं नया हो गया, तो इस जगत में मेरे लिए कुछ भी पुराना न रह जायेगा, और भौतिकवादी कहता है कि चीजें नयी करो, क्योंकि स्वयं के नये होने का तो कोई उपाय नहीं है. नया मकान बनाओ, नयी सड़कें, नये कारखाने, नयी व्यवस्था लाकर सब नया कर लो. लेकिन अगर आदमी पुराना है और चीजों को पुराना करने की तरकीब उसके भीतर है, तो वह सब चीजों को पुराना कर ही लेगा. हम इस तरह नयेपन का धोखा पैदा करते हैं.

– आचार्य रजनीश ओशो

“मन से बाहर फिसल जाइए, और आप जान लेंगे कि यह क्या है: वह जो आदि रहित और अनंत है.

_ मन का आदि है और अंत भी है, इसलिए मन और वास्तविकता कभी नहीं मिल सकते. मन शाश्वत को नहीं समझ सकता.
_ और यदि आप सचमुच समझना चाहते हैं, तो आपको मन को खोना पड़ेगा.
_ आपको मन को खोने की कीमत चुकानी पड़ेगी.
_ लेकिन यदि आप ज़िद करेंगे, ‘मुझे तो मन के माध्यम से ही समझना है,’ तो केवल एक ही चीज़ संभव है — मन धीरे-धीरे आपको यकीन दिला देगा कि कुछ भी ऐसा नहीं है जो आदि रहित हो, कुछ भी ऐसा नहीं है जो अंतहीन हो, कुछ भी ऐसा नहीं है जो अज्ञेय हो.
_ धीरे-धीरे, वास्तविकता से संपर्क करने की कला सीखिए, बिना मन के बीच में आने के.
_ कभी-कभी जब सूरज अस्त हो रहा हो, बस बैठ जाइए और सूरज को देखते रहिए, उसके बारे में सोचिए मत — केवल देखिए, मूल्यांकन मत कीजिए,
_ यहाँ तक कि यह भी मत कहिए ‘कितना सुंदर है !’
_ जिस क्षण आप कुछ कहते हैं, मन बीच में आ जाता है.
_ यदि आप सचमुच समझना चाहते हैं, तो आपको मन को खोना पड़ेगा.
_ आपको मन को खोने की कीमत चुकानी पड़ेगी.
_ लेकिन यदि आप मन का ही उपयोग करने पर ज़ोर देंगे, तो केवल वही ज्ञान मिलेगा, केवल वही चीज़ें मिलेंगी जिन्हें मन समझ सकता है.
_ आप माया में ही बने रहेंगे.”
~ ओशो
 
“Slipping out of the mind, and you will know what it is: the beginningless, the endless. The mind has a beginning and an end, hence the mind and reality cannot meet. The mind cannot comprehend the eternal.
And if you really want to understand, you will have to lose the mind. You will have to pay the price of losing the mind. But if you insist, ‘I have to understand through the mind,’ then only one thing is possible. The mind will convince you, slowly slowly, that there is nothing which is beginningless, nothing which is endless, nothing which is indefinable, nothing which is unknowable.
Slowly slowly, learn the art of contacting reality without the mind interfering. Sometimes when the sun is setting, just sit there looking at the sun, not thinking about it—watching, not evaluating, not even saying, ‘How beautiful it is!’ The moment you say something, the mind has come in.
Viraj, if you really want to understand, you will lose the mind. You will have to pay the price of losing the mind. But if you insist on using the mind, then only knowledge, only things that can be understood by the mind will happen. You will remain in illusions.”
~ Osho
“जीवन की ताज़गी”

_ जीवन बासी नहीं है, हम इसे बासी बनाते हैं—कल का बोझ और कल की चिंता ढोकर.
_ लेकिन सच तो यह है कि हर पल अछूता है, एकदम नया..
_ बिल्कुल इस सांस, इस हवा, इस खामोशी की तरह..
_ कभी-कभी मैं इसे गहराई से महसूस करता हूँ—जब मैं पुरानी खुशियों को दोहराने या नई खुशियों का पीछा करना बंद कर देता हूँ.
_ जब मैं बस होता हूँ..
_ एक नदी की तरह जो कभी भी एक ही तरह से दो बार नहीं बहती..
_ आसमान की तरह.. जो कोई याद नहीं रखता.
_ इसमें कुछ आज़ादी है.
_ बिना उम्मीद के काम करना, बिना ज़रूरत के प्यार करना.
_ मैं यह देखने लगा हूँ कि असली जीवंतता ज़्यादा करने में नहीं, बल्कि ज़्यादा पूर्णता से पहुँचने में है.
_ बीते कल में नहीं, आने वाले कल में नहीं..
_ लेकिन अभी—दोनों पैरों के साथ वर्तमान में..
_ यही वह जगह है.. जहाँ जीवन सबसे ज़्यादा जीवंत लगता है.
_ यही वह जगह है.. जहाँ मैं खुद को सबसे ज़्यादा महसूस करता हूँ.
_ “जीवन ताजा ही है”
मन का संचालन दिमाग से होता है,

_ अगर दिमाग सही दिशा पकड़ ले तो मन अच्छा काम करता है.

मन तो सबका होता है कि मन का हो..

_ पर हमेशा मन का हो ये ज़रूरी नहीं.!!

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ये मन का स्वभाव हैं कि जिन चीजों से वो परिचित होता है, उससे ऊब पैदा हो जाती है -और जो कुछ अनजाना है वो रोमांचित करता है !

_ चीजों का जानने की नहीं बल्कि जीने की फिराक में रहो.!!

_ जो जान लिया जाता है, वो तो पुराना, बासी हो जाता है और जो जिया जाता है _ वो हमारे व्यक्तित्व में कुछ नए अहसास, कुछ नई उमंग ओर कुछ नया गीत जोड़ देता है.

_ जितना इस अस्तित्व से मिले उसके लिए धन्यवाद का भाव उठना चाहिए.!!

_ शिकायतों में अक्सर हम इस जगत से पाने की योग्यता धुंधली कर लेते हैं; _ शिकायत का भाव हमारी अपात्रता दर्शाता है.

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रोज दिन होता है. _ रोज रात के बाद सवेरा होता है. _ नया क्या है ? कुछ भी नही..!!
_ परेशानियां, उदासियां, खालीपन और अवसाद किसी नये साल के आने से खत्म नही हो जाते.
_ जो इस दौर में हैं. _ उनके लिए कुछ भी नया नही है. _ ज्यादातर चेहरों पर खुश दिखने की एक परत है.
_ एक दिन की खुशफहमी से बाकी बचे 364 दिन बदल नही जाएंगे.
_ क्या ही उछल-कूद करना क्या ही बधाई और शुभकामनाएं देना.
_ छः महीनों से जिस शख्स ने पुराना मैसेज सीन नही किया था _ उसने भी हैप्पी न्यू ईयर का मैसेज भेज दिया है.
_ बीते साल में जिसके पास कॉल करने का वक्त नहीं था _ वो भी फोन करके शुभकामनाएं दे रहा है.
_ एक दिन में साल नही सिमट सकता है, _ कैसे समझाया जाए ऐसे लोगों को समझ नहीं आता..!!
_ एक दिन का अपनापन दिखाने के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों है ?
_ मैं ये प्रश्न दूसरे से क्यों करूं, _ मुझे खुद से करना चाहिए..!!
मेरे सेम टू यू कह देने भर से मेरा या आपका कुछ ठीक हो जाता है तो चलिए कह देता हूं, _ सेम टू यू !!
_ जिस उत्साह से भरभर के शुभकामनाएं जिसे भेजी गयी हैं _ उसे तो ये पता ही नहीं होगा कि _ मैं जिसे ये शुभकामनाएं भेज रहा हूं. __ एक वक्त पर उसे आपकी जरूरत थी _ आपके समय की जरूरत थी._ तब आप साथ नहीं थे.
__ आज आपके इस अपनेपन से उसे खीज उठ रही है.__ ये कोई नहीं समझता है.
__ यकीन मानिए..!! “सब फौरी बाते हैं”_ उम्मीद पालना एक फितरत बन गयी है कि सब ठीक हो जाएगा.
_ किसी के साथ होने से किसी की शुभकामनाएं मिल जाने से जिंदगी पूरे साल गुलजार रहेगी.
_ अगर ऐसा होता तो दुनिया में दुःख ही नहीं होता _ हर रोज उत्सव ही होता..!!_ अफसोस ऐसा होता नही है.
_ इसलिए बचा जाना चाहिए इस दिखावे से..!!
_ “दिन मेरा है” _ ठीक एक साधारण दिन की तरह, _ कैलेंडर बदला है. _ लोग नहीं बदलेंगे ये माहौल नहीं बदलेगा..!!
_ बदलना है तो खुद को बदलिए _ खुद के साथ मजबूती से खड़े रहने के संकल्प के साथ..!!
_ खुद को शुभकामनाएं दीजिए कि खुद ही सब ठीक कर देंगे..!!
_ किसी के हैप्पी न्यू ईयर कह देने या सुन लेने से कुछ नहीं बदलने वाला है..!!
_ समय के साथ यही रह जाना है. __ बकिया कुछ भी नहीं._ सच है मैंने स्वीकार किया है ; _ आप भी इसे मान लीजिए कोई जबरदस्ती थोड़े है..!!
_ जो इस दुनिया की भीड़ में होकर भी खुद के साथ मजबूती से खड़े हैं ; _ ऐसे लोगों को मेरा प्यार..!!
_ इस साल उनको _ उनके हिस्से का जहां मिले, प्यार मिले, खुशियां मिले, आजादी मिले..!!
_ इससे बढ़कर कोई दुवाएं नहीं है मेरे पास, _ रख लीजिए..!!
 
– पथिक मनीष
 
हर किसी की जिंदगी मे लो पॉइंट आता है !
 
हम थक चुके होते है इस भीड़ का हिस्सा बन के, हमे लगता है ये सूरज रोज निकलता है शाम होते ही ढल जाता है, उसके बाद गुप अंधेरे मे खिड़की से चांद को देखना तारों से बातें करना एक आम बात होती है, अकेलेपन मे होने वाली घटनाओं पर ये घिसीपिटी बाते है !
 
हमारी जिंदगी की जो घटनाएँ हमे सबसे ज्यादा तोड़ देती है, हम उन्हें याद करते ही उनमें घुसते ही सब भूल जाते है कि जिंदगी बड़ी खूबसूरत है और कुछ खूबसूरत घटनाएं घटेंगी अभी हां हमे बिना बताए बिना कहे !
 
जिंदगी डिफरेंट मोड़ पर कब आएगा ये डिफरेंट क्या होता है और कितनी देर के लिए होता है ?
 
मै स्कूल मे पढ़ रहा था तो दुनिया भी पढ़ ही रही थी ना मेरे स्कूल मे हजारों बच्चे थे ये एक स्कूल की बात थी उस हिसाब से दुनिया मे उस समय करोड़ों अरबों बच्चे पढ़ रहे थे !
 
पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढना यहां न्यूजपेपर से लेकर वैकेंसी वाले वेबसाइट पर लाखों नौकरियां थी जिनको अप्लाई करने वाले करोड़ों थे, तो फिर करोड़ लोग एक साथ नौकरी के लिए भाग रहे थे !
 
शादी हाँ एक ही दिन शहर के कई गली नुक्कड़ से बारात निकल रही थी यानि रोज लाखों शादीयां हो रही थी, इन सबमे डिफरेंट कहा है यहा तो सब कॉमन ही है !
 
पैसा घर परिवार जिम्मेदारी सामाजिकता मे पिसता हुवा इंसान जिसकी जिंदगी मे वो लो पॉईंट है वो सोच रहा था ये डिफरेंट होना क्या होता है ? कब होता है ?
 
कठिनाइयों में डूबे हुवे व्यक्ति का सहारा वही कठिनाइयाँ ही है, उन परिस्थितियों मे शरीर मे बसने वाली आत्मा छूट के भाग जाने की जिद पर अड़ जाती है और शरीर असामान्य रूप से ढीला पड़ जाता है और फिर यहीं से कहानियां बनती है, जिन्हें हमे तराश के उतारना पड़ता है,
ज़िन्दगी के पन्नों पर फिर यही कहानियां हमे सहारा देती है और आपके बचे रहने का कारण यही कहानियां होंगी, ये कहानियां जिंदगी की वास्तविकता से गुजर कर जब डायरी के पन्नों पर आएंगी ना ये आपको उलझा के नही सुलझा के रखेंगे ताऊम्र।
 
उस लो पॉईंट मे ये डिफरेंट पॉइंट आता नही है लाना पड़ता है।
 
— पथिक मनीष
 
मेरे बहुत से दोस्त हैं. फ्यूचर के बारे में बात करते वक्त अक्सर कहते हैं.
_ खूब पैसा कमाना है, बड़ा घर बड़ी गाड़ी पत्नी बच्चे समेत पूरा परिवार सब मिलकर सुकून से रहेंगे और फिर जिंदगी आराम से बीत जाएगी.
_ मैं खुश हो लेता हूं, चलो सबके पास कुछ प्लान है.
_ सबने एक टारगेट सेट कर रखा है.. होना भी चाहिए.
_ जिंदगी जीने का एक मकसद होना अच्छी बात है.
_ सारी बात घुमा-फिरा जब मेरे जवाबदेही का वक्त आता है.. मैं मौन हो जाता हूं.
_ मैं क्या जवाब दूं.. कोई प्लान नही है.
_ एक शहर में बहुत ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता हूं.
_ जॉब एक साल के बाद मुझे बहुत परेशान करने लगती है.
_ घूमने-फिरने के लिए कोई प्लान नही करता हूं, जब मन किया झोला उठाया और निकल लिया.
_ ऐसे में क्या टारगेट सेट करूं फ्यूचर का.. कुछ समझ में नही आता है.
_ इन सब बातों के बाद बैंक बैलेंस चेक करता हूं तो पता चलता है कि बस इतना बचा है कि किसी एक शहर में एक महीने से ज्यादा गुज़ारा नहीं होगा.
_ और जब पैसे कमाए तो किये क्या तो पता चलता है कमरा ट्रैवलिंग से जुड़े सामानों से पटा पड़ा है.
_ एक कैमरा है, सात/आठ बैग हैं, बहुत सारे जूते हैं, ढेर सारी किताबें हैं, डायरी है और इससे ज्यादा कुछ नही है.
_ देखकर मुझे सुकून मिलता है.
_ कुछ ना होकर बहुत कुछ है मेरे पास.. यही सोच के खुद की पीठ थपथपा लेता हूं. आत्ममुग्धता भी जरूरी है ना ?
_ एक सच बताऊं.. नही चाहिए बड़ा घर.
_ कंक्रीट के जंगल में मुझे एक वक्त के बाद उफनाहट होने लगती है.
_ बहुत सारा पैसा रख के क्या ही करना है..
_ पैसे जीवन में सुख दे तो देंगे पर स्वार्थ वाले रिश्तों की भीड़ भी इन्हीं पैसों की वजह से है.. लोगों से मिला अनुभव है.
_ वक्त आ गया है.
_ फिर से शहर बदल जायेगा.. अब खानाबदोश जिंदगी से धीरे-धीरे प्यार हो गया है.
_ और हां बुद्ध का दिन है आज, बुद्ध को पढ़ ही रहा था.
_ भीतर उमड़े द्वंद्व का जवाब मुझे बुद्ध से बेहतर कोई नही दे सकता था.
_ उचाट मन को भी लिखना कभी-कभी सुकून देता है.
_ इसलिए लिख रहा हूं.. बस इतना ही.!!
– पथिक मनीष
 
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नया साल कितना नया होता है पता नहीं.. सिवाय यह मानने के कि नया साल है…
_ मुझे लगता है कि नया है तो प्रतिपल नया है और पुराना है तो प्रतिपल पुराना है…
_ हम जस के तस रह जाते हैं…
_ पीछे साल हमसे हमारा समय जा चुका होता है आगे साल समय में होते हैं उसके जाने के इंतजार में…
_ फिर भी उत्साह तो होता है आस पास को देखकर, उत्साह बना रहे इसके लिए नया साल शुभ हो, चेतन की अवस्था और उर्ध्वगामी हो…
 
– अमित तिवारी
 
जाम की लम्बी लम्बी कतारें, टूट चुके पहाड़, चमकीली रोशनियों से अंधे हो चुके कबूतर रात को सो नहीं पाते, न ही सो पाते हैं गौरैया के बच्चे| सारे जानवर भी हैरान हैं हमारी अंधी दौड़ और उब भरी ज़िन्दगी से पैदा हुए जश्न को देखकर |
 
कोई भी ख़ास उपलक्ष हो या यह नया साल, बस एक ही चीज दिखती है लोग भागना चाहते हैं कहीं और जाकर जश्न में खुद को डुबो देना चाहते हैं |
चाहे उस जश्न में कुर्बान कर दिए गए हों हजारों लाखो जानवर और उनकी बोटी को चबा लिया गया हो या बीयर और शराब की बोतलें फूट गयी हों सड़कों पर या पहाड़ों के सबसे शांत क्षेत्र में भी बियर और शराब की बोतल ने दस्तक दे रखी हो |
 
एक समय था जब सिर्फ़ मस्ती करने वाली जगह पर ही लोग मस्ती करने जाते थें बाकी जगहें छूटी रहती थी |
उदहारण के तौर पर शराब पीने के लिए ज्यादातर उसके एक निश्तित स्थान पर भीड़ इकट्ठी होती थी, धर्मस्थल कम से कम छूटे रहते थें.
 
आज की स्थिति क्या है ? चाहे बनारस हो या हरिद्वार और ऋषिकेश सब जगह लोग पार्टी करने जा रहे हैं |
 
धर्म और अध्यात्म की जगह से कोई सरोकार नहीं है, सरोकार है तो बस कुछ पल जोर जोर के संगीत के साथ शराब के नशे में झूम लेने से और एक साथ ‘हैप्पी न्यू इयर’ बोलकर सुबह फिर से बेसुध उबासी भरी जिंदगी में वापस लौट जाने से..
 
आख़िर हम इतने बेसुध कब से हो गए कि किसी भी ख़ास दिन के लिए इतनी पार्टी करनी पड़े |
पार्टी करना और पार्टीजीवी होना दोनों अलग अलग बाते हैं |
पार्टी की संस्कृति को अपनाते अपनाते पार्टीजीवी हो गए हम सबके सब |
सबको अब एक अच्छी और धमाकेदार पार्टी करनी है |
चाहे उसके लिए कोई बियर बार हो, निरीह पहाड़ हों या धर्मस्थल |
 
अभी कुछ वर्षों पूर्व तक यदि शांति चाहिए तो लोग पहाड़ों का रुख करते थें |
अब पहाड़ लम्बे लम्बे जाम के पर्याय बन गए हैं | कई किलोमीटर तक लम्बा जाम लग जाता है |
पहाड़ों पर रास्ते सकरे होते हैं | पहाड़ एक साथ इतनी जनसँख्या को बर्दाश्त करने के लिए नहीं हैं|
इससे न सिर्फ वहां की भीड़ बढ़ रही है बल्कि पूरा का पूरा वातावरण, पूरी प्रकृति प्रभावित हो रही है
 
जितने ज्यादा लोग होंगे उतनी अधिक मात्रा में संसाधनों की आवश्यकता होगी और उतना ही अधिक अपशिष्ट एवं अन्य दूषित पदार्थ वहां जमा होगा, जिससे पूरी की पूरी हवा बदल जाएगी या यूँ कहें की बदल रही है |
पहाड़ श्रापित हो रहे हैं, जो हमें शांति दे सकते थें अब वही शोर में समां गए हैं |
यह एक तरीके से प्रलय का आगमन है, जहाँ मानव सभ्यता किंकर्तव्यविमूढ़ हो चुकी है |
सबको बस जश्न मनाना है |
 
नए साल में इस जश्न का रोग और भी अँधा हो जाता है |
लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि नयी तिथि के आगमन का स्वागत कैसे किया जाये |
सभी जश्न मना रहे हैं, पार्टी कर रहे हैं तो हमें भी करना है |
ढेर सारा पैसा खर्च करो, नहीं है तो भी जश्न मनाने के दबाव में पैसा खर्च करो |
जहाँ भीड़ है वहां जाकर भीड़ का हिस्सा बन जाओ और स्वयं को मनोरंजन दो |
 
कितनी बार तो लोगों का चेहरा देखने पर आभास होता है कि अमुक व्यक्ति को कुछ ख़ास आनंद आ नहीं रहा है इस तरीके के मनोरंजन में _परन्तु क्यूंकि यह पता ही नहीं इस नए दिन को कैसे मनाये, इसका स्वागत कैसे करें, तो बाकि दुनिया जैसा कर रही है वैसा काम करने में सम्मलित हो जाओ और उसी जश्न का हिस्सा बन जाओ |
 
यह जानने की कोशिश किये बिना कि क्या इस स्वागत को किसी और तरीके से भी मनाया जा सकता है ? जिसमें जीवन की सार्थकता निहित हो | जिसका उदगम जीवन की बोरियत या उबासी नहीं बल्कि सहजता हो |
 
सहजता एक सतत प्रक्रिया है संवेदना की, जितना व्यक्ति संवेदनशील होगा उतनी ही सहजता उसमें उतरती जाएगी |
जितना असंवेदनशील होगा उतनी असहजता एवं अंधे जश्न को मनाने की तीव्रता का बढ़ती जाएगी |
 
संवेदनशीलता आती है जागरूकता से, जागरूकता यह नहीं की ज़माने में क्या चल रहा है उसके बारे में हमें सब पता है, जागरूकता यह भी नहीं की राजनीती या फिर व्यापर या तकनिकी में आजकल क्या चल रहा है, उसके बारे में भी हमें सबकुछ पता है,
बल्कि जागरूकता है कि यह सब जो चल रहा है वह क्यूँ चल रहा है | क्या यह सब जो चल रहा है उसकी वाकई आवश्यकता हमको है या बस हमें बाज़ार का हिस्सा बनाकर हमारा दोहन किया जा रहा है |
 
जागरूकता है स्वयं का दोहन न होने देने से बचाना, जागरूकता तभी आएगी जब ज़िम्मेदारी होगी और जिम्मेदारी किस बात की जानने और समझने के इच्छा की, तो जब तक इस बात की जिम्मेदारी नहीं की हमें जानना या समझना है तब तक जागरूकता नहीं होगी और जागरूकता के न रहने पर संवेदना भी नहीं रहेगी |
 
एक असंवेदनशील व्यक्ति का जीवन सिर्फ़ उबासी से भरा रहेगा |
उबासी से भरा व्यक्ति उस उबासी को मिटाने के लिए कुछ भी कर सकता है,
वह नदी, पहाड़, मंदिर, धर्मस्थल, आसपास का वातावरण सबकुछ के दोहन के लिए तैयार रहेगा |
वह यह सबकुछ करेगा क्यूंकि उबासी में अशांति होती है, परन्तु व्यक्ति को शांति चाहिए,
वह इन दोहन के तरीके से शांति पाना तो चाहता है, जीवन को सार्थकता में जीना तो चाहता है
परन्तु वह ऐसा करने में अक्षम रहता है,
क्यूंकि शांति तो संवेदना में है, जो आती है जागरूकता से और यह व्यक्ति व्यस्त है मनाने में अँधा जश्न…
 
अब यह हमारे हाथ में है की हम अंधे जश्न का शिकार होते रहते हैं या फिर एक दिन जागरूक होने की कसम खाते हैं और संवेदना को जन्म देते हैं स्वयं के ही अंतर में, जिससे दोहन से अधिक सृजन के भागीदार बनें और बने रह सकें एक पूर्ण इन्सान बने रहने की यात्रा में,
यह यात्रा ही निरंतरता है जिसमें कोई भी अँधा जश्न विलीन हो जाता है…बस चुनना है तो यात्रा का मार्ग…
 
– अमित तिवारी
 
साल बीता, अच्छा बीता, बहुत कुछ मिला, बहुत कुछ फिसला भी, सीख मिली..
_ नए लोग मिले, कुछ से पहचान गाढ़ी हुई, कुछ से फीकी..
_ पढ़ा ख़ूब, लिखा भी, सुना बहुत, बोला भी, कमाया भी, गंवाया भी, मोह हुआ, मोहभंग भी..
_ भावुकता से अतिरेक घटाने में कुछ और सफल रहा..
_ हर बात साझा न करने का प्रयास किया, हर बात पर प्रतिक्रिया न देने का भी..
_ क्या नहीं करना, यह और अच्छे से जाना..
_ समय का मूल्य और अधिक समझा..
_ यात्राएँ की, मीठा कम किया, स्वास्थ्य के प्रति सचेत हुआ..
_ ख़ूब हँसा, रोया भी, ग़लतियाँ की, माफ़ी भी मांगी..
_ कुल मिलाकर थोड़ा और इंसान होने की कोशिश की..!!
 
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुछ छूट गया, रह गया,
किसी का वादा अधूरा रहा।
किसी की मुलाकात अधूरी रही।
किसी से सोहबत अधूरी रही।
किसी की मोहब्बत अधूरी रही।
किसी की सपने अधूरे रहे।
किसी के अपने अधूरे रहे।
हुए पूरे वो जिन्होंने समय की मांग को भांप कर समय रहते खुद को सचेत कर लिया।
परिवर्तन संसार का नियम है, इसी रीत को आगे बढ़ाते हुए परिवर्तन स्वीकार करते हुए नए साल को दिल खोल के गले लगाइए…..आप कमाल हैं, बेमिसाल हैं, होनहार हैं
आप बहुत खूबसूरत हैं, प्यारे हैं, खुद से प्यार कीजिए…………
इस ऊलजुलूल दुनियां में अपने आप को बचा के रखिए………..खुद को प्राथमिकता दीजिए, खुद से बढ़कर कुछ नहीं (खूब ख्याल रखिए अपना)
तरक्की इतनी भी न कर लीजिए कि अपने लोग नजर ना आएं……दुनिया बहुत छोटी है*
हम आज हैं कल नहीं, जब तक धड़कन चल रही…… मौज काटिए
– मस्त मौला  
 
साल भर की सीख
१ अतीत को भूल जाओ, हम सबके अतीत में कीचड़ के सिवा कुछ नहीं, वो जो बड़े है – वो कीचड़ से सने है और जो छोटे है – कीचड़ से अटे है, बेहतर है अतीत का ना गुणगान सुनो, ना कहो और ना ही याद रखो.
 
२ जीवन एक ही है, पण्डो पुजारियों, मौलवियों, फादर्स और गुरुओं ने पिछले और अगले जन्म की बात की है, स्वर्ग – नर्क की कपोल कल्पना को थोपा है ,सब भूलकर जिंदगी का आज जियो और अभी, बाकी जीवन अनिश्चित है.
 
३ जिंदगी में असफल होने, बदनाम होने, अकर्मण्य होने या अकेले होने से मत डरो, यह सब वे ही भोग सकते है – जो अलग है और बेहतर है, सबके समान होने में कोई नयापन नहीं है, अलग होना ही और भीड़ से अलग रहना ही चुनौती है और अक्सर बहादुर लोग ही इस गली में आते है.
 
४ असफल होने का अर्थ जीवन में सब कुछ खत्म हो जाना नहीं है, आपकी असफलता ही दूसरों की सफलता है, सबसे नीचे वाली सीढ़ी ना हो तो शिखर एक झटके ढह जाएगा, नींव मजबूत ना हो तो कोई भी कलश शिखर पर स्थापित नहीं हो सकेगा, असफल लोग ही सफलता को स्थापित करके नए सोपान बनाते है.
 
५ अपने आप पर विश्वास रखें – भले ही आप सबके साथ अपनी नज़र में भी एक समय के बाद किसी मोड़ पर गलत साबित हो जाएं, पर यह ध्यान रखिए कि सही – गलत कुछ होता नहीं, कोई भी यह तय नहीं कर सकता और ये सिर्फ सापेक्षता की बातें है – इसलिए अपने आप पर विश्वास रखें और वहीं करें – जो आपको भाता है और आप कर सकते है.
 
६ आपको जीवन में माता-पिता से लेकर बंधु-बांधव, कुनबा और दोस्तों के समूह – समाज मिलता है, पर आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपका साथ सिर्फ आप ही निभा सकते है, सबसे मिलकर रहिए – क्योंकि साठ-सत्तर साल तक के जीवन में हर पल आपको दूसरों की जरूरत पड़ती है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि आप पूर्णतया किसी पर निर्भर हो जाएं, सिर्फ अपने आपसे बातें करके अपनी जरूरतों को न्यूनतम करते जाइए – ताकि निर्भरता खत्म हो जाएं और आप स्वयं में सक्षम होकर सुकून से जी सकें, यह याद रखिए कि दिनभर नाराज रहो, झगड़ा करो – पर सूर्यास्त के समय सब भूल जाओ और रात का खाना सब एकसाथ टेबल पर खाओ.
 
७ अपने आपको कभी भी कम नहीं आंके, क्योंकि संसार के सारे सूत्र आपके होने से ही इर्द-गिर्द गुम्फित है और बुने हुए है, आपकी खामोशी या आपकी वाचालता ही आपके होने का सबूत है, इसलिए जरूरी हस्तक्षेप किसी भी माध्यम से करते रहिए, जब आपको लगें कि आपके हस्तक्षेप का कोई अर्थ नहीं, जवाब नहीं है तो चुप रहिए और इंतजार तब तक करिए – जब तक दूसरे छोर से कोई स्पंदन ना हो और फिर भी कोई हरकत ना हो तो बेहतर है आगे से रिस्पॉन्स करना बंद कर दीजिए, संसार कम से कम एकांकी मार्ग पर नहीं चल सकता, ट्रैफिक में ठोस विकल्पों के बाद ही एकांकी मार्ग की घोषणा की जाती है.
 
८ धीरे – धीरे उन सभी जगहों से खारिज करने की कला सीखिए – जहां आपको लगता है कि संत्रास, पीड़ा, तनाव, अवसाद या अपराध बोध महसूस होता है, आपके होने से परिवाद कायम हो सकते है, अनुतोष या प्रतिफल की हिस्सेदारी में संकट होने लगते हो और यह किसी भी स्तर का हो सकता है, खारिज होना या अंग्रेजी में कहते है Withdraw कर लेना एक दीर्घकालिक समझ और परिणामों का आईना बन सकता है.
 
९ बहुत ज़्यादा झगड़े और विवाद आपको बेचैन कर सकते है, बेहतर है जब सांस लेने में तकलीफ़ होने लगे तो वातावरण और जगह बदल देना चाहिए, खासकरके रिश्तों में यह कटुता सबसे पहले होती दिखती है, फिर घर एवं समाज के स्तर पर और अंत में प्रोफेशनल स्तर पर जिसके लिए कई विकल्प होते है, पर रिश्तों, घर, परिवार और समाज में कोई विकल्प नहीं होते, इसलिए स्वयं को सारी जगहों से विच्छेद करके अपनी हवाई और एकांत की दुनिया में जीने के लायक बना लेना चाहिए और सिर्फ मृत्यु या कोई आवश्यक अवसर पर ही आने – जाने का संबंध निर्वाह करने का कड़ा इरादा करना और क्रियान्वित करना चाहिए़, बाकी प्रोफेशनल स्तर पर तो कुछ सोचने – विचारने की जरूरत नहीं है संसार बहुत बड़ा है.
 
१० जीवन में बहुत थोड़े और छोटे सिद्धांत और मूल्य बनाए रखने चाहिए, ज़्यादा आदर्शवाद और अनुशासन दिखावा है, असल में जब तक हम अपनी ही सीमाओं और वर्जनाओं को नहीं तोड़ेंगे – तब तक हम जी ही नहीं पाएंगे, गंभीरता घातक है और संसार में मरे हुए लोगों की संख्या आज के जीवित लोगों से ज्यादा है, निश्चित ही वे सब भी गंभीर और बड़े मूल्यपरक या सिद्धांतवादी लोग रहें होंगे – पर आज हमको अपने से पहले की तीन पीढ़ी के लोगों के कर्म तो दूर – नाम भी याद नहीं, तो क्या ही कहा जाए, बस मजे से रहिए तनाव और अवसाद के बगैर.
 
नये साल का आना मतलब सिर्फ कैलेंडर बदलना ना हो जाएं, अभी तक की मस्ती को बरकरार रखते हुए जीते चले जाइए जब तक जीवन है आपका, और इसे मृत्यु के अलावा कोई नहीं छीन सकता यह विश्वास रखिए.
[ आपको लगता है कि इन सीखों में कुछ और जोड़ना चाहिए तो कमेंट्स में लिखिए मैं भी सीखूंगा ]
– Sandip Naik
 
 

सुविचार – प्रतिक्रिया – रिएक्ट – React- 085

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जब भी विपरीत परिस्थिति आपके सामने आए, दो मिनट रुक कर सोचें कि

मेरी कौन- सी प्रतिक्रिया मुझे सही दिशा में ले जाएगी.

इंसान के असफल होने का एक प्रमुख कारण _

_उसका बिना सोचे समझे _ प्रतिक्रिया देने की आदत है.

जब आप प्रतिक्रिया करने से पहले रुकते हैं तो _

_ आप दस गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं..

शांत होकर सोचने से हर समस्या का समाधान मिल जाता है.

जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने की जगह.. सोच- विचार कर प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

जीवन एक बड़ी यात्रा है, अतः हमें हर किसी को जवाब देने की..

_ और प्रत्येक चीज़ पर प्रतिक्रिया करने की कोई जरुरत नहीं है,,

_ जिस यात्रा का चुनाव हमने स्वयं किया हो, उसके उतार चढ़ाव हमें ही स्वीकारने होंगे..!!

किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लोभ को यदि कुछ वक़्त के लिए टाल दिया जाए, तो बाद में सोचने पर अपनी तुच्छता/महत्वहीनता को आसानी से स्वीकार किया जा सकता है.

_ क्योंकि जब हम लोगों को समझने लगते हैं तो शांत होने लगते हैं.!!

सुविचार – पर्व – त्यौहार – उत्सव – उल्लास – हर्षोल्लास दिवस -समारोह – फेस्टिवल- Festival – 084

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जिस दिन आपने खुल कर के अपनी जिंदगी जी ली बस वही त्यौहार है…

..बाकी सब कैलेंडर की डेट्स हैं…

** कोई भी उत्सव इतना खास नहीं होता, अच्छे से जीया गया जीवन ही खास होता है..!!

_ जिंदा रहना सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर मुझे अपने कपड़े या अन्य चीजें किसी और खास मौके के लिए क्यों बचाकर रखना चाहिए ?
“ज़िंदगी ही जब सबसे बड़ा अवसर है, तो हर दिन को खास मानकर जीना भी एक समझदारी है –
कल के लिए बचाया गया ‘आज’ अक्सर अधूरा रह जाता है.”
_ अक्सर हम जीवन को भविष्य के किसी “परफेक्ट दिन” के लिए रोक देते हैं,
और आज को बस रिहर्सल मानकर निकाल देते हैं.
_ अगर सच में मान लें कि ‘जिन्दा रहना ही सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर –
अच्छे कपड़े “किसी दिन” नहीं, आज के लिए हैं,
पसंदीदा जूते किसी समारोह के लिए नहीं, आज की चाल के लिए हैं, महक किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद को महसूस कराने के लिए है.
_ हम चीज़ें बचाकर इसलिए रखते हैं.. क्योंकि भीतर कहीं डर होता है –
“कहीं ये पल ज़ाया न हो जाए”
_ पर सच्चाई उलटी है –
पल चीज़ों के लिए नहीं होते, चीज़ें पलों के लिए होती हैं.
_ जो जीवन को टालता है,
वह धीरे-धीरे खुद को भी टालने लगता है.
_ और एक दिन समझ आता है – हमने सब संभाल कर रखा था… सिर्फ़ जीना भूल गए थे.
_ आज अगर जी रहे हो, तो आज ही अवसर है.
_ बाकी सब सिर्फ़ तारीख़ें.!!
त्यौहार ख़त्म हो गए हैं अब, अब सिर्फ तारीखें बची हैं.!!

जीवन एक यात्रा है, और यह यात्रा अकेले नहीं की जाती.. इसे उत्सव बनाइए..!

_ जब किसी के साथ हैं, तो सिर्फ़ शारीरिक रूप से ही नहीं, मन का साथ दीजिए.. क्योंकि असली साथ वही है.!!

उत्सव का कारण कभी भी और हर समय बनाया जा सकता है.

जीवन सुंदर है उन लोगों के कारण _ जो साधारण खुशियों को बड़े उत्सवों में बदलने की कला जानते हैं.

प्रसन्न रहना, संतुष्ट रहना, शांत रहना, उत्साहित रहना, जीवन उत्सव के रंग हैं.

इसलिए हर पल को जी भरकर जीओ, हर दिन महोत्सव है.

जब हम सार्थक जीवन [meaningful life] जीते हैं, तो हमें किसी उत्सव का इंतजार नहीं करना पड़ता,

_ हमारे जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि एक उत्सव [celebration] होती है.!!

पहले त्यौहार में उतना थोड़ा भी बहुत ज्यादा होता था,

_ _ अब बहुत ज्यादा में उतना बहुत की खुशी गुम सी है..!!

लोग अगले ही दिन भूल जाते हैं कि कल कोई उत्सव भी था..

_ लोग कितने प्रतिबद्ध [Committed] हैं अपने-अपने दुखों में लौटने के लिए.!!

त्यौहार, पर्व, उत्सव, चाहे उनका ताल्लुक देश से हो या व्यक्तिगत खास अवसरों से, जीवन में खुशियाँ लाते हैं.

हमें ये खुशी के अवसर कभी नहीं छोड़ने चाहिए..

_ जब हम इन्हें सेलिब्रेट करते हैं तो हमारे ख़ुशी के पल बढ़ जाते हैं.

किसी भी पर्व, त्यौहार या ख़ास अवसर में ऐसा कुछ न करें ..जिससे किसी की या आपकी ही ज़िंदगी तबाह हो जाए.

_ आप ख़ास अवसर को मनाएं, पूरे हर्षोल्लास से मनाएं.
_ लेकिन सावधानी का साथ ..एक पल को भी न छोड़ें.
_ जीवन अनमोल है, और ज़रा-सी लापरवाही जीवनभर का दर्द दे सकती है.

अब तो सभी त्यौहार हर साल आते हैं, चुपके से गुजर जाते हैं, _ऐसा क्यों हो रहा है   पिछले कई वर्षों से ?

पहले अपनी भीनी-भीनी खुशबू छोड़ कर जाते थे.

_ और अब ? अब क्या हो गया है जो यह त्यौहार पहले जैसे नहीं रहे ?

अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है, जो थोड़ी-बहुत खुशी दे जाता है ; _ चलिए, इसी खुशी को मना लूँ मैं..!!

_ त्यौहार खत्म होने के बाद के लम्हें को झेलना काफी कष्टकारी होता है.. खैर,

_ हम सभी जानते है कि जीवन में खुशियों का पल क्षण भर के लिए आता है.!!

त्योहारों के मायने बदल गए हैं, लोग बदल गए हैं, रिश्ते बदल गए और खुशियाँ तो ख़ैर.!

एक मेरे बचपन के त्यौहार थे..

_ अब तो जिंदगी की भागदौड़ ने सबकुछ खत्म कर दिया है…
_ जो प्रेम आपस में बचपन में था,, वो बड़े होने पर न जाने कहां खो जाता है…
_ क्या सच में हम समझदार होते हैं,, या बेवकूफ बनते चले जाते हैं…
_ मगर वो बचपन के त्यौहार काफी पीछे छूट चुके हैं..
_ अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है.!!
_ अब तो ऐसा लगने लगा है कि ये दिन आया ही क्यों.. और जब आ ही गया तो जल्दी बीत क्यों नहीं रहा.. _ फिर लगने लगता है कि ये फेस्टिवल जश्न के लिए नहीं आते.. बल्कि ये याद दिलाने आते हैं कि अब खुशी भी अजनबी लगने लगी है.!!
अब तो किसी भी फेस्टिवल का नाम सुनते ही अजीब सा एहसास होने लगता है,
_ और न जाने क्यों मेरे अंदर एक बेचैनी सी पैदा हो जाती है.

_ वो नीरस आवाज़ें अब मेरे कानों में मिठास नहीं लातीं, हँसी और खुशी का शोर अब बोझिल सा लगता है.
_ ऐसा लगता है मानो हर कोई बस खुशी, प्यार और अपनापन का अभिनय कर रहा है.
_ मुझे नहीं पता कि मुझे किससे नफ़रत है: लोगों से या इन रस्मों के पीछे छिपे झूठे सुकून से..
_ मैं बस इतना जानता हूँ कि मेरा दिल अब इन बंधनों को नहीं, सिर्फ़ सच्चे जुड़ाव को चाहता है.!!

ना पहले जैसी खुशी है न पहले जैसे लोग न पहले जैसा समय.. 
_ जैसे जैसे समय बीत रहा.. भावनाएं निर्जीव होती जा रही हैं.!!

हिन्दुओं में इतने त्यौहार होते हैं (अन्यों का पता नहीं) कि सब मनाने बैठो तो आदमी जीवन में और कुछ कर ही नहीं सकता..

_ करने लायक रहता ही नहीं..
_ किसी के पास इतना समय कहाँ है ?
_ हम सिर्फ़ जन्माष्टमी, होली, दिवाली मनाते हैं.!!

पर्व- त्योहार होते रहना चाहिए..

_ नहीं तो निगेटिविटी और नीरसता आ जायेगी।
_ और कितने लोगों के आमदनी पर फ़र्क पड़ने लगेगा;
_ हर समय पर्व- त्यौहार का ध्यान रहता है,
_ बड़ी बड़ी कम्पनियां ही नहीं छोटे मोटे धन्धे वालों को भी इन्तजार रहता है,
_ पर्व- त्यौहार का कि थोड़ा ज्यादा और महंगी बिक्री होगी और कुछ पैसे बच जायेंगे।
_ त्यौहार के बहाने ही सही कपड़े और श्रृंगार के सामान के साथ कुछ जरूरी सामान भी आ जायेगा..!!
_ जश्न की उम्मीद ही जिन्दगी को जीने के लिये सबसे मजबूत कड़ी है, _ वरना तो बेरंग जिन्दगी जीने के कोई मायने नहीं.!!!

कोई भी दिवस हो, कोई भी कार्यक्रम हो ..उसमें लगने वाला समय ..आटे में नमक जितना होना चाहिए,

_ यानी मुख्य कार्य कभी बाधित न हो ..इसका खयाल रखना चाहिए..
_त्योहार, दिवस, पर्व मनाइए …पर ध्यान रहे इसे गौण [secondary] और जीवन को प्रमुख स्थान दें..
..बाकी बड़ी बड़ी बातें, तर्क करने के लिए कुछ भी कहा जा सकता है..
_ अपवादों की बात नहीं करिए, अधिकतर क्या हो रहा ..उसपर विचार करिए न !!…
— हमें न गरीबी चाहिए और न ही अमीरी;
_हमें हमारे लिये सुविधाजनक जीवन चाहिए.!!

त्योहारों को मनाना हमारी परम्परा है लेकिन अब उनमें आवश्यक परिवर्तन ज़रूरी हैं.

पानी, दूध, अनाज, विद्युत ऊर्जा [ इलेक्ट्रिक ] या पेट्रोल- डीज़ल की बर्बादी और पर्यावरण की अशुद्धता- ऐसी समस्या है,

_जिस पर हम यदि गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हमारी लापरवाही को भुगतेगी.

_हमें अपने ‘साक्षर’ नहीं, सुशिक्षित होने का व्यवहार करना चाहिए.

_एक कहावत है- `बचाया हुआ यानी कमाया हुआ.’

उत्सव क्या है ? एक दिन का उल्लास ;

_ हम खुश ना होकर भी खुश होने और दिखने का अभिनय कर रहे होते हैं.
_ “जिससे भी बात करो तो सब परेशान जैसे कि इस दुनिया में कोई खुश हैं ही नहीं..”
__लेकिन जब आपकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे किरदार हों _ जाने अनजाने में वो आपको उस अपनेपन का एहसास करा दें, जो खून के रिश्ते ताउम्र नहीं करा पाते..
_ तो समझिए वही दिन उत्सव है और हर दिन उल्लास..!!

सुविचार – संगीत – Music – 083

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संगीत आत्मा को रोजमर्रा की जिंदगी की धूल से धो देता है.

जो भारी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है.

बाहर का संगीत तब ही महत्वपूर्ण है..

_ जब वो तुम्हें ” तुम्हारे अंदर के संगीत की याद दिलाए “

संगीत सुनना मानसिक और आत्मिक रूप से किसी से जुड़ने जैसा है.

अधिकांश समय, हम संगीत सुनते हैं क्योंकि यह हमें शांत करता है या हमारी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करता है.

लेकिन कभी-कभी, संगीत अन्य चीजों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है – किसी ऐसे व्यक्ति में रुचि दिखाने के लिए जिसे हम पसंद करते हैं या प्यार करते हैं,

हमारी आत्मा को शांत करने के लिए इसे सुनना, हमें दूसरी जगह ले जाना और हमारी समस्याओं को दूर करना..!!

इसके अलावा, जहाँ हम अपने विचारों को नहीं सुन सकते, केवल महसूस कर सकते हैं और इसका आनंद ले सकते हैं.

आजकल लोगों ने गाना- संगीत सुनना ही बंद-सा कर दिया है,

_ लोग तनावपूर्ण जीवन के इतने आदी हो गए हैं कि वे उन रुचियों को भूल गए हैं..
_ जो कभी उन्हें खुशी देती थीं.!!
कुछ गाने-म्यूजिक हमारे दिलो-दिमाग़ में ऐसे बस जाते हैं मानो हमारी ही अधूरी कहानी का हिस्सा हों.
_ वो वक़्त-बेवक़्त हमारी ज़बान पर आते हैं, कभी किसी पुराने दर्द को छू जाते हैं, तो कभी एक अजीब सा सुकून दे जाते हैं.
 _ न जाने क्यों, पर कुछ धुनें शब्दों से ज़्यादा हमें समझती हैं.

संगीत भी दवा का काम करता है बहुत बार..

_ जब मन भारी हो, उदास हो, हताश हो, और जब खुशी से पागल हो तब भी …!

🎶Music Therapy🎶

“जब सुर और ताल से मन शांत हो, तो शरीर अपने आप ठीक होने लगता है.”
_ “Music सिर्फ सुनने की चीज नहीं, बल्कि एक उपचार है जो दिल और दिमाग दोनों को छू लेता है.”

जीवन संगीत है,  सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है.

Life is music. When this music is played in a melodious manner, it is pleasing and sweet.

“संगीत में अस्तित्व के हर शानदार पहलू को उत्साहित रूप से व्यक्त करने की क्षमता है, जबकि डाउनबीट पर उस पीड़ा को व्यक्त करने की क्षमता है जो एक इंसान समय की क्षणभंगुर प्रकृति और जीने और मरने की रहस्यमय यातना को समझने पर अनुभव करता है.

संगीत जीवन के प्रतीकों और चरणों, अस्तित्व और गैर-अस्तित्व दोनों को संप्रेषित करने की अपनी क्षमता में अकेला है.

“Music has the ability to express in the upbeat every brilliant aspect of existence, while on the downbeat convey the anguish that a human being experiences when apprehending the fleeting nature of time, and the mysterious torture of living and dying.

Music stands alone in its ability to communicate the symbols and phases of life, both being and nonbeing.” – Kilroy J. Oldster

सुविचार – नवाब – बादशाह – बादशाहत – बादशाही – अलमस्त – फ़क़ीर – फ़कीर – फकीर – फ़क़ीरी – फ़कीरी – फकीरी – 082

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अपनी ग़ैरत के लिए फ़ाक़ा कशी भी मंज़ूर,

तेरी शर्तों पे ख़ज़ाना भी नहीं चाहते हम – हसीब सोज़

फकीरों को कोई बर्दाश्त नहीं करता, असल में सच्चे फकीर कहीं भी बर्दाश्त नहीं किये जाते _ क्योंकि सच्चे फकीरों की सच्चाई लोगों को काटती है ;

_ उनकी सच्चाई से लोगों के झूठ नंगे हो जाते हैं, उनकी सच्चाई से लोगों के मुखौटे गिर जाते हैं.

फ़क़ीर : जिसे न दुख से मतलब न सुख से, न दिन से न रात से, न सम्मान से मतलब न ही अपमान, न किसी के पाने की लालसा न किसी के खोने का ग़म !!

_ जिसकी सांसारिक इच्छाएं मिट गईं हो, जिसे सभी मनुष्यों में एक ही रब दिखे, जिसे सारा संसार एक लगे, जो केवल ब्रह्म की खोज में हो…
शायद यही वैराग्य है और जिनमें ये गुण हैं शायद वही बैरागी ….. अब और किसी के अनुसार और क्या हो सकता है ये वही जाने.!!

फ़क़ीर : जो अपनी मस्त धुन में मदमस्त मस्तमौला है, जिसे दुनिया के रंग में रंगने का कोई शौक नहीं,

_ जो ख़ुद की ज़िन्दगी ख़ुद के बनाए तरीके से जीना पसंद करता है..!!

ये शक्ल ये सूरत सब क़र्ज़ पे ले रक्खी है, वक़्त आने पर इसके मालिक को लौटाना होगा.!!

किस्मत भी बादशाह उसी को बनाती है ; जो खुद कुछ करने का हुनर रखता है.

दिल अगर फ़क़ीरी पे उतर आए,,,_तो उलझ पड़ता है बादशाहों से….!!!

ये फकीरों की महफ़िल है चले आओ, हम जैसे लोग हैसियत नहीं पूछते.!!

न ढूंढ हमें दुनिया की भीड़ मैं, हम फ़क़ीर हैं हमेशा तन्हा ही मिलते हैं .!!

हम फ़क़ीर मिलते हैं टूट कर और बिछड़ते हैं शान से..!!

सलामत रहे गुरुर आपका, हम तो वैसे भी फ़क़ीर ठहरे..!!

बादशाहों का इंतज़ार करे.. इतनी फुर्सत कहाँ फकीरों को..!!

अध्यात्म का वास्तविक रूप फक्कड़पन /फकीरी में ही है.-  इसे कोई नहीं बदल सकता.!!

पूछ के मेरा पता वक्त जाया न करो, मैं तो फ़क़ीर हूं जानें किधर जाऊंगा.!!

फकीरों की फ़कीरी पर मत जाइए,

_ उसके भीतर बहुत बेतरतीब सा एक शख्स रहता है कोई.!!

“मुझे भीख की खुशियां मंजूर नहीं, _ मैं जीता हूँ अपनी तकलीफों में भी नवाबों की तरह.”

_ किस्मत की गुलामी नहीं करता मैं, _ अपनी मेहनत का नवाब हूं मैं !

मेरी ग़ुरबत को देख कर रास्ता ना बदल मुर्शद,

_ मैं दिल का बादशाह हूँ, मुक़द्दर तो खुदा लिखता है..!!

जरुरी नहीं कि फकीर फटेहाल ही दिखे,

_ जेब वो जगह है जिसे कोई न देख पाया.!!

हम फकीरों की सूरत पर ना जाना, _ _ हम कई रूप धर लेते हैं !

गुनगुनाता जा रहा था एक फ़क़ीर, धूप रहती है ना साया देर तक..!!

वक्त के एक तमाचे की देर है प्यारे, मेरी फकीरी क्या तेरी बादशाही क्या..!!

अमीरी में क्या है जो फकीरी में नहीं, _ दुनिया मेरी है नहीं तो दुनिया तेरी भी नही.

हर मांगने वाले को फ़क़ीर कहते है पर इसका मतलब ये नही है के जो सिर्फ सड़को पर गली मोहल्लों में फिर कर मांगते हैं, _ वही सिर्फ फ़क़ीर कहलाते हैं,

असल में फ़क़ीर तो हम सब हैं जो कुछ न कुछ हर रोज़ खुदा से मांगते हैं, _ कभी अपनी ज़रूरतों की चीज़ें कभी अपनी ज़िंदगी की भीख, कभी अपनी खुशी की भीख,,,, तो फ़क़ीर हम सब हैं

_ बस हमारा मांगने का तरीका उन मांगने वालो से थोड़ा अलग है जो सड़को पर मांगते हैं और हम दिल मे मांगते हैं तो हम सब फ़क़ीर हैं.

जीवन को तो बेशर्त ही जिया जा सकता है, दूसरों की तो छोड़ें _ जीवन को अपनी भी शर्तों पर नहीं जिया जा सकता है.

जीवन की अपनी ही मौज है, और अपनी मौज में ही जीवन जिया जा सकता है, दूसरों की मौज में नहीं.

दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से तो बेहतर है कि अपनी ही मौज में फ़क़ीर हो जायें. दूसरों की शर्तों पर सम्राट बन कर कभी आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता, अपनी मौज में फ़क़ीर बन भी वो आनन्द मिलता है, जो दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से नहीं मिलता.

जरूरतों के मुताबिक जियो, _ ख़्वाहिश मुताबिक नहीं. _ क्यूंकि

_ जरुरत फ़क़ीर की भी पूरी हो जाती है, _ ख्वाहिश बादशाह की भी अधूरी रह जाती है.

” हम अपनी फ़क़ीरी में भी बादशाह रहे, _ यह उन लोगों को बहुत अखरा,

_ जो दौलत कमा कर भी गरीब रहे और हम, _ आज भी बादशाह हैं,”

ज़िन्दगी सब कुछ देकर भी, किसी ना किसी चीज के लिए _

_ फकीर बना कर ही रखती है..

किसी ने पूंछा … फकीर कौन होता है … !!

_ मैंने कहा …जिसका कोई नहीं और … जो सबका..!!

जिसका ये ऐलान है कि वो मज़े में है,

_ या तो वो फ़कीर है या फिर नशे में है.!!

सच ही कहा था मुझ से एक फ़क़ीर ने..

_ कि तुझे लोग अपना तो कहेंगे, पर कभी अपना नहीं मानेंगे !!

आप फकीरों से क्या लोगे, आप फकीरों को क्या दोगे..

_ कभी ज़िक्र ए यार आएगा, बार-बार मेरे बारे में सोचोगे..!!

फ़कीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब,

बादशाही का अन्दाज़ ख़ुद ब ख़ुद आ जायेगा.

दुसरो की शर्तों से सुल्तान बनने से अच्छा, _

_खुद की खुशी से फकीर बनना ज्यादा बेहतर है.

हमें मंजूर नही था तेरी शर्तों पर सुल्तान बनना, _

_ इसलिए मै अपनी सल्तनत का फकीर बन गया…

कभी फ़क़ीर, कभी शाह, कभी दिलनशीं की तरह.. _

_ जिन्दगी, हमसे रोज मिलती है अजनबी की तरह..

जिसका ये एलान है कि वो मजे में है,

_ या तो वो फ़कीर है या नशे में है..!!!

मैं खुल कर हंस रहा हूं फकीर होते हुए,

वो मुस्करा भी नहीं पाया अमीर होते हुए.

फकीरी न दे सकी मेरे ज़मीर को शिकस्त,

_ झुक कर हर किसी से नहीं मिलता हूँ मैं..!!

खुद से मिलना है तो दिल से फकीर बन जाओ,_

_ मिट सके ना जो वो पत्थर की लकीर बन जाओ..

भौतिक जीवन की विपदाएँ सहते रहता है,

_ घर में रह कर भी दिल से फ़क़ीर होता है..!!

सब कुछ चला जाएगा फिर भी मुस्कुराएंगे,

_ हम दिल में एक फ़क़ीर रखा करते हैं.!!

मंजिल उनको मुबारक जिन्हें होड़ है कुछ पाने की, _

_ हम तो अल्हड़ फ़क़ीर हैं जो हर दम सफ़र करते हैं !!

ज़लील कर के जिस फ़क़ीर को किया तूने रुखसत… _

_ वो भीख लेनें नहीं…. तुझे दुआएँ देने आता था.. 

फ़कीराना तबियत हैं…मिले तो बाँट देते हैं,

_ हमसे तो दुआओं की जमाखोरी नहीं होती….!!

फकीरी ला देती है हुनर चुप रहने का,

अमीरी जरा सी भी हो तो शोर बहुत करती है.

ये खाली जेबें, फ़कीर हुलिया, उदास आंखें..

_ हमें जो कोई गले लगाए, तो क्यों लगाए !!

हम गृहस्थ आश्रम में कर्म करते हुए बैराग और फ़क़ीर मन को रख सकते हैं,

_ सिर्फ आत्मबल की जरूरत है.!!

सुविचार – Financial Planning – वित्तीय योजना – 081

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जिंदगी एक खूबसूरत रेस की तरह है.. अगर आप स्थिति के हिसाब से खुद को अपग्रेड करते जा रहे हैं तो आप पीछे नहीं रहेंगे..!!

योजना जितनी गुप्त रहेगी, सफलता उतनी ही उच्च रहेगी.!!

कुछ समय से Insurance / SIP / Mutual Fund / Equity को लेकर परफ़ेक्ट मार्केटिंग का माहौल बना हुआ है।

मैं थोड़ा सा assume कर रहा हूँ कि आपकी स्थिति १-२ हज़ार महीना इन्वेस्ट कर पाने की है तो ऐसे में आपकी आर्थिक हालत दयनीय वाली है। ऐसे में आपको किसी भी प्रोडक्ट में इन्वेस्ट करने से पहले ख़ुद में इन्वेस्ट करना है। हाँ जी आप भी एक प्रोडक्ट हैं।
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💸आपसे बड़ा कोई प्रोडक्ट नहीं है। ख़ुद की शिक्षा में इन्वेस्ट करिए, स्किल अपग्रेड में इन्वेस्ट करिए, ज़रूरी कोर्स करिए और सबसे पहले अपनी इनकम बढ़ाइए। बिना इनकम बढ़ाये हुए १ भी रुपये किसी भी स्कीम में डालने की आवश्यकता नहीं है।
ख़ुद से पूछिये आप इतना कम क्यों कमा रहे _ जबकि आप के ही साथ के बाक़ी लोग _ इथिकली आपसे कई गुना ज़्यादा कमा रहे।
शिक्षा से बड़ा कोई भी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट नहीं है। आज की शिक्षा इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट ही है, तो फर्स्ट इन्वेस्टमेंट शिक्षा को ही जाना चाहिए। स्किल अपग्रेड को ही जाना चाहिए।
अगर कम कमा रहे हैं और इतनी बुद्धि है कि भविष्य का सोच रहे तो शिक्षा से ज़्यादा कन्फर्म और हाई रिटर्न मिलेगा ही नहीं।
गारंटिड रिटर्न और अमीर बनने के लिए सबसे पहले शिक्षा में इन्वेस्ट करिए।
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💸जब शिक्षा से sufficient पैसे आने लगें तो अगले पड़ाव में हेल्थ इन्शुरन्स लीजिए।यंग हैं तो ३ लाख कवर वाला प्लान ले सकते हैं, उम्र बढ़ती जाए तो अपने शरीर के रिस्पांस के हिसाब से कवर बढ़ाते जाये, वैसे कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत हल्का सा ही बढ़ता है।
मैं इन्शुरन्स के ही डोमेन में कस्टमर सर्विस में रहा हूँ और इन्शुरन्स प्रॉडक्ट्स का USA से सर्टिफ़ाइड ट्रेनर हूँ तो डिटेल में इसके कारण फिर कभी समझा दूँगा।
मोटा मोटा ये समझिए छोटे क्लेम ही ज़्यादा आते हैं, जीवन में बहुत बड़ा लॉस होने के चांसेज बहुत कम होते हैं _ इसलिए कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ता।
_तो उम्र के हिसाब से और अपनी फ़िटनेस के हिसाब से कवर बढ़ाते रहिए। कम से कम ४५ की उम्र तक फ़िटनेस इतनी रखिए कि ३-५ लाख के कवर में ही आप cure कर जायें।
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💸जब हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिये और आपकी शिक्षा आपको ठीक ठाक कमा कर दे रही तो _ अगले चरण में आप पर जो भी लोग डिपेंडेंट हैं _ उनके लिये शिक्षा का स्कोप देखिए _ और उनको अपनी डिपेंडेंसी से बाहर करिए, _वो बस अपने भर का ही कमा लें _उतना भी आपके लिये बहुत है,
_ ये इसलिए भी आवश्यक है ताकि आपको अचानक कुछ हो भी तो आप भूत बनकर भी ये न सोचें कि वो लोग तो अब भूखों मर रहे हैं ।
यदि उनके केस में संभव नहीं है और डिपेंडेंसी लगातार आप पर ही रहनी है _ तो उनलोगों का भी हेल्थ इन्शुरन्स अपने साथ ख़रीदिए।
_आप पर डिपेंडेंट बंदा पहले तो ज़िंदा रहे बाक़ी सब चीज़ें उसके बाद में देखी जाती हैं।
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💸एक बार आप शिक्षित होकर ठीक ठाक कमा रहे और आप पर डिपेंडेंट लोग या तो आगे बढ़ गए हैं या फिर अभी आप पर ही डिपेंडेंट हैं। हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिया है।
_ तो अगला चरण है अपनी ख़ुद की फिजिकल फ़िटनेस पर इन्वेस्ट करिए, बेहतर भोजन ख़रीदिए, बेहतर कपड़े, बेहतर जूते, बेहतर घड़ी, बेहतर फ़ोन और बेहतर फिजीक, ये सब चीजें इसलिए इंपोर्टेंट हैं _ताकि आप पहले तो फिट रह कर लंबे समय तक बिना किसी बीमारी के नौकरी या व्यवसाय कर सकें।
_ पैसा अपने आप इनसे आता है, शिक्षा वाला क्लाज पहले लगायें। फिट, बेहतर दिखने वाले लोगों को बेहतर मौक़े मिलते हैं,
_किसी भी फ़ालतू फ़िलासफ़ी में पड़े बिना चुपचाप सबसे पहले अपने आप को बेहतर दिखने लायक़ बनाइए।
_नैचुरली जो मिला वो भगवान से मिला उसके बाद कपड़ों इत्यादि में इन्वेस्ट करके अपने आप को मार्केट में कंप्टीशन में लाइए।
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💸जब शिक्षा भी हो गई, शिक्षा से पैसा भी बन रहा है। हेल्थ भी कवर हो गई, आप पर डिपेंडेंट लोग भी सेट हो गये या फिर आप उनको कवर कर ले गये तब अगले चरण में टर्म इन्शुरन्स लेना है, _वो भी सिर्फ़ तब _जब आप पर कोई बहुत जायदा डिपेंडेंट है। अगर आप पर कोई डिपेंडेंट नहीं है तो टर्म insurance भी बकवास प्रोडक्ट है।
_उदाहरण के लिए कुछ एकल परिवारों में पति पत्नी दोनों बहुत अच्छे से सेटेल होते हैं और इंडिविजुअली भी कई करोड़ की हैसियत रखते हैं। उधर भी लोग टर्म इन्शुरन्स लेके सोचते हैं कि मैं मरूँगा तो मेरी बीवी को १ करोड़ मिलेगा तो उसके आगे के खर्चे चलेंगे। भाई साहब ऐसे घरों में सिर्फ़ आप इंपोर्टेंट हैं। आपके मरने के बाद का पैसा नहीं।
_ये समझना ज़रूरी है कि पैसा बहुत ज़्यादा आवश्यक चीज है लेकिन एक नियत अमाउंट से ज़्यादा नहीं।
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💸जब उपरोक्त सब कुछ हो जाये तो कुछ पैसा लिक्विडिटी के रूप में रखिए। ध्यान रखिए कभी भी एक बैंक में ५ लाख से ज़्यादा रुपये मत रखिए। जब ५ लाख से ज़्यादा होने लगे तो खाता एक अन्य बैंक में भी खुलवा कर वहाँ भी ५ लाख तक रखिए।
_assume करूँगा कि आप ऊपर लिखे स्टेप्स से अच्छा ख़ासा कमा रहे हैं और ऐसे में २५-३० लाख तक कैश होल्ड करना उचित है, उससे ज़्यादा नहीं।
_ज़्यादा नहीं कमा रहे तो कम से कम १ वर्ष तक नौकरी न करने पर आपका घर चल जाये इसलिए कैश immidiate डिस्पोजल पर होना चाहिये।
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💸जब उपरोक्त सब हो गया हो तो पहला इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी में करिए। लेकिन ध्यान रखिए प्रॉपर्टी उतनी ही दूर ख़रीदिए जहां आप जब मन करे तब पहुँच कर जाँच सकें। अव्वल तो प्रॉपर्टी वही ख़रीदिए जहां रहते हैं।
_ और जब वहाँ से मूव करिए तो प्रॉपर्टी बेच के आगे नई जगह पर ले लीजिए। प्रॉपर्टी से कभी दिल नहीं लगाना चाहिए।
_ दिल लगाने के लिए पत्नी/प्रेमिका, माता पिता, बच्चे, मित्र तथा पालतू जानवर बस इतना ही उचित है। _ अच्छा एक बात और, जिस घर में आप रहते हैं _ वो जबतक आप उसमे रहते हैं _ वो asset सिर्फ़ काग़ज़ों पर होती है, रियल लाइफ में liability ही होती है। क्योंकि जब तक आप उसमे रहेंगे तब तक बेच के encash नहीं ही कर सकते _ तो उसको कभी अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग में as a asset मत कैलकुलेट करिए।
_ वो बात अलग है बेचने पर उससे पैसा मिलता है, लेकिन अगर आप उसको बेचते हैं तो, तुरंत कोई ख़रीदनी भी पड़ती है, ताकि रेंट से बचें।
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💸उपरोक्त में से कोई भी काम करने के लिए आपको पूरा जीवन लगेगा ही नहीं। लोग ये कहेंगे ऊपर जो कुछ लिखा है उतना करने में ही तो पूरा जीवन निकल जाता है _ लेकिन उपरोक्त लिखा सब कुछ अगर सही सीक्वेंस में फॉलो किया जाये तो मात्र १० वर्ष में सब कुछ हो जाता है।
_ और अगर आपसे नहीं हुआ तो यक़ीन मानिए, आपने शिक्षा की इन्वेस्टमेंट में ही गड़बड़ करी है। फिर से कहूँगा स्टार्ट अगेन फ्रॉम एजुकेशन एंड स्किल अपग्रेड।
_ अंधा पैसा पे करने वाले लोग पड़े हुए हैं। बस राइट एम्प्लोयी चाहिए।
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💸अब जब उपरोक्त सब हो गया। आइये अब रथ को Insurance/SIP/Equity/Mutual Fund इत्यादि पर ले चलते हैं।
_ अब फ्री माइंड से किसी में भी इन्वेस्ट करिए, आप 15-20% तक रिटर्न अपने आप बनाने लगेंगे क्योंकि आपकी रिस्क लेने और होल्ड करने की क्षमता बढ़ी हुई होगी।
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💸ये लिखे हुए concepts मार्केट से एकदम उल्टे हैं लेकिन यही इफेक्टिव हैं। एक बार फिर से कहना चाहूँगा Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता।
_ जब भी आपको कोई confusion हो तो _ आप इसी लाइन को बार बार दोहराये कि “Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता”
_ Insurance सिर्फ़ और सिर्फ़ रिस्क कवर के लिए ख़रीदिए _ जोकि हेल्थ कवर के रूप में आप आलरेडी ख़रीद चुके हैं।
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💸इन्शुरन्स कितना लेना चाहिए, यदि Term इन्शुरन्स ले रहे हैं तो अपने जीवन में अनुमानित आप वर्तमान स्थितियों में जितना कमा सकते हैं _वही आपकी लिमिट होनी चाहिए। उससे ज़्यादा नहीं लेनी।
_ याद रखिए पैदा होने के बाद पूरी दुनिया के खर्चे उठाने का जिम्मा आपका नहीं है। कुछ जिम्मा बाक़ी पैदा हुए लोगों का भी है।
_ आपके मरने के बाद दुनिया कैसे चल रही इससे आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। आपकी पत्नी हो सकता है _ दूसरी शादी कर के सैटल हो जाये, बच्चे कहीं और चले जायें, _इसलिए फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करिए, जीते जी financial नाईट मेयर मत बनाइए।
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💸गहनों में इन्वेस्ट नहीं करना चाहिए। गहने सिर्फ़ अपनी पत्नी, माँ या बेटी के शृंगार अथवा उपहार के लिए ख़रीदिए।
_ ऐसा भी सिर्फ़ तब करिए जब उन्हें भी ये पसंद हो, सोना और चाँदी के अलावा कोई भी गहना न ख़रीदें।
_ इन्वेस्टमेंट के लिए कभी गहने नहीं लेने चाहिए। अगर बहुत मन करे तो गोल्ड बिस्किट ख़रीदिए, लेकिन ध्यान रखिए आपके घर पर कभी भी चोरी हो सकती है, घर का कोई भी सदस्य कभी भी चुरा कर बेच सकता है।
_ यहाँ मुझे कोई सोशल या मोरल लेक्चर न दें। लेकिन ऐसा नहीं है कि गहने ख़रीदने ही नहीं है _लेकिन इनको इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं ख़रीदना _इसलिए इनको फाइनेंसियल प्लानिंग में मत लाइए।
_ अपने जीवन में मौजूद ज़रूरी स्त्रियों (पत्नी/प्रेमिका, माँ, बेटी) को इम्प्रैस करने के लिए ज़रूर ख़रीदें। गहने अगर उन्हें खुश करते हैं तो आपकी क्षमता के हिसाब से उसमे खर्चा बुरा नहीं है।
हीरे चूँकि लैब में भी बनाये जा सकते हैं _इसलिए हीरे तो बिलकुल भी रीसेल में नहीं जाते _जबतक कि आपके हाथ में सीधा कोहिनूर ही न हो।
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💸अगर सब कुछ उपरोक्त सीक्वेंस में आपकी लाइफ में चल ही रहा है तो फिर further बहुतेरे इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स है। एक्स्ट्रा पड़ा पैसा PPF, NPS, Equity, SIP, Mutual Fund तथा प्रॉपर्टी इत्यादि में मन मुताबिक़ डालिये। सबसे ठीक ठाक रिटर्न आने लगेगा।
_अगर आपकी लाइफ़ में सब चीजें उपरोक्त सीक्वेंस में नहीं बन पा रही हैं _क्योंकि आप कम कमाते हैं तो लेख को शुरू से पढ़ना शुरू करिए और लाइफ में फिर से शुरू करिए।
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💸इन्वेस्ट करके करोड़पति बनने का सपना त्याग दीजिये। १% भी ऐसे लोग नहीं हैं जो इन्वेस्ट करके अमीर बनते हों। इन्वेस्ट करके पैसा कमाना लाइफ की पैसा कमाने की सबसे आख़िरी स्टेज है। पहली स्टेज हमेशा काम करके पैसा कमाने की है। इसी स्टेज से दुनिया और आपके आस पास के लोग अमीर बने होते हैं।
इन्वेस्ट करके अमीर बनने का कोई फ़ितूर दिमाग़ से निकाल दीजिये अगर आपकी बेसिक कमाई ही बहुत कम है और आप day to day ख़र्चों के लिए भी स्ट्रगल ही करते हैं।
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💸अल्ट्रा लॉग टर्म फाइनेंसियल प्लानिंग नहीं करनी है। मार्केट डायनेमिक्स १०-१५ साल में पूरी तरह बदल जाते हैं। आपके द्वारा २० साल पहले लिये गये सभी पहले आज आउटडेटेड होंगे। इसलिए १०-१५ साल का टारगेट रक्खें बस।
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💸रिटायरमेंट के लिए रेंटल इनकम का प्लान करें। और रिटायरमेंट किसी आश्रम में अध्यात्म करते हुए बिताएँ।
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–Anurag Tiwari
ये आदतें आपको हमेशा गरीब बनाए रखेंगी. सावधान रहें !!

_ यदि आप एक ऐसा आदमी बनना चाहते हैं जो अपने जीवन पर नियंत्रण रखता है, सम्मानित है, और वित्तीय रूप से सुरक्षित है, तो पैसे के मामले में आपको कुछ बातें कभी नहीं करनी चाहिए.
_ एक पुरुष की वित्तीय स्थिति केवल उसके बैंक खाते को नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास, रिश्तों, अवसरों, और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है.
_ बहुत से पुरुष मेहनत करते हैं, फिर भी गरीब रहते हैं. क्यों ?
_ क्योंकि पैसे कमाना एक बात है, लेकिन उन्हें बनाए रखना और बढ़ाना दूसरी बात है.
_ यदि आप अपनी वित्तीय स्थिति पर काबू नहीं पाते, तो आप हमेशा किसी और आदमी के नियंत्रण में रहेंगे.
_ यहां कुछ वित्तीय गलतियाँ दी गई हैं जो आपको हमेशा कमजोर, अटका हुआ, और संघर्षशील बनाए रखेंगी:
1. इम्प्रेस करने के लिए खर्च करना, प्रगति के लिए निवेश नहीं करना:
_ अगर आप सिर्फ दिखावे के लिए पैसे खर्च करते हैं, तो आप खुद को गरीब बनाने की ओर बढ़ रहे हैं.
_ राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के शोध से पता चला है कि अधिकांश अमीर लोग अपनी जरूरतों से कम खर्च करते हैं, जबकि कई मध्यवर्गीय और गरीब लोग लक्जरी सामानों पर ज्यादा खर्च करते हैं.
_ असली ताकत संपत्ति में है। निवेश में। ऐसी क्षमताओं में जो पैसे उत्पन्न करती हैं। महंगे कपड़े नहीं जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते.
2. एक ही स्रोत पर निर्भर रहना:
_ यदि आपकी पूरी वित्तीय जिंदगी एक ही वेतन या एक ही व्यवसाय पर निर्भर है, तो आप एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं.
_ औसत करोड़पति के पास 7 आय के स्रोत होते हैं, लेकिन अधिकांश पुरुषों के पास केवल एक होता है.
_ यदि वही खत्म हो जाता है, तो क्या होता है ? घबराहट, संघर्ष, निर्भरता.
_ आय के कई स्रोत बनाना शुरू करें. भले ही आपके पास नौकरी हो, एक नई कौशल सीखें, एक साइड हसल शुरू करें, निवेश करें.
3. वित्तीय साक्षरता की उपेक्षा करना:
_ पैसे के भी अपने नियम होते हैं, और यदि आप उन्हें नहीं सीखते, तो आप हमेशा हारते रहेंगे.
_ राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा संस्थान के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70% लॉटरी विजेता कुछ ही वर्षों में गरीब हो जाते हैं, क्योंकि उन्होंने संपत्ति प्रबंधन के तरीके नहीं सीखे थे.
_ चाहे आप कितना भी कमाते हों, अगर आप पैसे को सही तरीके से नहीं संभालते, तो वह जल्दी खत्म हो जाएगा.
_ वित्तीय किताबें पढ़ें, अमीर लोगों का अध्ययन करें, और जो सीखें उसे लागू करें. अज्ञानता महंगी होती है.
4. गलत कारणों के लिए कर्ज लेना:
_ अच्छा कर्ज और बुरा कर्ज दोनों होते हैं.
_ अच्छा कर्ज आपको और अमीर बनाता है—जैसे कि व्यापार या रियल एस्टेट में निवेश के लिए उधारी लेना.
_ बुरा कर्ज आपको गरीब बनाता है—जैसे कि ऐसी चीज़ें खरीदना जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते केवल दिखावा करने के लिए.
_ यदि आप हमेशा कर्ज ले रहे हैं और वह कर्ज सिर्फ आपकी जरूरतों के बजाय भौतिक वस्तुओं के लिए है, तो आप एक वित्तीय गड्ढे में गिर रहे हैं.
5. “किस्मत” पर निर्भर रहना, रणनीति नहीं:
_ वे पुरुष जो “बड़े ब्रेक” या “भाग्यशाली अवसर” का इंतजार करते हैं, वे गरीब रहेंगे, जबकि अन्य पुरुष रणनीतिक रूप से संपत्ति बना रहे होंगे.
_ सफलता योजना, क्रिया और अनुशासन का परिणाम है, न कि किसी चमत्कार का.
_ चमत्कार का इंतजार करना बंद करें, स्मार्ट कदमों के माध्यम से खुद चमत्कार बनें.
6. जल्दी निवेश नहीं करना:
_ फेडरल रिजर्व के एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग अपनी 20s में निवेश करना शुरू करते हैं, वे अपनी 30s या 40s में निवेश करने वालों की तुलना में अधिक संभावना रखते हैं कि वे समृद्ध रूप से सेवानिवृत्त हो जाएं.
_ चाहे आप अब कितना भी कम कमा रहे हों, बचत और निवेश शुरू करें.
_ जितनी जल्दी आप शुरू करेंगे, उतना बड़ा आपका वित्तीय स्वतंत्रता होगा.
7. महिलाओं को अपने वित्तीय निर्णयों पर नियंत्रण देना:
_ एक असली पुरुष अपनी वित्तीय जिंदगी का नेतृत्व करता है.
_ बहुत से पुरुष पैसे के फैसले महिलाओं को प्रभावित करने के लिए लेते हैं—महंगे गिफ्ट खरीदना, महंगे डिनर पर जाना.. जबकि वे संघर्ष कर रहे होते हैं, या ऐसे जीवनशैली को फंड करना.. जिसे वे संभाल नहीं सकते.
_ एक महिला को आपके दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए, न कि आपके वॉलेट को खाली करना.
_ जो महिला सच में आपकी कद्र करती है, वह आपकी वित्तीय वृद्धि का समर्थन करेगी, न कि उसे नष्ट करेगी.
निष्कर्ष:
_ आपकी वित्तीय स्वतंत्रता आपके हाथ में है.
_ अगर आप इन गलतियों को बार-बार करेंगे, तो आप हमेशा संघर्ष करते रहेंगे, निर्भर रहेंगे, और सीमित रहेंगे.
_ लेकिन अगर आप नियंत्रण प्राप्त करते हैं—वित्तीय शिक्षा प्राप्त करते हैं, आय के कई स्रोत बनाते हैं, समझदारी से निवेश करते हैं, और स्मार्ट तरीके से खर्च करते हैं—तो आप हमेशा अपने भाग्य के मालिक होंगे.
_ अपने पैसों को नियंत्रित करें, या उसे नियंत्रित होने दें.. निर्णय आपका है.!!

सुविचार – काम, कार्य, धंधा, रोजगार – बेरोजगार, बेरोजगारी – 080

उनसे पूछिए कैसा लगता है जीवन का एक दिन को भी गुजारना..

_ जिनके पास काबिलियत तो है, परन्तु उनकी काबिलियत के अनुसार उन्हें रोजगार नहीं मिलता..

_ और इस वजह से वो _ बेरोजगारी के आग में पल – पल जलते हैं..

सता रहा है डर भविष्य का, अभिशाप बन गई बेरोजगारी है,

_ कैसे गुजारा होगा परिवार का, सिर पर हज़ारों ज़िम्मेदारी है..!!
ये बहुत तकलीफ देह होता है.. जब आप अपने जीने के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधनों की कमी से झूझ रहे हों.

_ कितना भी सकारात्मक सोच लो, लेकिन अंततः वास्तविकता आप को झकझोर कर रख देती है.!!

काम हमारे शरीर और दिमाग के लिए एक सबसे अच्छा व्यायाम है, जो जीवन में वास्तविक आनंद लाता है,

_ कार्य कौशल विकास के साथ-साथ नए अवसरों के लिए भी रास्ता निकालता है.

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काम को इतना बिगाड़ देते हैं कि _एक समय ऐसा आता है _जब उन्हें कहना पड़ता है कि, ‘रहने दो, मैं खुद कर लूंगा’

_ और फिर उन्हें काम से मुक्त कर के _सही व्यक्ति को _ उस काम को _अपने ऊपर ले लेना पड़ता है.

जो लोग काम करते हैं वो ज्यादा बात नहीं करते..

_ और जो ज्यादा बात करते हैं वो बातों के अलावा कुछ कर नहीं पाते.!!

बेरोजगारी किसी इंसान को उतना मायूस नहीं करती है..

_ जितना की उसके ख़ुद के परिवार वालों और दोस्तों का रवैया उसे कर देता है.!!

आप जो भी काम करें उसमें मूल्यों [values] के साथ समझौता न करें.!!

किसी भी कीमत पर..अपने काम के साथ कभी खिलवाड़ मत करना,

_ क्योंकि लोग तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन भूख तो हर दिन दस्तक देगी ही देगी.!!

किसी भी काम को पूरा करने से पहले उसका ढिंढोरा मत पीटा करो,

_ क्योंकि वो काम फिर मुश्किल से ही अपनी मंजिल पर पहुँच पाता है..!!

अपने उस काम के प्रति कभी भी शर्मिंदा मत होना, जो आपको दो वक्त की रोटी देता है, _ कम कमाना लेकिन हक़ का खाना.. ही बेहतर है.!!

आप बात करते हो, हम काम करते हैं, यही अंतर है..!!

You talk, we work, that’s the difference..!!

किसी काम को करने से पहले उसके बारे में अच्छे से जान लें.

Before doing any work, know about it thoroughly.

किसी का मूल्यांकन उसके काम को देखकर करना चाहिए.

One should judge someone by looking at his/her work.

जब काम में मज़ा आए तो काम, काम नहीं लगता.!!

कोई काम नामुमकिन नहीं और हर काम करना ही है, यह कतई ज़रूरी नहीं.!!

सुविचार – धैर्य – धीरज – 079

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धैर्य रखो !! क्योंकि हर नया परिवर्तन आसान होने से पहले मुश्किल हुआ करता है. [

” धैर्य ” एक कड़वा पौधा है, पर इसके फल हमेशा मीठे ही आते हैं..!!

धैर्य रखें और समय उन्हें आपकी कीमत बताएगा.!!

जब मन बैचेन हो, तब निर्णय नहीं… धैर्य चुनें.!!

यदि आपके अंदर धैर्य है, तो आप जो चाहें, वह सब पा सकते हैं.

धैर्य रखने वाला मनुष्य अपनी इच्छानुसार सब कुछ प्राप्त कर सकता है !!

जीवन के मार्ग में जब धुंध छा जाए तब दृढ़ता और धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है.

जब हम धैर्य रखना सीख लेते है, उस दिन से किसी और की आवश्यकता नहीं रहेगी.!!

जड़ से उखड़े हुआ लोगों को अपनी जड़ें जमाने के लिए बहुत मेहनत और धैर्य की जरुरत होती है..!!

यदि आप जीवन में बुद्धि और धैर्य नहीं रखेंगे तो आप अपना जीवन दूसरों को गाली देते हुए बिता देंगे.!!

आप कुछ समय के लिए धैर्य रखें.. आपके पास सब कुछ है.. इसे समझने के लिए कुछ भी गड़बड़ न करें..

_ अपने आप को थोड़ा समय दें.. आप इसे स्वयं समझ लेंगे.

ज्यादा से ज्यादा आपकी बातें धैर्य और इत्मीनान से सुना जा सकता है,

उस से ज्यादा कोई कुछ नहीं कर सकता,
_ आपको अपने मन के घाव खुद ही और वक़्त के हाथों ही भरवाने होंगे..!!

धैर्य और ख़ुद पर विश्वास होना हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है,

_ ये तभी संभव है, जब हमारा कोई ऊंचा सार्थक लक्ष्य हो,
_ हमारा जीवन हमारे ख़ुद के नजर में कीमती हो..!!

विपरीत परिस्थितियों में रखा गया धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाता,

_ जिस दिन आप अपने बुरे समय को अपने सामने दम तोड़ते हुए देखेंगे,
_ उस दिन आप सबसे ज्यादा शुक्रगुज़ार उस धैर्य के होंगे…
जिसे कभी आपने टूटने नहीं दिया..!!

इतना धैर्य और सब्र रखना सीख जाओ कि अगर कुछ बुरा भी हो तो बुरा न लगे.!!

जब आपके पास कम हो तो धैर्य रखें, जब आपके पास सब कुछ हो तो कद्र करें..

हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़ें.

धैर्य जब जीवन में आ जाये तब ना कोई खास लगता है और ना ही कोई खाक लगता है.. जब एक समान लगता है.!!

धैर्य का स्वाद शुरुआत में कड़वा लगता है,

_ पर उसका परिणाम हमेशा सुकून देने वाला होता है.!!

इंसान के लिए धैर्य और सब्र सबसे ज़रूरी होता है, क्योंकि यह ही वह शक्ति है जो उसे टूटने से बचाती है.

_ हर कोई दर्द सह सकता है, लेकिन केवल धैर्य और सब्र ही हमें बिना शिकायत किए जीना सिखाता है.
_ धैर्य और सब्र का अर्थ चुप रहना नहीं है, इसका का अर्थ है स्थिति को समझना और उससे निपटना.!!

जीवन में धैर्य बेहद महत्वपूर्ण होता है.

_ धैर्य इंसान को प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने में सहयोगी होता है,
_ पर अब इंसानों में सबसे अधिक कमी धैर्य की ही है.!!

अच्छी चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो रब पर विश्वास और आस्था रखते हैं,

_ और बेहतर चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो धैर्य रखते हैं,
_ और सबसे अच्छी चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो हार नहीं मानते.!!

कभी-कभी हमें चाहिए होता है कि कोई बस सुन भर ले, और जैसे सारी थकान ख़त्म सी हो जाती है इतना भर होने से ; “धैर्य से सुनने” की अहमियत बहुत है.!!

जब जीवन आपको कठिन परिस्थितियों में लाकर खड़ा कर दे, तो आप यह न कहें,

“मैं ही क्यों”, बल्कि यह कहिये, “मुझे जांचिये”, अगर आप ऐसा करते हैं तो कल सफल होकर ही रहेंगे.

जीवन में जब हम समय से कमजोर होते हैं, तो उसी समय हमें अधिक धैर्य की आवश्यकता होती है, अन्यथा लोग हमें तोड़ने को तैयार बैठे हैं. यह बात हर समय याद रखिये.

धैर्य एक व्यक्ति के सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है ; _यह क्रोधित या परेशान हुए बिना किसी चीज़ की प्रतीक्षा करने की क्षमता है.

_ धैर्य प्रतीक्षा करने की क्षमता नहीं है बल्कि प्रतीक्षा करते समय अच्छा रवैया बनाए रखने की क्षमता है.

Patience is one of the most important virtues a person can possess. It’s the ability to wait for something without becoming angry or upset.

Patience is not the ability to wait but the ability to keep a good attitude while waiting.

जब हम कमजोर पड़ते हैं, तब हमारे भीतर नकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ने लगता है.

_ ऐसे समय में यदि मन पर नियंत्रण न रखा जाए, तो जीवन धीरे-धीरे गलत दिशा की ओर बढ़ने लगता है.
_ इसलिए उन क्षणों में सबसे अधिक आवश्यक होता है धैर्य बनाए रखना,
_ क्योंकि वही हमें संभालकर सही राह पर टिकाए रखता है.!!

जो लोग धैर्य रखते हैं, उनके पास सबसे खूबसूरत अंत होते हैं.

_ जीवन हमेशा हमारे अनुसार नहीं चलता, लेकिन जो लोग प्रक्रिया पर विश्वास रखते हैं, जो इंतजार करने की मजबूरी को सहन करते हैं,
_ वे हमेशा अपने आप को ठीक उसी जगह पाते हैं, जहां उन्हें होना चाहिए.
_ धैर्य सिर्फ इंतजार करने का नाम नहीं है—यह विश्वास रखने का है, यहां तक कि जब कुछ भी समझ में न आए.
_ यह विश्वास रखने का है कि सही चीजें आएंगी, जब हम उन्हें मांगेंगे नहीं, बल्कि जब हम उन्हें प्राप्त करने के लिए सचमुच तैयार होंगे.
_ सबसे खूबसूरत कहानियाँ जल्दी नहीं बनतीं; वे समय लेती हैं, जिनमें सीख, मोड़ और वे खामोश लड़ाइयाँ होती हैं जो कोई नहीं देखता.
_ लेकिन आखिरकार, जो लोग धैर्य रखते हैं—जो तूफानों के बावजूद अपने दिलों को शांत रखते हैं—वही लोग शांति, प्यार और सफलता पाते हैं जो स्थायी होती है.
_ क्योंकि जो आपके लिए है, वह कभी भी आपसे दूर नहीं जाएगा;
_ वह बस सही समय का इंतजार कर रहा है.
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