सुविचार – पर्व – त्यौहार – उत्सव – उल्लास – हर्षोल्लास दिवस -समारोह – फेस्टिवल- Festival – 084

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जिस दिन आपने खुल कर के अपनी जिंदगी जी ली बस वही त्यौहार है…

..बाकी सब कैलेंडर की डेट्स हैं…

** कोई भी उत्सव इतना खास नहीं होता, अच्छे से जीया गया जीवन ही खास होता है..!!

_ जिंदा रहना सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर मुझे अपने कपड़े या अन्य चीजें किसी और खास मौके के लिए क्यों बचाकर रखना चाहिए ?
“ज़िंदगी ही जब सबसे बड़ा अवसर है, तो हर दिन को खास मानकर जीना भी एक समझदारी है –
कल के लिए बचाया गया ‘आज’ अक्सर अधूरा रह जाता है.”
_ अक्सर हम जीवन को भविष्य के किसी “परफेक्ट दिन” के लिए रोक देते हैं,
और आज को बस रिहर्सल मानकर निकाल देते हैं.
_ अगर सच में मान लें कि ‘जिन्दा रहना ही सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर –
अच्छे कपड़े “किसी दिन” नहीं, आज के लिए हैं,
पसंदीदा जूते किसी समारोह के लिए नहीं, आज की चाल के लिए हैं, महक किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद को महसूस कराने के लिए है.
_ हम चीज़ें बचाकर इसलिए रखते हैं.. क्योंकि भीतर कहीं डर होता है –
“कहीं ये पल ज़ाया न हो जाए”
_ पर सच्चाई उलटी है –
पल चीज़ों के लिए नहीं होते, चीज़ें पलों के लिए होती हैं.
_ जो जीवन को टालता है,
वह धीरे-धीरे खुद को भी टालने लगता है.
_ और एक दिन समझ आता है – हमने सब संभाल कर रखा था… सिर्फ़ जीना भूल गए थे.
_ आज अगर जी रहे हो, तो आज ही अवसर है.
_ बाकी सब सिर्फ़ तारीख़ें.!!
त्यौहार ख़त्म हो गए हैं अब, अब सिर्फ तारीखें बची हैं.!!
जीवन एक यात्रा है, और यह यात्रा अकेले नहीं की जाती.. इसे उत्सव बनाइए..!

_ जब किसी के साथ हैं, तो सिर्फ़ शारीरिक रूप से ही नहीं, मन का साथ दीजिए.. क्योंकि असली साथ वही है.!!

उत्सव का कारण कभी भी और हर समय बनाया जा सकता है.
जीवन सुंदर है उन लोगों के कारण _ जो साधारण खुशियों को बड़े उत्सवों में बदलने की कला जानते हैं.
प्रसन्न रहना, संतुष्ट रहना, शांत रहना, उत्साहित रहना, जीवन उत्सव के रंग हैं.

इसलिए हर पल को जी भरकर जीओ, हर दिन महोत्सव है.

जब हम सार्थक जीवन [meaningful life] जीते हैं, तो हमें किसी उत्सव का इंतजार नहीं करना पड़ता,

_ हमारे जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि एक उत्सव [celebration] होती है.!!
पहले त्यौहार में उतना थोड़ा भी बहुत ज्यादा होता था,

_ _ अब बहुत ज्यादा में उतना बहुत की खुशी गुम सी है..!!

लोग अगले ही दिन भूल जाते हैं कि कल कोई उत्सव भी था..

_ लोग कितने प्रतिबद्ध [Committed] हैं अपने-अपने दुखों में लौटने के लिए.!!

त्यौहार, पर्व, उत्सव, चाहे उनका ताल्लुक देश से हो या व्यक्तिगत खास अवसरों से, जीवन में खुशियाँ लाते हैं.

हमें ये खुशी के अवसर कभी नहीं छोड़ने चाहिए..

_ जब हम इन्हें सेलिब्रेट करते हैं तो हमारे ख़ुशी के पल बढ़ जाते हैं.

किसी भी पर्व, त्यौहार या ख़ास अवसर में ऐसा कुछ न करें ..जिससे किसी की या आपकी ही ज़िंदगी तबाह हो जाए.

_ आप ख़ास अवसर को मनाएं, पूरे हर्षोल्लास से मनाएं.
_ लेकिन सावधानी का साथ ..एक पल को भी न छोड़ें.
_ जीवन अनमोल है, और ज़रा-सी लापरवाही जीवनभर का दर्द दे सकती है.
अब तो सभी त्यौहार हर साल आते हैं, चुपके से गुजर जाते हैं, _ऐसा क्यों हो रहा है   पिछले कई वर्षों से ?

पहले अपनी भीनी-भीनी खुशबू छोड़ कर जाते थे.

_ और अब ? अब क्या हो गया है जो यह त्यौहार पहले जैसे नहीं रहे ?

अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है, जो थोड़ी-बहुत खुशी दे जाता है ; _ चलिए, इसी खुशी को मना लूँ मैं..!!

_ त्यौहार खत्म होने के बाद के लम्हें को झेलना काफी कष्टकारी होता है.. खैर,

_ हम सभी जानते है कि जीवन में खुशियों का पल क्षण भर के लिए आता है.!!

त्योहारों के मायने बदल गए हैं, लोग बदल गए हैं, रिश्ते बदल गए और खुशियाँ तो ख़ैर.!
एक मेरे बचपन के त्यौहार थे..

_ अब तो जिंदगी की भागदौड़ ने सबकुछ खत्म कर दिया है…
_ जो प्रेम आपस में बचपन में था,, वो बड़े होने पर न जाने कहां खो जाता है…
_ क्या सच में हम समझदार होते हैं,, या बेवकूफ बनते चले जाते हैं…
_ मगर वो बचपन के त्यौहार काफी पीछे छूट चुके हैं..
_ अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है.!!
_ अब तो ऐसा लगने लगा है कि ये दिन आया ही क्यों.. और जब आ ही गया तो जल्दी बीत क्यों नहीं रहा.. _ फिर लगने लगता है कि ये फेस्टिवल जश्न के लिए नहीं आते.. बल्कि ये याद दिलाने आते हैं कि अब खुशी भी अजनबी लगने लगी है.!!
अब तो किसी भी फेस्टिवल का नाम सुनते ही अजीब सा एहसास होने लगता है,
_ और न जाने क्यों मेरे अंदर एक बेचैनी सी पैदा हो जाती है.

_ वो नीरस आवाज़ें अब मेरे कानों में मिठास नहीं लातीं, हँसी और खुशी का शोर अब बोझिल सा लगता है.
_ ऐसा लगता है मानो हर कोई बस खुशी, प्यार और अपनापन का अभिनय कर रहा है.
_ मुझे नहीं पता कि मुझे किससे नफ़रत है: लोगों से या इन रस्मों के पीछे छिपे झूठे सुकून से..
_ मैं बस इतना जानता हूँ कि मेरा दिल अब इन बंधनों को नहीं, सिर्फ़ सच्चे जुड़ाव को चाहता है.!!
ना पहले जैसी खुशी है न पहले जैसे लोग न पहले जैसा समय.. 
_ जैसे जैसे समय बीत रहा.. भावनाएं निर्जीव होती जा रही हैं.!!
हिन्दुओं में इतने त्यौहार होते हैं (अन्यों का पता नहीं) कि सब मनाने बैठो तो आदमी जीवन में और कुछ कर ही नहीं सकता..

_ करने लायक रहता ही नहीं..
_ किसी के पास इतना समय कहाँ है ?
_ हम सिर्फ़ जन्माष्टमी, होली, दिवाली मनाते हैं.!!
पर्व- त्योहार होते रहना चाहिए..

_ नहीं तो निगेटिविटी और नीरसता आ जायेगी।
_ और कितने लोगों के आमदनी पर फ़र्क पड़ने लगेगा;
_ हर समय पर्व- त्यौहार का ध्यान रहता है,
_ बड़ी बड़ी कम्पनियां ही नहीं छोटे मोटे धन्धे वालों को भी इन्तजार रहता है,
_ पर्व- त्यौहार का कि थोड़ा ज्यादा और महंगी बिक्री होगी और कुछ पैसे बच जायेंगे।
_ त्यौहार के बहाने ही सही कपड़े और श्रृंगार के सामान के साथ कुछ जरूरी सामान भी आ जायेगा..!!
_ जश्न की उम्मीद ही जिन्दगी को जीने के लिये सबसे मजबूत कड़ी है, _ वरना तो बेरंग जिन्दगी जीने के कोई मायने नहीं.!!!
कोई भी दिवस हो, कोई भी कार्यक्रम हो ..उसमें लगने वाला समय ..आटे में नमक जितना होना चाहिए,

_ यानी मुख्य कार्य कभी बाधित न हो ..इसका खयाल रखना चाहिए..
_त्योहार, दिवस, पर्व मनाइए …पर ध्यान रहे इसे गौण [secondary] और जीवन को प्रमुख स्थान दें..
..बाकी बड़ी बड़ी बातें, तर्क करने के लिए कुछ भी कहा जा सकता है..
_ अपवादों की बात नहीं करिए, अधिकतर क्या हो रहा ..उसपर विचार करिए न !!…
— हमें न गरीबी चाहिए और न ही अमीरी;
_हमें हमारे लिये सुविधाजनक जीवन चाहिए.!!
त्योहारों को मनाना हमारी परम्परा है लेकिन अब उनमें आवश्यक परिवर्तन ज़रूरी हैं.

पानी, दूध, अनाज, विद्युत ऊर्जा [ इलेक्ट्रिक ] या पेट्रोल- डीज़ल की बर्बादी और पर्यावरण की अशुद्धता- ऐसी समस्या है,

_जिस पर हम यदि गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हमारी लापरवाही को भुगतेगी.

_हमें अपने ‘साक्षर’ नहीं, सुशिक्षित होने का व्यवहार करना चाहिए.

_एक कहावत है- `बचाया हुआ यानी कमाया हुआ.’

उत्सव क्या है ? एक दिन का उल्लास ;

_ हम खुश ना होकर भी खुश होने और दिखने का अभिनय कर रहे होते हैं.
_ “जिससे भी बात करो तो सब परेशान जैसे कि इस दुनिया में कोई खुश हैं ही नहीं..”
__लेकिन जब आपकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे किरदार हों _ जाने अनजाने में वो आपको उस अपनेपन का एहसास करा दें, जो खून के रिश्ते ताउम्र नहीं करा पाते..
_ तो समझिए वही दिन उत्सव है और हर दिन उल्लास..!!

सुविचार – संगीत – Music – 083

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संगीत आत्मा को रोजमर्रा की जिंदगी की धूल से धो देता है.
जो भारी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है.
बाहर का संगीत तब ही महत्वपूर्ण है..

_ जब वो तुम्हें ” तुम्हारे अंदर के संगीत की याद दिलाए “

संगीत सुनना मानसिक और आत्मिक रूप से किसी से जुड़ने जैसा है.

अधिकांश समय, हम संगीत सुनते हैं क्योंकि यह हमें शांत करता है या हमारी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करता है.

लेकिन कभी-कभी, संगीत अन्य चीजों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है – किसी ऐसे व्यक्ति में रुचि दिखाने के लिए जिसे हम पसंद करते हैं या प्यार करते हैं,

हमारी आत्मा को शांत करने के लिए इसे सुनना, हमें दूसरी जगह ले जाना और हमारी समस्याओं को दूर करना..!!

इसके अलावा, जहाँ हम अपने विचारों को नहीं सुन सकते, केवल महसूस कर सकते हैं और इसका आनंद ले सकते हैं.

आजकल लोगों ने गाना- संगीत सुनना ही बंद-सा कर दिया है,

_ लोग तनावपूर्ण जीवन के इतने आदी हो गए हैं कि वे उन रुचियों को भूल गए हैं..
_ जो कभी उन्हें खुशी देती थीं.!!
कुछ गाने-म्यूजिक हमारे दिलो-दिमाग़ में ऐसे बस जाते हैं मानो हमारी ही अधूरी कहानी का हिस्सा हों.
_ वो वक़्त-बेवक़्त हमारी ज़बान पर आते हैं, कभी किसी पुराने दर्द को छू जाते हैं, तो कभी एक अजीब सा सुकून दे जाते हैं.
 _ न जाने क्यों, पर कुछ धुनें शब्दों से ज़्यादा हमें समझती हैं.
संगीत भी दवा का काम करता है बहुत बार..

_ जब मन भारी हो, उदास हो, हताश हो, और जब खुशी से पागल हो तब भी …!

🎶Music Therapy🎶

“जब सुर और ताल से मन शांत हो, तो शरीर अपने आप ठीक होने लगता है.”
_ “Music सिर्फ सुनने की चीज नहीं, बल्कि एक उपचार है जो दिल और दिमाग दोनों को छू लेता है.”

जीवन संगीत है,  सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है.

Life is music. When this music is played in a melodious manner, it is pleasing and sweet.

“संगीत में अस्तित्व के हर शानदार पहलू को उत्साहित रूप से व्यक्त करने की क्षमता है, जबकि डाउनबीट पर उस पीड़ा को व्यक्त करने की क्षमता है जो एक इंसान समय की क्षणभंगुर प्रकृति और जीने और मरने की रहस्यमय यातना को समझने पर अनुभव करता है.

संगीत जीवन के प्रतीकों और चरणों, अस्तित्व और गैर-अस्तित्व दोनों को संप्रेषित करने की अपनी क्षमता में अकेला है.

“Music has the ability to express in the upbeat every brilliant aspect of existence, while on the downbeat convey the anguish that a human being experiences when apprehending the fleeting nature of time, and the mysterious torture of living and dying.

Music stands alone in its ability to communicate the symbols and phases of life, both being and nonbeing.” – Kilroy J. Oldster

सुविचार – नवाब – बादशाह – बादशाहत – बादशाही – अलमस्त – फ़क़ीर – फ़कीर – फकीर – फ़क़ीरी – फ़कीरी – फकीरी – 082

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अपनी ग़ैरत के लिए फ़ाक़ा कशी भी मंज़ूर,

तेरी शर्तों पे ख़ज़ाना भी नहीं चाहते हम – हसीब सोज़

फकीरों को कोई बर्दाश्त नहीं करता, असल में सच्चे फकीर कहीं भी बर्दाश्त नहीं किये जाते _ क्योंकि सच्चे फकीरों की सच्चाई लोगों को काटती है ;

_ उनकी सच्चाई से लोगों के झूठ नंगे हो जाते हैं, उनकी सच्चाई से लोगों के मुखौटे गिर जाते हैं.

फ़क़ीर : जिसे न दुख से मतलब न सुख से, न दिन से न रात से, न सम्मान से मतलब न ही अपमान, न किसी के पाने की लालसा न किसी के खोने का ग़म !!

_ जिसकी सांसारिक इच्छाएं मिट गईं हो, जिसे सभी मनुष्यों में एक ही रब दिखे, जिसे सारा संसार एक लगे, जो केवल ब्रह्म की खोज में हो…
शायद यही वैराग्य है और जिनमें ये गुण हैं शायद वही बैरागी ….. अब और किसी के अनुसार और क्या हो सकता है ये वही जाने.!!
फ़क़ीर : जो अपनी मस्त धुन में मदमस्त मस्तमौला है, जिसे दुनिया के रंग में रंगने का कोई शौक नहीं,

_ जो ख़ुद की ज़िन्दगी ख़ुद के बनाए तरीके से जीना पसंद करता है..!!

ये शक्ल ये सूरत सब क़र्ज़ पे ले रक्खी है, वक़्त आने पर इसके मालिक को लौटाना होगा.!!
किस्मत भी बादशाह उसी को बनाती है ; जो खुद कुछ करने का हुनर रखता है.
दिल अगर फ़क़ीरी पे उतर आए,,,_तो उलझ पड़ता है बादशाहों से….!!!
ये फकीरों की महफ़िल है चले आओ, हम जैसे लोग हैसियत नहीं पूछते.!!
न ढूंढ हमें दुनिया की भीड़ मैं, हम फ़क़ीर हैं हमेशा तन्हा ही मिलते हैं .!!
हम फ़क़ीर मिलते हैं टूट कर और बिछड़ते हैं शान से..!!
सलामत रहे गुरुर आपका, हम तो वैसे भी फ़क़ीर ठहरे..!!
बादशाहों का इंतज़ार करे.. इतनी फुर्सत कहाँ फकीरों को..!!
अध्यात्म का वास्तविक रूप फक्कड़पन /फकीरी में ही है.-  इसे कोई नहीं बदल सकता.!!
पूछ के मेरा पता वक्त जाया न करो, मैं तो फ़क़ीर हूं जानें किधर जाऊंगा.!!
फकीरों की फ़कीरी पर मत जाइए,

_ उसके भीतर बहुत बेतरतीब सा एक शख्स रहता है कोई.!!

“मुझे भीख की खुशियां मंजूर नहीं, _ मैं जीता हूँ अपनी तकलीफों में भी नवाबों की तरह.”

_ किस्मत की गुलामी नहीं करता मैं, _ अपनी मेहनत का नवाब हूं मैं !

मेरी ग़ुरबत को देख कर रास्ता ना बदल मुर्शद,

_ मैं दिल का बादशाह हूँ, मुक़द्दर तो खुदा लिखता है..!!

जरुरी नहीं कि फकीर फटेहाल ही दिखे,

_ जेब वो जगह है जिसे कोई न देख पाया.!!

हम फकीरों की सूरत पर ना जाना, _ _ हम कई रूप धर लेते हैं !
गुनगुनाता जा रहा था एक फ़क़ीर, धूप रहती है ना साया देर तक..!!
वक्त के एक तमाचे की देर है प्यारे, मेरी फकीरी क्या तेरी बादशाही क्या..!!
अमीरी में क्या है जो फकीरी में नहीं, _ दुनिया मेरी है नहीं तो दुनिया तेरी भी नही.
हर मांगने वाले को फ़क़ीर कहते है पर इसका मतलब ये नही है के जो सिर्फ सड़को पर गली मोहल्लों में फिर कर मांगते हैं, _ वही सिर्फ फ़क़ीर कहलाते हैं,

असल में फ़क़ीर तो हम सब हैं जो कुछ न कुछ हर रोज़ खुदा से मांगते हैं, _ कभी अपनी ज़रूरतों की चीज़ें कभी अपनी ज़िंदगी की भीख, कभी अपनी खुशी की भीख,,,, तो फ़क़ीर हम सब हैं

_ बस हमारा मांगने का तरीका उन मांगने वालो से थोड़ा अलग है जो सड़को पर मांगते हैं और हम दिल मे मांगते हैं तो हम सब फ़क़ीर हैं.

जीवन को तो बेशर्त ही जिया जा सकता है, दूसरों की तो छोड़ें _ जीवन को अपनी भी शर्तों पर नहीं जिया जा सकता है.

जीवन की अपनी ही मौज है, और अपनी मौज में ही जीवन जिया जा सकता है, दूसरों की मौज में नहीं.

दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से तो बेहतर है कि अपनी ही मौज में फ़क़ीर हो जायें. दूसरों की शर्तों पर सम्राट बन कर कभी आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता, अपनी मौज में फ़क़ीर बन भी वो आनन्द मिलता है, जो दूसरों की शर्तों पर सम्राट बनने से नहीं मिलता.

जरूरतों के मुताबिक जियो, _ ख़्वाहिश मुताबिक नहीं. _ क्यूंकि

_ जरुरत फ़क़ीर की भी पूरी हो जाती है, _ ख्वाहिश बादशाह की भी अधूरी रह जाती है.

” हम अपनी फ़क़ीरी में भी बादशाह रहे, _ यह उन लोगों को बहुत अखरा,

_ जो दौलत कमा कर भी गरीब रहे और हम, _ आज भी बादशाह हैं,”

ज़िन्दगी सब कुछ देकर भी, किसी ना किसी चीज के लिए _

_ फकीर बना कर ही रखती है..

किसी ने पूंछा … फकीर कौन होता है … !!

_ मैंने कहा …जिसका कोई नहीं और … जो सबका..!!

जिसका ये ऐलान है कि वो मज़े में है,

_ या तो वो फ़कीर है या फिर नशे में है.!!

सच ही कहा था मुझ से एक फ़क़ीर ने..

_ कि तुझे लोग अपना तो कहेंगे, पर कभी अपना नहीं मानेंगे !!

आप फकीरों से क्या लोगे, आप फकीरों को क्या दोगे..

_ कभी ज़िक्र ए यार आएगा, बार-बार मेरे बारे में सोचोगे..!!

फ़कीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब,

बादशाही का अन्दाज़ ख़ुद ब ख़ुद आ जायेगा.

दुसरो की शर्तों से सुल्तान बनने से अच्छा, _

_खुद की खुशी से फकीर बनना ज्यादा बेहतर है.

हमें मंजूर नही था तेरी शर्तों पर सुल्तान बनना, _

_ इसलिए मै अपनी सल्तनत का फकीर बन गया…

कभी फ़क़ीर, कभी शाह, कभी दिलनशीं की तरह.. _

_ जिन्दगी, हमसे रोज मिलती है अजनबी की तरह..

जिसका ये एलान है कि वो मजे में है,

_ या तो वो फ़कीर है या नशे में है..!!!

मैं खुल कर हंस रहा हूं फकीर होते हुए,

वो मुस्करा भी नहीं पाया अमीर होते हुए.

फकीरी न दे सकी मेरे ज़मीर को शिकस्त,

_ झुक कर हर किसी से नहीं मिलता हूँ मैं..!!

खुद से मिलना है तो दिल से फकीर बन जाओ,_

_ मिट सके ना जो वो पत्थर की लकीर बन जाओ..

भौतिक जीवन की विपदाएँ सहते रहता है,

_ घर में रह कर भी दिल से फ़क़ीर होता है..!!

सब कुछ चला जाएगा फिर भी मुस्कुराएंगे,

_ हम दिल में एक फ़क़ीर रखा करते हैं.!!

मंजिल उनको मुबारक जिन्हें होड़ है कुछ पाने की, _

_ हम तो अल्हड़ फ़क़ीर हैं जो हर दम सफ़र करते हैं !!

ज़लील कर के जिस फ़क़ीर को किया तूने रुखसत… _

_ वो भीख लेनें नहीं…. तुझे दुआएँ देने आता था.. 

फ़कीराना तबियत हैं…मिले तो बाँट देते हैं,

_ हमसे तो दुआओं की जमाखोरी नहीं होती….!!

फकीरी ला देती है हुनर चुप रहने का,

अमीरी जरा सी भी हो तो शोर बहुत करती है.

ये खाली जेबें, फ़कीर हुलिया, उदास आंखें..

_ हमें जो कोई गले लगाए, तो क्यों लगाए !!

हम गृहस्थ आश्रम में कर्म करते हुए बैराग और फ़क़ीर मन को रख सकते हैं,

_ सिर्फ आत्मबल की जरूरत है.!!

सुविचार – Financial Planning – वित्तीय योजना – 081

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जिंदगी एक खूबसूरत रेस की तरह है.. अगर आप स्थिति के हिसाब से खुद को अपग्रेड करते जा रहे हैं तो आप पीछे नहीं रहेंगे..!!
Financial planning का उद्देश्य हर risk को खत्म करना नहीं है, बल्कि इतनी व्यवस्था बनाना है कि पैसों की चिंता रोज दिमाग में जगह ना घेरे.!!

“Financial freedom का मतलब बहुत पैसा होना नहीं ; इतना होना है कि पैसा हर दिन हमारे मन की शांति ना चुरा ले.!!
योजना जितनी गुप्त रहेगी, सफलता उतनी ही उच्च रहेगी.!!
कुछ समय से Insurance / SIP / Mutual Fund / Equity को लेकर परफ़ेक्ट मार्केटिंग का माहौल बना हुआ है।

मैं थोड़ा सा assume कर रहा हूँ कि आपकी स्थिति १-२ हज़ार महीना इन्वेस्ट कर पाने की है तो ऐसे में आपकी आर्थिक हालत दयनीय वाली है। ऐसे में आपको किसी भी प्रोडक्ट में इन्वेस्ट करने से पहले ख़ुद में इन्वेस्ट करना है। हाँ जी आप भी एक प्रोडक्ट हैं।
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💸आपसे बड़ा कोई प्रोडक्ट नहीं है। ख़ुद की शिक्षा में इन्वेस्ट करिए, स्किल अपग्रेड में इन्वेस्ट करिए, ज़रूरी कोर्स करिए और सबसे पहले अपनी इनकम बढ़ाइए। बिना इनकम बढ़ाये हुए १ भी रुपये किसी भी स्कीम में डालने की आवश्यकता नहीं है।
ख़ुद से पूछिये आप इतना कम क्यों कमा रहे _ जबकि आप के ही साथ के बाक़ी लोग _ इथिकली आपसे कई गुना ज़्यादा कमा रहे।
शिक्षा से बड़ा कोई भी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट नहीं है। आज की शिक्षा इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट ही है, तो फर्स्ट इन्वेस्टमेंट शिक्षा को ही जाना चाहिए। स्किल अपग्रेड को ही जाना चाहिए।
अगर कम कमा रहे हैं और इतनी बुद्धि है कि भविष्य का सोच रहे तो शिक्षा से ज़्यादा कन्फर्म और हाई रिटर्न मिलेगा ही नहीं।
गारंटिड रिटर्न और अमीर बनने के लिए सबसे पहले शिक्षा में इन्वेस्ट करिए।
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💸जब शिक्षा से sufficient पैसे आने लगें तो अगले पड़ाव में हेल्थ इन्शुरन्स लीजिए।यंग हैं तो ३ लाख कवर वाला प्लान ले सकते हैं, उम्र बढ़ती जाए तो अपने शरीर के रिस्पांस के हिसाब से कवर बढ़ाते जाये, वैसे कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत हल्का सा ही बढ़ता है।
मैं इन्शुरन्स के ही डोमेन में कस्टमर सर्विस में रहा हूँ और इन्शुरन्स प्रॉडक्ट्स का USA से सर्टिफ़ाइड ट्रेनर हूँ तो डिटेल में इसके कारण फिर कभी समझा दूँगा।
मोटा मोटा ये समझिए छोटे क्लेम ही ज़्यादा आते हैं, जीवन में बहुत बड़ा लॉस होने के चांसेज बहुत कम होते हैं _ इसलिए कवर बढ़ाने पर प्रीमियम बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ता।
_तो उम्र के हिसाब से और अपनी फ़िटनेस के हिसाब से कवर बढ़ाते रहिए। कम से कम ४५ की उम्र तक फ़िटनेस इतनी रखिए कि ३-५ लाख के कवर में ही आप cure कर जायें।
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💸जब हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिये और आपकी शिक्षा आपको ठीक ठाक कमा कर दे रही तो _ अगले चरण में आप पर जो भी लोग डिपेंडेंट हैं _ उनके लिये शिक्षा का स्कोप देखिए _ और उनको अपनी डिपेंडेंसी से बाहर करिए, _वो बस अपने भर का ही कमा लें _उतना भी आपके लिये बहुत है,
_ ये इसलिए भी आवश्यक है ताकि आपको अचानक कुछ हो भी तो आप भूत बनकर भी ये न सोचें कि वो लोग तो अब भूखों मर रहे हैं ।
यदि उनके केस में संभव नहीं है और डिपेंडेंसी लगातार आप पर ही रहनी है _ तो उनलोगों का भी हेल्थ इन्शुरन्स अपने साथ ख़रीदिए।
_आप पर डिपेंडेंट बंदा पहले तो ज़िंदा रहे बाक़ी सब चीज़ें उसके बाद में देखी जाती हैं।
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💸एक बार आप शिक्षित होकर ठीक ठाक कमा रहे और आप पर डिपेंडेंट लोग या तो आगे बढ़ गए हैं या फिर अभी आप पर ही डिपेंडेंट हैं। हेल्थ इन्शुरन्स भी ले लिया है।
_ तो अगला चरण है अपनी ख़ुद की फिजिकल फ़िटनेस पर इन्वेस्ट करिए, बेहतर भोजन ख़रीदिए, बेहतर कपड़े, बेहतर जूते, बेहतर घड़ी, बेहतर फ़ोन और बेहतर फिजीक, ये सब चीजें इसलिए इंपोर्टेंट हैं _ताकि आप पहले तो फिट रह कर लंबे समय तक बिना किसी बीमारी के नौकरी या व्यवसाय कर सकें।
_ पैसा अपने आप इनसे आता है, शिक्षा वाला क्लाज पहले लगायें। फिट, बेहतर दिखने वाले लोगों को बेहतर मौक़े मिलते हैं,
_किसी भी फ़ालतू फ़िलासफ़ी में पड़े बिना चुपचाप सबसे पहले अपने आप को बेहतर दिखने लायक़ बनाइए।
_नैचुरली जो मिला वो भगवान से मिला उसके बाद कपड़ों इत्यादि में इन्वेस्ट करके अपने आप को मार्केट में कंप्टीशन में लाइए।
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💸जब शिक्षा भी हो गई, शिक्षा से पैसा भी बन रहा है। हेल्थ भी कवर हो गई, आप पर डिपेंडेंट लोग भी सेट हो गये या फिर आप उनको कवर कर ले गये तब अगले चरण में टर्म इन्शुरन्स लेना है, _वो भी सिर्फ़ तब _जब आप पर कोई बहुत जायदा डिपेंडेंट है। अगर आप पर कोई डिपेंडेंट नहीं है तो टर्म insurance भी बकवास प्रोडक्ट है।
_उदाहरण के लिए कुछ एकल परिवारों में पति पत्नी दोनों बहुत अच्छे से सेटेल होते हैं और इंडिविजुअली भी कई करोड़ की हैसियत रखते हैं। उधर भी लोग टर्म इन्शुरन्स लेके सोचते हैं कि मैं मरूँगा तो मेरी बीवी को १ करोड़ मिलेगा तो उसके आगे के खर्चे चलेंगे। भाई साहब ऐसे घरों में सिर्फ़ आप इंपोर्टेंट हैं। आपके मरने के बाद का पैसा नहीं।
_ये समझना ज़रूरी है कि पैसा बहुत ज़्यादा आवश्यक चीज है लेकिन एक नियत अमाउंट से ज़्यादा नहीं।
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💸जब उपरोक्त सब कुछ हो जाये तो कुछ पैसा लिक्विडिटी के रूप में रखिए। ध्यान रखिए कभी भी एक बैंक में ५ लाख से ज़्यादा रुपये मत रखिए। जब ५ लाख से ज़्यादा होने लगे तो खाता एक अन्य बैंक में भी खुलवा कर वहाँ भी ५ लाख तक रखिए।
_assume करूँगा कि आप ऊपर लिखे स्टेप्स से अच्छा ख़ासा कमा रहे हैं और ऐसे में २५-३० लाख तक कैश होल्ड करना उचित है, उससे ज़्यादा नहीं।
_ज़्यादा नहीं कमा रहे तो कम से कम १ वर्ष तक नौकरी न करने पर आपका घर चल जाये इसलिए कैश immidiate डिस्पोजल पर होना चाहिये।
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💸जब उपरोक्त सब हो गया हो तो पहला इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी में करिए। लेकिन ध्यान रखिए प्रॉपर्टी उतनी ही दूर ख़रीदिए जहां आप जब मन करे तब पहुँच कर जाँच सकें। अव्वल तो प्रॉपर्टी वही ख़रीदिए जहां रहते हैं।
_ और जब वहाँ से मूव करिए तो प्रॉपर्टी बेच के आगे नई जगह पर ले लीजिए। प्रॉपर्टी से कभी दिल नहीं लगाना चाहिए।
_ दिल लगाने के लिए पत्नी/प्रेमिका, माता पिता, बच्चे, मित्र तथा पालतू जानवर बस इतना ही उचित है। _ अच्छा एक बात और, जिस घर में आप रहते हैं _ वो जबतक आप उसमे रहते हैं _ वो asset सिर्फ़ काग़ज़ों पर होती है, रियल लाइफ में liability ही होती है। क्योंकि जब तक आप उसमे रहेंगे तब तक बेच के encash नहीं ही कर सकते _ तो उसको कभी अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग में as a asset मत कैलकुलेट करिए।
_ वो बात अलग है बेचने पर उससे पैसा मिलता है, लेकिन अगर आप उसको बेचते हैं तो, तुरंत कोई ख़रीदनी भी पड़ती है, ताकि रेंट से बचें।
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💸उपरोक्त में से कोई भी काम करने के लिए आपको पूरा जीवन लगेगा ही नहीं। लोग ये कहेंगे ऊपर जो कुछ लिखा है उतना करने में ही तो पूरा जीवन निकल जाता है _ लेकिन उपरोक्त लिखा सब कुछ अगर सही सीक्वेंस में फॉलो किया जाये तो मात्र १० वर्ष में सब कुछ हो जाता है।
_ और अगर आपसे नहीं हुआ तो यक़ीन मानिए, आपने शिक्षा की इन्वेस्टमेंट में ही गड़बड़ करी है। फिर से कहूँगा स्टार्ट अगेन फ्रॉम एजुकेशन एंड स्किल अपग्रेड।
_ अंधा पैसा पे करने वाले लोग पड़े हुए हैं। बस राइट एम्प्लोयी चाहिए।
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💸अब जब उपरोक्त सब हो गया। आइये अब रथ को Insurance/SIP/Equity/Mutual Fund इत्यादि पर ले चलते हैं।
_ अब फ्री माइंड से किसी में भी इन्वेस्ट करिए, आप 15-20% तक रिटर्न अपने आप बनाने लगेंगे क्योंकि आपकी रिस्क लेने और होल्ड करने की क्षमता बढ़ी हुई होगी।
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💸ये लिखे हुए concepts मार्केट से एकदम उल्टे हैं लेकिन यही इफेक्टिव हैं। एक बार फिर से कहना चाहूँगा Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता।
_ जब भी आपको कोई confusion हो तो _ आप इसी लाइन को बार बार दोहराये कि “Insurance एक Risk Cover प्रोडक्ट है, ये आपको रिटर्न देने के लिए डिजाइन नहीं करा जाता”
_ Insurance सिर्फ़ और सिर्फ़ रिस्क कवर के लिए ख़रीदिए _ जोकि हेल्थ कवर के रूप में आप आलरेडी ख़रीद चुके हैं।
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💸इन्शुरन्स कितना लेना चाहिए, यदि Term इन्शुरन्स ले रहे हैं तो अपने जीवन में अनुमानित आप वर्तमान स्थितियों में जितना कमा सकते हैं _वही आपकी लिमिट होनी चाहिए। उससे ज़्यादा नहीं लेनी।
_ याद रखिए पैदा होने के बाद पूरी दुनिया के खर्चे उठाने का जिम्मा आपका नहीं है। कुछ जिम्मा बाक़ी पैदा हुए लोगों का भी है।
_ आपके मरने के बाद दुनिया कैसे चल रही इससे आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। आपकी पत्नी हो सकता है _ दूसरी शादी कर के सैटल हो जाये, बच्चे कहीं और चले जायें, _इसलिए फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करिए, जीते जी financial नाईट मेयर मत बनाइए।
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💸गहनों में इन्वेस्ट नहीं करना चाहिए। गहने सिर्फ़ अपनी पत्नी, माँ या बेटी के शृंगार अथवा उपहार के लिए ख़रीदिए।
_ ऐसा भी सिर्फ़ तब करिए जब उन्हें भी ये पसंद हो, सोना और चाँदी के अलावा कोई भी गहना न ख़रीदें।
_ इन्वेस्टमेंट के लिए कभी गहने नहीं लेने चाहिए। अगर बहुत मन करे तो गोल्ड बिस्किट ख़रीदिए, लेकिन ध्यान रखिए आपके घर पर कभी भी चोरी हो सकती है, घर का कोई भी सदस्य कभी भी चुरा कर बेच सकता है।
_ यहाँ मुझे कोई सोशल या मोरल लेक्चर न दें। लेकिन ऐसा नहीं है कि गहने ख़रीदने ही नहीं है _लेकिन इनको इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं ख़रीदना _इसलिए इनको फाइनेंसियल प्लानिंग में मत लाइए।
_ अपने जीवन में मौजूद ज़रूरी स्त्रियों (पत्नी/प्रेमिका, माँ, बेटी) को इम्प्रैस करने के लिए ज़रूर ख़रीदें। गहने अगर उन्हें खुश करते हैं तो आपकी क्षमता के हिसाब से उसमे खर्चा बुरा नहीं है।
हीरे चूँकि लैब में भी बनाये जा सकते हैं _इसलिए हीरे तो बिलकुल भी रीसेल में नहीं जाते _जबतक कि आपके हाथ में सीधा कोहिनूर ही न हो।
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💸अगर सब कुछ उपरोक्त सीक्वेंस में आपकी लाइफ में चल ही रहा है तो फिर further बहुतेरे इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स है। एक्स्ट्रा पड़ा पैसा PPF, NPS, Equity, SIP, Mutual Fund तथा प्रॉपर्टी इत्यादि में मन मुताबिक़ डालिये। सबसे ठीक ठाक रिटर्न आने लगेगा।
_अगर आपकी लाइफ़ में सब चीजें उपरोक्त सीक्वेंस में नहीं बन पा रही हैं _क्योंकि आप कम कमाते हैं तो लेख को शुरू से पढ़ना शुरू करिए और लाइफ में फिर से शुरू करिए।
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💸इन्वेस्ट करके करोड़पति बनने का सपना त्याग दीजिये। १% भी ऐसे लोग नहीं हैं जो इन्वेस्ट करके अमीर बनते हों। इन्वेस्ट करके पैसा कमाना लाइफ की पैसा कमाने की सबसे आख़िरी स्टेज है। पहली स्टेज हमेशा काम करके पैसा कमाने की है। इसी स्टेज से दुनिया और आपके आस पास के लोग अमीर बने होते हैं।
इन्वेस्ट करके अमीर बनने का कोई फ़ितूर दिमाग़ से निकाल दीजिये अगर आपकी बेसिक कमाई ही बहुत कम है और आप day to day ख़र्चों के लिए भी स्ट्रगल ही करते हैं।
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💸अल्ट्रा लॉग टर्म फाइनेंसियल प्लानिंग नहीं करनी है। मार्केट डायनेमिक्स १०-१५ साल में पूरी तरह बदल जाते हैं। आपके द्वारा २० साल पहले लिये गये सभी पहले आज आउटडेटेड होंगे। इसलिए १०-१५ साल का टारगेट रक्खें बस।
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💸रिटायरमेंट के लिए रेंटल इनकम का प्लान करें। और रिटायरमेंट किसी आश्रम में अध्यात्म करते हुए बिताएँ।
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–Anurag Tiwari
ये आदतें आपको हमेशा गरीब बनाए रखेंगी. सावधान रहें !!

_ यदि आप एक ऐसा आदमी बनना चाहते हैं जो अपने जीवन पर नियंत्रण रखता है, सम्मानित है, और वित्तीय रूप से सुरक्षित है, तो पैसे के मामले में आपको कुछ बातें कभी नहीं करनी चाहिए.
_ एक पुरुष की वित्तीय स्थिति केवल उसके बैंक खाते को नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास, रिश्तों, अवसरों, और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है.
_ बहुत से पुरुष मेहनत करते हैं, फिर भी गरीब रहते हैं. क्यों ?
_ क्योंकि पैसे कमाना एक बात है, लेकिन उन्हें बनाए रखना और बढ़ाना दूसरी बात है.
_ यदि आप अपनी वित्तीय स्थिति पर काबू नहीं पाते, तो आप हमेशा किसी और आदमी के नियंत्रण में रहेंगे.
_ यहां कुछ वित्तीय गलतियाँ दी गई हैं जो आपको हमेशा कमजोर, अटका हुआ, और संघर्षशील बनाए रखेंगी:
1. इम्प्रेस करने के लिए खर्च करना, प्रगति के लिए निवेश नहीं करना:
_ अगर आप सिर्फ दिखावे के लिए पैसे खर्च करते हैं, तो आप खुद को गरीब बनाने की ओर बढ़ रहे हैं.
_ राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के शोध से पता चला है कि अधिकांश अमीर लोग अपनी जरूरतों से कम खर्च करते हैं, जबकि कई मध्यवर्गीय और गरीब लोग लक्जरी सामानों पर ज्यादा खर्च करते हैं.
_ असली ताकत संपत्ति में है। निवेश में। ऐसी क्षमताओं में जो पैसे उत्पन्न करती हैं। महंगे कपड़े नहीं जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते.
2. एक ही स्रोत पर निर्भर रहना:
_ यदि आपकी पूरी वित्तीय जिंदगी एक ही वेतन या एक ही व्यवसाय पर निर्भर है, तो आप एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं.
_ औसत करोड़पति के पास 7 आय के स्रोत होते हैं, लेकिन अधिकांश पुरुषों के पास केवल एक होता है.
_ यदि वही खत्म हो जाता है, तो क्या होता है ? घबराहट, संघर्ष, निर्भरता.
_ आय के कई स्रोत बनाना शुरू करें. भले ही आपके पास नौकरी हो, एक नई कौशल सीखें, एक साइड हसल शुरू करें, निवेश करें.
3. वित्तीय साक्षरता की उपेक्षा करना:
_ पैसे के भी अपने नियम होते हैं, और यदि आप उन्हें नहीं सीखते, तो आप हमेशा हारते रहेंगे.
_ राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा संस्थान के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70% लॉटरी विजेता कुछ ही वर्षों में गरीब हो जाते हैं, क्योंकि उन्होंने संपत्ति प्रबंधन के तरीके नहीं सीखे थे.
_ चाहे आप कितना भी कमाते हों, अगर आप पैसे को सही तरीके से नहीं संभालते, तो वह जल्दी खत्म हो जाएगा.
_ वित्तीय किताबें पढ़ें, अमीर लोगों का अध्ययन करें, और जो सीखें उसे लागू करें. अज्ञानता महंगी होती है.
4. गलत कारणों के लिए कर्ज लेना:
_ अच्छा कर्ज और बुरा कर्ज दोनों होते हैं.
_ अच्छा कर्ज आपको और अमीर बनाता है—जैसे कि व्यापार या रियल एस्टेट में निवेश के लिए उधारी लेना.
_ बुरा कर्ज आपको गरीब बनाता है—जैसे कि ऐसी चीज़ें खरीदना जो आप अफोर्ड नहीं कर सकते केवल दिखावा करने के लिए.
_ यदि आप हमेशा कर्ज ले रहे हैं और वह कर्ज सिर्फ आपकी जरूरतों के बजाय भौतिक वस्तुओं के लिए है, तो आप एक वित्तीय गड्ढे में गिर रहे हैं.
5. “किस्मत” पर निर्भर रहना, रणनीति नहीं:
_ वे पुरुष जो “बड़े ब्रेक” या “भाग्यशाली अवसर” का इंतजार करते हैं, वे गरीब रहेंगे, जबकि अन्य पुरुष रणनीतिक रूप से संपत्ति बना रहे होंगे.
_ सफलता योजना, क्रिया और अनुशासन का परिणाम है, न कि किसी चमत्कार का.
_ चमत्कार का इंतजार करना बंद करें, स्मार्ट कदमों के माध्यम से खुद चमत्कार बनें.
6. जल्दी निवेश नहीं करना:
_ फेडरल रिजर्व के एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग अपनी 20s में निवेश करना शुरू करते हैं, वे अपनी 30s या 40s में निवेश करने वालों की तुलना में अधिक संभावना रखते हैं कि वे समृद्ध रूप से सेवानिवृत्त हो जाएं.
_ चाहे आप अब कितना भी कम कमा रहे हों, बचत और निवेश शुरू करें.
_ जितनी जल्दी आप शुरू करेंगे, उतना बड़ा आपका वित्तीय स्वतंत्रता होगा.
7. महिलाओं को अपने वित्तीय निर्णयों पर नियंत्रण देना:
_ एक असली पुरुष अपनी वित्तीय जिंदगी का नेतृत्व करता है.
_ बहुत से पुरुष पैसे के फैसले महिलाओं को प्रभावित करने के लिए लेते हैं—महंगे गिफ्ट खरीदना, महंगे डिनर पर जाना.. जबकि वे संघर्ष कर रहे होते हैं, या ऐसे जीवनशैली को फंड करना.. जिसे वे संभाल नहीं सकते.
_ एक महिला को आपके दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए, न कि आपके वॉलेट को खाली करना.
_ जो महिला सच में आपकी कद्र करती है, वह आपकी वित्तीय वृद्धि का समर्थन करेगी, न कि उसे नष्ट करेगी.
निष्कर्ष:
_ आपकी वित्तीय स्वतंत्रता आपके हाथ में है.
_ अगर आप इन गलतियों को बार-बार करेंगे, तो आप हमेशा संघर्ष करते रहेंगे, निर्भर रहेंगे, और सीमित रहेंगे.
_ लेकिन अगर आप नियंत्रण प्राप्त करते हैं—वित्तीय शिक्षा प्राप्त करते हैं, आय के कई स्रोत बनाते हैं, समझदारी से निवेश करते हैं, और स्मार्ट तरीके से खर्च करते हैं—तो आप हमेशा अपने भाग्य के मालिक होंगे.
_ अपने पैसों को नियंत्रित करें, या उसे नियंत्रित होने दें.. निर्णय आपका है.!!

सुविचार – काम, कार्य, धंधा, रोजगार – बेरोजगार, बेरोजगारी – 080

उनसे पूछिए कैसा लगता है जीवन का एक दिन को भी गुजारना..

_ जिनके पास काबिलियत तो है, परन्तु उनकी काबिलियत के अनुसार उन्हें रोजगार नहीं मिलता..

_ और इस वजह से वो _ बेरोजगारी के आग में पल – पल जलते हैं..

सता रहा है डर भविष्य का, अभिशाप बन गई बेरोजगारी है,

_ कैसे गुजारा होगा परिवार का, सिर पर हज़ारों ज़िम्मेदारी है..!!
ये बहुत तकलीफ देह होता है.. जब आप अपने जीने के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधनों की कमी से झूझ रहे हों.

_ कितना भी सकारात्मक सोच लो, लेकिन अंततः वास्तविकता आप को झकझोर कर रख देती है.!!
काम हमारे शरीर और दिमाग के लिए एक सबसे अच्छा व्यायाम है, जो जीवन में वास्तविक आनंद लाता है,

_ कार्य कौशल विकास के साथ-साथ नए अवसरों के लिए भी रास्ता निकालता है.

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काम को इतना बिगाड़ देते हैं कि _एक समय ऐसा आता है _जब उन्हें कहना पड़ता है कि, ‘रहने दो, मैं खुद कर लूंगा’

_ और फिर उन्हें काम से मुक्त कर के _सही व्यक्ति को _ उस काम को _अपने ऊपर ले लेना पड़ता है.
जो लोग काम करते हैं वो ज्यादा बात नहीं करते..

_ और जो ज्यादा बात करते हैं वो बातों के अलावा कुछ कर नहीं पाते.!!

बेरोजगारी किसी इंसान को उतना मायूस नहीं करती है..

_ जितना की उसके ख़ुद के परिवार वालों और दोस्तों का रवैया उसे कर देता है.!!
आप जो भी काम करें उसमें मूल्यों [values] के साथ समझौता न करें.!!
किसी भी कीमत पर..अपने काम के साथ कभी खिलवाड़ मत करना,

_ क्योंकि लोग तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन भूख तो हर दिन दस्तक देगी ही देगी.!!

किसी भी काम को पूरा करने से पहले उसका ढिंढोरा मत पीटा करो,

_ क्योंकि वो काम फिर मुश्किल से ही अपनी मंजिल पर पहुँच पाता है..!!
अपने उस काम के प्रति कभी भी शर्मिंदा मत होना, जो आपको दो वक्त की रोटी देता है, _ कम कमाना लेकिन हक़ का खाना.. ही बेहतर है.!!
आप बात करते हो, हम काम करते हैं, यही अंतर है..!!

You talk, we work, that’s the difference..!!

किसी काम को करने से पहले उसके बारे में अच्छे से जान लें.

Before doing any work, know about it thoroughly.

किसी का मूल्यांकन उसके काम को देखकर करना चाहिए.

One should judge someone by looking at his/her work.

जब काम में मज़ा आए तो काम, काम नहीं लगता.!!
कोई काम नामुमकिन नहीं और हर काम करना ही है, यह कतई ज़रूरी नहीं.!!

सुविचार – धैर्य – धीरज – 079

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धैर्य रखो !! क्योंकि हर नया परिवर्तन आसान होने से पहले मुश्किल हुआ करता है. [

 अनेक काम धैर्य से संपन्न होते हैं और जल्दबाज मनुष्य सिर के बल गिरता हैं. – शेख सादी 

” धैर्य ” एक कड़वा पौधा है, पर इसके फल हमेशा मीठे ही आते हैं..!!
धैर्य रखें और समय उन्हें आपकी कीमत बताएगा.!!
जब मन बैचेन हो, तब निर्णय नहीं… धैर्य चुनें.!!
यदि आपके अंदर धैर्य है, तो आप जो चाहें, वह सब पा सकते हैं.
धैर्य रखने वाला मनुष्य अपनी इच्छानुसार सब कुछ प्राप्त कर सकता है !!
जीवन के मार्ग में जब धुंध छा जाए तब दृढ़ता और धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है.
जब हम धैर्य रखना सीख लेते है, उस दिन से किसी और की आवश्यकता नहीं रहेगी.!!
जड़ से उखड़े हुआ लोगों को अपनी जड़ें जमाने के लिए बहुत मेहनत और धैर्य की जरुरत होती है..!!
यदि आप जीवन में बुद्धि और धैर्य नहीं रखेंगे तो आप अपना जीवन दूसरों को गाली देते हुए बिता देंगे.!!
आप कुछ समय के लिए धैर्य रखें.. आपके पास सब कुछ है.. इसे समझने के लिए कुछ भी गड़बड़ न करें..

_ अपने आप को थोड़ा समय दें.. आप इसे स्वयं समझ लेंगे.

ज्यादा से ज्यादा आपकी बातें धैर्य और इत्मीनान से सुना जा सकता है,

उस से ज्यादा कोई कुछ नहीं कर सकता,
_ आपको अपने मन के घाव खुद ही और वक़्त के हाथों ही भरवाने होंगे..!!
धैर्य और ख़ुद पर विश्वास होना हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है,

_ ये तभी संभव है, जब हमारा कोई ऊंचा सार्थक लक्ष्य हो,
_ हमारा जीवन हमारे ख़ुद के नजर में कीमती हो..!!
विपरीत परिस्थितियों में रखा गया धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाता,

_ जिस दिन आप अपने बुरे समय को अपने सामने दम तोड़ते हुए देखेंगे,
_ उस दिन आप सबसे ज्यादा शुक्रगुज़ार उस धैर्य के होंगे…
जिसे कभी आपने टूटने नहीं दिया..!!
इतना धैर्य और सब्र रखना सीख जाओ कि अगर कुछ बुरा भी हो तो बुरा न लगे.!!
जब आपके पास कम हो तो धैर्य रखें, जब आपके पास सब कुछ हो तो कद्र करें..
हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़ें.
धैर्य जब जीवन में आ जाये तब ना कोई खास लगता है और ना ही कोई खाक लगता है.. जब एक समान लगता है.!!
धैर्य का स्वाद शुरुआत में कड़वा लगता है,

_ पर उसका परिणाम हमेशा सुकून देने वाला होता है.!!

इंसान के लिए धैर्य और सब्र सबसे ज़रूरी होता है, क्योंकि यह ही वह शक्ति है जो उसे टूटने से बचाती है.

_ हर कोई दर्द सह सकता है, लेकिन केवल धैर्य और सब्र ही हमें बिना शिकायत किए जीना सिखाता है.
_ धैर्य और सब्र का अर्थ चुप रहना नहीं है, इसका का अर्थ है स्थिति को समझना और उससे निपटना.!!
जीवन में धैर्य बेहद महत्वपूर्ण होता है.

_ धैर्य इंसान को प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने में सहयोगी होता है,
_ पर अब इंसानों में सबसे अधिक कमी धैर्य की ही है.!!
अच्छी चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो रब पर विश्वास और आस्था रखते हैं,

_ और बेहतर चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो धैर्य रखते हैं,
_ और सबसे अच्छी चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो हार नहीं मानते.!!
यह जीवन एक परीक्षा है, और इस समय शायद कुछ कठिन प्रश्न हमारे सामने हैं.

_ कभी धैर्य की परीक्षा है तो कभी संघर्ष की.. लेकिन इतना विश्वास जरूर है कि यदि हिम्मत और ईमानदारी से हर चुनौती का सामना करते रहे, तो अंत में आने वाला परिणाम हमारे ही हित में होगा.!!
कभी-कभी हमें चाहिए होता है कि कोई बस सुन भर ले, और जैसे सारी थकान ख़त्म सी हो जाती है इतना भर होने से ; “धैर्य से सुनने” की अहमियत बहुत है.!!
जब जीवन आपको कठिन परिस्थितियों में लाकर खड़ा कर दे, तो आप यह न कहें,

“मैं ही क्यों”, बल्कि यह कहिये, “मुझे जांचिये”, अगर आप ऐसा करते हैं तो कल सफल होकर ही रहेंगे.

जीवन में जब हम समय से कमजोर होते हैं, तो उसी समय हमें अधिक धैर्य की आवश्यकता होती है, अन्यथा लोग हमें तोड़ने को तैयार बैठे हैं. यह बात हर समय याद रखिये.

धैर्य एक व्यक्ति के सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है ; _यह क्रोधित या परेशान हुए बिना किसी चीज़ की प्रतीक्षा करने की क्षमता है.

_ धैर्य प्रतीक्षा करने की क्षमता नहीं है बल्कि प्रतीक्षा करते समय अच्छा रवैया बनाए रखने की क्षमता है.

Patience is one of the most important virtues a person can possess. It’s the ability to wait for something without becoming angry or upset.

Patience is not the ability to wait but the ability to keep a good attitude while waiting.

जब हम कमजोर पड़ते हैं, तब हमारे भीतर नकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ने लगता है.

_ ऐसे समय में यदि मन पर नियंत्रण न रखा जाए, तो जीवन धीरे-धीरे गलत दिशा की ओर बढ़ने लगता है.
_ इसलिए उन क्षणों में सबसे अधिक आवश्यक होता है धैर्य बनाए रखना,
_ क्योंकि वही हमें संभालकर सही राह पर टिकाए रखता है.!!
जो लोग धैर्य रखते हैं, उनके पास सबसे खूबसूरत अंत होते हैं.

_ जीवन हमेशा हमारे अनुसार नहीं चलता, लेकिन जो लोग प्रक्रिया पर विश्वास रखते हैं, जो इंतजार करने की मजबूरी को सहन करते हैं,
_ वे हमेशा अपने आप को ठीक उसी जगह पाते हैं, जहां उन्हें होना चाहिए.
_ धैर्य सिर्फ इंतजार करने का नाम नहीं है—यह विश्वास रखने का है, यहां तक कि जब कुछ भी समझ में न आए.
_ यह विश्वास रखने का है कि सही चीजें आएंगी, जब हम उन्हें मांगेंगे नहीं, बल्कि जब हम उन्हें प्राप्त करने के लिए सचमुच तैयार होंगे.
_ सबसे खूबसूरत कहानियाँ जल्दी नहीं बनतीं; वे समय लेती हैं, जिनमें सीख, मोड़ और वे खामोश लड़ाइयाँ होती हैं जो कोई नहीं देखता.
_ लेकिन आखिरकार, जो लोग धैर्य रखते हैं—जो तूफानों के बावजूद अपने दिलों को शांत रखते हैं—वही लोग शांति, प्यार और सफलता पाते हैं जो स्थायी होती है.
_ क्योंकि जो आपके लिए है, वह कभी भी आपसे दूर नहीं जाएगा;
_ वह बस सही समय का इंतजार कर रहा है.
यह मायने नहीं रखता कि गिलास आधा भरा है या आधा खाली है.

_ शुक्र कीजिए कि आपके पास एक गिलास तो है, चाहे जितना ही भरा हो.
_ हमें सब्र करना नहीं आता, धैर्य की कमी होती है, इसीलिए वह आधा भरा गिलास भी लुढ़क जाता है.
– Manika Mohini

सुविचार – तनाव – चिंता – चिन्ता – परेशानी – परेशान – मुसीबत – मुसीबतें – मुसीबतों – आपदा विपदा – 078

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तनाव क्या है ?

तनाव मन की वह स्थिति है जिसमे मनुष्य का मन हमेशा बोझिल रहता है. मन लगातार द्वन्द की अवस्था में रहता है. छोटी- छोटी बातों से भी मन उद्विग्न हो जाता है, मनुष्य कोई भी काम मन की स्थिरता में नहीं कर पाता, घर और बाहर के दैनिक कार्य करते हुए हड़बड़ी मचाना उसकी आदत ही बन जाती है. बात- बात में चिढ जाना, अचानक भड़क जाना, शरीर और मन में थकावट महसूस करना, चेहरे की मुस्कुराहट का गायब हो जाना, ये मन की तनावग्रस्त स्थिति के लछण हैं. जब यह स्थिति लम्बे समय तक चलती रहती है, तो उसके परिणामस्वरुप कई रोग शरीर और मन में उत्पन्न होने शुरू हो जाते हैं.

अक्सर वे ही लोग तनाव के शिकार होते हैं, जो दिमागी तौर पर कमजोर हों और जिनको जटिल परिस्थितियों को सहजता से सुलझाने का हुनर नहीं हो.
तनाव का मूल कारण है- अस्वीकार भाव. विगत और वर्तमान की परिस्थितियों को स्वीकार न करना और भविष्य के प्रति आशंकित रहना ही तनाव की जड़ है. यदि हमारे मन और ह्रदय का दायरा बढ़ सके, तो तनावमुक्ति आसान हो जाएगी. मन को एक से अधिक कामों में लगाने से मन खंडित हो जाता है और इससे तनावग्रस्त होने से बचा जा सकता है.

इसलिए, कुछ- कुछ समय के पर चंद सेकेंड का ही सही, लेकिन ब्रेक लें और इस ब्रेक में अपना ध्यान किसी अन्य विषय पर रखें.

हमारे भीतर जो ऊर्जा इकट्ठी होती रहती है, उसके निकास का मार्ग पता न होने से भी हमारी ऊर्जा क्रोध या तनाव का रूप ले लेती है. अगर हम हल्के- फुल्के व्यायाम करने के भी अभ्यस्त हो जाएं, तो हमारी ऊर्जा को निकास का मार्ग मिलता है और हमारे भीतर सकारात्मक भाव बनने लगते हैं.

चिन्ता और तनाव तो पछियों की तरह है, _ जिन्हे हम अपने आस पास उड़ने से नहीं रोक सकते. परन्तु उन्हें मन में घरोंदा मत बनाने दो .

अपने तनाव को खत्म कर दो, _ इससे पहले कि आपका तनाव आपको खतम कर दे.

जो दूसरों को परेशान करना चाहता है, वह हमेशा परेशान और विचलित रहता है.!
उन सभी परेशानियों के लिए आभारी रहें… जिनका आपको सामना नहीं करना पड़ा.!
तनाव में जीने से बेहतर है.. आप तनाव देने वालों को अपनी ज़िंदगी में से शांति से हटा देना.!!
“कौन आया कौन गया उसकी चिंता मत करो, जो इस वक्त तुम्हारे पास है वही तुम्हारा है..”
चिन्ता जब चिन्तन में बदल जाती है, तो सकारात्मक परिणाम होते हैं. 
चिंता करने से हमारी परेशानियां दूर हों ना हों,

_ लेकिन हमारा आज का सुकून जरूर दूर हो जाता है.!!

अपनी परेशानियों का रोना किसी से ना रोयें..

_ क्योंकि 20% लोगों को आपकी परवाह नहीं होगी..
_ और बाकी 80% इस बात से खुश होंगे कि आप परेशानी में हैं..!!
हम अपनी जागरूकता बढ़ाएं, ज्यादा जिम्मेदार बनें तो कई आपदाएँ रुक जाएंगी..
_ सिर्फ भाग्य भरोसे रहेंगे तो कुछ नहीं होगा.!!
कोई भी काम तनावपूर्ण नहीं होता है. शरीर, मन और भावनाओं का प्रबंधन नहीं कर पाने से आप तनाव में होते हैं.

तनाव से बचना अपने हाथ में है, जितना इससे भागने की कोशिश करेंगे, उतना ही यह आपका पीछा करेगा.

इस दुनिया में सभी लोग अपने-अपने हिसाब से घूम रहे हैं, हमें बस जिंदगी को जीना है,

_ वे सकारात्मक तरीके से जियेंगे तो परेशानियो में भी अवसर दिखेंगे, नहीं तो खुशी में भी दुखी रहेंगे..

जितना संभव हो सके, किसी को परेशान न करें या दूसरों के लिए परेशानी का कारण न बनें.

_ दूसरों को अनावश्यक परेशानी देने से बचकर, कई लोगों के साथ रिश्ते अच्छे हो सकते हैं.
_ जब लोग हमसे परेशान महसूस करते हैं, तो वे अक्सर हमसे दूरी बनाने या हमसे बचने की कोशिश करते हैं.!!
अपनी परेशानियाँ गुप्त रखें; दुनिया में सहानुभूति कम और तमाशा देखने वालों की तादाद ज़्यादा है, इसलिए हमेशा खुद के सबसे अच्छे हमदर्द बनें.!!
चिंता इंसान का सबसे गहरा डर है, और यह अक्सर तब आती है जब आप अकेले होते हैं..

_ और ऐसे कारणों से घिरे होते हैं.. जिन्हें समझाना मुश्किल होता है.
_ कभी वो वजह कोई ऐसी घटना होती है जो अभी घटी ही नहीं, या फिर वो बीत चुकी होती है.. जिसे आप बदल नहीं सकते.
_ और जब इन विचारों को रोकने की ताक़त भी आपके पास न रहे, तो चिंता एक बेहद दर्दनाक अनुभव बन जाती है.!!
चिंता सबसे भयानक अनुभव है, यह हमें तब घेरती है जब हम अकेले बैठे होते हैं और किसी वजह से दुखी होते हैं जिसे हम समझा नहीं सकते..
_ क्योंकि या तो वो घटना घटी ही नहीं या फिर घट चुकी है, जिसे हम बदल नहीं सकते..
_ और जब हम चाह कर भी इन विचारों को रोक नहीं सकते तो बहुत तकलीफदेह होता है.!!
आधुनिक जीवन में तनाव से पूरी तरह बचना संभव नहीं है, लेकिन उसे नियंत्रित करना सीखा जा सकता है.
_ लगातार तनाव में रहना हृदय और मस्तिष्क दोनों के लिए नुकसानदायक है.
_ योग, प्राणायाम, ध्यान और पर्याप्त नींद तनाव को कम करने में सहायक होते हैं.
_ शांत मन शरीर को भी स्वस्थ रखता है.!!
जब सारे कार्य तनाव रहित और खुश रहकर किए जाते हैं _

_ तब आत्मिक संतुष्टि के साथ-साथ सांसारिक उन्नति भी प्राप्त होती है.

जैसे हर रास्ते पर कुछ न कुछ परेशानी होती है,

_ वैसे ही हर परेशानी का कोई न कोई रास्ता भी होता है !!

हम उन मामलों को भी अपने ऊपर तनावग्रस्त होने दे रहे हैं, जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं.!

प्राकृतिक आपदा से नहीं बच सकते..
_ पर अन्य आपदाओं को अपनी बुद्धि और श्रम से टाला जा सकता है.!!
जब हम जीवन की परेशानियों को स्वीकार करना सीख जाते हैं तो हमारे लिए जीवन आसान हो जाता है.
उन लोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करें जो आपको परेशान करने के बजाय आपको प्रेरित करते हैं.

_आप जीवन में बहुत आगे बढ़ेंगे.

Focus more on the people who inspire you rather than annoy you.

You’ll get much further in life.

चिंता आपके आनंद को चुराने के अलावा और कुछ नहीं करती और आपको कुछ न करते हुए व्यस्त रखती है.

Worry does nothing but steal your joy and keep you very busy doing nothing.

परेशानियां और तनाव हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है, जो हमें अपना बेस्ट देने के लिए प्रेरित करता है. इसे खुद पर हावी होने देने के बजाय अगर हम इसे पॉजिटिवली लेकर चलें, तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.
ज्यादातर लोगों को पता होता है कि कोई काम एक निश्चित समय सीमा में पूरा करना है,

_ फिर भी उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा करने के बजाय आख़िरी तारीख़ के लिए टालते रहते हैं.
_ नतीजा यह होता है कि जो परेशानियाँ धीरे-धीरे सुलझ सकती थीं, वे सब एक ही दिन सामने आकर खड़ी हो जाती हैं,
_ और फिर समय भी कम पड़ता है और दबाव भी कई गुना बढ़ जाता है.!
हर इंसान जीवन में कभी न कभी बेचारगी के उस दौर से गुजरता है,

_ जहाँ उसकी व्यक्तिगत चुनौतियाँ और परेशानियाँ उसके विवेक पर इस कदर हावी हो जाती हैं कि वह यह तक महसूस नहीं कर पाता जिस स्वभाव से उसे खुद नफ़रत है,
_ वो फिलहाल उसी स्वभाव की गिरफ्त में है.!!
जो अपनी चिंताओं से, अपने तनावों से, अपने अवसादों से लड़ नही पाता, वह युवावस्था में ही बुढापा जी रहा होता है.

_ अतः अपनी चिंताओं को ताख पर रख कर अपनी जीवन जिये.
_ हाँ, ये जितना कहना आसान है, उतनी ही मुश्किल है करना, पर यह असम्भव तो नही है.!!
चिंता सबसे भयानक अनुभवों में से एक है, वो आपको तब घेरती है जब आप अकेले बैठे होते हैं और किसी ऐसी वजह से दुखी होते हैं.. जिसे आप बयां नहीं कर सकते,

_ क्योंकि या तो वो घटना अभी घटी ही नहीं होती, या फिर पहले ही घट चुकी होती है.. जिसे आप बदल नहीं सकते और जब आप चाहकर भी इन विचारों को रोक नहीं पाते, तो ये बहुत दर्दनाक हो जाता है.!!
हर किसी के जीवन में कभी ना कभी ऐसा समय आता है जब हम मुश्किलों में घिर जाते हैं और हमारे सामने अनेकों समस्यायें एक साथ आ जाती हैं. ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं और हमें खुद पर भरोसा नहीं रहता और हम अपना आत्मविश्वास खो देते हैं, और खुद प्रयास करने के बजाय दूसरों से उम्मीद लगाने लग जाते हैं जिससे हमें और ज्यादा नुकसान होता है तथा और ज्यादा तनाव होता है और हम नकारात्मकता के शिकार हो जाते हैं और संघर्ष करना छोड़ देते हैं.

इसलिए जब भी कभी आपके जीवन में मुश्किलें या समस्यायें आयें तो उनसे घबरायें नहीं बल्कि डट कर उनका सामना करें. संघर्ष करते रहें तथा नकारात्मक विचार त्याग कर सकारात्मकता के साथ प्रयास करते रहें. एक दिन आप अपने मुश्किल रूपी कोकून से बाहर आयेंगे और खुले आसमान में उडान भरेंगे अर्थात आप जीत जायेंगे.

आप सभी मुश्किलों, समस्यायों पर विजय पा लेंगे.

वर्तमान समय में हर व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक कर गुजरने की कोशिश में लगा हुआ है.

इस भौतिकवादी युग में हर काम में तेजी, प्रतिद्वन्द्विता का दबाव एवं हर हाल में सर्वोच्च बनने की इच्छा के चलते हमारे तन मन और बुद्धि को बहुत से परिवर्तन झेलने पड़ते हैं.

इससे हमारा शारीरिक और बौद्धिक तारतम्य गड़बड़ हो जाता है. ऐसे परिवर्तनों के लिए हमारे तन और मन में जो स्वाभाविक प्रतिक्रिया परिलक्षित होती है, वही तनाव है.

इन संकेतों की अनदेखी निश्चयतः हानिकारक और घातक सिद्ध होती है.

तनाव प्रबंधन के लिए तीन उपाय बताए गए हैं, A A A.
(1) A = Alter
(2) A = Avoid
(3) A = Accept
(1) A = Alter = परिस्थिति में बदलाव : जो भी तनावपूर्ण स्थिति है या जो भी तनाव देने वाला व्यक्ति या स्थान है, उसे बदल दिया जाए. : Try to alter the situation.
(2) A = Avoid = परिस्थिति से बचाव : तनावपूर्ण स्थिति से दूर रहा जाए या उस पर ध्यान न दिया जाए.
: If alteration is not possible, avoid it.
(3) A = Accept = परिस्थिति से समझौता : जैसा भी तनाव हो उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया जाए.
: If it’s no way, accept it.
भौतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दिन-रात की भागदौड़ से उपजे तनाव को कम किया जा सकता है, लेकिन समाप्त करना असंभव है.
बेहतर है कि तनाव को तनाव न मानकर चुनौती के रूप में स्वीकार कर लिया जाए तो _तनाव का मौलिक स्वरुप ही बदल जाएगा.
वैसे थोड़ा तनाव हमारी क्षमताओं को जागृत करने में सहायक होता है. _ यदि जीवन में प्रतिस्पर्धा नहीं होगी तो _हमारे जीवन में ठहराव आ जाएगा.
इसलिए काम को पूरा करने का तनाव हमारी मदद भी करता है. तनाव हमें अधिक कार्य करने की प्रेरणा दे _तो इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे अन्यथा तनाव की वज़ह से हमें मानसिक कष्ट होगा ही.
चिंता सबसे भयानक अनुभव है, वो आपको तब घेरती है जब आप अकेले बैठे हों, और किसी ऐसी बजह से परेशान हों, जिसको बया नही कर सकते ;
_क्योकि या तो वो घटना घटी ही नही है या फिर घट चुकी है जिसे आप बदल नही सकते और जब आप चाहकर भी इन विचारों को रोक नहीं सकते, _ तो ये बहोत दर्दनाक होता है…!
चिंता कम करें—-

1. इस बात को कम महत्व दें कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं: दूसरे लोग आपके नियंत्रण से बाहर होते हैं और अगर आप अपनी इमेज के बारे में चिंता करना छोड़ नहीं सकते तो आप खुलकर नहीं जी पाते | आप हर किसी को खुश नहीं कर सकते इसलिए अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि आप ऐसा कर सकते हैं तो यह आपको अलग-थलग और निराश करके छोड़ देगा |
आप खुद को दूसरों की सोच के अनुसार न ढालें |अपने जीवन में खुद को “टॉक्सिक या जहरीले” लोगों से अलग रखें | ये वे लोग होते हैं जो आपको मैनीपुलेशन, नकारात्मकता और अन्य प्रकार के नियंत्रणों से नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं | बेहतर होगा कि, नॉन-वायलेंट कम्युनिकेशन तकनीक को सीखकर और कम प्रतिक्रियाशील और अधिक जिम्मेदार और मुखर बनकर अपने मुद्दे पर अडिग रहते हुए ऐसे लोगों को अपने वश में करना सीखें, आपके अंदर वो शक्ति है जिससे आप ऐसे लोगों से खुद को मुक्त रख सकते हैं और उनके गलत इरादों से खुद को बचा सकते हैं | अच्छे दोस्त भी आपका संतुलन खोजने में आपकी मदद करेंगे |
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2. बुरी चीजों पर फोकस करना बंद करें: जो चीजें हो चुकी हैं उन पर फोकास करना बंद करें बल्कि जो किया जा सकता है उस पर फोकस करें | अपना ध्यान इस ओर लगायें कि आप अपने और दूसरों के लिए चीज़ों को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं | ऐसा करने से, आप जीवन जीने के लिए श्रेष्ठ स्वतंत्रता खोज लेंगे |
अपनी असफलताओं को याद रखने की बजाय खुद की सफलताओं को याद रखें |
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3. ईमानदार रहें: झूठ आपको छल के जाल में उलझता जाता है जिससे आप खुलकर जी नहीं पाते | खुद से और दूसरों से बोले जाने वाले झूठ को पहचानें | भरोसेमंद और इंसान बनने से आप उन लोगों से बेहतर रूप से जुड़ सकते हैं जिन पर आप भरोसा करते हैं क्योंकि वे ही आपकी भेद्यता (vulnerability) को पहचान सकते हैं |
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4. पैसा शब्द पर आयें (और उसकी हानि पर भी नज़र डालें): कई लोग “काफी पैसा होने” को सम्बन्ध आजादी से जोड़ते हैं, लेकिन पैसे के प्रति आपकी लालसा बताती है कि पैसा ही आपके लिए सब कुछ है, स्वतंत्रता नहीं | धन या पैसे के साथ अपने जीवन में एक उपकरण की तरह बर्ताव करें, इसे अपने जीवन का ड्राइवर न बनायें | बचत करने, बजट बनाने और एक सचेत ग्राहक बनने के बारे में सीखें.
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5. वो चीज़ें बनायें जिन्हें बनाने पर आप अच्छा महसूस करते हैं.
जितना हो सके, कुछ न कुछ नया करते रहें: नए अनुभवों को दिल खोलकर स्वीकार करना स्वतंत्रता का स्त्रोत होता है क्योंकि आप अपने क्षेत्र को विस्तृत करते हैं, छुपी हुई नयी प्रतिभाओं को खोजते हैं और जीवन की अच्छाइयों को दिल खोलकर आत्मसात करते हैं |
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6. ऐसा मानें जैसे कि आपकी हर रोज़ की जिंदगी में आपको एक बैकग्राउंड म्यूजिक मिल गया है: सभी मूवीज में साउंड ट्रैक होता है इसलिए आपके पास भी होना चाहिए | एक मूसलाधार बारिश के दिन किसी गली से गुजरें, खुद को किसी चीज़ के साथ थामे जिससे आपके पैर चलते रहें और दिमाग आपका मनोरंजन करता रहे |
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7. थोडा टहलें: बाहर निकलें और टहलना शुरू करें | बिना किसी विशेष दिशा के, सिर्फ टहलते रहें और जब तक आपका रुकने का मन न हो न रुकें | अपने दिमाग से सारी परेशानियों को निकालकर टहलना बहुत अच्छा होता है |

सुविचार – Home Maintenance System – घर रखरखाव सिस्टम – 077

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“जो repeat होता है, उसका सिस्टम बनाओ… और सिस्टम को टूटने मत दो”

_ किसी भी चीज का सिस्टम एक बार सेट हो जाए, तो फिर वो खुद ही चलने लगता है.!!
_ बस उसे सब मेन्टेन करें और सिस्टम को टूटने मत दो.!!
Home Maintenance System Checklist (Daily + Weekly)

1.🌅 Daily System
☐ सुबह उठने का fixed time
☐ 10–15 min cleaning (कमरा/रसोई)
☐ चीज़ों को उनकी जगह पर रखना
☐ kitchen basic setup (next meal prep)
☐ 10–20 min silence / meditation
☐ सोने से पहले quick reset (5 min)
2.🧹 Weekly System
☐ Deep cleaning (एक दिन fix)
☐ कपड़े wash + organize
☐ groceries check & refill
☐ fridge साफ़ / expired items remove
☐ घर का एक कोना declutter
3.🍽️ Kitchen System
☐ weekly menu decide
☐ grocery list ready
☐ cook instructions simple & clear
☐ basic items always stocked
4.📦 Organization System
☐ हर चीज़ की fixed जगह
☐ “use → वापस रखो” rule follow
☐ extra सामान हटाओ (declutter)
5.💰 Money System
☐ weekly खर्च check
☐ महीने की शुरुआत में planning
☐ unnecessary खर्च note करो.
कुछ अच्छा दिखा ? तुरंत मत खरीदो.
“24” घंटे बाद भी लगे, “जरुरी है”, तब लो.
“चाहत और जरुरत अलग दिखने लगती है”
6.📱 Digital System
☐ phone साफ़ (photos/apps)
☐ important docs organized
☐ useless notifications off
7.🧘 Inner System
☐ रोज़ 10–20 min meditation
☐ एक line reflection: “आज कैसा महसूस हुआ ?”
☐ हफ्ते में 1 बार self-check
Monthly Clarity Checklist (हर महीने की 1 तारीख को )

🏥 Health & Medicines

Health & Medicines
☐ Medicine expiry check
☐ First aid box refill
☐ BP reading note karna
☐ Weight record karna

🍳 Kitchen & Food Safety
☐ Fridge items expiry check
☐ Gas cylinder level check
☐ Gas stove + pipe leakage test
☐ RO / Water purifier indicator
☐ Micro oven
☐ Mixer Grinder
☐ Washing Machine
🚿 Washroom Hygiene & Safety
☐ Exhaust fan working check
☐ Geyser safety & heating test
☐ Tap leakage check
☐ Flush tank proper working
☐ Floor drain blockage check
☐ Anti-skid [फिसलन रोधी] mat condition
☐ Cleaning supplies refill
☐ Toothbrush replace (3 months rule review)
☐ Mirror & tiles deep clean
☐ Odonil / Freshner

⚡ Electrical & Devices
☐ Inverter water level
☐ All remote batteries
☐ Weighing machine battery
☐ Wall clock battery
☐ Emergency torch working
☐ Main MCB off–on test
☐ All mobiles, Laptop, Remote clean
☐ Air Purifier
☐ Iron
☐ Hair Dryer
🏠 Home Safety & Maintenance
☐ Door locks & latches [कुंडी] check
☐ Sink / washbasin leakage check
☐ Switch boards heating check
☐ Extension boards dust clean

📱 Digital & Financial Hygiene
☐ Important data backup (photos/documents)
☐ Auto-debit / bank SMS review

Extra (Optional, jab mann kare)
☐ Wardrobe / papers mini-declutter (1 item release)
☐ Attachi & Bag
☐ corner cleaning
☐ Nursery maintain
☐ Nail + baal trim
☐ Sofa cleaning
☐ TV Cleaning
☐ Book shelf Cleaning

———————————–
🌳 Yearly Master Review
(Har Saal – January ya Apne Birthday Par)

🏥 Health
☐ Full body check-up / blood test review
☐ Dental check-up
☐ Eye check-up
☐ Walking shoes replace (agar ghis gaye ho)

🏠 Home & Assets
☐ Insurance policies review
☐ Important documents file organise
☐ Appliances deep cleaning / servicing
☐ Emergency contacts list update

💰 Financial Clarity
☐ Investment review
☐ Nomination details verify
☐ Annual expense summary dekhna

🌿 Life Reflection
☐ इस साल क्या सीखा ? [3 बातें लिखना]
☐ क्या छोड़ना है ? [1 आदत ]
☐ क्या बढ़ाना है? [1 Quality/ गुण ]
——————————–
🌅 5-Year Vision Reflection
(शांत मन से, बिना जल्दी किये लिखें)
🌿 मैं 5 साल बाद कैसा व्यक्ति बनना चाहता हूं ?
———

🏠 मेरा जीवन किस तरह का होना चाहिए ?
(Simple / Travel / Seva / Study / Financial Freedom etc.)
——

💰 आर्थिक स्थिति का लक्ष्य


🧘 Health & Inner Growth


✍ एक वाक्य में मेरा 5 साल का संकल्प:
——
“Simplicity is the highest form of order.”
[सरलता ही व्यवस्था का सर्वोच्च रूप है.]

सुविचार – न्यूनतमवादी बनना – मिनिमिलिस्ट – Becoming minimalist – खरीदना – Purchase – 076

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धीमी गति से खरीदें, ऊंचे स्तर पर रहें..

Buy slow, stay high.

“सुंदरता जोड़ने से नहीं, अनावश्यक हटाने से उभरती है.”
सबसे जरुरी है अपने घर का चूल्हा जलाए रखना,
_ इनकम के वो सोर्स बनाना.. जिनसे ज़िंदगी चल सके.. बाकी चीजें उतनी जरुरी नहीं.!!
कोई कितना खरीदे और क्या क्या खरीदे ? इतना पैसा भी कहां से लाओ ? और खरीद लाओ तो काम आए न आए ?

_ क्या उसे इस्तेमाल करने का समय होगा या नहीं ?
_ और अगर खरीदा भी जाए, तो क्या वह काम आएगा या नहीं ?
_ समय का तो अभाव ही अभाव है आधुनिक जिंदगी में.!!
मिनिमिलिस्ट होने के अपने सुख और दुख हैं.!

_ सुख कि आपको सामानों के ढेर को सहेजना नहीं पड़ता, न चुनाव की समस्या होती है.!!
हम ख़ालीपन की वजह से नहीं, अनचाही चीज़ों के भराव से ख़ाली हैं.!!
अब समय है अपनी सही समझ के अनुसार जीने का..

_ क्योंकि आज सब कुछ बाजार है और बाजार में हर कोई अपना फायदा देखता है.!!

ये हमारा दोष है कि चीजें तो हर कोई चाहता है,

_लेकिन उन्हें मेन्टेन [ रख-रखाव ] कोई नहीं करना चाहता.!!

यदि आप अपने घर में जिस सामान का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो उससे छुटकारा पाएं.

आप इसे किसी कोठरी में रखकर इसका अधिक उपयोग शुरू नहीं करेंगे.

बाजार द्वारा जो कुछ भी हमें बेचा जाता है, हम उसका उपभोग [ consumption ] कर रहे हैं.

_हमने यह निर्णय लेने की जागरूकता खो दी है कि वास्तव में क्या आवश्यक है और क्या नहीं !!
चीजों से हो रही है पहचान आदमी की, औकात अब हमारी बाजार लिख रहे हैं !!
जब ज़िंदगी से ज्यादा कीमत सामान की हो, तो समझो इंसान बाज़ार का गुलाम बन चुका है.!!
चीजें तब तक ही आकर्षित करती हैं, जब तक वो हमारी नहीं हो जातीं..!!
कोई ऐसा प्रोडक्ट न खरीदें, जो खरीदते समय सस्ता/अच्छा लगता है ;

_परन्तु उसका मूल्य चुकाते चुकाते सदियां निकल जाती हैं..!!

जरूरतों [needs] को देखने के लिए अपनी आंखों का उपयोग करें..

..और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी प्रतिभा [talents] का उपयोग करें.

जब कुछ खरीदने की जल्दी नहीं होती, तब दिमाग ज़्यादा साफ़ सोचता है.
_ “देखो सब, खरीदो वही.. जो कुछ दिनों बाद भी उतना ही अच्छा लगे”
घर में हर वस्तु या तो उपयोग में हो, या आनंद दे.
_जो न उपयोग में है, न आनंद दे रही है, वह केवल जगह घेरती है.
हर चीज़ को तुरंत खरीदना जरूरी नहीं है ;
_ खरीदने से पहले कुछ समय लेना बेहतर है.!!
इच्छाओं और जरूरतों के बीच अंतर को समझने से..

_हम अनावश्यक बोझ से मुक्त हो जाते हैं.!!

कर्ज में विलासितापूर्ण ढंग से रहने की तुलना में बजट के तहत सस्ते में जीवन जीना बेहतर है.

It’s better to live cheap under budget than luxuriously in debt.

जिंदगी में हम अपने ऊपर बहुत सारा बोझ लेकर चलते हैं, जो हमें बहुत जरूरी लगता है..

..लेकिन असल में वो जरा सा भी जरूरी नहीं होता..!!

जितनी अधिक हम चीजों की कदर करते हैं, उतनी ही कम हम खुद की कदर करते हैं.
The more we value things, the less we value ourselves.
कर्ज में मज़े लेने का कोई फायदा नहीं, जितना है उतने में आनंद करें.
हम सभी गहराई से जानते हैं, कि डिपार्टमेंटल स्टोर या मॉल में खुशी नहीं खरीदी जा सकती है ;
_ हमें सिर्फ इतनी बार झूठ कहा गया है कि _ हम उस पर विश्वास करने लगते हैं.
—— लेकिन क्या होगा अगर, वास्तव में, न्यूनतम जीवन जीने और जानबूझकर कम में जीने में _वास्तव में अधिक आनंद है ?
_ दूसरे शब्दों में, न्यूनतम जीवन _जीवन को बदलने वाला और जीवन देने वाला _अहसास होगा.
“आप अपना घर उन चीजों से नहीं भरें, जिनकी आपको आवश्यकता नहीं है..”

— क्या कम सामन होने से घर खाली या उबाऊ लगने लगेगा ???
–सरल का मतलब ..उबाऊ नहीं है ; सामने है सच..
_ _ कम गंदगी के साथ, आपका घर अधिक शांतिपूर्ण बन सकता है.
_ ये व्यवस्था आपकी समस्या को हमेशा के लिए हल कर देगी.
_ आप का घर आपके लिए तनाव के स्रोत के बजाय _ आराम का स्थान होगा..!!
यदि आप अच्छी क्वालिटी वाली वस्तुएँ खरीदते हैं, तो वे एक ही काफी हैं,

_क्योंकि उनमें शायद ही कुछ सुधार करना होता है.!!
_अच्छी क्वालिटी वाली वस्तुएँ की सावधानी से देखभाल की जाए, तो अपग्रेड करने की आवश्यकता के बिना वर्षों तक अच्छी तरह से काम चला सकते हैं.
_ हमारे रहने की जगह में ‘कम चीज़ें’ रखने से _हमें अधिक महत्वपूर्ण चीज़ों पर खर्च करने के लिए अधिक समय मिलता है.
हमारे पास कपड़ों से भरी अलमारी और हमारी ज़रूरत से ज़्यादा क्यों है ? क्या यह इसलिए है _ क्योंकि हम उन सभी से प्यार करते हैं या इसलिए कि हमें इतने सारे शर्ट या जूते चाहिए ? नही बिल्कुल नही..
_हम उन्हें खरीदते हैं _क्योंकि हम बदलते फैशन के साथ बने रहने की कोशिश कर रहे हैं – वही बदलती शैली जो फैशन उद्योग हमें बताता है कि हमें शैली में बने रहने की आवश्यकता है.
इसी तरह, जब हम अपने बाकी सामन को देखते हैं, तो जो हमारे अलमारियों को अस्त-व्यस्त कर देते हैं ; _ हमारे पास क्यों है ?
क्योंकि हम उनसे प्यार करते हैं और वे हमारे जीवन की कहानी कहते हैं ?
इसके बजाय, क्योंकि वे बिक रहे थे और हमनें उन्हें ख़रीदा, वे सोफे से मेल खाते थे, या अंतर्मन को कुछ चाहिए था.!!
प्रत्येक मामले में, हम चीजें खरीदते हैं और उन्हें रखते हैं, इसलिए नहीं कि वे हमारे जीवन को लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए..
उन चीजों को न खरीदें, जिनकी आपको आवश्यकता नहीं है…ताकि आप वह जीवन जीना शुरू कर सकें जो आप चाहते हैं.!!
ऐसा लगता है कि हमारी पूरी व्यवस्था लोगों को, उनके पास जो कुछ है _उससे असंतुष्ट महसूस कराने पर तुली हुई है ;
_ और कोई भी सावधानीपूर्वक और समझदारीपूर्वक जीवन जीने को तैयार नहीं है.!!
मैं अक्सर अपने आप से एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछता हूं, “अधिक लोग सरल और न्यूनतम जीवन की ओर आकर्षित क्यों नहीं होते ?”

_हमारी ज़रूरत की चीज़ों के मालिक होने के सभी फ़ायदों को देखते हुए, कोई भी उन चीज़ों का पूरा मालिक होना क्यों चाहेगा _ जिनकी उन्हें ज़रूरत नहीं है ?
_ मैं श्रेष्ठता, घमंड या नैतिकता के भाव से प्रश्न नहीं पूछता। मेरे लिए, यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है _ जिससे मैं जूझता रहता हूँ।
_वह चीजें जिसकी मुझे आवश्यकता नहीं थी ? मैंने यह सब क्यों खरीदा ?”
हम सबसे पहले वह चीज़ें क्यों खरीदते हैं, _ जिनकी हमें ज़रूरत नहीं है ? लेकिन हम पूरी तरह दोषी नहीं हैं. बाहरी दुनिया हमारे खिलाफ साजिश रचती है।
प्रत्येक मामले में, हमें “अपनी आवश्यकता से अधिक की इच्छा करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है” _क्योंकि इससे उन्हें पैसा मिलता है.
_ हम यह उम्मीद करने लगे हैं कि जीवन का यह तरीका सामान्य है और जीवन कैसे जीना चाहिए ?
बस यही तो जिंदगी है… जरूरत से ज्यादा चाहना और खरीदना… सही है ?
लेकिन कोई गलती न करें. हमें धोखा दिया जा रहा है. _ हमें ऐसे वादे बेचे जा रहे हैं _ जिन्हें खुदरा विक्रेता और निर्माता कभी पूरा नहीं कर सकते।
_ उनका बाहरी हेरफेर हमारी आंतरिक असुरक्षा को आकर्षित करता है _और हमें ज़रूरत से ज़्यादा पीछा करने, खरीदने और संचय करने के लिए मजबूर करता है।
तो हम इस हेरफेर पर कैसे काबू पाएं ?
काश यह एक आसान उत्तर होता, लेकिन मैंने पाया कि ऐसा नहीं है।
हेरफेर पर काबू पाने के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता होती है। लेकिन इसे पूरा करने के लिए हम यहां कुछ महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं:–>
1. पहचानें कि हमारे चारों ओर स्वार्थी प्रेरणाएँ हैं.
हर कंपनी और हर विज्ञापन हमारे भले के लिए नहीं है। वे सिर्फ अपने लाभ के लिए हैं।
2. कंपनियों के हेरफेर को देखने के लिए काम करें.
अधिकांश विज्ञापन हमारी अवचेतन इच्छाओं (स्थिति, लिंग, प्रतिष्ठा, खुशी, उपस्थिति, आत्म-सम्मान, पहचान, या प्रतिष्ठा) और भय (अकेलापन, सुरक्षा, कमजोरियां, अनिश्चितता) को आकर्षित करते हैं।
_उनकी रणनीति से अवगत रहें _ताकि आप इससे मूर्ख न बनें.
_ याद रखें कि खुशियाँ खरीदी नहीं जा सकतीं.
3. हमारे जीवन की सीमित प्रकृति का सम्मान करें।
सारा जीवन सीमित है – हमारा समय, हमारा पैसा, हमारी ऊर्जा। इस वजह से, यह सीखना अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण है कि _हमें अपना ध्यान कहाँ रखना है.
4. चीजें उनकी उपयोगिता के लिए खरीदें, हैसियत के लिए नहीं।
वस्तुएं आपकी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता के आधार पर खरीदें, न कि लोगों को प्रभावित करने के लिए ;
इस सिद्धांत को हर जगह लागू करें- आपका घर, आपकी कार और आपके कपड़े सभी शुरुआत करने के लिए बेहतरीन जगह हैं।
आपको हर किसी की तरह जीने की ज़रूरत नहीं है। वास्तव में, यदि आप ऐसा नहीं करेंगे _तो संभवतः आप अधिक खुश रहेंगे।
5. खुद को याद दिलाएं कि जीवन में और भी बड़े लक्ष्य हैं।
हम अपने पैसे से हमेशा ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं जिनकी हमें जरूरत नहीं है।
हमारा पैसा उतना ही मूल्यवान है _जितना हम इसे जिस पर खर्च करना चुनते हैं।
_इसे सोच-समझकर खर्च करें.
एक समय ऐसा आया जब मैंने अपने जीवन पर नजर डाली और महसूस किया कि मैंने बहुत सारी चीजें जमा कर ली हैं..

_ और अगर मैं अपनी भौतिक संपत्ति को त्याग नहीं पाता, तो मैं कभी भी उन चीजों को हासिल नहीं कर पाऊंगा जो मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती हैं.
_ मुझे यह एहसास हो रहा था कि भौतिक वस्तुएँ मेरे लिए वह काम नहीं कर रहा था, जैसा मैं सोचता था.
1. Peace of mind.
मुझे एहसास ही नहीं था कि मैं अपनी चीज़ों को लेकर कितना चिंतित रहता था, जब तक मैंने उन्हें जाने नहीं दिया.
_ अचानक मुझे मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा फिर से मिल गई, और अचानक एहसास हुआ कि – मैं आज़ाद हूँ.
_ अपनी चीज़ों को छोड़ने पर मुझे ऐसा ही महसूस हुआ.
_ मुझे मुश्किल से याद आया कि मुझे उनकी इतनी ज़रूरत क्यों थी.
_ छोड़ने से मुझे बहुत शांति मिली.
2. Impulse control. [आवेग नियंत्रण]
जब से मैंने बेवजह की खरीदारी बंद की है, तब से एक अद्भुत बदलाव आया है.
_ मैं किसी स्टोर या किसी भी किराने की दुकान में जाता हूँ और केवल वही चीजें खरीदता हूँ.. जिनकी मुझे ज़रूरत है,
_ और अगर वहाँ वह चीज़ नहीं है.. जो मैं ढूंढ रहा हूँ, तो खाली हाथ वापस आ जाता हूँ.
3. Health and happiness.
कम सामान के साथ रहने से मैं वास्तव में ज़्यादा स्वस्थ और खुश हूं.
_ शायद इसलिए क्योंकि मैं ज़्यादा सोता हूं, कम काम करता हूं और पैसों को लेकर कम तनाव महसूस करता हूं.
4. Freedom to pursue my dreams. [अपने सपनों को साकार करने की स्वतंत्रता]
मैं उन चीज़ों को पूरा कर पा रहा हूँ, जो मेरे लिए वाकई मायने रखता है,
_ क्योंकि अब मैं अपनी भौतिक चीज़ों से इतना आसक्त नहीं हूँ ;
_ अब वो काम कर पा रहा हूँ, जो मुझे पसंद है.
_ और इस तरह की आज़ादी मेरे लिए मायने रखती है.
5.** A more nuanced understanding of “responsibility.”
[“जिम्मेदारी” की अधिक सूक्ष्म समझ।]
_ मुझे लगता था कि मैं अपनी ज़्यादातर चीज़ें नहीं छोड़ सकता – क्योंकि यह “जिम्मेदाराना” नहीं होगा.
_ मैंने यह सीखा है कि ज़िम्मेदारी हर किसी के लिए अलग-अलग होती है, और ज़िम्मेदार होने का एक हिस्सा अपने आध्यात्मिक और भावनात्मक स्व का ख्याल रखना भी है, जो भौतिक से परे है.
_ दूसरे शब्दों में, क्या होगा अगर “जिम्मेदार” होने का एक हिस्सा यह भी हो कि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें, जब वह आपको हर सुबह काम पर जाते समय या अपने घर की अव्यवस्था को देखते समय बताती है कि आपको घुटन हो रही है ?
6. Extra cash.
मुझे लगता था कि मैं मुश्किल से अपने खर्च लायक ही कमा पाता हूँ, मेरे पास कोई क्रेडिट कार्ड नहीं है.
_ मैंने जो फैसले लिए हैं, वे शायद सबके लिए कारगर न हों,
_ लेकिन मैंने यह सीखा है कि अक्सर हमारे बजट में ऐसी जगह होती है.. जिसके बारे में हमें पता ही नहीं होता,
_ और जब उन चीजों को छोड़ दिया.. जिन्हें मैं वास्तव में नहीं चाहता था, तो मुझे ऐसे अनमोल अनुभव मिले.. जो मुझे अन्यथा कभी हासिल नहीं हो पाते.
7.** Once in a lifetime experiences. [जीवन में एक बार मिलने वाले अनुभव]
मैं हर महीने अपने पैसों का एक छोटा हिस्सा यादगार अनुभव संजोने के लिए बचाकर रखता हूँ.
_ मुझे अनुभव पर पैसा खर्च करने का कभी पछतावा नहीं होता.
_ मैं हमेशा यादगार अनुभव संजोने की कोशिश करते रहता हूँ, इसलिए मैं अक्सर यात्रा करते रहता हूँ.
_ मुझे नई जगहों को घूमना और अपने जैसे दोस्तों के साथ दिल खोलकर समय बिताना पसंद है.
8. Courage. [साहस]
यह जानकर हैरानी होती है कि जब मेरा जीवन मेरी चीज़ों के इर्द-गिर्द घूमता था, तब मैं कितना डरा हुआ था.
_ मुझे अपनी चीज़ों के बारे में बार-बार बुरे सपने आते थे.
_ पर जब से मैंने अपनी चीज़ें छोड़ी हैं, तब से मुझे जो साहस मिला है, उसे देखकर मैं दंग रह गया हूँ.
_ क्योंकि अब मेरी चीज़ें मुझे परिभाषित नहीं करतीं, इसलिए मैं उन चीज़ों के लिए ज़्यादा रिस्क उठा पाता हूँ.. जो मेरे लिए सच में मायने रखती हैं.
9. A developed sense of self. [आत्मबोध का विकसित होना]
लंबे समय तक मुझे लगता था कि मेरे पास जो कुछ भी है, वह मेरे बारे में कुछ बताता है, और शायद एक तरह से यह सच भी है.
_ लेकिन अब मैं जान गया हूँ कि मेरा आत्मसम्मान कहीं अधिक गहरे और सुरक्षित स्रोत से आता है, इसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती.
10. Better relationships. [बेहतर रिश्ते]
अब मेरे लिए किसी ऐसे हानिकारक रिश्ते में पड़ने की संभावना कम है जो मेरी सारी ऊर्जा [energy] छीन लेता है.
_ अब मेरे लिए उन छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ करना आसान हो गया है.. जिनका कोई महत्व नहीं है – क्योंकि अब मैं समझता हूँ कि क्या मायने रखता है.
_ मेरा जीवन परिपूर्ण नहीं है, लेकिन मैं पहले से कहीं अधिक खुश और संतुष्ट हूँ और मैं कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहूँगा.!!
हम चीजों के खोने पर रोते हैं क्योंकि उनकी कीमत होती है;

_ लेकिन क्या हम जीवन की हानि पर भी रोते हैं,
_ [ जीवनयापन ] जीने का खर्च बहुत ज्यादा है,, और हमने इसकी कीमत चुकाने से इनकार कर दिया है..!!
_ काश, हम सब की ज़िन्दगी रोचक होती !
_ हम सब मज़े से जीना चाहते हैं.. लेकिन आस-पास के हालात हमारी चमड़ी उधेड़ते रहते हैं.. और हम अपने बदन को छिला हुआ देखकर भी.. यह नहीं तय कर पाते कि इस पर हंसें या रोएँ !
“मुश्किलों का सामना करने के दो तरीके हैं ;
_ आप कठिनाइयों को बदल देते हैं या उनका सामना करने के लिए खुद को बदल लेते हैं.”
हमारे पास कपड़ों की इतनी अलग-अलग वस्तुएं और हमारी ज़रूरत से कहीं ज़्यादा चीज़ें क्यों हैं ?

_ क्या ऐसा इसलिए है _क्योंकि हम उन सभी से प्यार करते हैं _ या हमें इतनी सारी शर्ट या जूते की ज़रूरत है ?
_ नहीं, हम उन्हें खरीदते हैं _क्योंकि हम बदलते फैशन के साथ बने रहने की कोशिश कर रहे हैं,
– वही बदलती शैलियाँ जिनके बारे में फैशन उद्योग ने हमें बताया था कि _हमें स्टाइल में बने रहने की जरूरत है.
_ हर बार, हम अपने आप को उस चीज़ की चाहत में पाते हैं _जो वर्तमान में हमारे पास नहीं है ;
_ हम उस पर केंद्रित हो जाते हैं जो हमारे पास नहीं है, और जो अच्छाई हम में पहले से ही है, __ उस पर से अपना ध्यान खो देते हैं.
_ यदि, मनुष्य के रूप में, हम मानते हैं कि केवल कुछ नया प्राप्त करके उच्च स्तर की खुशी पाई जा सकती है, तो हम हमेशा निराश होंगे.
_ हमारी आंतरिक आवाज़ इस तरह कभी संतुष्ट नहीं होगी.
_ कोई भी चीज़ कभी भी पर्याप्त अच्छी नहीं होती…. क्योंकि हमारे अंदर लगातार असंतोष भड़कता रहता है.
_ इस प्रकार आंतरिक और बाह्य दोनों ही दृष्टियों से हमारे हृदय, मन और आत्मा में निरन्तर असन्तोष भड़कता रहता है।
_ इस असंतोष के परिणामस्वरूप क्या होता है कि _ हम जल्दी ही अपने आस-पास की और अपनी अच्छाइयों को नज़रअंदाज कर देते हैं.
बेवजह की शाप्पिंग भी एक ट्रेंड बन गया है.

_ जब करने को कुछ न हो तो ‘चलो शाप्पिंग’ करते हुए निकल जाना कितना अजीब लगता है न.
_ आज बोर हो रहे हैं – चलो शाप्पिंग !
_ गर्मी बहुत है – चलो शाप्पिंग !
_ मेहमान आये हैं – चलो शाप्पिंग !
_ शाप्पिंग तो कम की मगर विंडो शाप्पिंग खूब की.
_ उपर वाला जब जरूरत से ज्यादा दे तो कहीं तो खपाना होता है.
_ जब खरीदना ही नहीं था तो शोरूम बन्द होने तक रुके रहने वाले विंडो शापर भी देखे होंगे.
_ वापसी में लालबत्ती चौक पर भीख मांगते गरीब के लिये कुछ नहीं था सिवाय झिड़की और गाली के !
-Tejbeer Singh Sadher

सुविचार – Result, रिजल्ट, परिणाम, नतीजा, प्रभाव, प्रतिफल, अंतिम परिणाम, अन्त – 075

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परिणाम जो भी हो, पर प्रयास,,,,, _ लाजवाब होना चाहिए ..
परिणाम बेकार ही सही, _ प्रयास सफ़ल होने चाहिए…!!!
हम प्रयास के लिए उत्तरदायी हैं, _ न कि परिणाम के लिए.
परिणाम…

कोई भी काम करने के पूर्व उसके परिणाम पर विचार अवश्य करें , फिर उस कार्य को शुरू करें, कहा भी है की बिना विचारे जो करे वो पाछे पछताए, यानी परिणाम के बारे में सोचे बिना किया गया कार्य अंत में पछताने पर मजबूर कर ही देता है !!!

हम जो कुछ भी हैं, वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है. यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है, तो उसे कष्ट ही मिलता है.

यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता या काम करता है, तो उसकी परछाई की तरह ख़ुशी उसका साथ नहीं छोड़ती.

हमारी ज़िन्दगी में अच्छे या बुरे जो भी परिणाम आते हैं, _ वे हमारे विचारों का ही प्रतिफल होते हैं.

अच्छा हो या बुरा, नतीजा बाद में आता है, लेकिन आपकी मेहनत दिल से हो, तो मन हमेशा संतुष्ट रहता है.!!
यह सही है कि कभी- कभी आपके किसी निर्णय का परिणाम आपको तत्काल न मिले,

लेकिन हमेशा याद रखें, देर सबेर ही सही, यदि आपने अपने दृष्टिकोण से सही निर्णय लिया है तो

कोई वजह नहीं कि आपका फैसला आपको अच्छा परिणाम न दे.

परिणाम हमारी इच्छा के अनुसार नहीं मिलता है, _ परिणाम हमारी मेहनत के आधार पर मिलता है !!
वे लोग कभी सफल नहीं हो सकते, जो परिणाम से ज्यादा काम में आने वाली मुश्किलों के बारे में सोचते हैं.
अच्छी व्यवस्था, अच्छे परिणाम तभी हासिल कर सकती है, जब उसे संचालित करने वाला अच्छा हो.
खाली बैठना बहुत अच्छा लगता है, पर उसका परिणाम कभी अच्छा नहीं होता,
उतावले उत्साह से बड़ा परिणाम निकलने की आशा नहीं रखनी चाहिए.
लाख छुपाओ अपने कर्मों का फल, _ परिणाम सारा भेद खोल देता है.

_ आप सब कुछ करने के लिए आज़ाद हो.. लेकिन अपने किए का परिणाम चुनने के लिए आज़ाद नहीं हो.!!
गरीबी और समृद्धि दोनों विचार का परिणाम है…
कभी हार नहीं मानना चाहिए. _ अगर आप हार नहीं मानेंगे और कोशिश करते रहेंगे _

_तब चौंकाने वाले परिणाम सामने आएँगे.

सुलझा हुआ मनुष्य वह है, जो अपने “निर्णय” स्वयं करता है,

और उन “निर्णयो” के “परिणाम” के लिए किसी “दूसरे” को “दोष” नहीं देता.

मेहनत बताती है कि परिणाम कैसा होगा,

वरना परिणाम तो बता ही देगा की _ मेहनत कैसी थी..

परिणाम बता देते हैं कि आपकी सोच कैसी रही होगी,

क्योंकि आप वही कहते और करते हो, जैसा आप सोचते हो..

महान परिणाम तत्काल प्राप्त नहीं होते,

इसलिए हमें कदम- दर- कदम बढ़ते जाने में सन्तोष मानना चाहिए.

लोग आपकी बातों का यकीन तब तक नहीं करेंगे,

जब तक आपके परिणाम उन्हें हिला नहीं देते..

जहां अकारण अत्यंत सत्कार हो,

वहां परिणाम में दुख की आशंका करनी ही चाहिए.

हां ! ऐसी भी परिस्थितियां आयेंगी जब आप सब कुछ सही कर रहे होंगे, उसके बाद भी परिणाम आपके हक़ में नहीं आएगा…

_ और ये दौर ही आपको सरल, सुलझा हुआ और संयमी इंसान बनने को मजबूर करेगा…
_ क्योंकि तब आपको समझ आ जाएगा कि,
“जीवन केवल कुछ ‘पा’ लेने के बारे में नहीं, बल्कि कैसे ‘कुछ न पा पाने के बाद भी लगे रहना है इस बारे में है”..!!
कई बार हमें पहले से ही पता होता है कि परिणाम क्या होने वाला है,

_ मन बार-बार उसी परिणाम का संकेत देता रहता है,
_ फिर भी भीतर कहीं एक छोटी-सी उम्मीद बची रहती है कि शायद इस बार कुछ अलग हो जाए,
_ लेकिन जब वही होता है जिसका डर या अंदाज़ा पहले से था, तब भी दिल चौंक जाता है.
_ शायद इसलिए कि सच को जान लेना और उसे अपनी आँखों के सामने घटते हुए देखना इन दोनों के दर्द में बहुत फर्क होता है.!!
अक्सर वही होता है.. जो पहले से तय होकर आता है,

_ हर परिणाम हमारी कोशिशों का नहीं होता,
_ कुछ हिस्से समय और परिस्थितियाँ अपने पास रख लेते हैं.!!
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