मस्त विचार 089

पहले मैं होशियार था, इसलिए दुनिया बदलने चला था,

आज मैं समझदार हूँ, इसलिए खुद को बदल रहा हूँ.

मस्त विचार 087

वो याद नहीं करते , हम भुला नहीं सकते .

वो हँसा नहीं सकते , हम रुला नहीं सकते .

साथ इतना खूबसूरत है हमारा .

वो बता नहीं सकते , और हम जत्ता नहीं सकते .

सुविचार – सुलझना – 220

सुलझना जटिल प्रक्रिया है, उलझना बड़ा आसान है.

_ सुलझाव के लिए जागृति चाहिए, होश चाहिए, सचेतना चाहिए.
_ इसके विपरीत जरा सी असावधानी हुई कि उलझे ही उलझे..
_ उलझन को सुलझाने में पीड़ा महसूस होती है, उलझन में पड़े रहने की आकांक्षा उठती है…यह होश ही नहीं रहता कि उलझते उलझते हम किस गर्क में आ गए हैं.
_ नीम बेहोशी में चले कि उलझे…होश में आने से डरते हैं,
_ हम इसलिए भी डरते हैं कि नीम बेहोशी में हमारे उलझने को हमारे होश में आते ही हम पर थोप दिया जाएगा…हजारों लांछन लगाए जाएंगे…उपहास उड़ाया जाएगा.
_ इसकी चिंता छोड़ ही देनी चाहिए…जो बीत गया बेहोशी में…उसे छोड़ ही दो…जो घटित हो गया हमारे अध्यान में उसे जाने ही दो.
_ राह में चलते हुए न जाने कितनी दफा हम भटक ही जाते हैं…
_ भटक जाना परेशानी नहीं है…भटक कर वहीं खड़े हो जाना परेशानी है…।
_ कई बार मार्ग में हम गिर पड़ते हैं…गिर पड़ना मुसीबत नहीं है…गिरकर न उठ पाना मुसीबत है.
_ अपने उलझन का सिरा पकड़िए…कठोर हाथों से नहीं…बिल्कुल नर्म स्पर्श के साथ…आहिस्ता आहिस्ता सुलझाइए….
_ कुछ समय बाद ही आपके बेहोशी…आपके अध्यान की उलझन सुलझने लगेगी।।
– अविनाशराही

सुविचार – नुकसान – 219

जब हमें कोई नुकसान होता है, तब यही सोच कर दिल को तसल्ली देनी होती है कि इससे भी ज़्यादा नुकसान हो सकता था.

_ हमें जितनी भी बड़ी चोट लगे, तसल्ली के लिए यही सोचना होगा कि इससे भी बड़ी चोट लग सकती थी.
_ बहुत बड़ी दुर्घटना हो जाए तो सोचिए, शुक्र है, बच गए, मर भी सकते थे.!!.
– Manika Mohini
दूसरा कोई हमारा नुकसान इतना नहीं करता, जितना नुकसान हम खुद अपना करते हैं.!

सुविचार 218

हम में से कई लोग एक- दूसरे को देख कर मुस्कुराते हैं, लेकिन दिमाग में एक- दूसरे के बारे में अच्छा नहीं सोचते हैं. हमें लगता है कि सामने वाला हमारे चेहरे को पढ़ सकता है, बुरी बातों को सुन सकता है, लेकिन हमारे दिमाग में क्या चल रहा है, यह उसे थोड़े ही पता है. वह हमें नुक़सान कैसे पहुंचायेगा ?

लेकिन सच तो यह है कि आपके द्वारा सोची गयी हर बात, वह चाहे अच्छी हो या बुरी, ब्रह्माण्ड में जाती है और उस व्यक्ति से टकरा कर आपके पास उसी रूप में वापस आती है.

हमारे आस पास के कई लोग ग़लत काम करते हैं, हो सकता है कि उन्हें सज़ा भी न मिले. लेकिन क्या इस बात को देखते हुए, हम भी ग़लत काम करें. खुद की तुलना और से न करें, आप तो बस अपना काम करते जाएँ.

मस्त विचार 086

क्या खूब कहा है…

“आसमां में मत दूंढ अपने सपनो को…

सपनो के लिए तो ज़मी जरूरी है,…

सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा,…

जीने के लिये एक कमी भी जरूरी है”..

मस्त विचार 084

जीने का मकसद ख़ास होना चाहिए, और अपने आप पर विश्वास होना चाहिए.

जीवन में खुशियों कि कोई कमी नहीं होती, बस जीने का अंदाज़ होना चाहिए.

मस्त विचार 083

वक़्त एक सा नहीं रहता है , कभी यहाँ सुन ले .

खुद भी रो पड़ते हैं यहाँ , औरों को रुलाने वाले .

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